Hindi Sex Stories By raj sharma

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raj..
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Hindi Sex Stories By raj sharma

Unread post by raj.. » 10 Oct 2014 14:39

Hindi Sex Stories By raj sharma

मेरी मौसी सास

मेरी उम्र छब्बीस वर्ष है, मेरी शादी को दो साल हो गये हैं,मेरी बीबी बहुत सुन्दर और मुझे बहुत प्यार करने वाली है, अब से लगभग छः महीने पहले मेरी बीबी मुझे अपनी एक मौसी के पास लेकर गई थी, उसकी मौसी दिल्ली में रहती है, तथा उनका काफी अच्छा घर परिवार है,कहने को तो वो मेरी बीबी की मौसी है लेकिन देखने में वो मेरी बीबी की बहन जैसी ही लगती है, उन्हें देख कर कोई नहीं कह सकता की वो शादी शुदा होंगी, वैसे भी वो मेरी बीबी से दो साल ही बड़ी है,


उनके अभी कोई बच्चा नहीं था शायद फेमिली प्लानिंग अपना रखी थी, उनके पति एक सरकारी फर्म में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर काम करते हैं, उनके पति हालांकि उम्र में मौसी से सीनियर हैं मगर बहुत ही आकर्षक और स्वस्थ ब्यक्ति हैं,

हमलोग फुर्सत निकाल कर मौसी के यहाँ गये थे, आराम से एक महिना गुजार कर आना था, मौसी हमें देख कर बहुत खुश हुवी, खास कर मेरी तो उन्होंने बहुत आव भगत की, हम पति पत्नी को उन्होंने उपर का बेडरूम दे रखा था,

उस दिन मैं सबरे उठा, तब मेरी बीबी गहरी नींद में सोई हुवी थी, मैनें काफी रात तक जो उसकी जम कर चुदाई की थी, अभी सूरज तो नहीं निकला था लेकिन उजाला चारों और फैल चुका था, मैनें ठंडी हवा लेने की गरज से खिड़की के पास जा कर पर्दा खिंच दिया, सुबह की धुंध चारों तरफ छाई थी, सीर निचा करके निचे देखा तो दिमाग को एक झटका सा लगा, नीचे लोन में मौसी केवल एक टाइट सी बिकनी पहने दौड़ कर चक्कर लगा रही थी,
उनके गोरे शरीर पर काली बिकनी ऐसे लग रही थी जैसे पूनम के चाँद पर काले रंग का बादल छा कर चाँद को और भी सुन्दर बना रहा हो,



बालों को उन्होंने पीछे कर के हेयर बेंड से बाँधा हुवा था, इसलिए उनका चौड़ा चमकीला माथा बहुत ही अच्छा दिख रहा था, बिकनी के बाहर उनकी चिकनी गोरी जांघें ऊपर कुल्हों तक दिख रही थी, भागने के कारण धीरे धीरे उछलती हुवी उनकी चूचियाँ तथा गोरी मखमली बाँहें और सुनहरी बगलें बहुत सुन्दर छटा बिखेर रही थीं, उन्हें देख कर मेरी नसों का खून उबाल खा गया, तभी वे मेरी खिड़की के निचे रुकी और झुकते और उठते हुवे कसरत करने लगी, वे जैसे ही झुक कर खड़ी होती उपर होने के कारण मुझे उनकी चूचियाँ काफी गहराई तक दिख जाती,

तभी जाने कैसे उन्होंने उपर नजर डाली और मुझे खिड़की पर खड़ा देख लिया, मैं हडबडा कर वहाँ से हटना चाहा, परन्तु उनके चेहरे पर मोहक मुस्कान देख कर मैं रुक गया, उन्हें मुस्कुराते देख कर मैं भी धीरे से मुस्कुरा दिया, तभी मैं चौंका वो मुझे इशारे से निचे बुला रही थी,

मेरा दिल जोर से धड़क गया, मैनें एक नजर अपनी सोती बीबी पर डाली, वो अभी भी बेखबर सो रही थी, फिर मैं निचे आ गया, मौसी जी लोन में ही जोगिंग कर रही थी,

"लोन में ही जोगिंग कर रही हैं मौसी जी " मैंने उनके पास जाकर कहा तो वे भी मुस्कुरा कर बोली,

" जो भी जगह जोगिंग के लिये उपयुक्त लगे वहीँ जोगिंग कर लो, तुम भी किया करो सेहत के लिये अच्छी होती है,"

" ठीक कह रही हैं आप " मैंने कहा,


वो फीर दौड़ पड़ी और मुझसे बोली " तो आओ मेरे साथ, कम ऑन "

मैं भी उनके साथ दौड़ने लगा, वे मुझसे जरा भी नहीं हिचक रही थी, मैं दौड़ते हुवे बहुत करीब से उनके महकते अंगों को देख रहा था,

" मौसा जी कहाँ हैं?" मैनें उनकी जाँघों पर नजर टीका कर पूछा,

" वे आज हैदराबाद गये हैं, कंपनी के काम से, सुबह जल्दी की फ्लाईट थी, शायद पांच छः दिन बाद लौटेंगे," उन्होंने जवाब दिया

ना जाने कयों मुझे तसल्ली के साथ साथ ख़ुशी भी हुई,

" आपका फिगर तो बहुत सुन्दर है मौसी जी " बहुत देर से दिमाग में घूमता ये सवाल आखिर मेरे मुंह से निकल ही गया,

मेरी आशा के विपरीत वे एकाएक रुक गई, मैं भी रुक गया, ये सोच कर की कहीं बुरा तो नहीं मान गई मेरा दिल धड़का, जबकि वे धीरे से मुस्कुरा कर मेरी आँखों में झाँक कर बोली,

" तुम्हारे शब्द लुभावनें हैं लेकिन अंदाज गलत है,"

" क्या मतलब," मैं चौंका,

" यदि मैं या मेरी हमउम्र लड़की तुमसे ये कहे की अंकल तुम्हारी पर्सनेल्टी बहुत अच्छी है तो तुम्हे कैसा लगेगा," मौसी जी ने मुझसे कहा,

" ओह...! " मेरे होंठ सिकुड़ गये, मैं उनकी बात का मतलब समझ गया था, क्योंकि वो मुझसे तो उम्र में छोटी थी, इसलिए उन्हें मेरा उनको मौसी जी कहना अच्छा नहीं लगा था, वैसे तो मुझे भी उनको मौसी जी कहना जरा अजीब सा लगता था लेकिन बीबी के रिश्ते के कारण मौसी नहीं तो और क्या कहता, यही बात उस वक्त मैनें उनसे कह दी,


" मैं भी आपको मौसी कहाँ कहना चाहता हूँ, मगर और क्या कहूँ,"

जवाब में वो शोखी से मुस्कुराई और मेरे बहुत करीब आकर मेरे सिने को अपने हांथों से थपथपा कर बोली

" वैसे तो मेरा नाम सुजाता है, मगर जो लोग मुझे पसन्द करते हैं वे सभी मुझे सूजी कहते हैं,"

" और जिन्हें आप पसन्द करती हैं उनसे आप खुद को सुजाता कहलवाना पसन्द करती हैं या सूजी," मैनें उनसे पूछा

वे मेरी बटन से छेड़छाड़ करती हुई मेरी आँखों में झाँक कर बोली " सूजी "

" यदि मैं आपको सूजी कहूँ तो?"

" नो प्रोब्लम, बल्कि मुझे ख़ुशी होगी " कह कर उन्होंने वापस दौड़ लगा दी,

मेरा दिल बुरी तरह धड़कने लगा, मौसी यानी सूजी मुझे अपने दिल की बात इशारों में समझा गई थी,उस समय मैनें खुद को किसी शहंशाह से कम नहीं समझा, सूजी थी ही इतनी सुन्दर की उसकी समीपता पाकर कोई भी अपने को शहंशाह समझ सकता था,



मैं मन में बड़ी अजीब सी अनुभूति लिये बेडरूम में आया, मेरी बीबी अभी अभी जागी थी,
वो बेड से उठ कर बड़े अचरज से मुझे देख कर बोली,

"कहाँ गये थे इतनी सुबह सुबह,"

" जोगिंग करने " मेरे मुंह से निकल गया

" जोगिंग " मेरी बीबी ने अचरज से अपनी आँखें फाड़ी,

" व ...वो मेरा मतलब है, मैं सुबह जल्दी उठ गया था ना इसलिये सोचा चलो जोगिंग की प्रेक्टिस की जाये, मगर सफल ना हो सका तो वापस चला आया," मैनें जल्दी से बात बनाई, मेरी बात सुन कर बीबी हंसी और बाथरूम में घुस गई,

फिर दो दिन निकल गये, मैं अपनी बीबी के सामने मौसी को मौसी जी कहता और अकेले में सूजी, इस बिच सूजी के ब्यवहार में आश्चर्य जनक परिवर्तन हुवा था, वो मेरे ज्यादा से ज्यादा करीब होने की कोशीश करती, बहुत गंभीर और परेशान सी दिखाई देती जैसे की मुझसे चुदवाने को तड़प रही हो, उसे चोदने के लिये तड़प तो मैं भी रहा था, मगर अपनी बीबी के कारण मैं उसे छिप कर बाहों में भर कर चूमने के सिवा कुछ ना कर सका, और आखिर परेशान होकर सूजी नें खुद ही एक दिन मौका निकाल लिया,


क्योंकि उनके पति को लौटनें में अब दो ही दिन रह गये थे, उनके पति के आने के बाद तो मौका निकालना लगभग नामुमकिन हो जाता, सूजी ने उस रात मेरी बीबी की कोफी में नींद की कुछ गोलियां मिला कर उसे पिला दी, थोडी देर में जब मेरी बीबी गहरी नींद में सो गई तो मैं फटाफट सूजी के बेडरूम में पहुँच गया,

वो तो मुझे मेरा इन्तजार करते हुवे मिली, मैनें झट उसे बांहों में भर कर भींच लिया और उसके चेहरे और शुर्ख होंठों पर ढेर सारे चुम्बन जड़ दिये, जवाब में उसने भी चुम्बनों का आदान प्रदान गर्मजोशी से दिया,

वो इस वक्त झीनी सी सफेद रंग की नाइटी में थी, जिसमें से उसका सारा शरीर नजर आ रहा था, मेरा खून कनपटीयों पर जमने लगा था, मैनें खिंच कर नाइटी को प्याज के छिलके की तरह उतार फेंका, पेंटी और ब्रा में कसे उसके दुधिया कटाव गजब ढा रहे थे, मैनें पहले ब्रा के उपर से ही उसकी कठोर चुचियों को पकड़ कर दबाया और काफी सख्ती दिखा दी,

" उफ ...सी...ई ...क्या कर रहे हो? सूजी के मुंह से निकला " ये नाजुक खिलौनें हैं इनके साथ प्यार से खेलो,"

मैनें हंस कर उन्हें छोड़ने के बाद पीछे हाँथ ले जा कर पेंटी में हाँथ घुसा दिया और उसके मोटे मुलायम चुतड के उभारों को मुट्ठी में भर लिया, इसी बिच सूजी ने मेरे पेंट के फूले हुवे स्थान पर हाँथ रख कर मेरे लंड को पकड़ा और जोर से भींच दिया,

" आह..." मैनें कराह कर अपना हाँथ उसकी पेंटी में से बाहर खिंच लिया, तब मुस्कुरा कर सूजी ने मेरा लंड छोड़ते हुवे कहा,

" क्यों जब तुम्हारे लंड पर सख्ती पड़ी तो मुंह से आह निकल गई और मेरे नाजुक अंगों पर सख्ती दिखा रहे थे,"

मैं भी उसकी बात सुन कर हंसने लगा, उसके बाद मैनें सूजी को और सूजी ने मुझे सारे कपड़े उतार कर नंगा कर दिया, और मैं उसके शरीर को दीवानगी से चूमने लगा,वो भी मेरे लंड को हाँथ में पकड़े आगे पीछे कर रही थी,

" वाह, काफी तगड़ा लंड है तुम्हारा तो,"



मैं उसकी एक चूची को मुंह में भर कर चूसने लगा तथा एक हाँथ से उसकी जांघ को सहलाते हुवे उसकी चिकनी चूत पर हाँथ फेरा, एकदम साफ़ चिकनी और फुली हुई चूत थी उसकी, एकदम डबलरोटी की तरह, उसके एक एक अंग का कटाव ऐसा था की फरिस्तों का ईमान भी डिगा देता, शायद नियमित जोगिंग के कारण ही उसका शरीर इतना सुन्दर था,

मैनें उसे बेड पर बिठा कर उसकी जांघें फैलाने के बाद उसकी खुबसूरत चूत को चूम लिया, और फीर जीभ निकाल कर चूत की दरार में फिराई तो उसने सिसकी भर कर अपनी जाँघों से मेरे सीर को अपनी चूत पर दबा दिया, मैनें उसकी चूत के छेद में जो की एकदम सिंदूर की तरह दहक कर लाल हो रहा था उसमें अपनी लम्बी नाक घुसा दी, उसकी दहकती चूत में से भीनी भीनी सुगन्ध आ रही थी


तभी सूजी ने मुझे उठाया, उत्तेजना के कारण उसका चेहरा बुरी तरह तमतमा रहा था
उसने मुझे उठाने के बाद कहा,

" अब मैं तुम्हारा लंड खाऊँगी,"

"खा लो,"
मैनें हंस कर कहा तो सचमुच जमीन पर घुटनों के बल बैठ गई और अपना मुंह फाड़ कर मेरा लंड अपने मुंह में भर कर चूसने लगी, मेरी बीबी ने भी कभी इस तरह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर नहीं चूसा था, क्योंकि उसे तो घिन आती थी, इसी कारण जब आज सूजी नें मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसा तो एक अजीब से सुख के कारण मेरा शरीर अकड़ रहा था,

वो मेरे चूतडों को हांथों से जकडे हुवे अपना मुंह आगे पीछे करते हुवे मेरा लंड चूस रही थी, उसके सुर्ख होंठों के बिच फंसा मेरा लंड सटासट उसके मुंह में अन्दर बाहर हो रहा था, सूजी मुस्कुराती आँखों से मुझे ही देख रही थी, फिर एकाएक वो अपनी गर्दन जोर जोर से आगे पीछे चलाने लगी तो मुझे लगा की मैं उसके मुंह में ही झड़ जाउंगा, इसलिए मैनें उसका सीर पकड़ कर लंड को मुंह से निकालने की कोशिश की और बोला,


" छ ...छोड़ दो सूजी डार्लिंग नहीं तो मैं तुम्हारे मुंह में ही पिचकारी छोड़ दूंगा,"

परन्तु इतना सुनने के बाद भी उसने मेरा लंड अपने मुंह से बाहर नहीं निकाला बल्कि ना के इशारे में सीर हिला दिया, तो मैं समझ गया की वो मुझे अपने मुंह में ही झडवा कर मानेगी, उसने मेरे चूतडों को और जोर से जकड़ लिया और तेज तेज गर्दन हिलाने लगी, तो मैं चाह कर भी अपना लंड उसके मुंह से बाहर नहीं निकाल सका,
आखिर मैं उसके मुंह में झड़ गया और उसके उपर लद गया, मेरे वीर्य की पिचकारी उसके मुंह में छुट गई तो उसने गर्दन उपर निचे करना रोक दिया और मेरे लंड के सुपाड़े को किसी बच्चे की तरह निप्पल के जैसे चूसने लगी, सारा वीर्य अच्छी तरह चाट कर ही वो उठी और चटकारा लेकर मुझ से बोली,


" मजा आ गया जानेमन, बड़ा स्वादिष्ट रस है तुम्हारा,"

परन्तु अब तो मैं बेकार हो चूका था, मेरा लंड सिकुड़ कर आठ इंच से दो इंच का हो गया था,
मैनें उसे देख कर शिकायती लहजे में कहा,

" ये बात अच्छी नहीं है सूजी, तुमने मेरे साथ धोखा किया है,"

" अरे नहीं डार्लिंग धोखा कैसा, मैं अभी तुम्हारे लंड को दोबारा जगाती हूँ,"

कहने के बाद सूजी मेरा सिकुड़ा हुवा लंड हांथों में पकड़ कर उठाने की कोशिश करने लगी, भला वो अब इतनी जल्दी कहाँ उठने वाला था, मगर सूजी तो पूरी उस्ताद निकली,

उसने मुझे धकेल कर फर्श पर चित लिटाया और मेरी जाँघों पर चढ़ कर बैठ गई, तथा मेरे सिकुड़े हुवे लंड को पकड़ कर अपनी दहकती हुई चूत के छेद पर रगड़ने लगी, मैं भी उसकी चुचियों को दबाने लगा, उसकी चूचियां बड़ी सुन्दर और कठोर थी, जल्दी ही मेरे लंड में थोड़ा कड़ापन आ गया,


उसी समय सूजी ने मेरे थोड़ा कठोर हो चुके लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रखा और अंगूठे की सहायता से जबरदस्ती अपनी चूत में ठूंस लिया, चूत के अन्दर की गर्मी पाकर तो मेरा लंड एकदम से खडा होने लगा और चूत में पड़े पड़े ही सीर उठाने लगा,

सूजी ने लंड को बाहर नहीं निकाला बल्कि वो संभल कर लंड के उपर ही बैठ गई, मेरा लंड जितना तनता जा रहा था उतना सूजी की चूत की दीवारों को फैलाता हुवा अन्दर घुसता जा रहा था, एक समय ऐसा आया की सूजी को अपने घुटनों की सहायता से उपर उठाना पड़ा, क्योंकि मेरा लंड अब तो पहले से भी ज्यादा लम्बा और कड़ा होकर करीब आधा तक उसकी चूत की गहराई में पहुँच कर चूत के छेद को चौड़ा करके कस चूका था, लंड अभी भी धीरे धीरे उठ रहा था, उसे इस तरह बढ़ता देख कर सूजी सिसिया कर उठ गई और लंड का सुपाड़ा सट से बाहर आ गया, वो बोली,


" बा....बाप रे....ये तो बढ़ता ही जा रहा है,"

" इस पर बैठो ना सूजी," मैनें उसे दोबारा लंड पर बैठने के लिये कहा, मगर वो नकली हैरानी दिखाते हुवे बोली,

" ना....ना बाबा ना, इतने लम्बे और मोटे लंड को मेरी कोमल चूत कैसे सहन कर पाएगी, इसे तुम्हारा ये बम्बू जैसा लंड फाड़ देगा,"

अब मैं उठा और सूजी से बोला,

" लो कम ऑन सूजी, तुम कोई बच्ची नहीं हो जो मेरे लंड से इतना डर दिखा रही हो,"

सूजी तो फालतु में नाटक कर रही थी, मैं तो एक बार झड़ चूका था, इसलिए मुझे कोई जल्दीबाजी नहीं थी, मगर सूजी की चूत में आग तब से अब तक उसी तरह लगी हुई थी, वो चुदवाने के लिये बुरी तरह उतावली हो रही थी, ये उसके चेहरे से ही झलक रहा था,
सो इस बार वो कोई भी नखरा किये बिना चुपचाप अपने घुटनें और हथेलियाँ फर्श पर टिका कर जानवरों वाली कंडीसन में हो गई, यानि वो जानवरों वाली पोजीसन में वो पीछे से लंड चूत में डलवा कर चुदवाना चाहती थी,


मुझे भला क्या ऐतराज होता, मैं उसके पीछे आ गया, लेकिन उसके कुल्हे मेरे धड़ से बहुत निचे थे, इसलिये मैनें उसे पंजो पर खडा करके उसकी पोजीसन को ठीक किया, अब उसके कूल्हों का सेंटर ठीक मेरे लंड से मेल खा रहा था, मैनें उसकी टांगों को आगे बढ़ा कर उसके पेट से सटा दिया,

अब उसकी चूत काफी हद तक उभर कर पीछे की ओर निकल आई थी, सब कुछ जांच परख कर मैनें उसकी चूत के छेद पर अपने लंड का सुपाड़ा टिकाया और उसके कुल्हे पकड़ कर मैं लंड अभी ठेलना ही चाहता था की उधर सूजी नें लंड अन्दर लेने के लिये अपने कूल्हों को पीछे की ओर ठेला और इधर मैनें धक्का मारा, दोनों तरफ के धक्कों के कारण लंड थोड़ा सा कसता हुवा सरसरा कर करीब आधा चूत के अन्दर चला गया,


सूजी के मुंह से सी...सी...ई...की आवाज निकली, उसने दोहरी होकर बदन ऐंठ दिया, मैं रुका नहीं और अपना पूरा लंड अन्दर ठेलता ही चला गया, हालांकि सूजी की चूत काफी कसी हुई थी और मैं जानता था की इस तरह सूजी को मेरे मोटे और लम्बे लंड से थोडी बहुत परेशानी हो रही होगी, मगर उतनी नहीं जितना की सूजी दिखा रही थी,

वो " ऊं ....आ ...आह.. करते हुवे अपना धड़ आगे बढाने लगी, जबकि मैंने उसकी कोई परवाह नहीं की और बहुत जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिये, मुझे इम्प्रेस ना होते देख कर सूजी ने भी कराहना बंद कर दिया और मेरे लंड का स्वाद अपनी चूत से लेने में मगन हो गई,

मेरे लगभग हर धक्के पर सूजी जरा सा आगे सरक जाती, मेरा आठ नौ इंची लम्बा लंड जरूर उसकी अंतड़ियों में जाकर अड़ जाता होगा, मैं लंड को सट से बाहर खींचता और सड़ाक से अन्दर घुसेड़ देता, मेरे जोर के धक्कों के कारण ही सूजी अपनी जगह से तीन चार फीट आगे सरक गई थी, साथ में मैं भी आगे बढ़ता चला गया,


अब वो मस्ती में सिसकियाँ भर रही थी और मैं उसके कुल्हे पकड़ कर धका धक लंड से पेलम पेल मचाये हुवे था, सूजी मेरे तेज धक्कों के कारण खुद को रोक ना सकी और जल्दी ही उसकी चूत नें पानी छोड़ दिया, मस्ती में वो अपने कुल्हे मटकाते हुवे मेरे लंड पर अपनी चूत से निकले रस की फुहार फेंकने लगी,

पूरी तरह मस्ती से निबट कर उसके मुंह से " ब.....बस...बस करो," की आवाज निकली, मगर मैं अभी कहाँ बस करने वाला था, मैं तो एक बार उसके मुंह में पहले ही अपना पानी गिरा चुका था, इसलिये अब दोबारा झड़ने में मुझे काफी देर लगनी थी, अभी तो मेरे झड़ने का आसार दुर दुर तक नहीं था,

यूँ भी मैं एक बार झड़ने के बाद दोबारा जब भी चुदाई करता तो मेरी बीबी भी मुझसे पनाह मांगती थी, इसीलिए वो मुझसे दोबारा चुदवाने के लिये कभी जल्दी से हाँ नहीं भरती थी, यदि चुदवाती भी तो पहले अपने हाँथ के जरिये या बाहर ही बाहर मेरे लंड को अपनी चूत पर काफी देर तक रगड़ती, जब तक मैं और मेरा लंड चोदने के लिये पूरी तरह तैयार ना हो जाते, इतनी देर के बाद चुदाई करने पर भी मैं अपनी बीबी से हाँथ जुड़वा कर ही दम लेता,

पर यहाँ तो मामला ही उल्टा था, सूजी ने तो मेरा लंड दोबारा खड़ा करके तुंरत ही अपनी चूत में डलवा लिया था, इसलिये अभी तो मैं जल्दी से झड़ने वाला नहीं था, सो मुस्कुरा कर उसी ताकत से उसके कूल्हों पर चोट करते हुवे बोला,

" मेरी जान, मुझे अपने मुंह में पहले झडवा कर के गलती तुमने की है, अब भुगतो मैं क्या करूँ?"

वो बुरी तरह कराह कर बोली, " हा....हाँ...गलती हो गई...मगर फिलहाल मुझे छोड़ दो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है,"

" मैं अब नहीं छोड़ने वाला " मैं धड़ा धड़ धक्के लगाता हुवा बोला,

" प्लीज थोडी देर के लिये अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लो," वो लगभग गिडगिडा कर बोली, " बस थोडी देर के लिये शान्त हो जाओ प्लीज "

मुझे उसपर दया आ गई, मैनें धक्के लगाने तो बंद कर दिये मगर लंड बाहर नहीं निकाला, उसके कूल्हों से सट कर हांफता हुवा बोला, " बस तुम औरतों में यही बात गलत है पहले तो मनमानी कर लेती हो फिर खुशामद करने लगती हो, तुम्हारा काम तो हो गया, अब मैं क्या करूँ?"

जवाब में वो कुछ देर सोचने के बाद बोली " अच्छा एक काम करो, मेरी गांड मार लो, अपना मुसल मेरी गांड में डाल लो "

" क्या...." मैं बुरी तरह चौंका, " क्या पागल हो गई हो, तुम्हारी गांड में लंड डालने से तो तुम्हें चूत से भी भयंकर दर्द होगा,"

" इसकी फ़िक्र तुम मत करो, अपने इस शैतान के बाप को मेरी चूत से निकाल कर मेरी गांड में डाल दो,"

वो खुद गांड मरवाने राजी थी तो मुझे भला क्या ऐतराज होता, मुझे तो मतलब मेरा काम पूरा होने से था, अब वो चाहे चूत हो गांड हो या मुंह, मुझे उससे क्या मतलब, तब मैनें सटाक से अपना लंड चूत से बाहर खिंचा, मेरा लंड चूत के पानी से भीगा हुवा था और चूत में पड़े रहने के कारण बहुत ही भयंकर नजर आ रहा था,

मैनें चूत के छेद से एक इंच उपर यानी गांड के गोल छेद पर अपने लंड का सुपाड़ा टिकाया और सूजी के कुल्हे पकड़ कर जोर लगाया, चूत के रस से चिकना सुपाड़ा गांड के छेद को फैला कर थोड़ा सा अन्दर घुस गया, मैं मन में सोच रहा था की सूजी के मुंह से चीख निकल जायेगी, परन्तु ऐसा नहीं हुवा, उसने सिर्फ सिसकी भर कर अपना सीर ताना, तब मैनें अपना पुरा लंड उसकी गांड में सरका दिया,

इस पर भी जब सूजी ने तकलीफ जाहिर नहीं की तो मैं समझ गया सूजी गांड मरवाने की आदि है, उसने सिर्फ कस कर अपने होंठ भींचे हुवे थे, फिर भी मैनें पूछा,

" तकलीफ तो नहीं हो रही है ना सूजी,"

" नहीं तुम धीरे धीरे चोदते रहो," उसने कहा तो मैं उसके गोल मटोल कुल्हे थपथपा कर धीरे से झुका और दोनों हाँथ निचे लाकर दोनों चुचियों को पकड़ कर उसकी गांड मारने लगा, थोडी देर बाद मैनें धक्के तेज कर दिये, मुझे तो उसकी चूत से अधिक उसकी गांड में अपना लंड कसा होने के कारण ज्यादा मजा आ रहा था, और जब मेरे धक्कों ने प्रचंड रूप धारण कर लिया तो सूजी एकदम से बोली,




" ...बस...अब अपना लंड मेरी गांड में से निकाल कर मेरी चूत में डाल दो,"

" क्यों " मैनें रुक कर पूछा,

" क्योंकि मैं तुम्हारा वीर्य अपनी चूत में गिरवाना चाहती हूँ,"

सुन कर मैं मुस्कुराया और अपना लंड गांड में से खिंच कर वापस उसकी चूत में घुसेड़ दिया, मैनें फीर जोर जोर से धक्के लगाने शुरु कर दिये थे, मगर इस बार सूजी को कोई परेशानी या दर्द नहीं हुवा था, बल्कि अब तो वो दुबारा मस्ती में भर कर अपने कुल्हे आगे पीछे ठेल कर मेरा पुरा साथ देने लगी थी, इतनी देर बाद भी मैं सूजी को मंजिल पर पहुंचा देने के बाद ही मैं झडा, सूजी भी कह उठी,

" मर्द हो तो तुम जैसा, एकदम कड़ियल जवान,"

" और औरत हो तो तुम जैसी एकदम कसी हुई," जवाब में मैनें भी कहा, फिर हम दोनों एक दुसरे की बाहों में समां गये,

मौसा जी को जहां दो दिन बाद आना था, दो दिन तो दूर की बात वो पुरे पांच दिन बाद आये,और उन पांच रातों का मैनें और सूजी नें भरपूर लाभ उठाया, सूजी हर रोज मेरी बीबी को नींद की गोलियां देकर सुला देती और हम दोनों अपनी रात रंगीन करते, मौसा जी के आने के बाद ही हमारा ये चुदाई का खेल रुका, इस बिच मौसी यानि सूजी बहुत उतावली रहती थी, वो मेरे एकांत में होने का जरा जरा सा बहाना ढुंढती थी,

मैं इस बात को उस वक्त ठीक से नहीं समझ सका की सूजी मेरी इतनी दीवानी क्यों है, क्या मौसा जी में कोई कमी है या वे इसे ठीक से चोद नहीं पाते? जबकि देखने भालने में वे ठीक ठाक थे,



सूजी मेरी इतनी दीवानी क्यों है? इसका जवाब मेरे दिमाग ने एक ही दिया की या तो वो मेरे लंड की ताकत से दीवानी हुई है या फिर मौसा जी उसे ढंग से चोद नहीं पाते होंगे, हम महिना भर वहाँ रहे, इस बिच हमने यदा कदा मौका देख कर चुदाई के कई राउंड मारे,

जब हम वहाँ से आने लगे तो सूजी ने मुझे अकेले में ले जाकर कहा,

" जल्दी जल्दी राउंड मारते रहना मुझे और मेरी चूत को तुम्हारे लंड का बेसब्री से इंतजार रहेगा,

मैनें इतनी चाहत का कारण पूछा तो उसने यही बताया की " वे " यानी की उसके पति उसे ठीक से चोद नहीं पाते, मेरा शक सही निकला, मौसा जी की कमी के कारन ही वो मेरी तरफ झुकी,

मेरा दिल भी उसे छोड़ कर जाने का नहीं कर रहा था, मगर मज़बूरी वश मुझे वापस आना पड़ा, आने के एक हफ्ता बाद ही मैं बीबी को बिना बत्ताये दुबारा सूजी के यहाँ पहुँच गया, वो मुझे देख कर बहुत खुश हुई,

मैं इस बार चार दिन वहाँ रहा और चारों दिन सूजी को खूब चोदा, क्योंकि मौसा जी के ऑफिस जाने के बाद मैं और सूजी ही घर में रह जाते और खूब रंगरेलियां मनाते, अब तो मेरी बीबी का भी खतरा नहीं था, मौसा जी को भी हम पर कोई शक होने वाला नहीं था, क्योंकि रिश्ते के हिसाब से मैं सूजी का दामाद हूँ, मौसा जी भी मुझे दामाद जैसी इज्जत देते,



इसी का फायदा उठा कर मैं हर महीने सूजी के यहाँ जाकर पूरी मौज मस्ती करके आता था, हमारा ये क्रम पांच महिने तक चला, उसके बाद जब एक महिने पहले सूजी के यहाँ पहुंचा तो उसका ब्यवहार देख कर मैं बुरी तरह चौंका, वो मुझे देख कर जरा भी खुश नहीं हुई और ना ही मुझसे एकांत में मिलने की कोई कोशिश की, और जब मुझे बहुत ज्यादा परेशान देख कर मुझसे मिली तो उसके चेहरे पर सदाबहार मुस्कान की जगह रूखापन था, मैनें इसका कारण पूछा, और उसने जो कुछ मुझे बताया उसे सुन कर तो मेरे पैरों के निचे से जमीन ही निकल गई, उसने बताया की...

उसने मेरे से इस लिये नहीं चुदवाया की मौसा जी उसे ठीक से नहीं चोद पाते थे, सूजी मौसा जी से चुदवा कर पूरी खुश थी और वो मौसा जी से बहुत प्यार करती थी, उसने मुझसे सिर्फ इसलिए चुदवाया था की वो समझ गई थी की मौसा जी बच्चा पैदा करने में असमर्थ थे, उनके वीर्य में शुक्राणु या तो हैं नहीं या हैं तो बहुत कमजोर हैं, ये बात उसने अपना चेकअप करा कर जानी, क्योंकि जब उसमें कोई कमी नहीं थी तो जाहिर था की कमी मौसा जी में ही हो सकती थी, जबकि उसे और मौसा जी को बच्चे की बहुत चाहत थी, इससे पहले की मौसा जी ये बात जानें, गर्भवती होने के लिये मुझसे संबंध बना लिये, ताकि मौसा जी अपने बारे में जान कर हीन भावना से ग्रस्त ना हो जाएँ, अब वो गर्भवती हो चुकी है इसलिए वो उसके पास ना आया करे, अंत में उसने कहा मुझे तुमसे कोई लगाव नहीं है, अब इधर दुबारा फटकना भी मत,

मुझे दूध में गिरी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया,


आपका दोस्त
राज शर्मा


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raj..
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Joined: 10 Oct 2014 01:37

Hindi Sex Stories By raj sharma मम्मी – पापा का खेल

Unread post by raj.. » 10 Oct 2014 14:43

मम्मी – पापा का खेल

बबली मेरे पड़ोस मैं रहती थी. बचपन मैं हम एक खेल खेलते थे,
जिसका नाम था "घर-घर". उमर कोई यों ही 3-6 साल तक रहा करती
होगी. घर के किसी कोने मैं हम बच्चे लोग एक दो चदडार के सहारे
किसी बड़े पलंग के नीचे साइड से ढककर घर बनाते…फिर उसे
सजाते…छोटे छोटे खिलोनो से और ये खेल खेलते. दिन – दिन भर
खेलते रहते थे. खास तौर से गर्मियों की छुट्टियों मैं. एक बच्चा
डॅडी बनता…एक मम्मी बनती….और बाकी उनके बच्चे. फिर डॅडी ऑफीस
जाते…मम्मी खाना बनाती…..बच्चे स्कूल जाते….खेलने जाते……और वो सब
हम सब बच्चे नाटक करते….जैसा की अक्सर घर मैं होता था.अक्सर…
हम आस-पड़ोस के आठ-दस बच्चे इस खेल को खेला करते. पता नहीं उस
छोटी सी उमर मैं मुझे याद है, जब जब बबली मम्मी बनती थी और
मैं पापा, तो मुझे खेल मैं एक अलग सा आनंद मिलता था. सामने वाले
शर्मा जी की बेटी थी वो. शर्मा जी कोई बड़े अमीर तो ना थे, पर उनकी
बेटी, यानी की रिंकी…अपने गोरे-चिट रंग…और खूबसूरत चेहरे से,
शर्मा जी की बेटी कम ही लगती थी.

उस उमर मैं वो बड़ी प्यारी बच्ची थी. कौन जानता था की बड़ी होकर वो
सारी कॉलोनी पर कयामत ढाएगी! वो मेरी अच्छी दोस्त बनी रही, जिसकी
एक वजह ये भी थी की हम एक ही स्कूल मैं पड़ते थे. और धीरे
धीरे ज्यों ज्यों साल बीतने लगे….भगवान बबली को दोनो हाथों से
रंग रूप देने लगे….और दोस्तों रूप अपने साथ नज़ाकत…और कशिश
अपने आप लाने लगता है……खूबसूरत लड़की कुछ जल्दी ही नशीली और
जवान होने लगती है. बबली के 14थ जन्मदिन पर जब हम उसके स्कूल
और कॉलोनी के दोस्त उसे बधाई देने लगे……मैं एक कोने से छुपी और
चोरी चोरी की नज़रों से उसे देख रहा था. मेरी कोशिश ये थी कि
उसकी खूबसूरती को अपनी आँखों से पी लेने मैं मुझे कोई डिस्टर्ब ना
कर दे.वो एक मदहोश कर देने वाली गुड़िया की तरह लग रही
थी…….उसके हाव-भाव देख कर मेरी सारी नस तन गयी….करीब 18 बरस
का ये नौजवान लड़का अपनी झंघाओं के बीच मैं कुछ गरमी महसूस
कर रहा था….और मैने नीचे तनाव महसूस किया. बबली का गुदाज
जिस्म….अपने गोरेपन के साथ मुझे खींचता ले जा रहा था….उस नरम
त्वचा को छूने के लिए सहसा मेरे अंदर एक तड़प उठने लगी. कहीं
एकांत मैं बबली के साथ..केवल जहाँ वो हो और जहाँ मैं हूँ. और
फिर उस एकांत मैं नियती हमसे वो करवा दे जो की दो जवान दिल और
जिस्म नज़दीकी पा कर कर उठते हैं.

कुछ और समय बीता और बबली का शरीर और खिलने लगा…आंग बढ़ने
लगी और उसके साथ मेरा दीवानापन बढ़ने लगा…..एक सुद्ध वासना जो उसके
आंग आंग के कसाव, बनाव और उभरून को देख कर मुझे अपने आगोश
मैं लपेट लेती थी. तक़दीर ने मुझ पर एक दिन छप्पर फाड़ कर
खुशी दी. एक बार फिर मैने "घर-घर"का खेल खेला, पर करीब 15
बरस की जवान गदराई…भरपूर मांसल लड़की के साथ. केवल अपनी बबली
के साथ.

हुआ यूँ की फिर वही गर्मियों की छुट्टिया थी. बबली देल्ही जा रही
थी अपने अंकल के यहाँ. मैं भी देहली गया था किसी काम से. वापस
आते समय मैने सोचा की क्यों ना एक फोन कर के पूछ लूँ कि शायद
शर्मा जी का परिवार भी वापस चल रहा हो तो साथ साथ मैं भी
चलूं (दरअसल मैं बबली के साथ और दीदार के लिए मरा जा रहा
था.). फोन बबली ने ही उठाया और वो बड़ी खुश हुई की मैं वापस
जा रहा हूँ मुंबई, और बोली की वो भी चलेगी मेरे साथ. उसकी ज़िद के
आगे शरमजी झुक गये और इस तरह बबली अकेली मेरे साथ मुंबई चल
दी. हालाँकि वो घर पर अपने भाई के साथ रहती, पर मैं इस यात्रा से
बड़ा खुश था. मैने शताब्दी एक्स्प की दो टिकेट्स बुक की और हम
चले. मैने उसका परा ख़याल रखा और इस यात्रा ने हम दोनो को फिर
बहुत नज़दीक कर दिया. यात्रा के दौरान ही एक बार फिर घर –घर
खेलने का प्रोग्राम बना और बबली ने वादा किया की वो मेरे घर आएगी
किसी दिन और हम बचपन की यादें ताज़ा करेंगे. मैने महसूस किया की
वो अभी स्वाभाव मैं बच्चीी ही है..पर उसका जवान शरीर…..ग़ज़ब
मादकता लिए हुए था. हम बहुत खुल गये ढेर सी बाते की. उसने
मुझे यहाँ तक बताया की उसकी मम्मी उसे ब्रा नहीं पहने देती और इस
बात पर वो अपनी मुम्मी से बहुत नाराज़ है. मैने उससे पूछा की उसका
साइज़ क्या है.

उसने मेरी आँखों मैं देखा, "पता नहीं….."

कभी नापा नहीं. बबली बोली.

अच्छा गेस करो……. वो बोली.

मैने गेस किया – 34-18-35.

वाह…आप तो बड़े होशियार हो…..

अच्छा…. मेरा साइज़ बताओ?

लड़को का कोई साइज़ होता है क्या?

मैने कहा हां होता है……

तो फिर आप ही बताओ….मुझे तो नहीं पता

8 इंच….और 6 इंच

ये क्या साइज़ होता है…?

तुम्हे पता नहीं….?

नहीं…….वो बोली.

अच्छा फिर कभी बताऊँगा….!

नहीं अभी बताओ ना…प्लीज़ …..

अच्छा जब घर-घर खेलने आओगी तब बताऊँगा…..

प्रॉमिस?

यस प्रॉमिस.

इस यात्रा ने मेरा निश्चय पक्का कर दिया ….क्योंकि उसके बेइंतहा
सौंदर्या ने, उसके साथ की मदहोशी ने….उसके मांसल सीने को जब मैने
इतने नज़दीक से देखा……जीन्स मैं कसे उसके चौड़े गोल पुत्तों को
…उफफफफफ्फ़…मैं कैसा तड़प रहा था मैं ही जानता हूँ.

जल्द ही वो दिन आ गया…..मैं उस दिन घर पर अकेला था. बबली भी आ
गयी….लंच के बाद. मेरी त्यारी पूरी थी. एक बहुत सुंदर बीच ब्रा
और जी-स्ट्रिंग मैने खरीदी. एक नया जॉकी अंडरवेर अपने लिए या
कहूँ की उस दिन के लिए, जिसका मुझे किसी भी चीज़ से ज़्यादा इंतज़ार
था.

फिर उस दिन वो आई…लंच के बाद. वो सुबह टशन गयी थी, तब उसका
भाई ताला लगाकर कहीं चला गया था. कुछ और काम ना था तो वो
मेरे घर आ गई. उस दिन मैं भी अकेला था.क्या बताऊं जब दरवाजा
खोला और उसे खड़ा देखा तो मेरे बदन मैं एक झुरजुरी सी हो गई.
वो कमसिन हसीना मेरे सामने खड़ी थी.उन्नत तना हुई शर्ट मैं कसे
कसे बूब्स….वो गड्राया बदन….मेरी नस –नस फड़कने लगी. हम
बातचीत मैं खो गये. आख़िर वोही बोली चलो घर-घर खेलते
हैं…..जैसे हम बचपन मैं खेलते थे!

हां चलो…..बहुत मज़ा आएगा……देखते हैं बचपन का खेल अब खेलने
मैं कैसा लगता है……ठीक है…..तुम मम्मी …मैं डॅडी……

और हमारे बच्चे…? उसने हंसते हुए पूछा….

अरे हां….बच्चा तो कोई भी नहीं..है….तो फिर तो हम केवल पति
–पत्नी हुए ना अभी…..ना की मम्मी-डॅडी.

वो खुस हुई….हां ये ठीक है…..पति-पत्नी. आप मेरे पति और मैं
आपकी पत्नी. और आज हम पूरे घर के अंदर ये खेलेंगे…ना की किसी
कोने मैं…..

ओके….मैने कहा.

और हम पति-पत्नी की तरह आक्टिंग करने लगे. खेल सुरू हो गया. मैं
फिर उसकी खूबसूरती के जादू मैं डूबने लगा. मेरे शरीर मैं एक
खुशनुमा मादकता च्चाने लगी. उसके बदन को छूने …देखने के बहाने
मैं ढूँढने लगा. जैसे वो किचन मैं चाइ बनाने लगी…तो मैं
चुपके से पीछे पहुँच गया….और उसके बम्स पर एक चिकोटी काटी. वो
उच्छली…ऊऊ….क्या कर रहे हैं आप…..

अपनी खूबसूरत बीबी से छेड़ छाड़…..मैने मुस्कुराते हुए कहा.

वो वाक़ई मैं बेलन लेकर झूठ-मूठ मरने के लिए मेरे पीछे
आई….मैं दूसरे कमरे मैं भगा….उसने एक मारा भी…..

आआहह….तुम तो मारने वाली बीबी हो…..मैने शिकायत भरे स्वर मैं
कहा……देखना जो मेरी असली बीवी होगी ना….वो मुझसे पागलों की तरह
प्यार करेगी.

और आप….? आप उसे कितना प्यार करोगे….?

मैं…..आपने से भी ज़्यादा……दुनिया उसके कदमों मे रख दूँगा मैं…..

साच…? वो कितनी लकी होगी…..अच्छा आप उसे किस तरह पुकरूगे…?

मैं उसे हमेशा डार्लिंग कहूँगा…..

तो आज के लिए मुझे भी कहो ना….

ओके…..तो मेरी डार्लिंग बबली…..ये बेलन वापस रखो…..और नाश्ता
दो…..मुझे ऑफीस भी जाना है….

ओह…..हां अभी देती हूँ…..आप ऑफीस के लिए त्यार हो जाओ…

वो जैसे ही जाने लगी…मैने कहा एक मिनिट. वो रुकी. मैं आगे बड़ा,
अचानक मैने उसे आपनी बाहों मैं उठा लिया…और ले चला….

आआहह….ऊओह…आप क्या कर रहे हैं……ऊओ..हह..और वो खिलखिलाई.

अपनी सुंदर सेक्सी पत्नी..को मैं ऐसे ही भाहों मैं उठा रखूँगा …..
डार्लिंग! मैने उसे उठा कर किचन तक ले गया….जिस्मों की ये पहली
मुलाकात बड़ी असरदायक थी. उसके दूधिया बूब्स की एक छोटी सी झलक
मिली जो उसने मुझे वहाँ पर देखते हुए देखा भी. झंघाओं का वो
स्पर्श…जब मैं उसे उठाए हुए था….धीरे धीरे उसके जिस्म से मेरी
छेड़ चाड बादने लगी. एक दो बार मैने उसे बाहों मैं भी भरा. वो
थोडा शरमाई भी..ज़्यादा नहीं…हल्की सी सुर्ख लाली …..गालों पर.

चलो आब ऑफीस जाओ…बहुत नटखट है ये मेरा पति…..सिर्फ़ शैतानिया
ही सुझति हैं आपको….वो बोली.

मैं झूठ-मूठ ऑफीस जाने का नाटक करने लगा (ये इस खेल का एक हिस्सा
होता था). ऑफीस जाने से पहले….मैं फिर उसके सामने खड़ा हो गया.

अब क्या है…..?

उसके कान मैं मैने कहा…….एक किस…..डार्लिंग, जो हर बीवी आपने पति
को ऑफीस जाने से पहले देती है.

और ये कहकर मैने उसे बाहों मैं भर लिया. वो
कसमसाई….छ्चोड़िए….क्या कर रहे हैं….बट अब मेरे होंठों ने….अपनी
प्यास भुझा ने की ठान ली थी. मैने उसे कसते हुए एक चुंबन उसके
दाहिने गाल पर जाड दिया…..सुंदर मदहोश कर देने वाला एक लंबा सा
किस. फिर उसे एक भरपूर नजऱ से देखा……उसके खूबसूरत चेहरे
को…दोनो मुस्कुराए…या मुस्कुराने की कोशिश की…..और फिर एक उनपेक्षित
चुंबन मैने उसके होंठो पर रख दिया. इस चुंबन ने जादू सा
किया. इसका प्रभाव ये हुआ की मेरे उठते हुए काम लंड ने इस चुंबन के
असर मैं आकर उसकी पेल्विस मैं एक चुभन दे डाली.ठीक वहीं
जहाँ…कुदरत ने उसका कर्म क्षेत्र बनाया है.

मैने एक बार उसके होंठ छोड़ दिए….कहा….तुम बहुत सुंदर हो
बबली….तुम जैसी ही बीवी तो चाहिए मुझे….. कितना सुंदर बदन है
तुम्हारा…..और एक बार फिर मैं उसके होंठ पीने लगा. एक लंबे
चुंबन के बाद….. उसने साथ नहीं दिया था…….मैने
पूछा….बबली….बुरा तो नहीं लगा?

नहीं…बिल्कुल नहीं…..आप तो किस करने मैं माहिर हैं!…. .वो नज़र
झुकाए ही बोली.

तो फिर तुमने क्यों नहीं किस किया मुझे…..?

मुझे नहीं आता …… आप सिख़ाओगे? अच्छा पर अभी आप ऑफीस जाओ……. वो
मुझे धक्का देने लगी.

अच्छा बाबा…जाता हूँ …..मैं हंसते हुए बोला.

मेरे लिए ऑफीस से वापस आते हुए क्या लाओगे…..?

एक गरमागरम किस…..

मारूंगी हां…..वो बनावटी गुस्से से बोली…..

मैं जाते हुए बोला…..अक्चा अक्च्छा मैं लाओंगा…..

थोड़ी देर के लिए मैं घर से बाहर गया. ऐसे ही नाटक करते हुए
मैं वापस भी आ गया. वो बेडरूम मैं थी. मैं चुपके से दूसरे
कमरे गया. उसके लिए मैने जो बीच ब्रा और जी-स्ट्रिंग पॅंटी खरीदी
थी वो पॅकेट निकाला……इन कपड़ों को चूमा. फिर जैसे की ऑफीस से
वापस आ गया……वापस बेडरूम मैं आ गया, जहाँ वो लेटी थी.

फिर यूँ ही खेल के कुछ और हिस्से चले…..फिर शाम भी हुई ….घूमने
गये….एसा करते करते हमारे खेल मैं रात आई…

इस खेल के डिन्नर के बाद…..? जब हमै रात मैं एक साथ सोना
था…उस समय उसने पूछा ….मेरे लिए क्या लाए…?

मैने पॅकेट उसके हाथ मैं दिया……देखो…..

क्या है….. वो ब्रा और पॅंटी निकालते हुए बोली……

वाउ….कितनी सुंदर है ये…..पर ये तो बहुत छोटी छोटी हैं…….

ब्रा और पॅंटी कोई बड़ी बड़ी होती हैं क्या…? मैं तो अपनी बीवी को ऐसी
ही पहनाओंगा….

पहनकर तो देखो…..

ओके….देखती हूँ…सच आप वाक़ई अच्छे पति हो आपको याद था की मुझे
ब्रा पहनना बहुत पसंद है? थॅंक यू…

थॅंक यू से काम नहीं चलेगा….पहनकर दिखना पड़ेगा……मैं भी तो
देखूं 34-18-35 के खूबसूरत जिस्म पर ये कैसे सुंदर लगते हैं….!

धात…स्ष…मैं कोई इन कपड़ों मैं आपके सामने आओंगी…?

क्यों भाई पति से शरमाओगी क्या? तो फिर दिखओगि किसे …डार्लिंग?
प्लीआसस्स्सीए! दिखाओ ना!

आच्छा ठीक है पर दूर से देखना पास ना आना. ओके?

ठीक है बाबा…तुम जाओ तो सही!

और ये क्या है…ये मेरा अंडरवेर है…..मैने आपना जॉकी उसके हाथ से
लेते हुए कहा….

वो दूसरे कमरे मैं चली गई…….मैने बिजली की फुरती से अपने कपड़े
निकाले और सिर्फ़ वो नया जॉकी का अंडरवेर पहन लिया….और मिरर के
सामने देखने लगा. जैसे की देख रहा हूँ कि ये अंडरवेर कैसा लगता
है. अंडरवेर बहुत सेक्सी था.फ्रंट मैं सिर्फ़ लंड को कवर करता
था.बाकी उस्मै बॉल तक सारे दिख रहे थे.

उसने आवाज़ दी ….मैं आऊ?

हां हां…डार्लिंग…मेरी जान आओ….!

वो थोड़ा शरमाती हुई आई…..अभी मैने उसके बदन की झलक ही देखी
थी की वो …वापस पलट गई….उउउइइइइमम्माआ……..!!!!!!!!!!!

मैं उसके पीछे लपका….और दूसरे कमरे मैं उसके सामने खड़ा हो गया.

एयाया….प्प्प..प्प्प नंगे क्यों हो गये…?

मैं….तो…तो..तो…अंडरवेर …पा…आ..आ..हहान..सीसी..आ….र्ररर देख रहा था….था…!

फिर हुमारे मुख मैं जैसे बोल अटक गये. मैं भी रोज एक्सर्साइज़ करता
था और मेरा बदन भी बड़ा गथीला था. वो मेरे जिस्म मैं खो गई
और मैं उसके उठाव –चढ़ाव- उतराव मैं. एक कमसिन अक्षत कौमार्या
मेरे सामने लगभग नग्न खड़ी थी. उस नयी जवानी भरे जिस्म पर वो
उठे हुए कसे कसे बड़े बड़े बूब्स….वो पतला सा पेट…..दुबली सी
कमनीया कमर….और फिर चौड़े नितंब……जी-स्ट्रिंग तो उसके उभरे हुए
गुलाबी चूत को भी पूरा नहीं धक पा रही थी.थोड़े थोड़े से रेशमी
बाल इधर उधर बिखरे थे.उसका वेजाइनल माउंड काफ़ी बड़े आकर का और
उभरा हुआ था…फूला फूला सा. और उसकी वो मादक झंघा….पतली लंबी
टांगे……बला की सेक्सी थी वो…फिल्म की हेरोयिन भी क्या उसके सामने
टिकेंगी…..मैं अचंभित सा कामुक दृष्टि से उसे यौं ही देखता
रहा….और कब मेरा लंड टंकार खड़ा हो गया …..मुझे खुद पता ना
चला.

पीछे….मम्मूउउद्दू तो….मैने अपना थूक अंदर घुटकते हुए कहा……

वो मूडी…..

आआआआआआआहहहहाहह…..व्वाअहह हह……

क्या ग़ज़ब का दिर्ष्या था….!दाग रहित गोरा धुधिया बदन….!उसके
बटक्स बिल्कुल डी शेप मैं थे…बड़े बड़े….पूरे नंगे…गस्टरिंग उनको
बिल्कुल भी नहीं ढक रही थी…..

मैने कहा…..बहुत कमसिन और खूबसूरत है तुम्हारा बदन मेरी
बबली….बहुत मादक और सेक्सी हो तुम….

आअप भी बहुत हॅंडसम और मसकुलीन हैं……..वो बोली….

उसकी नज़र मेरे तने हुए अंडरवेर पर थी. मेरा लंड जैसे की
अंडरवेर फाड़ देने को बेताब था.उसने अंडरवेर को एकदम 120 डिग्री
का तनाव दिया हुआ था…..और साइड से देखने पर मेरे टेस्ट्स…जो की
लगभग एग्स जैसे बड़े हैं….सॉफ दिख रहे थे….और साथ मैं मोटी
तनतनी शाफ्ट भी. जहाँ पर मेरे लंड का हेड अंडरवेर को छू रहा
था वहाँ अंडरवेर गीला हो गया था.

मैं आगे बड़ा…..वो पीछे हटने लगी…..चलते समय मेरा लंबा लंड
उप आंड डाउन हिल रहा था…मैने देखा उसकी नज़र वहीं पर थी. पीछे
जाते जाते वो दीवार पर चिपक गई….उसने एक मादक सी आंगड़ाई अपने
बदन को दी…..मेरे लंड ने प्री-कम की एक और बूँद उगली.

मैं जानती हूँ उस दिन आप मेल के किस साइज़ की बात कर रहे थे…..!

मैने उसे बाहों मैं लेते हुए कहा…..किस चीज़ के साइज़ की बात कर
रहा था मैं…?

आब तक मेरे हाथों ने उसकी कमर को पकड़ लिया था……

उसने अपने हाथ से मेरे अंडरवेर के उपर से मेरे लंड को हल्का सा
पकड़ते हुए कहा ……. इसकी….! ये 8 इंच लंबा है…और 6 इंच मोटा
है…सर्कंफरेन्स मैं…..!

गुड…! किसने बताया …?

मेरी सहेली ने…..वो तो आपका ये देखना चाहती है…..!

तुम नहीं देखना चाहोगी?

उसने शरम से चेहरा नेरए सीने मैं छुपा लिया……मैने उसकी पीठ को
सहलाया….एक हाथ से उसके चेहरे पर से जुल्फ हठाते हुए उसके कानों
के नीचे…नरम गोस्त पर लजरता चुंबन दिया. मेरी उंगलियों ने ब्रा का
धागा खोल लिया……ब्रा गिर गई….नंगे बूब्स जैसे ही आज़ाद हुए उनके आकर
मैं बाडोतरी हुई और मेरे सीने पर उन्होने दस्तक दी. शायद नीचे
मेरा लंड और थोडा लंबा होकर थोडा और हार्ड हो गया. आब मेरे हाथ
उसके चुटटर सहला रहे थे.वो कामुक हो चुकी थी…..उसके और ज़्यादा
कठोर होते बूब्स इस बात की गवाही दे रहे थे.मैने ज्यों ही पॅंटी के
अंदर हाथ डाल कर उसके चुचि पर उंगली फिराई….उसके मुँह से आवाज़
निकली ….सस्स्स्सस्स म्‍म्म्ममम….राआअज

हन मुझे भी देखना है…आआ..आ…प्प..प्प…कककक…सीसी..आ..आ…..ळ्ळ्ळुउउउन्न्द्द… ..!

तो फिर मेरा अंडरवेर उतारो…!

वो झुकी घुटनो पर बैठ गई……और मेरा अंडरवेर उसने निकाल दिया.
लंड जैसे….की कोई शेर पिंजरे से आज़ाद हो गया हो….तुरंत ही उसने 3-4
प्रेकुं की बूँदें उगली…..

कैसा है…..

बड़ा गरम है…वो छूकर बोली….बाप रे कितना लंबा और मोटा है..पर
बहुत शानदार…..कितना बड़ा है आपका….और कितना मोटा….

किस करो ना…इसे…तुम्हे अच्छा लगा मेरी रानी..मैने उसके बालों मैं
हाथ फिरते हुए और अपने टेस्ट्स उसके होंठो पर रगड़ते हुए कहा.

उसने अपने होंठ पीछे बढ़ाए….और लंड के हेड को चूम लिया. फिर
थोडा रुककर एक और चुंबन उसका लिया….लंड दहाड़ उठा….और प्रेकुं की
चार बूंदे उसके होंठो पर गिरा दी…...

क्या तुम इसे चूसना पसंद करोगी……? इसकी पूरी लंबाई को?

ऊओ…हां…आप कहते हो तो…ज़रूर…पर ये बहुत मोटा है मेरे मुँह
मैं जाएगा…?

हां कोशिश तो करो…

वो मेरी टाँगों से चिपक गई. उसने मेरे चुट्टर पकड़ लिए. उसके बूब्स
मेरी झंघाओ से घर्षण कर रहे थे. बबली ने तने हुए लंड के
हेड को अपने मुँह से पकड़ा और फिर पुश करते हुए…पूरा हेड पहले
अंदर ले लिया. मैं तड़प उठा….मैने उसका सिर पकड़ा और लंड को आगे
पुश किया….आधा लंड उसके मुँह मैं था. वो उसे अपने थूक से गीला
कर रही थी. फिर उसने उसे चूसना सुरू किया.मुँह के अंदर
बाहर….फिर उसने उसे निकालकर चाटा …शाफ्ट की लंबाई पूरी चाटी. मैं
स्वर्ग मैं था…थोड़ी देर बाद मैने उसे मना किया की वो आब मत करे.
वो उठ गई…

कैसा लगा आपको?

तुम बहुत अच्छा चूस्ति हो….आब मुझे अपनी चूत नहीं दिखावगी?

पहले आप एक वादा करो!

क्या…?

कि आज रात आप मेरे साथ सुहग्रात मनाओगे……मैने सुना है उस्मै
बड़ा मज़ा आता है! सुना है दूल्हा और दुल्हन सारी रात नंगे होकर
बिस्तर पर कोई खेल खेलते हैं….चुदाई का….फिर दूल्हा दुल्हन को अपने
बच्चे की मम्मी बना देता है….अपने लंड को दुल्हन की चूत मैं
डालकर…और इस मैं बड़ा मज़ा आता है….

तुम्हे किसने बताया..? मैने पूछा.

मेरी सहेलिओं ने क्लास मैं….

ओह….15 साल की उमर मैं ही तुम्हारी सहेलिया बड़ी होशियार हो गई हैं…

हां मेरी एक सहेली की दीदी की शादी हुई है ना अभी 2 महेने पहले.
तो उसकी दीदी ने उसे बताया की सुहग्रात मैं बड़ा मज़ा आया. इतना की
सारी रात मनाई. उसकी दीदी ने तो ये भी बताया की उसके जीजाजी ने उसकी
दीदी की चूत मैं अपने लंड से खूब वीएरया भरा और आब उसकी दीदी
मम्मी बन जाएगी. फिर एक दिन मेरी सहेली ने अपने जीजाजी से कहा की वो
उसके साथ भी मना दे सुहग्रात…..एक दिन वो सोई भी अपने जीजाजी के
साथ …पर जीजाजी उसके साथ चुदाई ना कर सके…..

क्यों?

वो अपना ये लंड मेरी सहेली के चूत मैं घुस्सा ना सके. मेरी सहेली
तदपकर रह गई…

अपनी सहेली को मेरे पास लेकर आना…कितनी उमर है तुम्हारी सहेली की?

14 साल…..आपके पास लाउन्गी तो आप उसके चूत मैं घुसा दोगे?आपका तो
इतना मोटा लंड है….

पगली ये लंड घुस्साना तो एक कला है ……हर मर्द थोड़े ही जानता
है…..खास तौर से कक़ची चूत छोड़ना आसान नहीं है…और कितनी
सहेलियाँ है तुम्हारी…..जो अपना कौमार्या लुटाना चाहती हैं?

सात – आठ…है…लेकिन किसी ने सुहग्रात नहीं मनाई..कभी …आप
मनाओगे ना आज मेरे साथ….मेरे दूल्हा बनकर…..?

हां ज़रूर…तुम्हारे इस मादक जिस्म की कसम मैं आज रात वो सुहग्रत
मनऊंगा तुम्हारे साथ …जैसी किसी लड़के ने किसी लड़की के साथ नहीं
मनाई होगी!

साच….? और फिर मेरे गर्भ को भी सींच देना….मैं आपको अपने
जीवन का पहला पुरुष मानकर अपने गर्भ मैं सबसे पहले आपके
वीरया की बूँद चाहती हूँ……आप दोगे ना?

हां मेरी रानी….क्यों नहीं….

तो फिर मैं आपके लंड के लिए अपना कौमार्या समर्पित करती
हूँ….!पर आप प्यार से करना मेरे साथ….मैं कच्ची कली हूँ
ना…..मेरी चूत बहुत टाइट है…..प्लीज़ धीरे धीरे चोदना मुझे
मेरे राजा……मेरे दूल्हे…..और वो मुस्कुरई…

उसने फिर जल्द ही अपनी पॅंटी उतार दी और पूरी नंगी खड़ी हो
गई…..मेरे तने लंड के सामने. मैने देखा… उसके चूत से रस बह रहा
था. वो पूरी तरह गीली थी. मैने उसे उठाया और बेडरूम मैं लाकर
उसे बिस्तर पर रख दिया. फिर उस पर चढ़ बैठा….उसके बूब्स चूसने
के लिए बेताब था मैं. हम जल्द ही गूँथ गये….दो जवान भूखे
जिस्म…जो आज पहली बार कॉम्क्रीडा करने जा रहे थे…! एक दूसरे पर
जैसे झपट पड़े….मैं उसके बूब्स बुरी तरह चूस रहा था…

उउउफ़फ्फ़…आ..हह..आआ..हह प्लीज़ थोड़ा धीरे….कतो ना…..उूउउइयौर
ज़ोर से चूसो…

दोनो बदन तप उठे. वो बुरी तरह तड़प उठी…..फिर मैने उसकी नाभि
से खेला….तो उसने मेरे सिर को अपने गुप्ताँग की तरफ धकेला….मैं
उसका इशारा समझ गया…तुरंत ही मेरे मुँह ने उसके उभरी हुई चूत
को किस किया और मैं फिर उसकी चूत को चाटने और पीने लगा. उसकी
झिर्री पर अपनी झीभ की नोक फिराते हुए…मैने उसके चूत के होंठ
खोलने चाहे….पर वो बेहद टाइट थे…फिर मैने वो इरादा छोड़ा और उस
झिर्री पर जीब की नोक फिराते हुए जीब को नीचे ले जाने
लगा….गुप्ताँग के नीचे चाटा कुरेदा….किस दिए…और फिर करते करते
जीब की नोक से उसके चुटटर के छेद को कुरेदने लगा. कभी मैं उसे
चाट लेता पूरी जीभ का चपटा भाग रखकर….मुझे मज़ा आ रहा था…वो
और ज़्यादा तड़पति जा रही थी…उसका बदन आब ज़ोर ज़ोर से उछल रहा
था. वो बहुत आवाज़ें भी निकाल रही थी…..पर मेरा घर बहुत बड़ा
है……उस शोर से मेरी कामग्नी और भड़क रही थी…सो मैने उसे और
तड़पाने लगा.

म्‍म्म्मायन्न…म्‍म्माआररर …ज्ज्जााूऊन्नननज्गगीइइइ …. प्प्प्ल्लीआसए.. मैं
उसकी ऊट मे उंगली डाल कर उसे थोड़ी ढीली करने की कोशिश कर रहा
था.. साथ ही जीभ से चाट रहा था.
मैने देखा की उसकी चूत से बहुत पानी निकल रहा है.. वो मेरे तने
हुए लंड को मसालने लगी .. मैं अब उसके पैरों को फैलाकर उसके बीच
मे बैठ गया.. और अपना लंड उसके चूत के दरार मे रगड़ने लगा.. वो
तड़प उठी.. राज.. मेरी चूत मे कुछ हो रहा है.. आग लग गयी
है.. मैने पास रखी पॉंड्स कोल्ड क्रीम की बॉटल से पूरी क्रीम अपने
लंड पर लगाया और उसकी चूत मे क्रीम डाल कर एक उंगली घुसाई..
बहुत टाइट थी उसकी गुलाबी ऊट.. वो सिहर उठी.. कहा दर्द हो रहा
है.. मैने कहा थोड़ा दर्द बर्दाश्त करो मेरी रानी.. अब लंड का मोटा
सूपड़ा उसकी चूत के छेद पर रखा और दबाया.. क्रीम की वजह से
लंड का सूपड़ा फिसलने लगा क्यूकी चूत टाइट थी. मैने फिर से लंड
को टीकाया और कमर टाइट करते हुए एक झटका दिया और वो चीख
पड़ी.. मैने उसके मुँह पर हाथ रखा.. और दूसरा धक्का दिया.. और
उसकी चूत ने खून की पिचकारी चला दी… उसने ज़ोर से मेरे हाथ मे काट
लिया जिससे मेरे हाथ से भी खून निकल आया.. उसकी आँखे बाहर निकल
आई और आँसू बहने लगे.. मैं उसे किस करने लगा…"राज …
निकाआआल्ल्ल लूऊओ…. मैं मर् जाउन्गी… ऊहह..माआआ. बहुत दर्द हो
रहा है…. मैने नीचे देखा मेरी चादर पूरी लाल हो गयी थी.. ये
देख कर मैं रुक गया लेकिन लंड बाहर नही निकाला.. उसका दर्द कम
होते ही मैने और एक धक्का मारा और मेरा पूरा लंड उसकी चूत मे
डाल दिया और उसके होंठो को मेरे होंटो से पकड़ लिया .. वो
गगगगगगगगग…. करने लगी.. मेरी पकड़ मजबूत थी..करीब 3-4 मिनूट के
बाद उसका दर्द कम हुआ और मैने धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर
करना शुरू किया.. उसे भी मज़ा आने लगा.. और 2 मिनूट मे ही वो झाड़
गयी.. मैने स्पीड बढ़ा दी.. अब वो भी मज़े लेने लगी.. ज़ोर से ..
मेरे दूल्हे राजा.. चोदो अपनी दुल्हन को अच्छे से चोदो.. आज तुमने
मेरी चूत फाड़ ही दी.. कितनी लकी हूँ मैं.. मेरी सहेली के जीजा से
तुम ज़्यादा अच्छे हो..आआआहह… ज़ोर से..मैं भी ज़्यादा रुकने की
पोज़िशन मे नही था.. मैने अब तूफ़ानी धक्के मारते हुए पूरे लंड को
बाहर खीच कर धक्के लगाने शुरू किए.. और फिर जड़ तक उसकी गुलाबी
चूत मे डाल कर मेरे लंड का पानी डाल दिया.. और उसकी चूंचियों
को चूमते हुए उसके उपर लेट गया..
हम दोनो तक गये थे.. इसलिए सो गये.. शाम को करीब 4 बजे उठे
.. दोनो बाथरूम गये और नहाए.. फिर वो शरमाती हुई.. अपने घर
चली गयी.. मैने देखा उसे चलने मे काफ़ी तकलीफ़ हो रही थी..
दोस्तो कैसी लगी ये कहानी आपको

raj..
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Hindi Sex Stories By raj sharma मेरी नादान मोहब्बत

Unread post by raj.. » 10 Oct 2014 14:45

मेरी नादान मोहब्बत

हेलो दोस्तो मैं आपका दोस्त राज शर्मा एक और नयी कमसिन कली की चुदाई की कहानी लेकर हाजिर हूँ अब ये फ़ैसला तो आप ही करेंगे कहानी आप सब को कैसी लगी दोस्तो कोमेंट देना मत भूलना
मेरी उम्र करीब 32 साल है मैं एक प्राइवेट कोम्पनी मैं मेनेज़र हूँ एक दिन शाम को ऑफीस से जल्दी घर जा रहा था.रास्ते मे अचानक एक बोल्ल मेरे सिने पर लगी.मेने नजर उठा कर देखा तो एक घर की छत पर एक 15 साल की लड़की ओर एक 10 साल का लड़का खड़े थे,जो की शायद खेल रहे होगे ओर उनकी बोल्ल मुझे आकर लगी.मेने वो बोल उठाई ओर उनकी तरफ फैंकते हुए कहा की ध्यान रखकर खेलो, किसी को लग जाएगी.वो कुछ भी नही बोले.ओर मेरी तरफ देखते रहे.फिर मे जाने लगा.काफ़ी दूर जाकर मेने सोचा की क्या बात हो सकती हे ये बच्चे मुझे बड़े गोर से देख रहे थे.इसी कशमकश मे मेने पलट कर देखा,तो मेने पाया की वो दूर से अभी तक भी मुझे देख रहे थे.फिर मे चला गया.ओर अपने घर आकर अपने कामो मे मशरूफ हो गया.दूसरे दिन मे रात को 9 ब्जे वही से निकला, तो मेने देखा की वो 15 साला लड़की छत पर खड़ी किसी का इन्तिजार कर रही थी.मेने गुज़रते हुए एक बार उसकी तरफ देखा, तो पाया की वो बड़े ही गोर से मेरी तरफ देख रही हे.मुझे एसा महसूस हुआ की शायद वो मेरा ही इन्तिजार कर रही थी.खैर मे चुप चाप वाहा से चला गया.मेने इस बात को नॉर्मल ही लिया.तीसरे दिन ऑफीस मे ज़्यादा काम होने की वजह से मे रात 11 बजे फारिग हुआ.ओर घर की तरफ जाने लगा.तो मेने देखा की वही लड़की छत पर बैठी मेरा इन्तिजार कर रही है.मैं हेरत भरी निगाहो से उसे देखता हुआ चला गया.अब रात को मेरा सोना भी दुश्वार हो गया.सोचता रहा की ये लड़की जिसकी उम्र मुझसे आधी भी नही हे,ये क्यू मेरा इन्तिजार करती है ? आख़िर क्या बात है,ये रोजाना मुझे मोहब्बत भरी निगाहो से क्यू देखती है.ओर ये क्या चाहती हे.इन्ही ख़यालो मे मैं कब नींद की आगोश मे चला गया मुझे पता भी नही चला.इस तरह ये सिलसिला कई माह तक चला मे रोजाना ऑफीस से घर को जाता ओर देखता रास्ते मे वही लड़की अपने घर की छत पर मेरा इन्तिजार कर रही होती.उसे ये भी मालूम था की शुक्रवार को मेरी छुट्टी रहती है इसलिए वो शुक्रवार को इन्तिजार नही करती.मुझे भी पता नहीं क्या हो गया की गुज़रते हुए मे उसकी छत पर ना चाहते हुए भी ज़रूर देखता. एक बार रात को मे ऑफीस से लॉट रहा था तो मेने उस लड़की की छत पर देखा मुझे वो नजर नहीं आई.फिर मेरी नज़र उसके घर के दरवाजे पर पड़ि, मेने देखा की वो दरवाजे पर खड़ी शायद मेरा ही इन्तिजार कर रही थी.मुझे आता देख कर वो मेरी तरफ आने लगी.ओर मेरे पास आकर एक लेटर मेरी तरफ बढ़ाते हुए बोली की ये लो, ये आपके लिए है.मेने पूछा की ये क्या हे ? तो वो बोली की इसे घर जाकर पढ़ना सब समझ मे आ जाएगा.मेने कुछ सोच कर वो लेटर लेलिया.ओर चलने लगा.घर पहुचते ही मेने जल्दी से उस लेटर को खोला ओर देखा, तो मेरी आँखे फटी की फटी रह गई, उसमे लिखा था '' ए अजनबी इंसान, जब से आपको देखा है आप ही के ख़यालो मे गुम हू.जिस दिन आपका दीदार न्ही होता वो दिन मेरी जिंदगी का सब्से बेकार दिन होता है.रोजाना आपके दीदार से अपनी आँखो की प्यास बुझाती हू.ओर आपके दीदार के लिए दिन भर रात के आने का इन्तिजार करती हू.हर वक्त आपके ख़यालो मे गुम रहती हू, खाना पीना खेलना कुछ भी अछा न्ही लगता.इसे मे क्या कहूँ, मोहब्बत का नाम दुगी तो शायद आपको बुरा लग जाए.की आपकी ओर मेरी उम्र मे बहुत ज़्यादा फरक है.मगर प्यार उम्र को न्ही देखता, दिल को ओर उसके ज़ज्बात को देखता है.मे न्ही जानती की आप मुजसे मोहब्बत करेगे या न्ही मगर मे आपसे बेहद मोहब्बत करने लगी हू.अगर मुझे अपनी मोहब्बत के काबिल समझो तो मेरे लेटर का जवाब ज़रूर देना.ये लेटर पढ़कर मे सोचता ही रह गया, ये नादानी है या प्यार ? वो लड़की अभी तक बच्ची है,फिर उसने ये सब केसे किया क्यू किया.इसी तरह सोचते सोचते मुझे नींद आगाई.ये प्यार न्ही बलकी ये तो बचपना है,नादानी है.मेने सोचा की करू भी तो क्या करूँ.फिर इसमे मुझे अपनी भी कुछ ग़लतिया नजर आई,वो ये की क्यू मे रोजाना वाहा से गुज़रता हू.ओर क्यू मेरी नज़र उसे देखती है.मुझे अपने उपर सरमींदगी महसूस हुई.फिर मेने सोचा की इसको समझना चाहिए.मेने एक जवाबी लेटर लिखा जिसमे मेने उससे अकेले मे मिलने की ख्वाहिश का इज़हार किया.वो पढ़कर बहुत खुश हुई.ओर मिलने को राज़ी हो गई.एक पार्क मे हम दोपहर के वक्त मिले.मेने उसे कहा की देखो अभी तुम बहुत छोटी हो, तुम्हारी इन सब चीज़ो की उम्र न्ही है.तो वो बोली की प्यार उम्र न्ही देखता.मेने कहा की जिसे तुम प्यार का नाम देती हो वो प्यार न्ही, बलकी नादानी हे, बचपना है.वो बोली की आप मुजसे प्यार करते है या न्ही मे न्ही जानती, मगर मे आपसे अपनी जान से ज़्यादा मोहब्बत करती हू.मेने उसे हर तरीक़े से समझने की कोशिशे की मगर वो कम उम्र लड़की मेरी हर बात का जवाब देकर मुझे खामोश कर देती.आख़िर मे मेने कहा की आज के बाद मे उस रास्ते से न्ही गुजरगा, जहा तुम रहती हो.वो बोली की मे फिर भी इन्तिजार करूगी.फिर वो चली गई.ओर मे भी घर आ गया.मे हर वक्त यही सोचता रहता की इसकी नादानी इसकी जिंदगी बर्बाद कर देगी, ये बच्ची समझने के लिए बिल्कुल तय्यार न्ही.मे कई दिन तक उस रास्ते से न्ही जाता जहा पर उसका घर आता था.फिर मेरे एक दोस्त ने एक दिन मुजसे कहा की यार घर जाते हुए मे रास्ते मे एक लड़की को छत पर उदास उदास बैठा देखता हू,वो रोजाना जेसे किसी के इन्तिजार मे आँखे बिछाए बैठी रहती है.रात को 12 ब्जे तक वो एसे ही अपने घर की छत पर बैठी नीचे देखती रहती है.ये सुनकर मेरा दिल पासिज़ गया, ओर आँखो से आँसू बहने लगे.मे समझ गया की ये वो ही नादान लड़की हे, ओर वो मेरा इन्तिजार करती रहती है.उस दिन मे भी उसी रास्ते से निकला, मुझे आता देख कर वो खुशी से झूमने लगी.मेने उसकी उदास आँखो मे एक नई चमक देखी.उस मंज़र को मे बयान न्ही कर सकता की उसकी खुशी का आलम क्या था.मेने एक नजर देखा फिर नज़रे नीची करके चला गया.मगर ये सारा मामला मेरा पीछा न्ही छोड़ रहा था.बार बार ना चाहते हुए भी ख़याल उसकी तरफ चले जाते.दूसरे दिन मे स्कूटेर प्र कही जा रहा था, ओर इन्ही ख़यालो मे गुम सोचता हुआ जा रहा था, की अचानक एक टॅक्सी से टकरा गया.ओर मेरा एक हाथ ज़ख्मी हो गया.दर्द ज़्यादा होने की व्जाह से डॉक्टर ने हाथ पर पट्टी बाँध दी थी.दूसरे दिन मे रात ऑफीस से उसी रास्ते से गुजरा, तो देखा की वो लड़की छत पर उसी तरह


बैठी है.उसकी नज़र मेरे हाथ पर पड़ी, जिसपर पट्टी बँधी हुई थी.वो दौड़कर नीचे आई.ओर चुप चाप मेरे पीछे पीछे चलने ल्गी.फिर एक सुनसान जगह देखकर उसने कहा की रुकिये तो………… मे रुका.उसने पूछा की ये चोट केसे आई.मेने कहा की कल आक्सिडेंट हो गया था.ये सुनकर उसके चहरे का रंग उड़ गया.ओर बोली की ज़्यादा चोट तो न्ही आई ? तो मेने गुस्से मे कहा की ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है.ओर मे गुस्से मे जल्दी जल्दी कदम बढ़ाता हुआ चला गया.मेने महसूस किया की वो रोटी हुई वापस चली गई.मुझे घर जाकर अपनी बात का बेहद दुख हुआ.मेने सोचा की यार मेने क्यू उस मासूम लड़की का दिल दुखा दिया, मुझे एसा न्ही करना चाहिए था.फिर मेने एक लेटर उसके नाम लिखा जिसमे मेने उससे कल वाली बात की माफी माँगी,ओर सोचा की कल ऑफीस से वापस आते वक्त उसे देदुगा.दूसरे दिन जब मे ऑफीस से उस रास्ते से गुजरा, तो ये देख कर मेरे होश उड़ गये की उस लड़की के हाथ पर भी पट्टी बँधी हुई थी.मे कुछ सोचता हुआ कुछ दूर गया, मेने पीछे किसी के कदमो की आहट सुनी.पलट कर देखा तो वो लड़की खड़ी थी.मेने उससे पूछा की ये तुम्हारे हाथ को क्या हो गया ? तो वो बदी मासूमियत से बोली की मेरी वजाह से आपका आक्सिडेंट हुआ, इसी लिए आज मेने अपने हाथ को भी ज़ख्मी कर लिया.ये सुनकर मेरे तो हवाश ही जाते रहे.फिर वो बोली की इन हाथो को मेने इसलिए भी ज़ख्मी किया हे ताकि मुझे अपने महबूब की तकलीफ़ का अहसास हो सके.मेने उससे कहा की ये पागलपन हे, वो बोली की न्ही ये सच्चा प्यार हे.फिर मे चला गया.पर रात भर उसकी दीवानगी मेरी आँखो के सामने घूमती रही.मे क्या करू इस नादान लड़की का ? इसको हर तरीक़े से समझा कर देख लिया मगर इसके दिमाग़ मे कुछ आता ही न्ही.अगर ये इसी तरह करती रही तो, मे भी बदनाम हो जाउन्गा ओर इसका तो पता न्ही क्या होगा.मेने ये फेसला किया की इसके मा बाप से बात करनी चाहिए शायद वो इसकी बीमारी का इलाज़ कर सकें.मे हिम्मत करके दिन मे उसके घर गया ओर उसके अम्मी पापा से हाथ जोड़कर कहने लगा की आप मुझे ग़लत मत समझना, ओर मेरी बातो का बुरा मानने के बजाय उस पर गोर करना.फिर मेने उनको सारी कहानी बता दी.मेरी बाते सुनने के बाद उसके पापा बोले की शुक्रिया जनाब, की आपने हमें वक्त पर सब कुछ बता दिया, वरना हम तो बदनाम हो जाते.वो मेरी बतो का बिल्कुल बुरा न्ही माने.ओर मुझे बा इज़्ज़त विदा किया.मुझे दरवाजे तक पहुचा कर वो अंदर गये ओर जाते ही उन्होने उस लड़की को बुरी तरह से मारना सुरू किया.वो लड़की बे तहाशा रो रही थी, ओर कह रही थी की पापा आप मुझे जान से मार दे मगर मे उस शख्स से मोहब्बत करती रहूगी.ओर उसके मा बाप उसे मारते रहे.मे अपने घर चला गया.मगर मुझे बहुत ज़्यादा दुख हो रहा था, की मे कैसा जालिम हू की जो मेरे लिए अपनी जान की भी फ़िक़र न्ही कर रही मे उसे उसके मा बाप से पिटवा रहा हू, जेसे की मे ही उसे अपने से मोहब्बत करने की सज़ा दिला रहा था.मेरा दिल बहुत दुखी हुआ.लेकिन मे भी तो क्या करता, वो लड़की जिसकी उम्र मुजसे आधी है जो मेरी मोहब्बत मे पागल हुए जा रही थी.उसे रास्ता दिखाने के लिए, ओर उसे इस बीमारी ओर नादानी से बचाने के लिए मजबूर होकर मुझे ये कदम उठाना पड़ा.खैर फिर मेने उस रास्ते से गुज़रना ही छोड़ दिया.काफ़ी दिन गुजर गये.मेरे घर वालो ने मेरी मँगनी भी कर दी, मगर ना जाने क्यू वो नादान लड़की का मासूम चेहरा हर वक्त मेरी नज़रो के सामने घूमता रहता.रात को सोता तो उसका मेरी खातिर अपने हाथ को ज़ख्मी करना, मेरी खातिर अपने घर वालो से मार खाना ये सब मुझे याद आता, ओर मेरी आँखो से आँसू बहने लगते.क्या कोई किसी से इतनी मोहब्बत कर सकती हे जितनी उस नादान ने मुजसे की.ना जाने क्यू मेरा दिल उसकी तरफ खिचने लगा.उसके लिए मेरे दिल मे भी इतना सारा प्यार उमड़ आया.कुछ भी हो उस लड़की ने मुजसे सच्चा प्यार किया है.इसी तरह सोचते हुए दिन गुजरने लगा.ओर मे ना चाहते हुए भी उस नादान की तरफ खिचता चला गया..ओर मे भी उससे मोहब्बत करने लगा.एक दिन मे ऑफीस मे काम कर रहा था, इतने मे उसी लड़की का बाप मुझे तलाश करता हुआ आया, ओर बोला की बाबूजी जरा बाहर आना.मे डर गया की क्या हो गया, ओर मे उसके साथ बाहर गया.बाहर आकर उसने बताया की मेरी बेटी को ना जाने केसे पता चल गया की आपकी माँगनी हो गई हे, उसे इस बात का बहुत ही ज़्यादा सदमा पहुचा.ओर उसने खाना पीना सब छोड़ दिया, इस वजाह से उसकी हालत बहुत ज़्यादा खराब हो गई.हमने उसे हॉस्पिटल मे अड्मिट करवाया है.बेहोशी मे आपको ही याद कर रही हे, डॉक्टर्स ने कहा की इस शख्स का यहा होना बेहद ज़रूरी है, वारना इसकी हालत ठीक न्ही हो सकेगी.ये बाते सुनकर मे फॉरन उनके साथ हॉस्पिटल गया.ओर अपनी उस नादान आशिक़ा को देखा.वो बेहोश थी.उसकी हालत देख कर मेरी आँखो मे आँसू आ गये, ओर मेने सोचा की अगर मेने इतना ज़्यादा चाहने वाली इस नादान महबूबा का दिल तोड़कर किसी ओर से शादी की, तो मे खुद कभी भी अपने आपको माफ़ न्ही कर पाऔगा.ओर मे बेतहाशा रोने लगा.उस लड़की के मा बाप मुझे तसल्ली देने लगे.फिर मे चला गया.ओर मेने अपनी मंगेतर को फ़ोन किया ओर उसे बुलाया.वो फॉरन चली आई.हमने काफ़ी देर तक बाते की, ओर मेने उसे सारी कहानी बताई ओर पूछा की अब तुम ही बताओ मे क्या करू ? इस नादान की मोहब्बत मुझे अपनी करीब खींचती है.इसका ये हाल मुजसे देखा न्ही जाता.अगर मेने इससे मूह मोड़ा तो शायद ये मर जाएगी.ओर अगर मेने मँगनी तोड़ी तो घर वाले न्ही मानेगे.मे क्या करूँ ? तो मेरी मंगेतर बोली की आप फ़िक़र ना करें सब ठीक हो जाएगा.इस लड़की से ज़्यादा मोहब्बत करने वाली आपको पूरी दुनिया मे न्ही मिलेगी.शायद यही आपके लिए बनी है, ओर इसे इस बात का अहसास भी हो चुक्का हे.ये लड़की नादान न्ही हे बलकी ये तो बहुत बड़ी आशिक़ा है.ओर इस तरह के आशिक़ बहुत ही क्म पेदा होते है.आप मँगनी की फ़िक़र ना करें, कोई बहाना करके मे खुद मँगनी तोड़ दुगी.मे उसकी बाते सुनकर कुछ संभला.ओर उसका बहुत शुक्रिया अदा किया.फिर मे उसे लेकर हॉस्पिटल गया.वहाँ उसने उस नादान आशिक़ा को देखा, ओर उसके पास जाकर उसके कदम चूमे,ओर रोने लगी.मेने कहा की क्यू रो रही हो ? तो मंगेतर बोली की मेने इसकी आँखो मे प्यार का वो समंदर देखा हे, जो लैला की आँखो मे मजनू के लिए था, ये बात मेने किताब मे पढ़ी थी.फिर मेने अपनी मंगेतर को रुखसत किया.ओर उस लड़की के मा बाप से बात की.'' अगर आपको कोई एतराज़ न्ही हो तो मे आपकी इस लड़की से शादी करना चाहता हू.ये सुनकर लड़की का बाप बोला की साहब हमें अपनी बेटी की खुशी चाहिए ओर ये दुनिया मे सिर्फ़ आपके साथ रहकर ही खुश रह सकती है.मेने उनसे अपने लिए उस लड़की का हाथ माँग कर रिश्ता पक्का कर दिया.अब मूज़े सिर्फ़ इस बात की फ़िक़र थी की मे अपने घर वालो को केसे मनाउन्गा .2 दिन बाद मेरी मा का फ़ोन आया वो बोली की तेरी मँगनी तेरी मंगेतर ने तोड़ दी हे, वो कहती हे की वो किसी ओर लड़के से प्यार करती हे.ये सुनकर मेरी आँखो से खुशी के आँसू छलक उठे.फिर मे अपने मा बाप के पास गया ओर उनको मेने पूरी बात बताई.पहले तो वो तेयार न्ही हुए की लड़की की उम्र ज़्यादा क्म है.ओर मेरी उम्र उससे कई ज़्यादा.पर मेने उनको उसकी चाहत के बारे मे बताया, तो वो आख़िर मान गये.आख़िर मेरी शादी उस नादान लड़की से तय हो गई.अभी उसकी उम्र इस वक्त 17 साल की थी ओर मेरी 30 साल.धूम धाम से हमरी शादी भी हुई. वो इतनी खुश थी की जेसे उसे दुनिया की सब्से बड़ी दोलत मिल गई है.लोग हमारे जोड़े को देख कर बड़े हैरत जदा थे.मेने ये फेसला किया की मे एक साल तक सुहाग रात न्ही मनाउन्गा, क्यू की वो अभी क्म उम्र है.इस एक साल मे उसने मेरी जो खिदमत की मे ब्यान न्ही कर सकता.जिस तरह की बीवी के बारे मे मे सोचता था, उससे कई गुना ज़्यादा बेहतर मेने उसे पाया.आज मे अपने आपको बेहद खुश नसीब समझता हू, कि मुझे ऐसी बीवी मिली.मेरी ओर उसकी पसंद बिल्कुल एक है.हर चीज़ मे हमरी पसंद मिलती हे.चाहे खाना पीना हो, कपड़े खरीदना हो या घूमना फिरना हो, हर जगह हमरी पसंद मिलती है.आज मुझे इस बात का पूरा पक्का य्कीन हो गया है कि यही वो लड़की हे जिसे मेरे लिए बनाया गया है.उसने मुजसे इतनी मोहब्बत की है जितनी किसी ने किसी से ना की हो.हम एक पल की जुदाई भी बर्दाश्त न्ही कर सकते.एक दिन मेने उससे पूछा की तुमने अपने हम उम्र लड़को के बजाय मुझे क्यू पसंद किया ? तो उसने बड़ी मासूमियत से ये जवाब दिया की मे जब भी आपको देखती थी, मुझे दिल मे ये अहसास होता था की यही वो इंसान हे जिनको मेरे लिए बनाया गया हे.इतना कहकर वो चुप हो गई.ओर मे उसकी तेज़ नज़र ओर रूहानी मोहब्बत पर हैरत जदा होने लगा.दोस्तो, मेने अपनी शादी के बाद 1 साल तक बीवी के होते हुए भी सब्र किया, ओर उसके साथ सुहाग रात न्ही मनाई.उस 1 साल मे हम दोनो एक दूसरे के दिल के इतने करीब आ गये की एक दूसरे की चाहत मे डूब गये.एक दूसरे को अछी तरह समझने मे कमियाब रहे, फिर जाकर हमने अपनी सुहाग रात मनाई.क्यू की मे न्ही चाहता था की मे अपने मज़े के लिए अपनी जान से ज़्यादा चाहने वाली बीवी को इस कम उम्र मे तकलीफ़ दू.इसी व्जाह से हमने 1 साल सब्र किया.ओर 1 साल के बाद ज्ब हम करीब से मिले, उस वक्त दिलो मे जो अहसास ओर जो मज़ा पाया, वो मज़ा जल्द बाजी करके न्ही पा सकते थे
मुझे आज भी याद है हमारी सुहाग रात के दिन जब वो रात को मेरे पास आई तो मैं उसके मासूम चेहरे को देखता ही रह गया उसने घूँघट डाल रखा था और उसके हाथ मैं दूध का एक गिलास था उसने दूध का गिलास मेज पर रख दिया और मेरे पैर पूजने के लिए जैसे ही झुकी मैने उसे अपने सीने से लगा लिया आज एक साल की प्यास मैं अपने प्यासे सिने से लगाकर बुझा लेना चाहता था मैं बेतहासा उसके चेहरे को चूमने लगा मेरे होंठ उसके होंठो से चिपक गये ओर मेरी जीभ उसके मुँह मैं किलोल करने लगी उसने भी मुझे अपनी छाती से चिपका लिया ओर उसके हाथ मेरी पीठ पर कसते चले गये अब उसने मेरे चुम्बनो का जवाब देना शुरू कर दिया था..मै अपनी जीभ उसके मुह के अन्दर घुमाया ..तो उसने भी अपनी जीभ मेरे मुह मे डाल दी उसकी गरम जीभ..अआह्ह..मै चूसने लगा.. . तेज़ सांसे लेने से उनकी भापूर गुदाज़ और उन्नत छाती ऊपर नीचे हो कर मेरे अन्दर के उबलते लावे मे और उबाल पैदा कर रही थी . मैंने अपनी पैंट, कमीज़ और बनियान उतर दी . उसने आँख खोलकर मेरी बालों से भरी छाती को देखा..फ़िर मैंने उसके सीने से उसकी साड़ी का आँचल हटा दिया..और उसके उभारों को ब्लाउज के ऊपर से सहलाया..मै अभी भी उसका चुम्बन कर रहा था...उसके मुह से सिस्कारी निकली..आह्ह इश स्.स्.स्.स्.स्.स्...और उसने साड़ी पूरी निकलने मे मेरी मदद की
मैं अपनी इस मासूम पत्नी की अदाओं पर कुर्बान हो गया अब मेरा एक हाथ ठोस चुचियो पर था मैं धीरे धीरे उन्हें दबाने लगा और मेरा दूसरा हाथ उसके मांसल चूतड़ को सहलाने लगा उसका शरीर तपने लगा मैने उसका ब्लाउज उतार दिया ब्रा मैं से झाँकती उसकी चुचियाँ मानो हिमालय की दो पर्वत श्रंखलाएँ खड़ी हों मैं दीवाना हो चुका था मैने अपने मुँह से चुचियो को चूमना शुरू कर दिया अब उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलना शुरू हो चुकी थी आहह मेरे राज मैं आसमान मैं उड़ रही हूँ ये तुमने मुझे क्या कर दिया है मेरे अंदर इतनी आग क्यू जल रही है ओह्ह्ह्ह्ह्ह्हराज मेरे राज्ज्जज्ज मेरी इस आग को बुझाओ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह वरना ये आग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग मुझे जला देगी अब मैने उसे बेड पर लिटा दिया उसके पेटिकोटऔर पॅंटी उसके बदन से निकाल कर एक तरफ फैंक दिए मैने उसकी चूत को चूमना शुरू किया तो वह तड़पने लगी मैने अपनी जीभ उसकी चूत मैं घुसा दी मेरी जीभ ने जैसे उसकी चूत किलोल करनी शुरू की उसने मेरे सिर को अपने हाथो से पकड़ लिया ओर अपनी चूत पर दबाने लगी वह मासूम कली से फूल बनने की राह पर चल पड़ी थी वह बुरी तरह तड़प रही थी अब मैने भी देर करना उचित नही समझा मैं उसे और तड़पाना नहीं चाहता था मैं उसके उपर आ गया उसकी चूत भट्टी की तरह जल रही थी इस भट्टी की आग को सिर्फ़ एक ही चीज़ बुझा सकती थी वो था हर औरत का प्यारा हर औरत का लाड़ला वो था लंड उसकी चूत बुरी तरह लंड की याद मैं आँसू बहा रही थी तड़प रही थी लंड को उस पर दया आनी ही थी मैने अपना लंड निकाल कर उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया वह बुरी तह से तड़पने लगी सिसकारिया निकालने लगी अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरे राज्ज्जज्ज मुजसे अब और बर्दास्त नहीं होता ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह राज्ज्जज्ज्ज
मैं मार जाउन्गि प्लीज़ मेरी इस आग को बुझा दो कुच्छ करो राज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज
मुझे अब और मत तडपा ओ अब मुझसे सहन नहीं होता मैने उसकी चूत पर अपने लॅंड का निशाना साधा ओर धीरे से एक धक्का मारा लंड का मुँह उसकी चूत मैं जाकर फँस गया उसके मूह से एक जोरदार चीख निकली और वह बुरी तरह से सिर को इधर उधर पटकने लगी उसने मुझे दूर हटाने की कोशिश की लकिन मैने उसे अपनी बाँहो मैं जाकड़ लिया मैने अपने लंड का दबाब थोडा सा ओर बढ़ाया मेरा लंड उसकी छूट मैं 2इंच घुस तक घुस चुका था उसकी दर्द की वजह से आँखे बाहर निकल आई मैने उसकी चुचियो को सह लाना शुरू किया एक चुचि का निप्पल अपने मुँह मैं लेकर चूसने लगा और एक हाथ से उसकी दूसरी चुचि को हल्के हल्के दबाने लगा थोड़ी देर मैं उसका दर्द कम हो गया मैने उसके होंठो को अपने होंठो मैं ले लिया और उन्हे लोलीपोप की तरह चूसने लगा ओर दो लगातार धक्को मैं लंड उसकी चूत मैं जड़ तक पहुँचा दिया लकिन दर्द से उसका चेहरा सफेद पड़ गया मैने उसकी चुचियो को सहलाया और उन्हे चूसने लगा और लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा थोड़ी देर मैं उसको भी मज़ा आने लगा हाय मेरे राज तुमने तो मुझे मार ही डाला था मैने उसे समझाया पहली बार जब लंड चूत मैं अपना रास्ता बनाता है तो थोड़ा दर्द होता ही है अब मैने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी वह भी पूरा साथ देने लगी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरे राज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज मुझे जिंदगी भररर ऐसे हीईईई प्यार करते रहो आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह राज मैं उड़ रही हूँ राज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज मुझे चोदो और ज़ोर से छोड़ो आहह मैं नहियीईईईईईईईईईई जानती थी इसमे इतना मज़ा है आहह मेरे राज आहह मैने कहा मेरी जान मैं तुझे हमेशा ऐसे ही प्यार करता रहूँगा हम दोनो की चुदाई अब पूरे उफान पर थी कोई भी हार मानने को त्य्यार नहीं था हम दोनो एक दूसरे को चूमते सहलाते प्यार की दुनियाँ मैं बहुत आगें बढ़ चुके थे अपनी मंज़िल की ओर जा रहे थे और हमें मंज़िल मिली एक चरम आनंद के साथ दोनों एक साथ मंज़िल पर पहुँचे और एक दूसरे की बाँहो मैं शांत होकर लेट गये इस तरह हमने उस रात पाँच बार अलग अलग आसनो से चुदाई की दोस्तो सुहाग रात का हमने भरपूर मज़ा लिया
.आज हमारी शादी को 5 साल हो चुके हैं हमारे एक लड़का भी हे जो 2 साल का हे.बहुत ही प्यारा, बिल्कुल अपनी मा जेसा.ओर आज भी हम दोनो मिया बीवी मे उतनी ही मोहब्बत बरकरार है जितनी शादी से पहले थी.इन 5 सालो मे कभी भी मेरी बीवी ने मेरा दिल न्ही दुखाया.ना कभी मेने उसे डांटा.ये है मेरी नादान मोहब्बत जिसने मुझे अपने इश्क़ मे अपनी चाहत मे उम्र भर के लिए बाँध लिया. मेरी कहानी अगर आपको पसंद आए तो अपनी बीवियो को ज़रूर सुनाना. ओर मुझे मेल्स के ज़रिए बताना.
दोस्तो कहानी कैसी लगी अब इस कहानी का यहीं एंड होता है फिर मिलेंगे एक ओर नयी कहानी के साथ

(¨`·.·´¨) ऑल्वेज़
`·.¸(¨`·.·´¨) कीप लविंग &
(¨`·.·´¨)¸.·´ कीप स्माइलिंग !
`·.¸.·´ -- राज शर्मा --