कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories, erotic stories. Visit dreamsfilm.ru
raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 10 Nov 2014 16:31

अंजलि ने जब कुछ कहा तो मेरी जेठनियो को तो छोड़िए, मेरी शादीशुदा ननदे भिलेकिन वो भी चुप होने वाली कहाँ,उसने मुझे छेड़ते हुए कहा, कि अरे भाभी की तो बुरी.. उसकी बात काट के मेरी एक जेठानी बोली,

"अरे साफ साफ क्यो नही कहती, कि भाभी की बर की बुरी हालत हो गयी, लेकिन ज़रा अपनी बुर की हालत सोच ना. अब तुम्हारी भाभी को तो चुदाई का लाइसेन्स मिल गया, अपने सैया से जब चाहे जितनी बार चाहें, जहा चाहे चुदवाये,

"अरे सिर्फ़ सैयाँ का ही नाम थोड़े उस लाइसेन्स पे लिखा है. सेया तो खाने का मेन कोर्स है साथ मे चटनी और आचार भी तो है, नेंदोई और देवर.." किसी ने जोड़ा और सब लोग हँसने लगे. मेरी उन जेठानी ने बात जारी रखी,

"अरे और क्या, सलहज पे तो नंदोई का पूरा हक है, जिस साले की बेहन ना चोदि, उस की बीबी पे थोड़ा बहुत तो, लेकिन तुम अपनी सोचो. तुम्हारी भाभी की बुर मे तो जब भी खु.जली मचेगी, वो कुछ बहाने बना के उपर कमरे मे और वहाँ उन्हे वो खड़ा तैयार मिलेगा.लेकिन अब ये सब हाल सुन के तुम्हारी बुर तो गीली हो गयी होगी, तो फिर अब बाथ रूम मे जा के उंगली या मोटी कॅंडल."

"अरे आज कल बेगन का भी सीज़न चल रहा है. लंबे मोटे चिकने" और सब लोग हंस पड़े लेकिन अंजलि का साथ देती हुई बहुत सीरियस्ली मैं बोली,

"अरे इन सब चीज़ो की ज़रूरत नही है, मेरी प्यारी ननदो को. आख़िर इनका ख्याल अगर इनकी भाभी नही रखेंगी तो कौन रखेगा. कल चौथी लेके मेरे दोनो भाई आ रहे है, संजय और सोनू जिनसे इसकी पक्की यारी है. अब बस24 घंटे इंतजार कर लो, फिर तो इसमे से किसी चीज़ की ज़रूरत नही पड़ेगी. जितनी बार चाहे उतनी बार,

"सच मे भाभी," उस के चेहरे पे तो 1000 वाट का बल्ब जल गया और सब लोग मुस्कराने लगे.

"और क्या एक दम सच. तुम जितनी बार चाहो, मेरे भाइयो से उतनी बार क़रवाओ ना एक बार भी मना नही करेंगे. किसके साथ कराओगी संजय के साथ या सोनू के साथ या चाहो तो दोनो के साथ." बिचारी की हालत खराब हो गयी, लेकिन उसका साथ देने केलिए दुलारी मैदान मे आ गयी. वो चालू हो गयी,

"..भौजी, अरे अपने भाई की बात छोड़िए. अरे हमारे भैया ने तो चोद चोद के तुम्हारी बुर का हलुवा बना दिया है, टाँग फैला के चल रही हो. मसल मसल के काट काट के तुम्हारी ई चूंचियो की लेकिन हम अपने भाई को क्यो बुरा कहे. तुम्हार ई चीक्कन गोर गोर गालवा देख के मन तो लालचाई जाई, और फिर ये गुलाबी रसीले होंठ.

क्यो खूब चुसवाई हो ना होंठ के रस,और फिर ई जवानी के रस से छलकात, मस्त मस्त चूंची और कसी कसी बुर. खूब चूंची पकड़ के दबाए के चोदवाइ होगी, है ना.

चूतड़ उठा उठा के गपा गॅप लंड घोंटी होगी रात भर.हाल तो मुझे पूरा मालूम है,

लेकिन सब तुम्हारे मूह से सुन-ना चाह रहे है वरना मैं सुनेआ देती कि कैसी चुद्वासि हो तुम और कैसे हचक के चोदा भैया ने तुमको.. अरे लंड घोंटने मे नही सारम - खचाखच चुद्वाने मे नही सारम - तो फिर चुदाई बोलने मे कौन सी शरम लग रही है"

"अरे नेई दुल्हन है थोड़ा तो सरमाएगी ही, मूह से बोलने मे कुछ" मेरी एक जेठानी ने मेरा बचाव किया. लेकिन दुलारी फूल फार्म पे थी. वो चालू रही,

"अरे उही मूह सेक्यो अभी लौंडा चूसी हो की नही चूसी हो तो चूमोगी भी चतोगी भी और चुसोगी भी उसी मूह से तो बोलने मे का शरम. अरे बेचारी ननद पूछ रही है तो बाते दो ना खुल के कैसे कैसे मज़ा आया सैयाँ के संग चुद्वाने मे. अगर एक बार बोल दो ना भाभी तो "

"ठीक है रख दो बिचारी का मन, बोल दो ना" मेरी सारी जेठानियो ने एक साथ कहा और फिर वो गाने लगी,

"सैया के संग रजैईया मे बड़ा मज़ा आए, चू" और मैं भी साथ दे रही थी. लेकिन जैसे ही मेने चुदाया बोला सब की सब शांत हो गयी और सिर्फ़ मेरी आवाज़ मे चुदाया सुनाई दिया. सब औरते एक साथ ज़ोर से हंस के बोली कि अब ये भी शामिल हो गई हम लोगो की गोल मे. और फिर एक जेठानी ने दुलारी से कहा,

"अरे मान लो ई सरमा रही है, तो तुम तो बड़ी बियाहिता ननद हो तुम ही सुनाई दो इस के रात का हाल."

"सुनती हू. अरे गा के सुनाउन्गि ज़रा ढोलक तो उठा दो, " और गुड्डी ने उनको ढोलक पकड़ा दी. और उन्होने गाना शुरू कर दिया,

भिंसारे चिरिया के बोली अरे भिंसारे चिरैया के बोली,

अरे हमारे भैया ने भाभी की चोली खोली,

अरे चोली खोल के चूंची टटोली और फिर दुलारी ने गाने गाने मे सब कुछ, कैसे 'उन्होने' मेरी चोली खोल के कस के चूंचिया दबाई, कैसे मेरी कसी चूत मे पहले उंगली की फिर टांगे उठा के कैसे खचाखच चोदा, खूब देर तक सुनाती रही. जब उसने गाना ख़तम किया तो ग़लती से गुड्डी के मूह से निकल गया, कि तुम तो हमारी बुआ के पीछे ही पड़ गयी. बस क्या दुलारी अब उसके पीछे,

"अरे बुआ की भतीजी की चूत मारू, अरे अपनी बुआ के गाल तो देखो जैसे माल पुआ. खूब कचकच काटने लायक है और कटवाती भी है. अरे बुआ बुआ करती हो तुम्हारी बुआ को तुम्हारी कुछ फिकर नेई. जब एक बुआ थी तुम्हारी तो इतने फूफा थे कि गिनेती नही (मेरी जेठानी की ओर इशारा कर के वो बोली) और अब ये आ गयी है. इनका तो हाल तुमने सुन ही लिया कि जब से आई है, दिन रात खाली चुदवाय रही है, और तुम्हारी वो बुआ वो तो वो भी तुम्हारे फूफा के या क्या पता कही तुम्हारे पापा ने भी मौका देख के हाथ साफ कर लिया हो. कही बुआ ने सोचा कि ये भतीजी भी कब की चौदह पार कर के चुद्वाने लायक हो गयी है, इसकी चुचिया गदराने लगी है. अपना तो लंड घोंटने मे, ज़रा इसके लिए भी लंड का इंतज़ाम करे. मेने तो कल समझाया था ना, शादी बियाह का घर है, इतने लड़के मर्द है पटा लो किसी को. अरे कुछ दिन मे तो लौट जाओगी तो किस को क्या पता चलेगा कीबुआ के भरोसे रहोगी तो."

रजनी ने बात काट के बताया कि कल मेने गुड्डी का मेक अप भी किया था और होंठ पे लिपस्टिक भी.."

"अरे नीचे वाले होंठ पे भी तो लिपस्टिक पौडर लगाया करो, जो 'खड़ा' (वर्टिकल) होंठ है उसकी भूख का भी तो इंतज़ाम करो, खाली उपर वाले पड़े ( हरिजोटल) होंठ का सिंगार करती हो. ज़रा एक बार अपने खड़े होंठ की झाँकी तो दिखाय दो बन्नो" ये कह के दुलारी ने झटके से उसकी फ्रॉक उपर उठा दी. और उसकी पूरी जांघे दिख गयी.

गनीमत था कि उसने एक सफेद चड्धि पहन रखी थी. दुलारी का हाथ वहाँ भी पहुँच गया और उसको चिढ़ाते हुए बोली,

"अरे इस बुल बुल को ऐसे पिंजरे मे बंद किए रहोगी तो चारा वारा कैसे गटकेगी. ज़रा इसको हवा तो खिलाओ" और वो शायद और भी तंग करती, लेकिन चमेली भाभी बीच मे आ गयी. उन्होने दुलारी का हाथ पकड़ के कहा,

"तुम सबका हाल तो पूछ रही हो, लेकिन गौने के बाद महीने भर हुआ, आया अपना हाल तो सुनाया नही कि गौने की रात सैया ने क्या क्या किया. कैसे दो महीने चुदवाया, ज़रा नाच के तो दिखा हिम्मत हो तो." सेर को सवा सेर मिल गया था.

क्रमशः……………………………………
शादी सुहागरात और हनीमून--27

gataank se aage…………………………………..

basabas jab meri ankhe khuli to subah ho gayi thi."

kuch der tak sab log chup baithe rahe, khas taur se meri kumvari nanade lag raha tha ki uneke tam man ko koyi math raha hai. mene jethani ji ko dekha. wo halke se muskara rahi thi. unhone nanado ko cheda,

"kyo soch ke hi gili ho gayi kya"

thi tak meri ek jethani aur ek shadi shuda nanad samane aa ke baith gayi aur ladakiyo ko thoda piche hata diya.

"chal hat, ham log puchate hai. tum sabo ko kya malum pahali raat ki hal, ham log to gujar chuke hai"aur phir mujhese kaha ki suno ha nahi me ya ek do shabd me bata dene aur hamase sharamane ki koi baat nahi ham log bhi to" aur meri un me se jo jethani lagati thi, unhone bahut pyar se, halke se pucha,

"ye bata ki jab unhone andar pahali baar push kiya, andar pela. jab tumhe kali se phul baanaa to unka hath kaha tha. teri patali kamar pe, ya tere chutad pe ya tere joban pe ya teri kalayi pe. abhi tum kah rahi thi ne ki chudi.."

"meri meri kalai pe" thuk gatakate huye mene kaha.

"are to ye kaho ne saph saph ki teri doni kalayi pakad ke hachak se usne kumvari chut me ek dhakke me lund pel diya.isame sharamane ki kya baat. shadi, sabhi ladakiya aurate janeti hai ki kyo hoti hai." meri un jethani ke sath baithi, un shadi shuda nanad ne kaha.

"are aise kyo bolati ho. is bechari se pucho kitane dard hua hoga jab us ki 17 sal ki kumvari chut phati hogi. are ye un meri nanado ki tarah thodi hai jo mayake se hi sil tudava ke ati hai aur jhuth muth ke aisa chilllati hai jaise chut me kabhi ungali bhi ne gayi ho, lund to dur." meri jethani ne baat samhali.

"are chikhi to ye bhi thi bahut kas ke, niche tak ham logo ko suneyi diya, kyo hai ne anjali." aur anjali ne itani kas ke sar hilaya, ki jaise wo hamare kamare ke bahar hi kan pare baithi rahi ho.

"jhuth, jhuthamain chikh sakati hi nahi thi. unhone apne hontho se mere hontho ko sil kar diya tha." main boli.

"sirph honth pe honth rakhe the yatum sar hila ke unhe hata bhi to sakati thi." pyar se jethani boli " kaise hatati, unhone mere muh me apni jibh bhi daal rakhi thi." lekin jab tak mene ye baat kahi, mujhe ahasas hua ki main to sari bate bol gayi. lekin ab kar bhi kya sakati thi.

"are phir to jab phati hogi, pahali baar ghusa hoga, to bahut dard hua hoga hai ne,

sirph supada ghusa ke rok diya tha ki ek baar me hi pura lund pel ke choda tha." nanad ne pucha.

"ham" mene ab ki samhal ke javab diya.

"are thik to kah rahi hai ye. itane beraham thoda hi hai wo. achcha ye batao, pahale sidhe tumhari chut me lund hi pel diya tha ya pahale chut me ungali daal ke pyar se vaisalin lagayi thi. jo pyar karata hai wo itane to dhyan rakhata hi hai. ek ungali daal ke lagayi thi ya do" mera sar sahalate, pyar se meri jethani ne pucha.

"pahale pahale vaisalin pahale ek ungali daal ke lagayi thi, phir do. khub der tak meri "

"ha ha bolo ne, "jethani boli " do ungali meri chut me daal kephir mujhe laga ki main kya bol gayi, lekin jethani ne mera hausala badhaya ki yaha sirph ladakiya aur bahuye hi to hai, phir daravaja band hai, kya sharamane. himmat kar ke mene age bola.." meri chut me daal ke pahae vaisalin lagayi."

"dekha mera devar kitane neval rasiya hai sab kuch malum hai.aur apni dulhan ka kitane khayal bhi hai, ye nahi ki dulhan dekhi aur taang utha ke pel diya, lage chodne, chahe wo chillati rahi, chahe use maja mila ho ya ne." wo boli.

"tujhe maja mila tha ya nahi jab usne teri bur me pela tha." meri nanad ne bola. main kya bolati chup rahi.

"are pahali baar me to jab kasi kumvari chut me lund jata hai to lagta hi hai. phir to is ki umar bhi abhi badi hai. pahali baar ki baat nahi, lekin us ke baad ek baar bhi, us din n sahi kal sahi thoda to maja aya hoga."

"hamaya." mene svikarokti me sar hilaya.

"to khub maje le le ke chudvaya tumane. kitni baar taang utha ke choda usne"

nanad ne pucha. main chup rahi.

"are ye kaisi bate karati ho. is tarah ki baat kisi neyi neveli se puchi jati hai. jethani ne unhe chup karaya aur mujhese pucha, bas ek baat yad kal ham devar ji ko chidha rahe the ki uneke mathe me mahavar laga tha. meri ek baji lag gayi tumhari ek nanad se.

mene kaha ki mera devar itane wo nahi ki har baar taange kandhe pe hi rakh ke chode.

usne alag alag tarike se pahale din choda hoga. to bas ye bata do,ki har baar taang kandhe pe hi rakh ke usne choda ya kisi aur tarike se bhi choda."

"ek baraek baar unhone meri taange phaila ke bhi, niche takiya rakh ke bhi" mene mane.

"lo suno, main kah rahi thi ne ki mera devar pakka rasiya hai. usne dulhan ko tarah tarah se khush kiya hoga. achcha ye bata," apni un nanad se apni jit ki ghoshhane kar ke wo phir meri or mukhatib huyi," sach sach batane, mujhe lagta hai mera devar tere is rasile joban ka rasiya hai. hai neto har baar jab wo ise pata hai to pahale halke se chuta hai, sahalata hai, dabata hai thi ragadata, masalata hai ya"

"pahale din to aise hi lekin" meri baat kaat ke meri nanad boli,

"are ye kyo nahi kahati saph saph ki ab wo itane matavala ho jata hai teri chunchiya dekh ke ki dekhate hi daboch leta hai, daba deta hai, masal deta hai. kach kacha ke kaat leta hai. ye to dekh ke hi lag raha hai" aur ye kah ke unhone mera anchal mere blouse par se hata diya. mere lo kat blouse se mer golaiya chalak padi aur sath hi mere ubhaaro pe unke dant aur nekhun ke nishan sabake samane the. unhone us or ishara karate huye bolane jari rakha," are aisi rasili chunchiya hongi to wo to besabara hoi jayega. chalo to tumane ye bataya apni pahali chudayi ke bare me ki pahale tere dulhe ne, teri kasi kumvari bur me pahale ek ungali aur phir do ungali daal ke choda aur vaisalin lagayi. aur phir jab tum chudvane ke liye bechain hoke apne chutad patakane lagi to tumhari taange usne apne kandhe pe rakh ke, tumhari dono kalayi kas ke pakad ke, tumhare hontho ko apne honth se daba ke tumhare muh me jibh ghused ke tumhari kachchi chut me apne mota lund pel tumhe chod diya aur tumhari chut phat gai. sath hi pahale to tumhari chunchiya wo sahalata raha aur phir kas ke khub ragadai masalai ki. ek baar tumhari tumane khud apni taange phaila ke use bula ke chudavaayaa. hai ne," main kya bolati. phir to un dono ne mil ke jaise pulis vale kabul vate hai jo jurm kiya ho aur jo ne kiya ho wo sabasab kuch kabulava liya.

lekin usase meri rahi sahi jhijhak bhi khatam ho gai. aur uske sath to jaise 'chudai puran' chalu ho gaya. aur nanade bhi kyoki andar sirph unki bhabhiya hi to thi,

khub khul keaur us ke sath hi ek neya grup ban gaya shadi shuda aur kumvariyo ka.

anjali ne jab kuch kaha to meri jethaniyo ko to chodiye, meri shadishuda nanade bhilekin wo bhi chup hone vali kaham,usne mujhe chedate huye kaha, ki are bhabhi ki to buri.. usaki baat kaat ke meri ek jethani boli,

"are saph saph kyo nahi kahati, ki bhabhi ki bur ki buri halat ho gayi, lekin jara apne bur ki halat soch ne. ab tumhari bhabhi ko to chudai ka license mil gaya, apne seya se jab chahe jitani baar chahem, jaha chahe chudavayem,

"are sirph seya ka hi naam thode us license pe likha hai. seya to khane ka men kors hai sath me chatani aur achar bhi to hai, nendoyi aur devar.." kisi ne joda aur sab log hansane lage. meri un jethani ne baat jari rakhi,

"are aur kya, salahaj pe to nmdoyi ka pura hak hai, jis sale ki behan ne chodi, us ki bibi pe thoda bahut to, lekin tum apne socho. tumhari bhabhi ki bur me to jab bhi khu.jali machegi, wo kuch bahane bane ke upar kamare me aur vaha unhe wo khada taiyaar milega.lekin ab ye sab haal sun ke tumhari bur to gili ho gayi hogi, to phir ab bath roo me ja ke ungali ya moti candle."

"are aaj kal baigan ka bhi season chal raha hai. lambe mote chikane" aur sab log hans pade lekin anjali ka sath deti huyi bahut seriously main boli,

"are in sab cheejo ki jarurat nahi hai, meri pyari nanado ko. akhir inka khyal agar inki bhabhi nahi rakhengi to kaun rakhega. kal chauthi leke mere dono bhai aa rahe hai, sanjay aur sonu jinese iski pakki yari hai. ab bas24 ghmte intajar kar lo, phir to isame se kisi cheej ki jarurat nahi padegi. jitani baar chahe utani bar,

"sach me bhabhi," us ke chehare pe to 1000 vat ka balb jal gaya aur sab log muskarane lage.

"aur kya ek dam sach. tum jitani baar chaho, mere bhaiyo se utani baar karavanewo ek baar bhi mane nahi karenge. kiske sath karawogi sanjay ke sath ya sonu ke sath ya chaho to dono ke sath." bichari ki halat kharaab ho gayi, lekin usaka sath dene keliye dulari maindan me aa gayi. wo chalu ho gayi,

"..bhauji, are apne bhai ki baat chodiye. are hamare bhaiya ne to chod chod ke tumhari bur ka haluva bane diya hai, taang phaila ke chal rahi ho. masal masal ke kaat kat ke tumhari i chunchiyo kilekin ham apne bhai ko kyo bura kahe. tumhar i chikkan gor gor galava dekh ke man to lalachai jai, aur phir ye gulabi rasile honth.

kyo khub chusavai ho ne honth ke ras,aur phir i javani ke ras se chalakat, mast mast chunchi aur kasi kasi bur. khub chunchi pakad ke dabay ke chodvai hogi, hai ne.

chutad utha utha ke gapa gap lund ghonti hogi raat bhar.hal to mujhe pura malum hai,

lekin sab tumhare muh se sun-ne chah rahe hai varne main suney deti ki kaisi chudvasi ho tum aur kaise hachak ke choda bhaiya ne tumko.. are lund ghontne me nahi saram - khachakhach chudvane me nahi saram - to phir chudai bolane me kaun si sharam lag rahi hai"

"are neyi dulhan hai thoda to saramayegi hi, muh se bolne me kuch" meri ek jethani ne mera bachav kiya. lekin dulari phul pharm pe thi. wo chalu rahi,

"are uhi muh sekyo abhi laumda chusi ho ki nahiehi chusi ho to chumogi bhi chatogi bhi aur chusogi bhi usi muh se to bolane me ka saram. are bechari nanad puch rahi hai to batay do ne khul ke kaise kaise maja aya semya ke sang chudvane me. agar ek baar bol do ne bhabhi to "

"thik hai rakh do bichari ka man, bol do ne" meri sari jithaniyo ne ek sath kaha aur phir wo gane lagi,

"semya ke sang rajaiya me bada maja aye, chu" aur main bhi sath de rahi thi. lekin jaise hi mene chudaiya bola sab ki sab shamt ho gayi aur sirph meri avaj me chudaiya sunaai diya. sab aurate ek sath jor se hans ke boli ki ab ye bhi shamil ho gai ham logo ki gol me. aur phir ek jethani ne dulari se kaha,

"are man lo i sarama rahi hai, to tum to badi biyahita nanad ho tum hi sunaai do is ke raat ka hal."

"suneti hu. are gay ke suneungi jara dholak to uthay do, " aur guddi ne uneko dholak pakada di. aur unone gane shuru kar diya,

bhinesare chiriya kay boli are bhinesare chiraiya kay boli,

are hamare bhaiya ne bhabhi ki choli kholi,

are choli khol ke chunchi tatoli aur phir dulari ne gane gane me sab kuch, kaise 'unhone' meri choli khol ke kas ke chunchiya dabayi, kaise meri kasi chut me pahale ungali ki phir taange utha ke kaise khachakhach choda, khub der tak suneti rahi. jab usne gane khatam kiya to galati se guddi ke muh se nikal gaya, ki tum to hamari bua ke piche hi pad gayi. bas kya dulari ab uske piche,

"are bua ki bhatiji ki chut marum, are apni bua ke gaal to dekho jaise mal pua. khub kachakach katane layak hai aur katavati bhi hai. are bua bua karati ho tumhari bua ko tumhari kuch phikar ney. jab ek bua thi tumhari to itane phupha the ki gineti nahi (meri jethani ki or ishara kar ke wo boli) aur ab ye aa gayi hai. inka to haal tumane sun hi liya ki jab se ayi hai, din raat kheli chudavay rahi hai, aur tumhari wo bua wo to wo bhi tumhare phupha ke ya kya pata kahi tumhare papa ne bhi mauka dekh ke hath saph kar liya ho. kahi bua ne socha ki ye bhatiji bhi kab ki chaudah par kar ke chudvane layak ho gayi hai, iski chuchiya gadarane lagi hai. apne to lund ghontane me, jara iske liye bhi lund ka intajam kare. mene to kal samajhaya tha ne, sadi biyah ka ghar hai, itane ladake mard hai patay lo kisi ko. are kuch din me to laut jaaogi to kis ko kya pata chalega kibua ke bharose rahogi to."

rajani ne baat kaat ke bataya ki kal mene guddi ka mek ap bhi kiya tha aur honth pe lipstik bhi.."

"are niche vale honth pe bhi to lipstik paudar lagaya karo, jo 'khada' (vertical) honth hai usaki bhukh ka bhi to intajam karo, kheli upar vale pade ( harijotal) honth ka simgar karati ho. jara ek baar apne khade honth ki jhanki to dikhay do banno" ye kah ke dulari ne jhatake se usaki frock upar utha di. aur usaki puri jaanghe dikh gayi.

ganimat tha ki usne ek saphed chaddhi pahan rakhi thi. dulari ka hath vaha bhi pahunch gaya aur usako chidhate huye boli,

"are is bul bul ko aise pinjare me band kiye rahogi to chara vara kaise gatakegi. jara isako hava to khilao" aur wo shayad aur bhi tang karati, lekin chameli bhabhi beech me aa gayi. unhone dulari ka hath pakad ke kaha,

"tum sabaka haal to puch rahi ho, lekin gaune ke baad mahine bhar hua, aye apne haal to suneya nahi ki gaune ki raat semya ne kya kya kiya. kaise do mahine chudavaayaa, jara nech ke to dikha himmat ho to." ser ko sava ser mil gaya tha.

kramashaah……………………………………



raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 10 Nov 2014 16:32

शादी सुहागरात और हनीमून--28

गतान्क से आगे…………………………………..

चमेली भाभी ने उसका हाथ खींच के खड़ा कर लिया, नाचने को. मेरी जेठानी ने ढोलक सम्हाली. दुलारी ने गाना शुरू किया लेकिन गाने के पहले बोली, ये गाना भौजी के हाल का है. और फिर गाना शुरू हो गया,

गौने की रात दुख दाई रे अबाहु ना भूले.

बारह बजे सुन सैयाँ की बोलिया,कौनो ननादिया खिड़किया ना खोले,

रात भर पेरैला हरजाई रे, अबहु ने भूले,

( अरे पेरेला की पेलैला, मेरी जेठानी ने छेड़ के पूछा) रह बेदर्दी चोली मोरा मसके, बाला जोबनेवा दबावे दूनो कस के.

मर गयी हे मोरी मैं रे, गौने की रात दुख दाई रे अबहु ने भूले.

लूट लिहाले हमारे नैहर के मालवा, सीने वा पे चढ़के दबावे दोनो गालवा

( अरे भाभी माल लुटवाना ही तो इतने साज संवर के आई थी अब क्या शिकायत, ननदे मेरे पीछे पद गयीं)

काट लहले जैसे नेन खटाई रे, अबहु ने भूले गौने की रात दुख दाई रे अबहु ने भूले.

और गाने के साथ साथ पूरा एक्शन, दोनो ने एक दूसरे की साड़ी साया सब उठा लिया, और फिर रगड़ रगड़ के, पॉज़ बदल बदल के पूरा ट्रिपल एक्स एकस्न था. वो तो बाहर से मेरी सास ने आवाज़ दी तो वो बंद हुआ और दरवाजा खुला. बाहर महारजिन खड़ी थी कि नाश्ता बन गया है. कुछ लोग बाहर गये लेकिन मेरे और जेठानी जी के लिए वही गुड्डी और रजनी ले के आई. हम लोग नाश्ता ख़तम ही कर रहे थे कि मेरे नंदोई अश्वनी,उनकी पत्नी, मझली ननद, और अंजलि आई.

वो बोले क्या खाया पिया जा रहा है अकेले अकेले. मेने उन्हे ओफर किया तो हंस के उन्होने मना कर दिया, कि रात भर की महनेट के बाद तुम्हे ताक़त की ज़्यादा ज़रूरत है. उसके साथ ही फिर हँसी मज़ाक शुरू हो गया. मैं देख रही थी कि कल के बाद रजनी मे एकदम फ़र्क आ गया है और वो उनसे चिपकी हुई है और उनके शुद्ध नोन वेज जोक्स का हम लोगो के साथ मज़ा ले रही है. मज़ाक मज़ाक मे उन्होने मेरी जेठानी से कहा,

"भाभी, आप को मेरे नाम का मतलब मालूम है."

"अरे कितनी बार तो आप बता चुके है" वो बोली.

"अरे साफ साफ कहिए ना कि नये माल को देख के अरे आप की सलहज है, इससे क्या परदा. नाम क्या सीधे 'वही' दिखा दीजिए." ननद ने उकसाया.

"अरे दिखा तो देता लेकिन बच्ची है कही भड़क ना जाए और वैसे भी अभी दिन रात साले का देख रही है."

"देखो तुम अपने इस नेंदोई से बच नही पओगि, अभी बच भी गयी ना तो होली मे तो ये बिन चोली खोले मानेंगे नही"

मैं चुपचाप मुस्करा रही थी, फिक्क से हंस दी. अश्विन भी खुल के हँसते हुए बोले " अरे हँसी तो फाँसी मैं बता दू नाम का मतलब.." मेरी ननद, उनकी पत्नी बोली,

"मैं ही समझा देती हू अश्व का मतलब घोड़ा..तो तुम्हारे ननदोयि का ये कहना है कि अश्वनी का मतलब हुआ, घोड़े जैसा" जेठानी जी ने कहा उनकी बात पूरी होने के पहले ही मैं ननदोयि जी की हिमायत करती हुई बोली,

"अरे दीदी जी, इसमे बिचारे ननदोयि जी को क्यो दोष देती है. अपनी सासू जी को बोलिए ना. वो कभी अंधेरे मे घुड़साल चली गयी होंगी और किसी घोड़े का "

मेरी बात ख़तम होने के पहले ही हँसी से कमरा गूँज गया. मेने रात का हिसाब बराबर कर दिया था. थोड़ी देर के हँसी मज़ाक के बाद उन्होने मेरा हाथ पकड़ लिया,

देखना कि नाम पे.

"अरे भाभी देखिए, जीजा हाथ पकड़ने के बहाने फिर कही कोहनी तक नही पहुँच जाएँ" अंजलि बोली.

"और फिर कोहनी से सीधे ज़ुबाने तक." ननद ने चिढ़ाया.

"अरे मेरी सलहज ऐसी डरने वाली नही है, और मैं तुम लोगो के फ़ायदे की बात देख रहा हू."

"क्या जीजू हम लोगो का क्या फ़ायदा होगा" अंजलि बोली.

"अरे नेग तो मिलेगा ना, तुम लोगो को बुआ बनाने पर. यही कि तुम लोग कब और कितनी बार बुआ बनोगी."

"तो क्या देखा आपने, अब तक." ननद जी ने पूछा.

"यही की चिड़िया ने चारा तो घोंटना शुरू कर दिया है, और अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है." वो बोले " तो तो क्या 9 महीने मे खुश खबरी" एक और ननद ने बनावटी खुशी से मुझेसे पूछा.

"तो चिड़िया इतना चारा घोंट रही है, तो उसका पेट जल्द ही फूलेगा." अंजलि ने और पालिता लगाया.

"अरे नही यार ये चिड़िया बहुत चालाक है. आज कल ऐसी गोलिया आती है, ये दिन रात चारा घोंटेगी और पेट भी नही फूलेगा.

तो बताइए ना क्या होगा." ननद ने ननदोयि जी से पूछा.

"अरे वो तो पूछे जिसका पेट फूलना है, उसे बताउन्गा."

"कहिए तो पैर छू के पुच्छू" झुकने का नाटक करते हुए मैं हँसते हुए बोली.

"वो ठीक है लेकिन कौन सा पैर छुओगी." एक ननद बोली.

"अरे वो भी कोई पूछने वाली बात है. बीच वाला वही, घोड़े वाला. अरे सिर्फ़ छूने से प्रसाद नहीमिलेगा, उसे ठीक से पकडो, दबाओ, मसलो तब बाबा प्रसन्न होंगें" मेरी मझली ननद बोली.

तब तक वास्तव मे वो हाथ से कोहनी तक पहुँच गये थे, और मेरे चेहरे को देखते हुए बोले,

"मैं देख रहा हू कि तुम अपनी जेठानी के साथ एक बाबा के यहाँ हो. तुम्हारी जेठानी पूछ रही है बाबा, 6 महीने हो गये बताइए क्या होगा. बाबा ने तुम्हारा पेट छुआ,

फिर सीना टटोला और कहा पता नही चल पा रहा . जेठानी जी ने बाबा के सारे पैर छुए,

फिर बाबा ने इनका साया उठाया और ध्यान से अंदर झाँक कर कहा, खुश रहो लड़का होगा. जेठानी ने पूछा, बाबा आप धनी है. आप ने वहाँ क्या देखा. वो बोले, अरे मुझेसे कैसे कोई बच सकता है. वो झाँक रहा था मेने उसकी मूँछे देख ली."

और फिर मेरी ननदो की ओर देख के बोले, इसका मतलब भतीजा होगा, नेग बढ़िया मिलेगा."

raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 10 Nov 2014 16:33

सब लोग ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे. मैं झेंप गयी और झेंप मिटाने के लिए जल्दी से बोली,

"नही नही, मेरे तो, मेरा मतलब मेरे तो वहाँ बाल ही नही है." फिर दुबारा सब लोग हँसने लगे और मैं अपनी बात का मतलब समझ खुद शरमा गयी.

"अरे तो इसमे इतने शरमा क्यो रही हो, जैसे लड़कियो को मूँछ दाढ़ी से चुम्मा चाती मे झंझट होती है, वैसे लड़को को भी होती है, है ना. वैसे नीचे वाले होंठ पे अभी चुम्मा चाती शुरू हुई की नही." ननदोयि जी ने और छेड़ा.

वो तो और छेड़ते, लेकिन बाहर से मेरी सासू जी ने आवाज़ लगाई और उनकी पत्नी उन्हे हांक के बाहर लेगयि. अंदर सिर्फ़ मेरे साथ मेरी जेठानी, अंजलि, गुड्डी और रजनी बचे.

जेठानी जी ने अंजलि से कहा कि वो दरवाजा बंद कर ले जिससे हम लोग थोड़ी देर आराम कर सके. दरवाजा बंद कर के वो मेरे पास आई और मेरा हाथ अपने हाथ मे देखने लगी.

हम सब लोग अब आराम से बैठ थे. अंजलि मेरे हाथ को देखते हुए बोली,

"भाभी, आपका हाथ देख के जीजू ने कितनी मजेदार बाते बताई."

"हाथ तो मैं भी देख लेती हू, लेकिन मैं वो बात बताती हू जो अक्सर हाथ देखने वाले नही बताते."

"क्या, भाभी." सब एक साथ बोल पड़ी और उसमे गुड्डी भी शामिल थी."

"मैं हाथ देख के तिल बता सकती हू और ऐसी जगह का तिल जहाँ सब की निगाह नही पड़ती."

"ये कैसे हो सकता है, ये तो आज तक मेने सुना नही" रजनी आर्य से बोली.

"अरे मेरी बन्नो अब तुम उस उमर मे पहुँच गयी हो जहाँ रोज नई ने चीज़ देखने और सीखने को मिलेगी. अगर तुम्हे नही विश्वास है तो मैं ये 100 रूपरे का नोट जेठानी जी के पास रख देती हू. मैं हाथ देख के तिल बताउन्गि, तुम लोग दिखाना, अगर मैं ग़लत हुई तो 100 रूपरे हर ग़लती पे तुम्हारे. मंजूर? तीनो एक साथ बोली, मंजूर.

मेने 100 रूपरे का नोट जेठानी जी के पास रख दिया और उन्होने उसे पार्स मे रख लिया.

सबसे पहले मेने अंजलि का हाथ थामा. थोड़ी देर तक हाथ देखने का नाटक करने के बाद, मेने उससे कहा कि तेरे पैर के तालुए मे तिल है. उसने चप्पल उतार के दिखाया. वाकाई मे तिल था.सब कहने लगी कि भाभी ये तो मान गये लेकिन कही आपने इसके पैर ऐसे उठे हुए देख लिए होंगे. मेने रजनी को छेड़ा, हे किसके सामने टाँग उठाई तुमने, इतनी जल्दी यहाँ तक आओ बिचारी तो शर्मा गयी लेकिन बाकी दोनो चिल्लाने लगी ये नही चलेगा, आप दुबारा बताइए. खैर मेने फिर अंजलि का हाथ मेने फिर पकड़ा और फिर कुछ देर तक देखने के बाद, मैं बोली मैं बताउन्गि तो लेकिन तुम्हे कपड़ा खोलना पड़ेगा दिखाने के लिए. वो बोली, ठीक है 100 रूपरे का सवाल है. तुम्हारे बाए बुब्स के ठीक नीचे, उसके बेस पे. वो बोली, नही वहाँ कोई तिल नही है, मैं रोज शीशे मे देखती हू. अरे, अरे तो बन्नो रोज देखती है कि जौबन पे कितना उभार आया, कितने गदराए. बेचारी शरमा गयी. लेकिन अंजलि और गुड्डी बोली,

दिखाओ, दिखाओ. थोड़ा उसने टॉप उठाया, बाकी अंजलि और गुड्डी ने मिल के सरका दिया,

ब्रा तक. कोई तिल नही था. दोनो ज़ोर से चिल्लाई, भाभी हार गई. रजनी ने भी 100 रूपरे के लिए हाथ बढ़ाया. मेने उसकी ब्रा थोड़ा सा उपर सरका दी. खूब गोरे मुलायम उभार और बाए बुब्स के बेस के थोड़ा उपर, एक काला तिल. (असल मे कल शाम को जब मेने उसकी ब्रा के नीचे पुश अप पैड लगाए थे तो मेने ये तिल देख लिया था). अब उसके बाद गुड्डी का नेंबर था. पहले तो मेने उसकी पीठ पे एक तिल बताया, लेकिन फिर सब ने कहा ये कोई बड़ी बात नही है. फिर मेने देर तक उसका हाथ देखने का नाटक करती रही फिर मैं बोली, बताऊ. तीनो एक साथ चिल्लाई, बताइए. मेने कहा लेकिन दिखाना पड़ेगा. अब गुड्डी बेचारी थोड़ी झिझकी. "फ्रॉक के नीचे, जाँघ के उपर." वो बेचारी कस के फ्रॉक को दबाती रही लेकिन रजनी और अंजलि ने मिल के फ्रॉक उपर सरकानी शुरू कर दी. अंजलि हंस के बोली, "अरे यार दिखा दे हमी लोग तो है 100 रुपये का सवाल है". उसकी खूब भारी भारी गोरी जांघे दिख रही थी लेकिन तिल का कही अता पता नही था. अब तीनो बोलने लगी, 100 रुपये, 100 रुपये.