जिस्म की प्यास compleet

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raj..
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जिस्म की प्यास compleet

Unread post by raj.. » 10 Oct 2014 05:55

चेतावनी ........... ये कहानी समाज के नियमो के खिलाफ है क्योंकि हमारा समाज मा बेटे और भाई बहन और बाप बेटी के रिश्ते को सबसे पवित्र रिश्ता मानता है अतः जिन भाइयो को इन रिश्तो की कहानियाँ पढ़ने से अरुचि होती हो वह ये कहानी ना पढ़े क्योंकि ये कहानी एक पारवारिक सेक्स की कहानी है

जिस्म की प्यास




दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और मस्त कहानी लेकर हाजिर हू दोस्तो जिस्म की प्यास एक ऐसी प्यास है जो बड़े बड़े खानदानो को तबाहओ बर्बाद कर देती है ये कहानी भी जिस्मो की प्यास पर आधारित है दोस्तो

ये कहानी एक साधारण भारतीय परिवार की है... दिल्ली शहर में बसा हुआ ये परिवार एक साथ बहुत खुश

रहता है मगर अलग अलग इनकी ज़िंदीगिया कुच्छ और ही है... और इनमे 5 लोग है..

सब से पहले

नारायण : उम्र: 50 साल.. रंग: सावला... दिखने में: लंबा, पतला और 6.5 इंच का लंड.. एक स्कूल अध्यापक

होने के कारण कयि लड़कियों से घिरा रहता था और उसकी वजह से उसकी काई इच्छाएँ थी जिनको वो . करने से डरता था.

शन्नो : उम्र 42 साल.. रंग: गोरा.. दिखने में: हट्टी कत्ति आंटी.. 38डी/30/38 साइज़ है और गाल पे एक तिल है..

एक ज़िम्मेदार पत्नी और मा मगर एक कमी है कि ये पैसो के बारे में कुच्छ ज़्यादा ही सोचती है..

डॉली : उम्र 23 साल.. रंग सावला.. दिखने में: 34बी/24/36 साइज़ खूबसूरत चेहरा और 5 7 इंच की हाइट..

सच्चे प्यार की तलाश में रहती है.. काफ़ी शरीफ और घरेलू लड़की है और अपने परिवार से बहुत प्यार करती है.

ललिता : उम्र 19 साल.. रंग गोरा.. दिखने में: 36सी/26/37 साइज़... छोटी उम्र मगर बाकी सब कुच्छ बड़ा..

अपनी बहन से बिल्कुल अलग.. प्यार से ज़्यादा इसको चुदाई में ज़्यादा दिलचस्पी है.... मगर अभी तक इसकी सील टूटी नहीं है...

चेतन :उम्र 18 साल.. रंग सावला.. दिखने में लंबा मोटा.. घर का सबसे छोटा और काफ़ी शरीफ लड़का..

आज तक उसने किसी लड़की को छुआ भी नहीं था छूना तो दूर की बात उसे बात भी करनी नहीं आती थी.. लेकिन उसका भी मन करता था कि उसकी कोई गर्ल फ्रेंड हो जो उसे बहुत ज़्यादा प्यार करें

ये कहानी नारायण के परिवार के बारे में हैं जो कि ईस्ट देल्ही में रहते हैं. नारायण 50 साल

का है और पेशे से स्कूल का टीचर है. उसकी बीवी शन्नो है जो कि घर की और पूरे परिवार की देखबाल

करती है. शन्नो के पिता ने उसकी 19 साल की उम्र में ही शादी करा दी थी. इतनी कम उम्र में शादी होने के बावजूद

अभी भी उनकी शादी शुदा ज़िंदगी अच्छी है. अपनी पहली बच्ची का नाम उन्होने डॉली रखा और कुच्छ साल बाद

उनको दो और बच्चे हुए जिनका नाम उन्होने ललिता और चेतन रखा. डॉली कॉलेज के आखरी साल में है....

ललिता डिस्टेन्स से अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही है मगर फिर भी उसको क्लासस के लिए हर दिन जाना पड़ता है

और चेतन फिलहाल स्कूल में पढ़ रहा है मगर ऐसा स्कूल जिसमे सिर्फ़ लड़के पढ़ते है...

रोज़ की तरह सुबह नारायण 6 बजे उठ कर दौड़ने चला गया. कुच्छ देर बाद शन्नो बिस्तर से सोके उठी और किचन

में जाके सुबह का नाश्ता बनाने लगी. जब तक नारायण दौड़ के आया शन्नो ने चेतन और ललिता दोनो को उठाया

और जल्दी से तैयार होके नाश्ता करने को कहा. चेतन हमेशा की तरह ललिता से लड़ झगड़ के बाथरूम में पहले

घुस गया. ललिता ज़ोर से दरवाज़े को पीटने लगी.... इन दोनो के बीच में कुत्ते बिल्ली जैसी लड़ाई होती रहती थी..

किसी ना किसी बात पर बहस होती रहती थी और कभी कबार हाथा पाई भी.... जैसे की सुबह कभी ललिता टाय्लेट

जल्दी चली जाती थी तो कभी चेतन और दोनो एक दूसरे को सताने के लिए बहुत समय लगाते थे... थोड़ी देर बाद

दोनो अच्छी तरह तैयार होके टाइम से खाना खाने के लिए आ गये. देखते ही देखते घर खाली हो गया.

नारायण ललिता को स्कूटर पे ले गया ताकि वो उसको क्लासस के लिए छोड़ दे और फिर स्कूल चले जाए और

चेतन अपने स्कूल चला गया बस से. ललिता को भी जल्दी जाना था क्यूंकी आज उसका एग्ज़ॅम था...

शन्नो को थोड़ी देर के लिए राहत मिली तो वो आराम करने चली गयी. जब उसकी आँख खुली तब 8:10 हो गये थे

वो जल्दी भागी डॉली के कमरे में उसको उठाने के लिए. जब तक वो पहुचि वहाँ डॉली पहले ही

तयार हो चुकी थी कॉलेज जाने के लिए. शन्नो उसके पास गयी और उसके माथे को हल्के से चूमा

और खाना खाने के लिए बोला. खाने के बाद डॉली भी अपना कॉलेज बॅग उठाके मेट्रो पकड़ने के लिए चली गयी.

शन्नो अकेले रूम में बैठ कर अपनी बेटी के बारे में सोचने लगी.. उसको डॉली पे बहुत नाज़ था और वो चाहती थी

की डॉली अपनी पढ़ाई पूरी करके अपनी ज़िंदगी जिए जो वो खुद नही कर पाई थी .

दूसरी ओर डॉली आनंद विहार स्टेशन पहुचि और जब तक वो प्लॅटफॉर्म पे पहुचि ट्रेन चली गयी थी.

अगली ट्रेन 4 मिनट में थी तो डॉली गर्ल्स कॉमपार्टमेंट की लाइन में जाके खड़ी हो गई.कुच्छ कदम दूर ही एक गार्ड

था जोकि लंबा चौड़ा था और डॉली को देखे जा रहा था. डॉली ने उसको नज़र अंदाज़ करने की कोशिश करी

मगर वो चलके उसके पास आने लगा. तभी मेट्रो आने की आवाज़ आई और डॉली झट से जाके उसमें बैठ गयी.

उस गार्ड ने तो उसको डरा ही दिया था मगर आज वो बहुत खुश थी क्यूंकी उसके बाय्फ्रेंड राज और उसके

रिलेशन्षिप को 6 महीने हो गये थे और वो सीधा उसके घर जाने का सोच रही थी इसीलिए तो उसने

अपनी फॅवुरेट ब्लू जीन्स और ब्लॅक टी-शर्ट ब्लॅक हाइ हील्स के साथ पहनी थी. वो ट्रेन में अपनी पहली मुलाकात

के बारे में सोचने लगी जब वो दोनो मेट्रो में ही मिले थे. डॉली अपनी सहेलिओ के साथ थी और

राज अपने दोस्तो के साथ. डॉली को पहली झलक में राज से प्यार हो गया था. फिर वो सोचने लगी

जब पहली बार राज के घर गयी थी और कैसे राज ने उसको अपनी बाँहो में लेके प्यार किया था.

उस दोपेहर का एक एक पल वो कभी नहीं भूल सकती जब वो दोनो पहली बारी हमबिस्तर हुए थे.

डॉली आज भी अपने आपको राज को सौपने जा रही थी और तभी उसने पर्पल ब्रा और पैंटी पहनी थी जोकि राज

का सबसे पसन्द का रंग है. डॉली लक्ष्मी नगर स्टेशन पे उतरी और राज के घर जाने लगी.

राज आकाश गंगा अपार्टमेंट्स में रहता था अपने मा बाप के साथ मगर उसके मा-बाप सुबह काम के लिए जाते थे

और शाम को ही लौटते थे... डॉली ने घर की बेल बजाई और कुच्छ सेकेंड्स इंतजार किया. थोड़ी देर फिर से बेल बजाई

तो दरवाज़ा खुला और राज के चेहरे का रंग ही उतर गया था डॉली को देख कर. डॉली ने राज को देख कर कहा

अर्रे दरवाज़ा तो खोलो. राज ने ना चाहते हुए भी दरवाज़ा खोला और डॉली घर के अंदर आके उसे लिपट गयी.

तभी रूम में से एक लड़की की आवाज़ आई "राज कौन आया है".. डॉली राज से दूर हो गयी और उसके बेडरूम में गयी.

बिस्तर पे रज़ाई ओढ़ के उसकी सबसे अच्छी सहेली नेहा लेटी हुई थी. नेहा डॉली को देख कर घबडा गई और कुच्छ बोल नही पाई.

डॉली की आँखों में आँसू आ गये और वो घर से बाहर चली गयी. डॉली अपने आपको रोक नहीं पाई

और सीडिओं पे बैठके रोने लगी. राज सीडिओं तक आया उसको चुप करने के लिए और गुस्से में आके

उसने राज को वहीं चाँटा लगा दिया और वहाँ से चली गयी...

पूरे रास्ते उसका ध्यान राज पे था जिसने उसको धोका दिया मगर उससे ज़्यादा उसे अपनी सहेली नेहा पे

गुस्सा आ रहा था.... वो नेहा को सब कुच्छ बताती थी और उसपे हद से ज़्यादा भरोसा करती मगर उसको

अंदाज़ा भी नहीं था कि वो कभी ऐसा कर सकती है... यही सोचते सोचते वो अंजाने में जाके

मेट्रो के नॉर्मल कॉमपार्टमेंट के अंदर चली गयी. इतना शोर सुनके उसका ध्यान भटका और देखा कि

पूरे कॉमपार्टमेंट में लड़के/आदमी थे. और उसके अगले कॉमपार्टमेंट में भी लड़के ही दिख रहे थे.

वो सोच में पड़ गयी कि अब लड़कियों के कॉमपार्टमेंट में जा भी नहीं सकती. डॉली पोल को पकड़के बीच में खड़ी हो गई.

उसने अपना ध्यान भटकाने के लिए इयरफोन्स लगाए और गाने सुनने लग गयी. अगले स्टेशन पे जब ट्रेन रुकी

तो और लोग उसमें चढ़ गये और डॉली सबके बीच पिस गयी. गाने सुनने के कारण डॉली के सिर में दर्द हो रहा था

तो उसने गाने सुनने बंद कर दिए मगर एअर फोन कान से नहीं निकाले. डॉली दोनो गेट के बीचे में

पोल पकड़के खड़ी हुई थी और पोले का सहारा लिए कयि लोग थे. डॉली को लगे जा रहा था कि ये लड़के/आदमी

ज़रूर मेरे हाथ को छुना चाहेंगे और इसी वजह से उसने पोल को सबसे उपर से पकड़ा.

इस ग़लती की वजह से अंजाने में डॉली की टी-शर्ट थोड़ी उपर हो गई और उसकी पतली कमर का नज़ारा दिखाने लगी.

सब लोगो की अंजाने में या जानके नज़र डॉली की कमर पे ही जा रही थी. अगला स्टेशन प्रीत विहार था

और स्टेशन पे जब गाड़ी रुकने वाली थी तभी लोग उतरने के लिए दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगे.

डॉली घबरा गयी और अपने आपको संभालने लगी. 2-3 लोगो से उसका बदन छुआ फिर उसको किसी का

हाथ गान्ड के उपर महसूस हुआ और दूसरे सेकेंड में ही उसकी नंगी कमर को सहलाता हुआ दूसरा हाथ.

डॉली ने जल्दी से अपना शर्ट नीचे करी और घबराके खड़ी हो गयी. उसने पूरी कोशिश करी कि उसकी

घबराहट किसी और को दिखे ना. प्रीत विहार पे जितने लोग उतरे तो उतने चढ़ भी गये. बस अब 2 स्टेशन बचे

थे आनंद विहार स्टेशन आने में और डॉली को उसका ही इंतजार था. धक्को के कारण डॉली दूसरे दरवाज़े

की तरफ हो गयी शीशे के बाहर देखने लगी.वो इतनी चिपकी हुई थी दरवाज़े से की मानो कभी कभी मेट्रो के

झटको के कारण उसके मम्मो और शीशे के बीच में चुंबन हो रहा हो. पर अचानक बड़ी तेज़ ब्रेक की

आवाज़ आई और झटके से मेट्रो रुक गयी. इसी मौके का फ़ायदा उठाके एक 15-16 साल के बच्चे ने डॉली की गान्ड को छुने का मज़ा उठाया. डॉली ने अपने आपको संभाला और तभी अनाउन्स्मेंट हुई

" ज़रूरी सूचना कुच्छ टेक्नीकी खराबी की वजह से मेट्रो का सफ़र रोका गया है. हमे खेद है

और जल्द ही इस समाधान को ठीक कर दिया जाएगा."

मेट्रो पूरी बंद हो चुकी थी हल्का सा अंधेरा भी च्छा गया था और एसी भी बंद हो गये थे.

डॉली ने अपनी आँखें बंद करके दुआ माँगी कि जल्दी सब ठीक हो जाए. गर्मी और दर्द के कारण डॉली ने

अपना कॉलेज बॅग अपने पैरो के पास रख दिया.

फिर से अनाउन्स्मेंट हुई कि "हम कुच्छ ही समय में सफ़र शुरू करदेंगे." डॉली को ये सुनके जान में

जान आई. डॉली का फोन वाइब्रट हुआ और उसने राज का नाम देख कर कट कर्दिआ. दो-तीन बारी कॉल आया और हर

बारी राज का कॉल कट कर दिया. मेट्रो भी चलने लगी और डॉली अब फिर आज सुबह के बारे में सोचने लगी.

जब ट्रेन आखरी स्टेशन पे पहुच गयी तब डॉली आराम से उतरी ताकि फिर धक्का मुक्की में ना फसना पड़े.

तक हारकर डॉली घर पहुचि और उसने बेल बजाई. थोड़ी देर बाद दरवाज़ा चेतन ने खोला.

"ओये तू इतनी जल्दी कैसे आ गया स्कूल से" डॉली ने चेतन से पूछा. चेतन ने कुच्छ नहीं कहा

और सीधा अपने कमरे में गया और दरवाज़ा बंद कर दिया. "अच्छी बात है आगयि तू डॉली" शन्नो गुस्से में बोली.

"क्या हुआ अम्मी" डॉली ने घबराके पूछा. "इस लड़के ने तो हमारा जीना हराम कर रखा है स्कूल

से लेटर आया है कि ये कितने दिनो से स्कूल नही जा रहा है. एक एग्ज़ॅम भी नही दिया इस नालयक ने. नज़ाने कहाँ किसके साथ रहता होगा."

ये बोलके शन्नो अपना सिर पकड़के सोफे पे बैठ गयी. डॉली ने अपनी अम्मी को तसल्ली दी और उसको कहा

की वो चेतन से बात करेगी... चेतन की सबसे चहेती बहन डॉली थी.. जितनी लड़ाई उसकी ललिता से थी उतना

ही प्यार उसका डॉली के साथ था... मगर डॉली के कई बारी दरवाज़े खटखटाने पर भी चेतन ने दरवाज़ा नही खोला.

डॉली आज वैसे ही काफ़ी झेल लिया था और अब वो परेशान होके अपने रूम में चली गयी सोने के लिए.

4 बजे तक घर पे सब शांत था फिर घर की बेल

बजी और शन्नो जल्दी से उठी दरवाज़ा खोलने के लिए.

नारायण और ललिता खड़े थे बाहर और नारायण कुच्छ

ज़्यादा ही गुस्से में था.

"कहा है साहब ज़ादे" नारायण ने चिल्लाके पूछा

शन्नो से. शन्नो ने कहा कि अपने रूम को बंद करके

बैठा हुआ है. नारायण ने भी चेतन को उसके हाल पे

छोड़ दिया और इंतजार किया उसके बाहर निकलने का.

शाम के 6 बज गये थे और डॉली और ललिता दोनो

बिस्तर पे सो रहे थे तभी चेतन ने अपने कमरे का

दरवाज़ा खोला और देखा के उसके अम्मी और पापा दोनो टीवी

देख रहे है. वो चुप चाप जाके सोफे पे बैठ गया.

कुच्छ देर बाद चेतन ने हिम्मत झुटाके पापा कहा और

नारायण ने टीवी बंद कर्दिआ.

"बोलो मैं सुन रहा हूँ" नारायण ने अपनी भारी

आवाज़ में बोला. "मैं मानता हूँ कि मैने स्कूल बंक

किया मगर खुदा की कसम मैने कोई ग़लत काम

नहीं किया. मैं चंदर के घर पे रहता हर समय

आप चाहे तो पूच्छ सकते है". नारायण ने कहा "उसकी

कोई ज़रूरत नहीं है मैने चंदर से पहले ही बात करली

थी और मुझे तुमपे भरोसा है कि तुमने कुच्छ ग़लत

काम नहीं किया होगा. मैं तुम्हारे स्कूल गया था

और बहुत गुज़ारिश करने के बाद तुम्हारी प्रिनिसिपल

ने तुम्हे आखरी मौका दिया है. मगर मुझे ये

बताओ तुमने एग्ज़ॅम क्यूँ नहीं दिए और स्कूल क्यूँ

बंक करा??"

"पापा उस स्कूल में सब मेरा मज़ाक उड़ाते है

और मुझे हर वक़्त परेशान किया जाता है. मुझे

उस स्कूल में तरह तरह के नामो से पुकारा जाता है"

ये बोलके चेतन के आँखों में आँसू आ गये.

नारायण ने समझाया "बेटा इस दुनिया में

कयि बारी तुम्हारे पे मुसीबते आएँगी मगर तुम्हे

उनसे भागना नहीं चाहिए. मेरेलिए तुम फिर से

स्कूल जाके देखो. अब तुम्हे कोई परेशान नहीं

करेगा". केयी कोशिशो के बाद चेतन ने नारायण की

बात मानलि और जाके दोनो के गले लग गया.

रात तक माहौल काफ़ी सुधर गया था. सब अपने अपने

रूम में सोने के लिए चले गये थे. डॉली अपने बिस्तर

पे अकेले नेहा और राज के बारे में सोचने लगी.

उसे एक पल भी नहीं लगा था कि ये दोनो मिलके उसको इतना

बड़ा धोका देंगे. तभी उसका मोबाइल बजा और राज

का मैसेज आया प्लीज़ डॉली फोन उठा लो बहुत ज़रूरी बात

करनी है. डॉली ने काफ़ी देर सोचा और उसको रिप्लाइ करा

कि मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी और तुम्हारी

आवाज़ हरगिज़ नहीं सुननी. राज ने फिर

लिखा की अगर हमारा प्यार सच्चा है तो कल तुम

मुझे अपने कॉलेज के बाहर मिलोगि.... मैं इंतजार

करूँगा... डॉली ने राज के मैसेज का कोई रिप्लाइ नहीं करा.

रात के कुच्छ 12:30 बज रहे होंगे नारायण ने अपनी आँख

खोली और बिस्तर से उठा और अपने रूम के बाहर गया.

पूरे घर में शांति थी.. नारायण अपने कमरे

में आया और आहिस्ते से अपनी अलमारी खोलके ड्रॉयर

में सेकोन्डोम निकाला. शन्नो उसके सामने ही

सीधे पड़े हुए बिस्तर पे सोरहि थी सफेद-हरे

सलवार कुर्ते में. उसने एक पतली सी चादर ओढ़ रखी थी

अपने पेट तक. कसम से काफ़ी मस्त लग रही थी वो

और जब भी वो सासें लेती तो उसके स्तन उपर नीचे

होते रहते नारायण उसके पास जाके खड़ा हो गया

और उसको 5 सेकेंड्स देखकर ही उसका लंड जाग गया.

नारायण अपनी बेगम को चौकाना चाहता था इसीलिए उसने

उसको जगाया नहीं बल्कि धीरे से उसकी चादर

नीचे सरका दी. नारायण ने अपना उल्टा हाथ धीरे से

बढ़ाता और शन्नो के मम्मे पे रख दिया और उसको

उपर नीचे करने लगा. शन्नो के कुच्छ ना करने पर वो

फिर उन्हे दबाने लगा... फिर उसकी मोटी चुचियो को

महसूस करने लगा और वो सख़्त हो गयी... बड़ी कठोरता से

नारायण ने उसकी चुचि को नौचा जिससे शन्नो

बिस्तर पे पलट गयी.... अब शन्नो की मोटी गान्ड उसके

सामने आ गयी थी.. वो नीचे घुटनो के बल बैठा

और अपनी बेगम की गान्ड को महसूस करने लगा..

उसने कुर्ते को उपर करा और सलवार के उपर से उसकी मस्त

गान्ड को सहलाने लगा...

फिर नारायण ने अपनी उंगली शन्नो की गान्ड के बीचकी सड़क

पे चलाने लग गया... शन्नो नींद में ही परेशान होके

फिरसे पलटी...

अब वो नारायण की तरफ मूड गयी थी... नारायण खड़ा

हुआ तो उसका लंड जो कि उसके पाजामे में था, शन्नो

के मुँह की तरफ देख रहा था. नारायण ने पाजामे का

नाडा खोला और अपने लंड को कच्छे में

से बाहर निकाला.. उसका 6.5 इंच का मोटा लंड और बढ़

गया था. वो थोड़ा शन्नो के पास झुका और अपना

लंड शन्नो के गाल पे रखके सहलाने लगा. उसका लंड

शन्नो के गालो को चाट्ता चाट्ता उसके होंठो तक पहुच गया

"हाए जालिम क्या क्या कर रहे हो" शन्नो चौक के बोली.

नारायण ने शन्नो को कॉंडम दिखाया. शन्नो ने गुस्से

में बोला आप जानते है ना कि कभी भी बिना कॉंडम

के लंड नहीं चूस सकती फिर क्यूँ मेरे

मुँह के पास लाए."

नारायण ने कहा "ग़लती हो गई ना बेगम...

चलो ना अब और इंतजार ना कर्वाओ इतने दिन हो

गये है तुम्हे ढंग से देखा भी नहीं".

शन्नो परेशान होके बोली

" नारायण आज नहीं कर सकते मैं बहुत थकि हुई हूँ

पूरा घर सॉफ किया है मैने".

नारायण ने उखड़ के कहा " मैं तुमसे बात नहीं

करूँगा" शन्नो ने प्यार से बोला"ऐसे बच्चो की

तरह बात नहीं करते नारायण... "मैं आज सच्ची में

बहुत थकि हुई हूँ और समय भी बहुत हो गया है

कल उठना भी है सुबह मुझे."

क्रमशः………………..


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raj..
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Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: जिस्म की प्यास

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 03:21

कामुक-कहानियाँ

जिस्म की प्यास--2

गतान्क से आगे……………………………………

नारायण ने अपनी अलमारी खोली और कॉंडम अंदर

फेक दिया और बिस्तर पे लेट गया. शन्नो बिस्तर से

उठी और कॉंडम वापस निकाला और बोली " देखो आज

संभोग तो नहीं कर सकते मगर मैं तुम्हारे

लंड को चूस सकती हूँ". नारायण ने भी सोचा जितना मिल

रहा है उसको तो लिया जाए और कहा "मगर एक

ही शर्त पे तुम्हे मेरा पानी मुँह में लेना होगा".

" नारायण तुम जानते हो ना मैं नहीं कर सकती ये सब"

शन्नो गुस्से में बोली. नारायण ने शन्नो के माथे को चूमा और कहा

कि "मैं ऐसी ही मज़ाक कर रहा था बेगम... मगर हाँ तुम्हारे

बड़े बड़े गोरे गोरे मम्मो पे तो डालूँगा ही"

शन्नो शर्माके बोली "जैसे आपकी मर्ज़ी"... ये बोलके

शन्नो ने नारायण के पाजामे का नाडा खोलके नीचे गिरा

दिया. उसने नारायण को बिस्तर पे बिठाया और मुस्कुराते

हुए उसका कच्छा उतार दिया.

नारायण का काला लंड जो कि सो चुका था उसको शन्नो ने

छुआ और फिर हाथ में लिया. 2-3बारी हिलाने के

बाद लंड थोड़ा बड़ा हो गया और शन्नो ने कॉंडम

पॅकेट मेंसे निकाला उसपे लगा दिया. शन्नो ने हल्के

से चूमा लंड को और आहिस्ते आहिस्ते अंदर लिया. नारायण ने

शन्नो के लंबे बालो को सहलाया और अपनी बेगम के

मज़े लेने लगा.शन्नो अब चूसने लगी थी लंड को

और लंड पूरी तरह बड़ा हो गया था. शन्नो का उल्टा

हाथ लंड को पकड़े हुआ था तो नारायण ने उसके सीधे

हाथ को अपने आंडो को सहलाने में लगा दिया.

नारायण ने शन्नो को बीच में रोका और झटके

से उसने वो कुर्ता उतार फेका जो उसकी बेगम के बड़े

मम्मो को छुपाए हुए था... शन्नो रात में ब्रा

नहीं पहनती थी तो उसके स्तन नारायण की आँखों

के सामने थे.. नारायण अब बिस्तर पे लेट गया था और

शन्नो बिस्तर पे बैठ कर अपने पति का लंड चूस

रही थी... लंड चूसने के साथ साथ उसके बड़े

मम्मे भी हिले जा रहे थे... नारायण ने अपने

हाथ से एक स्तन को दबाना शुरू करा और बीच बीच

में चुचियो को मसलना भी... शन्नो अब पूरे

नशे में लंड को अपने मुँह लिए जा रही थी और नारायण

पूरी तरह गरम हो चुका था कि उसके मुँह से

सिसकियाँ निकल रही थी.. शन्नो ने अपनी चूसने की

रफ़्तार तेज़ करदी. पूरी तेज़ी से शन्नो लंड को चूसने लगी

और नारायण ने

"हट जल्दी" कहा और कॉंडम को लंड से हटा दिया और

अपना वीर्य आधेसे ज़्यादा शन्नो के मुँह पे

जाने दिए.

शन्नो गुस्सा होके टाय्लेट में चली गयी. नारायण

मन ही मन मुस्कुराने लगा. फिर उठ कर कॉंडम

फेका और ज़मीन को सॉफ किया. जैसी ही शन्नो बाहर

निकली तो नारायण ने उसको कुर्ता पहनने को दिया और अपना लंड

सॉफ करने टाय्लेट चला गया. जब वो बाहर निकला तो पूरे

कमरे में अंधेरा था और उसे पता चल गया था

कि शन्नो बहुत गुस्से में है. वो भी फिर जाके बिस्तर

पे सो गया. सुबह पूरे घर में शांति छाई हुई थी. शन्नो नारायण की तरफ देख भी नहीं रही थी. नारायण ने उससे बात

करने की कोशिश करी मगर वो कल रात की वजह से अब भी नारायण से खफा थी. रोज़ की तरह ललिता क्लासस के

लिए और चेतन स्कूल जाने के लिए उठे और लड़ झगरकर नीचे आ गये. शन्नो ने सबको नाश्ता दिया और घर

से बाहर निकाल दिया.

इतने दिनो के बाद आज चेतन स्कूल गया और उसे बड़ा अजीब लग रहा था. सब उससे यही पूछ रहे थे कि वो

इतने दिन आया क्यूँ नहीं. उसने पीछा छुड़ाने के लिए झूठ मूठ कुच्छ बोल दिया...कुच्छ देर बाद सारे लड़के

शीला की जवानी गाने के बारे में बात करने लगे.., सब कटरीना कैफ़ के गोरे और कंचन जिस्म की तारीफ करने लगे...

उनमें से एक तो बोलने लगा कि सल्लू भाई की किस्मत है जो जब चाहे इसको चोद्ते होंगे और तभी दूसरा बोला

ये भी तो रोल के लिए कुतिया की तरह आती होगी उसके पास... चेतन को भी कटरीना पसंद थी मगर जिस तरह ये

लड़के उसके बारे में बात कर रहा थे वो सुनके उसे अच्छा नहीं लग रहा था....

चेतन लड़कियों के मामले में बहुत सीधा था. वो अपनी बहनो के अलावा किसी और लड़की से बात भी नहीं कर

पाता था. ऐसा नहीं था कि उसे ये नहीं पता था कि लंड का असली इस्तेमाल कहाँ करा जाता है या लड़की के जिस्म

में कितने छेद होते है.... उसने इधर उधर से थोडा बहुत सीख ही लिया था... मगर फिर भी इसको सारे स्कूल के

लड़के हिजड़ा बुलाते थे सिवाई इसके सबसे अच्च्चे मित्र चंदर के...

खैर किसी तरह चेतन का दिन बीत रहा था उधर दूसरी और नारायण स्कूल में परेशान हुए जा रहा था.

उसका दिमाग़ बस सेक्स के बारे में सोचे जा रहा था. वो जानता था कि घर जाके उसको आज कुच्छ नहीं

नसीब होगा और ये बात उसको और खाई जा रही थी. मगर वो याद कर रहा था कि शन्नो के चेहरे पे जब उसने

बो वीर्य छिड़का हाए कमाल का नज़ारा था..... फिर वो स्कूल की लड़कियों को स्कर्ट में देख कर और मचले जा रहा था.

स्कूल का आखरी आधा घंटा बचा था जो कि हमेशा फ्री पीरियड होता था. नारायण समय काटने के लिए

क्लास में बैठा कॉपिया चेक कर रहा था. पूरी क्लास में सिर्फ़ 3 लड़किया थी और एक लड़का... बाकी सब बच्चे स्कूल

में कहीं ना कहीं घूम रहे थे. ये जो 3 लड़किया थी इनका नाम रंजना, एकता और सिमरन था. सिमरन पूरे स्कूल

की टॉपर और देखने में बिल्कुल चुहिया जैसी पतली छोटी सी थी. इससे बिकुल अलग रंजना और एकता थी गोरी, गुबारे जैसीफूली हुई और अपनी छोटी 18 साल की उमर में बंब थी. उन दोनो लड़कियों के कयि किस्से सुन रखे थे नारायण ने...

उसका एक मित्र सलीम स्कूल में मथ्स का अध्यापक था... वो तो एकता के बारे में ये तक कहता था कि मार्क्स के

लिए पांडे जी (हिन्दी के टीचर) से चुदवा चुकी है.... नज़ाने इस बात में कितना सच था या नहीं मगर नारायण ने

खुद रंजना को उसके बॉय फ्रेंड के साथ हाथो में हाथ डाले गले मिलते हुए पकड़ा था...

खैर जो लड़का अकेला बैठा था उसका नाम आशीष था जिसको कोई भी पसंद नही करता था क्यूंकी वो हर समय

अकेला चुपचाप बैठा रहता था. अभी भी वो उल्टे हाथ की ओर बैठा हुआ था और ये तीन बिल्कुल सीधे हाथ की ओर.

नारायण की भी कुर्सी बीच में नहीं उल्टे हाथ पे थी ताकि वो पंखे की हवा का आनंद ले सके और साथ ही

साथ तीनो सुन्दरिओ को तिर्छि नज़रों से दर्शन कर सके. पूरी क्लास नारायण को सबसे कूल टीचर मानती थी

तभी तो एकता आराम से डेस्क पे बैठके अपनी सहेलिओ से बतिया रही थी. नारायण ने कॉपिओ को चेक करते हुए देखा कि आशीष एकता की बड़ी मोटी जाँघो को देख रहा है जोकि उसकी स्कर्ट में से हल्की हल्की नज़र आ रही थी. उसने गौर से देखा तो आशीष अपने लंड को भी सहला रहा था एकता को घूरते हुए.... इस द्रिश्य को देख कर नारायण का लंड भी जाग चुका था.

उसने अपने उल्टे हाथ से अपने लंड को ठीक किया. नारायण की नज़रे भी एकता की जाँघो पे पड़ रही थी साथ ही साथ

रंजना और सिमरन के हस्ते चेहरो पर भी. उसे लगा काश वो इन चेहरो पर भी अपना वीर्य छिड़क पाए...

फिर अचानक घंटी बज गयी और स्कूल की छुट्टी हो गयी. नारायण ने सब कुच्छ क्लास की अलमारी में फेंका और ताला

लगा के टाय्लेट चले गया. उसने अपने पैंट की ज़िप खोली और अपने लंड को कच्छा से निकाला और उसको सहलाने लग गया. वो बस ध्यान लगा रहा था एकता के जिस्म पे और अपने लंड को आगे पीछे हिला रहा था. पूरी तरह खो गया था

नारायण और अचानक से उसका वीर्य निकला और दूर जाके गिरा. नारायण का हाथ भी गंदा हो चुका था फिर भी उसको ऐसा लग रहा था कि वो पूरी तरह सॅटिस्फाइ हो गया है. वो टाय्लेट से निकला और क्लास से अपना बॅग लेके घर के लिए रवाना हो गया..

आज नारायण को ललिता को क्लासस से उठाने नहीं जाना था क्यूंकी आज क्लासस देर तक चलनी थी...

वो सीधा तेज़ी से घर क्यूंकी वहाँ से उसको शन्नो के साथ किसी के घर लंच के लिए जाना था...

वैसे जब आपने पढ़ा कि ललिता की क्लासस देर तक चलनी है तब आपके दिमाग़ में ज़रूर गंदे ख़यालात आए

होंगे मगर ऐसा नहीं था वो सिर्फ़ अपने दोस्तो के साथ मर्डर 2 पिक्चर देखने गयी थी... उसके दोस्तो में एक भी

लड़का नहीं था सारी लड़किया थी.... फिलहाल मूवी ख़तम होने में अभी भी घंटा पड़ा था...

बाकियों का तो पता नहीं मगर ललिता गरम हो चुकी इतने सारे सेक्स सीन्स के बाद... ललिता को एमरान हाशमी इतना

भी पसंद नहीं था मगर जिस तरह से वो जक्क़लीन को मज़े दे रहा था वो देख कर तो उसके होश ही उड़ गये थे...

उधर दूसरी ओर नारायण ने शन्नो को घर से उठा लिया था मगर वो अभी उससे बात नहीं कर रही थी...

चेतन घर पे अकेला था तो उसने खाना खाया और अपने कमरे में जाके लेट गया.... ये कमरा काफ़ी बड़ा था क्यूंकी

ये आधा ललिता का भी था... आप सोच रहे होंगे कि ललिता डॉली के साथ क्यूँ नहीं रहती वो इसलिए क्यूंकी पहले

ये कमरा डॉली और ललिता का ही था मगर डॉली को इधर काफ़ी डरावने सपने आया करते थे जिसकी वजह से ये चेतन

के छोटे से कमरे में चली गयी और चेतन इस कमरे में आ गया.. चेतन बिस्तर पे अकेला पड़ा याद कर रहा था

कि उसकी क्लास के लड़के ना जाने क्या क्या बक रहे थे कटरीना कैफ़ के बारे में.. वो एक एक बात याद करने लगा

और उसका लंड भी हिलने लगा... उसको अजीब लगा पहले मगर फिर उसने अपनी आँखें बंद करी और कटरीना कैफ़ के

बारे में सोचने लगा कि कैसे वो उस गाने में कह रही थी ज़रा ज़रा टच मी टच मी किस मी फील मी...

ये सोचके उसका लंड बड़ा होने लगा... उसका हाथ अपने आप ही अपने लंड की तरफ बढ़ा और उससे खेलने लगा...

उसने अपने लंड को शॉर्ट्स में से निकाला खुली हवा में मगर फिर अचानक उसका दिमाग़ में से कटरीना कैफ़ की छवि

मिट गयी और उसकी अपनी बहन डॉली की तस्वीर बन गयी... उसने उसे मिटाना चाहा मगर उसके ज़हेन में

डॉली नंगी खड़ी थी और बोल रही थी ज़रा ज़रा टच मी फील मी किस मी... चेतन ने घबरा के अपनी आँखें खोली और

टाय्लेट गया अपने हाथ धोने के लिए...

उसके टाय्लेट में पानी नहीं आ रहा था तो वो अपने पापा मम्मी के टाय्लेट में गया क्यूँ वोई सबसे पास था...

उसने डेटोल से अपने हाथ धो लिए.. नल बंद करके जब वो बाहर जाने के लिए मुड़ातो उसने सामने पड़ी हुई सफेद रंग

की वॉशिंग मशीन देखी जो ढंग से बंद नहीं थी... उसने उसका ढक्कन खोला तो उसमें सबसे उपर वोई

काली टी-शर्ट और जीन्स थी जो कल डॉली ने पहनी थी... चेतन ने उसपे ध्यान ना देते उसको नीचे दबाने की कोशिश करी

और तभी उसमें से ब्रा थोड़ी बाहर की तरफ आगयि.. वोई पर्पल ब्रा थी चेतन को समझ आ गया था कि ये

उसकी बहन की ही ब्रा है... उसने घबराते हुए मशीन में धकेला और उसका ढक्कन लगाके वहाँ से चला गया...

अब जैसे ही वो अपने रूम में जाने लगा तो घर की घंटी बजी... उसने अपने माथे का पसीना पौछा और दरवाज़ा

खोलते ही उसकी बहन डॉली खड़ी थी... डॉली उसको देख कर ही मुस्कुराइ और उसके गाल खीच दिए...

फिर वो अपने कमरे में चली गयी... चेतन को समझ नहीं आ रहा था कि ये सब हो क्या रहा है उसके साथ..

वो भी अपने कमरे में गया और आँखें बंद करके सो गया...

उधर ललिता मूवी देख कर बाहर निकली तो शाम और रात के बीच का माहौल हो रहा था यानी के हल्का अंधेरा

छा गया आसमान पे.... ललिता की एक दोस्त रिचा उसके घर के पास ही रहती थी तो दोनो ने सोचा कि एक ऑटो कर लेते है

जल्दी पहुच जाएँगे... ऑटो की तलाश में दोनो ने 10 मिनट गवाँ दिए मगर कोई नहीं रुका...

उधर शन्नो का कॉल आया ललिता के मोबाइल पे जिससे ललिता और भी ज़्यादा घबरा गयी... रिचा ने सुझाव दिया कि ऑटो छोड़तेहै रिक्शे में ही चलते है 10 के 20 मिनट लग जाएँगे मगर पहुच तो जाएँगे... उन दोनो ने तुरंत

एक रिक्शे वाला ढूँढा और उसमें बैठ गये..

रिक्शे वाला काफ़ी अच्छी रफ़्तार में चला रहा था और मज़े की बात ये थी कि उसकी रिक्शा के

पिछे धन्नो लिखा हुआ था... मगर साला जहाँ सड़क खराब थी वहाँ भी तेज़ी से चला रहा जिस वजह से रिचा और ललिता

की गान्ड सीट पे उपर नीचे होती रही... फिर कहीं रिक्शा रोक दिया उसने और उतर भागने लगा... इससे पहले दोनो पूछती

कि वो कहाँ जा रहा है वो झाड़ियों के पास जाके मूतने लगा... रिचा हसके बोली "तो इसलिए ये इतनी तेज़ चला रहा था"

दोनो लड़कियाँ ज़ोर से हस्ने लगी और उनकी हँसी उस रिक्शे वाले ने भी सुन ली... उसकी पिशाब की आवाज़ सॉफ कानो

तक पहुच रही थी दोनो लड़कियों के... रिचा से रुका नहीं गया और वो हल्के से हस्ने लग गयी....

फिर वो रिक्शा चलाने वापस आया.. उसने आराम से पहले रिचा को घर छोड़ा और फिर ललिता के घर जाके रुक गया...

उसने 30 रूपर माँगे जोकि एक दम सही भाव था... ललिता ने अपना पर्स खोला और उसके पर्स में 50 का नोट था..

उसने वो नोट उसको देदिया.. उस रिक्शे वाले ने अपनी जेंब में से पैसे की गद्दी निकाली और ललिता की उंगलिओ को छुके

20 का नोट थमा दिया... ललिता को याद आया कि साला वहाँ मूत रहा था और उन हाथो से मेरी उंगलिओ को भी च्छू लिया...

घर पहुच कर ही सबसे पहले उसने अपने हाथ धोए... उसको उम्मीद थी कि आज वो बहुत सुनेगी शन्नो से मगर किसीने

उसको कुच्छ नहीं बोला...

रात को खाना खाने के कुच्छ देर बाद डॉली अपने कमरे से निकली और गंदे बर्तन धोने किचन में गयी....

\ ड्रॉयिंग रूम में चेतन बैठा हुआ टीवी देख रहा था और जब उसे आवाज़ आई बर्तनो की तो उसने सोचा कि दीदी की

कुच्छ मदद कर्दु तो उसने टीवी बंद किया और एक सूखा कपड़ा लेके डॉली के साथ में खड़ा हो गया...

डॉली बर्तन धोके चेतन को दे रही थी और वो उन्हे अच्छी तरह पोछ के रख रहा था....

दोनो इधर उधर की बातें भी कर रहे थे.. डॉली को खुशी थी कि उसका भाई बाकी लड़को की तरह नहीं है

जो घर में सिर्फ़ अनाज खाते है और कुच्छ काम नहीं करते.. अचानक से नलके से पानी 2 सेकेंड के लिए

बंद हो गया और फिर पूरी तेज़ी से आया और उसकी वजह से पानी के छींटे डॉली के उपर आ गये...

उसके कपड़ो पे तो कोई फरक नहीं पड़ा मगर उसके चेहरे पे एक दो छींटे थे... डॉली ने चेतन को उन्हे हटाने

को कहा क्यूंकी वो अपने गंदे हाथो से खुद नहीं कर सकती थी... चेतन ने पहला छिन्टा तो हटा दिया

जोकि डॉली के माथे की तरफ था मगर दूसरे छींटे को हटाते हुए उसके चेहरे पे एक अजीब मुस्कान आ गयी

क्यूंकी जैसे उसने डॉली के कोमल गालो को छुआ छीटा हटाने के लिए उसका लंड भी कछे के अंदर हिल गया...

ना चाहते हुए भी उसकी नज़र डॉली के जिस्म की ओर बढ़ गयी क्यूंकी जिस तरह से वो बर्तन धो रही थी उसका

जिस्म हिले जा रहा था ख़ास तौर से उसके संतरे जैसे स्तन.... उन्हे देखते देखते चेतन के हाथ से वहीं

एक काँच की प्लेट ज़मीन पे गिरी और हर जगह शीशा फेल गया...

चेतन फिर नीचे बैठा शीशा उठाने के लिए तो डॉली बोली

"चेतन तुम मत करो शीशा चुभ जाएगा मैं कर्दुन्गि... तुम टीवी देखो"

चेतन ने डॉली की बात को नज़र अंदाज़ कर दिया और शीशा उठाने लगा...

शीशा उठाते उठाते उसकी नज़र अपनी बेहन की टाँगो पे गयी जिसपे एक भी बाल का नामो निशान नहीं था...

डॉली के बदन का नीचे का हिस्सा एक खाकी रंग की शॉर्ट्स से ढका हुआ था जोकि उसके घुटने तक थी...

चेतन शीशा उठाता हुआ डॉली की टाँग को देखता देखता उनके पास पहुचा तो उसकी उंगली पे बारीक शीशा चुभ गया...

"आउच" निकला चेतन के मुँह से और डॉली ने घबरा के पूछा "क्या हुआ??"

चेतन बोला "कुच्छ नहीं हल्का सा लग गया"

डॉली बोली "बस सुननी तो होती नहीं है तुमको... अंदर तो नहीं घुसा ना??"

चेतन बोला 'पता नही मुझे दीदी"

डॉली के बर्तन भी ख़तम हो गये थे तो उसने अपने हाथ को कपड़े से पौछा और

चेतन की उंगली में शीशा देखने लगी... डॉली ने उसकी उंगली अपने अंगूठे और एक उंगली से पकड़ी

और उसे घूरके देखने लग गयी... "अर्रे कुच्छ नहीं हुआ है बस वो हल्का सा लगा होगा"

ये कहके डॉली ने प्यार से चेतन की उंगली को चूमा और उसके बालो को हिलाते हुए अपने कमरे में चली गयी...

मगर चेतन वहीं खड़ा हुआ रह गया... ऐसा नहीं था कि उसकी दीदी ने कभी उसके गाल को या उंगली को नहीं चूमा था

मगर इस बारी उसको अंदर बड़ा अजीब लगने लगा... कुछ देर बाद वो भी अंदर चला गया सोने के लिए..

क्रमशः………………..

raj..
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Re: जिस्म की प्यास

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 03:30

जिस्म की प्यास--3

गतान्क से आगे……………………………………

देर रात को पूरे घर में सिर्फ़ ड्रॉयिंग रूम की तरफ एक बत्ती जल रही थी...

तीनो कमरो के दरवाज़े बंद हुए थे और कमरो में अंधेरा फेला हुआ था...

ललिता की आँखें बंद थी मगर वो अभी सोई नहीं थी... वो याद कर रही थी मर्डर 2 में जॅक्लिन और एमरान

के हॉट सीन्स को ख़ासतौर से जिस तरह वो एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे....

ललिता बड़े मज़े से अपने बदन के उपरी हिस्सो पे हाथ फेर रही थी (जोकि टॉप से ढका हुआ था)...

मगर वो अपने मम्मो को कभी कबार च्छू रही थी मगर जब भी वो उन्हे छूती उसके बदन में चिंगारी आ जाती....

उसे फिर याद आया कि वो रिक्शे वाला कैसे झाड़ियो के उधर पिशाब कर रहा था..

शायद वो जान बुझ कर गया ताकि दो जवान लड़किया उसको देख पाए... मगर जिस तरह रिचा उसे देख के हंस रही थी

वो ललिता नहीं भूल पा रही थी... जितनी शरम ललिता के चेहरे पे थी उस समय उतनी ही शरारती मुस्कान

रिचा के चेहरे पे थी.... फिर वो सोचने लगी कि ये आदमी भी कहीं पर भी शुरू हो जाते है...

और सबको मज़ा भी आता होगा खुली हवा में मूतने का और क्या पता इनको दिखाने में भी मज़ा आता हो...

तभी बिस्तर से चेतन उठा और ललिता एक दम से डर गयी... चेतन कमरे के बाहर गया तो ललिता के गंदे दिमाग़ में

आया कि ये भी शायद मूतने जा रहा होगा और ये सोचके वो हँसने लग गयी...

चेतन पहले तो टाय्लेट गया मूतने के लिए फिर उसने सोचा नींद तो आ नहीं रही है तो टीवी ही देख लू...

बिल्कुल धीमी आवाज़ पे उसने टीवी देखना शुरू करा...हमेशा की तरह टीवी पे कुच्छ ख़ास नहीं आ रहा था

तो वो गाने सुनने लग गया तो शीला की जवानी गाना आ रहा था... कटरीना कैफ़ को बिस्तर पर एक चादर लपेटे हुए

देख कर उसका दिमाग़ फिर से वहीं चलने लगा... ना चाहते हुए उसने चॅनेल बदल दिया

क्यूंकी वो ऐसा ख़याल नहीं लाना चाहता था.... फिर उसे बाल्कनी की तरफ से कुच्छ आवाज़ आई...

5 सेकेंड बाद फिर से आवाज़ आई तो वो डर गया... वो पहले पापा को उठाने गया मगर वहाँ पर बॅट पड़ा हुआ था

तो वो खुद ही बॅट उठाते हुए बाल्कनी की तरफ बड़ा... धीरे धीरे वो वहाँ पहुचा और उसने दरवाज़े को झट

से खोला तो वहाँ डॉली बैठी हुई थी... चेतन की जान में जान आई मगर उसके हाथ में बॅट देख कर डॉली डर गयी...

"क्या कर रहा है" डॉली ने घबरा के पूछा

चेतन बोला "अर्रे मुझे कुच्छ आवाज़ सी आई तो मैं डर गया मुझे लगा कोई चोर आया है

पागल... मुझे डरा दिया" डॉली हसके बोली

"आप यहाँ क्या कर रहे हो" चेतन ने पूछा

डॉली बोली "कुच्छ नहीं बस बैठी हूँ सितारों को देख रही हूँ"

चेतन भी डॉली की कुर्सी के सामने (थोड़ा सा साइड में) रेलिंग से टिक कर खड़ा हो गया...

डॉली के चेहरे पे चाँद की रोशनी इस तरह पड़ रही थी जैसे किसी खूबसूरत झील पे पड़ रही हो....

फिर डॉली ने पूछा 'क्यूँ कल स्कूल नहीं जाना है क्या?"

चेतन बोला "जाने का मन तो नहीं है मगर जाना पड़ेगा"

डॉली ने फिर पूछा "अच्छा बता तेरी गर्ल फ्रेंड बनी क्या अब तक"

ये सुनके चेतन हँसने लग गया और बोला "मैं आपके अलावा किसी और लड़की से बात भी नहीं करता"

'और ललिता से भी तो करता है" डॉली बोली

"ललिता से तो मैं सिर्फ़ लड़ता हूँ" ये सुनके डॉली हँसने लगी....

डॉली ने अपनी टाँगें रेलिंग पे रख दी ताकि उनको आराम मिल जाए मगर उस वजह से चेतन बौखला गया...

उसकी कोहनी से कुच्छ 5 इंच दूर उसकी दीदी की लंबी टाँगें थी और गौर की बात ये थी डॉली की शॉर्ट्स भी

जाँघो की तरफ से ढीली थी जिस कारण चेतन डॉली के नीचे हिस्से की जाँघ को भी देख सकता था....

चेतन अपनी आँखें फेरके डॉली से बात करने लगा...

डॉली बोली "खड़ा हुआ क्यूँ है बैठ जा यार..." तो चेतन ने ने एक कुर्सी ली अपनी दीदी की तरह रेलिंग पे

पाओ रख के बैठ गया... डॉली चेतन की तरफ पैर करते हुए बोली "देख मेरे पाओ कितने बड़े है तुझसे"

चेतन भी चौक गया ये देख के क्यूंकी डॉली के पाओ काफ़ी बड़े थे... मगर वो हिल गया जब डॉली ने अपना सीधा पाँव

उसके उल्टे पाँव से मिला दिया था दोनो का साइज़ नापने के लिए....

चेतन ने बोला "आप तो चुड़ैल हो इतने बड़े पैर है आपके"

ये सुनके डॉली चेतन से मज़ाक में हाथ पाई करने लगी...

डॉली ने फिर चेतन को रोका पानी पीने के लिए... चेतन भी रुका और डॉली बॉटल से आ करके पानी पीने लगी...

चेतन ने मस्ती में मौके का फ़ायदा उठाके बॉटल के निचले हिस्से पे हाथ मारा और उस बॉटल का

आधा पानी डॉली के मम्मो पे गिर गया... डॉली की टी-शर्ट पूरी तरह गीली हो चुकी थी डॉली ने भी बॉटल का बाकी

पानी चेतन के उपर फेक दिया और दोनो एक दूसरे की हालत पे हँसने लगे...

डॉली बोली "अंदर चल नहीं पापा जाग जाएँगे और हमे बहुत मारेंगे.... डॉली चेतन के आगे आगे चल रही थी...

उसकी टी-शर्ट पूरी तरह उसकी पीठ का हिस्सा बिल्कुल सूखा हुआ था मगर जब वो उस ड्रॉयिंग रूम की लाइट की तरफ आके मूडी तो

उसके बदन से चिपकी हुई थी... और डॉली की चुचियो को देख कर जोकि ठंडे पानी से

इतनी सख़्त हो गई थी कि चेतन अनुमान लगा सकता था कि डॉली की चुचियाँ काफ़ी बड़ी है...

चेतन को इतना तो समझ में आ गया था कि उसकी दीदी ने अंदर कुच्छ नहीं पहेन रखा था...

फिर डॉली अपने कपड़े बदलने के लिए चली और चेतन भी उसे गडनाइट कहके अपने कमरे में चले गया...

इन हसीन पल को याद करते करते उसकी आँख लग गयी....

अगली सुबह सब लोग अपने अपने काम पे चले गये मगर डॉली नहीं गयी क्यूंकी आज कॉलेज का आखरी दिन

और इसके एग्ज़ॅम के लिए छुट्टिया थी... डॉली आराम से 10 बजे तक सोके उठी तो उसकी मम्मी उसके कमरे

में आई और बोली "बेटा तुम्हारी मासी और उनके बच्चे आ रहे है लंच के लिए तो जल्दी उठ जाओ और घर सॉफ

करने में मेरी मदद करो.. डॉली बिस्तर से उठी और घर सॉफ करने में शन्नो की मदद करने लगी...

घर को अच्छी तरह सॉफ करने के बाद डॉली नहाने चली गयी... उसे खुशी थी कि उसकी बुआ और

उसके दो कज़िन्स घर आ रहे थे... उनमें से छोटा "सोनू" से तो वो कुच्छ समय पहले भी मिली

मगर उसके बड़े भाई "मनोज' से वो काफ़ी समय से नहीं मिली थी... खैर वो नहा के आई और अपने कपड़े बदलने लगी....

उसने हरे रंग की कुरती जैसा टॉप पहना और उसके नीचे नीले रंग की जीन्स पहेन ली

उसके अंदर उसने सफेद रंग की ब्रा और पैंटी पहेन रखी थी...

अपने बालो को उसने रिब्बन में बाँध दिया और बैठके टीवी देखने लगी...

उसकी मम्मी खाना बनाते बनाते बोली " डॉली मासी और बच्चे आ रहे है तो कुच्छ खाने पीने के लिए तो ले आ"

एक लंबी साँस लेके डॉली ने टीवी बंद करा और पैसे लेके मार्केट चली गयी....

मार्केट ज़्यादा दूर नहीं थी तो उसने पैदल जाना ठीक समझा... गुप्ता स्टोर्स के अंदर गयी जहाँ से

उसका परिवार हमेशा समान लेता था... वो दुकानदार को समान बताने लगी

तभी पीछे से एक बंदा आकर डॉली की गान्ड पर अपना लंड छुआता हुआ चला गया...

डॉली ने गुस्से से उसकी तरफ देखा तो वो कोई गाओं वाला सा लग रहा था और

डॉली ने सोचा छोटे लोगो के मुँह नहीं लगना चाहिए... फिर उसने कोक चिप्स और बिस्किट्स खरीदे और घर के लिए

रवाना हो गयी....