समलिंगी कहानियाँ

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rajaarkey
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Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:22

यार बना प्रीतम - भाग (3)

गतान्क से आगे........

यार, तू चूस ले पहले, इतना गाढा वीर्य पिलाऊँगा कि रबडी भी उस'के साम'ने फीकी पड़ जाएगी. और असल में अभी इससे अगर तुझे चोदून्गा तो ज़रूर तेरी फट जाएगी. तू नहीं झेल पाएगा. अपनी जान की नाज़ुक गान्ड मैं फाड़ना नहीं चाहता. आख़िर रोज मारनी है! एक बार झड'ने के बाद जब थोड़ा ज़ोर कम हो जाए इस मुस्टंडे का, तो फिर मारूँगा तेरी प्यार से. और वह अपना सुपाड मेरे गालों और मुँह पर बड़े लाड से रगड़'ने लगा.

मैने प्रीतम के लंड को हाथ में लिया. वह ऐसा थिरक रहा था जैसे की कोई जिंदा जानवर हो. उस'की नसें सूज कर रस्सी जैसी फूल गयी थी. शुपाडे की बुरी तरह तनी हुई लाल चमडी बिलकुल रेशम जैसी मुलायम थी. शुपाडे के बीच के छेद से बड़ी भीनी खुशबू आ रही थी और छेद पर एक मोटी जैसी बूँद भी चमक रही थी. पास से उस'की घनी झाँटें भी बहुत मादक लग रही थी, एक एक घूंघराला बाल साफ दिख रहा था.

मैं अब और ना रुक सका और जीभ निकाल कर उस मस्त चीज़ को चाट'ने लगा. पहले तो मैने उस अमृत सी बूँद को जीभ की नोक से उठ लिया और फिर पूरे लंड को अपनी जीभ से ऐसे चाट'ने लगा जैसे की आइसक्रीम की कैंडी हो. प्रीतम ने एक सुख की आह भारी और मेरे सिर को पकड़'कर अप'ने पेट पर दबाना शुरू किया.

मज़ा आ गया यार, बड मस्त चाट'ता है तू, अब मुँह में ले ले मेरे राजा, चूस ले. मैं भी उस रसीले लंड की मलाई का स्वाद लेने को उत्सुक था इस'लिए मैने अप'ने होंठ खोले और सुपाड़ा मुँह में लेने की कोशिश की. वह इतना बड़ा था कि दो तीन बार कोशिश कर'ने पर भी मुँह में नहीं समा रहा था और मेरे दाँत बार बार उस'की नाज़ुक चमडी में लग'ने से प्रीतम सिसक उठ'ता था. आख़िर प्रीतम ने बाँये हाथ में अपना लौड पकड़ा और दाहिने से मेरे गालों को दबाते हुए बोला.

लग'ता है मेरे यार ने कभी लंड नहीं चूसा, चल तुझे सिखाऊँ, पहले तू अप'ने होंठों से अप'ने दाँत ढक ले. शाब्बा ... स. अब मुँह खोल. इतना सा नहीं राजा! और खोल! समझ डेन्टिस्ट के यहाँ बैठा है. उसका हाथ मेरे गालों को कस कर पिचका कर मेरा मुँह खोल'ने लगा और साथ ही मैने भी पूरी शक्ति से अपना मुँह चौड़ा दिया. ठीक मौके पर प्रीतम ने सुपाड़ा थोड़ा दबाया और मेरे मुँह में सरका दिया. पूरा सुपाड़ा ऐसे मेरे मुँह में भर गया जैसे बड़ा लड्डू हो. उस मुलायम चिक'ने लड्डू को मैं चूस'ने लगा.

प्रीतम ने अब लंड पर से हाथ हटा लिया और मेरे बालों में उंगलियाँ प्यार से चलाता हुआ मुझे प्रोत्साहित कर'ने लगा. मैने उस'के लंड का डंडा हाथ में लिया और दबा'ने लगा. ढाई इंच मोटे उस सख़्त नसों से भरे हुए डंडे को हाथ में लेकर ऐसा लग'ता था जैसे किसी मोटी ककडी को पकड़ा हुआ हूँ. अपनी जीभ मैने उस'के सुपाडे की सतह पर घुमाई तो प्रीतम हुमक उठा और दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़'कर अपनी ओर खींच'ता हुआ बोला.

पूरा ले ले मुँह में सुकुमार राजा, निगल ले, पूरा लेकर चूस'ने में और मज़ा आएगा. मैने अपना गला ढीला छोडा और लंड और अंदर लेने की कोशिश की. बस तीन चार इंच ही ले पाया. मेरा मुँह पूरा भर गया था और सुपाड भी गले में पहुँच कर अटक गया था. प्रीतम ने अब अधीर होकर मेरा सिर पकड और अप'ने पेट पर भींच लिया. वह अपना पूरा लंड मेरे मुँह में घुसेड'ने की कोशिश कर रहा था.

पर गले में सुपाड फँस'ने से मैं गोंगिया'ने लगा. लंड मुँह में लेकर चूस'ने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था पर अब ऐसा लग रहा था जैसे मेरा दम घुट जाएगा. मुझे छटपाटाता देख प्रीतम ने अपनी पकड़ ढीली कर दी.

लग'ता है पहली बार है मेरे यार का, लंड नहीं चूसा कभी. चल कोई बात नहीं, पहली बार है, अगली बार पूरा ले लेना. अब चल, पलंग पर चल. वहाँ आराम से लेट कर तुझे अपना लंड चुसवाता हूँ कह'ता हुआ प्रीतम पलंग पर बैठ गया. पीच्चे सरक'कर वह सिराहा'ने से सॅट कर आराम से लेट गया और मुझे अपनी जाँघ पर सिर रख कर लिटा लिया. उसका लंड अभी भी मैने मुँह में लिया हुआ था और चूस रहा था.

देख अब मैं तेरे मुँह में साडाका लगाता हूँ, तू चूस'ता रहा, जल्दी नहीं करना मेरे राजा, आराम से चूस, तू भी मज़ा ले, मैं भी लेता हूँ. कह'कर उस'ने मेरे मुँह के बाहर निकले लंड को अपनी मूठी में पकड और मेरे सिर को दूसरे हाथ से तान कर सहारा दिया. फिर वह अपने हाथ आगे पीछे कर'ता हुआ सटासट साडाका लगा'ने लगा.

जैसे उसका हाथ आगे पीछे होता, सुपाड़ा मेरे मुँह में और फूल'ता और सिकुडता. मैं प्रीतम की जाँघ पर सिर रखे उस'की आँखों में आँखें डाल'कर मन लगा'कर उसका लॉडा चूस'ने लगा. प्रीतम बीच बीच में झुक'कर मेरा गाल चूम लेता. उस'की आँखों में अजब कामुक'ता और प्यार की खुमारी थी. पंद्रह बीस मिनिट तक वह सडक लगाता रहा. जब भी वह झड'ने को होता तो हाथ रोक लेता. बड़ा जबरदस्त कंट्रोल था अपनी वासना पर, मंजा हुआ खिलाड़ी था.

वह तो शायद रात भर चुसवाता पर अब मैं ही बहुत अधीर हो गया था. मेरा लंड भी फिर से खड़ा होने लगा था. प्रीतम का वीर्य पीने को मैं आतुर था. आख़िर जब फिर से वह झड'ने के करीब आया तो मैने बड़ी याचना भरी नज़रों से उस'की ओर देखा. उस'ने मेरी बात मान ली.

ठीक है, चल अब झाड़'ता हूँ, तैयार रहना मेरे दोस्त, एक बूँद भी नहीं छोडना, मस्त माल है, तू खुशकिस्मत है, सब को नहीं पिलाता मैं अप'ने लौडे की मलाई. कह कर वह ज़ोर ज़ोर से हस्तमैथुन कर'ने लगा. अब उस'के दूसरे हाथ का दबाव भी मेरे सिर पर बढ गया था और लंड मेरे मुँह में और गहराई तक ठूंस'ता हुआ वह सपासाप मूठ मार रहा था.

अचानक उस'के मुँह से एक सिस'की निकली और उसका शरीर ऐंठ सा गया. सुपाड़ा अचानक मेरे मुँह में एकदम फूला जैसे गुब्बारा फूल'कर फट'ने वाला हो. फिर गरम गरम घी जैसी बूँदें मेरे मुँह में बरस'ने लगीं. शुरू में तो ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी ने मलाई का नाल खोल दिया हो इस'लिए मैं उन्हें मुँह से ना निकल'ने देने के चक्कर में सीधा निगल'ता गया, जबकि मेरी इच्च्छा यह हो रही थी कि उन्हें जीभ पर लूं और चाखूँ.

जब लंड का उछलना कुच्छ कम हुआ तब जा'कर मैने अपनी जीभ उस'के छेद पर लगाई और बूँदों को इकठ्ठा कर'ने लगा. चम्मच भर माल जमा होने पर मैने उसे चखा. मानो अमृत था. गाढ़ा गाढा पिघले मक्खन सा, खारा और कुच्छ कसैला. मैने उस चिपचिपे द्रव्य को अपनी जीभ पर खूब घुमाया और जब वह पानी हो गया तो निगल लिया. तब तक प्रीतम का लंड एक और चम्मच माल मेरी जीभ पर उगल चुका था.

पाँच मिनिट लगे मुझे मेरे यार के इस अमूल्य उपहार को निगल'ने में. प्रीतम का लंड अब ठंडा होकर सिकुड'ने लगा था पर मैं उसे तब तक मुँह में लेकर प्यार से चूस'ता रहा जब तक वह बिलकुल नहीं मुरझा गया. आख़िर जब मैने उसे मुँह से निकाला तो प्रीतम ने मुझे खींच कर अप'ने साथ बिठ लिया और मेरा चुंबन लेते हुए बोला.

मेरे राजा, मेरी जान, तू तो लंड चूस'ने में एकदम हीरा है, मालूम है, साले नये नौसिखिए छोकरे शुरू में बहुत सा वीर्य मुँह से निकल जा'ने देते हैं पर तूने तो एक बूँद नहीं बेकार की. बस पूरा लंड मुँह में लेना तुझे सिखाना पड़ेगा, फिर तू किसी रंडी से कम नहीं होगा लंड चूस'ने में मैं उस'की इस शाबासी पर कुच्छ शरमा गया और उसे चूम'ने लगा.

अब हम आपस में लिपट'कर अप'ने हाथों से एक दूसरे के शरीर को सहला रहे थे. चुंबन जारी थे. एक दूसरे के लंड चूस'ने की प्यास बुझ'ने के बाद हम दोनों ही अब चूम चाटी के मूड में थे. पहले तो हम'ने एक दूसरे के होंठों का गहरा चुंबन लिया. प्रीतम की मून्छ मेरे ऊपरी होंठ पर गड़'कर बड़ी मीठी गुदगुदी कर रही थी.

फिर हम'ने अपना मुँह खोला और खुले मुँह वाले चुंबन लेने लगे. अब मज़ा और बढ गया. प्रीतम ने अपनी जीभ मेरे होंठों पर चलाई और फिर मेरे मुँह में डाल दी और मेरी जीभ से लड़ा'ने लगा. मैने भी जीभ निकाली और कुच्छ देर हम हँसते हुए सिर्फ़ जीभ लडाते रहे. फिर एक दूसरे की जीभ मुँह में लेकर चूस'ने का सिलसिला शुरू हुआ.

प्रीतम के मुँह के रस का स्वाद पहली बार मुझे ठीक से मिला और मुझे इतना अच्च्छा लगा कि मैं उस'की जीभ गोली जैसे चूस'ने लगा. उसे भी मेरा मुँह बहुत मीठा लगा होगा क्योंकि वह भी मेरी जीभ बार बार अप'ने होंठों में दबा कर चूस लेता. प्रीतम ने सहसा प्यार से मुझे डाँट कर कहा

साले मादरचोद, मुँह खोल और खुला रख, जब तक मैं बंद कर'ने को ना कहूँ, खुला रखना और फिर मेरे खुले मुँह में उस'ने अपनी लंबी जीभ डाली और मेरे दाँत, मसूडे, जीभ, तालू और आख़िर में मेरा गला अंदर से चाट'ने लगा. उसे मैने मन भर कर अप'ने मुँह का स्वाद लेने दिया. फिर उस'ने भी मुझे वही कर'ने दिया. अब हम दोनों के लंड फिर तन कर खड़े हो गये थे. एक दूसरे के लंडों को मूठी में पकड़'कर हम मुठिया रहे थे. बड़ा मज़ा आ रहा था.

अब क्या करें यार? मैने पूच्छा. हंस कर मेरा चुम्मा लेते हुए प्रीतम बोला.

अब तो असली काम शुरू होगा मेरी जान, गान्ड मार'ने का.

आज ही? मैने थोड़ा डर कर पूच्छा. मुझे उस'के मतवाले लंड को देख'कर मरवा'ने की इच्च्छा तो हो रही थी पर गान्ड में दर्द का भय भी था.

हां राजा, आज ही, इसीलिए तो दोपहर में सोए थे, आज रात भर जाग कर मस्ती करेंगे, कल तो छुट्टी है, देर तक सोएंगे. पहली बार गान्ड मरा रहा है तू, कल आराम मिल जाएगा! प्रीतम की प्यार भरी ज़ोर ज़बरदस्ती पर मैने भी जब यह सोचा कि अपनी गान्ड मरवा'ने के साथ साथ मैं भी प्रीतम की मोटी ताजी गान्ड मार सकूँगा तो मेरा डर कम हुआ और साथ साथ एक अजीब खुमार लंड में चढ गया.

पहले तू मरवाएगा या मैं मरवाऊ? प्रीतम ने अपना लॉडा मुठियाते हुए पूच्छा. मेरी झिझक देख'कर फिर खुद ही बोला.

चल तू ही मार ले. तेरे मस्त लंड से चुदवा'ने को मरी जा रही है मेरी गान्ड, साली बहुत कुलबुला रही है तेरा लॉडा देख'कर, बिलकुल चूत जैसी पुकपुका रही है वह ओन्धे मुँह बिस्तर पर लेट गया और अप'ने चूतड हिला कर मुझे रिझाता हुआ बोला.

देख अब मेरे चूतड तेरे हैं, जो करना है कर, तेरी गान्ड तो बहुत प्यारी है यार, बिलकुल लौन्दियो जैसी, मेरे चूतड ज़रा बड़े हैं, भारी भरकम. देख अच्छे लगते हैं तुझे या नहीं. मैं उस'के पास जा'कर बैठ गया और उस'के चूतड सहला'ने लगा. पहली बार किसी की गान्ड इतनी पास से सॉफ देख रहा था, और वह भी किसी औरत की नहीं बल्कि एक हट्टे कट्टे नौजवान की. प्रीतम के चूतड बहुत भारी भरकम थे पर पिलपिले नहीं थे. घठे हुए मास पेशियों से भरे, चिक'ने और गोरे उन नितंबों को देख मेरे लंड ने ही अपनी राय पहले जाहिर की और कस कर और तंन कर खड़ा हो गया. दोनों चूतदों के बीच गहरी लकीर थी और गान्ड का छेद भूरे रंग के एक बंद मुँह सा लग रहा था.

उस'में उंगली कर'ने का मेरा मन हुआ और मैने उंगली अप'ने मुँह से गीली कर के धीरे से उस'में डाली. मुझे लगा कि मुश्किल से जाएगी पर उस'की गान्ड में बड़ी आसानी से वह उतर गयी. उसका गुदाद्वार अंदर से बड कोमल था. मेरे उंगली करते ही प्रीतम ने हुमक कर कहा.

हाय यार मज़ा आ गया, और उंगली कर ना, इधर उधर चला. ऐसा कर जा'कर मक्खन ले आ, फ़्रिज़ में रखा है. मक्खन लगा कर उंगली कर, मस्त फिसलेगी मैं जा'कर मक्खन ले आया. ठोड उंगली पर लिया और उस'के गुदा में चुपड दिया.

दो उंगली डाल मेरे राजा, प्लीज़. ! मैने उंगली अंदर घुमामी और फिर धीरे से दूसरी भी डाल दी. फिर उन्हें अंदर बाहर कर'ने लगा. मेरी उंगलियाँ आराम से मक्खन से चिक'ने उस मुलायम छेद में घुस रही थी जैसे गान्ड नहीं, किसी युव'ती की चूत हो.

मैने झुक'कर उस'के नितंबों को चूम लिया. फिर चूम'ता हुआ और जीभ से चाट'ता हुआ उस'के छेद की ओर बढ़ा. मुँह छेद के पास ला'कर मैने उंगलियाँ निकाल ली और उन्हें सूँघा. नहाते हुए अपनी ही गान्ड में उंगली कर के मैने बहुत बार सूँघा था, आज प्रीतम की गान्ड की वह मादक गंध मुझे बड़ी मतवाली लगी. मैने उंगलियाँ मुँह में ले लीं और चूस'ने लगा. मक्खन में मिली गान्ड की सौंधी सौंधी खुशबू थी.

चुम्मा दे दे यार उसे, बिचारी तेरी जीभ के लिए तडप रही है. प्रीतम ने मज़ाक किया. वह मेरी ओर देख रहा था कि गान्ड चूस'ने से मैं कतराता हूँ या नहीं. मैं तो अब उस गान्ड की पूजा करना चाह'ता था, इस'लिए तुरंत अप'ने होंठ उस'के गुदा पर रख दिए और चूस'ने लगा.

उस सौंधे स्वाद से जो आनंद मिला वाह क्या कहूँ. प्रीतम ने भी अप'ने हाथों से अप'ने ही चूतड फैला कर अपनी गुदा कोखोला. मैं देख'कर हैरान रह गया. मुझे लग रहा था कि जैसा सबका होता है वैसा छोट सकरा भूरा छेद होगा. पर प्रीतम का छेद तो किसी चूत जैसा खुल गया. उस'के अंदर की गुलाबी कोमल झलक देख कर मैने उस'में जीभ डाल दी. मक्खन से चिकनी उस गान्ड को चूस'ने में ऐसा आनंद आया जैसे कोई मिठायी खा'कर भी नहीं आता.

शाब्बास मेरे राजा, मस्त चाट'ता है तू गान्ड, ज़रा जीभ और अंदर डाल. जीभ से चोद दे यार. जीभ डाल डाल कर मैने उस'की गान्ड को खूब चॅटा और चूसा. बीच में प्यार से उस'में नाक डाल कर सूंघ'ता पड़ा रहा. अंत में मन नहीं माना तो मुँह में उस'के नितंब का मास भर'कर उसे दाँतों से हल्के हल्के काट'ने लगा. प्रीतम बोला.

गांद खाना चाह'ता है मेरी? खिला दूँगा यार वह भी, क्या याद करेगा तू. अपनी गान्ड भरपूर चुसवा कर प्रीतम ने मुझे पास खींच कर ज़ोर ज़ोर से मेरा लंड चूस कर गीला किया और फिर बोला.

चढ़ जा यार, मार ले मेरी, अब नहीं रहा जाता. मस्त गीली है गान्ड तेरे चूस'ने से, मक्खन भी लगा है, आराम से घुस जाएगा तेरा लौडा मैं प्रीतम के कूल्हों के दोनों ओर घुट'ने जमा कर बैठ और अपना सुपाड़ा उस'के गुदा में दबा दिया. प्रीतम ने अप'ने चूतड पकड़ कर खींच रखे थे इस'लिए बड़े आराम से उस'के खुले छेद में सपप से मेरा शिश्न अंदर हो गया. उस मुलायम छेद के सुखद स्पर्श से मैं और उत्तेजित हो उठ और एक धक्के में अपना लंड जड़ तक प्रीतम की गान्ड में उतार दिया.

क्रमशः................


rajaarkey
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Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:22

YAAR BANA PRITAM - BHAAG (3)

gataank se aage........

Yaar, too choos le pahale, itana gaaDhaa veery pilaaoonga ki rabaDee bhee us'ke saam'ne feekee paD jaayegee. Aur asal men abhee isase agar tujhe chodoonga to jaroor teree faT jaayegee. Too naheen jhel paayegaa. Apanee jaan kee naajuk gaanD main faaDana naheen chaahataa. Aakhir roj maaranee hai! Ek baar jhaD'ne ke baad jab thoDa jor kam ho jaaye is musTande kaa, to fir maaroonga teree pyaar se. Aur wah apana supaaDa mere gaalon aur munh par baDe laaD se ragaD'ne lagaa.

Maine Pritam ke lunD ko haath men liyaa. Wah aisa thirak raha tha jaise ki koee jinda jaanawar ho. Us'kee nasen sooj kar rassee jaisee fool gayee thee. SupaaDe kee buree tarah tanee huee laal chamaDee bilakul resham jaisee mulaayam thee. SupaaDe ke beech ke chhed se baDee bheenee khushaboo aa rahee thee aur chhed par ek motee jaisee boond bhee chamak rahee thee. Paas se us'kee ghanee jhaanten bhee bahut maadak lag rahee thee, ek ek ghungharaala baal saaf dikh raha thaa.

Main ab aur na ruk saka aur jeebh nikaal kar us mast cheez ko chaaT'ne lagaa. Pahale to maine us amRut see boond ko jeebh kee nok se uTha liya aur fir poore lunD ko apanee jeebh se aise chaaT'ne laga jaise ki aaisacream kee kaindee ho. Pritam ne ek sukh kee aah bharee aur mere sir ko pakaD'kar ap'ne peT par dabaana shuroo kiyaa.

Maja aa gaya yaar, baDa mast chaaT'ta hai too, ab munh men le le mere raajaa, choos le. Main bhee us raseele lunD kee malaayee ka swaad lene ko utsuk tha is'liye maine ap'ne honth khole aur supaaDa munh men lene kee koshish kee. Wah itana baDa tha ki do teen baar koshish kar'ne par bhee munh men naheen sama raha tha aur mere daant baar baar us'kee naajuk chamaDee men lag'ne se Pritam sisak uTh'ta thaa. Aakhir Pritam ne baanye haath men apana lauDa pakaDa aur daahine se mere gaalon ko dabaate hue bolaa.

Lag'ta hai mere yaar ne kabhee lunD naheen choosaa, chal tujhe sikhaaoom, pahale too ap'ne honthon se ap'ne daant Dhak le. Shaabba ... S. Ab munh khol. itana sa naheen raajaa! Aur khol! samajh DenTisT ke yahaan baiTha hai. Usaka haath mere gaalon ko kas kar pichaka kar mera munh khol'ne laga aur saath hee maine bhee pooree shakti se apana munh ba diyaa. Theek mauke par Pritam ne supaaDa thoDa dabaaya aur mere munh men saraka diyaa. Poora supaaDa aise mere munh men bhar gaya jaise baDa laDDoo ho. Us mulaayam chik'ne laDDoo ko main choos'ne lagaa.

Pritam ne ab lunD par se haath haTa liya aur mere baalon men ungaliyaan pyaar se chalaata hua mujhe protsaahit kar'ne lagaa. Maine us'ke lunD ka Danda haath men liya aur daba'ne lagaa. Dhaayee inch moTe us sakht nason se bhare hue Dande ko haath men lekar aisa lag'ta tha jaise kisee moTee kakaDee ko pakaDa hua hoon. Apanee jeebh maine us'ke supaaDe kee satah par ghumaamee to Pritam humak uTha aur donon haathon se mera sir pakaD'kar apanee or kheench'ta hua bolaa.

Poora le le munh men Sukumar raajaa, nigal le, poora lekar choos'ne men aur maja aayegaa. Maine apana gala Dheela chhoDa aur lunD aur andar lene kee koshish kee. Bas teen chaar inch hee le paayaa. Mera munh poora bhar gaya tha aur supaaDa bhee gale men pahunch kar aTak gaya thaa. Pritam ne ab adheer hokar mera sir pakaDa aur ap'ne peT par bheench liyaa. Wah apana poora lunD mere munh men ghuseD'ne kee koshish kar raha thaa.

Par gale men supaaDa fans'ne se main gongiya'ne lagaa. LunD munh men lekar choos'ne men mujhe bahut maja aa raha tha par ab aisa lag raha tha jaise mera dam ghuT jaayegaa. Mujhe chhaTapaTaata dekh Pritam ne apanee pakaD Dheelee kar dee.

Lag'ta hai pahalee baar main mere yaar kee, lunD naheen choosa kabhee. Chal koee baat naheen, pahalee baar hai, agalee baar poora le lenaa. Ab chal, palang par chal. Wahaan aaraam se leT kar tujhe apana lunD chusawaata hoon Kah'ta hua Pritam palang par baiTh gayaa. Peechhe sarak'kar wah siraha'ne se saT kar aaraam se leT gaya aur mujhe apanee jaangh par sir rakh kar liTa liyaa. Usaka lunD abhee bhee maine munh men liya hua tha aur choos raha thaa.

Dekh ab main tere munh men saDaka lagaata hoon, too choos'ta raha, jaldee naheen karana mere raajaa, aaraam se choos, too bhee maja le, main bhee leta hoon. Kah'kar us'ne mere munh ke baahar nikale lunD ko apanee mooThee men pakaDa aur mere sir ko doosare haath se thaan kar sahaara diyaa. Fir wah apanee haath aage peechhe kar'ta hua saTaasaT saDaka laga'ne lagaa.

Jaise usaka haath aage peechhe hotaa, supaaDa mere munh men aur fool'ta aur sikuDataa. Main Pritam kee jaangh par sir rakhe us'kee aankhon men aankhen Daal'kar man laga'kar usaka lauDa choos'ne lagaa. Pritam beech beech men jhuk'kar mera gaal choom letaa. Us'kee aankhon men ajab kaamuk'ta aur pyaar kee khumaaree thee. Pandrah bees minute tak wah saDaka lagaata rahaa. Jab bhee wah jhaD'ne ko hota to haath rok letaa. BaDa jabaradast kantrol tha apanee waasana par, manja hua khilaaDee thaa.

Wah to shaayad raat bhar chusawaata par ab main hee bahut adheer ho gaya thaa. Mera lunD bhee fir se khaDa hone laga thaa. Pritam ka veery peene ko main aatur thaa. Aakhir jab fir se wah jhaD'ne ke kareeb aaya to maine baDee yaachana bharee najaron se us'kee or dekhaa. Us'ne meree baat maan lee.

Theek hai, chal ab jhaD'ta hoon, taiyaar rahana mere dost, ek boond bhee naheen chhoDanaa, mast maal hai, too khushakismat hai, sab ko naheen pilaata main ap'ne lauDe kee malaayee. Kah kar wah jor jor se hastamaithun kar'ne lagaa. Ab us'ke doosare haath ka dabaav bhee mere sir par baDha gaya tha aur lunD mere munh men aur gaharaayee tak Thoons'ta hua wah sapaasap mooTh maar raha thaa.

Achaanak us'ke munh se ek sis'kee nikalee aur usaka shareer ainth sa gayaa. SupaaDa achaanak mere munh men ekadam foola jaise gubbaara fool'kar faT'ne waala ho. Fir garam garam ghee jaisee boonden mere munh men baras'ne lageen. Shuroo men to aisa lag raha tha ki jaise kisee ne malaayee ka nal khol diya ho is'liye main unhen munh se na nikal'ne dene ke chakkar men seedha nigal'ta gayaa, jabaki meree ichchha yah ho rahee thee ki unhen jeebh par loon aur chakhoon.

Jab lunD ka uchhalana kuchh kam hua tab ja'kar maine apanee jeebh us'ke chhed par lagaayee aur boondon ko ikaThTha kar'ne lagaa. Chmaach bhar maal jama hone par maine use chakhaa. Maano amRut thaa. GaaDhaa gaaDhaa pighale makkhan saa, khaara aur kuchh kasailaa. Maine us chipachipe dravy ko apanee jeebh par khoob ghumaaya aur jab wah paanee ho gaya to nigal liyaa. Tab tak Pritam ka lunD ek aur chmaach maal meree jeebh par ugal chuka thaa.

Paanch minute lage mujhe mere yaar ke is amooly upahaar ko nigal'ne men. Pritam ka lunD ab Thanda hokar sikuD'ne laga tha par main use tab tak munh men lekar pyaar se choos'ta raha jab tak wah bilakul naheen murajha gayaa. Aakhir jab maine use munh se nikaala to Pritam ne mujhe kheench kar ap'ne saath biTha liya aur mera chumban lete hue bolaa.

Mere raajaa, meree jaan, too to lunD choos'ne men ekadam heera hai, maaloom hai, saale naye nausikhiye chhokare shuroo men bahut sa veery munh se nikal ja'ne dete hain par toone to ek boond naheen bekaar kee. Bas poora lunD munh men lena tujhe sikhaana paDegaa, fir too kisee randee se kam naheen hoga lunD choos'ne men Main us'kee is shaabaasee par kuchh sharama gaya aur use choom'ne lagaa.

Ab ham aapas men lipaT'kar ap'ne haathon se ek doosare ke shareer ko sahala rahe the. Chumban jaaree the. Ek doosare ke lunD choos'ne kee pyaas bujh'ne ke baad ham donon hee ab choom chaaTee ke mooD men the. Pahale to ham'ne ek doosare ke honthon ka gahara chumban liyaa. Pritam kee moonchh mere ooparee honth par gaD'kar baDee meeThee gudagudee kar rahee thee.

Fir ham'ne apana munh khola aur khule munh waale chumban lene lage. Ab maja aur baDha gayaa. Pritam ne apanee jeebh mere honthon par chalaayee aur fir mere munh men Daal dee aur meree jeebh se laDa'ne lagaa. Maine bhee jeebh nikaalee aur kuchh der ham hansate hue sirf jeebh laDaate rahe. Fir ek doosare kee jeebh munh men lekar choos'ne ka silasila shuroo huaa.

Pritam ke munh ke ras ka swaad pahalee baar mujhe Theek se mila aur mujhe itana achchha laga ki main us'kee jeebh golee jaise choos'ne lagaa. Use bhee mera munh bahut meeTha laga hoga kyonki wah bhee meree jeebh baar baar ap'ne honthon men daba kar choos letaa. Pritam ne sahasa pyaar se mujhe Daant kar kaha

Saale maadarachod, munh khol aur khula rakh, jab tak main band kar'ne ko na kahoon, khula rakhanaa Aur fir mere khule munh men us'ne apanee lambee jeebh Daalee aur mere daant, masooDe, jeebh, taaloo aur aakhir men mera gala andar se chaaT'ne lagaa. Use maine man bhar kar ap'ne munh ka swaad lene diyaa. Fir us'ne bhee mujhe wahee kar'ne diyaa. Ab ham donon ke lunD fir tan kar khaDe ho gaye the. Ek doosare ke landon ko mooThee men pakaD'kar ham muThiya rahe the. BaDa maja aa raha thaa.

Ab kya karen yaar? Maine poochhaa. Hans kar mera chumma lete hue Pritam bolaa.

Ab to asalee kaam shuroo hoga meree jaan, gaanD maar'ne kaa.

Aaj hee? Maine thoDa Dar kar poochhaa. Mujhe us'ke matawaale lunD ko dekh'kar marawa'ne kee ichchha to ho rahee thee par gaanD men dard ka bhay bhee thaa.

Haan raajaa, aaj hee, iseeliye to dopahar men soye the, aaj raat bhar jaag kar mastee karenge, kal to chhuTTee hai, der tak soyenge. Pahalee baar gaanD mara raha hai too, kal aaraam mil jaayegaa! Pritam kee pyaar bharee jor jabaradastee par maine bhee jab yah socha ki apanee gaanD marawa'ne ke saath saath main bhee Pritam kee moTee taajee gaanD maar sakoonga to mera Dar kam hua aur saath saath ek ajeeb khumaar lunD men chaDha gayaa.

Pahale too marawaayega ya main marawaaoom? Pritam ne apana lauDa muThiyaate hue poochhaa. Meree jhijhak dekh'kar fir khud hee bolaa.

Chal too hee maar le. Tere mast lunD se chudawa'ne ko maree ja rahee hai meree gaanD, saalee bahut kulabula rahee hai tera lauDa dekh'kar, bilakul choot jaisee pukapuka rahee hai Wah ondhe munh bistar par leT gaya aur ap'ne chootaD hila kar mujhe rijhaata hua bolaa.

Dekh ab mere chootaD tere hain, jo karana hai kar, teree gaanD to bahut pyaaree hai yaar, bilakul laundiyon jaisee, mere chootaD jara baDe hain, bhaaree bharakama. Dekh achchhe lagate hain tujhe ya naheen. Main us'ke paas ja'kar baiTh gaya aur us'ke chootaD sahala'ne lagaa. Pahalee baar kisee kee gaanD itanee paas se saaf dekh raha thaa, aur wah bhee kisee aurat kee naheen balki ek haTTe kaTTe naujawaan kee. Pritam ke chootaD bahut bhaaree bharakam the par pilapile naheen the. GaThe hue maas peshiyon se bhare, chik'ne aur gore un nitambon ko dekh mere lunD ne hee apanee raay pahale jaahir kee aur kas kar aur tann kar khaDa ho gayaa. Donon chootaDon ke beech gaharee lakeer thee aur gaanD ka chhed bhoore rang ke ek band munh sa lag raha thaa.

Us'men ungalee kar'ne ka mera man hua aur maine ungalee ap'ne munh se geelee kar ke dheere se us'men Daalee. Mujhe laga ki mushkil se jaayegee par us'kee gaanD men baDee aasaanee se wah utar gayee. Usaka gudaadwaar andar se baDa komal thaa. Mere ungalee karate hee Pritam ne humak kar kahaa.

Haay yaar maja aa gayaa, aur ungalee kar naa, idhar udhar chalaa. Aisa kar ja'kar makkhan le aa, friz men rakha hai. Makkhan laga kar ungalee kar, mast fisalegee Main ja'kar makkhan le aayaa. ThoDa ungalee par liya aur us'ke guda men chupaD diyaa.

Do ungalee Daal mere raajaa, please. ! Maine ungalee andar ghumaamee aur fir dheere se doosaree bhee Daal dee. Fir unhen andar baahar kar'ne lagaa. Meree ungaliyaan aaraam se makkhan se chik'ne us mulaayam chhed men ghus rahee thee jaise gaanD naheen, kisee yuw'tee kee choot ho.

maine jhuk'kar us'ke nitambon ko choom liyaa. Fir choom'ta hua aur jeebh se chaaT'ta hua us'ke chhed kee or baDhaaa. Munh chhed ke paas la'kar maine ungaliyaan nikaal lee aur unhen soonghaa. Nahaate hue apanee hee gaanD men ungalee kar ke maine bahut baar soongha thaa, aaj Pritam kee gaanD kee wah maadak gandh mujhe baDee matawaalee lagee. Maine ungaliyaan munh men le leen aur choos'ne lagaa. Makhkhan men milee gaanD kee saundhee saundhee khushaboo thee.

Chumma de de yaar use, bichaaree teree jeebh ke liye taDap rahee hai. Pritam ne majaak kiyaa. Wah meree or dekh raha tha ki gaanD choos'ne se main kataraata hoon ya naheen. Main to ab us gaanD kee pooja karana chaah'ta thaa, is'liye turant ap'ne honth us'ke guda par rakh diye aur choos'ne lagaa.

Us saundhe swaad se jo aanand mila wah kya kahoon. Pritam ne bhee ap'ne haathon se ap'ne hee chootaD faila kar apana guda kholaa. Main dekh'kar hairaan rah gayaa. Mujhe lag raha tha ki jaisa sabaka hota hai waisa chhoTa sakara bhoora chhed hogaa. Par Pritam ka chhed to kisee choot jaisa khul gayaa. Us'ke andar kee gulaabee komal jhalak dekh kar maine us'men jeebh Daal dee. Makkhan se chikanee us gaanD ko choos'ne men aisa aanand aaya jaise koee miThaayee kha'kar bhee naheen aataa.

Shaabbaas mere raajaa, mast chaaT'ta hai too gaanD, jara jeebh aur andar Daal. Jeebh se chod de yaar. Jeebh Daal Daal kar maine us'kee gaanD ko khoob chaaTa aur choosaa. Beech men pyaar se us'men naak Daal kar soongh'ta paDa rahaa. Ant men man naheen maana to munh men us'ke nitamb ka maas bhar'kar use daanton se halke halke kaaT'ne lagaa. Pritam bolaa.

GaanD khaana chaah'ta hai meree? Khila doonga yaar wah bhee, kya yaad karega too. Apanee gaanD bharapoor chusawa kar Pritam ne mujhe paas kheench kar jor jor se mera lunD choos kar geela kiya aur fir bolaa.

ChaDha ja yaar, maar le meree, ab naheen raha jaataa. Mast geelee hai gaanD tere choos'ne se, makkhan bhee laga hai, aaraam se ghus jaayega tera lauDaa Main Pritam ke koolhon ke donon or ghuT'ne jama kar baiTha aur apana supaaDa us'ke guda men daba diyaa. Pritam ne ap'ne chootaD pakaD kar kheench rakhe the is'liye baDe aaraam se us'ke khule chhed men sapp se mera shishnaagr andar ho gayaa. Us mulaayam chhed ke sukhad sparsh se main aur uttejit ho uTha aur ek dhakke men apana lunD jaD tak Pritam kee gaanD men utaar diyaa.

kramashah................


rajaarkey
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Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:23

यार बना प्रीतम - भाग (4)

गतान्क से आगे........

मुझे बहुत अच्च्छा लगा, थोड़ा आश्चर्य भी हुआ. मुझे लगा था कि गान्ड में लंड डाल'ने में थोड़ी मेहनत करना पडेगी. यहाँ तो वह आसानी से पूरा अंदर हो गया था. मैं समझ गया कि मेरा यार काफ़ी मरवा चुका है.

अब उस'ने चूतड छोडे और अपना छल्ला सिकोड कर मेरा लंड गान्ड से पकड़ लिया. अब मज़ा आया मुझे. उस'की गान्ड ने कस कर ऐसे मेरे लंड को पकड हुआ था जैसे मूठी में दबा लिया हो. मैं प्रीतम के ऊपर लेट गया और बेतहाशा उस'की चिकनी पीठ और मासल कंधे चूम'ने लगा.

मेरे राजा, बहुत प्यारा है तेरा लंड, बड मस्त लग रहा है गान्ड में, है थोड़ा छ्होटा पर एकदम सख़्त है, लोहे जैसा. मार यार, गान्ड मार मेरी उस'के कहते ही मैं धीरे धीरे मज़े लेकर उस'की गान्ड मार'ने लगा. मैने कल'पना भी नहीं की थी कि किसी मर्द की गान्ड मारना इतना सुखद अनुभव होगा. उस'की गान्ड एकदम कोमल और गरम थी और मेरे लंड को प्यार से पकड़े हुए थी. मैने अपनी बाँहें प्रीतम के शरीर के नीचे घुसा कर उस'की छा'ती को बाँहों में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से गान्ड मार'ने लगा.

शाबास मेरे राजा, मार और ज़ोर से, और मेरे चूचुक दबा यार प्लीज़, समझ औरत के हैं. मुझे मज़ा आता है यार चूचुक मसले जा'ने पर. और देख झद'ना नहीं साले नहीं तो मार खाएगा. प्रीतम के चमडीले बेरों जैसे चूचुक दबाता और उंगलियों में लेकर मसल'ता हुआ मैं एक चित्त होकर उस'की गान्ड को भोग'ने लगा. मक्खन से चिकनी गान्ड में लंड इतना मस्त फिसल रहा था की मैं जल्द ही बिलकुल झड'ने के करीब आ गया. किसी तरह अप'ने आप को मैने रोका और हांफ'ता हुआ पड रहा. मेरे इस संयम पर खुश होकर प्रीतम ने अपना सिर घुमाया और अपना हाथ पीछे कर'के मेरी गर्दन में डाल'कर मेरे सिर को पास खींच लिया.

बस ऐसे ही मार बिना झाडे. बहुत मस्त मार रहा है तू, इनाम मिलना चाहिए तुझे मेरी जान, चुम्मा दूँगा मस्त रसीला, अप'ने मुँह का रस चखाऊंगा तुझे. चुम्मा लेते हुए गान्ड मार अप'ने यार की. मैने अप'ने होंठ उस'के होंठों पर रख दिए और पास से उस'की वासना भरी आँखों में एक प्रेमी की तरह झाँक'ता हुआ उसका मुँह चूस'ने लगा. उस'के मुँह के रस का स्वाद किसी सुंदरी के मुँह से ज़्यादा मीठा लग रहा था. जल्द ही खुले मुँह में घुस कर हमारी जीभें लड़'ने लगीं और एक दूसरे की जीभ चूसते हुए हम'ने फिर संभोग शुरू कर दिया. गांद में मेरे लंड के फिर गहरे घुसते ही प्रीतम चहक उठा.

मार साली को ज़ोर से, फुकला कर दे, मा कसम, इतना मज़ा बहुत दिन में आया मेरी जान. घंटा भर मार मेरी राजा प्लीज़. . घंटे भर तो नहीं पर बीस मिनिट मैने ज़रूर प्रीतम की गान्ड मारी होगी. अप'ने चूतड उच्छाल उच्छाल कर पूरे जोरों से प्रीतम की गान्ड में मैं लंड पेल'ता और फिर सुपाडे तक बाहर खींच लेता. मेरी जांघें उस'के नितंबों से टकरा'कर 'सॅट' 'सॅट' 'सॅट' आवाज़ कर रही थी. आख़िर कामसुख के अतिरेक से मेरा संयम जवाब दे गया और उस'की जीभ चूसते हुए मैं कस कर झड गया.

प्रीतम ने मेरे लंड को अप'ने चूतडो की गहराई में पूरा झड जा'ने दिया और फिर मुझे अपनी पीठ से उतार कर उठ बैठा. उस'की आँखें अब वासना से लाल हो चुकी थी. उसका लंड उच्छल उच्छल कर फूफकार रहा था.

मेरी सील टूटी

बिना कुच्छ कहे उस'ने मुझे बिस्तर पर ऑंढा लिटा दिया और फिर मेरी गान्ड पर टूट पड़ा. मेरे नितंबों को चाट'ता हुआ और चूम'ता हुआ वह उन्हें ऐसे मसल रहा था जैसे चूचियाँ हों. मस्ती में उस'ने ज़ोर से मेरे नितंब को काट खाया. मेरी हल्की सी चीख निकल गयी. फिर झुक कर सीधा मेरा गुदा चूस'ने लगा. अप'ने हाथों से मेरे नितंब खींच कर उस'ने मेरी गान्ड खोली और उस'में अपनी जीभ उतार दी. प्रीतम की लंबी जीभ गहरी मेरे चूतदों में गयी और मैं सुख से सिहर उठा.

प्रीतम ऐसे मेरी गान्ड में मुँह मार रहा था जैसे खा जाना चाह'ता हो. कभी जीभ से चोदता, कभी मुँह में मेरे गुदा को भर'कर चबा'ने लगता. दर्द के साथ ही आसीन सुख की लहर मेरी नस नस में दौड़ जा'ती.

अब सहन नहीं होता मेरी जान, मार लेता हूँ तेरी. यार अब तू ही मेरे लंड पर मक्खन लगा. तेरे मुलायम हाथों से ज़रा लॉडा और मस्त होगा साला, देख तो कैसा उच्छल रहा है तेरी गान्ड लेने को. जा मक्खन ले आ यार प्रीतम ने मुझपर से उठते हुए कहा. पर मैं उठ'कर पहले टेबल के पास गया और स्केल ले कर आया. मन में बहुत कुतूहल था कि उस मतवाले लंड की आख़िर साइज़ क्या है! मैं स्केल से प्रीतम का लंड नाप'ने लगा. वह मुस्करा दिया.

नाप ले मेरी रानी. आख़िर गान्ड में लेना है, तुझे भी गर्व होगा कि इतना बड तूने लिया है. उसका शिश्न पूरा सवा आठ इंच लंबा था. डंडे की मोटायी दो इंच से थोड़ी ज़्यादा थी और सुपाड़ा तो करीब करीब ढाई इंच के व्यास का था. मेरे कौमार्य को कुच्छ ही देर में भंग कर'ने को मचलते उस हथियार को मैने फिर एक बार चूमा और फिर हथेली पर ढेर सा मक्खन लेकर उस'के लंड में चुपड'ने लगा. लोहे के डंडे जैसे उस लौडे को हाथ में लेकर उस'की फूली नसों को महसूस कर'के जहाँ एक तरफ मेरी वासना फिर भड़क'ने लगी वहीं मन में डर सा लग'ने लगा. घ्होडे के लंड जैसे इस लौडे को क्या मैं ले पाऊँगा?

पाँच मिनिट मालिश करवा कर प्रीतम की सहनशक्ति भी जा'ती रही. उस'ने मुझे फिर बिस्तर पर मुँह के बल पटका और मेरे गुदा में मक्खन लगाना शुरू किया. दो तीन लोन्दे उस'ने अंदर डाल दिए और फिर मेरे शरीर के दोनों ओर घुट'ने टेक कर बैठ गया.

बस मेरी रानी, अब नहीं रहा जाता, तैयार हो जा अपनी कुँवारी गान्ड मरवा'ने को. ऐसा कर अप'ने चूतड ज़रा खुद ही फैला, इससे आसानी से अंदर जाएगा, तुझे तकलीफ़ भी कम होगी मैने अप'ने चूतड फैलाए और मेरे गुदा पर उस'के सुपाडे का स्पर्श महसूस कर'के आँखें बंद कर'के प्रतीक्षा कर'ने लगा. आज मुझे महसूस हो रहा था कि सुहागरात में पहली बार लंड चूत में लेते हुए दुल्हन पर क्या बीत'ती होगी. दिल जोरों से धडक रहा था. बहुत डर लग रहा था. पर छूट कर भाग'ने की मेरी बिलकुल इच्च्छा नहीं थी.

प्रीतम ने हौले हौले लंड पेलना शुरू किया. अपनी धधक'ती वासना के बावजूद वह बड़े प्यार से लंड अंदर डाल रहा था. पर मेरा गुदा अप'ने आप सिकुड'कर मानो अंदर घुस'ने वाले शत्रु को रोक रहा था. प्रीतम ने मुझे समझाया

यार सुकुमार, मेरी रानी, गान्ड खोल, जैसे टट्टी के समय कर'ता है, तब घुसेगा अंदर आसानी से नहीं तो तकलीफ़ देगा तुझे मेरी जान. मैने ज़ोर लगाया और गान्ड ढीली छोडी. एक सेकंड में मौका देख'कर प्रीतम ने मंजे खिलाड़ी जैसे सुपाड़ा पचाक से अंदर कर दिया. मेरा गुदा ऐसा दुखा जैसे फट गया हो. मैं चीख पड़ा. प्रीतम इस'के लिए तैयार था, मेरा मुँह दबोच कर उस'ने मेरी चीख बंद कर दी. मैं छ्टेपाटा'ने लगा. आँखों में आँसू आ गये. प्रीतम ने लंड पेलना बंद किया और एक हाथ मेरे पेट के नीचे डाल कर मेरा लंड सहला'ने लगा.

बस मेरे राजा, हो गया, रो मत, हाथी तो चला गया, अब पूंच्छ आराम से जाएगी. तू गान्ड मत सिकोड ढीली छोड पाँच मिनिट में ऐसा मरवाएगा कि कोई रंडी भी क्या चुदवा'ती होगी. कह'कर वह मेरी गर्दन चूम'ने लगा. उस'की मीठी पुचकार ने और मेरे लंड में होती मीठी चुदासी ने आख़िर अपना जादू दिखाया. मेरी यातना कम हुई और मैने सिसकना बंद कर'के गान्ड ढीली छोडी. बहुत राहत मिली.

बस अब दो मिनिट में पूरा डाल'ता हूँ, दुखे तो बताना, मैं रुक जाऊँगा. कह'कर प्रीतम ने इंच इंच लंड मेरे चूतडो के बीच पेलना शुरू किया. आधा तो मैने ले लिया और फिर दर्द होने से सिसक पड़ा. वह रुक गया. कुच्छ देर बाद दो इंच और डाला तो मुझे लगा कि पूरी गान्ड ठूंस ठूंस कर किसीने भर दी हो. अंदर जगह ही नहीं थी.

प्रीतम कुच्छ देर और धीरे धीरे लंड पेल'ने की कोशिश कर'ता रहा पर अब वह अंदर नहीं जा रहा था. वह ज़ोर लगाता तो मुझे बहुत दर्द होता था. एकाएक उस'ने मेरा मुँह दबोचा और एक शक्तिशाली झट'के से बचा हुआ तीन चार इंच का डंडा एक ही बार में अंदर गाढ दिया. मुझे लगा कि जैसे मेरी गान्ड फट गयी. मैं तिलमिला उठ और चीख'ने की कोशिश कर'ता हुआ हाथ पैर मार'ने लगा. प्रीतम ने अब मुझे पूरी तरह दबोच लिया था और मेरे ऊपर ऐसे चढ गया था जैसे शेर हिरण पर शिकार के लिए चढ जाता है. उसका लॉडा जड़ तक मेरी गान्ड में उतर गया था. मेरे तन कर खुले खींचे गुदा के छल्ले पर उस'की झाँटें महसूस हो रही थी.

दो मिनिट बाद जब उस'ने हाथ मेरे मुँह से हटाया तो मैं कराह कर सिसक'ने लगा. घान्ड में भयानक दर्द हो रहा था. मुझे चूम चूम कर और मेरा लंड मुठिया मुठिया कर उस'ने मुझे चुप कराया.

सॉरी मेरी जान पर आख़िर के तीन इंच इसी तरह ज़बरदस्ती पेल'ने पड़ते हैं नहीं तो रात निकल जा'ती है उसे अंदर डाल'ने में. असल में वहाँ तेरी आँत में बेंड है और उस'के आगे जा'ने में लंड बहुत दर्द देता है. आज अब तेरी सील टूट गयी, मालूम है, वहाँ तेरी आँत अब सीधी हो गयी होगी. अब दर्द इतना नहीं होगा. अब बस मत रो मेरी जान, अब मज़ा ही मज़ा है. कह कर वह मेरा सिर अपनी ओर घुमा कर मुझे चूम'ने लगा और मेरे आँसू अपनी जीभ से चाट'ने लगा.

उस'की आँखों में बेहद प्यार और तीव्र कामुक'ता थी. धीरे धीरे मेरा दर्द कम हुआ और लंड भी कस कर खड़ा हो गया. दर्द तो अब भी हो रहा था पर गान्ड में अब एक अजीब मादक खुमार सा भर गया था. इसका प्रमाण यह था कि अचानक मेरा गुदा अप'ने आप सिकुड कर प्रीतम के लंड को पकड़'ने लगा.

आ गया रास्ते पर. चल अब मार'ने दे, और ना तडपा. हंस कर वा बोला. मैं भी शरमा सा गया और आँसू भरी आँखों से उस'की आँखों में देख'कर उसे चूम कर मुस्करा दिया. प्रीतम ने मेरे मुँह पर अप'ने होंठ दबा दिए और एक गहरा चुंबन लेता हुआ वह धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर कर'ने लगा. मेरी गान्ड की चुदाई शुरू हो चुकी थी.

आधे घंटे तक प्रीतम ने मेरी मारी. पूरे मज़े ले लेकर, प्यार से मेरी कुँवारी गान्ड को उस'ने भोगा. दो तीन आसन उस'ने इस आधे घंटे में मुझे सीखा दिए. पहले कुच्छ देर मुझपर चढ कर वह बड़े साधे अंदाज में मेरी मार'ता रहा. धीरे धीरे रफ़्तार भी बढाइ. जब लंड आराम से 'पच' 'पच 'पच' की सेक्सी आवाज़ के साथ मेरी गान्ड में फिसल'ने लगा तब कुच्छ देर और मार'ने के बाद वह उठा और मुझे पकड़ कर चलाता हुआ दीवार तक ले गया.

गांद में लंड लेकर चलना भी एक अलग अनुभव था. हर कदम के साथ मेरे चूतड जब डोलते थे तो लंड गान्ड में रोल होता था. दुख'ता भी था और मज़ा भी आता था. प्रीतम ने मुझे दीवार से मुँह के बल सट कर खड किया और फिर खड़े खड़े ही मेरी मारी. अब तक मेरे गुदा में दर्द कम हो गया था और लबालब भरे मक्खन के कारण उसका लॉडा आराम से घचाघाच फिसल रहा था.

पसंद आया आसन मेरे राजा? या लेटे लेटे लेने में मज़ा आया? उस'ने मेरी गान्ड में लंड पेलते हुए पूच्छा. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

यार तुम उलट लटक'कर भी मारो तो मुझे मज़ा आएगा. क्या शाही लॉडा है तेरा मेरे राजा! मैं तो फिदा हो गया. मैने भाव विभोर होकर उससे कहा. प्रीतम हंस दिया पर मेरी बात उसे बहुत अच्छी लगी यह सॉफ था क्योंकि उस'ने और जोश से मेरी मारना शुरू कर दिया. फिर वह मुझे टेबल तक ले गया और मुझे झुक कर टेबल का आधार लेकर खड़े होने को कहा. मैं टेबल का किनारा पकड़ कर झुक कर खड हुआ और वह मेरे पीछे खड़ा खड़ा मेरी मार'ता रहा.

ये खजुराहो स्टाइल है. देखी है ना वो मूर्ति? फ़र्क सिर्फ़ यह है कि उस'में एक मर्द औरत को ऐसे चोद'ता है. उस'के कंट्रोल की मैने दाद दी, इत'ने तन कर खड़े लंड के बावजूद वह बड मज़ा ले लेकर सधी हुई लय से मुझे आसन सीखा सीखा कर मेरी मार रहा था.

उस'के बाद मुझे फिर बिस्तर पर ले गया. बिस्तर पर मुझे कोहानियों और घुटनों पर कुतिया स्टाइल में खड़ा किया और पीछे से मेरे ऊपर चढ कर कुत्ते जैसी मेरी मार'ने लगा. अब उस'के हाथ मेरे बदन को भींचे हुए थे और वह घुट'ने टेक कर आधा वजन मेरे ऊपर देता हुआ मेरी मार रहा था.

यह आखरी आसन है यार. अब मैं ये मस्ती और सह नहीं सकूँगा. वैसे पशुसंभोग का यह आसान मरा'ने वाले के लिए ज़रा कठिन है. वजन सहन पड़'ता है, जैसे कुतिया कुत्ते का या घोडी घोड़े का सह'ती है. हाँ, मार'ने वाले को बहुत मज़ा आता है मैं अब कामुक'ता में डूबा हुआ हाम्फते हुए कुतिया जैसे मरवा रहा था. इतना मज़ा आ रहा था कि मैने सोचा कि अगर प्रीतम मेरे ऊपर पूरा चढ जाए तो क्या मज़ा आएगा. मैने उससे कहा तो वह ज़ोर से साँस लेता हुआ बोला कि बस दो मिनिट बाद. असल में उस'के स्खलन का समय करीब आ रहा था. कुच्छ देर बाद उस'की साँस और तेज चल'ने लगी. वह मुझे बोला

क्रमशः................