सीता --गाँव की लड़की शहर में compleet

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The Romantic
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Re: सीता --गाँव की लड़की शहर में

Unread post by The Romantic » 14 Dec 2014 12:33

सीता --एक गाँव की लड़की--13

कोमल दीदी की पॉर्लर में नजर पड़ते ही मेरी नजर कोमल दीदी पर पड़ी.. जो कि बैठी अपने साथ काम करने वाली लेडिज से बात कर रही थी..

मुझे देखते ही उन्होंने अपनी बात बंद कर मुस्कुरा दी और बोली,"आओ सीता, कैसी हो और इधर कैसे भटक गई...

"नहीं दीदी. भटक के नहीं, बस आपसे मिलने आई हूँ.. घर पर अकेली बोर हो रही थी तो सोची कहीं घूम आऊँ.."मैं आगे बढ़ती हुई हँसते हुए बोली..

"जरूर सीता,, हमारी इस छोटी सी कुटिया में हर वक्त स्वागत है... अच्छा वो पूजा नहीं आई क्या?"कोमल दीदी हमें बैठने के लिए इशारा करती हुई बोली.

मैं पास में पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए बोली,"पूजा कॉलेज गई है दीदी, वर्ना वो भी आती.."

तब तक उनकी सहकर्मी उठ गई और कोने में पड़ी फ्रिज से कोल्ड ड्रिंक ले आई..

"पूजा तो हमसे नाराज ही हो गई तो कैसे आएगी मिलने?"दीदी ड्रिंक की एक घूँट लेती हुई बोली..

"नहीं दीदी, वो नाराज नहीं है बस थोड़ी सी डर गई थी.."

"क्यों?"कोमल दीदी चौंकती सी पूछी..

"दीदी वो क्या कहते हैं उसको ब्लैकमेल करना.. बस इसी से डरती है कि कहीं आप भी....."मैं थोड़ी सकुचाती हुई बोली..

मेरी बात सुनते ही वो आश्चर्य और गंभीर नजरों से हमें देखने लगी...मैं भी डर गई कि शायद इन्हें मेरी बात अच्छी नहीं लगी..

कमरें में पूरी तरह सन्नाटा छा गई थी..हम तीनों की नजरें आपस में टकरा रही थी..

अचानक ही कोमल दीदी और उनकी दोस्त सहकर्मी ठहाका लगा जोर से हँसने लगी..

मैं उनकी इस हँसी को समझने की कोशिश करती मुस्कुराते हुए देखने लगी.. फिर वो बोतल में बची सारी ड्रिंक एक ही घूँट में खत्म कर दी...

फिर वो चेयर से उठी और मेरी तरफ देख बोली,"चलो इधर आओ.. तुम्हें कुछ दिखाती हूँ."

मैं तुरंत ही उठ गई और उनके पीछे चली गई..वो कमरे के एक तरफ लगी बड़ी सी दर्पण के पास गई और वहाँ लगी एक बटन दबा दी...

बटन दबते ही वो दर्पण बिना चूँ किए एक तरफ साइड हो गई.. ये तो अदंर जाने की गेट थी..वो आगे बढ़ती हुई बोली,"अंदर आओ सीता, ये हमारा सीक्रेट रूम है."

मैं उनके पीछे अंदर आ गई..अंदरआते ही कोमल दीदी गेट लॉक कर दी.. कमरे में सोफे लगी हुई थी.. और एक तरफ मेकअप की सारी सामग्री सजी हुई थी...

और साथ में बाथरूम अटैच थी..तभी कोमल दीदी आगे बढ़ एक दीवार की तरफ गई और वहाँ दीवार पर अपने हाथ रख दी.

गौर से देखी तो मालूल पड़ी कि जहाँ वो हाथ रखी थी वहाँ 4 वर्गाकार डॉट बिंदु थी जो नहीं के बराबर मालूम पड़ती थी..

तभी उस दीवार की ठीक विपरीत वाली दीवार से हल्की सी आवाज आई..नजर घुमाई तो वहाँ दीवार पर से बिल्कुल पतली सी परत हट गई जो कि दीवार के रंग की थी..

मैं एक एक चीजों को गौर से देखी जा रही थी.. और कोमल दीदी मुस्कुराती हुई अपने कामों में लगी हुई थी...

उस खुली परत के अंर देखी तो वहाँ ढ़़ेर सारी लॉकर थी.. वैसी लॉकर तो मैं सिर्फ फिल्मों में ही देखती थी.. बड़े बड़े लोग अपनी कीमती वस्तुओं की सुरक्षा में इसका उपयोग करते हैं.

कोमल दीदी उस लॉकर की बटन दबाने लगी..अगले ही पल एक लॉकर खुल गई...

कोमल दीदी उसमें हाथ बढ़ा रखी एक मोटी सी एलबम निकाली...फिर वो मेरी तरफ देख बोली,"इधर सोफे पर बैठते हैं..." और वो एलबम ले सोफे की तरफ बढ़ गई...

मैं भी उनके पीछे चलती उस सोफे पर दीदी के बगल में बैठ गई...दीदी मेरी तरफ एलबम बढाते हुए बोली,"लो पहले एलबम देखो.."

मैं सोच में पड़ गई कि आखिर ये कैसी एलबम है जिसे ईतनी सुरक्षा में रखी जाती है.. अगर इतनी सीक्रेट है तो फिर हमें क्यों दिखा रही है.. मैं तो आज तक सिर्फ दो ही बार मिली हूँ इनसे...इसी तरह की ढ़ेर सारी बातें सोचती एलबम पकड़ ली..

मैं एलबम के कवर पलट दी.. सामने एक बहुत ही खूबसूरत लेडिज की फोटो थी..

फोटो में उसकी चेहरे थी जो कि देखने से काफी आकर्षक लग रही थी.. साथ में उस फोटो की एक तरफ उसकी पूरी फोटो भ एडिट कर डाली हुई थी..

दिखने से ये काफी अमीरजादी लग रही थी.. रंग- रूप और बनावट से भी काफी धनी लग रही थी...

"फोटो की पीठ पर इनके बारे में थोड़ी सी जानकारी लिखी हुई है.."तभी दीदी की आवाज मेरी कानों गूँजी... मैं उनकी बातों को सुन फोटो की पीठ पर देखी...

जूली सिन्हा
पति- Mr. रॉबिन सिन्हा(Gov. judge of Patna high court)
उम्र- 30
पता- मजिस्ट्रेट कॉलोनी, आशियाना नगर, पटना
फोन - +9194300#####


मैं पूरी पढ़ने के बाद एक बार फिर वापस उसकी तस्वीर देखने लगी... मतलब ये एक जज की बीवी है..

फिर मैं अगली तस्वीर देखने लगी.. आगे भी इसी तरह की ढ़ेर सारी तस्वीरें थी.... जिसमें कोई जज की बीवी, कोई वकील की बीवी, किसी नामी नेता की बहू, तो कोई बड़े डॉक्टर की बेटी है..

मैं एक-2 कर सभी तस्वीरें देख रही थी.. कोई 30 मिनट तक लगातार देखती रही तब जाकर समाप्त हुई कहीं... इनमें एक भी ऐसी औरत या लड़की नहीं थी जो निम्न वर्ग की थी... सभी ऊंचे और अमीर परिवार की थी... 200 के करीब सारी तस्वीरें थी..

फिर मैं एलबम को बंद करती हुई बोली,"दीदी, आपकी दोस्ती तो काफी अच्छे-2 से हैं..."

मेरी बात सुनते ही दीदी मुस्कुराती हुई बोली,"हाँ, ये सब मेरी बेस्ट फ्रेंड हैं...अच्छा ये एलबम तुम्हें क्यों दिखाई, पता है क्या?"

मैं कुछ सोच में पड़ गई जीदी की सवालों से..फिर बोली,"शायद आप अपने दोस्तों के बारें में बताना चाहती हो."

कोमल दीदी कुटीली सी हँसी हँसते हुए बोली," हाँ पर साथ में तुम्हारी डर दूर करने के लिए भी.."

"मतलब???"मैं एक बार फिर दीदी की बात को समझ नहीं पाई.

"मतलब ये कि तुम जितनी फोटो देखी, सब की सब सेक्स रैकेट से जुड़ी है.. यानी ये सब धंधे करती है.. और आज तक ये सभी सुरक्षित हैं.. कुछ तो अपनी शरीर की प्यास बुझाने करती है और कुछ शौक से.."कोमल दीदी एक बारगी से बेहिचक बता रह थी..

मुझे तो जैसे शॉक लग गई..मैं एकटक दीदी को निहारती उनकी बातें सुन रही थी.. बार बार मेरी नजर एलबम की तरफ जा रही थी..

"और तुम शायद ये सोच रही होगी कि कहीं मैं इन्हें ब्लैकमेल तो नहीं कर रही.. तो तुम किसी को फोन पर पूछ सकती हो कि ये अपनी मर्जी से आई या जबरदस्ती..."

मैं क्या जवाब देती..? मेरी तो ऐसी बातें सुन के ही आवाजें बंद हो गई थी..तभी दीदी दूसरी तरफ दिवाल में लगी बटन दबा दी जिससे एक और गेट खुली... मेरी तो दिमाग अब काम करना लगभग छोड़ चुकी थी..

गेट खुलते ही दीदी मेरी तरफ पलट के मुझे आँखों से ही बुलाई.. मैं चुपचाप उठी और दीदी के पास पहुँच गई.. दीदी आगे उस गेट में प्रवेश कर गई..

ये एक संकरी गली थी जो कि आगे जा के खत्म हो गई थी.. इसमें आने से पहले ये एक किसी गुफा की तरह अंधकारमय थी..

पर कोमल दीदी जैसे ही अपना एक पैर रखी, पूरी की पूरी गली प्रकीश से नहा गई.. मैं तो चकरा सी गई ऐसी व्यवस्था को देखकर..

कुछ ही पल में हम इस तंग गली की अंतिम छोर पर थी जहाँ पर लिफ्ट लगी थी.. दीदी ने बटन दबा दी लिफ्ट की जिससे क्षण भर में ही लिफ्ट पहुँग गई..

दीदी मुस्कुराती लिफ्ट के अंदर दाखिल हो गई.. मैं भी उनके पीछे लिफ्ट में घुस गई.. चंद सेकंड में लिफ्ट रूक गई...

लिफ्ट के रूकते ही हम दोनों बाहर निकले..
नजर दौड़ाई तो मैं किसी आलीशान भवन के कॉरिडोर में खड़ी थी.. सामने दोनों तरफ कई कमरे बने थे जो दूर तक जाती दिख रही थी..

यहाँ से बाहर देखने की कोई व्यवस्था नहीं थी जिससे मैं अनुमान लगाती कि आखिर मैं कहाँ हूँ...

तभी कोमल दीदी सामने उस कमरे की तरफ देखती हुई बोली,"तुम्हें पता है अभी तुम कहाँ हो"

दीदी के सवाल मेरे कानों में पड़ते ही मैं ना में सिर हिला दी..

"अभी तुम पटना की नामी 3 स्टार होटल के कॉरिडोर में खड़ी हो...और ये जो सामने जितने रूम देख रही हो ना... यही हमारी हाई प्रोफाईल लेडिज की रंडीखाना है.."

"यहाँ आने के सिर्फ दो रास्ते हैं.. एक जहां से हम लोग आए हैं.. सभी लेडिज भी इसी होकर ही आती है.. जबकि दूसरा रास्ता नीचे 3री मंजिल पर एक सीक्रेट रूम से होते हुए है.. उधर से सिर्फ कस्टमर ही आते हैं.."

मैं तो हैरत भरी नजरों से सिर्फ दीदी की बातों को सुने जा रही थी..

"दीदी फिर आप इन होटल वालों से मैनेज कैसे???"मैं कुछ होश में आती अपनी बेतुका सवाल कर गई..

दीदी मेरी बात सुन हँस पड़ी और आगे की तरफ बढ़ गई..मैं भी कोमल दीदी के साथ धीरे-2 आगे बढ़ी..

"ये होटल मेरे पति के हैं.. और सभी कस्टमर से सीक्रेटली वही बात करते हैं तो किसी तरह की प्रोबलम की बात ही नहीं है..और यहाँ तो बड़े से बड़े लोग किसी कुत्ते की तरह दुम दबाते मजे के लिए आते हैं..."

मैं दीदी की की बात सुनते ही ठिठक पड़ी.. ये दोनों पति पत्नी तो सेक्स रैकेट बड़े ही आसानी से चला रहे हैं... इन पर किसी का शक करना आसान नहीं सिवाए इनके ग्रुप में शामिल लेडिज और कस्टमर के....

कॉरिडोर पूरी तरह से रोशनी से जगमगा रही थी और लाईट से नहाई हुई थी.... कॉरिडोर में पूरी AC लगी हुई थी जिसकी सनसनाती हुई हवा हमें ठंडक देने की कोशिश कर रही थी...

पर मैं तो दीदी के हर एक विस्फोट से लगातार पसीने छूट रहे थे.. मैं दीदी के साथ आहिस्ते-2 चलती बातें सुन रही थी..

तभी सामने एक गेट खुली और एक मोटा सा काला आदमी कमर पर तौलिया लपेटे निकला.. वो पसीने से तरबतर हो हाँफ रहा था मानों काफी लम्बी दौड़ लगा कर आया हो..

दीदी उसे देखते ही मुस्कुराती हुई बोली,"क्यों पांडे जी, आज कुछ ज्यादा ही मेहनत हो गई क्या?"

पांडे मेरी तरफ बड़ी बड़ी आँखें नचाते हुए भूखे भेड़िये की तरह देख रहा था.. मैं तो डर के मारे दीदी के पीछे हो गई..

"हा" मैडम, पिछले 2 दिनों से इस लौंडिया का भाई नाक में दम कर रखा था.. सारा गुस्सा इसके अंदर डाल दिया शाली के.." कहते हुए उसने अपना लंड बाहर से ही मसल दिया और हल्की हंसी हँस दिया..

उसकी इस हरकत से दीदी जहां नॉर्मल थी, वहीं मैं शर्म से मरी जा रही थी..दीदी हंसती हुई उसकी बात सुन कमरे की तरफ बढ़ गई जहाँ से वो आदमी निकला था..

मैं भी तेज कदमों से दीदी के पीछे जल्दी से अंदर आ गई.. सामने बेड पर एक नंगी लड़की पड़ी हुई थी जिसकी चूत से ताजी वीर्य बह रही थी.. उसकी चुची पर कई जगह दांत के निशान थे.. वो आंखें बंद किए तेज सांस ले रही थी..

कोमल दीदी उस लड़की के पास बैठती हुई उसके सर पर हाथ रखती प्यार से बोली," रश्मि, तुम ठीक तो हो ना?"

रश्मि दीदी की आवाज सुनते ही मुस्कुराते हुए हां में सिर हिला दी.. दीदी फिर बेड से उठती हुई बोली,"अब उठ को फ्रेश हो जाओ, फिर आराम करना.."

और दीदी वापस रूम के बाहर की तरफ चल दी..रूम के बाहर निकलते ही वो आदमी दीदी से पूछा,"मैडम, इनको कभी देखा नहीं.. परिचय नहीं करवाइएगा?"

कोमल दीदी उसकी बात सुनते ही मुस्कुरा के मेरी तरफ देखती हुई बोली," ये मेरी नई दोस्त है.. आज बस घूमने आई हैं.. फिर कभी आपकी मुलाकात अच्छे से करवा दूंगी.. आज इसे जल्दी जाना है.."कहते हुए कोमल दीदी वापस लिफ्ट की तरफ बढ़ गई...

मैं अपनी मुलाकात सुनते ही समझ गई कि दीदी कैसी मुलाकात करवानी वाली है.. तेज कदमों से भागती मैं तुरंत ही लिफ्ट तक पहुँच गई..

लिफ्ट में घुसते ही दीदी बोली,"ये पांडे जी यहां के इंस्पेक्टर हैं.. ये अक्सर ही यहां आते रहते हैं"

तब तक लिफ्ट रुक चुकी थी..मैं दीदी की तरफ कान लगाए बाहर उसी तंग गली में घुस गई..

"और ये लड़की S.P. की छोटी बहन है.. SP अपने काम के प्रति काफी सक्रिय हैं जिससे सभी इंस्पेक्टर परेशान हो जाते हैं.. हर वक्त काम-2 की रट लगाए रहता है.."
अब हम दोनों रूम में आ गए थे और कोमल दीदी एलबम को लॉकर में रखती हुई बोली,"पांडे जी भी इसके भाई से कैफी परेशान रहता है.. इसे तो उसके घर के काम भा करने पड़ते हैं.. बस इसी का गुस्सा उसकी बहन को चोद कर निकालने अक्सर आते हैं..और इस रश्मि को भी हॉर्ड सेक्स की आदत लग गई है..वो भी दौड़ती हुई आ जाती है.."

हम दोनों वहीं सोफे पर बैठ गई.. मैं अब यहां से जाना चाहती थी पर जब कोमल दीदी बैठ गई तो मैं कैसे निकल सकती थी..

मुझे कुछ परेशान देख दीदी सीधी प्वाइंट पर आ गई..कोमल दीदी मेरे हाथों को अपने हाथों से दबाती हुई बोली,"मैं जानती हूं कि अभी तुम मुझे या मेरे इस काम को लेकर बिल्कुल भी सहज नहीं हो..सो ज्यादा कुछ नहीं कहूंगी.. बस मैं यही कहूंगी कि अगर कभी मेरी जरूरत पड़े तो बेहिचक चली आना."

आखिर मैं इसी बात का इंतजार कर रही थी कि अब तक दीदी बोली क्यों नहीं..मैं एक टक दीदी को देखे जा रही थी..

"घर में बैठी बोर होने से बेहतर है कि जिंदगी के ये मजे भी उठा लो..और मस्ती के साथ कुछ पैसे भी मिल जाएंगे..पूजा से भी बात कर लेना.."

और इपनी बात खत्म कर दीदी बाहर की तरफ चल दी..मैं भी उनके पीछे पॉर्लर तक आ गई..

"दीदी, मैं अब निकलती हूँ,"मैं गेट की तरफ नजर दौड़ती हुई बोली..

दीदी हहं कहते हुए बोली,"ठीक है. निकलो तुम.. इसी तरह घूमते हुए आती रहना.."

मैं हां में सिर हिला अपने पसीने पोंछती निकल गई.. आज मैं औरों दिन की भांति उतनी परेशान नहीं थी.. शायद आदत लग रही थी ऐसी बातों को नॉर्मल की तरह सुनने की..

मैं बाहर सड़क के साइड खड़ी किसी ऑटो का इंतजार करने लगी..तभी तेज रफ्तार से एक बाइक सवार हेलमेट लगाए मेरे करीब आ रूक गई...
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[...कहानी जारी है]


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Re: सीता --गाँव की लड़की शहर में

Unread post by The Romantic » 14 Dec 2014 12:35

सीता --एक गाँव की लड़की--14

"लिफ्ट?"उस बाइक सवार ने अपने हेलमेट के कांच को ऊपर करते हुए पूछा..

मैं एक बार तो चौंक पड़ी पर जल्द ही संभल गई कि ये गांव नहीं शहर है और यहां तो ऐसी बातें होती रहती है..

मगर मैं फिर भी सहज महसूस नहीं कर रही थी. मैं ना में सिर हिला दी..वो अगले ही पल बोला,"मैडम, मैंने देखा कि आप अकेली हैं तो पूछ लिया, आगे आपकी मर्जी..."

कहते हुए उसने अपने गाड़ी की सेल्फ लगा दी..मैं बिना कुछ कहे उसकी तरफ देख रही थी..फिर एक नजर चारों तरफ दौड़ाई कि कोई मेरी तरफ.... मगर यहां कौन इतना फ्री रहता है कि.....

अगले ही पल मैं आगे बढ़ उसके साथ बैठ गई.. जैसे ही मैं बैठी उसने बाइक बढ़ा दिया..

बाईक की सीट काफी ऊंची थी जिससे मैं साड़ी में काफी डर भी महसूस कर रही थी..कुछ ही दूर चलने के बाद उसने पूछा,"मैडम, किधर जाओगी?"

बाइक वाले का चेहरा तो अभी तक नहीं देखी थी पर कद-काठी से काफी स्मॉर्ट लग रहा था.. रंग भी साफ था..

हालांकि उसने अभी तक कोई ऐसी वैसी हरकत नहीं की थी कि जिससे हमें कोई परेशानी होती...बस हम दोनों आगे की तरफ बाइक से जा रहे थे....

मैं उसे अपने घर की तरफ चलने बोल दी..मेरी बात सुन वो ओके कह बाइक दौड़ाने लगा.

आगे चौराहा थी जहां पहले से रेड लाइट जल रही थी..उसने भी बाइक रोक ली.. मैं बैठी आगे सड़क पर क्रॉस करती गाड़ी देख रही थी..

अचानक से मुझे पूजा एक बाइक पर चिपकी दिखी.. मैं गौर से देखी पर वो किसके साथ बैठी थी उसे पहचान नहीं सकी..

वो कुछ ही पल में आँखों से ओझल हो गई..मैं सोचने लगी कि क्या करूं..उसके पीछे जा के देखूं कि वो किसके साथ है..

तब तक इधर भी हरी लाइट जल गई.. तभी अचानक से मुझे क्या सूझी, बोली,"वो जरा इधर चलिएगा.."

वो मेरी बात सुन उधर बाइक मोड़ दी जिधर पूजा गई थी..कुछ देर चलने के बाद भी मुझे पूजा कहीं नजर नहीं आई..

तभी मैंने अपने एक हाथ उसके कंधे पर रख दिए और दूसरी हाथ से मोबाइल निकाल के पूजा को फोन करने लगी...

ऐसी अवस्था में मैं सटी थी कि मेरी दोनों चुची उसकी पीठ को दबा रही थी और मेरी गर्म सांसें उसके सीधे गर्दन पर पड़ रही थी...

पूजा कुछ देर बाद फोन रिसीव कर ली..उसके फोन रिसीव करते ही मैं बोली," हैलो पूजा, कहां हो तुम?"

मेरी बात सुनते ही पूजा थोड़ी घबराई हुई आवाज में बोली,"क्यों, क्या हुआ आपको... ठीक तो हो ना?"

शायद पूजा को लगा कि मुझे कुछ दिक्कत आई है..मैं थोड़ी हंसती हुई बोली,"अरे नहीं, मैं बिल्कुल ठीक हूं..दरअसल घर पर बोर हो रही थी अकेली तो सोची घूमने चली जाउं...वैसे तुम्हारा कॉलेज टाइम भी खत्म हो गया तो फोन कर ली.."

मेरी बात सुन पूजा राहत की सांस लेती हुई बोली,"क्या बात है ... मैं मॉल की तरफ जा रही हूँ,,आ जाओ इधर..मैं रूकती हूं..."

पूजा के फोन रखते ही मैं पूजा के बताए जगह पर चलने बोली.. वो भी अब तेजी से बाइक दौड़ता चला जा रहा था क्योंकि अब मैं उससे चिपक के बैठी जो थी...

कुछ ही देर में मैं पूजा के पास थी.. पूजा हमें बाइक पर देख आश्चर्य भरी नजरों से देखे जा रही थी..

"क्या हुआ पूजा? अब चलो ना? "मैं चोरी से पूजा को आंख मारते हुए पूछी..

पर पूजा तो अभी भी घूरे रह रही थी मानों वो जानना चाहती थी कि तुम किसके साथ आई...मैं जल्द ही पूजा को इन बातों से बाहर लाने की सोच बोली,"लो मैं आ रही थी तो रास्ते में इनसे लिफ्ट ले ली थी.. अब आप भी तो इनका परिचय करवा दो.."

पूजा मेरी बात सुन मुस्कुराती हुइ बोली,"हम दोनों एक ही कॉलेज में हैं तो इनसे दोस्ती हो गई है.."

"ओके अब तो चलो.."मैं हंसती हुई पूजा से बोली जिसे सुन पूजा मुस्कुराती हुई बाइक पर बैठ गई..

"आप फ्री तो हैं ना अभी, वर्ना बेवजह आपको तकलीफ नहीं दूँगी.."मैं अपने बाइक वाले से पूछी..

मेरी बात शायद पूजा और उसके दोस्त भी सुन चुके थे जिस वजह से पूजा के दोस्त तपाक से बोले,"अरे इसकी टेंशन आप क्यों ले रही हो.. ये पूरे दिन फ्री ही रहता है.. इसका बाप इतना कमाता है कि इसे कोई काम करने की जरूरत ही नहीं."

उसकी बात सुनते ही मैं और पूजा एक साथ चौंक पड़ी..क्या ये दोनों एक दूसरे को जानते हैं? पूजा को भी शायद ये बात नहीं मालूम पड़ी थी..वो उससे पूछी," तुम दोनों दोस्त हो क्या?"

"हाँ पूजा जी हम दोनों दोस्त हैं और आपके बारे में ये बता चुका है बस मिलना बाकी था जो कि आज इनकी वजह से संभव हो गया.."

मेरे बाइक वाले ने पूजा को उत्तर देते हुए कहा..जिसे सुन पूजा का दोस्त हां में सहमति कर दिया..

"अच्छा पूजा, ये कौन हैं, इनसे तो परिचय करवाओ.. पहले तो कभी नहीं बताई इनके बारे में?" पूजा का दोस्त धीरे-2 बाइक बढ़ाते हुए पूछा..

पूजा हंसती हुई बोली,"कभी पूछे हो क्या जो नहीं बताई हूँ..तुम तो बस हर वक्त मेरे बारे में ही पूछते रहते.."

"पूजा, ये शाला है ही चुतिया..जब से तुम इसकी दोस्त बनी हो ना तब से हमें भी भूल गया है तो औरों के बारे मों खाक पूछेगा"मेरे बाइक वाले ने हंसते हुए पूजा को कहा..

जिसे सुन हम सब की हँसी निकल गई..पूजा का दोस्त हँसते हुए बोला,"पूजा, अब बता भी दो कि ये कौन हैं..वैसे अगर बात जम तो शायद इन दोनों की भी दोस्ती हो जाएगी..इसे मैरिड गर्ल्स से दोस्ती काफी पसंद है"

उसकी बात सुन मैं झेंप सी गई और मुंह दूसरी तरफ कर ली..तभी पूजा आगे बोली,"ये मेरी सीता भाभी हैं पर रहते हम दोनों बहन की तरह.. अकेली होती हूँ तो दीदी ही कह के बुलाती हूँ इन्हें.."

मैं पूजा की बात सुन हंस पड़ी.तब तक हम सब मॉल पहुँच चुके थे..गाड़ी पॉर्क करने वो दोनों दूसरी तरफ चले गए..पूजा आगे आती हुई बोली,"क्यों दीदी, मस्त है आपका बाइक वाला.. दोस्ती कर ले .खूब मजे देगा.."

"अच्छा, तुम्हें कैसे पता?"मैं मुस्कुरा के बोली..

"बॉडी से.." पूजा एक ही शब्दों में उत्तर देती हुई बोली..

"तुम कितनी बार मजे ले चुकी हो अब तक इससे.." मैं हंसती हुई पूछी..

"अभी तक तो नहीं.. काफी दिनों से पीछे पड़ा था तो आज ही हाँ बोली हूं.."पूजा अपनी सफाई देते हुए बोली..

तभी सामने से वो दोनों दोस्त काफी खुश होते हुए आ रहा था..

पूजा भी ये देख जल्दी से बोली,"अगर प्रपोज करे तो प्लीज हां कह देना.. काफी मजा आएगा.."

पूजा की बात सुन मैं मुस्कुरा पड़ी..तब तक दोनों पास आ चुके थे.. उसे आते ही पूजा और मैं मॉल की तरफ बढ़ गई..

पीछे से वो दोनों भी मुस्कुराते हुए हम दोनों की गांड़ पर नजर गड़ाए आ रहे थे...

हम सब मॉल में कुछ देर घूमे.. फिर पूजा अपने लिए कुछ ड्रेस देखने लगी.. तभी उसका दोस्त आगे पूजा के पास गया और पूछा,"क्या लेगी?"

"तुम कहो अभी तो कुछ सोची नहीं, बस देख रही हूँ.."पूजा मुस्कुराती हुई जवाब दी..

"अच्छा,, फिर तो मेरी मानो सिर्फ अंडर गारमेंट्स के सेट ले लो... मस्त लगोगी..."हंसता हुआ उसने जवाब दिया..

"रहने दो.. मरना नहीं हमें अभी."पूजा चिढ़ती सी बोली.

तब तक पूजा अपने लिए एक शॉर्ट्स और काफी पतली सी टी-शर्ट चूज कर ली और मेरी तरफ दिखाती हूई बोली,"दीदी, ये अच्छी है?"

मैं कुछ बोलती इससे पहले ही उसका दोस्त बोल पड़ा,"वॉव,, कयामत लगेगी मेरी जान.. प्लीज जल्दी से पहन के दिखाओ.."

उसकी बातें सुन हम सब की हंसी निकल गई.. पूजा भी हल्की हंसी हंसते हुए ट्रायल रूम की तरफ बढ़ गई..

पूजा के जाते ही पूजा के साथ वाला लड़का अपने दोस्त को बोला,"ओए घोंचू, बाप का पैसा बचा के क्या करेगा? अपने दोस्त को को भी कोई अच्छी ड्रेस ले लो"

उसकी बात सुन मेरी बाईक वाला मेरे निकट आ बोला,"अभी तो ठीक से जाने भी नहीं है फिर भी मैं आपसे दोस्ती करना चाहता हूँ..अगर आपको पसंद है हमारी दोस्ती तो प्लीज मेरी तरफ से कुछ ले लीजिए.."

उसकी बात सुन मैं अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी कि ये सच में इतना अच्छा नेचर का है फिर बस यूँ ही...

फिर मुझे कुछ शरारत सूझी.. उसके सीधे में आते हुए बोली,"अभी तक आपने अपना नाम तो बताया नहीं और गिफ्ट देने तक पहुँच गए.."

मेरी बात सुनते ही वो झेंप गया.. और पूजा का दोस्त अच्छी वाली गाली देने लगा उसे...

"सॉरी जी, आपसे जब से साथ हूँ खुद को ही भूल गया हूँ.. वैसे मेरा नाम सन्नी है.." वो अपनी गलती स्वीकारते हुए बोला..जिससे मेरी हंसी निकल गई..

"और मैं बंटी.. बाद में मत कहना कि मैंने अपना नाम नहीं बताया.." पूजा का दोस्त भी खुद को बचाते हुए बोल दिया जिससे हम सब एक साथ हंस पड़े...

तभी पूजा ट्रायल रूम से निकली.. वो छोटी सी शॉर्टस और V-shep की टी- शर्ट में काफी सेक्सी लग रही थी..

शॉर्टस जो कि आधी जांघें तक ही आ रही थी, जबकि टी-शर्ट में उसकी आधी चुची निकली सभी के हाथों को बुला रही थी...

और टी-शर्टस इतनी पतली थी कि अंदर की ब्रॉ की shape साफ-2 नजर आ रही थी..इधर बंटी के साथ-2 सन्नी भी पूजा को ऐसे देखे जा रहा था; मानों आँखों से ही चोद रहा हो...

पूजा पास आते ही हम तीनों से एक-मुश्त ही पूछी," हैलो....अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या?"

बंटी हड़बड़ाते हुए बोला,"वॉव पूजा,मुझे नहीं पता था कि तुम छोटे कपड़ों में तो और धांसू लगती हो...अगर कोई कह दे कि अच्छी नहीं लगती तो शाले का मुंह तोड़ दूं..क्यों भाभी जी??"

उसकी बाते सुन मैं हामी भर दी और शिकायत भरी लब्जों में बोली,"बंटी, मेरा नाम सीता है...आगे से याद रखना.. मैं भाभी हूं तो सिर्फ पूजा की, वो भी थोड़ी सी.. बाकी तो उसकी बेस्ट फ्रेंड हैं ही.."

मेरी शिकायत सुनते ही बंटी ओहहह करते हुए सॉरी बोलने लगा..तभी सन्नी बोल पड़ा," हे सीता, प्लीज अब तो मत तरसाओ.. देखो पूजा कितनी बवाल की लग रही है..अब जल्दी से तुम भी..."

सन्नी की बात को बीच में ही काटते हुए बोली," नो सन्नी, मुझे नहीं पसंद..मैं ऐसे ही ठीक दिखती हूं.."

"अरे तुम तो साड़ी में भी मस्त लगती हो पर बस हम सब की इच्छा है कि तुम भी अगर वेस्टर्न ड्रेसेज ले लोगी तो..."

तभी पूजा बीच में टपकती हुई बोली,"..तो बाइक पर आराम से चिपक के बैठ सकती है..."

पूजा की बात पूरी होते ही सब जोर से हंस पड़े जबकि मैं शर्म से लाल हो मुंह दूसरी तरफ कर मुस्कुराने लगी...

तभी पूजा हमें साथ लेती आगे बढ़ी और एक काले रंग की कैप्री और टी-शर्ट चूज कर मेरे हाथों देती बोली,"लो मेरी जान और जल्दी से इसे पहन के जरा अपने जलवे तो दिखा दो.."

अब जब पूजा कह रही है तो ना कहने की हिम्मत कैसे करती,,क्योंकि वो मानने वाली थोड़े ही थी..

मैं दबी हुई हंसी के साथ ट्रायल रूम की तरफ शर्माती हुई बढ़ गई...वो दोनों बंटी व सन्नी भी मुस्कुरा रहे थे...

अंदर घुसते ही मैंने जल्दी से साड़ी को अलग फेंक दी...बेशब्री तो हमें भी थी पर कुछ तो नाटक करनी ही थी ना...

चंद घड़ी बाद ही मैं सिर्फ ब्रॉ और पेन्टी में खड़ी थी...खुद को एक बार सामने मिरर में देखी तो खुद ही शर्मा गई...

फिर मुस्कुराते हुए कैप्री पहन ली...जो कि घुटने से थोड़ी ऊपर ही आ रही थी..कुछ कैप्री तो नीचे तक रहती है पर ये कुछ ज्यादा ही छोटी थी...शायद सेक्सी दिखने के लिए ही थी इतनी छोटी...

फिर टी-शर्ट पहन लो जो कि काफी तंग आ रही थी..मेरी चुची की पूरी shape साफ साफ नजर आ रही थी...

साथ में ब्रॉ भी हल्की-2 नजर आ रही थी.. कुल मिला काफी हॉट बना रही थी जो किसी भी मर्द के पानी यूँ निकलवा सके...

मैंने अपने साड़ी- पेटिकोट व ब्लॉउज समेट बाहर निकलन मुड़ी ही थी कि मिरर में मेरी गांड़ की उभार दिखी...

ओह गॉड,, ये तो काफी कसी और बाहर की तरफ निकल रही थी...खुद की गांड़ देख मेरी मुँह में पानी आ गई कि इतनी कामुक और विशाल गांड़....

अभी सिर्फ चूत चुदवाई तो ये हालत है, आगे गांड़ में ली तो पता नहीं क्या हालत होगी???

फिर हल्की सी सेक्सी पोज देती मुस्कुराती हुई सभी लंड के पानी छुड़वाने गेट खोल बाहर निकल गई...

बाहर तीनों गोल-मटोल हो गुटर-गूं कर रहे थे..उन सब की नजर हमारी तरफ नहीं थी...हाँ, मॉल में और सब लंड की नजर जरूर टिक गई थी हम पर..

उनके निकट पहुंच हाय कहती हुई सबका ध्यान अपनी तरफ की..मुझे देखते ही उन सब की आवाजें ही गुम हो गई...

सन्नी की नजरें तो मेरी उठी हुई चुची से हट ही नहीं रही थी, जबकि बंटी मेरी पूरी फिगर को ऊपर से नीचे देख शायद पछता रहा था कि शाला, कहां मैं पूजा को फंसा के गलती कर दिया...

पूजा आंखें निपोरती हुई बोली,"वॉव भाभी,, क्या मस्त आइटम लग रही हो... पता नहीं बेचारा सन्नी कैसे बर्दाश्त करेगा?"

कहते हुए पूजा खिलखला कर हँस पड़ी.. मैं अपनी आंखें निकालती हुई पूजा को नजरों से ही डांट दी...

उधर वो दोनों तो अभी भी बेखबर हो देखे जा रहे थे.. पूजा क्या बोली, वो तो सुना भी नहीं वर्ना उसका सीना फूल के 72इंच हो जाता...

तभी पूजा को भी आभास हुआ कि दोनों अब इस दुनिया से सपनों की दुनिया में पहुँच गए हैं...तो पूजा बंटी के गालों पर हल्की चपत लगाती हुई बोली,"ऐ मिस्टर, भाभी अगर अच्छी नहीं लग रही है तो अपनी मुंह खोलते हुए कोई दुसरी ड्रेस चूज करो.."

शायद पूजा उसकी प्रतिक्रया देखना चाहती थी कि दोनों कैसा रिएक्ट करते हैं...पूजा की बात सुनते ही सन्नी हड़बड़ाता हुआ बोला,"नहीं नहीं पूजा,, हम दोनों की आँखों पर तो विश्वास ही नहीं हो रही है कि साड़ी में सिम्पल सी सीता ऐसी ड्रेस में इतनी बलाल मचा देगी मेरे अंदर...amazingggg ...."

"सीता,प्लीज.. इसमें तुम काफी सुंदर लग रही हो और तुम्हारी फिगर...उफ्फफफ...साड़ी में तो मालूम ही नहीं पड़ती थी कि तुम इतनी हॉट हो...कसम से..."बंटी भी कुछ बोले रह नहीं सका...अब तो मेरी अनुमान भी सटीक हो गई थी कि बंटी सच में पछता रहा है...

और बंटी की ऐसी सेक्सी तारीफ सुन मैं अंदर ही अंदर शर्मा गई थी...पर अपनी शर्म को साइड करती हुई बोली,"थैंक्स, अब 2 मिनट रूको मैं चेंज कर आती हूँ.. फिर चलेंगे.."

सच ये तो मैं खुद नहीं चाहती थी पर कुछ तो फॉर्मिलीटी करनी थी ना....

मेरी बातें सुनते ही तीनों गिड़गिड़ाने लगे...प्लीज सीता,मेरे लिए.....प्लीज भाभी.....आदि आदि...

मेरी तो हंसी रूक नहीं सकी और हँसते हुए ओके बोली...मेरी हाँ सुनते ही तीनों ऐसे चियर्स किए मानों कोई बड़ी बाजी जीत गए...

फिर हम सब काउन्टर पर थोड़ी देर रूके.. पेमेन्ट दोनों कर बाहर की तरफ चल दिए...इस दौरान वहां मौजूद सारे मर्द आँखों से ही हम दोनों हॉट माल को चोदे जा रहे थे... पर अब तो हमें भी आदत सी हो गई थी...

फिर मैं सन्नी की बाइक पर और पूजा बंटी की बाइक पर चिपक के बैठी थी... अब तो शायद सन्नी भी समझ गया था कि मुझे उसकी दोस्ती ही नहीं,लंड भी चाहिए...

अगले ही पल बाइक तेज गति से सड़कों पर दौड़ने लगी थी... अभी कुछ ही देर चली थी कि ओहहहह नो...


The Romantic
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Re: सीता --गाँव की लड़की शहर में

Unread post by The Romantic » 14 Dec 2014 12:35

सीता --एक गाँव की लड़की--15

...बारिश की धीमी धीमी बूंदें पड़ने शुरू हो गई...मेरी होंठों पर पड़ रही हर एक बूंद से बरसाती मुस्कान रेंगने लगी थी..बगल में बाइक पर पूजा खुशी से झूमती अपने बंटी की पीठ पर कई चुम्मे जड़ चुकी थी..

उसे ऐसा करते पा बंटी अपनी बाइक और स्टाइल से चला रहा था..और सन्नी दोनों को आशा भरी नजरों से मुड़ मुड़ के देखे जा रहा थाकि काश, मेरी पीठ को कोई प्यार से चूमे...

तभी अचानक से बारिश तेज पड़ने लगी थी..मेरी पतली सी टी-शर्ट ज्यादा पानी बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरी चुची पर लगी सफेद रंग की ब्रॉ को स्पष्ट कर दी..

सड़क पर के लोग तो पानी से बचने इधर उधर भाग रहे थे, पर जो सुरक्षित खड़े थे,, उनकी नजर मुझ पर पड़ते ही खुल जाती..

इन सब को नजरअंदाज करती मैं एक अलग दुनिया में खो जाना चाहती थी..हम अपनी घरों की तरफ बढ़े जा रहे थे..तभी सन्नी बोला,"सीता,तुम्हें बारिश से एलर्जी तो नहीं है ना.."

अब तक जो मैं सिर्फ सट के बैठी थी, उसकी बात सुनने के बहाने अपने दोनों हाथ उसके सीने में लिपटाती अपने होंठों को सन्नी के कान में सटाती बोली,"एलर्जी तो नहीं है पर जनाब को और भींगाने का इरादा है क्या?"

"हाँ.. पर आपकी इजाजत के बिना नहीं..."

मैं उसकी बात सुन हल्की सी मुस्कुरा दी और बोली,"पूजा से पूछ लेती हूँ.. अगर वो हाँ कह दी तो ठीक है..."

तभी पल भर में ही सन्नी पूजा के काफी करीब पहूंचते हुए बोला,"ए बंटी, चल ना रूम पर चलते हैं.." सन्नी की बात सुनते ही मुस्काता हुआ पूजा से बोला,"डॉर्लिंग, अब तो अपना काम बन गया..."

फिर हम दोनों की तरफ देखता हुआ बोला,"चल..." और तेजी से बाइक बढ़ा दिया..बंटी के आगे बढ़ते ही मैं सन्नी से पूछ बैठी,"कौन सा काम बना बंटी का?"

"चलोगी तब तो देखोगी कि कौन सा काम बन गया.." सन्नी हंसता हुआ बोला.. मेरी जेहन में तुरंत ही ये बात समा गई कि कहीं ये दोनों सेक्स तो नहीं....

मैं एक तरफ रोमांच से भर गई थी तो दूसरी तरफ ये सोच के मरी जा रही थी कि इन दोनों के बीच मैं क्या करूंगी?? कहीं सन्नी जोश में आ मेरे साथ जबरदस्ती तो नहीं करेगा...

इसी तरह की कई ख्यालात में डूबी कब मैं उसके रूम पर पहुंच गई, मालूम ही नहीं पड़ी...

पूजा और बंटी बाइक से उतर अंदर की तरफ चले गए.. मैं अभी भी सन्नी के साथ बारिश में भींग रही थी..मुझे सोच में डूबी देख सन्नी बोला,"हे सीता,, तुम क्या सोचने लग गई.."

मैं अपनी निंद्रा से बाहर निकल फीकी मुस्कान देती हुई बोली," कुछ नहीं.. बस ज्यादा देर मत रूकना..घर भी जाना है.."

सच में मैं डर रही थी.. अगर ये दोनों जबरदस्ती ही करते तो मैं क्या कर सकती..पूजा तो खैर अपने मन से आई तो उसे कोई फिक्र नहीं थी पर मैं तो नहीं रेड्डी थी..

मेरी डर को सन्नी जल्द ही भापं गया..वो मेरे सामने होते हुए बोला,"देखो सीता,तुम जिस बात की डर है वो अपने दिमाग से निकाल दो..हाँ ये सच है कि वो दोनों यहां सेक्स करने आए हैं, पर हम तुम्हारे साथ किसी तरह की ऐसी वैसी बात नहीं करेंगे..सच कहूं तो आज मैं ऑफर जरूर करूंगा पर जब तक तुम हाँ नहीं कहोगी तब तक मैं छूऊंगा भी नहीं...अब चलो अंदर, ज्यादा देर तक भींग गई तो सर्दी लग जाएगी.."

मैं उसकी पूरी बात ध्यान से सुनी जा रही थी..अब तक मैं पूरी भींग गई थी..थोड़ी-2 ठंड भी लग रही थी..मैं जड़बुत बनीं वहीं पर खड़ी उसकी तरफ निहारे जा रही थी...

तभी वो मेरी कलाई पकड़ अंदर की तरफ चल दिया..मैं खिंचती हुई उसके पीछे चलने लगी...कुछ ही पलों में मैं रूम के अंदर थी जहां दो अलग-2 रूम लॉक थी और हम दोनों रूम के बाहर छोटी सी बरामदे में थी..उतनी छोटी भी नहीं थी..

पूजा बाहर नहीं थी..एक रूम की तरफ इशारा करते हुए सन्नी बोला," वो दोनों इसमें काम बना रहे हैं..चलो हम दोनों अपने रूम में काम बनाने..."

उसकी बात खत्म होते ही मैं उसकी तरफ आंखें निकाल कर देखने लगी...वो मुझे इस तरह देख हंसता हुआ बोला,"अरे तुम तो मजाक को भी सच मान बैठती हो..चलो रूम में शरीर साफ कर लेना..."

मैं उसकी बात पर हल्की सी मुस्काती रूम की तरफ बढ़ गई..सन्नी भी मेरे पीछे-2 रूम में दाखिल होते हुए एक तौलिया मेरी तरफ बढ़ा दिया...मैं तौलिया से शरीर सुखाने की कोशिश करने लगी..

"अच्छा सीता, तुम्हारे रहते भी पूजा चली गई उधर..तुम्हे बुरा नहीं लगा?" सन्नी पास में पड़ी चेयर पर बैठते हुए पूछा..जो कि एक कमप्यूटर डेस्क के साथ लगी थी..

मैं उसकी तरफ देख हंसती हुई बोली," बिल्कुल नहीं..क्योंकि पूजा खुद चाहती है..अगर वो नहीं चाहती तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाती.."

सन्नी हामी भरता हुआ मेरी बदन को अब निहार भी रहा था..कब तक बेचारा आग के सामने रह उसकी ज्वाला को नजरअंदाज करता...मैं भी हालात समझती ज्यादा ध्यान नहीं देने की कोशिश की..

फिर वो कुर्सी से उठा और अपने कपड़े खोलने लगा..मैं क्षण भर तो सकपका गई, पर जल्द ही समझ गई कि ये भी तो भींग चुका है...मैं अपने शरीर से कुछ गीलापन जा चुकी थी पर कपड़े अभी भी भींगी ही थी...

"ये भी खोल के पानी सुखा लो ना,,अंदर ब्रॉ तो पहनी ही हो.." सन्नी अपनी टी-शर्ट खोल चौड़ी छाती दिखाते हुए मुझे टी-शर्ट खोलने कह रहा था..

उसकी बात सुनते ही मैं गुस्से से आंखें दिखाने लगी...जिस पर वो हंसता हुआ हुआ मेरे पास आया और मेरी कमर पकड़ कर जोर से अपने शरीर से सटाता हुआ बोला," मैडम,हमसे दोस्ती की हो तो कुछ तो बेशर्म बनना पड़ेगा ही..वैसे तुम्हारी ब्रॉ साफ-2 दिख रही है इसलिए बोला.. और सिर्फ ऊपर के कपड़े ही खोलने हैं,पूरी नहीं.."

मैं तो उसके शरीर से चिपकते ही चिहुंक उठी थी..उसके सीने की घनी बालें मेरी छाती से रगड़ खा रही थी और नीचे तो उफ्फफ उसका पूरा तना हुआ लंड सीधा मेरी चूत पर जा टिका था...साथ में उसकी मर्दाना खुशबू,, हमें उत्तेजित करने के लिए काफी थी.. मैं कसमसा कर रह गई क्योंकि उसकी पकड़ काफी जोर से थी जिससे निकल पाना लगभग असंभव थी....

और मैं ज्यादा जोर भी नहीं कर रही थी निकलने की,,क्योंकि लंड का आभास होते ही मेरी चूत मुझ पर कंट्रोल करने जो लग जाती थी...तभ सन्नी मेरी कमर से हाथहटा मेरी टीशर्ट के दोनों बगलें पकड़ ली...मैं अब अंदर ही अंदर काफी उत्तेजित हो गई थी...पर उसे अंदर ही दबा दी थी..

फिर सन्नी आहिस्ते-2 टीशर्ट ऊपर की तरफ खींचने लगा...मेरे होंठ अब कंपकपाने लगे थे जिसे मैं पूरी ताकत से रोकने की कोशिश कर रही थी...

कुछ ही पल में मेरी टी-शर्ट खोलते उसकी हाथ मेरे बूब्स के निकट पहुंच गई..अब मैं बर्दाश्त करने लायक नहीं रह गई थी..तभी उसने मेरी बूब्स को टी-शर्ट पकड़े ही अपने अंगूठे से रगड़ता हुआ ऊपर कर लिया...

अब मेरी टी-शर्ट दोनों बूब्स से ऊपर आ चुकी थी...ब्रॉ में कैद मेरी बूब्स उसके सीने से सट-हट रही थी...

मैं अब बिल्कुल ही होश गंवा बैठी थी...एक बार तो सोची कि अब वो टी-शर्ट निकालने को लिए मेरे हाथ ऊपर करेगा पर नहीं...उसने तो टी-शर्ट को ही थोड़ी जोर से ऊपर किया जिससे मैं खुद ही हाथ ऊपर उठा उसे मदद कर दी...ये मैं कैसे कर दी या उसकी कला थी, पता नही.....

मेरी टी-शर्ट अब बेड पर फेंकी हुई थी...और मैं अपनी आँखें बंद की उससे चिपक के खड़ी थी...तभी उसने हाथ मेरी पीठ पर ले जाते हुए मेरी ब्रॉ की हुक खोल दी...

मैं उफ्फ्फ करती हुई सिसक पड़ी...उसके सीने से चिपकी थी इसलिएनहीं तो मेरी ब्रॉ जमीन पर पड़ी होती अब तक....

तभी सन्नी ने अपने एक हाथ से तौलिया बेड से उठाया और मेरे सीने पर आगे से रख वो थोड़ी सी पीछे हो गया...उसके पीछे हटते ही तौलिया मेरी बूब्स को कवर करती नीचे जांघ तक गिर गई...मैं तो उसकी हर एक अदा की दीवानी हो गई थी...कितनी शालीनता से कर रहा था ये सब...

फिर वो तौलिया मेरे शरीर पर बांध दिया और अपने हाथ नीचे बढ़ा मेरी कैप्री के हुक यूं खोल दिया, जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकती...

अगले ही पल उसने मुझे कुर्सी पर बिठा दिया और खुद नीचे बैठते हुए कैप्री को खींच बेड की तरफ उछाल दिया...कुर्सी पर मैं पीछे की तरफ सिर झुकाए तेज-2 सांसें ले रही थी..मैं कुछ सोच ही नहीं पा रही थी कि अब क्या करेगा?

तभी उसकी उंगली मेरी जांघ के पास तौलिया के अंदर महसूस हुई..मैं सिहर उठी..उसने अपनी दोनों उंगली से मेरी पेन्टी की बगल पकड़ा और तेजी से घुटने तक खींच दिया...

मैं काम वासना से लबालब भरी चिहुंकती हुई उठ खड़ी हुई..वो शायद समझ चुका था कि अब मैं क्या चाहती हूँ..वो भी उतनी ही तेजी से खड़ा हो मुझे अपने बांहों में कस लिया..मैं गरम तो थी ही उसके बांहों में आते ही चीख पड़ी

और कांपती हुई चूत से पानी निकालती घुटने पर टिकी पेन्टी भिंगो रही थी...वो मेरे बालों पर धीरे से हाथ फेरता हुआ सहला रहा था..जब मैं पूरी तरह झड़ गई तो उसने अपने पैरों से ही मेरी गीली पेन्टी को पकड़ा और बाहर कर दिया...

कुछ देर मैं यूं ही उसकी बांहों में पड़ी रही, फिर उसने मुझे आहिस्ते से कुर्सी पर बिठा दिया...मैं ना चाहते हुए भी बैठ गई..इस वक्त अगर सन्नी की जगह कोई और होता तो कब का चोद चुका होता, पर सन्नी में कुछ इंसानियत तो थी जिसकी मैं दिवानी हो गई थी...फिर वो मेरे चेहरे के सामने अपना चेहरा झुका मुस्कुराते हुए बोला," अगर तुम खुद कपड़े निकाल लेती तो तुम्हारी ये हालत नहीं होती ना.."

वो झड़ने की बातें कर रहा था जिसे सुन मैं शर्म से मुस्काती नजरें चुरा ली..अगले ही पल उसने भी अपनी जींस खोल कर अलग कर दी और दूसरी तौलिया लपेट वो भी अंदर से पूरा नंगा हो गया...

फिर उसने मेरे और खुद के भींगे कपड़े से पानी निचोड़ सुखने के लिए कमरे में ही लगी तार पर रख दिया...

फिर वो एक दूसरी कुर्सी बाहर से ला मेरी बगल में लगाता हुआ बैठ गया और सामने कमप्यूटर ऑन कर दिया...मेरी नजर कमप्यूटर की स्क्रीन की तरफ चली गई....

कमप्यूटर स्क्रीन ऑन होते ही मेरी शरीर में झुरझर्री सी दौड़ गई...सामने स्क्रीन पर पूजा कुतिया की तरह मादरजात नंगी झुकी मुंह खोले चिल्लाए जा रही थी और बंटी उसकी कमर पकड़ दनादन अपना लंड उसकी गांड़ में पेले जा रहा था...

पूरी तरह से छिनाल की तरह चुद रही थी हमारी पूजा..इसे देख मैं थोड़ी सी शर्मा गई पर अब सन्नी पर इतनी विश्वास तो थी ही कि वो बिना इजाजत टच भी नहीं करेगा...

हम दोनों एक- दूसरे की तरफ देखे बिना पूजा की लाइव चुदाई देखने लगे...मैं अपनी आंखों को तिरछी कर सन्नी की तरफ देखी तो वो तौलिया के भीतर अपना हाथ घुसा लंड मसल रहा था..

तभी सन्नी की-बोर्ड पर एक बटन दबा दी जिससे पिक्चर जूम हो गई..अब पूजा की गांड़ में जाती लंड काफी निकट से दिखाई दे रही थी...

तभी मेरी नजर पूजा की चूत पर गई जो बंटी के लंड से ठीक नीचे थी..गौर से देखी तो उसकी चूत सूजी हुई थी और कुछ गाढ़ा रस टपक रही थी...मतलब इतनी देर में उसकी चूत का कबाड़ा करने के बाद बंटी उसकी गांड़ के पीछे पड़ गया था...

अब मेरी भी चूत रोने लग गई थी...शरीर में अंदर से काफी ऐंठन हो रही थी..ये सन्नी अब भोंदू दिखने लगा था कि मैं सिर्फ टॉवेल में बैठी चुदाई देख रही हूं और ये सन्नी कुछ नहीं कर रहा है..

तभी बंटी पूजा की बाल पकड़ जोर से खींचते हुए घुरसवार की तरह तेज धक्के लगाने लगा...पूजा की आँखों से आंसू बह रहे थे...तभी सन्नी टेबल के नीचे से हेडफोन निकाल कान में लगा लिया, मतलब वो अब आवाज भी सुनेगा..

मैं उसकी तरफ देखी तो वो हल्की मुस्कान दे दिया..मैं भी मुस्कुराती उसकी तरफ देखी..उसने एक और हेडफोन ले मेरे कानों में लगा दिया...

पूजा और बंटी की एक- एक शब्द अब स्पष्ट सुनाई पड़ रही थी...

"आहहहह मादरचोद ये ले......ओफ्फफफ शाली रंडी आज तेरी मां चोद चोद के भोसड़ा कर दूँगा कुतिया....."

"आउउउउउउउ शाबास मेरे राजा...कमीनी चूत हर वक्त तंग करती है हमें..याहहहह याहहहहह..कस के चोदो अपनी इस कुतिया की चूत और रंडी बना डालो मेरे चोदू..."

"जरूर बनाऊंगा तुझे और साथ में तेरी भाभी को भी शाली,,, आहहह क्या फिगर है उस रंडी के भी यूहहह यूह आह ले और ले.."

मैं अपने बारे में सुन गुस्से से सन्नी की तरफ देखने लगी..जिसे देख सन्नी होंठो पर हंसी लाता मेरी कानों से हेडफोन हटाते हुए बोला,"देखो जान, सेक्स में थोड़ी बहुत गाली ना हो तो मजा नहीं आता सो प्लीज माइंड मत करना.."

"और मेरे बारे में जो बोल रहा है उसका क्या?" मैं झूठी ही सही गुस्से में आती हुई बोली...

"ओहो डॉर्लिंग, जोश में बोल दिया, तुम बेकार में गुस्सा कर रही हो..छोड़ो उसे और मजे से देखो.." कहते हुए सन्नी हेडफोन वापस लगा अपने हाथ मेरे कंधों पर रखते हुए मेरे गाल सहलाने लगा..

मैं उसकी तरफ पलटी तो मुझे नजरअंदाज कर लाइव चुदाई के मजे लेने लगा..उसकी ये हरकत देख मैं अंदर ही अंदर मुस्कुरा पड़ी..और मैं भी सीधी हो पूजा की लाइव देखने लगी...

बंटी अब काफी तेज तेज शॉट मार रहा था...शायद झड़ने वाला था...जबकि पूजा भी अब जोर से चिल्ला और चीखती हुई अपनी गांड़ पीछे धकेल रही थी..

तभी अचानक से बंटी ठप्प की आवाज के साथ अपना लंड खींचा और वो पूजा को बेरहमी की तरह बाल खींचता हुआ बैठा दिया और तेजी से अपना लंड उसके मुंह में ठेल दिया...

पूजा बालों के दर्द से हल्की चीख निकल पड़ी पर लंड मुंह में जाते ही वो दर्द भूल चूप्पे लगाने लगी..

इधर सन्नी की उंगली कब मेरे मुंह में चली गई, पता नहीं..और तो और सन्नी की उंगली को मैं भी पूजा के माफिक ही चूसे जा रही थी..


सन्नी के साथ अब मेरी भी उंगली अपनी चूत पर रगड़ रही थी..उधर बंटी चुदाई के बाद हो रही गहरी- गहरी चुसाई को सह नहीं पाया..और पूजा के सिर को जोरों से दबाता हुआ चीख पड़ा..

बंटी अपने लंड के पवित्र जल को झटके के साथ पूजा के गले में उतार रहा था..पूजा का चेहरा प्रसन्नचित्त हो सारा रस मुंह में लेने लगी..

बंटी और पूजा को देख मेरी सब्र की बाँध टूट गई और मैं लपकती सी कुर्सी से उठी और सन्नी के होठों पर अपन दहकते होंठ रख दिए..सन्नी भी एक भूखे शेर की भांति मेरे होंठो को निचोड़ने लगा..

कुर्सी पर बैठे सन्नी के शरीर पर लदी मस्ती में अपने रस निकलवा रही थी..सन्नी कुछ
सहज महसूस नहीं कर रहा था ऐसी अवस्था में...वो मुझे अपने होंठो से अलग करता हुआ खड़ा हुआ...

पल भर अलग होते ही मेरी नजर वापस स्क्रीन पर गई जहाँ पूजा सारा वीर्य किसी रांड की तरह गटकने के बाद चुप-चुप करती बंटी के लंड को जीभ से चाटकर साफ कर रही थी...

तभी सन्नी एक झटके से मुझे बेड की ओर धक्का देते हुए मेरे तन की तौलिया का एक सिरा पकड़ लिया...जिससे मैं नंगी होती हुई बेड पर धम्म से गिरी...सन्नी भी पीछे से मेरे शरीर पर गिरा और गिरते के साथ ही मेरे होंठो को कैद कर चूसने लगा..

अब जब हरी झंडी मिल गई उसे तो भला अपने लंड को क्यों तकलीफ देता..वो एक हाथ से मेरी बूब्स मसलते हुए मस्ती के सागर में डुबकी लगाए जा रहा था..

मैं भी वासना से मरी जा रही थी तो उसे पूरी आजादी देते हुए आनंद ले रही थी..कुछ देर में ही वो अपनी उंगली से मेरी चूत भी रगड़ने लगा..मैं मस्ती से लबालब होती अपने चूत ऊपर की उछाल कर उंगली को गहराई तक पहुंचाना चाहती थी...

मेरी इस हरकत को देख सन्नी तुरंत समझ गया कि मैं कितनी गरम हूं...वो मेरे होंठ को आजाद किया और अगले ही पल उसके होंठ मेरी चूत में उतर गई..मैं तड़प के उछल पड़ी और उसके बाल नोचने लगी...मैं लाख कोशिश की उसे हटाने की पर वो उतनी ही जोरों से मेरी चूत को खाए जा रहा था...

मैं ज्यादा देर तक खुद पर काबू नहीं रख सकी और सन्नी के बाल नोंचते हुए पैर पटकने लगी...तभी मेरे अंदर के बादल फटी और सारा पानी सन्नी के चेहरे को धोने लगी..जितना उससे संभव हुआ.उतना पानी वो अंदर गटक लिया,बाकी बेडसीट और उसके चेहरे को भिंगो दिया..मैं झड़ते हुए जोरों से हांफ रही थी...इस दौरान सन्नी भी नंगा हो गया था..

अगले ही क्षण वो उठा और अपना 7 इंची लंड से मेरे होंठो पर मारते हुए बोला," आहहह मेरी रानी, अपने मुंह तो खोल" मैं इससे पहले एक-दो बार लंड मुंह में ली जरूर थी, पर अभी तक आदत नहीं पड़ी थी इसकी..थोड़ी सी हिचकिचाती हुई अपने होंठ थोड़े खोले कि सन्नी पूरी ताकत से अपना लंड ठूस दिया..मैं उबकाई लेती हुई कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी पर मुश्किल लग रही थी मेरे लिए..मेरे चेहरे की उड़ती रंग देख वो समझ गया कि मैं मुंह में नहीं लेती..

उसने लंड के दबाव को थोड़ा कम किया और बोला,"अब आदत डाल ले मेरी रानी,क्योंकि रोज लेने होंगे चुदाई से पहले.."

मैं उसकी तरफ आंखें उठा के देखी और आंखों से हामी भरती धीरे -2 अंदर बाहर करने लगी..पूजा की तरह ढ़ंग से तो नहीं कर पा रही थी जिससे सन्नी को उतना मजा आता..पर पहली बार की वजह से वो आहें भरते हुए मजा ले रहा था...

कुछ मिनटों में ही वो जोर से चीखते हुए "नहीईईईई" किया और अपना लंड को जोर से आखिरी धक्का मेरी मुंह में मार खींच लिया...शुक्र है वो झड़ा नहीं था वर्ना मैं कैसे उसके पानी को मुंह में ले पाती..

फिर वो बेड से नीचे उतरा और मुझे अपनी दिशा में लाते हुए मेरे पैरों को अपने कमर में लिपटा लिया..जिससे मेरी गर्म चूत ठीक उसके लंड से टकराई..मैं सिहरती हुई कराह उठी..और सांस रोके उसके लंड का इंजार करने लगी..

अगले ही पल दनदनाता हुआ उसका पूरा लंड जड़ तक मेरी चूत में उतर गया था..मेरी सांसें तो ऊपर ही अटक गई थी क्योंकि ऐसा करारी शॉट ना ही श्याम मारे थे और ना मेरे भैया....

वो अपने लंड को वहीं रोक नीचे झुक मेरी बूब्स को बारी- बारी चूसने लगा..कुछ ही पल में मेरी दर्र भाग गई और मस्ती आने लगी..जिससे मैं अपनी चूत ऊपर की तरफ मारने लगी...

वो मेरी ओर देखते हुए बूब्स से अपना मुंह हटाया और मुस्कुराते हुए अपना लंड आगे-पीछे करने लगा...साथ ही मेरी बूब्स को मसलने लगा...

मेरी मुंह से अब सेक्स वाली आवाजें निकलनी शुरू हो गई थी..जिससे वो और उत्तेजित हो तेज-2 धक्के लगा रहा था..

पूरे कमरे में हम दोनों की सेक्सी आवाजें और फच-फच की धुन गूंज रही थी..मेरी शरीर तो ऐसे हिचकोलें खा रही थी मानों कोई लोकल ट्रेन हो..जिसे मेरी दोनों भोंपू दबाए सन्नी ड्राइवर चला रहा था...

हम दोनों की पहली चुदाई की वजह से सन्नी और मैं ज्यादा दूरी तक इस ट्रेन को नहीं ले जा सके...

मैं चीखती हुई सन्नी के साथ 3री बार झड़ गई..जिसे देखा देखी सन्नी भी चिल्लाते हुए अपना गरम लावा मेरी चूत के अंदर उड़ेल दिया.. मेरी चूत की सारी गर्मी को सन्नी के वीर्य ने शांत कर दिया...

सन्नी हांफता हुआ बेड पर मेरे बगल गिर पड़ा..जिसे मैं अपनी बांहों में लेती हुई उसके बाल सहलाती खुद पर भी काबू पाने की कोशिश कर रही थी...