गन्ने की मिठास compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories, erotic stories. Visit dreamsfilm.ru
rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 11:49

गन्ने की मिठास--13

गतान्क से आगे......................

सुधिया ने जब रामू के मुँह से ऐसी बाते सुनी तो उसका हाथ खुद ही उसकी चूत तक पहुच गया और वह अपनी चूत को

सहलाते हुए सामने देखने लगी,

रमिया- पर भैया तुम तो मा को पूरी नंगी करके उससे चिपकना चाहते होगे ना

रामू- अरे वो तो ठीक है पर मेने अभी तक मा की मस्त चूत भी नही देखी है, मेरा बड़ा मन करता है मा को नंगी

देखने का,

रमिया- भैया तुम मा को नंगी देख सकते हो लेकिन तुम यहाँ खेतो मे आ जाते हो और मा तुम्हारे आने के बाद आँगन

मे बैठ कर कई बार पूरी नंगी ही नहाती है,

रामू- रमिया को अपनी गोद मे अपने लंड पर बैठाता है और रमिया अपनी चूत मे अपने भैया का मोटा लंड एक झटके

मे फसा कर बैठ जाती है, रमिया क्या तूने मा को पूरी नंगी देखा है,

रमिया- हाँ मेने तो कई बार मा को नंगी नहाते हुए देखा है, मा बहुत मोटी और गोरी लगती है,

रमिया- भैया तुम एक काम करो कल खेत पर ना आना और बहाना बना देना कि तुम्हारी तबीयत ठीक नही है, फिर आँगन

के पास वाले कमरे जहाँ अंधेरा रहता है वहाँ से आँगन मे जहाँ मा बैठ कर नहाती है वह बिल्कुल सामने और बहुत

पास मे है, तुम जब वहाँ से मा को नहाते देखोगे तो तुम्हे सब कुछ बहुत साफ दिखाई देगा ऐसा लगेगा जैसे मा

तुम्हारे सामने ही पूरी नंगी होकर नहा रही है, और तुम मा को नंगी देख कर मस्त हो जाओगे,

रामू ने रमिया की बात सुनते ही उसकी चूत मे कस कर लंड पेलते हुए, हे मेरी प्यारी बहना कितना अच्छा रास्ता बताया है

तूने, अब तो मा के नंगे बदन की एक झलक तो मुझे मिल ही जाएगी,

रमिया- आह भैया आज कुछ ज़्यादा ही मोटा और बड़ा लग रहा है तुम्हारा लंड लगता है यह मा को नंगी सोच कर और

बढ़ने लगा है,

मा जब नंगी होती है तो बहुत मस्त नज़र आती है तुम कल जी भर कर अपनी मा को पूरी नंगी देखना, तुम नही जानते मा को नहाने मे बहुत देर लगती है, वह खूब रगड़-रगड़ कर नहाती है, तुम्हारा पानी तो वह नहाते-नहाते ही निकाल देगी

सुधिया- अपने मन मे बेशरम कही की मुझे क्या पता था यह रमिया इतनी बड़ी चुदासी रांड़ निकलेगी, कैसे अपनी छोटी

सी गुलाबी चूत मे अपने भैया का इतना मोटा लंड फसा कर उसकी गोद मे चढ़ि हुई है,

रमिया- अपने भैया के मोटे डंडे पर कूदते हुए, भैया तुम्हे मा को सबसे ज़्यादा कहाँ चूमने का मन होता है,

रामू- मेरा दिल करता है कि मा का खूब शृंगार करके सबसे पहले उसके रसीले होंठो को चूमता हुआ उसकी फूली चूत

अपने हाथो मे भर कर खूब दबाऊ और फिर उसे घोड़ी बना कर खूब कस कर उसकी चूत और गान्ड चातू,

रमिया- भैया अब मेरे उपर चढ़ कर चोदो ना, उसकी बात सुनते ही रामू ने उसे खाट पर लेटा दिया और उसकी चूत मे अपना लंड डाल कर उसे चोदने लगा,

रामू- रमिया क्या मा भी मुझसे चुद्वाने के लिए ऐसे ही तड़पति होगी

रमिया- पता नही पर अगर मा तुमसे कुछ ज़्यादा ही चिपकने की कोशिश करे तो समझ लेना कि उसे तुम्हारा लंड चाहिए

वैसे एक दिन रात को मेने उसे अपनी चूत मे उंगली डालते हुए देखा था फिर मे नींद मे थी तो जल्दी ही सो गई,

रामू- मे तो मा को छुने के लिए भी तरसता रहता हू और उसके डर के मारे रात को भी उससे दूर ही सोता हू

रमिया- अरे भैया तुम तो बेकार ही डरते हो मा तो बहुत पक्की नींद मे सोती है रात को तुम उसकी मोटी गान्ड को खूब कस- कस कर भी सहलाओगे तो भी वह उठने वाली नही है, तुम तो उसके पास ही सोते हो जब मन करे मा की चूत और गान्ड अपने हाथो मे भर कर सहला दिया करो, मा के तो दूध भी कितने मोटे-मोटे है तुम्हारा जब दिल करे मा की छातीयो को मसल दिया करो, उसकी फिकर ना करो वह बड़ी मुश्किल मे उठती है,

रामू- तू सच कह रही है

रमिया- हाँ तुम्हे यकीन ना हो तो आज ही पहले पीछे से मा की भारी गान्ड को सहलाना मा एक घाघरा भर तो पहन कर सोती है तुम्हे तो ऐसा लगेगा जैसे तुम मा के भारी चुतड़ों को पूरा नंगा करके ही सहला रहे हो,

अपने दोनो बच्चो के मुँह से अपने बारे मे इस तरह की बाते सुन कर सुधिया अपनी चूत को खूब ज़ोर-ज़ोर से मसल रही थी और उसे रामू का मोटा तगड़ा लंड रमिया की चूत मे आता हुआ साफ दिखाई दे रहा था, जब रामू रमिया को चोद चुका तब उसने रमिया की चूत को पानी से अच्छी तरह धो कर अपने गम्छे से साफ किया और फिर उसकी चूत को जीभ से चाटते हुए

रामू- रमिया तुझे पता है चूत चाटने मे कितना मज़ा आता है,

रमिया- मुझे मालूम है और तुम्हे भी पता है मुझे तुम्हारा लंड चूसने मे कितना मज़ा आता है, तुम्हारा मोटा

लंड जो औरत एक बार अपनी चूत मे ले ले वह मस्त हो जाएगी,

रामू चल अब जल्दी से हाथ मुँह धो ले कुछ देर मे मा आती ही होगी, उसके बाद रामू अपने काम मे जुट जाता है और फिर सुधिया थोड़ा रुक कर अपने चेहरे पर बनावटी हसी लाकर खाट पर बैठते हुए,

सुधिया- बेटे चल आजा और खाना खा ले,

रमिया- मा आज क्या खाना लाई हो

सुधिया- अपने मन मे खुद से बाते करती हुई, कुतिया अभी इतना मोटा लंड खा रही थी तो तेरा पेट नही भरा

रामू और रमिया जब तक खाना खाते रहे सुधिया वही खाट पर आराम से लेटी रही, उसके बाद वह कुच्छ देर रुकी और फिर

घर आ गई, उसका मन बिल्कुल नही लग रहा था और उसकी आँखो के सामने रामू का मोटा लंड रमिया की चूत मे आता जाता नज़र आ रहा था, बड़ी मुश्किल से दिन गुजरा, रात को सब खा पीकर सो रहे थे तब रामू ने धीरे से अपने हाथ को अपनी मा की घाघरे के अंदर कसी हुई मोटी जाँघो पर रख दिया, अपनी मा की मोटी गुदाज जाँघो को छुते ही रामू का लंड तन कर खड़ा हो गया, रामू कुछ देर अपना हाथ रखे रहा और फिर कुछ देर बाद रामू ने अपनी मा की मोटी जाँघो के गोश्त को अपनी हथेली मे भर कर दबोचा तो सुधिया ने अपनी आँखे खोल कर दुबारा बंद कर ली उसकी उठी हुई गान्ड रामू की तरफ थी और वह रमिया की और मुँह करके लेटी हुई थी,

जब रामू ने अपनी मा की मोटी जाँघो को दबोचा तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई और उसने धीरे से अपने हाथो को उपर की ओर बढ़ा कर अपनी मा की मोटी और गदराई गान्ड पर रखा तो वह मस्त हो गया, उसकी मा की गान्ड बहुत भरी हुई और मस्त थी,

रामू से रहा नही गया और वह अपनी मा के और करीब सरक गया और अब अपने हाथो से अपनी मा की पूरी गान्ड को सहलाने लगा, अभी वह गान्ड के उभार पर ही अपना हाथ फेर रहा था फिर उसने हिम्मत करके अपने हाथ की उंगलियो को थोड़ा सा अपनी मा की गान्ड के छेद पर दबाया तो उसकी उंगली थोड़ा अंदर की ओर दब गई और अब वह बड़े आराम से अपनी मा की गान्ड का छेद और चूत को भी च्छुने लगा,

सुधिया की चूत से पानी आने लगा और उसकी साँसे तेज होने लगी थी, रामू ने धीरे से अपनी मा के कान मे आवाज़ देकर उसे पुकारा लेकिन सुधिया चुपचाप लेटी रही, रामू अब सुधिया की गान्ड और पीठ से पूरी तरह चिपक गया था और उसने अपना हाथ बढ़ा कर अपनी मा के मोटे-मोटे चोली मे कसे हुए चुचो को थाम लिया और उसके गुदाज चुचियो का मज़ा लेने लगा,

रामू काफ़ी देर तक अपनी मा के दूध को दबाता रहा और कभी उसकी गान्ड और कभी उसके गोरे नंगे पेट पर अपना हाथ

चलाता रहा उसका लंड अपनी मा की मोटी गान्ड मे पूरी तरह धसा हुआ था और अपने बेटे के लंड की चुभन अपनी गान्ड

मे महसूस करके सुधिया मस्त हो रही थी और उसका दिल अपनी चूत को मसल्ने का कर रहा था, रामू सुधिया से चिपका हुआ ना जाने कब सो गया और इसी तारह सुधिया को भी नींद आ गई,

सुबह सुधिया ने रामू को जागते हुए उठाया,

सुधिया- चल बेटा उठ जा सूरज सर पर चढ़ गया है, रामू उठ कर बैठ गया और सुधिया चाइ बनाने लगी, उसने अपने

बाल खोल रखे थे और उसकी चोली के उपर के दो बटन खुले हुए थे उसकी छलकती जवानी ने सुबह से ही रामू का लंड

खड़ा कर दिया, उसे अपनी मा को देख कर लगा कि वह नहाने की तैयारी मे है,

सुधिया चाइ लेकर रामू के पास आई ले चाइ पी और इतना आलस क्यो कर रहा है खेत पर नही जाना क्या

रामू- मा आज कुछ तबीयत ठीक नही लग रही है,

सुधिया- उसके चेहरे को अपने हाथो से छु कर देखते हुए क्या हुआ बुखार तो नही है,

रामू- बस मा थोड़ी कमज़ोरी सी लग रही है, बस आराम करने का दिल कर रहा है

सुधिया- उसे अपने सीने से लगाते हुए अच्छा ठीक है तू जा कर उस कमरे मे सो जा मे यहाँ झाड़ू लगा डू,

रामू अंदर वाले कमरे मे आ जाता है और वहाँ से आँगन की और खुलने वाली खिड़की जो बिल्कुल नीचे की तरफ थी और

आँगन मे जहाँ उसकी मा नहाती थी वह जगह बस खिड़की के दूसरी ओर थी, वहाँ से झाँकने पर दूसरी ओर अगर बैठ भी

जाया जाय तो आसानी से नज़र आ जाए,

रामू ने दरवाजे के पास आकर देखा तो सुधिया झाड़ू मार रही थी और उसकी मोटी गान्ड रामू की ओर थी रामू ने अपने लंड

को सहलाते हुए अपनी मा की मटकती गान्ड का मज़ा लेना शुरू कर दिया,

सुधिया- रमिया ले यह कचड़ा बाहर फेंक कर आ मे नहाने जा रही हू

रमिया- मा तुम नहा लो मे तब तक पड़ोस की चाची के यहाँ से आती हू,

सुधिया रामू के कमरे की ओर आती है और रामू जल्दी से बिस्तेर पर लेट जाता है,

सुधिया- उसके पास आकर बैठते हुए उसके सर पर हाथ फेर कर नींद आ रही है क्या

रामू- हाँ मा पूरा बदन टूट रहा है

सुधिया- अच्छा तू आराम कर मे ज़रा नहा लेती हू और फिर सुधिया ने बाहर का दरवाजा लगा दिया और नहाने चली गई,

सुधिया जानती थी कि रामू आज उसको पूरी नंगी देखना चाहता है इसलिए उसकी चूत पहले से ही खूब फूल चुकी थी और इसलिए उसको भी खूब मस्ती सूझ रही थी, रामू ने अपनी आँखे खिड़की के नीचे के छेद से लगा दी और दूसरी और का साफ नज़ारा देखने लगा दूसरी तरफ उसकी मा उसके इतने करीब लग रही थी कि उसका पूरा भरा हुआ शरीर उसे पागल बना रहा था,

सुधिया ने धीरे से अपनी चोली खोल कर अलग कर दी, रामू ने अपनी मा के बड़े-बड़े गतीले दूध देखे तो वह मस्त हो

गया, सुधिया का भरा हुआ जिस्म देख कर रामू ने अपने लंड को अपने हाथ मे लेकर सहलाना शुरू कर दिया सुधिया ने

अब अपने घाघरे का नाडा खोला और मन ही मन खुस होते हुए एक दम से अपना घाघरा छ्चोड़ दिया, रामू के सामने उसकी गदराई मा पूरी नंगी खड़ी थी, रामू ने जब अपनी मा की फूली हुई गुदाज चूत और उसका उठा हुआ पेडू देखा तो उसे ऐसा लगा जैसे उसका पानी अभी निकल जाएगा,

सुधिया अब अपने कपड़े उठाने के लिए झुकी तो उसने एक दम से अपनी भारी गान्ड रामू के मुँह की ओर कर दी और रामू अपनी मा की मस्त मोटी गान्ड और उसके नीचे से उसकी खूब उभरी हुई बड़ी-बड़ी फांको वाली चिकनी चूत देख कर मस्त हो गया, सुधिया अपनी नंगी मोटी गान्ड हिलाती हुई झुक कर बाल्टी मे कपड़े गला रही थी और रामू का दिल कर रहा था कि अपनी मा सुधिया के पीछे बैठ कर उसकी मस्त गान्ड और चूत मे अपना मुँह भर कर खूब दबोचे, सुधिया वही पर उकड़ू बैठ कर कपड़े पर साबुन लगा-लगा कर घिसने लगी और उसका मस्त फूला हुआ भोसड़ा और मोटे-मोटे दूध पूरे उसके बेटे के सामने खुले हुए थे,

सुधिया ने कपड़े धोने के बाद उन्हे निचोड़ने के लिए फिर से अपने भारी चुतड़ों को रामू की ओर करके झुक कर कपड़े

निचोड़ने लगी उसके बाद वह आँगन मे नंगी घूम-घूम कर कपड़े रस्सी मे डालने लगी, जब वह पलट कर जाती तो उसके

भारी भरकम चूतड़ देख कर रामू का दिल करता कि अभी जाकर अपनी मा की गान्ड मे पूरा खड़ा लंड पेल दे, और जब

सुधिया वापस उस और आती तो अपनी मा का उभरा हुआ पेट और पेडू देख कर रामू उसके बदन को चूमने के लिए तड़प

उठता था,

सुधिया कपड़े धोने के बाद आराम से एक उँचे से पत्थर पर बैठ गई और अपनी आइडिया रगड़ने लगी, जब वह अपनी जाँघो

को बार-बार फैला कर अपनी आइडिया रगड़ती तब उसकी चूत की फांके बार-बार कभी खुलती और कभी बंद हो जाती, रामू

बराबर अपने लंड को हिला रहा था, सुधिया ने अब साबुन अपनी जाँघो पर लगाना शुरू किया उसकी चूत खूब पानी छ्चोड़

रही थी और वह अपनी जाँघो को अपनी गान्ड और चूत तक खूब घिस-घिस कर नहा रही थी उसने अपने बदन पर पानी डाला और फिर अपने मोटे दूध पर साबुन लगा कर घिसने लगी, वह हर तरह से रामू को अपना नंगा बदन दिखा रही थी, वह जितना अपने बदन को साबुन से मल रही थी उसकी चूत से उतना ही पानी बह-बह कर बाहर आ रहा था, रामू अपने लंड को मसल्ते हुए अपनी मा की नंगी जवानी का रस पी रहा था,

तभी सुधिया ने अपनी जाँघो को पूरा फैला लिया और अपनी रसीली फूली हुई चूत पर पानी डाल कर उस पर साबुन लगाने लगी, उसकी चूत पूरी चिकनी थी रामू सोच रहा था कि मा की चूत पर एक भी बाल नही है और कितनी फूली और गोरी नज़र आ रही है,

तभी सुधिया ने अपनी चूत की फांको को कुछ इस तरह फैलाया कि रामू को अपनी मा की चूत का लाल चिरा हुआ हिस्सा और उसकी चूत का रस से भीगा लाल-लाल छेद नज़र आने लगा, रामू के मुँह मे पानी भर आया, अपनी मा की रसीली चूत देख कर उससे बर्दास्त नही हुआ और उसने वही अपनी मा की नंगी चूत को देखते हुए मूठ मारना शुरू कर दी,

सुधिया ने जब अपनी चूत पर साबुन लगा कर उसे धोया तो वह एक दम से चमक उठी सुधिया ने दो उंगलिया चूत मे डाल

कर थोड़ा रगड़ा और फिर अपनी चूत पर ठंडा पानी डाल कर उसकी गर्मी को कुछ शांत किया, उसके बाद सुधिया ने अपने भारी चुतड़ों पर साबुन लगा-लगा कर मसलना शुरू कर दिया रामू लगातार अपने लंड को आगे पिछे कर रहा था, तभी

सुधिया ने साबुन मे भीगी अपनी एक उंगली को धीरे से अपनी गुदा मे डाल कर रगड़ा और फिर अपन गान्ड मे पानी डाल कर उसे रगड़-रगड़ कर धोने लगी अपनी मा की मस्त गान्ड का गहरा छेद देख कर रामू को लगा कि अभी वह अपना लंड अपनी मा की मोटी गान्ड मे भर कर उसे खूब कस कर चोद दे और उसका एक दम से पानी निकल गया,

रामू ने अपने लंड को दबा-दबा कर अपना माल निकाल दिया और सुधिया ने भी उधर अपने बदन को सूखे कपड़े से पोछ

कर पेटिकोट और ब्लाउज पहन लिया, तभी किसी ने दरवाजा बजाया और रामू जल्दी से अपने बिस्तेर पर आ कर लेट गया,

बाहर रमिया खड़ी थी और मा ने जब दरवाजा खोला तो वह अंदर आते हुए,

रमिया- मा नहा ली क्या

सुधिया- हाँ मे तो नहा चुकी हू तू रामू से जाकर पुच्छ ले कि वह अभी नहाएगा या देर से और फिर सुधिया अपने काम

मे लग जाती है,

रमिया- धीरे से अंदर जाकर सीधे रामू का लंड पकड़ कर, तुमने सुना मा क्या पूछ रही है, कि रामू से पूछ ले कि वह

अपना लंड अभी दिखाएगा या बाद मे,

रामू- रमिया की छोटी पकड़ कर खिचते हुए, बहुत बोलने लगी है कल चल तू मेरे साथ खेत मे कल तुझे बताता हू,

रमिया- हस्ते हुए आह भैया छ्चोड़ो दर्द हो रहा है,

रामू- बिस्तेर से उठ कर नहाने चला जाता है और रमिया जाकर सब्जिया काटने लगती है सुधिया दूर से रामू के कसरती

बदन को देख रही थी फिर सुधिया चुपके से कमरे की अंदर चली गई तब रमिया ने रामू की ओर धीरे से इशारा कर दिया

और रामू ने अपने लंड को धोती से बाहर निकाल कर जब उस पर साबुन लगा कर मसलना शुरू किया तो सुधिया की साँसे तेज होने लगी जब उसके बेटे का लंड अपनी पूरी औकात पर आ गया तो सुधिया की आँखे खुली की खुली रह गई आज भरपूर रोशनी मे वह अपने बेटे का तना हुआ लंड देख रही थी, उसका लाल सूपड़ा बहुत फूला हुआ था और उसके बड़े-बड़े गोटे लंड से पूरी तरह चिपके हुए थे, उसके लंड की मोटी-मोटी नशे पूरी तरह उभर कर दिखाई दे रही थी, सुधिया अपने बेटे के लंड को देख कर मस्त हो गई तभी रमिया ने रामू की ओर मुस्कुराते हुए देख कर आवाज़ लगाई मा ओ मा

सुधिया जल्दी से कमरे से बाहर आकर क्या है रे क्यो चिल्ला रही है,

रमिया- मा पूरी सब्जी काट लू या बचाउ

सुधिया- पूरी काट ले, सुधिया ने इस बार रामू को इस तरफ़ से देखा तब रामू अपने बदन पर पानी डाल कर नहा चुका था,

उस दिन रामू दिन भर बैचेन रहा और आख़िर मे शाम को वह फिर से हरिया काका के पास पहुच गया,

हरिया- आओ रामू आज खेत नही आए थे का बात है

रामू- पहले अपनी चिलम पिलाओ फिर आगे का हाल बताता हू

हरिया ने चिलम बना कर रामू को दी और रामू ने कश लगाना शुरू कर दिया, रामू की आँखे धीरे-धीरे लाल सुर्ख हो

गई और हरिया उसकी नशीली आँखो को देख कर,

हरिया- वाह बेटा अब तुम हमारे बगल मे बैठने लायक हो गये हो बस एक ही कमी है

रामू- वह क्या

हरिया- यही कि तुम अपनी मा को चोदने का सपना देख रहे हो और मे कई सालो पहले अपनी मा को चोद चुका हू,

रामू- क्या बात कर रहे हो हरिया काका,

हरिया- हाँ बेटा यह सच है, फिर हरिया चिलम का एक गहरा कश खीच कर रामू को देते हुए, बेटा हमारी कहानी तो

बहुत लंबी है हम तुम्हे फिर कभी सुनाएगे,

हरिया- तुम अपनी कहो रामू तुम्हारे क्या हाल है, कोई लोंड़िया चोदने को मिलती है या बस हाथ से ही काम चला रहे हो,

रामू- अरे कहा काका कोई चोदने को मिल जाती तो फिर क्या था, उपर से यह चिलम पीकर तो और भी चोदने का मन करने लगता है,

क्रमशः.............



gataank se aage......................

sudhiya ne jab ramu ke munh se aisi bate suni to uska hath khub hi uski chut tak pahuch gaya aur vah apni chut ko

sahlate huye samne dekhne lagi,

ramiya- par bhaiya tum to ma ko puri nangi karke usse chipakna chahte hoge na

ramu- are vo to thik hai par mene abhi tak ma ki mast chut bhi nahi dekhi hai, mera bada man karta hai ma ko nangi

dekhne ka,

ramiya- bhaiya tum ma ko nangi dekh sakte ho lekin tum yahan kheto me aa jate ho aur ma tumhare aane ke bad aangan

me baith kar kai bar puri nangi hi nahati hai,

ramu- ramiya ko apni god me apne lund par baithata hai aur ramiya apni chut me apne bhaiya ka mota lund ek jhatke

me phasa kar baith jati hai, ramiya kya tune ma ko puri nangi dekha hai,

ramiya- ha mene to kai bar ma ko nangi nahate huye dekha hai, ma bahut moti aur gori lagti hai,

ramiya- bhaiya tum ek kam karo kal khet par na aana aur bahana bana dena ki tumhari tabiyat thik nahi hai, phir aangan

ke pas wale kamre jahan andhera rahta hai vahan se aangan me jahan ma baith kar nahati hai vah bilkul samne aur bahut

pas me hai, tum jab vahan se ma ko nahate dekhoge to tumhe sab kuch bahut saf dikhai dega aisa lagega jaise ma

tumhare samne hi puri nangi hokar naha rahi hai, aur tum ma ko nangi dekh kar mast ho jaoge,

ramu ne ramiya ki bat sunte hi uski chut me kas kar lund pelte huye, hay meri pyari bahna kitna achcha rasta bataya hai

tune, ab to ma ke nange badan ki ek jhalak to mujhe mil hi jayegi,

ramiya- aah bhaiya aaj kuch jyada hi mota aur bada lag raha hai tumhara lund lagta hai yah ma ko nangi soch kar aur

badhne laga hai,

ma jab nangi hoti hai to bahut mast najar aati hai tum kal jee bhar kar apni ma ko puri nangi dekhna, tum nahi jante ma

ko nahane me bahut der lagti hai, vah khub ragad-ragad kar nahati hai, tumhara pani to vah nahate-nahate hi nikal degi

sudhiya- apne man me besharam kahi ki mujhe kya pata tha yah ramiya itni badi chudasi rand niklegi, kaise apni choti

si gulabi chut me apne bhaiya ka itna mota lund phasa kar uski god me chadhi hui hai,

ramiya- apne bhaiya ke mote dande par kudte huye, bhaiya tumhe ma ko sabse jyada kaha chumne ka man hota hai,

ramu- mera dil karta hai ki ma ka khub shrangar karke sabse pahle uske rasile hontho ko chumta hua uski phuli chut

apne hatho me bhar kar khub dabau aur phir use ghodi bana kar khub kas kar uski chut aur gaanD chatu,

ramiya- bhaiya ab mere upar chadh kar chodo na, uski bat sunte hi ramu ne use khat par leta diya aur uski chut me apna

lund dal kar use chodane laga,

ramu- ramiya kya ma bhi mujhse chudwane ke liye aise hi tadapti hogi

ramiya- pata nahi par agar ma tumse kuch jyada hi chipakne ki koshish kare to samajh lena ki use tumhara lund chahiye

vaise ek din rat ko mene use apni chut me ungli dalte huye dekha tha phir me neend me thi to jaldi hi so gai,

ramu- me to ma ko chhune ke liye bhi tarasta rahta hu aur uske dar ke mare rat ko bhi usse dur hi sota hu

ramiya- are bhaiya tum to bekar hi darte ho ma to bahut pakki neend me soti hai rat ko tm uski moti gaanD ko khub kas-

kas kar bhi sahlaoge to bhi vah uthne wali nahi hai, tum to uske pass hi sote ho jab man kare ma ki chut aur gaanD apne

hatho me bhar kar sahla diya karo, ma ke to doodh bhi kitne mote-mote hai tumhara jab dil kare ma ki chhaateeyo ko

masal diya karo, uski fikar na karo vah badi mushkil me uthti hai,

ramu- tu sach kah rahi hai

ramiya- ha tumhe yakin na ho to aaj hi pahle piche se ma ki bhari gaanD ko sahlana ma ek ghaghra bhar to pahan kar soti

hait tumhe to aisa lagega jaise tum ma ke bhari chutdo ko pura nanga karke hi sahla rahe ho,

apne dono bachcho ke munh se apne bare me is tarah ki bate sun kar sudhiya apni chut ko khub jor-jor se masal rahi thi

aur use ramu ka mota tagda lund ramiya ki chut me aata hua saf dikhai de raha tha, jab ramu ramiya ko chod chuka tab

usne ramiya ki chut ko pani se achchi tarah dho kar apne gamchhe se saf kiya aur phir uski chut ko jeebh se chatte huye

ramu- ramiya tujhe pata hai chut chatne me kitna maza ata hai,

ramiya- mujhe malum hai aur tumhe bhi pata hai mujhe tumhara lund chusne me kitna maza aata hai, tumhara mota

lund jo aurat ek bar apni chut me le le vah mast ho jayegi,

ramu chal ab jaldi se hath munh dho le kuch der me ma aati hi hogi, uske bad ramu apne kam me jut jata hai aur phir

sudhiya thoda ruk kar apne chehre par banawati hasi lakar khat par baithte huye,

sudhiya- bete chal aaja aur khana kha le,

ramiya- ma aaj kya khana lai ho

sudhiya- apne man me khud se bate karti hui, kutiya abhi itna mota lund kha rahi thi to tera pet nahi bhara

ramu aur ramiya jab tak khana khate rahe sudhiya vahi khat par aaram se leti rahi, uske bad vah kuchh der ruki aur phir

ghar aa gai, uska man bilkul nahi lag raha tha aur uski aankho ke samne ramu ka mota lund ramiya ki chut me aata jata

najar aa raha tha, badi mushkil se din gujra, rat ko sab kha pikar so rahe the tab ramu ne dhire se apne hath ko apni ma

ki ghaghre ke andar kasi hui moti jangho par rakh diya, apni ma ki moti gudaj jangho ko chhute hi ramu ka lund tan kar

khada ho gaya, ramu kuch der apna hath rakhe raha aur phir kuch der bad ramu ne apni ma ki moti jangho ke gosht ko

apni hatheli me bhar kar dabocha to sudhiya ne apni aankhe khol kar dubara band kar li uski uthi hui gaanD ramu ki taraf

thi aur vah ramiya ki aur munh karke leti hui thi,

jab ramu ne apni ma ki moti jangho ko dabocha to uski himmat aur badh gai aur usne dhire se apne hatho ko upar ki aur

badha kar apni ma ki moti aur gadrai gaanD par rakha to vah mast ho gaya, uski ma ki gaanD bahut bhari hui aur mast thi,

ramu se raha nahi gaya aur vah apni ma ke aur karib sarak gaya aur ab apne hatho se apni ma ki puri gaanD ko sahlane

laga, abhi vah gaanD ke ubhar par hi apna hath pher raha tha phir usne himmat karke apne hath ki ungliyo ko thoda sa

apni ma ki gaanD ke ched par dabaya to uski ungli thoda andar ki aur dab gai aur ab vah bade aaram se apni ma ki gaanD

ka ched aur chut ko bhi chhune laga,

sudhiya ki chut se pani aane laga aur uski sanse tej hone lagi thi, ramu ne dhire se apni ma ke kan me aawaj dekar use

pukara lekin sudhiya chupchaap leti rahi, ramu ab sudhiya ki gaanD aur pith se puri tarah chipak gaya tha aur usne apna

hath badha kar apni ma ke mote-mote choli me kase huye doodh ko tham liya aur uske gudaj doodh ka maza lene laga,

ramu kaphi der tak apni ma ke doodh ko dabata raha aur kabhi uski gaanD aur kabhi uske gore nange pet par apna hath

chalata raha uska lund apni ma ki moti gaanD me puri tarah dhasa hua tha aur apne bete ke lund ki chubhan apni gaanD

me mehsus karke sudhiya mast ho rahi thi aur uska dil apni chut ko masalne ka kar raha tha, ramu sidhiya se chipka hua

na jane kab so gaya aur isi tarh sudhiya ko bhi neend aa gai,

subah sudhiya ne ramu ko jagate huye uthaya,

sudhiya- chal beta uth ja suraj sar par chadh gaya hai, ramu uth kar baith gaya aur sudhiya chai banane lagi, usne apne

bal khol rakhe the aur uski choli ke upar ke do batton khule huye the uski chhalkti jawani ne subah se hi ramu ka lund

khada kar diya, use apni ma ko dekh kar laga ki vah nahane ki taiyari me hai,

sudhiya chai lekar ramu ke pas aai le chai pi aur itna aalas kyo kar raha hai khet par nahi jana kya

ramu- ma aaj kuch tabiyat thik nahi lag rahi hai,

sudhiya- uske chehre ko apne hatho se chhu kar dekhte huye kya hua bukhar to nahi hai,

ramu- bas ma thodi kamjori si lag rahi hai, bas aaram karne ka dil kar raha hai

sudhiya- use apne sine se lagate huye achcha thik hai tu ja kar us kamre me so ja me yahan jhadu laga du,

ramu andar wale kamre me aa jata hai aur vahan se aangan ki aur khulne wali khidki jo bilkul niche ki taraf thi aur

aangan me jahan uski ma nahati thi vah jagah bas khidki ke dusri aur thi, vahan se jhankne par dusri aur agar baith bhi

jaya jay to aasani se najar aa jaye,

ramu ne darwaje ke pas aakar dekha to sudhiya jhadu mar rahi thi aur uski moti gaanD ramu ki aur thi ramu ne apne lund

ko sahlate huye apni ma ki matkti gaanD ka maza lena shuru kar diya,

sudhiya- ramiya le yah kachda bahar phenk kar aa me nahane ja rahi hu

ramiya- ma tum naha lo me tab tak pados ki chachi ke yahan se aati hu,

sudhiya ramu ke kamre ki aur aati hai aur ramu jaldi se bister par let jata hai,

sudhiya- uske pas aakar baithte huye uske sar par hath pher kar neend aa rahi hai kya

ramu- ha ma pura badan tut raha hai

sudhiya- achcha tu aaram kar me jara naha leti hu aur phir sudhiya ne bahar ka darwaja laga diya aur nahane chali gai,

sudhiya janti thi ki ramu aaj usko puri nangi dekhna chahta hai isliye uski chut pahle se hi khub phul chuki thi aur isliye

usko bhi khub masti sujh rahi thi, ramu ne apni aankhe khidki ke niche ke ched se laga di aur dusri aur ka saf najara

dekhne laga dusri taraf uski ma uske itne karib lag rahi thi ki uska pura bhara hua sharir use pagal bana raha tha,

sudhiya ne dhire se apni choli khol kar alag kar di, ramu ne apni ma ke bade-bade gathile doodh dekhe to vah mast ho

gaya, sudhiya ka bhara hua jism dekh kar ramu ne apne lund ko apne hanth me lekar sahlana shuru kar diya sudhiya ne

ab apne ghaghre ka nada khola aur man hi man khus hote huye ek dam se apna ghaghra chhod diya, ramu ke samne uski

gadrai ma puri nangi khadi thi, ramu ne jab apni ma ki phuli hui gudaj chut aur uska utha hua pedu dekha to use aisa

laga jaise uska pani abhi nikal jayega,

sudhiya ne ab apne kapde uthane ke liye jhuki to usne ek dam se apni bhari gaanD ramu ke munh ki aur kar di aur ramu

apni ma ki mast moti gaanD aur uske niche se uski khub ubhari hui badi-badi phanko wali chikni chut dekh kar mast ho

gaya, sudhiya apni nangi moti gaanD hilati hui jhuk kar balti me kapde gala rahi thi aur ramu ka din kar raha tha ki apni

ma sudhiya ke piche baith kar uski mast gaanD aur chut me apna munh bhar kar khub daboche, sudhiya vahi par ukdu baith

kar kapde par sabun laga-laga kar ghisne lagi aur uska mast phula hua bhosda aur mote-mote doodh pure uske bete ke

samne khule huye the,

sudhiya ne kapde dhone ke bad unhe nichodane ke liye phir se apne bhari chutdo ko ramu ki aur karke jhuk kar kapde

nichodane lagi uske bad vah anagan me nangi ghum-ghum kar kapde rassi me dalne lagi, jab vah palat kar jati to uske

bhari bharkam chutd dekh kar ramu ka dil karta ki abhi jakar apni ma ki gaanD me pura khada lund pel de, aur jab

sudhiya vapas us aur aati to apni ma kaubhara hua pet aur pedu dekh kar ramu uske badan ko chumne ke liye tadap

uthta tha,

sudhiya kapde dhone ke bad aaram se ek unche se patthar par baith gai aur apni aidiya ragadne lagi, jab vah apni jangho

ko bar-bar phaila kar apni aidiya ragadti tab uski chut ki phanke bar-bar kabhi khulti aur kabhi band ho jati, ramu

barabar apne lund ko hila raha tha, sudhiya ne ab sabun apni jangho par lagana shuru kiya uski chut khub pani chhod

rahi thi aur vah apni jangho ko apni gaanD aur chut tak khub ghis-ghis kar naha rahi thi usne apne badan par pani dala

aur phir apne mote doodh par sabun laga kar ghisne lagi, vah har tarah se ramu ko

apna nanga badan dikha rahi thi, vah

jitna apne badan ko sabun se mal rahi thi uski chut se utna hi pani bah-bah kar bahar aa raha tha, ramu apne lund ko

masalte huye apni ma ki nangi jawani ka ras pi raha tha,

tabhi sudhiya ne apni jangho ko pura phaila liya aur apni rasili phuli hui chut par pani dal kar us par sabun lagane lagi,

uski chut puri chikni thi ramu soch raha tha ki ma ki chut par ek bhi bal nahi hai aur kitni phuli aur gori najar aa rahi hai,

tabhi sudhiya ne apni chut ki phanko ko kuch is tarah phailaya ki ramu ko apni ma ki chut ka lal chira hua hissa aur uski

chut ka ras se bhiga lal-lal ched najar aane laga, ramu ke munh me pani bhar aaya, apni ma ki rasili chut dekh kar usse

bardast nahi hua aur usne vahi apni ma ki nangi chut ko dekhte huye mutth marna shuru kar di,

sudhiya ne jab apni chut par sabun laga kar use dhoya to vah ek dam se chamak uthi sudhiya ne do ungliya chut me dal

kar thoda ragda aur phir apni chut par thanda pani dal kar uski garmi ko kuch shant kiya, uske bad sudhiya ne apne bhari

chutdo par sabun laga-laga kar masalna shuru kar diya ramu lagatar apne lund ko aage pichhe kar raha tha, tabhi

sudhiya ne sabun me bhigi apni ek ungli ko dhire se apni guda me dal kar ragda aur

phir apn gaanD me pani dal kar use

ragad-ragad kar dhone lagi apni ma ki mast gaanD ka gahra ched dekh kar ramu ko laga ki abhi vah apna lund apni ma ki

moti gaanD me bhar kar use khub kas kar chod de aur uska ek dam se pani nikal gaya,

ramu ne apne lund ko daba-daba kar apna mal nikal diya aur sudhiya ne bhi udhar apne badan ko sukhe kapde se pochh

kar petikot aur blauj pahan liya, tabhi kisi ne darwaja bajaya aur ramu jaldi se apne bister par aa kar let gaya,

bahar ramiya khadi thi aur ma ne jab darwaja khola to vah andar aate huye,

ramiya- ma naha li kya

sudhiya- ha me to naha chuki hu tu ramu se jakar puchh le ki vah abhi nahayega ya der se aur phir sudhiya apne kam

me lag jati hai,

ramiya- dhire se andar jakar sidhe ramu ka lund pakad kar, tumne suna ma kya puch rahi hai, ki ramu se puch le ki vah

apna lund abhi dikhayega ya bad me,

ramu- ramiya ki choti pakad kar khichte huye, bahut bolne lagi hai kal chal tu mere sath khet me kal tujhe batata hu,

ramiya- haste huye aah bhaiya chhodo dard ho raha hai,

ramu- bister se uth kar nahane chala jata hai aur ramiya jakar sabjiya katne lagti hai sudhiya dur se ramu ke kasile

badan ko dekh rahi thi phir sudhiya chupke se kamre ke andar chali gai tab ramiya ne ramu ki aur dhire se ishara kar diya

aur ramu ne apne lund ko dhoti se bahar nikal kar jab us par sabun laga kar masalna shuru kiya to sudhiya ki sanse tej

hone lagi jab uske bete ka lund apni puri aukat par aa gaya to sudhiya ki aankhe khuli ki khuli rah gai aaj bharpur roshni

me vah apne bete ka tana hua lund dekh rahi thi, uska lal supada bahut phula hua tha aur uske bade-bade gote lund se

puri tarah chipke huye the, uske lund ki moti-moti nashe puri tarah ubhar kar dikhai de rahi thi, sudhiya apne bete ke

lund ko dekh kar mast ho gai tabhi ramiya ne ramu ki aur muskurate huye dekh kar aawaj lagai ma o ma

sudhiya jaldi se kamre se bahar aakar kya hai re kyo chilla rahi hai,

ramiya- ma puri sabji kat lu ya bachau

sudhiya- puri kat le, sudhiya ne is bar ramu ko is tarf se dekha tab ramu apne badan par pani dal kar naha chuka tha,

us din ramu din bhar baichain raha aur aakhir me sham ko vah phir se hariya kaka ke pas pahuch gaya,

hariya- aao ramu aaj khet nahi aaye the ka bat hai

ramu- pahle apni chilam pilao phir aage ka hal batata hu

hariya ne chilam bana kar ramu ko di aur ramu ne kash lagana shuru kar diya, ramu ki aankhe dhire-dhire lal surkh ho

gai aur hariya uski nashili aankho ko dekh kar,

hariya- wah beta ab tum hamare bagal me baithne layak ho gaye ho bas ek hi kami hai

ramu- vah kya

hariya- yahi ki tum apni ma ko chodane ka sapna dekh rahe ho aur me kai salo pahle apni ma ko chod chuka hu,

ramu- kya bat kar rahe ho hariya kaka,

hariya- ha beta yah sach hai, phir hariya chilam ka ek gahra kash khich kar ramu ko dete huye, beta hamari kahani to

bahut lambi hai hum tumhe phir kabhi sunayege,

hariya- tum apni kaho ramu tumhare kya hal hai, koi londiya chodane ko milti hai ya bas hath se hi kam chala rahe ho,

ramu- are kaha kaka koi chodane ko mil jati to phir kya tha, upar se yah chilam pikar to aur bhi chodane ka man karne

lagta hai,

kramashah.............


rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 11:50

गन्ने की मिठास--14

गतान्क से आगे......................

हरिया- देखो रामू तुम हमारी बात समझते नही हो इसलिए तकलीफ़ मे रहते हो,

हम तुमको इतना बढ़िया आइडिया दिए थे कि अपनी बहन निम्मो की कसी मस्त जवानी का रस तुम खुद ही पिलो वह लोंड़िया भी मस्त होकर ससुराल जाती और जब कभी वापस आती तो रात दिन तेरे वारे न्यारे रहते, लेकिन तूने कोई प्रयास नही किया अब अगर असली माल चोद्ना चाहता है तो तेरी मा सुधिया सा मस्त माल चोदने को नही मिलेगा, अभी तेरी मा की चूत मे बहुत उठाव है उसे एक तगड़े लंड की ज़रूरत है, उसके चूतड़ नही देखे, लंड खाने को कैसे तड़प रहे है, सच मे रामू तुम्हारी मा सुधिया तुम्हारे जैसे मोटे लंड से चुद्ने के लिए भीतर ही भीतर तड़प रही होगी,

रामू का लंड अपने पूरे ताव पर था और हरिया उसके बदन मे और भी आग लगा रहा था,

हरिया- रामू मे सच कहता हू तेरी मा सुधिया सा मस्त माल नही है, बस ये है कि तुझे चोदने मे थोड़ी मेहनत करनी

पड़ेगी, काफ़ी हेवी शरीर की है, जब तू उसे पूरी नंगी करके उसके बदन से चिपकेगा ना तो ध्यान रखना तेरा लंड कही

पानी ना छ्चोड़ दे,

रामू- पर काका अब मुझे आगे क्या करना चाहिए,

हरिया- देख बेटा दुनिया के सारे कम रात को ही होते है, तू अब बस रात को अपनी मा के बदन से चिपक कर सोया कर और धीरे-धीरे उसकी मोटी गान्ड और गुदाज जाँघो पर हाथ फेर कर मज़ा ले, उसके जाग जाने से डरना नही, अगर वह जाग भी गई तो पहले कुछ समय तक तेरे सहलाने का आनंद ज़रूर लेगी, तू बस उसे रोज रात को हाथ फेर-फेर कर गरम कर, कोशिश कर की उसकी चूत को सहला सके अगर एक बार तूने उसकी चूत को अपने हाथो मे भर कर सहला दिया फिर तो वह खुद अपनी चूत तेरे लिए खोल देगी,

रामू- काका कहते तो तुम ठीक हो मे करके देखता हू,

रामू हरिया के पास से उठ कर घर आ गया,

रात को जब सब आधे घंटे से लेटे हुए थे तब रामू ने एक करवट लेते हुए अपनी टाँगे अपनी मा सुधिया की मोटी जाँघो

के उपर चढ़ा कर रख दी और हाथ को सुधिया की मोटी छातीयो के ठीक उपर रख दिया,

रामू दो मिनट तक ऐसे ही पड़ा रहा उसका लंड पूरी तरह तन चुका था, उसे यकीन हो गया कि मा गहरी नींद मे सो

रही है, रामू ने अपने मुँह को उसके गालो के पास लाकर उसे चूमते हुए अपने हाथ को उसकी मोटी जाँघो के उपर रख कर

हल्के से दबा दिया, रामू ने जब कोई फ़र्क नही देखा तो वह नीचे सरक कर लेट गया और अपने मुँह को अपनी मा की मोटी गान्ड के पीछे दोनो पाटो के बीच लगा दिया, फिर रामू धीरे से उपर सरक कर आया और उसका धोती मे तना हुआ लंड सीधे सुधिया की मोटी गान्ड की दरार मे उसके घाघरे सहित फस गया, सुधिया थोड़ी कसमसाई लेकिन फिर शांत हो गई,

रामू हिम्मत करके अपनी मा की मोटी गान्ड मे अपने लंड को गढ़ाए हुए चिपका रहा, एक हाथ से रामू अपनी मा सुधिया

के उठे हुए पेट और उसकी गहरी नाभि पर चला रहा था, इधर सुधिया की चूत से पानी बह आया और वह चुप चाप

आँखे बंद किए हुए लेटी रही उसे उसके बेटे के लंड की चुभन अपनी गान्ड मे बहुत अच्छी लग रही थी उसकी चूत से

पानी टपकना तो सुबह से ही शुरू था लेकिन अब तो उसके अंदर की चिकनाहट इतनी बढ़ गई थी कि सुधिया से रहा नही जा रहा था,

रामू ने थोड़ी हिम्मत करके सुधिया के मोटे दूध पर रख कर अपनी मा के दूध को अपने हाथो मे पूरी तरह जैसे ही

भरा ना जाने उसकी कमर ने क्यो ऐसा झटका लिया कि सुधिया उस झटके से एक दम मस्त हो गई, रामू ने जब लंड को एक दम

से अपनी मा की चूत के छेद के उपर ठोकर मारी तो सुधिया की चूत का दाना फड़फड़ाने लगा, इधर रामू ने सुधिया को

पूरी तरह अपनी बाँहो मे भर रखा था और नीचे से अपनी मा की मोटी गान्ड मे अपने लंड को पूरी ताक़त से दबाए हुए

था,

सुधिया एक बुत की तरह चुपचाप करवट लिए लेटी थी लेकिन उसकी चूत ने उसकी जाँघो तक पानी पहुचा दिया था,

रामू अपनी मा के गले और गालो को चूमते हुए धीरे-धीरे उसके दूध दबाने लगा, बीच-बीच मे वह दूध की

मोटाई को महसूस करके दूध कुछ तेज दबा देता था और उसी समय उसकी कमर का दबाव भी अपनी मा की मोटी गान्ड की गहराई मे पड़ जाता था, सुधिया मस्ती मे चुपचाप मज़ा ले रही थी लेकिन अब वह एक ही तरीके से लेटे हुए थक गई थी पर रामू था कि उसे छ्चोड़ने का नाम ही नही ले रहा था, रामू उसे अपनी बाँहो मे पूरी तरह लेने के बाद उसे बड़े प्यार

से सहला रहा था,

तभी दूसरी और लेटी हुई रमिया ने खाँसते हुए अचानक करवट ली तो रामू एक दम से अपनी मा को छ्चोड़ कर अलग हो गया

सुधिया एक ही तरह से लेटे हुए थक गई थी इसलिए उसने भी करवट लेते हुए एक दम सीधे लेट गई और दोनो पेर लंबे कर लिए, अब सुधिया का पतला सा घाघरा उसके घुटनो तक चढ़ा हुआ था और उसके घाघरे के उपर से उसकी फूली हुई चूत का उभार साफ नज़र आ रहा था, रामू करवट लेकर लेटे हुए अपनी मा के घाघरे के उस स्थान को देख रहा था जहाँ उसकी मा की चूत का बड़ा सा उभार साफ नज़र आ रहा था, रामू ने धीरे से अपने हाथ को लेजा कर अपनी मा की फूली हुई चूत के उभार पर रख दिया,

अपनी चूत पर सीधे-सीधे अपने बेटे का हाथ पड़ते ही सुधिया मस्त हो गई और अपने मन मे कहने लगी हे बेटा रामू

लगता है तू आज अपनी मा की जान लेने के इरादे से यहाँ लेटा है,

रामू ने धीरे से अपनी मा की चूत को अपने हाथो मे भर कर दबोच लिया और अपने मुँह को अपनी मा के मोटे-मोटे दूध

के उपर रख कर उन्हे हल्के-हल्के दबाने लगा, रामू अब बड़े प्यार से अपनी मा सुधिया की चूत को उसके घाघरे के उपर

से सहला रहा था और सुधिया मस्ती मे मस्त हो रही थी, अब रामू का मन अपनी मा की फूली हुई चूत देखने का करने लगा

और वह धीरे से उठा और अपने हाथो से अपनी मा के घाघरे को उपर की ओर सरकाने लगा, वह बहुत आहिस्ते से अपनी मा के घाघरे को उपर की ओर खींच रहा था, सुधिया रामू की इस हरकत से अंदर ही अंदर शर्म से लाल हुई जा रही थी, लेकिन आज उसका भी दिल कर रहा था कि उसका अपना बेटा उसकी गदराई चूत को अच्छे से देख ले,

रामू ने अपनी मा के घाघरे को उसकी मोटी गुदाज जाँघो तक सरका दिया और फिर रामू ने जब अपनी मा की चूत के उपर से उसका घाघरा हटा कर अपनी मा की मस्त गुदाज पॅव रोटी सी फूली चूत को देखा तो उसके लंड से पानी निकलते-निकलते रह गया, रामू पूरी तरह अपनी मा की चूत को खा जाने की नज़र से देख रहा था, और सुधिया उस वक़्त मस्त हो गई जब उसने धीरे से अपनी आँखे खोल कर अपने बेटे की ओर देखा जो कि उसकी फूली चूत को बड़े प्यार से देखे जा रहा था, रामू से सहन नही हुआ और उसने धीरे से अपनी मा की चूत के उपर अपना मुँह लेजा कर उसकी चूत को पहले अपनी नाक से सूंघने की कोशिश करने लगा और जब उसकी नाक मे उसकी मा की मादक नशीली गांध पहुचि तो उससे रहा नही गया और उसने अपनी मा की फूली हुई चूत पर अपना मुँह रख कर उसे अपने होंठो से दबा दिया,

रामू एक दम मस्त हो गया और वह बार-बार अपने मुँह से अपनी मा सुधिया की फूली हुई चूत को दबा रहा था, सुधिया से

रहा नही जा रहा था और अचानक उसने थोड़ी सी टाँगे खोल दी, जब सुधिया ने थोड़ी सी टाँगे खोली तो रामू ने एक दम से

अपना मुँह अपनी मा की चूत से हटा लिया और कुछ देर अपनी मा को देखता रहा, जब उसे कोई परेशानी नज़र नही आई तब उसने अपनी मा की मस्त मोटी जाँघो को सहलाते हुए उसकी दूसरे टांग की मोटी जाँघो को थोड़ा और फैला दिया, और उसके सामने उसकी मा की पानी छोड़ती चूत नज़र आने लगी,

रामू अपनी मा की मस्त फटी हुई चूत देख कर मस्त हो गया, वह धीरे से अपनी मा की चूत को सहला कर देख रहा था उसका दिल उसे चूमने और चाटने का कर रहा था लेकिन वह जानता था कि अगर उसने चूत चाटने की कोशिश की तो उसकी मा जाग जाएगी, रामू मन मार कर चुप चाप लेट कर अपनी मा की चूत और मोटी गान्ड को अपने हाथो से सहलाता रहा और फिर ना जाने कब उसकी नींद लग गई,

उसके सोने के बाद सुधिया ने रामू के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए उसके चेहरे हो चूम लिया और उसे अपने मोटे-मोटे

दूध मे भर कर दबा लिया, सुधिया की पूरी चूत गीली हो रही थी, वह समझ चुकी थी कि रामू उसे चोद्ना चाहता है

लेकिन वह डर के मारे आगे नही बढ़ सका, वह रामू से अपनी चूत मराने के लिए तड़पने लगती है और उसका हाथ अनायास ही रामू के लंड की और चला जाता है, वह धोती के उपर से ही रामू के ढीले हुए लंड को एक बार पकड़ कर महसूस करती है, लेकिन फिर यह सोचती हुई सो जाती है कि कही रामू जाग ना जाए,

सुबह-सुबह रामू खेतो मे जाने के लिए तैयार हो जाता है तभी सुधिया उससे कहती है बेटा मे भी आज तेरे साथ खेतो

मे चलूंगी, आज का खाना बना कर रमिया लेकर आएगी, और फिर सुधिया भी रामू के साथ चल देती है,

हरिया- क्या बात है सुधिया बहन आज तो तुम भी रामू के साथ यहाँ आ गई हो

सुधिया- अरे क्या करू घर भी तो सूना लगता है इन बच्चो के बिना, और कामिनी नही आई क्या,

हरिया- अरे भाभी वह तो दोपहर का खाना लेकर आएगी, अच्छा बेटा रामू थोड़ी देर बाद ज़रा आना हमारा ये हल काम नही

कर रहा है थोड़ा आकर बनवा देना,

रामू- ठीक है काका यह समान रख कर आता हू,

रामू और सुधिया अपने खेतो मे आ जाते है,

सुधिया को खेत मे छ्चोड़ कर रामू हरिया के पास से होकर आने का कह कर चला जाता है और सुधिया खत पर गुम्सुम

सी बैठ जाती है,

हरिया- रामू को देख कर मुस्कुराते हुए, क्या बात है राजा बाबू आज तो तुम लगता है अपनी मा को खेतो मे ही चोदने के मूड से लेकर आए हो, नही तो तुम्हारी मा कभी खेतो मे आती नही है,

रामू- अरे क्या काका, कौन सी मा अपनी चूत मरवाने आई है वह तो ऐसे ही आ गई,

हरिया- बेटा यह बाल धूप मे ही सफेद नही हुए है, ज़रूर तूने रात को कुछ किया है, तभी तो तेरी मा सुबह से ही इतनी चुदासी दिखाई दे रही है, मेने तो तेरी मा का लाल तमतमाया हुआ चेहरा देखते ही समझ लिया था कि उसके मन मे तेरे लंड से चुदने की इच्छा पेदा हो चुकी है और उसकी आँखो के सामने बस तेरा लंड ही लंड नज़र आ रहा है,

रामू- काका तुम ठीक कह रहे हो पर अब आगे मे क्या करू मे ना तो मा को रात को सोते मे चोद सकता हू और ना उससे अभी जा के कह सकता हू कि मे उसकी चूत मारना चाहता हू,

हरिया- और वह भी तुझसे यह तो कहेगी नही कि बेटा मेरी चूत को अपने मोटे लंड से चोद दे,

रामू- वही तो मे कह रहा हू काका अब बात आगे कैसे बढ़े,

हरिया- कुछ सोचते हुए तू एक काम कर एक आधे घंटे से आ मे तब तक अपनी चिलम बना कर तैयार कर लेता हू फिर मे तुझे कुछ उपाय बताता हू,

रामू हरिया के पास से अपनी मा के पास आ जाता है उसकी मा आराम से खेतो मे जाते पाइप के पानी से अपने पेर धो रही थी और रामू उसके पास जाकर बैठते हुए,

रामू- मा गन्ना चुसेगी,

सुधिया- रामू को कातिल नज़रो से देखते हुए, बेटा अब इस उमर मे मे क्या गन्ना चुसुन्गि

रामू- क्यो तेरी उमर को क्या हुआ है, तू तो मस्त तरीके से गन्ना चूस सकती है, तू नही जानती मेने निम्मो दीदी को खूब मस्त गन्ने चुस्वाए है यहाँ,

सुधिया- रामू को मुस्कुराते हुए देख कर, अपनी बहन को गन्ना चूसा कर तेरा पेट नही भरा जो अब अपनी मा को भी गन्ना चूसाना चाहता है,

रामू- अरे मा यहाँ के गन्ने है ही इतने मीठे और रसीले कि तू एक बार चूस लेगी तो इन गन्नो की मिठास कभी नही भूलेगी और तेरा दिल तो मोटे-मोटे गन्ने चूसने का करेगा,

सुधिया- हस्ते हुए अच्छा ला चूसा दे कहाँ है तेरा गन्ना,

रामू का दिल किया कि वह अपनी धोती मे से अपने लंड को निकाल कर अपनी मा के मुँह मे दे दे लेकिन फिर कुछ सोच कर खेतो के बीच से एक मस्त गन्ना तोड़ कर ले आया और अपनी मा को देते हुए ले तू गन्ना चूस मे अभी आता हू और फिर रामू हरिया काका के पास चला जाता है,

रामू जब हरिया काका के खेत मे जाता है तो उसे वह बाहर नज़र नही आते है तब वह आवाज़ लगाता हुआ झोपड़ी की ओर बढ़ जाता है, तभी झोपड़ी के अंदर से हरिया बाहर आकर हरिया- का बात है रामू कुछ काम है का,

रामू- हा काका काम तो है पर तुम का दिन भर चंदा के संग लगे रहते हो,हरिया- आओ खटिया पर चलते है और रामू के गले मे हाथ डाल कर खटिया पर आकर बैठ जाते है, हरिया अपनी चिलम निकाल कर उसे जलाने की तैयारी करने लगता है,

हरिया- देखो रामू जब अपनी मस्त लोंड़िया के साथ हम यहाँ काम करते है तो हमारा लंड तो उसकी गुलाबी जवानी देख-देख कर वैसे ही खड़ा रहता है तो अब तुम ही बताओ जब लंड खड़ा रहेगा तो बार-बार दिल अपनी लोंड़िया को दबोचने का नही करेगा,

रामू-काका आपकी बात तो एक दम ठीक है पर हमारा भी कुछ भला कर दो ना

हरिया- बोलो क्या करना हैरामु- आज मा भी मेरे साथ आई है, तुम ज़रा खटिया पर चंदा को लाकर थोड़ा मज़े करो और मे जाकर मा को किसी बहाने इधर से लेकर निकालूँगा और फिर तुम समझ गये कि नही काका,

हरिया- चिलम जलाते हुए बेटा बात तो तू एक दम ठीक कह रहा है पर कही चंदा के साथ मुझे देख कर तेरी मा ने हल्ला मचा दिया क़ी बाप बेटी पर चढ़ा है तो,

रामू- हस्ते हुए क्या काका अब तुम डरने लगे,हरिया- अरे डर कौन रहा है ठीक है जैसी तेरी मर्ज़ी हो हमे इशारा कर देना हम तैयार हो जाएगे.रामू वहाँ से वापस आता है तो अचानक अपनी मा को खाट से खड़ा होते देख एक दम से गन्ने के पीछे छिप जाता है और देखने लगता है,

सुधिया किसी मस्तानी घोड़ी की तरह चलती हुई अपने घाघरे के उपर से अपनी गान्ड मसल्ते हुए आगे बढ़ती हुई उस और जाती है जहाँ नहाने के लिए पत्थर रखे हुए थे और वहाँ जाकर वह एक दम से अपना घाघरा उपर उठा कर इधर उधर एक नज़र मारती है और फिर अपनी चूत को अपने हाथो से सहलाते हुए देखती है और वही बैठ जाती है,

रामू अपनी मा की मस्त मोटी नंगी गान्ड देख कर पागल हो जाता है और अपने लंड को धोती के उपर से सहलाते हुए अपनी रंडी मा की जवानी को घूर्ने लगता है उसके सामने उसकी मा के भारी चूतड़ साफ खुले नज़र आते है और उसकी चूतड़ की गहराई को देख कर उसका लंड झटके मारने लगता है तभी सुधिया अपने घाघरे को आगे से थोड़ा उपर करके अपनी फूली हुई चूत को देखती है और फिर एक मोटी धार मार कर मूतने लगती है उसके मूतने से रामू के सुनसान खेत मे जब मस्त सीटी की आवाज़ गूँजती है तो रामू के होश खोने लगते है,

सुधिया वही कुछ देर तक मुत्ती रहती है और उसकी चूत से रह-रह कर पेशाब बाहर निकलता है, रामू अपनी मा की मस्त फूली हुई गुलाबी चूत को देख कर अपने लंड को बराबर सहलाए जा रहा था, सुधिया कुछ देर मूतने के बाद वही गड्ढे मे भरे पानी से अपनी चूत को सहला-सहला कर धोने लगती है और रामू अपनी मा की चूत की गुलाबी घाटी को बड़े प्यार से घूर कर देखता हुआ अपना लंड सहला रहा था,

कुछ देर सुधिया अपनी फूली चूत को वही बैठी-बैठी रगड़ती है और फिर खड़ी होकर अपनी चूत को अपने घाघरे से पोंछ कर वापस से खाट की तरफ चल देती है,थोड़ी देर बाद रामू आकर अपनी मा के पास बैठ जाता है और सुधिया इधर-उधर का नज़ारा देखते हुए, बेटे निम्मो ने भी खूब गन्ने चूसे होंगे ना,रामू- हाँ मा दीदी तो मस्त गन्ने चुस्ती थी,

उसे मेने खूब मस्त तरीके से गन्ने चुस्वाए है

,सुधिया- वह कायसेरामू- खड़ा होकर तुझे चूसना है क्या

सुधिया- चूसा दे रामू- तो फिर हमे गन्नो के खेत मे घुस कर कोई मस्त गन्ना ढूँढना पड़ेगा, बोल ढूँढेगी

,सुधिया- पर तुझे भी मेरे पीछे-पीछे आना पड़ेगा,

रामू मे तो तेरे पिछे ही रहूँगा तू खुद मस्त वाला गन्ना ढूँढ लेना, और फिर रामू ने अपनी मा का हाथ पकड़ कर कहा चल और सुधिया उसके साथ चलने लगी,

रामू रुक गया और उसने अपनी मा सुधिया को गन्ने के खेत मे घुसेड दिया, रामू का खेत काफ़ी बड़ा था और खेत के सामने वाले हिस्से मे हरिया का खेत जुड़ा हुआ था और बीच मे गन्नो के कारण दोनो की झोपडिया तक नज़र नही आती थी,

रामू अपनी मा को हरिया की ओर जाने वाले हिस्से मे घुसेड कर उसके पिछे चलने लगा,

रामू- मा कोई गन्ना पसंद आ रहा है

सुधिया- देख रही हू

रामू अपनी मा को एक हाथ से पकड़े हुए दूसरे हाथ से गन्ने हटा-हटा कर आगे बढ़ रहे थे रामू अपने हाथ को कभी अपनी मा की मोटी गान्ड पर फेर देता कभी उसकी नंगी कमर पर और जब सुधिया एक दम से रुकती तो रामू पूरा उसके उपर चला आता था,

अब हरिया काका का खेत बस थोडा ही बचा था, उधर हरिया ने चंदा को अपनी गोद मे बैठा लिया और उसके गाल चूमते हुए उसके मोटे-मोटे दूध दबाने लगा, चंदा अपने बाबा द्वारा इस तरह कस-कस कर अपनी ठोस और मोटी चुचिया दबाए जाने से बहुत चुदासी हो गई थी और उसने अपना हाथ अपने बाबा की धोती मे डाल कर उसका मस्त तना हुआ लंड बाहर निकाल लिया,

अब चंदा अपने दोनो हाथो से अपने बाबा के लंड के टोपे को कभी उपर कभी नीचे करने लगी जब अपने बाबा के लंड का लाल बड़ा सा सूपड़ा एक दम से फूल गया तब चंदा ने उस फूले सूपदे को एक दम से अपने मुँह मे भर कर रस से भिगो दिया,

चंदा अपने बाबा के लंड को बराबर चूस रही थी और हरिया अपनी बेटी की मोटी गान्ड को फैला कर चाट रहा था, तभी हरिया ने खाट पर बैठे-बैठे चंदा को कमर से पकड़ कर उठा लिया और उसकी दोनो जाँघो को अपने मुँह मे भर कर उसकी चूत और गान्ड को चूसने लगा, नीचे झुकी हुई चंदा ने अपने बाबा का लंड पकड़ कर उसे अपने मुँह मे भर लिया,

चंदा अपने बाबा के सीने से उल्टी होकर चिपकी हुई अपने बाबा को अपनी चूत और गान्ड चटा रही थी और नीचे अपने बाबा का लंड पीते हुए उसके मोटे-मोटे गोटे सहला रही थी,

रामू ने एक दम से अपनी मा सुधिया की मोटी गान्ड को दोनो हाथो से थाम लिया और मा रूको एक मिनिट कुछ आवाज़ आ रही है और अपनी मा के बिल्कुल करीब आ गया, रामू का लंड उसकी धोती मे खड़ा होकर अपनी मा की मोटी गान्ड जो कि सिर्फ़ एक पतले से घाघरे से धकि थी मे घुसने लगा,

क्रमशः.............



gataank se aage......................

hariya- dekho ramu tum hamari bat samajhte nahi ho isliye taklif me rahte ho,

hum tumko itna badhiya idea diye the ki apni bahan nimmo ki kasi mast jawani ka ras tum khud hi pilo vah londiya bhi

mast hokar sasural jati aur jab kabhi vapas aati to rat din tere ware nyare rahte, lekin tune koi prayas nahi kiya ab agar

asli mal chodna chahta hai to teri ma sudhiya se mast mal chodane ko nahi milega, abhi teri ma ki chut me bahut uthav

hai use ek tagde lund ki jarurat hai, uske chutd nahi dekhe, lund khane ko kaise tadap rahe hai, sach me ramu tumhari

ma sudhiya tumhare jaise mote lund se chudne ke liye bhitar hi bhitar tadap rahi hogi,

ramu ka lund apne pure tav par tha aur hariya uske badan me aur bhi aag laga raha tha,

hariya- ramu me sach kahta hu teri ma sudhiya se mast mal nahi hai, bas ye hai ki tujhe chodane me thodi mehnat karni

padegi, kaphi heavy sharir ki hai, jab tu use puri nangi karke uske badan se chipkega na to dhyan rakhna tera lund kahi

pani na chhod de,

ramu- par kaka ab mujhe aage kya karna chahiye,

hariya- dekh beta duniya ke sare kam rat ko hi hote hai, tu ab bas rat ko apni ma ke badan se chipak kar soya kar aur

dhire-dhire uski moti gaanD aur gudaj jangho par hath pher kar maza le, uske jag jane se darna nahi, agar vah jag bhi gai

to pahle kuch samay tak tere sahlane ka anand jarur legi, tu bas use roj rat ko hath pher-pher kar garam kar,

koshish kar ki uski chut ko sahla sake agar ek bar tune uski chut ko apne hatho me bhar kar sahla diya phir to vah

khud apni chut tere liye khol degi,

ramu- kaka kahte to tum thik ho me karke dekhta hu,

ramu hariya ke pas se uth kar ghar aa gaya,

rat ko jab sab aadhe ghante se lete huye the tab ramu ne ek karwat lete huye apni tange apni ma sudhiya ki moti jangho

ke upar chadha kar rakh di aur hath ko sudhiya ki moti chhaateeyo ke thik upar rakh diya,

ramu do munute tak aise hi pada raha uska lund puri tarah tan chuka tha, use yakin ho gaya ki ma gahri neend me so

rahi hai, ramu ne apne munh ko uske galo ke pas lakar use chumte huye apne hath ko uski moti jangho ke upar rakh kar

halke se daba diya, ramu ne jan koi fark nahi dekha to vah niche sarak kar let gaya aur apne munh ko apni ma ki moti

gaanD ke piche dono pato ke beech laga diya, phir ramu dhire se upar sarak kar aaya aur uska dhoti me tana hua lund

sidhe sudhiya ki moti gaanD ki darar me uske ghaghre sahit fas gaya, sudhiya thodi kasmasai lekin phir shant ho gai,

ramu himmat karke apni ma ki moti gaanD me apne lund ko gadaye huye chipka raha, ek hath se ramu apni ma sudhiya

ke uthe huye pet aur uski gahri nabhi par chala raha tha, idhar sudhiya ki chut se pani bah aaya aur vah chup chap

aankhe band kiye huye leti rahi use uske bete ke lund ki chubhan apni gaanD me bahut achchi lag rahi thi uski chut se

pani tapakna to subah se hi shuru tha lekin ab to uske andar ki chiknahat itni badh gai thi ki sudhiya se raha nahi ja raha

tha,

ramu ne thodi himmat karke sudhiya ke mote doodh par rakh kar apni ma ke doodh ko apne hatho me puri tarah jaise hi

bhara na jane uski kamar ne kyo aisa jhatka liya ki sudhiya us jhatke se ek dam mast ho gai, ramu ne jab lund ko ek dam

se apni ma ki chut ke ched ke upar thokar mari to sudhiya ki chut ka dana fadfadane laga, idhar ramu ne sudhiya ko

puri tarah apni banho me bhar rakha tha aur niche se apni ma ki moti gaanD me apne lund ko puri takat se dabaye huye

tha,

sudhiya ek but ki tarah chupchaap karwat liye leti thi lekin uski chut ne uski jangho tak pani pahucha diya tha,

ramu ne apni ma ke gale aur galo ko chumte huye dhire-dhire uske doodh dabane laga, beech-beech me vah doodh ki

motai ko mehsus karke doodh kuch tej daba deta tha aur usi samay uski kamar ka dabav bhi apni ma ki moti gaanD ki

gahrai me pad jata tha, sudhiya masti me chupchaap maza le rahi thi lekin ab vah ek hi tarike se lete huye thak gai thi

par ramu tha ki use chhodne ka nam hi nahi le raha tha, ramu use apni banho me puri tarah lene ke bad use bade pyar

se sahla raha tha,

tabhi dusri aur leti hui ramiya ne khaste huye achanak karwat li to ramu ne ek dam se apni ma ko chhod kar alag ho gaya

sudhiya ek hi tarah se lete huye thak gai thi isliye usne bhi karwat lete huye ek dam sidhe let gai aur dono per lambe kar

liye, ab sudhiya ka patla sa ghaghra uske ghutno tak chadha hua tha aur uske ghaghre ke upar se uski phuli hui chut ka

ubhar saf najar aa raha tha, ramu karwat lekar lete huye apni ma ke ghaghre ke us sthan ko dekh raha tha jahan uski ma

ki chut ka bada sa ubhar saf najar aa raha tha, ramu ne dhire se apne hath ko lejakar apni ma ki phuli hui chut ke ubhar

par rakh diya,

apni chut par sidhe-sidhe apne bete ka hath padte hi sudhiya mast ho gai aur apne man me kahne lagi hay beta ramu

lagta hai tu aaj apni ma ki jan lene ke irade se yahan leta hai,

ramu ne dhire se apni ma ki chut ko apne hatho me bhar kar daboch liya aur apne munh ko apni ma ke mote-mote doodh

ke upar rakh kar unhe halke-halke dabane laga, ramu ab bade pyar se apni ma sudhiya ki chut ko uske ghaghre ke upar

se sahla raha tha aur sudhiya masti me mast ho rahi thi, ab ramu ka man apni ma ki phuli hui chut dekhne ka karne laga

aur vah dhire se utha aur apne hatho se apni ma ke ghaghre ko upar ki aur sarkane laga, vah bahut ahiste se apni ma

ke ghaghre ko upar ki aur khinch raha tha, sudhiya ramu ki is harkat se andar hi andar sharm se lal hui ja rahi thi, lekin

aaj uska bhi dil kar raha tha ki uska apna beta uski gadrai chut ko achche se dekh le,

ramu ne apni ma ke ghaghre ko uski moti gudaj jangho tak sarka diya aur phir ramu ne jab apni ma ki chut ke upar se

uska ghaghra hata kar apni ma ki mast gudaj pav roti si phuli chut ko dekha to uske lund se pani nikalte-nikalte rah

gaya, ramu puri tarah apni ma ki chut ko kha jane ki najar se dekh raha tha, aur sudhiya us waqt mast ho gai jab usne

dhire se apni aankhe khol kar apne bete ki aur dekha jo ki uski phuli chut ko bade pyar se dekhe ja raha tha, ramu se

sahan nahi hua aur usne dhire se apni ma ki chut ke upar apna munh lejakar uski chut ko pahle apni nak se sunghne ki

koshish karne laga aur jab uski nak me uski ma ki madak nashili gaanDh pahuchi to usse raha nahi gaya aur usne apni ma

ki phuli hui chut par apna munh rakh kar use apne hontho se daba diya,

ramu ek dam mast ho gaya aur vah bar-bar apne munh se apni ma sudhiya ki phuli hui chut ko daba raha tha, sudhiya se

raha nahi ja raha tha aur achanak usne thodi si tange khol di, jab sudhiya ne thodi si tange kholi to ramu ne ek dam se

apna munh apni ma ki chut se hata liya aur kuch der apni ma ko dekhta raha, jab use koi parehsani najar nahi aai tab

usne apni ma ki mast moti jangho ko sahlate huye uski dusre tang ki moti jangho ko thoda aur phaila diya, aur uske

samne uski ma ki pani chhodti chut najar aane lagi,

ramu apni ma ki mast fati hui chut dekh kar mast ho gaya, vah dhire se apni ma ki chut ko sahla kar dekh raha tha uska

dil use chumne aur chatne ka kar raha tha lekin vah janta tha ki agar usne chut chatne ki koshish ki to uski ma jag

jayegi, ramu man mar kar chup chap let kar apni ma ki chut aur moti gaanD ko apne hatho se sahlata raha aur phir na

jane kab uski neend lag gai,

uske sone ke bad sudhiya ne ramu ke sar par pyar se hath pherte huye uske chehre ho chum liya aur use apne mote-mote

doodh me bhar kar daba liya, sudhiya ki puri chut gili ho rahi thi, vah samajh chuki thi ki ramu use chodna chahta hai

lekin vah dar ke mare aage nahi badh saka, vah ramu se apni chut marane ke liye tadapne lagti hai aur uska hath anayas

hi ramu ke lund ki aur chala jata hai, vah dhoti ke upar se hi ramu ke dhile huye lund ko ek bar pakad kar mehsus karti

hai, lekin phir yah sochti hui so jati hai ki kahi ramu jag na jaye,

subah-subah ramu kheto me jane ke liye taiyar ho jata hai tabhi sudhiya usse kahti hai beta me bhi aaj tere sath kheto

me chalungi, aaj ka khana bana kar ramiya lekar aayegi, aur phir sudhiya bhi ramu ke sath chal deti hai,

hariya- kya bat hai sudhiya bahan aaj to tum bhi ramu ke sath yahan aa gai ho

sudhiya- are kya karu ghar bhi to suna lagta hai in bachcho ke bina, aur kamini nahi aai kya,

hariya- are didi vah to dophar ka khana lekar aayegi, achcha beta ramu thodi der bad jara aana hamara ye hal kam nahi

kar raha hai thoda aakar banwa dena,

ramu- thik hai kaka yah saman rakh kar aata hu,

ramu aur sudhiya apne kheto me aa jate hai,

sudhiya ko khet me chhod kar ramu hariya ke pas se hokar aane ka kah kar chala jata hai aur sudhiya khat par gumsum

si baith jati hai,

hariya- ramu ko dekh kar muskurate huye, kya bat hai raja babu aaj to tum lagta hai apni ma ko kheto me hi chodane ke mood se lekar aaye ho, nahi to tumhari ma kabhi kheto me aati nahi hai,

ramu- are kya kaka, kaun sa ma apni chut marwane aai hai vah to aise hi aa gai,

hariya- beta yah bal dhup me hi safed nahi huye hai, jarur tune rat ko kuch kiya hai, tabhi to teri ma subah se hi itni chudasi dikhai de rahi hai, mene to teri ma ka lal tamtamaya hua chehra dekhte hi samajh lliya tha ki uske man me tere lund se chudne ki icchcha peda ho chuki hai aur uski anakho ke samne bas tera lund hi lund najar aa raha hai,

ramu- kaka tum thik kah rahe ho par ab aage me kya karu me na to ma ko rat ko sote me chod sakta hu aur na usse abhi ja ke kah sakta hu ki me uski chut marna chahta hu,

hariya- aur vah bhi tujhse yah to kahegi nahi ki beta meri chut ko apne mote lund se chod de,

ramu- vahi to me kah raha hu kaka ab bat aage kaise badhe,

hariya- kuch sochte huye tu ek kam kar ek aadhe ghante se aa me tab tak apni chilam bana kar taiyar kar leta hu phir me tujhe kuch upay batata hu,

ramu hariya ke pas se apni ma ke pas aa jata hai uski ma aaram se kheto me jate pipe ke pani se apne per dho rahi thi aur ramu uske pas jakar baithte huye,

ramu- ma ganna chusegi,

sudhiya- ramu ko katil najro se dekhte huye, beta ab is umar me me kya ganna chusungi

ramu- kyo teri umar ko kya hua hai, tu to mast tarike se ganna chus sakti hai, tu nahi janti mene nimmo didi ko khub mast ganne chuswaye hai yahan,

sudhiya- ramu ko muskurate huye dekh kar, apni bahan ko ganna chusa kar tera pet nahi bhara jo ab apni ma ko bhi ganna chusana chahta hai,

ramu- are ma yahan ke ganne hai hi itne meethe aur rasile ki tu ek bar chus legi to in ganno ki mithas kabhi nahi bhulegi aur tera dil ro mote-mote ganne chusne ka karega,

sudhiya- haste huye achcha la chusa de kaha hai tera ganna,

ramu ka dil kiya ki vah apni dhoti me se apne lund ko nikal kar apni ma ke munh me de de lekin phir kuch soch kar kheto ke beech se ek mast ganna tod kar le aaya aur apni ma ko dete huye le tu ganna chus me abhi aata hu aur phir ramu hariya kaka ke pas chala jata hai,

ramu jab hariya kaka ke khet me jata hai to use vah bahar najar nahi aate hai tab vah aawaj lagata hua jhopdi ki aur badh jata hai, tabhi jhopadi ke andar se hariya bahar aakar hariya- ka bat hai ramu kuch kam hai ka,

ramu- ha kaka kam to hai par tum ka din bhar chanda ke sang lage rahte ho,hariya- aao kahtiya par chalte hai aur ramu ke gale me hath dal kar khatiya par aakar baith jate hai, hariya apni chilam nikal kar use jalane ki taiyari karne lagta hai,

hariya- dekho ramu jab apni mast londiya ke sath hum yahan kam karte hai to hamara lund to uski gulabi jawani dekh-dekh kar vaise hi khada rahta hai to ab tum hi bataao jab lund khada rahega to bar-bar dil apni londiya ko dabochne ka nahi karega,

ramu-kaka aapki bat to ek dam thik hai par hamara bhi kuch bhala kar do nahariya- bolo kya karna hairamu- aaj ma bhi mere sath aai hai, tum jara khatiya par chanda ko lakar thoda maje karo aur me jakar ma ko kisi bahane idhar se lekar niklunga aur phir tum samajh gaye ki nahi kaka,

hariya- chilam jalate huye beta bat to tu ek dam thik kah raha hai par kahi chanda ke sath mujhe dekh kar teri ma ne halla macha diya ki bap beti bap chadha hai to,

ramu- haste huye kya kaka ab tum darne lage,hariya- are dar kaun raha hai thik hai jaisi teri marji ho hame ishara kar dena hum taiyar ho jayege.ramu vahan se vapas aata hai to achanak apni ma ko khat se khada hote dekh ek dam se ganne ke piche chhip jata hai aur dekhne lagta hai,

sudhiya kisi mastani ghodi ki tarah chalti hui apne ghaghre ke upar se apni gaanD masalte huye aage badhti hui us aur jati hai jahan nahane ke liye patthar rakhe huye the aur vahan jakar vah ek dam se apna ghaghra upar utha kar idhar udhar ek najar marti hai aur phir apni chut ko apne hatho se sahlate huye dekhti hai aur vahi baith jati hai,

ramu apni ma ki mast moti nangi gaanD dekh kar pagal ho jata hai aur apne lund ko dhoti ke upar se sahlate huye apni randi ma ki jawani ko ghurne lagta hai uske samne uski ma ke bhari chutd saf khule najar aate hai aur uski chutd ki gahrai ko dekh kar uska lund jhatke marne lagta haitabhi sudhiya apne ghaghre ko aage se thoda upar karke apni phuli hui chut ko dekhti hai aur phir ek moti dhar mar kar mutne lagti hai uske mutne se ramu ke sunsan khet me jab mast city ki aawaj gunjti hai to ramu ke hosh khone lagte hai,

sudhiya vahi kuch der tak mutti rahti hai aur uski chut se rah-rah kar peshab bahar nikalta hai, ramu apni ma ki mast phuli hui gulabi chut ko dekh kar apne lund ko barabar sahlaye ja raha tha, sudhiya kuch der mutne ke bad vahi gaddhe me bhare pani se apni chut ko sahla-sahla kar dhone lagti hai aur ramu apni ma ki chut ki gulabi ghati ko bade pyar se ghur kar dekhta hua apna lund sahla raha tha,

kuch der sudhiya apni phuli chut ko vahi baithi-baithi ragadti hai aur phir khadi hokar apni chut ko apne gahghre se ponch kar vapas se khat ki taraf chal deti hai,thodi der bad ramu aakar apni ma ke pas baith jata hai aur sudhiya idhar-udhar ka najara dekhte huye, bete nimmo ne bhi khub ganne chuse honge na,ramu- ha ma didi to mast ganne chusti thi,

use mene khub mast tarike se ganne chuswaye hai,sudhiya- vah kaiseramu- khada hokar tujhe chusna hai kyasudhiya- chusa deramu- to phir hame ganno ke khet me ghus kar koi mast ganna dhundhna padega, bol dhundhegi,sudhiya- par tujhe bhi mere piche-piche aana padega,

ramu me to tere pichhe hi rahunga tu khud mast wala ganna dhundh lena, aur phir ramu ne apni ma ka hath pakad kar kaha chal aur sudhiya uske sath chalne lagi,

ramu ruk gaya aur usne apni ma sudhiya ko ganne ke khet me ghused diya, ramu ka khet kaphi bada tha aur khet ke samne wale hisse me hariya ka khet juda hua tha aur beech me ganno ke karan dono ki jhopdiya tak najar nahi aati thi,

ramu ne apni ma ko hariya ki aur jane wale hisse me ghused kar uske pichhe chalne laga,

ramu- ma koi ganna pasand aa raha hai

sudhiya- dekh rahi hu

ramu apni ma ko ek hath se pakde huye dusre hath se ganne hata-hata kar aage badh rahe the ramu apne hath ko kabhi apni ma ki moti gaanD par pher deta kabhi uski nangi kamar par aur jab sudhiya ek dam se rukti to ramu pura uske upar chala ataa tha,

ab hariya kaka ka khet bas thoda hi bachha tha, udhar hariya ne chanda ko apni god me baitha liya aur uske gal chumte huye uske mote-mote doodh dabane laga, chanda apne baba dwara is tarah kas-kas kar apni thos aur moti chuchiya dabaye jane se bahut chudasi ho gai thi aur usne apna hath apne baba ki dhoti me dal kar uska mast tana hua lund bahar nikal liya,

ab chanda apne dono hatho se apne baba ke lund ke tope ko kabhi upar kabhi niche karne lagi jab apne baba ke lund ka lal bada sa supada ek dam se phul gaya tab chanda ne us phule supade ko ek dam se apne munh me bhar kar ras se bhigo diya,

chanda apne baba ke lund ko barabar chus rahi thi aur hariya apni beti ki moti gaanD ko phaila kar chat raha tha, tabhi hariya ne khat par baithe-baithe chanda ko kamar se pakad kar utha liya aur uski dono jangho ko apne munh me bhar kar uski chut aur gaanD ko chusne laga, niche jhuki hui chanda ne apne baba ka lund pakad kar use apne munh me bhar liya,

chanda apne baba ke sine se ulti hokar chipki hui apne baba ko apni chut aur gaanD chata rahi thi aur niche apne baba ka lund pite huye uske mote-mote gote sahla rahi thi,

ramu ne ek dam se apni ma sudhiya ki moti gaanD ko dono hatho se tham liya aur ma ruko ek minute kuch aawaj aa rahi hai aur apni ma ke bilkul karib aa gaya, ramu ka lund uski dhoti me khada hokar apni ma ki moti gaanD jo ki sirf ek patle se ghaghre se dhaki thi me ghusne laga,

kramashah.............


rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 12:00

गन्ने की मिठास--15

गतान्क से आगे......................

सुधिया की साँसे एक दम तेज हो गई और वह मुड़ना चाहती थी लेकिन रामू ने उसकी दोनो बाजुओ को पीछे से कस कर पकड़े हुए अपने लंड को अपनी मा की मोटी गान्ड मे थोड़ा और गढ़ा दिया, सुधिया तो एकदम मस्ती मे झूम उठी,

रामू --मा अब धीरे-धीरे उन तीन चार गन्नो को हटाओ, रामू अपनी मा के गालो से बिल्कुल चिपका हुआ था, सुधिया ने धीरे से दो तीन गन्नो को हटाया और थोड़ा आगे बढ़ी तब रामू ने कहा बस रुक जाओ मा अब बस आगे वाले वो दो गन्ने हटा दो

सामने जो दिखाई दे रहा था वह दो गन्नो के पिछे थोड़ा-थोड़ा नज़र आ रहा था बस उसको ही देख कर सुधिया की नशो मे खून दौड़ पड़ा सुधिया का हाथ जब गन्नो को हटाने के लिए आगे बढ़ रहा था तब उसके हाथ लरज रहे थे तभी रामू ने अपनी मा की कमर मे हाथ डाल कर अपने मोटे लंड को अपनी मा की मस्तानी गान्ड मे तबीयत से गढ़ाते हुए,

मा धीरे से हटाना और जैसे ही सुधिया ने सामने के गन्नो को हटा कर देखा तो उसकी साँसे रुक सी गई हरिया और चंदा एक दूसरे के लंड और चूत को पागलो की तरह चूस रहे थे हरिया खड़ा हुआ था और चंदा को उल्टी टांग कर उसकी जाँघो को फैला कर उसकी चूत और गान्ड चाट रहा था और चंदा नीचे से अपने बाबा का लंड चूस रही थी,

सुधिया ने एक दम से गन्नो को छ्चोड़ दिया तो रामू ने अपनी मा की गान्ड मे अपने लंड को कस कर गढ़ाते हुए मा थोड़ा आगे सर्को मुझे पीछे कुछ चुभ रहा है, सुधिया थोड़ा आगे सरक्ति है और रामू अब थोड़ा आगे होकर अपने हाथो से दोनो गन्नो को हाथ देता है,

रामू और सुधिया दोनो बिल्कुल चुप थे मगर रामू के हाथ अपनी मा की कमर मे हाथ डाले हुए धीरे-धीरे उसके गुदाज पेट पर चल रहे थे, रामू लगातार अपने लंड का दबाव धीरे-धीरे अपनी मा की गान्ड मे बना रहा था,

लेकिन वह यह नही जानता था की उसका लंड उसकी मा के पतले से घाघरे को दबाते हुए सीधे उसकी रस छोड़ती चूत के छेद से भिड़ा हुआ था और सुधिया का घाघरे का वह हिस्सा भी चूत के पानी से पूरा गीला हो चुका था,

सुधिया ने जब रामू के लंड को अपनी चूत के छेद मे गढ़ते महसूस किया तो वह सिहर उठी उसकी चूत का दाना कूदने लगा

सुधिया अब बड़ी बेशर्मी से हरिया के मोटे लंड को देख रही थी और सोच रही थी कि कैसे चंदा अपने बाप का लंड बड़े प्यार से चूस रही है और रामू देख रहा था कि हरिया कैसे बड़े प्यार से अपनी बेटी चंदा की चूत को चूस रहा है,

तभी अचानक हरिया ने चंदा को उतार कर खड़ी करके उसे उल्टी घुमा कर खटिया से पेट के बल लेटा दिया और नीचे बैठ कर उसकी गान्ड को चौड़ी करके अपनी जीभ से चाटने लगा और चंदा हाय बाबा और ज़ोर से चतो आह बाबा बहुत मज़ा आ रहा है, ओह बाबा फाड़ दो अपनी बेटी की गान्ड और चूत को और चूसो खूब कस कर चूसो दबाओ .

रामू ने अपनी मा के भारी चुतड़ों को अपने हाथो मे थाम रखा था और अपने लंड का सारा दबाव अपनी मा की मोटी गान्ड के छेद मे दे रखा था, सुधिया चंदा के मुँह से ऐसी बाते सुन कर पागल हो जाती है और रामू की ओर अपना मुँह घुमा कर उसके गालो से अपने होंठो को सताए हुए कहती है,

सुधिया- रामू बेटा मुझे पेशाब लगी है,

रामू यह सुनते ही खुशी से पागल हो जाता है और अपनी मा की गान्ड मे अपने लंड को दबा कर उसके गालो को चूमते हुए कहता है

रामू- मा धीरे से यही बैठ के कर ले,

सुधिया- यहाँ

रामू- हाँ और कहाँ

सुधिया- लेकिन तू तो मेरे पास खड़ा है

रामू- तो क्या हुआ तू बैठ तो सही और फिर रामू ने सुधिया की बाँहे पकड़ कर उसे मूतने के लिए बैठा दिया, सुधिया ने अपना घाघरा उचा कर लिया और पीछे से रामू ने जब अपनी मा की गोरी-गोरी मोटी गान्ड देखी तो वह मस्त हो गया, रामू तुरंत अपनी मा के पिछे बिल्कुल उससे सॅट कर बैठ गया,

सुधिया- तू क्यो बैठ गया

रामू- अपनी धोती के उपर से अपने लंड को मसल्ते हुए, मा मुझे भी पेशाब लगी है

सुधिया- तो क्या मेरे सामने करेगा,

रामू अपनी धोती से अपने मोटे लंड को बाहर निकालते हुए, मा जब तू मेरे सामने कर सकती है तो मे क्यो नही और फिर रामू अपने मस्त लंड को निकाल कर जब उसकी चॅम्डी उलटता है तो सुधिया उस तगड़े लंड की मोटाई और उसके टोपे की चिकनाहट देख कर मस्त हो जाती है उसकी खुली हुई चूत से पेशाब की जगह चुदास रस निकलने लगता है,

रामू- क्या हुआ मा पेशाब करो ना

सुधिया- उसको खा जाने वाली नज़रो से देखती हुई, मुझे नही आ रही है,

रामू- अभी तो लगी थी रुक क्यो गई

सुधिया- पता नही

रामू- लाओ मे करवा देता हू और रामू ने झट से अपनी मा की चूत मे हाथ डालते हुए उसकी चूत के खड़े दाने को अपनी उंगलियो मे भर लिया, सुधिया रामू की इस हरकत से एक दम से सन्न रह गई रामू ने धीरे-धीरे अपनी मा की चूत को अपनी हथेलियो से सहलाते हुए देखना शुरू कर दिया,

सुधिया की चूत से पानी बहने लगा और रामू उसे बड़े प्यार से सहलाते हुए देखने लगा, सुधिया अपने बेटे

द्वारा इस तरह से अपनी चूत सहलाए जाने से मस्त हो गई और उससे रहा नही गया और उसने रामू के लंड को एक दम से पकड़ लिया,

रामू अपनी मा की इस हरकत से पागल हो उठा और वह अपनी मा की चूत को अपने हाथो से सहलाता हुआ उसके रसीले होंठो को अपने मुँह मे भर लेता है और दूसरे हाथ से

अपनी मा की मोटी-मोटी छातिया पकड़ लेता है,

सुधिया- पूरी मस्ती से अपने बेटे के लंड को सहलाती हुई आह रामू तू यह क्या कर रहा है तुझे शरम नही आती अपनी मा की चूत को इस तरह सहलाते हुए,

रामू- अपनी की चूत मे दो उंगली खच्छ से भर कर, मा देख हरिया काका कैसे अपनी बेटी चंदा की गान्ड और चूत को अपनी जीभ से प्यार कर रहे है,

सुधिया- आह बेटा आह अरे बेटे वह तो अपनी बेटी की चूत और गान्ड चाट रहा है तो क्या तू अपनी मा को नंगी करके उसकी चूत और गान्ड चाटना चाहता है,

रामू- अपनी मा की पूरी भोसड़ी को अपने हाथो से दबोचते हुए, हाँ मा मे तुझे पूरी नंगी करके खूब कस कर चोद्ना चाहता हू

सुधिया- थोडा सा मुस्कुराकर रामू के लंड को कस कर भिचते हुए, तो क्या तू अपने इस लंड से अपनी मा को अच्छी तरह चोद पाएगा,

रामू- मा पहले तो इस मोटे लंड को मे तेरे मुँह मे देकर चूसाउँगा उसके बाद तेरी चूत को खूब कस कर फाड़ुँगा और फिर अंत मे अपनी मा की यह मस्तानी गान्ड फाड़ुँगा और जानती है मेरा यह लंड कहाँ घुसेगा और फिर रामू अपने हाथ को चूत से हटा कर अपनी मा की गुदा मे लगा देता है और अपनी उंगली अपनी मा की गुदा मे भर देता है,

रामू- मा तेरी गान्ड का छेद तो बड़ा कसा हुआ है मेरा लंड तो बहुत टाइट घुसेगा इसमे

सुधिया- रामू बेटे अब मुझसे नही रहा जा रहा है,

रामू- मा एक बार मूत तो ले फिर चलते है अपने खेत मे

सुधिया- नही बेटे यहाँ मुझसे नही मुता जाएगा तू चल हम खेत मे चलते है फिर वहाँ मे मुतुँगी

रामू- अपनी मा के होंठो को चूम कर मा खेत मे चल कर तुझे अपने बेटे के मुँह मे मुतना पड़ेगा, बोल मुतेगि ना अपने बेटे के मुँह पर

सुधिया- सीसियते हुए हाँ बेटा हाँ आज तेरी मा तुझे पूरी नंगी होकर अपनी चूत का मूत पिलाएगी, तेरी मम्मी खड़ी होकर मुतती जाएगी और तू अपनी मम्मी की मूत से भरी छूट चाटते जाना,

रामू- मा तू नही जानती तेरी चूत से पेशाब पीने के लिए मे कब से तरस रहा हू, सच मा तेरा भोसड़ा बहुत मस्त है,

सुधिया- मेरे लाल आज तू अपनी मा की चूत तब चाटना जब उसकी चूत से मस्त पेशाब की मोटी धार निकलेगी

रामू- मा एक बार खड़ी होकर अपनी चूत मेरे मुँह के उपर रख ना मे यही बैठा रहता हू और तू थोड़ा खड़ी होकर मेरे मुँह से अपनी गान्ड और चूत ऐसे रगड़ कि मे किसी कुत्ते की तरह तेरी चूत और गान्ड को सूंघ कर चाट सकु,

सुधिया- बेटे ऐसे तो मेरा पेशाब तेरे मुँह मे निकल जाएगा

रामू- तो क्या हुआ तू थोड़ा सा मेरे मुँह मे मुँह देना पर पूरा नही बाकी का खेत मे चल कर मुझे पिलाना

सुधिया वही थोड़ा सा खड़ी होती है और रामू अपने मुँह को अपनी मा की भारी गान्ड और चूत के नीचे ले आता है और सुधिया अपनी चूत और गान्ड को अपने बेटे के मुँह पर रगड़ने लगती है, और रामू अपनी जीभ निकाल कर कभी अपनी मा की गान्ड और कभी चूत को चाटने लगता है तभी रामू अपनी मा की चूत के मोटे तने हुए दाने को अपने मुँह से पकड़ कर एक दम से चूसने लगता है,

सुधिया जब देखती है कि उसके बेटे ने उसकी चूत को कस कर अपने मुँह से दबोच लिया है तो मस्ती मे उसकी चूत से पेशाब निकल जाती है और रामू अपनी मा की गान्ड और जाँघो को पकड़े हुए उसका पेशाब चाटने लगता है,

उसके मुँह मे जैसे ही उसका मा का पेशाब का स्वाद जाता है वह किसी पागल कुत्ते की

तरह अपनी मा की चूत को चाटने और चूसने लगता है, सुधिया आज अपने जिंदगी का सबसे मजेदार वक़्त गुज़ार रही थी और अपने बेटे के द्वारा अपनी चूत इतने प्यार से चाटने के कारण उसने थोड़ा रुक कर फिर से थोड़ा सा मुतना चालू कर के फिर से रोक लिया और रामू अपनी मा की चूत की फांको को फैला कर खूब कस-कस कर चाटने लगा,

सुधिया के पेर काँपने लगे और वह एक दम से फिर से नीचे बैठ गई, उधर चंदा ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हुए कह रही थी ओह बाबा थोड़ा और तेज मरो अपनी बेटी की चूत मे ओह बाबा आज फाड़ दो अपनी बेटी की चूत, जब सुधिया ने उधर झाँक कर देखा तो उसके होश उड़ गये हरिया चंदा को अपने लंड पर खड़ा होकर बैठाए था और उसकी जाँघो को थामे उसे हवा मे उठाए अपने मोटे लंड से अपनी बेटी की चूत मार रहा था,

सुधिया उनकी भयानक चुदाई देख कर मस्त हो गई और रामू का लंड ज़ोर से पकड़ कर मसल्ते हुए रामू अब चल बेटा मुझे बहुत जोरो की पेशाब लगी है मे बस

तेरे मुँह मे अपनी चूत धर कर मूतने के लिए मरी जा रही हू,

रामू- मा एक बार और अपनी चूत मुझे चटा दे फिर हम चलते है, सुधिया एक दम से अपने दाँत पीसते हुए मस्ती मे आ गई और उसने वही खड़ी होकर अपने हाथ से

अपने बेटे रामू का मुँह खोला और उसमे अपनी चूत का दाना लगा कर एक धार उसके मुँह मे जैसे ही मारी रामू ने अपनी मा की चूत को अपने मुँह मे पूरा भर लिया और सुधिया अपने बेटे की इस हरकत से पागल हो उठी उसने खूब ज़ोर-ज़ोर से रामू के मुँह मे अपनी चूत को मारना शुरू कर दिया और रामू ने अपनी मा की चूत को खूब ज़ोर-ज़ोर से चूस्ते हुए उसका सारा रस निचोड़ कर चूस लिया.

रामू से अब रहा नही गया और वह सुधिया का हाथ पकड़ कर उसे वापस अपने खेत की ओर चलने का इशारा करता है, सुधिया वहाँ से उठ कर चल देती है और रामू अपनी मा के भारी चुतड़ों को सहलाता हुआ उसके पीछे-पीछे चलने लगता है,

दोनो जब खेत मे आ जाते है, खेत मे आते ही रामू सुधिया को झोपड़ी के अंदर लेजा कर तुरंत उसका घाघरा पकड़ कर उठा देता है और घुटनो पर बैठ कर अपनी मा की चूत चाटने लगता है सुधिया सीसियते हुए रामू के सर पर हाथ फेरने लगती है,

रामू- मा तुझे पेशाब लगी थी ना

सुधिया- खड़ी-खड़ी अपनी चूत अपने बेटे के मुँह से रगड़ती हुई हा बेटे बहुत जोरो की पेशाब लगी है

रामू- मा तो मूत ना

सुधिया-कहाँ

रामू-यही खड़े-खड़े अपने बेटे के मुँह मे अपनी चूत फैला कर मूत दे

सुधिया- अपने हाथो से अपनी चूत खोले नही बेटा मुझे शरम आती है,

रामू- अच्छा तू नीचे बैठ और सुधिया को नीचे बैठा कर अपना हाथ अपनी मा की चूत मे लेजा कर उसे धीरे-धीरे सहलाते हुए, एक हाथ से अपनी मा की गान्ड को सहलाना शुरू कर देता है सुधिया से बर्दास्त नही होता है और वह फिर से खड़ी हो जाती है,

रामू सीधे अपना मुँह अपनी मा की चूत के ताने हुए दाने से लगा कर चाटते हुए, ले मा अब मुँह और अपना हाथ पीछे लेजा कर अपनी मा की गान्ड को दबोचते हुए उसकी गुदा मे उंगली भर देता है सुधिया बिल्कुल पागल हो जाती है और अपनी चूत से खड़े-खड़े एक लंबी धार मार देती है रामू जब अपनी मा की चूत से मोटी पेशाब की धार निकलते देखता है तो वह अपना मुँह अपनी मा की चूत मे लगा कर पागलो की तरह चाटने लगता है,

रामू अपनी मा की चूत की फांको को दोनो हाथो से फैलाकर उसकी चूत के दाने से रिस्ते पानी को अपनी जीभ से दबा-दबा कर जैसे-जैसे चूस्ता है सुधिया उह आ ओ बेटे करने लगती है, रामू उसकी एक टांग को उठा कर अपने कंधे पर रख लेता है और फिर अपनी मा की पूरी चूत को सूंघते हुए अपनी जीभ चूत के छेद मे भर-भर कर उसका रस चूसने लगता है,

सुधिया अपने हाथो से अपनी चूत को और फैला देती है और रामू बड़े आराम से अपनी मा की चूत को चूस्ते हुए अपनी मा की गुदाज गान्ड को दबाता हुआ उसके छेद मे उंगली डाल-डाल कर सहलाता रहता है

रामू अपनी मा की चूत चूस-चूस कर उसे लाल कर देता है और सुधिया की टाँगे काँपने लगती है वह सीधे ज़मीन मे लेट जाती है और रामू को अपने उपर खीच लेती है,

क्रमशः.............


gataank se aage......................

sudhiya ki sanse ek dam tej ho gai aur vah mudna chahti thi lekin ramu ne uski dono bajuo ko piche se kas kar pakde huye apne lund ko apni ma ki moti gaanD me thoda aur gada diya, sudhiya to ekdam masti me jhum uthi,

ramu ma ab dhire-dhire un teen char ganno ko hatao, ramu apni ma ke galo se bilkul chipka hua tha, sudhiya ne dhire se do teen ganno ko hataya aur thoda aage badhi tab ramu ne kaha bas ruk jao ma ab bas aage wale vo do ganne hata do

samne jo dikhai de raha tha vah do ganno ke pichhe thoda-thoda najar aa raha tha bas usko hi dekh kar sudhiya ki nasho me khun daud pada sudhiya ka hath jab ganno ko hatane ke liye aage badh raha tha tab uske hath laraj rahe the tabhi ramu ne apni ma ki kamar me hath dal kar apne mote lund ko apni ma ki mastani gaanD me tabiyat se gadate huye,

ma dhire se hatana aur jaise hi sudhiya ne samne ke ganno ko hata kar dekha to uski sanse ruk si gai hariya aur chanda ek dusre ke lund aur chut ko paglo ki tarah chus rahe the hariya khada hua tha aur chanda ko ulti tang kar uski jangho ko phaila kar uski chut aur gaanD chat raha tha aur chanda niche se apne baba ka lund chus rahi thi,

sudhiya ne ek dam se ganno ko chhod diya to ramu ne apni ma ki gaanD me apne lund ko kas kar gadate huye ma thoda aage sarko mujhe piche kuch chubh raha hai, sudhiya thoda aage sarakti hai aur ramu ab thoda aage hokar apne hatho se dono ganno ko hath deta hai,

ramu aur sudhiya dono bilkul chup the magar ramu ke hath apni ma ki kamar me hath dale huye dhire-dhire uske gudaj pet par chal rahe the, ramu lagatar apne lund ka dabav dhire-dhire apni ma ki gaanD me bana raha tha,

lekin vah yah nahi janta tha ki uska lund uski ma ke patle se ghaghre ko dabate huye sidhe uski ras chhodti chut ke ched se bhida hua tha aur sudhiya ka ghaghre ka vah hissa bhi chut ke pani se pura gila ho chuka tha,

sudhiya ne jab ramu ke lund ko apni chut ke ched me gadte mehsus kiya to vah sihar uthi uski chut ka dana kudne laga

sudhiya ab badi besharmi se hariya ke mote lund ko dekh rahi thi aur soch rahi thi ki kaise chanda apne bap ka lund bade pyar se chus rahi hai aur ramu dekh raha tha ki hariya kaise bade pyar se apni beti chanda ki chut ko chus raha hai,

tabhi achanak hariya ne chanda ko utar kar khadi karke use ulti ghuma kar khatiya se pet ke bal leta diya aur niche baith kar uski gaanD ko chaudi karke apni jeebh se chatne lage aur chanda hay baba aur jor se chato aah baba bahut maja aa raha hai, oh baba fad do apni beti ki gaanD aur chut ko aur chuso khub kas kar chuso babaao .

ramu ne apni ma ke bhari chutdo ko apne hatho me tham rakha tha aur apne lund ka sara dabav apni ma ki moti gaanD ke ched me de rakha tha, sudhiya chanda ke munh se aisi bate sun kar pagal ho jati hai aur ramu ki aur apna munh ghuma kar uske galo se apne hontho ko sataye huye kahti hai,

sudhiya- ramu beta mujhe peshab lagi hai,

ramu yah sunte hi khushi se pagal ho jata hai aur apni ma ki gaanD me apne lund ko daba kar uske galo ko chumte huye kahta hai

ramu- ma dhire se yahi baith ke kar le,

sudhiya- yahan

ramu- ha aur kaha

sudhiya- lekin tu to mere pas khada hai

ramu- to kya hua tu baith to sahi aur phir ramu ne sudhiya ki banhe pakad kar use mutne ke liye baitha diya, sudhiya ne apna ghaghra ucha kar liya aur piche se ramu ne jab apni ma ki gori-gori moti gaanD dekhi to vah mast ho gaya, ramu turant apni ma ke pichhe bilkul usse sat kar baith gaya,

sudhiya- tu kyo baith gaya

ramu- apni dhoti ke upar se apne lund ko masalte huye, ma mujhe bhi peshab lagi hai

sudhiya- to kya mere samne karega,

ramu apni dhoti se apne mote lund ko bahar nikalte huye, ma jab tu mere samne kar sakti hai to me kyo nahi aur phir ramu apne mast lund ko nikal kar jab uski chamdi ulatta hai to sudhiya us tagde lund ki motai aur uske tope ki chiknahat dekh kar mast ho jati hai uski khuli hui chut se peshab ki jagah chudasbhara ras nikalne lagta hai,

ramu- kya hua ma peshab karo na

sudhiya- usko kha jane wali najro se dekhti hui, mujhe nahi aa rahi hai,

ramu- abhi to lagi thi ruk kyo gai

sudhiya- pata nahi

ramu- lao me karwa deta hu aur ramu ne jhat se apni ma ki chut me hath dalte huye uski chut ke khade dane ko apni ungliyo me bhar liya, sudhiya ramu ki is harkat se ek dam se sann rah gai ramu ne dhire-dhire apni ma ki chut ko apni hatheliyo se sahlate huye dekhna shuru kar diya,

sudhiya ki chut se pani bahne laga aur ramu use bade pyar se sahlate huye dekhne laga, sudhiya apne bete

dwara is tarah se apni chut sahlaye jane se mast ho gai aur usse raha nahi gaya aur usne ramu ke lund ko ek dam se pakad liya,

ramu apni ma ki is harkat se pagal ho utha aur vah apni ma ki chut ko apne hatho se sahlata hua uske rasile hontho ko apne munh me bhar leta hai aur dusre hath se

apni ma ki moti-moti chatiya pakad leta hai,

sudhiya- puri masti se apne bete ke lund ko sahlati hui aah ramu tu yah kya kar raha hai tujhe sharam nahi aati apni ma ki chut ko is tarah sahlate huye,

ramu- apni ko ki chut me do ungli khachch se bhar kar, ma dekh hariya kaka kaise apni beti chanda ki gaanD aur chut ko apni jeebh se pyar kar rahe hai,

sudhiya- aah beta aah are bete vah to apni beti ki chut aur gaanD chat raha hai to kya tu apni ma ko nangi karke uski chut aur gaanD chatna chahta hai,

ramu- apni ma ki puri bhosdi ko apne hatho se dabochte huye, ha ma me tujhe puri nangi karke khub kas kar chodna chahta hu

sudhiya- thoda sa muskurakar ramu ke lund ko kas kar bhichte huye, to kya tu apne is lund se apni ma ko achchi tarah chod payega,

ramu- ma pahle to is mote lund ko me tere munh me dekar chusaunga uske bad teri chut ko khub kas kar fadunga aur phir ant me apni ma ki yah mastani gaanD fadunga aur janti hai mera yah lund kaha ghusega aur phir ramu apne hath ko chut se hata kar apni ma ki guda me laga deta hai aur apni ungli apni ma ki guda me bhar deta hai,

ramu- ma teri gaanD ka ched to bada kasa hua hai mera lund to bahut tite ghusega isme

sudhiya- ramu bete ab mujhse nahi raha ja raha hai,

ramu- ma ek bar mut to le phir chalte hai apne khet me

sudhiya- nahi bete yahan mujhse nahi muta jayega tu chal hum khet me chalte hai phir vahan me mutungi

ramu- apni ma ke hontho ko chum kar ma khet me chal kar tujhe apne bete ke munh me mutna padega, bol mutegi na apne bete ke munh par

sudhiya- sisiyate huye ha beta ha aaj teri ma tujhe puri nangi hokar apni chut ka mut pilayegi, teri mummy khadi hokar mutti jayegi aur tu apni mummy ki mut se bhari chut chatte jana,

ramu- ma tu nahi janti teri chut se peshab pine ke liye me kab se taras raha hu, sach ma tera bhosda bahut mast hai,

sudhiya- mere lal aaj tu apni ma ki chut tab chatna jab uski chut se mast peshab ki moti dhar niklegi

ramu- ma ek bar khadi hokar apni chut mere munh ke upar rakh na me yahi baitha rahta hu aur tu thoda khadi hokar mere munh se apni gaanD aur chut aise ragad ki me kisi kutte ki tarah teri chut aur gaanD ko sungh kar chat saku,

sudhiya- bete aise to mera peshab tere munh me nikal jayega

ramu- to kya hua tu thoda sa mere munh me munh dena par pura nahi baki ka khet me chal kar mujhe pilana

sudhiya vahi thoda sa khadi hoti hai aur ramu apne munh ko apni ma ki bhari gaanD aur chut ke niche le aata hai aur sudhiya apni chut aur gaanD ko apne bete ke munh par ragadne lagti hai, aur ramu apni jeebh nikal kar kabhi apni ma ki gaanD aur kabhi chut ko chatne lagta hai tabhi ramu apni ma ki chut ke mote tane huye dane ko apne munh se pakad kar ek dam se chusne lagta hai,

sudhiya jab dekhti hai ki uske bete ne uski chut ko kas kar apne munh se daboch liya hai to masti me uski chut se peshab nikal jati hai aur ramu apni ma ki gaanD aur jangho ko pakde huye uska peshab chatne lagta hai,

uske munh me jaise hi uska ma ka peshab ka swad jata hai vah kisi pagal kutte ki

tarah apni ma ki choot ko chatne aur chusne lagta hai, sudhiya aaj apne jindagi ka sabse majedar waqt gujar rahi thi aur apne bete ke dwara apni chut itne pyar se chatne ke karan usne thoda ruk kar phir se thoda sa mutna chalu kar ke phir se rok liya aur ramu apni ma ki chut ki phanko ko phaila kar khub kas-kas kar chatne laga,

sudhiya ke per kampne lage aur vah ek dam se phir se niche baith gai, udhar chanda jor-jor se chillate huye kah rahi thi oh baba thoda aur tej maro apni beti ki chut me oh baba aaj fad do apni beti ki chut, jab sudhiya ne udhar jhank kar dekha to uske hosh ud gaye hariya chanda ko apne lund par khada hokar baithaye tha aur uski jangho ko thame use hawa me uthaye apne mote lund se apni beti ki chut mar raha tha,

sudhiya unki bhayanak chudaai dekh kar mast ho gai aur ramu ka lund jor se pakad kar masalte huye ramu ab chal beta mujhe bahut joro ki peshab lagi hai me bas

tere munh me apni chut dhar kar mutne ke liye mari ja rahi hu,

ramu- ma ek bar aur apni chut mujhe chata de phir hum chalte hai, sudhiya ek dam se apne dant piste huye masti me aa gai aur usne vahi khadi hokar apne hath se

apne bete ramu ka munh khola aur usme apni chut ka dana laga kar ek dhar uske munh me jaise hi mari ramu ne apni ma ki chut ko apne munh me pura bhar liya aur sudhiya apne bete ki is harkat se pagal ho uthi usne khub jor-jor se ramu ke munh me apni chut ko marna shuru kar diya aur ramu ne apni ma ki chut ko khub jor-jor se chuste huye uska sara ras nichod kar chus liya.

ramu se ab raha nahi gaya aur vah sudhiya ka hath pakad kar use vapas apne khet ki aur chalne ka ishara karta hai, sudhiya vahan se uth kar chal deti hai aur ramu apni ma ke bhari chutdo ko sahlata hua uske piche-piche chalne lagta hai,

dono jab khet me aa jate hai, khet me aate hi ramu sudhiya ko jhopadi ke andar lejakar turant uska ghaghra pakad kar utha deta hai aur ghutno par baith kar apni ma ki chut chatne lagta hai sudhiya sisiyate huye ramu ke sar par hath pherne lagti hai,

ramu- ma tujhe peshab lagi thi na

sudhiya- khadi-khadi apni chut apne bete ke munh se ragadti hui ha bete bahut joro ki peshab lagi hai

ramu- ma to mut na

sudhiya-kaha

ramu-yahi khade-khade apne bete ke munh me apni chut phaila kar mut de

sudhiya- apne hatho se apni chut khole nahi beta mujhe sharam aati hai,

ramu- achcha tu niche baith aur sudhiya ko niche baitha kar apna hath apni ma ki chut me lejakar use dhire-dhire sahlate huye, ek hath se apni ma ki gaanD ko sahlana shuru kar deta hai sudhiya se bardast nahi hota hai aur vah phir se khadi ho jati hai,

ramu sidhe apna munh apni ma ki chut ke tane huye dane se laga kar chatte huye, le ma ab munh aur apna hath piche lejakar apni ma ki gaanD ko dabochte huye uski guda me ungli bhar deta hai sudhiya bilkul pagal ho jati hai aur apni chut se khade-khade ek lambi dhar mar deti hai ramu jab apni ma ki chut se moti peshab ki dhar nikalte dekhta hai to vah apna munh apni ma ki chut me laga kar paglo ki tarah chatne lagta hai,

ramu apni ma ki chut ki phanko ko dono hatho se phailakar uski chut ke dane se riste pani ko apni jeebh se daba-daba kar jaise-jaise chusta hai sudhiya uh uh o bete karne lagti hai, ramu uski ek tang ko utha kar apne kandhe par rakh leta hai aur phir apni ma ki puri chut ko sunghte huye apni jeebh chut ke ched me bhar-bhar kar uska ras chusne lagta hai,

sudhiya apne hatho se apni chut ko aur phaila deti hai aur ramu bade aaram se apni ma ki chut ko chuste huye apni ma ki gudaj gaanD ko dabata hua uske ched me ungli dal-dal kar sahlata rahta hai

ramu apni ma ki chut chus-chus kar use lal kar deta hai aur sudhiya ki tange kampne lagti hai vah sidhe jameen me let jati hai aur ramu ko apne upar khich leti hai,

kramashah.............