आरती की वासना compleet

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rajaarkey
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Re: आरती की वासना

Unread post by rajaarkey » 22 Oct 2014 00:09

आरती बेड पे लुढ़कते हुए लेट गयी और जसवंत आरती की टाँगें उठाके अपने कँधों पे रखते हुए बोला, “मेरी छिनाल आरती... अब तू देखती जा मेरे लंड का कमाल... चूत खोल राँड... बहनचोद रंडी... आज फिर तुझे जी भरके चोदूँगा।” आरती अपने हाथों से चूत खोलके बोली, “यह ले जसवंत खोल दी मैंने अपनी चूत तेरे लंड के लिए... आजा साले... अपनी छिनाल की चूत चोद अपने राजपुताना लौड़े से और दिखा दे फिर से तेरे लंड का कमाल... कुत्ते अपनी छिनाल कुत्तिया की चूत मस्ती से चोद।” जसवंत आरती की चूत का दाना रगड़ते हुए बोला, “साली रंडी आरती... तेरी चूत अभी भी कितनी टाईट है... लगता है जैसे कुँवारी चूत है... जब तुझे पहली बार चोदा तब अगर मुझे मालूम नहीं होता कि पूजा तेरी बेटी है... तो मुझे लगता कि मैं किसी २०-२२ साल की लड़की को ही चोद रहा हूँ। इस उम्र में इतनी टाईट चूत मिलना मतलब लॉटरी लगना है रंडी...।” आरती तो मदहोशी से आँखें बँद करके सिसकरियाँ लेते हुए अपने मम्मे मसलने लगी और कमर उठा के जसवंत के हाथ पे चूत दबाते हुए बड़बड़ायी, “साला... कुँवारी बोलता है... मैं... साली चुदाई का कोई मौका नहीं छोड़ती.... कुँवारी...?” और फिर हँसने लगी और और हँसते हुए ही आगे बोली, “शायद तेरे जैसा तगड़ा राजपुताना लौड़ा नहीं मिला... इसलिए यह टाईट है... हुच्च... और शायद इसी वजह से मैंने खुद को और साथ में अपनी हरामी बेटी को भी तुझसे चुदवाया ना?”

जसवंत ने एक हाथ से अपना लंड आरती की चूत पे रखा और फिर दूसरे हाथ से आरती के दोनों हाथ पकड़ के ऊपर कर के बोला, “आरती तू हमेशा खुश रहेगी मेरी रंडी बनके... बहनचोद... तेरी जैसी मस्त और बिंदास औरत को पैर की जूती बना के ही चोदना चाहिए। साली... इतने साल से तेरी गरम चूत को जिस तगड़े लंड की तालाश थी वो अब खतम हो गयी... मेरी रंडी बनके तू ने वो तालाश खुद खतम की है। आज के बाद तुझे कभी भी प्यासी नहीं रहना पड़ेगा मेरी छिनाल... तू चाहेगी तो एक साथ दो-दो मर्द तो क्या.... तुझे एक साथ पाँच-पाँच मर्दों से चुदवाऊँगा।”

आरती अपनी चूत ऊपर उठा के जसवंत के लंड से भिड़ाती हुई बोली, “डाल दे अपना लौड़ा मेरी चूत में और चोद के मेरी चूत की गरमी निकाल दे... अब तेरे जैसे मस्त लौड़े से मेरी चूत चुदेगी तो मेरी प्यास ज़रूर मिटेगी... जसवंत अब आज के बाद मैं और मेरी बेटी पूजा तेरी रंडियाँ बन गयी हैं... तू जब.. जितना और जिससे भी चाहे हमें चुदवा।”

जसवंत ने अपना लंड आरती की चूत पे रख के आरती की चूत का मुँह खोला और फिर अपना लंड अंदर घुसेड़ने लगा। उसका लंड ज़रा मुश्किल से अंदर घुस रहा था। जैसे-जैसे जसवंत ने ज़ोर लगाया, उसका लंड आरती की चूत में घुसने लगा। आरती की चूत एक दम गीली हो गयी थी, इसलिए फिर १-२ धक्कों में जसवंत का पूरा लंड आरती की चूत में घुस गया। लंड पूरा घुसने के बाद जसवंत आरती के हाथ छोड़ के उसके निप्पल चूसते हुए आरती को दनादन चोदने लगा। आरती भी नीचे से कमर उठा-उठाके चुदवाने लगी और जसवंत से बोली, “हाँ डाल साले... और अंदर पेल लंड... चोद मुझे... जी भर के मेरी चूत चोद... ऊफ्फ्फ्फ्फफ क्या मस्त लंड है तेरा भोंसड़ी के... बेरहमी से चोद मेरी चूत।” जसवंत भी ताव में आ के आरती की चूत चोदते और मम्मे मसलते हुए बोला, “ले साली... ले... आज तुझे रंडी की परिभाषा पता चल जायेगी। बहनचोद साली... गरम माल है तू और तेरी बेटी... कसम से… ऐसी मस्त चूत नहीं चोदी। हरामी तू अगर शादी के पहले मिलती तो तुझे अपनी बीवी बनाता लेकिन अब तुझे मेरी राँड बनना होगा।”

जसवंत अब मस्ती में ज़ोर-ज़ोर से आरती को चोदने लगा। वो धक्कों पे धक्के मारते हुए पूरा लंड अंदर घुसाते हुए चोद रहा था। आरती भी नीचे से उसके धक्कों के जवाब में अपनी कमर उठाके चुदवाती हुई बोली, “जसवंत हाँ ऐसे ही मेरे मम्मे दबाते हुए और निप्पल चूसते हुए मुझे चोद... चोद और चोद तेरी यह राँड बड़ी भूखी है... चूत फाड़ दे अपनी रंडी आरती कि... मेरे कुत्ते राजा... तू कहेगा तो मैं कुत्तों से भी चुदवाने को तैयार हूँ।” जसवंत बारी-बारी से उसके मम्मे मसलते और चूसते हुए बोला, “तू अब मेरी रखैल बनके रहेगी... ले साली हरामज़ादी चूत... चुदवा ऐसे ही... साली बेटीचोद औरत... तुझे तो दिन रात चोदना चाहिए... यह ले और ले छिनाल... चुदवा ले मेरे राजपुताना लौड़े से बहनचोद...।” इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

जसवंत का लंड आरती की क्लिट पे रगड़ते हुए चूत में बहुत गहरायी तक जाके टक्कर मार रहा था। जसवंत के धक्कों का जवाब आरती नीचे से अपने धक्कों से दे रही थी और जसवंत के धक्कों से आरती का पूरा बदन उछल रहा था। जसवंत ने थोड़ा पीछे होके धक्का मारा तो आरती के सीने की हलचल देखके खुश हुआ। जसवंत के धक्कों से आरती की चूचियाँ थर-थरा जाती थीं। जिस ताल से वो आरती को चोद रहा था उसी लय से आरती के मम्मे उछल रहे थे। आरती जसवंत का चेहरा नीचे करके उसे किस करते हुए बोली, “हाँ जसवंत मैं तेरी रंडी रखैल हूँ और ऐसी माँ हूँ जिसने अपनी जवान बेटी को तुझसे और बाहर उस हरामी मंगल से खुद चुदवाया है... पर मैं क्या करती... एक तो मैं गरम औरत हूँ और मेरी बेटी भी कम नहीं है... वो छिनाल तो इतने दिनों से २-२ लड़कों से रोज़ –रोज़ चुदवा रही है... मैंने तो कभी-कभार ही दो-दो मर्दों से एक-साथ चुदवा पाती हूँ। अब बस तू मुझे ऐसे ही चोदता रह... और कभी अपनी इस रखैल को प्यासी मत रखना।”

जसवंत ने जोश में आरती के मम्मे मसलते हुए एक अँगुली आरती की गाँड में डालके आरती को चोदते हुए बोला, “नहीं मेरी जान... आज के बाद तू कभी प्यासी नहीं रहेगी... अब तुझे जब भी मेरा लंड चाहिए मेरे पास आ और मैं तुझे चोदके तेरी प्यास बुझाऊँगा।” फिर १५ मिनट तक उनकी चुदाई बड़ी ज़ोरों से चली। जसवंत ने आरती का पूरा बदन चोद-चोद के तोड़ के रख दिया था। जब उसे एहसास हुआ कि वो झड़नेवाला है तो वो अपना लंड आरती की चूत के अंदर ही अंदर ऐसे घुमाने लगा जैसे कि पेंच कस रहा हो। फिर एक बार कसके धक्का मारते हुए बोला, “हरामी रंडी... साली अब मैं झड़ने वाला हूँ तेरी गरम चूत में... यह ले साली बहनचोद रंडी... तेरी गाँड मारूँ छिनाल... यह ले... और ले... और ले... मेरी रंडी आरती।” आरती भी जसवंत को कसके पकड़के अपनी कमर उठाके चुदवती हुई बोली, “जसवंत साले रंडीबाज... आरती की चूत आज से तेरी अमानत है डीयर... उउउउउफ्फ्फ्फ अब मैं भी झड़नेवाली हूँ जसवंत... मुझे कसके पकड़ और चोद मुझे। ऊउउम्म्म्म... आआआआआआहहहह... जसवंत बड़ा मज़ा आ रहा है तेरी राँड को तुझसे चुदवाके। जी भरके मुझे चोद...।”

अब दोनों ने एक दूसरे को कसके पकड़ लिया और जसवंत भी जितना हो सके उतने ज़ोर से आरती को चोदने लगा। दोनों बहुत सिसकारियाँ भरते हुए चुदाई का मज़ा ले रहे थे। पूरे कमरे में आहहहहहहह... उहहहह... ओफ्फ्फ्फ्फ... उम्म्म्म्म.... और चोद साले... ले मेरी छिनाल... मेरी रंडी.... की आवाज़ें और भारी-भारी साँसों की आवाज़ सुनायी दे रही थी। जसवंत आखिरी बार अपना लंड आरती की चूत की सबसे गहरे भाग में धकेल के झड़ते हुए बोला, “आआआआह मेरी चुदक्कड़ रानी... आरती... मेरी रंडी... मेरी जान... पूरा पनी तेरी चूत में भर रहा है... मैं इस राजपुताना लंड के पानी से तेरी चूत की आग शाँत कर रहा हूँ मेरी छिनाल...।” जब जसवंत के पानी का एहसास आरती को हुआ तो उसकी चूत भी पिघल गयी और वो अपनी कमर उठा के जसवंत के लंड को ज्यादा से ज्यादा अंदर लेती हुई बोली, “हाँ चोद जसवंत और ज़ोर से चोद... दे तेरा पूरा पानी मेरी प्यासी चूत को... आआहहहहह जसवंत..... मैं झड़ गयीईईईई राजा... आआआहहहहह कितना सकून मिल रहा है मेरे यार... दे अपना पूरा पानी... मेरी चूत को मेरे राजपुताना चोदू।”

rajaarkey
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Re: आरती की वासना

Unread post by rajaarkey » 22 Oct 2014 00:10

आरती और जसवंत पूरी तरह झड़के शाँत हो गये पर जसवंत अब भी आरती के जिस्म पे लेटा हुआ था और जसवंत ने पूरा लंड आरती की चूत में घुसाया हुआ था। जब जसवंत भी ढीला पड़ा तो आरती की चूत से उन दोनों के चुदाई-रस का मिश्रण हल्के-हल्के बाहर आने लगा। दिल की धड़कन शाँत होने के बाद जसवंत आरती की चूत से लंड निकाल के उसकी बगल में लेट गया। जसवंत आरती को चोद चुका था और दोनों बेहाल पड़े थे। १५- २० मिनट के बाद आरती जसवंत की बाहों में आयी और बालों से भरा जसवंत का सीना हल्के हाथों से सहलाने लगी। जसवंत भी करवट लेके आरती के मम्मे मसलने लगा। फिर आरती का हाथ अपने लंड पे रखते हुर जसवंत बोला, “मेरी जानेमन... अब भी मेरा दिल भरा नहीं है... मेरा लंड फिरसे तुझे चोदना चाहता है... ज़रा मुँह में मेरा लंड लेके उसे गरम कर... ताकि फिर तुझे चोदूँ।” आरती उठके जसवंत का पूरा लंड अच्छी तरह चाट के बोली, “मेरी चूत के राजा.. तूने मुझे इतना तगड़ा चोदा कि मज़ा आ गया पर अब मेरी चूत भी दोबारा चुदाई के लिए तड़प रही है। लेकिन थोड़ा सा रुक जा फिर फ़्रैश होके मुझे चोद... वैसे भी मुझे मंगल से भी चुदवाना है। मेरी बेटी भी तो देखे कि उसकी माँ कैसे चुदासी बन के चुदवाती है।” जसवंत आरती के निप्पल हल्के से खींचते हुए बोला, “बड़ी हरामी चूत है तू... साली... तो अब मुझसे नहीं चुदवाना है... लेकिन मंगल से बेटी के सामने चुदवाना चाहती है तू... बहनचोद तेरी जैसी बेशरम औरत नहीं देखी मैंने... ठीक है चल देखते हैं तेरी मादरचोद बेटी का क्या हाल किया है उस मंगल ने।” इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

आरती के चुदाई के नशे की तरह ही उसका शराब का नशा भी कम नहीं हुआ था। जसवंत लड़खड़ाती हुई नंगी आरती को लेके हॉल में आया। उन्होंने देखा कि मंगल पूजा को कुत्तिया बनाके अब उसकी गाँड मारने के तैयारी में है। दोनों बेशरम माँ बेटी एक दूसरे को देख के मुस्कुराईं। माँ और बेटी आपस में खुल चुकी थीं इसलिए दोनों में से किसी को भी शरम नहीं थी। आरती पूजा के सामने जाके उसे किस करने लगी। मंगल तब पूजा की गाँड पे अपना लंड ज़ोर ज़ोर से रगड़के बोला, “साली रंडी की छिनाल बेटी... आज तू सही मायने में रंडी बनेगी। साली राजेश और वैभव तुझे बराबर चोदते हैं तो फिर हमसे क्या झिझक...? तेरी माँ की चूत पूजा... आज के बाद तू मेरी रंडी बनके रहेगी और तेरी छिनाल माँ जसवंत सर की... समझी?” जसवंत पूजा के मम्मे मसलते हुए ललचाती नज़रों से पूजा को देखते हुए बोला, “क्या मंगल अब तक तूने पूजा को चोदा नहीं? बहनचोद मैंने तो आरती को चोद भी दिया और अब दूसरे राऊँड की तैयारी करने आया था। यह बहनचोद आरती अब तुझसे अपनी बेटी के सामने चुदवाना चाहती है।” इसके पहले कि मंगल कुछ जवाब देता, आरती पूजा के मम्मे मसल रहे जसवंत के हाथ को हल्के से मारते हुए हँसते हुए बोली, “साले कमीने... तूने अभी इस पूजा की माँ को इतनी चोद-चोद कर रंडी बना दिया... अब फिर बेटी को देख रहा है... हरामी जितनी कमीनी मुझे बोलता है... उतने ही कमीने तुम दोनों हो।”

आरती और जसवंत की बात सुनके मंगल ने पूजा को छोड़ा और आरती को धक्का देके सोफ़े पे गिराते हुए खुद सोफ़े पे चड़ गया और अपना लंड उसके मुँह में डालते हुए बोला, “छिनाल चूत... बहनचोद... साली एक तो तुझे हमने अपनी रंडी बनाया और हमको ही कमीना बोलती है? कुत्तिया... साली बेवड़ी... नशे में अपनी औकात मत भूल... तू और तेरी बेटी हमारी रंडियाँ हो। तुझे सर चोदने के लिए ले गये तब तेरी बेटी की चूत मैंने मारी और अब गाँड मारने जा रहा था। अब तू आयी है तो तुझे भी चोदके अपनी रंडी बनाऊँगा और जसवंत सर पूजा को चोदके उसे अपनी छिनाल बनायेंगे।” जसवंत नंगी पूजा को अपनी गोद में बिठा के उसके बदन से खेलते हुए आरती से बोला, “हरामज़ादी राँड... तेरी बेटी भी एकदम जवान और हसीन है... वैसे तुम माँ बेटी नहीं बल्कि एक दूसरे की बहन लगती हो... देख तेरी मादरचोद बेटी कैसे अपनी गाँड मेरे लंड पे रगड़ रही है। पूजा... तेरी माँ की चूत... मादरचोद चूत... तेरी माँ को मंगल कुत्तिया बनाके उसकी गाँड मारेगा... तू सोफ़े पे बैठके अपनी माँ के मम्मे मसलेगी और तेरी छिनाल माँ तेरी चूत चाटते हुए अपनी गाँड मरवायेगी और तू... हरामी मादरचोद रंडी... मेरा लंड चूसेगी... समझी?” पूजा यह सुनके खुश हुई कि उसकी माँ उसकी चूत चाटने वाली है और वो तुरँत हाँ बोली। जसवंत पूजा को खड़ी करके बोला, “मंगल की रंडी... अब चल तू आ मेरे साथ।” जसवंत पूजा को पकड़के मंगल और आरती के पास ले गया और उसे सोफ़े पे बिठा के उसकी टाँगें खोल दीं। फिर आरती को कुत्तिया जैसी झुका के उसका सिर पूजा की चूत पे दबाते हुए जसवंत बोला, “सुन पूजा रंडी... तू अपनी माँ के मम्मों से खेल... तेरी यह रंडी माँ तेरी चूत चाटेगी और पीछे से मंगल तेरी माँ की गाँड मारेगा। मैं सोफ़े के पास खड़ा रहूँगा और तू मेरा लंड चूसेगी... समझी...? चल मादरचोद अपनी माँ के मम्मे मसलने शुरू कर।”

आरती बिल्कुल वैसा ही करने लगी जो जसवंत कह रहा था। अब कमरे में दृश्य ऐसा था कि मंगल धीरे-धीरे करके अपना लंड आरती की गाँड में घुसाते हुए उसे चोद रहा था और आरती अपनी गाँड मरवाती हुई झुक के अपनी बेटी की चूत चाट रही थी। पूजा अपनी माँ से अपनी चूत चटवाती हुई आरती के मम्मों से खेल रही थी और साथ ही जसवंत का लंड भी चूस रही थी। जसवंत पूजा का मुँह चोदते-चोदते पूजा के मम्मों से खेल रहा था। बड़ी बेरहमी से वो दोनों मर्द इन माँ बेटी की गाँड और मुँह चोद रहे थे। आरती बेशरम होके अपनी बेटी की चूत चाट रही थी और पूजा भी मस्ती से उसके मम्मे मसल रही थी। मंगल आरती की कमर पकड़के गाँड में ज़ोरदार धक्के मारते हुए बोला, “आहह... आरती तेरी गाँड तेरी बेटी जैसी लाजवाब है... साली जब तुझे जसवंत सर के ऑफिस में जाते देखा था तबसे तुझे चोदने की तमन्ना हुई। उस दिन सर के ऑफिस में तेरी गाँड मारी तब मुझे सकून मिल... लेकिन जबसे तेरी बेटी को चोदा तबसे लंड को आराम ही नहीं मिलता। बहनचोद क्या मस्त रंडियाँ हो तुम माँ बेटी।” आरती पूजा की चूत चाटती हुई मंगल से पूरा लंड ले रही थी गाँड में। पूजा भी अब जोश में अपनी माँ के मम्मे मसलती हुई जसवंत का लंड चूस रही थी।

जसवंत आगे पीछे करते हुए पूरा लंड पूजा के मुँह में डालके उसे चोदते हुए बोला, “साली पूजा... रंडी की औलाद... तू भी अपनी माँ जैसी ही मस्त लंड चूसती है। आरती पहले तेरे मर्द ने और कोई अच्छा काम किया हो या नहीं पर साले ने तेरी जैसी गरम बीवी और पूजा जैसी कम्सिन चूत हमारे लिए यहाँ छोड़के जाने का अच्छा काम किया है। क्या मस्त गरम बेटी पैदा की है तुम पति-पत्नी ने... साली आगे जाके तेरी बेटी तेरा नाम रोशन करेगी। मेरा लंड चूस छिनाल और अपनी माँ को मंगल से गाँड मरवाते भी देख।” इन माँ बेटी के साथ वो दो मर्द बेरहमी से पेश आ रहे थे लेकिन यह बेरहमी उन माँ बेटी को अच्छी लग रही थी। सब गालियाँ और बेइज़्ज़ती उन्हें और चुदास बना रही थी और वो माँ बेटी बेशरम हो के अपना बदन उनसे चुदवा रही थीं।

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Re: आरती की वासना

Unread post by rajaarkey » 22 Oct 2014 00:11

मंगल आरती की गाँड मारने के साथ-साथ उसकी गीली टपकती चूत में अँगुली रगड़ रहा था और आरती भी मस्ती से गाँड में मंगल का लंड ले रही थी और टाँगें फ़ैला के उसकी अँगुली से अपनी चूत को भी चुदवा रही थी। आरती दोनों हाथों से पूजा की कमर पकड़के अपनी कम्सिन जवान बेटी की चूत का पानी बड़ी प्यार से चाट रही थी। पूजा की चूत के दाने को हल्के से चबाती हुई आरती पूजा को और गरम कर रही थी। साँस लेने के लिए उसने मुँह पूजा की चूत से हटाया और बोली, “हम माँ बेटी के यारों... आज मेरी प्यारी बेटी और उसकी रंडी माँ को इतना चोदो कि पूजा राजेश और वैभव को भूल जाये और मैं अपने बाकी यारों को। जब चाहो पूजा रंडी को कॉलेज में चोदना और जब दिल करे तो घर आके इस अपनी रखैल रंडी आरती को चोदना। तुम दोनों इसको चोदते रहोगे तो यह इधर उधर नहीं जायेगी, कॉलेज में अटेंडैंस और पढ़ाई भी इम्प्रूव करेगी और चूतिया लड़कों से अपनी जवानी बर्बाद नहीं करेगी।”

मंगल का लंड पिस्टन की तरह आरती की गाँड मार रहा था। अपनी माँ से चूत चटवाती पूजा अब झड़ने के करीब थी। वो उत्तेजना से चिल्लाई, “माँ, मुझे राजेश और वैभव ने कई बार चोदा... दोनों ने अक्सर एक साथ भी चोदा मुझे... मगर जो मज़ा आज इन दोनों ने दिया वो कभी पहले नहीं मिला... अब जब मेरी पूरी बात खुल चुकी है तो मुझे कोई डर नहीं... मेरी प्यारी माँ... आरती।” पूजा की बात सुनके आरती पूरी जीभ पूजा की चूत में डालके उसकी चूत को चोदते हुए बोली, “हाँ मेरी छिनाल बेटी... मुझे पता है। उस दिन जबसे इन दोनों ने मुझे कॉलेज में चोदा है तब से मेरी हालत भी एक चुदास कुत्तिया जैसी हो गयी है...। इनके लंड से चुदवाके मैंने तुझे भी इनसे चुदवाने का फ़ैसला किया। अब तो यह दोनों मर्दों की हम माँ बेटी रंडियाँ बन गयी हैं तो हमें कोई तकलीफ़ नहीं होगी।”

जसवंत ने आरती की बात सुनके खुश हो के उसे किस किया। अब मंगल और जसवंत भी झड़ने वाले थे। मंगल का तो पूरा लंड आरती की गाँड में घुसा हुआ था और गोटियाँ आरती की चिकनी गाँड पे टकरा रही थीं। जसवंत भी झड़ने वाला था तो वो पूजा को एक थप्पड़ मारते हुए बोला, “मादरचोद साली... कमीनी छिनाल... ज़रा ज़ोर से मेरा लंड चूस... बहनचोद झड़ते वक्त लंड कैसे चूसना चाहिए... तुझे तेरी छिनाल माँ ने सिखाया नहीं क्या?”

पूजा अपनी माँ के मम्मों को छोड़के अब जसवंत का लंड पकड़ के पूरा लंड मुँह में लेकर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। जसवंत का लंड पूजा के हलक से टकरा रहा था। फिर आरती ने ज़ोर-ज़ोर से अपनी बेटी के मम्मे मसलते हुए उसकी चूत चाटनी शुरू की। मंगल की अँगुलियों ने आरती की चूत को पागल कर रखा था और लंड ने आरती की गाँड का भोंसड़ा बना रखा था।

सबसे पहले पूजा झड़ने लगी तो उसने जसवंत का लंड छोड़ा और अपनी माँ का मुँह चूत पे दबाते हुई पानी छोड़ने लगी। अपने बदन को अकड़ाते हुए पूजा ने पूरा पानी अपनी माँ के मुँह में चोड़ दिया। पूजा को आरती के मुँह में झड़ते देख मंगल से रहा नहीं गया और उसने आरती की कमर कसके पकड़ी और ८-१० धक्कों के बाद उसके लंड ने आरती की गाँड में पिचकारी छोड़ी। अपने लंड के पानी का आखिरी कतरा आरती की गाँड में डाल के मंगल ने लंड उसकी गाँड से निकाला और हाँफता हुआ नीचे लेट गया।

जब जसवंत ने देखा कि पूजा पूरी तरह झड़ गयी है तो उसने अपना लंड फिरसे पूजा के मुँह में घुसाया और जल्दी-जल्दी उसका मुँह चोदते हुए आरती की चूत में अँगुली करने लगा। अब जसवंत का लंड एक बेटी के मुँह में था और उसकी अँगुलियाँ उस लड़की की माँ की चूत में थीं। इतना समय चूत में अँगुली से चुद्वाने से आरती भी झड़ने लगी और फिर उसने अपना मुँह अपनी बेटी की चूत पे रखा और उसे चाटने लगी। देखते-देखते जसवंत ने भी अपना पानी पूजा के मुँह में छोड़ दिया और सब लोग झड़के थक के अलग-अलग हो गये।

वो पूरा दिन और पूरी रात वो दोनों मर्द आरती के घर में ही रहे और पूरा वक्त चारों मादरजात नंगे थे। किसने, किसको, कैसे, कहाँ और कितनी बार चोदा इसकी गिनती ही नहीं थी।

!!!! समाप्त !!!!