समलिंगी कहानियाँ

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rajaarkey
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Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:39

यार बना प्रीतम - भाग (15)

गतान्क से आगे.......

बहू तू अब बाथ रूम हो आ. फ्रेश हो ले, फिर तुझे तेरे पति की चप्पल खिलाते हैं, तू बड़ी बेताब है उस'के लिए मुझे मालूम है. मैं किसी तरह बाथ रूम गया. अंग अंग दुख रहा था. आँखों में आँसू आ गये थे. अब तक मेरी मस्ती हवा हो गयी थी. मन में रुलाई छूट रही थी कि कहाँ फँस गया. पर अब मैं कहाँ जाता, इस परिवार से मेरी छुट्टी इस जनम में तो नहीं होगी ये मुझे मालूम हो गया था.

पंद्रह मिनिट बाद भी मैं जब नहीं निकला तो प्रदीप बुला'ने आया. मैने दरवाजा खोला तो पहले उस'ने मुझे एक करारा तमाचा मारा. मैं रोने लगा. वह बोला.

माधुरी रानी, मुझे लगा था कि आप'ने पातिदेव की चप्पल खा'ने को तू फटाफट खुशी खुशी आएगी पर तू तो रो रही है! यह नहीं चलेगा. तू गुलाम है हमारी, जैसा कहते हैं वैसा करना नहीं तो तेरी ऐसी हालत करेंगे कि तुझसे सहन नहीं होगी. तुझे चप्पल खा'ने का शौक है ना? आज खिलाता हूँ तुझे अपनी चप्पलें. ख़ास सुहागरात के लिए महीने भर से दिन रात पहन कर घूम रहा हूँ

मुझे गर्दन से पकड़'कर दबोच कर वह पकड़'कर बिस्तर पर लाया और मुझे पटक दिया. मुझे लिटा'कर मेरे मुँह में चप्पल देने की तैयारी होने लगी.

एक साथ देना प्रीतम की एक एक करके. प्रदीप ने पूच्छा.

अरे पूरी जोड़ी दो मेरी भाभी के मुँह में. मेरे साथ थी तो मुझे बार बार कह'ती थी कि प्रीतम राजा, जोड़ी दे दे मेरे मुँह में. मैने वादा किया था कि सुहागरात के दिन खिलाऊँगा. एक एक खा'ने में उसे मज़ा नहीं आएगा

प्रीतम मेरी ओर देख'कर बोला. बात तो सच थी पर आज चुदा चुदा कर मेरी हालत खराब थी. मुँह भी दुख रहा था. और प्रदीप की उन दस नंबर की चप्पालों को देख कर जहाँ मन में गुदगुदी होती थी वहीं बहुत डर भी लग रहा था. प्रीतम की चप्पलें तो पतली थी. प्रदीप की एक साथ लेकर तो मैं दम घुट कर मर जाऊँगा. मैं भयभीत होकर चुप रहा.

मा ने मेरे हाथ पकड़े और प्रीतम ने पाँव. प्रदीप तैयार होकर मेरा सिर गोद में लेकर बैठ गया. दोनों चप्पलें उस'ने जोड़ कर पंजे मेरे मुँह पर रखे. मैने चुपचाप मुँह खोल दिया. और क्या करता? पर उन बड़ी ज़रा मोटी रबड की चप्पालों की साइज़ देख'कर मैं घबरा गया था. एक एक चप्पल प्रीतम की पतली दो चप्पालों के बराबर थी जो उस'ने मुझे पहली बार खिलाई थी.

प्रदीप ने चप्पालों के पंजे मेरे मुँह में ठूंस दिए. फिर दबा दबा कर उन्हें मेरे मुँह में और घुसेड'ने लगा. मैं दर्द और दम घुट'ने से तडप'ने लगा. मा बोलीं

अरे धीरे धीरे प्यार से, नाज़ुक बहू है, उसे समय लगेगा तेरी बड़ी चप्पलें निगल'ने में.

अरे मा, कुच्छ नाज़ुक वाजुक नहीं है, नखरा कर'ती है, साली प्रीतम की चप्पलें कैसे गपा गॅप खा'ती थी! है ना प्रीतम? कहते हुए प्रदीप ने ज़ोर लगा'कर आधी चप्पलें मेरे मुँह में डाल दीं.

हां चप्पालों की बहुत शौकीन है माधुरी रानी. पूरी चप्पल जोड़ी मुँह में लेने को कब से आतुर है. मैने ही रोक दिया था कि अब पहले शादी के बाद अप'ने पति की चप्पलें खाना, बाद में मैं और अम्मा भी खिला देंगे.

प्रीतम ने मेरी ओर देख'कर मुस्कराते हुए कहा. पाँच मिनिट बाद जब बची खुची चप्पलें भी मेरे मुँहे में प्रदीप ने ठूंस दी तो मैं कराह कर बेहोश हो गया. आखरी दो तीन इंच मेरे मुँह में डाल'ने के लिए उसे अपनी पूरी शक्ति का उपयोग करना पड़ा. वह मेरे सीने के ऊपर चढ कर मेरी चून्चियो पर बैठ गया और अप'ने दोनों हाथ रख'कर कस कर दबाया जैसे टायर में ट्यूब ठूंस रहा हो. पकाक से पूरी चप्पलें मेरे मुँह में चली गयीं. मैं दम घुट'ने से और गालों में होते भयानक दर्द से होश खो बैठा. मेरे मुँह पर टेप लगा'कर उसे बंद कर दिया गया कि मैं उन्हें निकल'ने की कोशिश ना करूँ और मेरे हाथ पैर भी कस कर बाँध दिए गये.

आधी बेहोशी में ही मैने सुना की मा ने आप'ने बिटो को मेरा रस पीने की आगया दे दी.

अरे अब बहू को आराम से अप'ने पति की चप्पलें खा'ने दो. अब हम लोग भी कुच्छ खा पी लें. बहू का दूध नहीं पीना है क्या? चलो बारी बारी से ये मज़ा ले लो. और मैं उसका लंड चूस'ती हूँ. देखो कैसे लहरा रहा है. दूध मुझे भी चखाना

मेरी ब्रा और पैंटी अब निकाल दी गयी. प्रीतम और प्रदीप मेरी चूचियों पर टूट पड़े और माजी मेरा लंड चूस'ने लगीं. मेरी चूचियों को दबा दबा कर मसल कर उन'में से दूध निकाल कर दोनों भाई पी रहे थे. उधर मा मेरे लंड को चबा चबा'कर चूस रही थी जैसे गंडरी खा रही हों. मैं तडप कर झड गया. मा'ने पूरा वीर्य पी कर ही मुझे चोदा. फिर प्रीतम और प्रदीप को हटा'कर मेरी दुख'ती चूचियों में बचा दूध दबा दबा कर निकाला और पिया जैसे पिच'के आमों को निचोड़ रही हों उनका बचा खुचा रस निकाल'ने को.

फिर वे आपस में चिपट कर संभोग कर'ने लगे. मुझे मेरी हालत पर छोड दिया गया. दोनों भाई अपनी मा को आगे पीछे से चोद'ने लगे.

खूब चोदो मेरे लाडलो पर झड़ना नहीं. मा उचक उचक कर प्रीतम से गान्ड मरवाते हुए बोलीं. प्रदीप आगे से उन्हें चोद रहा था.

झड़ना बहू की गान्ड में. उस'की गान्ड आज इतनी मारी जानी चाहिए कि कभी यह ना कह स'के कि सुहाग रात में उस'के साथ इंसाफ़ नहीं हुआ . बीच बीच में दोनों अलट पलट कर मेरी गान्ड मार'ने लगते. प्रदीप मेरे मुँह को टटोल'ता और कहता.

अरे अभी तक नहीं खाई चप्पल? जल्दी खा रानी. सुबह हो जाएगी तो नाश्ता भी कराना है तुझे. कब से पेट में लिए घूम रहा हूँ! चल जल्दी चबा . और मुझे चबा'ने को मजबूर कर'ने के लिए कस कर मेरी चूची मरोड देता या चूचुक खींच'ने लगता.

वे दो तीन घंटे मेरे ऐसे गये जैसे मैं स्वर्ग नरक के अजीब से मिले जुले माहौल में हू. बदन और दुखते मुँह से मैं तडप तडप कर रो रहा था और चबा चबा कर प्रदीप की चप्पलें खा'ने की कोशिश कर रहा था. उधर इस विकृत कामक्रीड़ा से मेरे मन की अनकही चाहतों ने ऐसा सिर उठाया था कि लंड में बड़ी मीठी गुदगुदी हो रही थी. एक अपूर्व कामवासना मेरे रोम रोम में भर गयी थी. उन पुरानी पहन पहन कर मैली की हुईं चप्पालों का स्वाद भी मुझे बहुत मादक लग रहा था.

आख़िर रात को तीन बजे मेरा चप्पल खाना ख़तम हुआ. आखरी टुकड़ा मैने निगला और फिर लस्त पड आराम कर'ने लगा. प्रदीप, प्रीतम और मा चोद चोद कर सो गये थे. प्रदीप का लंड अब भी मेरी गान्ड में था. मेरी भी आँखें लग गयीं.

पहली सुबहा

सुबह मुझे झिन्झोड कर जगाया गया. अंग अंग दुख रहा था जैसे किसी ने रात भर तोड़ा मरोड़ा हो. गांद में अजब टीस थी, ज़ोर का दर्द था और कुच्छ मस्ती भी थी. मुँह ऐसे दुख रहा था जैसे गाल फट गये हों.

नींद खुलते खुलते मुझे अपनी बाँहों में उठा'कर चूमते हुए प्रदीप बाथ रूम ले गया. प्रीतम और माजी भी साथ में थे.

चलो बहू को भूख लगी होगी. प्रदीप जल्दी कर बेटा, मैं बहू को तेरी गान्ड में से तेरी टट्टी खाते देखना चाह'ती हूँ. फिर प्रीतम भी खिला देगा.

माजी बार बार प्रदीप से कह रही थी. आराम कर'ने से मेरा लंड फिर खड़ा हो गया था. पिच्छली रात की मेरे दुर्गति याद कर'के मुझे बड़ी मादक सनसनी हो रही थी. अब मैं अप'ने आप को कोस रहा था कि क्यों मैं रोया और चिल्लाया! यह तो मेरा भाग्य था कि इतनी तीव्र गंदी और विकृत कामवासना से भरी जिंदगी मुझे मिली थी. अब मुझे यह लग रहा था कि फिर से तीनों मेरे ऊपर कब चढ़ाएँगे!

अप'ने मसले दुखते बदन में होती पीड़ा को अनदेखा कर'के मैने प्यार से प्रदीप के गले में बाँहें डाल दीं और उसे चूम लिया. उस'की आँखों मे देखते हुए शरमा कर मैने कहा.

स्वामी, आप'ने, देवराजी और माजीने मुझे जो सुख दिया है, मैं कभी नहीं भूलूंगी. आप तीनों मुझे खूब भोगिए, अपनी सारी हवस निकाल लीजिए, मुझे चोद चोद कर मार डा'लिए प्लीज़, मुझसे यह चुदासी सहन नहीं होती अब. और मेरी एक और प्रार्थना है स्वामी! प्रदीप चूम कर मुझे बोला

बोल रानी, क्या चाह'ती है? क्या मुराद रह गयी तेरी सुहागरात में?

देवराजी की गान्ड तो मैने बहुत मारी है, माजी की भी मार ली, अब आप भी मरा लेना मेरे स्वामी, आप जो कहेंगे मैं करूँगी.

प्रदीप ने मुझे चूमते हुए कहा. 'तो यह चाह'ती है तू, चल अभी मार लेना. पहले तेरे मुँह में गान्ड खाली कर लूँ, फिर उस'में अपना यह हसीन लंड डाल देना. और तू फिकर मत कर रानी, तुझे तो हम ऐसे ऐसे चोदेन्गे और ऐसे ऐसे कुकर्म तेरे साथ करेंगे, तूने सोचे भी नहीं होंगे. हर तरह की नाजायज़, गंदी, हरामीपन की क्रियाएँ तेरे साथ हम कर'ने वाले हैं. साल भर में तुझे पीलापिला ना कर दिया तो कहना. अब चल, तुझे अपनी टट्टी खिलाता हूँ.

मुझे बाथ रूम में फर्श पर पटक'कर वह मेरे मुँह पर बैठ गया. उसे अब सहन नहीं हो रहा था. उसका लंड भी फिर तन कर खड़ा हो गया था. अप'ने सैंया के विशाल गठीले गोरे चूतड मैने पास से देखे तो वासना से सिसक उठा. मेरे पति के गुदा का छेद खुल बंद हो रहा था और उस'में से अंदर की ठोस टट्टी बाहर आने वाली थी. मैने मुँह खोला और बिना और कुच्छ कहे मेरा पति मेरे मुँह में हॅग'ने लगा. मोटी ठोस लेंडी मेरे मुँह में उतर'ने लगी. मैं भाव विभोर होकर उसे चबा चबा कर खा'ने लगा. मेरा लंड फिर कस कर खड़ा हो गया था और उस मस्ती में प्रदीप की गान्ड की टट्टी मुझे प्रसाद जैसी लग रही थी.

पाँच मिनिट में मैने प्रदीप की गान्ड खाली कर दी. कम से कम आधा किलो टट्टी निकली होगी. मेरी मदहोश वासना देख'कर प्रीतम और मा भी मस्ती में आ गये थे. प्रदीप की गान्ड मैने चाट कर सॉफ की और फिर तुरंत प्रीतम मेरे मुँह पर बैठ गया. दस मिनिट बाद अपनी गान्ड खाली कर'के जब वह उठा तो उसका भी लंड तन कर खड हो गया था. मा भी मूठ मार रही थी.

बहू एकदम रति देवी की मूरत है प्रदीप. अब तुम लोगों से मूतना तो होगा नहीं अप'ने खड़े लंडों से, मैं ही इस'की प्यास बुझा देती हूँ. कह'कर वे मेरे मुँह में मूत'ने लगीं.

मेरा पेट लबालब भर गया था और वासना से मेरा सिर सनसाना रहा था. मेरी हालत देख कर अब दोनों भाई मेरे ऊपर फिर चढ़ना चाहते थे, मैं भी यही चाह'ता था. पर मा ने मना कर दिया.

बहू को क्या वादा किया था प्रदीप? चलो गान्ड मराओ उससे. प्रदीप ज़मीन पर ओँदा लेट गया और मैं उसपर झुक कर उस'के चूतड चूम'ने लगा. क्या चूतड थे एकदम गठीले, कड़े और मास पेशियों से भरे. मैने उस'के गुदा में नाक डाली और सूंघ'ने लगा. फिर जीभ डाल'कर चाट'ने लगा.

जल्दी कर रानी. प्रदीप बोला. उसे मेरी जीभ का स्पर्श मतवाला कर रहा था.

बहू को मज़ा कर'ने दे मन भर कर. तू कर बहू क्या करना है. मैने मन भर कर अप'ने पति की गान्ड चूसी और आख़िर जब मस्ती से पागल सा हो गया तब उसपर चढ'कर उस'की गान्ड में अपना लंड डाल दिया. तन कर ख़ड़ा होने के बावजूद लंड आराम से गया. आख़िर वह अप'ने छोटे भाई प्रीतम से मरावाता था, गान्ड ढीली होनी ही थी.

क्रमशः................

rajaarkey
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Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:40

YAAR BANA PRITAM - BHAAG (15)

gataank se aage.......

Bahoo too ab bath room ho aa. Fresh ho le, fir tujhe tere pati kee chappal khilaate hain, too baDee betaab hai us'ke liye mujhe maaloom hai. Main kisee tarah bath room gayaa. Ang ang dukh raha thaa. Aankhon men aansoo aa gaye the. Ab tak meree mastee hawa ho gayee thee. Man men rulaayee chhooT rahee thee ki kahaan fans gayaa. Par ab main kahaan jaataa, is pariwaar se meree chhuTTee is janam men to naheen hogee ye mujhe maaloom ho gaya thaa.

Pandrah minute baad bhee main jab naheen nikala to Pradeep bula'ne aayaa. Maine darawaaja khola to pahale us'ne mujhe ek karaara tamaacha maaraa. Main rone lagaa. Wah bolaa.

Maadhuri raanee, mujhe laga tha ki ap'ne patidev kee chappal kha'ne ko too faTaafaT khushee khushee aayegee par too to ro rahee hai! Yah naheen chalegaa. Too gulaam hai hamaaree, jaisa kahate hain waisa karana naheen to teree aisee haalat karenge ki tujhase sahan naheen hogee. Tujhe chappal kha'ne ka shauk hai naa? Aaj khilaata hoon tujhe apanee chappalen. Khaas suhaagaraat ke liye mahine bhar se din raat pahan kar ghoom raha hoon

Mujhe gardan se pakaD'kar daboch kar wah pakaD'kar bistar par laaya aur mujhe paTak diyaa. Mujhe liTa'kar mere munh men chappal dene kee taiyaaree hone lagee.

Ek saath dena Pritam ki ek ek karake. Pradeep ne poochhaa.

Are pooree joDee do meree bhaabhee ke munh men. Mere saath thee to mujhe baar baar kah'tee thee ki Pritam raajaa, joDee de de mere munh men. Maine waada kiya tha ki suhaagaraat ke din khilaaoongaa. Ek ek kha'ne men use maja naheen aayegaa

Pritam meree or dekh'kar bolaa. Baat to sach thee par aaj chuda chuda kar meree haalat kharaab thee. Munh bhee dukh raha thaa. Aur Pradeep kee un das nambar kee chappalon ko dekh kar jahaan man men gudagudee hotee thee waheen bahut Dar bhee lag raha thaa. Pritam kee chappalen to patalee thee. Pradeep kee ek saath lekar to main dam ghuT kar mar jaaoongaa. Main bhayabheet hokar chup rahaa.

Maa ne mere haath pakaDe aur Pritam ne paanv. Pradeep taiyaar hokar mera sir god men lekar baiTh gayaa. Donon chappalen us'ne joD kar panje mere munh par rakhe. Maine chupachaap munh khol diyaa. Aur kya karataa? Par un baDee jara moTee rabaD kee chappalon kee saaiz dekh'kar main ghabara gaya thaa. Ek ek chappal Pritam kee patalee do chappalon ke baraabar thee jo us'ne mujhe pahalee baar khilaayee thee.

Pradeep ne chappalon ke panje mere munh men Thoons diye. Fir daba daba kar unhen mere munh men aur ghuseD'ne lagaa. Main dard aur dam ghuT'ne se taDap'ne lagaa. Maa boleen

Are dheere dheere pyaar se, naajuk bahoo hai, use samay lagega teree baDee chappalen nigal'ne men.

Are maa, kuchh naajuk waajuk naheen hai, nakhara kar'tee hai, saalee Pritam kee chappalen kaise gapa gap kha'tee thee! Hai na Pritam? Kahate hue Pradeep ne jor laga'kar aadhee chappalen mere munh men Daal deen.

Haan chappalon kee bahut shaukeen hai Maadhuri raanee. Pooree chappal joDee munh men lene ko kab se aatur hai. Maine hee rok diya tha ki ab pahale shaadee ke baad ap'ne pati kee chappalen khaanaaa, baad men main aur ammma bhee khila denge.

Pritam ne meree or dekh'kar muskaraate hue kahaa. Paanch minute baad jab bachee khuchee chappalen bhee mere munhe men Pradeep ne Thoons dee to main karaah kar behosh ho gayaa. Aakharee do teen inch mere munh men Daal'ne ke liye use apanee pooree shakti ka upayog karana paDaa. Wah mere seene ke oopar chaDha kar meree choonchiyon par baiTh gaya aur ap'ne donon haath rakh'kar kas kar dabaaya jaise Taayar men Tyoob Thoons raha ho. Pakaak se pooree chappalen mere munh men chalee gayeen. Main dam ghuT'ne se aur gaalon men hote bhayaanak dard se hosh kho baiThaa. Mere munh par Tep laga'kar use band kar diya gaya ki main unhen nikaal'ne kee koshish na karoon aur mere haath pair bhee kas kar baandh diye gaye.

Aadhee behoshee men hee maine sun ki maa ne ap'ne beTO ko mera ras peene kee aagya de dee.

Are ab bahoo ko aaraam se ap'ne pati kee chappalen kha'ne do. Ab ham log bhee kuchh kha pee lena. Bahoo ka doodh naheen peena hai kyaa? Chalo baaree baaree se ye maja le lo. Aur main usaka lunD choos'tee hoon. Dekho kaise lahara raha hai. Doodh mujhe bhee chakhaanaaa

Meree bra aur paintee ab nikaal dee gayee. Pritam aur Pradeep meree choochiyon par TooT paDe aur maajee mera lunD choos'ne lageen. Meree choochiyon ko daba daba kar masal kar un'men se doodh nikaal kar donon bhaayee pee rahe the. Udhar maa mere lunD ko chaba chaba'kar choos rahee thee jaise ganderee kha rahee hon. Main taDap kar jhaD gayaa. Maa'ne poora weery pee kar hee mujhe chhoDaa. Fir Pritam aur Pradeep ko haTa'kar meree dukh'tee choochiyon men bacha doodh daba daba kar nikaala aur piya jaise pich'ke aamon ko nichoD rahee hon unaka bacha khucha ras nikaal'ne ko.

Fir we aapas men chipaT kar sambhog kar'ne lage. Mujhe meree haalat par chhoD diya gayaa. Donon bhaayee apanee maa ko aage peechhe se chod'ne lage.

Khoob chodo mere laaDalo par jhaDana naheen. Maa uchak uchak kar Pritam se gaanD marawaate hue boleen. Pradeep aage se unhen chod raha thaa.

JhaDana bahoo kee gaanD men. Us'kee gaanD aaj itanee maaree jaanee chaahiye ki kabhee yah na kah s'ke ki suhaag raat men us'ke saath insaaf naheen huaa . Beech beech men donon alaT palaT kar meree gaanD maar'ne lagate. Pradeep mere munh ko TaTol'ta aur kahataa.

Are abhee tak naheen khaayee chappal? Jaldee kha raanee. Subah ho jaayegee to naashta bhee karaana hai tujhe. Kab se peT men liye ghoom raha hoon! Chal jaldee chabaa . Aur mujhe chaba'ne ko majaboor kar'ne ke liye kas kar meree choochee maroD deta ya chuchuk kheench'ne lagataa.

We do teen ghante mere aise gaye jaise main swarg narak ke ajeeb se mile jule maahaul men hooom. Badan aur dukhate munh se main taDap taDap kar ro raha tha aur chaba chaba kar Pradeep kee chappalen kha'ne kee koshish kar raha thaa. Udhar is vikRut kaamakreeDa se mere man kee anakahee chahaton ne aisa sir uThaaya tha ki lunD men baDee meeThee gudagudee ho rahee thee. Ek apoorw kaamawaasana mere ron ron men bhar gayee thee. Un puraanee pahan pahan kar mailee kee hueen chappalon ka swaad bhee mujhe bahut maadak lag raha thaa.

Aakhir raat ko teen baje mera chappal khaana khatam huaa. Aakharee TukaDa maine nigala aur fir last paDa aaraam kar'ne lagaa. Pradeep, Pritam aur maa chod chod kar so gaye the. Pradeep ka lunD ab bhee meree gaanD men thaa. Meree bhee aankhen lag gayeen.

Pahalee subaha

Subah mujhe jhinjhoD kar jagaaya gayaa. Ang ang dukh raha tha jaise kisee ne raat bhar toDa maroDa ho. GaanD men ajab Tees thee, jor ka dard tha aur kuchh mastee bhee thee. Munh aise dukh raha tha jaise gaal faT gaye hon.

Neend khulate khulate mujhe apanee baanhon men uTha'kar choonate hue Pradeep bath room le gayaa. Pritam aur maajee bhee saath men the.

Chalo bahoo ko bhookh lagee hogee. Pradeep jaldee kar beTaa, main bahoo ko teree gaanD men se teree TaTTee khaate dekhana chaah'tee hoon. Fir Pritam bhee khila degaa.

maajee baar baar Pradeep se kah rahee thee. Aaraam kar'ne se mera lunD fir khaDa ho gaya thaa. Pichhalee raat kee mere durgati yaad kar'ke mujhe baDee maadak sanasanee ho rahee thee. Ab main ap'ne aap ko kos raha tha ki kyon main roya aur chillaayaa! Yah to mera bhaagy tha ki itanee teevr gandee aur vikRut kaamavaasana se bharee jindagee mujhe milee thee. Ab mujhe yah lag raha tha ki fir se teenon mere oopar kab chaDhayenge!

Ap'ne masale dukhate badan men hotee peeDa ko anadekha kar'ke maine pyaar se Pradeep ke gale men baanhen Daal deen aur use choom liyaa. Us'kee aankhon me dekhate hue sharama kar maine kahaa.

Swaamee, aap'ne, dewarajee aur maajeene mujhe jo sukh diya hai, main kabhee naheen bhooloongee. Aap teenon mujhe khoob bhogiye, apanee saaree hawas nikaal leejiye, mujhe chod chod kar maar Da'liye please, mujhase yah chudaasee sahan naheen hotee ab. Aur meree ek aur praarthana hai swaamee! Pradeep choom kar mujhe bola

Bol raanee, kya chaah'tee hai? Kya muraad rah gayee teree suhaagaraat men?

Devarajee kee gaanD to maine bahut maaree hai, maajee kee bhee maar lee, ab aap bhee mara lena mere swaamee, aap jo kahenge main karoongee.

Pradeep ne mujhe choonate hue kahaa. 'To yah chaah'tee hai too, chal abhee maar lenaa. Pahale tere munh men gaanD khaalee kar loon, fir us'men apana yah haseen lunD Daal denaa. Aur too fikar mat kar raanee, tujhe to ham aise aise chodenge aur aise aise kukarm tere saath karenge, toone soche bhee naheen honge. Har tarah kee naajaayaj, gandee, haraameepan kee kriyaayen tere saath ham kar'ne waale hain. Saal bhar men tujhe pilapila na kar diya to kahanaa. Ab chal, tujhe apanee TaTTee khilaata hoon.

Mujhe bath room men farsh par paTak'kar wah mere munh par baiTh gayaa. Use ab sahan naheen ho raha thaa. Usaka lunD bhee fir tan kar khaDa ho gaya thaa. Ap'ne sainya ke vishaal gaTheele gore chootaD maine paas se dekhe to waasana se sisak uThaa. Mere pati ke guda ka chhed khul band ho raha tha aur us'men se andar kee Thos TaTTee baahar aane waalee thee. Maine munh khola aur bina aur kuchh kahe mera pati mere munh men hag'ne lagaa. MoTee Thos lendee mere munh men utar'ne lagee. Main bhaav vibhor hokar use chaba chaba kar kha'ne lagaa. Mera lunD fir kas kar khaDa ho gaya tha aur use mastee men Pradeep kee gaanD kee TaTTee mujhe prasaad jaisee lag rahee thee.

Paanch minute men maine Pradeep kee gaanD khaalee kar dee. Kam se kam aadha kilo TaTTee nikalee hogee. Meree madahosh waasana dekh'kar Pritam aur maa bhee mastee men aa gaye the. Pradeep kee gaanD maine chaaT kar saaf kee aur fir turant Pritam mere munh par baiTh gayaa. Das minute baad apanee gaanD khaalee kar'ke jab wah uTha to usaka bhee lunD tan kar khaDa ho gaya thaa. Maa bhee mooTh maar rahee thee.

Bahoo ekadam rati devee kee moorat hai Pradeep. Ab tum logon se mootan to hoga naheen ap'ne khaDe landon se, main hee is'kee pyaas bujha detee hoon. Kah'kar we mere munh men moot'ne lageen.

Mera peT labaalab bhar gaya tha aur waasana se mera sir sanasana raha thaa. Meree haalat dekh kar ab donon bhaayee mere oopar fir chaDhaan chaahate the, main bhee yahee chaah'ta thaa. Par maa ne man kar diyaa.

Bahoo ko kya waada kiya tha Pradeep? Chalo gaanD maraao usase. Pradeep jameen par ondha leT gaya aur main usapar jhuk kar us'ke chootaD choom'ne lagaa. Kya chootaD the ekadam gaTheele, kaDe aur maas peshiyon se bhare. Maine us'ke guda men naak Daalee aur soongh'ne lagaa. Fir jeebh Daal'kar chaaT'ne lagaa.

Jaldee kar raanee. Pradeep bolaa. Use meree jeebh ka sparsh matawaala kar raha thaa.

Bahoo ko maja kar'ne de man bhar kar. Too kar bahoo kya karana hai. Maine man bhar kar ap'ne pati kee gaanD choosee aur akhir jab mastee se paagal sa ho gaya tab usapar chaDha'kar us'kee gaanD men apana lunD Daal diyaa. Tan kar khaDa hone ke baawajood lunD aaraam se gayaa. Yah upanyaas aap yahoo groups; deshiromance men padh rahe hain. Aakhir wah ap'ne chhoTe bhaayee Pritam se marawaata thaa, gaanD Dheelee honee hee thee.

kramashah................


rajaarkey
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Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:42

यार बना प्रीतम - भाग (16)

गतान्क से आगे.......

मैं उससे चिपट'कर अप'ने पति की गान्ड मार'ने लगा. मेरी चूचियाँ उस'की पीठ पर दब रही थी. उससे प्रदीप को भी मज़ा आ रहा था. प्रदीप भी मुझे हिम्मत दे रहा था.

मार रानी, मार मेरी गान्ड . मा ! मैं पहला पति होऊँगा जिस'ने सचमुच के लंड से अप'नी पत्नी से गान्ड मरवाई है! तीव्र सुख के साथ मैं अचानक झड गया और रोने लगा. रुलाई खुशी की भी थी और इस अफ़सोस से भी थी कि और देर मैं यह सुख नहीं ले पाया. मा ने मुझे दिलासा दिया.

बहू अब तू रोज मार सक'ती है तू. दिल छोटा ना कर, तेरा ही आदमी है, कभी भी इस'की गान्ड मार लिया कर. तुझे ना थोड़े कहेगा! ऐसा किया कर कि रोज इस'की टट्टी खा'कर इस'की गान्ड मारा कर. बहुत मज़ा आएगा. और कल से अब मैं टट्टी कर'ने का टाइम टेबल बना रही हूँ, आख़िर तीन तीन गान्डो का सवाल है. टट्टी खा'ने के बाद बहू का हक होगा उस गान्ड पर अगर वह मारना चाह'ती हो. प्रीतम तू आज बच गया. चल कल मरा लेना. फिर वे अप'ने दोनों मस्ताये बेटों से बोलीं.

अब बहू को स्नान कर'ने दो, सॉफ होने दो. बाद में इसे इस घर के तौर तरीके सीखा देंगे. एक टाइम टेबल भी बनाना है. प्यारी आ'टी होगी. उसे कहूँगी बहू को नहला दे. किसीने बाथ रूम का दरवाजा खटखटाया. माजी बोली.

लो प्यारी आ गयी. आ जा चंदा, तेरी ही राह देख रहे थे. दरवाजा खुला और पैंतीस की उम्र की एक साँवली भरे पूरे बदन की औरत अंदर आई. एकदम सेक्सी और देसी माल था. बड़ा सिंदूर, आधी खुली चोली जिस'में से बड़े बड़े मम्मे दिख रहे थे, और गाँव की स्टाइल में बाँधी साड़ी जिस'में से उस'की मोटी चिकनी टाँगें दिख रही थी. होंठ पान से लाल थे. मुझे घूरते हुए वह बोली.

तो ले आए बहू को? मैं तो मरी जा रही थी देख'ने को पर आप ने कहा कि सुहागरात के बाद ही आना इस'लिए कल रात ऐसे ही सदका लगा'कर सब्र कर लिया. बड़ी सुंदर है बहू, कितनी चिकनी है, कोई कह नहीं सक'ता कि लड़का थी, बस इस लंड से पता चल'ता है. लंड तो बहुत प्यारा है दीदी. और मम्मे? मैं तो वारी जाउ, क्या चूचियाँ हैं? पर बड़ी मसली कुचली और थ'की लग रही है बहू रानी. लग'ता है खूब मस्त सुहागरात हुई है दीदी. और हंस'ने लगी. माजी मुझे बोली.

बहू, यह है चंदा. हमारी नौकरानी है पर घर की है. इससे कोई बात छिपी नहीं है. मेरी ख़ास सहेली है. हम दोनों ने बहुत मज़ा किया है, अब तेरे साथ और करेंगे. आज से यही तेरा ख़याल रखेगी. तुझे हमारे भोग के लिए तैयार किया करेगी. इसका भी तुझ पर इतना ही हक है जितना हमारा. इसका कहा मानना. प्यारी तू बहू को नहला दे और तैयार कर. फिर बहू को सब समझाना है

मुझे प्यारी के सुपुर्द कर'के वे तीनों चले गये. जाते जाते प्रदीप उस'की चूची दबा कर बोला.

अब चढ मत जाना बहू पर प्यारी बाई, हम'ने काफ़ी ठुकायी की है!

अरे तू जा ना! मैं देख लूँगी बहू के साथ क्या करना है उलाहना देकर उस'ने सब को बाहर निकाला और दरवाजा लगा लिया. फिर कपड़े उतारते हुए बोली.

आओ बहू रानी तुम्हें नहला दू. पेट तो भर गया ना? कब से तैयारी हो रही थी तुम्हें खिला'ने पिला'ने की. कह'कर वह एक कुटिल हँसी हँसी और मेरी चूची ज़ोर से मसल दी. मैं कराह उठा. लग'ता है वह भी अपनी मालकिन और उस'के बेटों जैसी दुष्ट थी. पर थी बड़ी सेक्सी.

उस'के मोटे मम्मे, घनी झाँटें और तगडी जांघें देख'कर मेरा लंड उच्छल'ने लगा.

ओहो, तो मैं पसंद आई बहू रानी को! मुझे भी तू बहुत पसंद है बहू, बस अप'ने आप को मेरे हवाले कर से, देख मैं तुझे कहाँ से कहाँ ले जा'ती हूँ. चल अब नहा ले

प्यारी ने मुझे खूब नहलाया. मेरे बदन की मालिश की, मेरे बॉल धोए और अंत में मेरा लंड चूस डाला. दो मिनिट में मुझे झाड़ा'कर मेरा वीर्य पीकर वह उठ खड़ी हुई. मैं ना न करते रह गया क्योंकि मुझे डर था कि उन लोगों को पता चल गया कि मैं झड गया हूँ तो ना जा'ने क्या करें. प्यारी ने मुझे दिलासा दिया.

बहुत स्वाद है तुझ'में बहू. तू मत डर, किसी को पता नहीं चलेगा, अभी तुझे फिर मस्त कर देती हूँ, और पता चल भी जाए तो क्या, मेरा भी हक है तेरे बदन पर. अब चल, मेरी बुर चूस, तेरी सास तो दिवानी है इसकी, तू भी चख ले. फिर दूध पिला'ती हूँ तुझे मेरे चेहरे पर के भाव देख'कर वह हंस'ने लगी.

अरे तेरे पति को, तेरे देवर को मैने ही तो पिलाया है. अब भी पीते हैं बदमाश, जो बच'ता है उन'की मा पी लेती है. अब बैठ नीचे. मुझे नीचे बिठा'कर वह मेरे मुँह में अपनी चूत देकर खड़ी हो गयी और मुझे चूस'ने को कहा. एकदम देसी माल था उसका, चिपचिपा और तीव्र गंध वाला. उस'की बात सच थी. उस'की चूत चूस कर मेरा फिर ऐसा खड़ा हुआ जैसे बैठा ही ना हो.

फिर उस'ने प्यार से वहीं बाथ रूम के फर्श पर बैठ'कर मुझे गोद में लिया और अपना दूध पिलाया. एकदम मीठा और गरम दूध था. मैं तो निहाल हो गया. उस'की मोटी चूची पकड़'कर बच्चे जैसा उसका स्तनपान कर'ने लगा. दोनों स्तन आधे आधे पीला कर प्यारी ने मेरा बदन पोंच्छ कर जल्दी जल्दी साड़ी और चोली पहनाई. मेरे होंठों पर लिपस्टिक लगाई और माग में सिंदूर भरा

ब्रा बाद में पहन लेना. अभी काम है. चल बाहर, सब इंतजार कर रहे होंगे.

मेरी जिंदगी कैसी होगी

बाहर सब नहा धोकर मेरी राह देख रहे थे. आओ बहू, बहुत सुंदर लग रही हो. प्यारी ज़रा नज़र उतार देना मेरी बहू की. बहू अब तुझे समझा'ती हूँ कि तेरा दिन भर का क्या टाइम टेबल है. तुम लोग भी सुनो. माजी फिर मुझे गोद में बिठा'कर चूमते हुए बोली.

बहू, तेरा काम है सिर्फ़ संभोग, दिन रात हमसे चुदवाना और गान्ड मरवाना और जैसा हम कहते हैं वैसा करना. जब कोई चाहेगा, तुझे जैसे मन आए भोग लेगा. और हमारे लिए अपना मुँह हमेशा तैयार रखना. हम उस'में जो दें, वह प्यार से प्रसाद समझ कर खाना. मैं दिन भर घर में रह'ती हूँ इस'लिए मेरी सेवा तो तू हमेशा करेगी. प्रदीप सुबह काम पर जाता है और दोपहर में आता है. सुबह वह तुझे अपनी टट्टी खिला'कर और मूत पीला कर नाश्ता करा'कर जाएगा. जा'ने से पह'ले जैसे चाहे तुझे चोद लेगा. उस'के बाद तेरा नहाना धोना होगा. प्यारी तुझे नहलाएगी और तैयार करेगी. तेरी चूची में दिन में तीन चार बार दूध भी वही भरेगी. इस'के बाद प्रीतम तुझे दोपहर तक चोदेगा. मैं तो रहूंगी ही. दोपहर को प्रीतम अपनी गान्ड से तुझे खाना खिलाएगा और फिर काम पर जाएगा.

प्रदीप आ'कर सो जाएगा कि रात को तुझे ठीक से चोद सके. दोपहर को तू मेरी सेवा करेगी. प्यारी भी अपनी सेवा तुझसे कराएगी. मैं रात का खाना तुझे खिलाऊँगी बेटी, अपनी गान्ड में से मस्त टट्टी दूँगी तुझे. प्रीतम भी आ'कर आराम कर लिया करेगा. फिर हर रात तेरी ठुकायी होगी जैसे कल सुहागरात में हुई थी. हम तीनों मिल'कर तुझे चोदा करेंगे. आज से प्यारी भी अब साथ रहा करेगी. जब भी किसी भी कारण से तू खाली रहे, वह तुझे चोद लिया करेगी. तुझे यह भी अपनी गान्ड से खिलाएगी फिर कोई भी अपनी गान्ड में इसे फिट कर'के तुझे अपनी टट्टी खिला सक'ता है मैं डरते डरते बोला.

पर स्वामी, माजी, देवराजी, मैं तो खुद बड़े चाव से आप'की टट्टी खा'ती हूँ, हमेशा तैयार रह'ती हूँ. इस'की ज़रूरत क्या है?

ज़रूरत क्यों नहीं है रानी प्रदीप अपना लंड मुठियाता हुआ बोला.

मान लो मुझे, मा और प्रीतम को और प्यारी को भी एक साथ एक ही समय तेरे मुँह में हगाना हो तो तू ले नहीं पाएगी. मुँह बंद कर लेगी. ऐसे में ये यंत्र फिट कर'के तुझे तीन क्या, दस लोगों की टट्टी खिला सकते हैं ज़बरदस्ती. मान लो मा ने कभी अपनी सहेलियों को बुलाया रात को, तेरी मुँह दिखाई को, वे कभी कभी अपनी सहेलियों के साथ चुदाई का रतजगा कर'ती है. अब तो सोने में सुहागा हो जाएगा. औरतें तुझे आशीर्वाद के साथ साथ अपनी गान्ड का प्रसाद भी देना चाहेंगी, तब तुझे इतनी औरतों की टट्टी खिला'ने के लिए ये ज़रूरी होगा.

और एक बात है, तू मस्त रह'ती है तो खुद खा'ती है. एक बार तुझे खूब झड कर तेरी मस्ती गायब करके, तुझे चप्पालों से खूब पीट कर, तेरी सारी मस्ती उतार'कर फिर मैं तेरे मुँह में हगाना चाह'ता हूँ. तब पता चलेगा कि मेरी, अप'ने पति की या फिर मा या प्रीतम की टट्टी तुझे कैसी लग'ती है? तब तू नहीं खाएगी अप'ने आप, तब ये यंत्र काम आएगा. मैं डर'के रोने लगा. मा'ने मुझे पुचकारते हुए कहा.

रो मत बहू, आज थोड़े ना कर'ने वाले हैं. ये तो तुझे ब'ता दिया कि किसी दिन करेंगे. और एक बात है, वो जानवरों वाली पुस्तक तो लाना प्रीतम बेटा! प्रीतम जा'कर एक किताब ले आया. मेरी ओर देख'कर वह मंद मंद मुस्करा रहा था.

माजी ने किताब खोली और मुझे चित्र दिखा'ने लगीं. उन'में जानवरों और इंसानों के संभोग के चित्र थे. औरतों को चोदते कुत्ते या घोड़े, जानवरों के लंड चूसते स्त्री पुरुष और अंत में बाँध कर रखे किशोर लड़कों और लड़कियों को चोदते हुए जानवर. उस'में कयी छोकरे और छ्हॉकरियाँ डर और दर्द से रो भी रहे थे और कुच्छ बड़ी वासना से मस्ती में दिख रहे थे. कहीं कहीं तो एक किशोर या किशोरी पर तीन तीन चार चार जानवर चढये हुए थे. हर छेद में एक लंड था. एक चित्र में एक जवान खूबसूरत पुरुष की गान्ड में घोड़े का लंड घुसा हुआ था!

हम सोच रहे थे कि कुच्छ जानवर पाल लेना. प्रदीप दो माह बाद जा'कर खरीद लाएगा. इंसानों से रति कर'ने के लिए सीखे सिखाए मिलते हैं ऐसा मैने सुना है. सोच रहे हैं कि तीन चार बड़े कुत्ते और एक घोड़ा पहले ले आएँ. ह'में कबसे उत्सुक'ता है कि जानवरों के साथ रति करें. पर डर भी लग'ता है. अब तू आ गयी है तो पहले तुझे चुदवायेन्गे कुत्तों से और घोड़े से. तुझे उनका लंड चूस'ने पर मजबूर करेंगे. उत्तेजना से अब माजी अपनी बुर में उंगली कर रही थी. प्रदीप और प्रीतम भी ज़ोर ज़ोर से साँसें भरते हुए अप'ने लंड मुठिया रहे थे.

बड़ा मज़ा आएगा जब तीन कुत्ते तुझ पर चढ़ाएँगे. एक गान्ड मारेगा, एक लंड चूसेगा और एक मुँह चोदेगा. वैसे कुतिया भी ला सकते है कि तेरे लंड को उस'की चूत में दे दें या किसी कुत्ते की गान्ड में डाल दें. घ्होडे से तेरी गान्ड ज़रूर मरवाएँगे. और तू सही सलामत बच गयी तो फिर मैं भी चुदवा कर देखूँगी. प्रदीप से बड़ा लंड अब सिर्फ़ अरबी घोड़े का ही मिलेगा मुझे! हम लोग भी शुरू हो जाएँगे. तेरे साथ उन जानवरों की फिल्म निकाल'ने का भी प्लान है, बहुत पैसे मिलेगे. हमारी बहू हमारे लिए पैसे भी कमाएगी. मैं डर और वासना से बेहोश होने को था. रुलाई भी छूट रही थी और लंड तन कर उच्छल भी रहा था. मा बोलीं.

बहू को बात पसंद आ गयी, देखो कैसी खुश है!. चल बहुत हो गया. प्यारी जा, उसे तैयार कर. प्रीतम और प्रदीप के लंड अब फट जाएँगे बहू को नहीं चोदा तो. देखा बहू तू कित'ने प्यारे परिवार में आ गयी है! और सुन, आज चोद'ने के पहले सब मिल'कर ज़रा चप्पालों से उस'की पिटायी करो. कल पिटायी नहीं हुई थी उसकी, बुरा मान जाएगी, बोलेगी कैसी ससुराल है जहाँ मन भर के पिटायी भी नहीं होती बहू की. आज सटासट चप्पलें लगा लगा कर उसे पहले कुचल डालो, इतना पीटो की इसका कोमल शरीर गुलाबी हो जाए, फिर चढ जाना! वैसे वे रबड के कोडे भी पड़े हैं, कल इसे उलट लटक'कर इस'की सुनताई करना, मुँह में चप्पल भर देना कि चीख ना पाए.

प्यारी मुझे पकड़'कर ले गयी और मैं अपनी अगली जिंदगी के बारे में सोच'ता सिसक'ता हुआ खिंचाखींचा उस'के पीछे चल दिया.

तो दोस्तो कैसी लगी ये मस्त कहानी आप लोगो को बताना ज़रूर आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त