बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:45

बात एक रात की--88

गतान्क से आगे.................

“हां रोहित मुझे सच में अब कुछ याद नही है. धीरे धीरे उसके चेहरे की छवि गायब हो गयी ज़हन से.”

“कोई बात नही ऐसा ही होता है हमारी मेमोरी के साथ. एक ही बार तो देखा था तुमने उसे.”

“ठीक है रोहित मैं चलती हूँ…अपना ख्याल रखना.”

“बहुत अच्छा लगा पद्‍मिनी जो कि तुम आई. अब सारे घाव भर जाएँगे.”

“टेक केर, बाइ.” पद्‍मिनी मुस्कुरा कर बोली और कमरे से बाहर आ गयी.

पद्‍मिनी के जाने के बाद राज शर्मा अंदर आया. “राज शर्मा अगर तुम्हे पद्‍मिनी के घर से हटा कर दूसरा काम दूं तो क्या कर पाओगे.”

“आप हुकुम कीजिए सर.”

“मेरे तकिये के पास से मेरा पर्स उठाओ. उसमे एक काग़ज़ का टुकड़ा है. उस पर किसी संजय नाम के व्यक्ति का अड्रेस है. संजय के सिमरन के साथ संबंध हैं जो की इसीसी बॅंक में काम करती है. सिमरन के पास ब्लॅक स्कॉर्पियो है. साइको भी ब्लॅक स्कॉर्पियो में घूमता है. सिमरन की ब्लॅक स्कॉर्पियो संजय के पास थी कल. तुम उसके घर जा कर उसकी इंक्वाइरी करो. कल रात वो कहाँ था ज़रूर पूछना उस से. पद्‍मिनी के घर मैं किसी और की ड्यूटी लगा देता हूँ. तुम अपना ये काम करके मुझे रिपोर्ट दे कर वापिस पद्‍मिनी के घर चले जाना.”

“राइट सर एइज यू विस. पर सर क्या मैं पहले पद्‍मिनी जी को घर छोड़ आउ सुरक्षित.”

“हां ऐसा कर्लो. मैं दूसरे को घर ही भेज दूँगा.” रोहित ने कहा.

“ओह, मैं भूल गया, सर ये लीजिए आपका फोन. एक आदमी पद्‍मिनी जी के घर पकड़ा गया था मुझे.”

“अच्छा हुआ जो कि फोन ले आए. कोई भी बात हो तो तुरंत मुझे फोन करना. साथ में 4-5 कॉन्स्टेबल्स ले जाओ. अच्छे से पूछ ताछ करना.”

“ओके सर.” राज शर्मा ने पर्स से वो काग़ज़ निकाला और अड्रेस देख कर बोला, “अरे ये तो मोनिका जी का घर है. इसका मतलब मोनिका संजय की बीवी है.”

“कौन मोनिका?” रोहित ने पूछा.

“मोनिका का सुरिंदर के साथ संबंध था सर. वो उस रात सुरिंदर के ही साथ थी जिस रात उसने पोलीस स्टेशन आकर झूठी गवाही दी थी पद्‍मिनी जी को फसाने के लिए.”

“ह्म्म…मोनिका सुरिंदर को जानती थी. संजय मोनिका का पति है. संजय ब्लॅक स्कॉर्पियो लेकर घूम रहा है. क्या सुरिंदर ने झुटि गवाही मोनिका के कहने पे दी थी?. ये सब इत्तेफ़ाक है या फिर बेवजह की हमारा टाइम कराब करने की साजिश.” रोहित ने कहा.

“सर मोनिका से मिला हूँ मैं. वो कोई साजिस करने वाली वुमन नही है. शी ईज़ नाइस वुमन. फिर भी एक बार ओपन माइंड से फिर से एक बार फिर से उनसे भी पूछ ताछ कर लूँगा.”

“हां ज़रूर करो. किसी के बारे में अपनी जग्डमेंट मत बनाओ. लोग यहा पल पल में रंग बदलते हैं. वैसे तो मुझे इस वक्त सबसे ज़्यादा कर्नल देवेंदर सिंग पर शक है, मगर संजय की इंक्वाइरी ज़रूरी है. अभी कुछ भी क्लियर नही है हमें. फूँक-फूँक कर कदम रखने होंगे हमें.”

“बिल्कुल सर, अगर संजय ब्लॅक स्कॉर्पियो लेकर घूम रहा है शहर में तो उसकी इंक्वाइरी बहुत ज़रूरी है.”

“मुझे यकीन था तुम इंटेरेस्ट लोगे इस इंक्वाइरी में. इसलिए तुम्हे भेज रहा हूँ. ऑल दा बेस्ट.”

“ओके सर मैं चलता हूँ. पद्‍मिनी जी को घर छोड़ कर. मैं इस काम के लिए निकल जाउन्गा.”

बाहर आकर राज शर्मा ने पद्‍मिनी से कहा, “मेरी ड्यूटी चेंज हो गयी है. मुझे दूसरे काम पर लगा दिया है रोहित सर ने. आपको घर छोड़ कर मैं चला जाउन्गा.”

“दूसरा काम, कौन सा दूसरा काम?” पद्‍मिनी ने हैरानी में पूछा.

“एक ज़रूरी इंक्वाइरी है. मुझे ही करनी होगी.”

“क्या कोई और नही कर सकता ये…मैं रोहित को बोल देती हूँ.”

“रहने दीजिए….मुझे ही करनी होगी ये इंक्वाइरी. मैं खुद करना चाहता हूँ.”

“तो ये कहो ना तुम थक गये हो मेरे घर के बाहर खड़े रहकर. तुम्हारे 10-10 लड़कियों से संबंध भी तो सफ़र हो रहे हैं. जाओ जहा मर्ज़ी मुझे क्या लेना देना.”

“प्यार करते हैं आपसे कोई मज़ाक नही. और आज लग रहा है कि आप भी प्यार करती है मुझे. शाम तक लौट आउन्गा मैं वापिस. तब तक कोई और ड्यूटी करेगा मेरी जगह.”

“मुझे तुमसे कोई प्यार नही है. बस चिंता कर रही थी कि कहाँ भटकोगे बेवजह.”

“ठीक है फिर मैं शाम को भी नही आउन्गा. रोहित सर से बोल कर ड्यूटी पर्मनेंट्ली चेंज करवा लेता हूँ.”

“तो करवा लो चेंज…मेरे उपर क्या अहसान करोगे मेरे घर रह कर. तुम चाहते हो मुझे मैं नही.”

पद्‍मिनी गुस्से में जीप में चल दी जीप की तरफ. राज शर्मा ने तुरंत हाथ पकड़ लिया.

“हाथ छोड़ो लोग देख रहे हैं.”

“पहले आप ये बतायें कि आपको मुझसे प्यार है कि नही. अब मैं चुप नही बैठूँगा. बहुत हो लिया आपका नाटक.”

“छोड़ो पागल हो क्या. लोग देख रहे हैं. घर चल कर बात करेंगे.”

“मैं जा रहा हूँ काम से बताया ना. अभी बताना होगा आपको कि क्या है आपके दिल में मेरे लिए.”

“तुम शाम को तो आओगे ना. फिर बात करेंगे, मेरा हाथ छोड़ो प्लीज़.” पद्‍मिनी गिड़गिडाई.

“शायद शाम तक जिंदा ना रहू मैं, जींदगी का क्या भरोसा है. चलिए छोड़ रहा हूँ हाथ आपका. शाम को भी नही आउन्गा मैं. अपनी ड्यूटी अभी हटवा लूँगा मैं.”

पद्‍मिनी ने कुछ नही कहा और जीप में आकर बैठ गयी. वापसीं का सफ़र बिल्कुल शांत रहा. पद्‍मिनी ने तीर्चि नज़रो से कयि बार राज शर्मा की तरफ देखा. पर वो कुछ बोल नही पाई क्योंकि बहुत गुस्सा था राज शर्मा के चेहरे पर.

पद्‍मिनी को घर छोड़ कर जीप से उतरे बिना राज शर्मा जीप घुमा कर वापिस चला गया. पद्‍मिनी बस उसे देखती रह गयी.

“क्या मैं ये प्यार भी खो दूँगी…राज शर्मा प्लीज़ शाम को आ जाना वापिस.” पद्‍मिनी ने मन ही मन कहा और अपने घर में घुस गयी. उसकी आँखे नम थी.

पद्‍मिनी ने घर में घुस कर राज शर्मा का फोन मिलाया मगर रिंग जाने से पहले ही काट दिया, “उसने जाते वक्त मूड कर भी नही देखा मुझे. समझता क्या है वो खुद को.जीप घुमा कर निकल गया चुपचाप. अगर शाम को नही आया वो तो कभी बात नही करूँगी उस से.”

राज शर्मा को कयि दिनो बाद गुस्सा आया था ऐसा. बहुत तेज चला रहा था जीप. पहले वो थाने गया और रोहित के कहे अनुसार 4 कॉन्स्टेबल्स लिए साथ में और चल दिया मोनिका के घर की तरफ. 20 मिनिट में ही उसके घर पहुँच गया वो.

राज शर्मा ने दरवाजा खड़काया. दरवाजा मोनिका ने खोला, “आप…आज मैं आपको ही याद कर रही थी.”

“मुझे याद कर रही थी…क्यों भला.” राज शर्मा ने कहा. उसका मूड अभी भी ऑफ था.

“वैसे ही…अच्छे लोगो को अक्सर याद करके दिल खुश हो जाता है.”

“आपके पति का नाम संजय है?” राज शर्मा ने मोनिका की बात इग्नोर करके पूछा.

“जी हां, शायद आपको बताया था मैने पहले.”

“बताया होगा, मुझे याद नही है अभी. कहाँ हैं आपके पति” राज शर्मा ने कहा.

“बात क्या है, आप तो पूरी पोलीस फोर्स ले आए हैं घर पर मेरे. क्या जान सकती हूँ कि बात क्या है.”

“मोनिका जी…मेरा मूड बहुत खराब है अभी…प्लीज़ जल्दी से ये बतायें कि संजय कहा है?”

“वो तो देल्ही गये हुए हैं पीछले 2 दिन से. उनकी जॉब ऐसी है कि उनका घूमना फिरना लगा रहता है.” मोनिका ने कहा.

“ह्म्म…ब्लॅक स्कॉर्पियो में गये हैं क्या वो देल्ही?”राज शर्मा ने पूछा.

“ब्लॅक स्कॉर्पियो!...हमारे पास कोई ब्लॅक स्कॉर्पियो नही है.” मोनिका ने कहा.

राज शर्मा ने सभी कॉन्स्टेबल्स को बाहर जीप के पास रुकने को कहा और मोनिका से बोला, “आपके पास नही है. मगर सिमरन के पास ब्लॅक स्कॉर्पियो है और आपके पति के उसके साथ संबंध हैं.”

“सिमरन…कौन सिमरन?”

“वो सब छोड़िए और ये बतायें कि देल्ही में कहा गये हैं आपके पति.”

“इतना सब कुछ वो मुझे नही बताते हैं. और ना ही मैं पूछती हूँ.”

“अच्छा…इट्स वेरी स्ट्रेंज…आपको आपके पति के बारे में नही पता. पत्नियाँ तो अक्सर पूरी जानकारी रखती हैं पति के बारे में.”

“मुझे कभी उन पर नज़र रखने की ज़रूरत नही पड़ी”

“क्या काम करते हैं आपके पति.”

“इसीसी बॅंक में हैं वो”

“ह्म्म…ठीक है…मैं इसीसी बॅंक ही जा रहा हूँ यहाँ से सीधा. आप ये बतायें कि क्या अक्सर आपके पति घर से गायब रहते हैं”

“अक्सर तो नही हां कभी कभी वो घर नही आते. पर वो अपने काम के सिलसिले में ही बाहर जाते हैं.”

“ये तो इसीसी बॅंक जाकर ही पता लगेगा कि काम के शील्षिले में जाते हैं या यू ही.” राज शर्मा ने कहा और चल दिया वाहा से.

राज शर्मा सीधा इसीसी बॅंक पहुँचा और बॅंक में घुसते ही सिमरन के कॅबिन में घुस गया, “क्या आपकी ब्लॅक स्कॉर्पियो आपके पास है अब.”

“देखिए मैने रोहित को सब बता दिया था. प्लीज़ डॉन’ट वेस्ट माइ टाइम.

“रोहित सर ने ही भेजा है मुझे. संजय के पास थी ना आपकी ब्लॅक स्कॉर्पियो, कहाँ है संजय बुलाओ उसे.”

“वो आज ड्यूटी पर नही आया.”

“क्या बॅंक के किसी काम से बाहर भेजा गया है उसे?”

“नही बॅंक के किसी काम से बाहर नही भेजा गया उसे. वो शायद घर होगा.”

“घर पर उसकी बीवी ने बताया कि वो देल्ही गया है…काम के सिलसिले में.”

“नही हमने उसे देल्ही नही भेजा…उनकी पत्नी को कोई ग़लतफहमी हुई होगी.”

राज शर्मा ने सारी बात फोन पर रोहित को बताई, “सर मोनिका कह रही है कि संजय देल्ही गया है मगर इसीसी बॅंक में मैने ब्रांच मॅनेजर सिमरन से बात की. उसके अनुसार उसे देल्ही नही भेजा गया. कही ये संजय ही तो साइको नही. ”

“ह्म्म…खैर सब कुछ इत्तेफ़ाक भी हो सकता है. मगर इंपॉर्टेंट जानकारी हाँसिल की है तुमने. सिमरन को फोन दो.” रोहित ने राज शर्मा से कहा.

राज शर्मा ने फोन सिमरन को पकड़ा दिया.

“सिमरन जब भी संजय आए या तुम्हे उसके बारे में कुछ भी पता चले, तुरंत मुझे फोन करना.”

“ठीक है रोहित…जैसे ही वो आएगा मैं तुम्हे इनफॉर्म कर दूँगी.”

राज शर्मा को फोन वापिस दे दिया सिमरन ने.

“सर एक रिक्वेस्ट थी आपसे.” राज शर्मा ने कहा.

“हां बोलो राज शर्मा”

“मेरी ड्यूटी पद्‍मिनी जी के वहाँ से हटवा दीजिए.”

“राज शर्मा वैसे तो मैं तुरंत तुम्हारी बात मान लेता. मगर पद्‍मिनी के साथ तुम्हारी ड्यूटी मेडम ने लगाई थी.”

“कोई बात नही सर, वैसे कैसी हैं मेडम अब सर.”

“ऑपरेशन तो हो गया है..मगर अभी उनको आइक्यू में रखा गया है. अभी उन्हे होश नही आया है. डॉक्टर कह रहा था कि शायद सुबह तक होश आ जाएगा. तुम अब पद्‍मिनी के घर जाओ. बाद में देखेंगे कि क्या करना है. और हां बहुत ज़्यादा सतर्क रहना होगा तुम्हे इन दिनो.”

“ओके सर.”

राज शर्मा ने सभी कॉन्स्टेबल्स को पहले थाने छोड़ दिया और फिर पद्‍मिनी के घर की तरफ चल दिया.

……………………………………………………………………..

क्रमशः........................

..

BAAT EK RAAT KI--88

gataank se aage.................

“haan rohit mujhe sach mein ab kuch yaad nahi hai. dheere dheere uske chehre ki chavi gaayab ho gayi zahan se.”

“koyi baat nahi aisa hi hota hai hamaari memory ke saath. Ek hi baar to dekha tha tumne use.”

“theek hai rohit main chalti hun…apna khyaal rakhna.”

“bahut achcha laga padmini jo ki tum aayi. Ab saare ghaav bhar jaayenge.”

“take care, bye.” Padmini muskura kar boli aur kamre se baahar aa gayi.

Padmini ke jaane ke baad Raj sharma ander aaya. “Raj sharma agar tumhe padmini ke ghar se hata kar dusra kaam dun to kya kar paaoge.”

“aap hukum kijiye sir.”

“mere takiye ke paas se mera purse uthaao. Usme ek kaagaz ka tukda hai. us par kisi sanjay naam ke vyakti ka address hai. sanjay ke simran ke saath sambandh hain jo ki icici bank mein kaam karti hai. simran ke paas black scorpio hai. psycho bhi black scorpio mein ghumta hai. simran ki black scorpio sanjay ke paas thi kal. Tum uske ghar ja kar uski inquiry karo. Kal raat vo kaha tha jaroor puchna us se. padmini ke ghar main kisi aur ki duty laga deta hun. tum apna ye kaam karke mujhe report de kar vaapis padmini ke ghar chale jaana.”

“right sir as you wis. Par sir kya main pahle padmini ji ko ghar chod aaun surakshit.”

“haan aisa karlo. Main dusre SI ko ghar hi bhej dunga.” Rohit ne kaha.

“oh, main bhul gaya, sir ye lijiye aapka phone. Ek aadmi padmini ji ke ghar pakda gaya tha mujhe.”

“achcha hua jo ki phone le aaye. Koyi bhi baat ho to turant mujhe phone karna. Saath mein 4-5 constables le jaao. Achche se puch taach karna.”

“ok sir.” Raj sharma ne purse se vo kaagaz nikaala aur address dekh kar bola, “arey ye to monika ji ka ghar hai. iska matlab monika sanjay ki biwi hai.”

“kaun monika?” rohit ne pucha.

“monika ka surinder ke saath sambandha tha sir. Vo us raat surinder ke hi saath thi jis raat usne police station aakar jhuti gavaahi di thi padmini ji ko phasaane ke liye.”

“hmm…monika surinder ko jaanti thi. sanjay monika ka pati hai. sanjay black scorpio lekar ghum raha hai. kya surinder ne jhuti gavaahi monika ke kahne pe di thi?. ye sab ittefaak hai ya phir bevajah ki hamaara time khraab karne ki saajish.” Rohit ne kaha.

“sir monika se mila hun main. Vo koyi saajis karne wali woman nahi hai. she is nice woman. Phir bhi ek baar open mind se phir se ek baar phir se unse bhi puch taach kar lunga.”

“haan jaroor karo. Kisi ke baare mein apni jugdement mat banaao. Log yaha pal pal mein rang badalte hain. Vaise to mujhe is vakt sabse jyada colonel devender singh par shak hai, magar sanjay ki inquiry jaroori hai. abhi kuch bhi clear nahi hai hamein. Phoonk-phoonk kar kadam rakhne honge hamein.”

“bilkul sir, agar sanjay black scorpio lekar ghum raha hai sahar mein to uski inquiry bahut jaroori hai.”

“mujhe yakin tha tum interest loge is inquiry mein. Isliye tumhe bhej raha hun. all the best.”

“ok sir main chalta hun. padmini ji ko ghar chod kar. Main is kaam ke liye nikal jaaunga.”

Baahar aakar Raj sharma ne padmini se kaha, “meri duty change ho gayi hai. mujhe dusre kaam par laga diya hai rohit sir ne. aapko ghar chod kar main chala jaaunga.”

“dusra kaam, kaun sa dusra kaam?” padmini ne hairaani mein pucha.

“ek jaroori inquiry hai. mujhe hi karni hogi.”

“kya koyi aur nahi kar sakta ye…main rohit ko bol deti hun.”

“rahne dijiye….mujhe hi karni hogi ye inquiry. Main khud karna chaahta hun.”

“to ye kaho na tum thak gaye ho mere ghar ke baahar khade rahkar. Tumhaare 10-10 ladkiyon se sambandh bhi to safar ho rahe hain. Jaao jaha marji mujhe kya lena dena.”

“pyar karte hain aapse koyi majaak nahi. Aur aaj lag raha hai ki aap bhi pyar karti hai mujhe. Shaam tak laut aaunga main vaapis. Tab tak koyi aur duty karega meri jagah.”

“mujhe tumse koyi pyar nahi hai. bas chinta kar rahi thi ki kaha bhatkoge bevajah.”

“theek hai phir main shaam ko bhi nahi aaunga. Rohit sir se bol kar duty permanently change karva leta hun.”

“to karva lo change…mere upar kya ahsaan karoge mere ghar rah kar. Tum chaahte ho mujhe main nahi.”

Padmini gusse mein jeep mein chal di jeep ki taraf. Raj sharma ne turant haath pakad liya.

“haath chodo log dekh rahe hain.”

“pahle aap ye bataayein ki aapko mujhse pyar hai ki nahi. Ab main chup nahi baithunga. Bahut ho liya aapka naatak.”

“chodo paagal ho kya. Log dekh rahe hain. Ghar chal kar baat karenge.”

“main ja raha hun kaam se bataaya na. abhi bataana hoga aapko ki kya hai aapke dil mein mere liye.”

“tum shaam ko to aaoge na. phir baat karenge, mera haath chodo please.” Padmini gidgidaayi.

“shaayad shaam tak jeenda na rahu main, jeendagi ka kya bharosa hai. chaliye chod raha hun haath aapka. Shaam ko bhi nahi aaunga main. Apni duty abhi hatva lunga main.”

Padmini ne kuch nahi kaha aur jeep mein aakar baith gayi. Vaapsin ka safar bilkul shaant raha. Padmini ne teerchi nazro se kayi baar Raj sharma ki taraf dekha. Par vo kuch bol nahi paayi kyonki bahut gussa tha Raj sharma ke chehre par.

Padmini ko ghar chod kar jeep se utre bina Raj sharma jeep ghuma kar vaapis chala gaya. padmini bas use dekhti rah gayi.

“kya main ye pyar bhi kho dungi…Raj sharma please shaam ko aa jaana vaapis.” Padmini ne man hi man kaha aur apne ghar mein ghus gayi. Uski aankhe nam thi.

Padmini ne ghar mein ghus kar Raj sharma ka phone milaaya magar ring jaane se pahle hi kaat diya, “usne jaate vakt mud kar bhi nahi dekha mujhe. Samajhta kya hai vo khud ko.jeep ghuma kar nikal gaya chupchaap. Agar shaam ko nahi aaya vo to kabhi baat nahi karungi us se.”

Raj sharma ko kayi dino baad gussa aaya tha aisa. Bahut tej chala raha tha jeep. Pahle vo thaane gaya aur rohit ke kahe anusaar 4 constables liye saath mein aur chal diya monika ke ghar ki taraf. 20 minute mein hi uske ghar pahunch gaya vo.

Raj sharma ne darvaaja khadkaaya. Darvaaja monika ne khola, “aap…aaj main aapko hi yaad kar rahi thi.”

“mujhe yaad kar rahi thi…kyon bhala.” Raj sharma ne kaha. Uska mood abhi bhi off tha.

“vaise hi…achche logo ko aksar yaad karke dil khuss ho jaata hai.”

“aapke pati ka naam sanjay hai?” Raj sharma ne monika ki baat ignore karke pucha.

“ji haan, shaayad aapko bataaya tha maine pahle.”

“bataaya hoga, mujhe yaad nahi hai abhi. Kaha hain aapke pati” Raj sharma ne kaha.

“baat kya hai, aap to puri police force le aaye hain ghar par mere. Kya jaan sakti hun ki baat kya hai.”

“monika ji…mera mood bahut khraab hai abhi…please jaldi se ye bataayein ki sanjay kaha hai?”

“vo to delhi gaye hue hain peechle 2 din se. unki job aisi hai ki unka ghumna phirna laga rahta hai.” monika ne kaha.

“hmm…black scorpio mein gaye hain kya vo delhi?”Raj sharma ne pucha.

“black scorpio!...hamaare paas koyi black scorpio nahi hai.” monika ne kaha.

Raj sharma ne sabhi constables ko baahar jeep ke paas rukne ko kaha aur monika se bola, “aapke paas nahi hai. magar simran ke paas black scorpio hai aur aapke pati ke uske saath sambandh hain.”

“simran…kaun simran?”

“vo sab chodiye aur ye bataayein ki delhi mein kaha gaye hain aapke pati.”

“itna sab kuch vo mujhe nahi bataate hain. Aur na hi main puchti hun.”

“achcha…its very strange…aapko aapke pati ke baare mein nahi pata. Patniyan to aksar puri jaankaari rakhti hain pati ke baare mein.”

“mujhe kabhi un par nazar rakhne ki jaroorat nahi padi”

“kya kaam karte hain aapke pati.”

“icici bank mein hain vo”

“hmm…theek hai…main icici bank hi ja raha hun yaha se seedha. Aap ye bataayein ki kya aksar aapke pati ghar se gaayab rahte hain”

“aksar to nahi haan kabhi kabhi vo ghar nahi aate. Par vo apne kaam ke shilshile mein hi baahar jaate hain.”

“ye to icici bank jaakar hi pata lagega ki kaam ke shilshile mein jaate hain ya yu hi.” Raj sharma ne kaha aur chal diya vaha se.

Raj sharma seedha icici bank pahuncha aur bank mein ghuste hi simran ke cabin mein ghus gaya, “kya aapki black scorpio aapke paas hai ab.”

“dekhiye maine rohit ko sab bata diya tha. please don’t waste my time.

“rohit sir ne hi bheja hai mujhe. Sanjay ke paas thi na aapki black scorpio, kaha hai sanjay bulaao use.”

“vo aaj duty par nahi aaya.”

“kya bank ke kisi kaam se baahar bheja gaya hai use?”

“nahi bank ke kisi kaam se baahar nahi bheja gaya use. Vo shaayad ghar hoga.”

“ghar par uski biwi ne bataaya ki vo delhi gaya hai…kaam ke shilshile mein.”

“nahi hamne use delhi nahi bheja…unki patni ko koyi galatfahmi hui hogi.”

Raj sharma ne saari baat phone par rohit ko bataayi, “sir monika kah rahi hai ki sanjay delhi gaya hai magar icici bank mein maine branch manager simran se baat ki. Uske anusaar use delhi nahi bheja gaya. kahi ye sanjay hi to psycho nahi. ”

“hmm…khair sab kuch ittefaak bhi ho sakta hai. magar important jaankaari haansil ki hai tumne. Simran ko phone do.” Rohit ne Raj sharma se kaha.

Raj sharma ne phone simran ko pakda diya.

“simran jab bhi sanjay aaye ya tumhe uske baare mein kuch bhi pata chale, turant mujhe phone karna.”

“theek hai rohit…jaise hi vo aayega main tumhe inform kar dungi.”

Raj sharma ko phone vaapis de diya simran ne.

“sir ek request thi aapse.” Raj sharma ne kaha.

“haan bolo Raj sharma”

“meri duty padmini ji ke vaha se hatva dijiye.”

“Raj sharma vaise to main turant tumhaari baat maan leta. Magar padmini ke saath tumhaari duty madam ne lagaayi thi.”

“koyi baat nahi sir, vaise kaisi hain madam ab sir.”

“operation to ho gaya hai..magar abhi unko ICU mein rakha gaya hai. abhi unhe hosh nahi aaya hai. doctor kah raha tha ki shaayad subah tak hosh aa jaayega. Tum ab padmini ke ghar jaao. Baad mein dekhenge ki kya karna hai. aur haan bahut jyada satark rahna hoga tumhe in dino.”

“ok sir.”

Raj sharma ne sabhi constables ko pahle thaane chod diya aur phir padmini ke ghar ki taraf chal diya.

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Kramashah..........................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:46

बात एक रात की--89

गतान्क से आगे.................

शाम के वक्त मोहित पूजा के कॉलेज के बाहर खड़ा उसका वेट कर रहा था. कॉलेज में कोई फंक्षन चल रहा था इसलिए पूजा देर तक कॉलेज में थी. वो बाहर आई तो मोहित झूम उठा उसे देखते ही.

“बहुत प्यारी लग रही हो पूजा…क्यों इतने सितम ढा रही हो मुझ पर.”

“अच्छा…झुटे कही के. सुबह भी तुम यही सब कह रहे थे.”

“अब क्या करूँ तुम्हे देखते ही मुँह से तुम्हारे लिए प्रसंसा खुद-ब-खुद निकल जाती है.” मोहित ने कहा.

“मोहित मन कर रहा था कि कही बैठ कर बाते करते पर लेट हो गयी हूँ.” पूजा ने कहा.

“आओ बैठ जाओ, प्यार के कुछ मीठे पल तो हम निकाल ही लेंगे.” मोहित ने कहा.

पूजा हंसते हुए बैठ गयी मोहित की बाइक पर और वो उसके बैठते ही बाइक को उड़ा ले चला.

“पूजा एक किस हो जाए आज. देखो कितनी हसीन शाम है. ऐसा मोका रोज नही आता.”

“मैं बाते करना चाहती थी और तुम्हे किस की पड़ी है. ये बताओ हमारा क्या होगा. कब बात करोगे बापू से.”

“तुम कहती हो तो आज ही कर लेता हूँ. मैं सोच रहा था कि तुम पहले कॉलेज फीनिस कर लो फिर आराम से शादी करेंगे.”

“तो किस की इतनी जल्दी क्यों पड़ गयी आपको. शादी तक इंतेज़ार नही कर सकते क्या.”

मोहित ने तुरंत बिके सड़क किनारे रोक दी. सड़क एक दम सुनसान थी. बिके से उतार गया वो. पूजा भी उतार गयी.

“क्या हुआ मोहित…इस सुनसान सड़क पर बाइक क्यों रोक दी.” पूजा ने पूछा.

मोहित ने बिना कुछ कहे पूजा के चेहरे को जाकड़ लिया और अपने होन्ट टिका दिए उसके होंटो पर. पूरे 2 मिनिट बाद छोड़ा उसने पूजा के होंटो को.

“शादी तक इंतेज़ार नही कर सकता. किस तो एक प्रेमी का फंडमेंटल राइट है. ये तुम मुझसे नही छीन सकती.”

“फंडमेंटल राइट के साथ फंडमेंटल ड्यूटी भी याद रखना.मुझे कभी अकेला मत छोड़ देना..जी नही पाउन्गि. बहुत प्यार करती हूँ तुम्हे.”

“जानता हूँ…बेफिकर रहो तुम. तुम्हे तो मैं पॅल्को पर बैठा कर रखूँगा.”

“हहेहहे…तुम्हारी पॅल्को पर कैसे बैठूँगी…वहाँ इतनी जगह नही है.”

“ठीक है कही और बैठ जाना, वाहा जगह बहुत है…मगर बदले में कुछ काम भी करना होगा तुम्हे.”

“कैसा काम, और ये कौन सी जगह की बात हो रही है ..” पूजा ने कहा

“बस मेरे उपर बैठ कर उछालती रहना तुम, ऐसी जगह है ..” मोहित ने कहा.

“जनाब चलिएगा कि नही या फिर सुहाने खवाब ही देखते रहेंगे इस सुनसान सड़क पर.” पूजा ने कहा.

“ओह हां सॉरी…चलते हैं. मैं तो बस अपनी पूजा की पप्पी लेने के लिए रुका था.”

“खबरदार जो दुबारा पप्पी की यू सड़क पर रोक कर. मुझे डर लगता है.”

“ठीक है आगे से बाइक पर चलते चलते करूँगा… …”

“वो कैसे मुमकिन होगा …”

“सब कुछ मुमकिन है तुम बस पप्पी देने वाली बनो.”

“नही मिलेगी अब…दुबारा मत माँगना”

“अफ अब तो दुबारा फिर लेनी पड़ेगी. तुम्हारी पप्पी लेने में बहुत मज़ा आता है.”

तभी अचानक एक ब्लॅक स्कॉर्पियो निकली उनके बाजू से.

“पूजा जल्दी बैठो…इस ब्लॅक स्कॉर्पियो का पीछा करना है.”

“क्या बात है..कौन है इस ब्लॅक स्कॉर्पियो में.”

“ब्लॅक स्कॉर्पियो में ही घूमता है साइको…आओ देखते हैं ये ब्लॅक स्कॉर्पियो कहाँ जा रही है.”

“मोहित मुझे डर लग रहा है, रात होने वाली है. घर पर मेरा इंतेज़ार हो रहा होगा..”

“पूजा अगर मैं तुम्हे ऑटो में बैठा दू तो क्या तुम चली जाओगी…मुझे इस कार के पीछे जाना होगा, क्या पता वो साइको इसी में हो.”

“ठीक है तुम मुझे किसी ऑटो में बैठा दो. मैं चली जाउन्गि.”

मोहित ने कुछ दूरी पर एक ऑटो रोक कर पूजा को उसमे बैठा दिया और खुद पूरी स्पीड से बाइक दौड़ा कर उस ब्लॅक स्कॉर्पियो के पीछे लगा दी.

………………………………………………………………………………

…….

राज शर्मा जब वापिस पद्‍मिनी के घर पहुँचा तो पद्‍मिनी अपने रूम की खिड़की

में ही खड़ी थी और बाहर झाँक रही थी. राज शर्मा को देखते ही उसने परदा गिरा दिया.

“ये लो हो गया इनका नाटक शुरू. समझ गया हूँ मैं आपको. दिमाग़ खराब था मेरा जो आपसे प्यार कर बैठा. मुझे देखते ही परदा गिरा दिया…क्या इतनी बुरी शकल है मेरी. बस अब बहुत हो गया आपसे कोई बात नही करूँगा मैं.” राज शर्मा चुपचाप आँखे बंद करके जीप में बैठ गया.

राज शर्मा ने ध्यान ही नही दिया की पद्‍मिनी घर का दरवाजा खोल कर खड़ी है.उसे देखते ही वो नीचे आ गयी थी. “कहा तो था कि शाम को बात करेंगे. चुपचाप आँखे बंद करके बैठ गया है. ये समझता क्या है खुद को. मुझे कोई बात नही करनी इस से.” दरवाजा पटक दिया ज़ोर से पद्‍मिनी ने और कुण्डी लगा ली.

दरवाजे की आवाज़ से राज शर्मा ने तुरंत आँख खोल कर देखा, “ये कैसी आवाज़ थी” राज शर्मा ने गन्मन से पूछा.

“दरवाजा बंद होने की आवाज़ थी सर. शायद घर के अंदर से आई थी.”

“ह्म्म…ठीक है तुम सतर्क रहो.” राज शर्मा ने कहा.

................................

मोहित ब्लॅक स्कॉर्पियो से कुछ दूरी बनाए हुआ था. मगर उसने गाड़ी का नंबर देख लिया, “कार तो ये गौरव मेहरा की है. चलो देखता हूँ आज कहाँ जा रहा है ये.”

कार एक घर के आगे आकर रुकी. कार में से गौरव मेहरा उतरा और घर में घुस गया. मोहित ने कुछ दूरी पर बाइक रोक दी और अपना कॅमरा लेकर दबे पाँव घर की तरफ बढ़ा. अंधेरा घिर आया था इसलिए मोहित का काम थोड़ा आसान हो गया था.

मोहित घर की खिड़की के पास आकर खड़ा हो गया. खिड़की में पर्दे टँगे थे. मोहित ने पर्दे को हल्का सा हाथ से हटाया और अंदर झाँक कर देखा. अंदर गौरव एक लड़की के सामने खड़ा था. लड़की देखने में सुंदर लग रही थी.

“स्वेता कितने फोन किए तुम्हे…तुम्हे मेरे साथ काम करना है या नही.”

“काम करना है सर…मेरी तबीयत खराब थी कुछ दिन से.”

“तो साली इनफॉर्म क्या तेरा बाप करेगा. इतनी सॅलरी देता हूँ तुझे. ये घर भी खरीद कर दिया तुझे..फिर भी मेरी कदर नही है तुम्हे.”

“सर आपने जो कुछ मेरे साथ किया अपनी बीवी के सामने वो ठीक नही था. मुझे रंडी और पता नही क्या-क्या कहा आपने.”

“मेरा मूड ठीक नही था उस दिन. वो साला दो कौड़ी का पोलीस वाला मुझे घर से घसीट कर ले गया था. दिमाग़ खराब हो गया था मेरा.”

“सर आपको मैने अपना सब कुछ दिया…और आप ऐसा बर्ताव करते हैं मेरे साथ.”

“चल ठीक है…आगे से ध्यान रखूँगा. आज बहुत मन कर रहा है तेरी लेने का…चल मस्ती करते हैं.”

“वो तो ठीक है पर आप प्लीज़ मुझे दुबारा रंडी मत कहना.”

“अरे ठीक है…बोला ना गुस्से में था उस दिन. चल लंड निकाल बाहर और चूसना शुरू कर. जिस तरह से तू चूस्ति है लंड मेरा आज तक किसी ने नही चूसा. तभी अपनी बीवी को दिखा रहा था हहहे.”

“पर क्या बीती होगी उन पर. आपको ऐसा नही करना चाहिए था.” स्वेता ने कहा.

“चल छोड़ ना ये सब जल्दी से लंड निकाल कर डाल ले इन खूबसूरत होंटो के बीच.”

स्वेता ने गौरव की ज़िप खोल कर उसके लिंग को बाहर निकाला और प्यार से चूसने लगी.

“गुड वेरी गुड..इसी काम की सॅलरी देता हूँ मैं तुम्हे…हाहहाहा.”

स्वेता चुपचाप सकिंग करती रही. मोहित ने चुपचाप चतुराई से उनकी फोटो ले ली. “ये फोटो दीपिका के काम आएगी.”

स्वेता का मुँह दुखने लगा सकिंग करते करते पर गौरव फिर भी चूस्वाता रहा.

“सर कुछ और नही करेंगे क्या…मुँह दुखने लगा है.”

“ऐसा करता हूँ आज तेरी गांद लेता हूँ. तेरी अब तक गांद नही ली ना मैने.”

“सर नही…वो रहने दीजिए.”

“क्यों रहने दूं..चल कपड़े उतार और झुक जा…इस बार बोनस दूँगा तुझे, तू गांद में लेकर तो देख. हाहाहा”

“सर प्लीज़..”

“देख अभी मेरा मूड ठीक है. मूड खराब हो गया तो ज़बरदस्ती लूँगा…आराम से कपड़े उतार कर झुक जा मेरे आगे.” गौरव ने कठोरता से कहा.

स्वेता ने अपने कपड़े उतारे और गौरव के आगे झुक गयी.

“गुड गर्ल तेरा बोनस पक्का. चल अब अपनी गांद फैला दोनो हाथो से और मेरे लंड के लिए रास्ता बना.” गौरव ने कहा.

स्वेता ने अपने नितंबो को फैला लिया और गौरव ने अपने लिंग पर थूक लगा कर स्वेता की आस होल पर रख दिया. स्वेता की साँसे थम गयी एंट्री की आंटिसिपेशन में.

मोहित सब कुछ रेकॉर्ड कर रहा था. पिक्चर भी ले रहा था और वीडियो भी बना रहा था.

“ऊऊहह सर नो….”

“बोनस मिलेगा स्वेता ले ले पूरा हाहाहा.” गौरव हँसने लगा.

“सर मैने कभी नही किया अनल बहुत दर्द हो रहा है.”

“मैने भी बहुत कम किया है…पर तेरी गांद लेने की इच्छा थी बहुत दिनो से आज पूरी हो रही है. बार बार भूल जाता था कि ये काम भी करना है.”

“आआहह…नूऊऊऊ सर धीरे….” स्वेता कराह उठी. गौरव ने एक दम से पूरा लंड डाल दिया था उसकी गांद में.

“हहहे अब तो गया पूरा…अब धीरे से क्या फ़ायडा स्वेता तुम ले चुकी हो पूरा अब मज़े करो.”

“थॅंक गॉड मुझे लगा था कि अभी पूरा जाना बाकी है.” स्वेता ने गहरी साँस ले कर कहा.

“वाह भाई वाह क्या बात है मिस्टर गौरव मेहरा. अपने एंप्लायीस की खूब जम कर लेते हो तुम…गुड.”

गौरव मेहरा और स्वेता दोनो ही चोंक गये. दोनो ने पीछे मूड कर देखा. उनके पीछे एक नकाब पोश खड़ा था, हाथ में बंदूक लिए. मोहित नकाब पोश को देखते ही खिड़की से हट गया. मगर बाद में चुपचाप झाँक कर देखने लगा.

“कौन हो तुम और यहा कैसे आए…” गौरव ने पूछा

“पहले तुम जैसे हो वैसे ही रहो हिलना मत. लंड मत निकालना इसकी गांद से. क्या सीन बनाया है तुम दोनो ने वाह. अच्छी पैंटिंग बनेगी.”

“साले तेरा भेजा उड़ा दूँगा मैं अभी…बता कौन है तू.”

“मेरे पूरे शहर में चर्चे हैं और तुम मुझे नही जानते. लोग मुझे साइको कह कर बदनाम कर रहे हैं जबकि मैं एक आर्टिस्ट हूँ जो कि रेर पैंटिंग बनाता है. अब देखो ने कितने रेर पोज़ में खड़े हो तुम दोनो. गांद में लंड डाल रखा है तुमने इस बेचारी के. अब अगर गांद मारते मारते इसकी पीठ में चाकू मारते जाओ तो बहुत ही अनमोल आर्ट बन जाएगी. मैने एरॉटिक पैंटिंग पहले भी बनाई है मगर ये तो बहुत ही अद्भुत पैटिंग कहलाएगी.”

“स..सर ये क्या कह रहा है.” स्वेता डर गयी.

“वही कह रहा हूँ जो कि तुम्हे सुन रहा है मेरी जान. गांद में लंड पीलवा रही हो अब ज़रा चाकू भी घुस्वाओ अपनी पीठ में और ज़्यादा मज़ा आएगा तुम्हे हाहहाहा.” साइको क्रूरता से हस्ने लगा.

क्रमशः..........................

BAAT EK RAAT KI--89

gataank se aage.................

Shaam ke vakt mohit puja ke college ke baahar khada uska wait kar raha tha. college mein koyi function chal raha tha isliye puja der tak college mein thi. vo baahar aayi to mohit jhum utha use dekhte hi.

“bahut pyari lag rahi ho puja…kyon itne shitam dha rahi ho mujh par.”

“achcha…jhute kahi ke. Subah bhi tum yahi sab kah rahe the.”

“ab kya karun tumhe dekhte hi munh se tumhaare liye parshansa khud-b-khud nikal jaati hai.” mohit ne kaha.

“mohit man kar raha tha ki kahi baith kar baate karte par late ho gayi hun.” puja ne kaha.

“aao baith jaao, pyar ke kuch meethe pal to hum nikaal hi lenge.” Mohit ne kaha.

Puja hanste hue baith gayi mohit ki bike par aur vo uske baithte hi bike ko uda le chala.

“puja ek kiss ho jaaye aaj. Dekho kitni hasin shaam hai. aisa moka roj nahi aata.”

“main baate karna chaahti thi aur tumhe kiss ki padi hai. ye bataao hamaara kya hoga. Kab baat karoge bapu se.”

“tum kahti ho to aaj hi kar leta hun. main soch raha tha ki tum pahle college finis kar lo phir araam se shaadi karenge.”

“to kiss ki itni jaldi kyon pad gayi aapko. Shaadi tak intezaar nahi kar sakte kya.”

Mohit ne turant bike sadak kinaare rok di. Sadak ek dam sunsaan thi. bike se utar gaya vo. Puja bhi utar gayi.

“kya hua mohit…is sunsaan sadak par bike kyon rok di.” Puja ne pucha.

Mohit ne bina kuch kahe puja ke chehre ko jakad liya aur apne hont tika diye uske honto par. Pure 2 minute baad choda usne puja ke honto ko.

“shaadi tak intezaar nahi kar sakta. Kiss to ek premi ka fundamental right hai. ye tum mujhse nahi cheen sakti.”

“fundamental right ke saath fundamental duty bhi yaad rakhna.mujhe kabhi akela mat chod dena..jee nahi paaungi. Bahut pyar karti hun tumhe.”

“jaanta hun…befikar raho tum. Tumhe to main palko par baitha kar rakhunga.”

“hehehehe…tumhaari palko par kaise baithungi…vaha itni jagah nahi hai.”

“theek hai kahi aur baith jaana, vaha jagah bahut hai…magar badle mein kuch kaam bhi karna hoga tumhe.”

“kaisa kaam, aur ye kaun si jagah ki baat ho rahi hai ..” puja ne kaha

“bas mere upar baith kar uchalti rahna tum, aisi jagah hai ..” mohit ne kaha.

“janaab chaliyega ki nahi ya phir suhaane khawaab hi dekhte rahenge is sunsaan sadak par.” Puja ne kaha.

“oh haan sorry…chalte hain. Main to bas apni puja ki pappi lene ke liye ruka tha.”

“khabardaar jo dubaara pappi ki yu sadak par rok kar. Mujhe dar lagta hai.”

“theek hai aage se bike par chalte chalte karunga… …”

“vo kaise mumkin hoga …”

“sab kuch mumkin hai tum bas pappi dene wali bano.”

“nahi milegi ab…dubaara mat maangna”

“uff ab to dubaara phir leni padegi. Tumhaari pappi lene mein bahut maja aata hai.”

Tabhi achaanak ek black scorpio nikal unke baju se.

“puja jaldi baitho…is black scorpio ka peecha karna hai.”

“kya baat hai..kaun hai is black scorpio mein.”

“black scorpio mein hi ghumta hai psycho…aao dekhte hain ye black scorpio kaha ja rahi hai.”

“mohit mujhe dar lag raha hai, raat hone wali hai. ghar par mera intezaar ho raha hoga..”

“puja agar main tumhe auto mein baitha du to kya tum chali jaaogi…mujhe is car ke peeche jaana hoga, kya pata vo psycho isi mein ho.”

“theek hai tum mujhe kisi auto mein baitha do. Main chali jaaungi.”

Mohit ne kuch duri par ek auto rok kar puja ko usme baitha diya aur khud puri speed se bike dauda kar us black scorpio ke peeche laga di.

…………………………………………………………………………………….

Raj sharma jab vaapis padmini ke ghar pahuncha to padmini apne room ki khidki

Mein hi khadi thi aur baahar jhaank rahi thi. Raj sharma ko dekhte hi usne parda gira diya.

“ye lo ho gaya inka naatak shuru. Samajh gaya hun main aapko. Deemag khraab tha mera jo aapse pyar kar baitha. Mujhe dekhte hi parda gira diya…kya itni buri shakal hai meri. Bas ab bahut ho gaya aapse koyi baat nahi karunga main.” Raj sharma chupchaap aankhe band karke jeep mein baith gaya.

Raj sharma ne dhyaan hi nahi diya ki padmini ghar ka darvaaja khol kar khadi hai.use dekhte hi vo neeche aa gayi thi. “kaha to tha ki shaam ko baat karenge. Chupchaap aankhe band karke baith gaya hai. ye samajhta kya hai khud ko. Mujhe koyi baat nahi karni is se.” darvaaja patak diya jor se padmini ne aur kundi laga li.

Darvaaje ki awaaj se Raj sharma ne turant aankh khol kar dekha, “ye kaisi awaaj thi” Raj sharma ne gunman se pucha.

“darvaaja band hone ki awaaj thi sir. Shaayad ghar ke ander se aayi thi.”

“hmm…theek hai tum satark raho.” Raj sharma ne kaha.

Mohit black scorpio se kuch duri banaaye hua tha. magar usne gaadi ka number dekh liya, “car to ye gaurav mehra ki hai. chalo dekhta hun aaj kaha ja raha hai ye.”

Car ek ghar ke aage aakar ruki. Car mein se gaurav mehra utra aur ghar mein ghus gaya. Mohit ne kuch duri par bike rok di aur apna camera lekar dabe paanv ghar ki taraf badha. Andhera ghir aaya tha isliye mohit ka kaam thoda aasaan ho gaya tha.

Mohit ghar ki khidki ke paas aakar khada ho gaya. khidki mein parde tange the. Mohit ne parde ko halka sa haath se hataaya aur ander jhaank kar dekha. Ander gaurav ek ladki ke saamne khada tha. ladki dekhne mein sundar lag rahi thi.

“sweta kitne phone kiye tumhe…tumhe mere saath kaam karna hai ya nahi.”

“kaam karna hai sir…meri tabiyat khraab thi kuch din se.”

“to saali inform kya tera baap karega. Itni salary deta hun tujhe. Ye ghar bhi kharid kar diya tujhe..phir bhi meri kadar nahi hai tumhe.”

“sir aapne jo kuch mere saath kiya apni biwi ke saamne vo theek nahi tha. mujhe randi aur pata nahi kya-kya kaha aapne.”

“mera mood theek nahi tha us din. Vo saala do kaudi ka police wala mujhe ghar se ghasit kar le gaya tha. deemag khraab ho gaya tha mera.”

“sir aapko maine apna sab kuch diya…aur aap aisa bartaav karte hain mere saath.”

“chal theek hai…aage se dhyaan rakhunga. Aaj bahut man kar raha hai teri lene ka…chal masti karte hain.”

“vo to theek hai par aap please mujhe dubara randi mat kahna.”

“arey theek hai…bola na gusse mein tha us din. Chal lund nikaal baahar aur choosna shuru kar. Jis tarah se tu choosti hai lund mera aaj tak kisi ne nahi choosa. Tabhi apni biwi ko dekha raha tha hehehe.”

“par kya beeti hogi un par. aapko aisa nahi karna chaahiye tha.” sweta ne kaha.

“chal chod na ye sab jaldi se lund nikaal kar daal le in khubsurat honto ke beech.”

Sweta ne gaurav ki zip khol kar uske ling ko baahar nikaala aur pyar se choosne lagi.

“good very good..isi kaam ki salary deta hun main tumhe…hahahaha.”

Sweta chupchaap sucking karti rahi. Mohit ne chupchaap chaturaayi se unki phoro le li. “ye photo deepika ke kaam aayegi.”

Sweta ka munh dukhne laga sucking karte karte par gaurav phir bhi choosvaata raha.

“sir kuch aur nahi karenge kya…munh dukhne laga hai.”

“aisa karta hun aaj teri gaand leta hun. Teri ab tak gaand mahi li na maine.”

“sir nahi…vo rahne dijiye.”

“kyon rahne dun..chal kapde utaar aur jhuk ja…is baar bonus dunga tujhe, tu gaand mein lekar to dekh. Hahaha”

“sir please..”

“dekh abhi mera mood theek hai. mood khraab ho gaya tp jabardasti lunga…araam se kapde utaar kar jhuk ja mere aage.” Gaurav ne kathorta se kaha.

Sweta ne apne kapde utaare aur gaurav ke aage jhuk gayi.

“good girl tera bonus pakka. Chal ab apni gaand faila dono haatho se aur mere lund ke liye raasta bana.” Gaurav ne kaha.

Sweta ne apne nitambo ko faila liya aur gaurav ne apne ling par thuk laga kar sweta ki ass hole par rakh diya. Sweta ki saanse tham gayi entry ki anticipation mein.

Mohit sab kuch record kar raha tha. picture bhi le raha tha aur video bhi bana raha tha.

“oooohhhhhh sir no….”

“bonus milega sweta le le pura hahaha.” Gaurav hansne laga.

“sir maine kabhi nahi kiya anal bahut dard ho raha hai.”

“maine bhi bahut kam kiya hai…par teri gaand lene ki itcha thi bahut dino se aaj puri ho rahi hai. baar baar bhool jaata tha ki ye kaam bhi karna hai.”

“aaaahhhhhh…noooooooo sir dheere….” Sweta karaah uthi. Gaurav ne ek dam se pura lund daal diya tha uski gaand mein.

“hehehe ab to gaya pura…ab dheere se kya faayda sweta tum le chuki ho pura ab maje karo.”

“thank god mujhe laga tha ki abhi pura jaana baaki hai.” sweta ne gahri saans le kar kaha.

“waah bhai waah kya baat hai mr gaurav mehra. Apne employees ki khub jam kar lete ho tum…good.”

Gaurav mehra aur sweta dono hi chonk gaye. dono ne peeche mud kar dekha. Unke peeche ek nakaab posh khada tha, haath mein bandook liye. mohit nakaab posh ko dekhte hi khidki se hat gaya. magar baad mein chupchaap jhaank kar dekhne laga.

“kaun ho tum aur yaha kaise aaye…” gaurav ne pucha

“pahle tum jaise ho vaise hi raho hilna mat. Lund mat nikaalna iski gaand se. kya scene banaaya hai tum dono ne waah. Atchi painting banegi.”

“saale tera bheja uda dunga main abhi…bata kaun hai tu.”

“mere pure sahar mein charche hain aur tum mujhe nahi jaante. Log mujhe psycho kah kar badnaam kar rahe hain jabki main ek artist hun jo ki rare painting banaata hai. ab dekho ne kitne rare pose mein khade ho tum dono. Gaand mein lund daal rakha hai tumne is bechaari ke. Ab agar gaand maarte maarte iski peeth mein chaaku maarte jaao to bahut hi anmol art ban jaayegi. Maine erotic painting pahle bhi banaayi hai magar ye to bahut hi adbhut paiting kahlaayegi.”

“s..sir ye kya kah raha hai.” sweta dar gayi.

“vahi kah raha hun jo ki tumhe sun raha hai meri jaan. Gaand mein lund peelva rahi ho ab jara chaaku bhi ghusvaao apni peeth mein aur jyada maja aayega tumhe hahahaha.” Psycho krurata se hasne laga.

Kramashah..........................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:47

बात एक रात की--90

गतान्क से आगे.................

“कितना पैसा चाहिए तुम्हे बोलो.” गौरव ने कहा.

“पैसे से कही ज़्यादा अनमोल पैंटिंग बनेगी तुम दोनो की. मेरी पैंटिंग के आगे तुम्हारा पैसा कुछ नही..ये लो चाकू पाकड़ो और हर एक धक्के के साथ एक चाकू मारो इसकी पीठ में. अगर तुमने इसे नही मारा तो तुम्हारा भेजा उड़ा दूँगा.” साइको ने चाकू थमा दिया गौरव को.

“सर…प्लीज़ मुझे मत मारना.” स्वेता गिड़गिडाई.

“और हां धक्के के बिना चाकू मारा तो भी तुम्हारा भेजा उड़ा दूँगा. इसे भी मारो और इसकी गांद भी मारो…दोनो एक साथ मारो हाहहहाहा.” साइको हँसने लगा.

“सर इसकी बात मत मान-ना प्लीज़.”

“चुप कर साली रंडी. मेरे लिए क्या तू अपनी जान नही दे सकती.” गौरव ने कहा.

मोहित ने खिड़की के पास से हट कर तुरंत रोहित को फोन मिलाया और पूरा वाक़या सुना दिया.

“मोहित मैं अभी हॉस्पिटल में हूँ…मगर पोलीस पार्टी अभी तुरंत भेज रहा हूँ वहाँ. तुम तब तक साइको पर नज़र रखो.” रोहित ने कहा.

मोहित वापिस खिड़की में आया तो उसने देखा कि गौरव ने चाकू हवा में उठा रखा है. इस से पहले की मोहित कुछ सोच पाता कुछ करने के बारे में गौरव ने खुद को आगे धकैल्ते हुए चाकू गाढ दिया स्वेता की पीठ में. कमरे में चीन्ख गूँज उठी स्वेता की.

“गुड वेरी गुड…एक धक्का और मारो और एक चाकू और मारो हाहहाहा.”

गौरव ने चाकू उपर उठाया ही था दुबारा मारने के लिए कि साइको ने फुर्ती से आगे बढ़ कर गला काट दिया गौरव का. वो तुरंत स्वेता को साथ लेकर ज़मीन पर गिर गया.

“साला कमीना कही का, बेचारी की गांद मारते-मारते जान ले ली. शरम आनी चाहिए तुम्हे. बट डॉन’ट वरी बोथ ऑफ यू आर नाउ प्राउड विक्टिम ऑफ माइ आर्ट. पूरा सीन रेकॉर्ड कर लिया है मैने घर जाकर इतमीनान से पैंटिंग बनाउन्गा तुम्हारी एरॉटिक मौत की हाहहाहा.”

“ये पोलीस कहाँ रह गयी…हमेशा लेट आती है. मेरे पास कोई हथियार भी नही है…क्या करूँ..कुछ नही किया तो ये फिर से भाग जाएगा आज.” मोहित ने मन ही मन कहा.

साइको वहाँ से अपना समान उठा कर चल दिया.

“ये ज़रूर घर के पीछे से घुसा होगा. कुछ करना होगा मुझे.” मोहित अपनी इन्वेस्टिगेशन का समान वही छोड़ कर घर के पीछे की तरफ भागा. साइको तब तक घर से निकल चुका था और घर के पीछे खड़ी अपनी कार की तरफ बढ़ रहा था. वो कार ब्लॅक स्कॉर्पियो नही थी.

“रुक जाओ वरना गोली मार दूँगा…हाथ उपर करो और ज़मीन पर बैठ जाओ.” मोहित ने पीछे से पोइलीसीए रोब में आवाज़ दी.

साइको ने तुरंत पीछे मूड कर देखा और हंसते हुए बोला, “मैं कुत्तो के भोंकने से नही रुकता हूँ. बंदूक तो ले आते कही से पहले ये सब भोंकने से पहले.” साइको ने कहा.

घर के पीछे अंधेरा था इसलिए साइको मोहित को पहचान नही पाया.

“पोलीस ने घेर लिया है तुम्हे चारो तरफ से तुम बच कर नही जा सकते यहाँ से. हथियार गिरा दो चुपचाप.”

“पोलीस की तो मैने गांद मार ली है बेटा…पोलीस की बात मत कर.” साइको ने बंदूक तान दी मोहित की तरफ.

मोहित साइको को बातों में उलझाने की कोशिस कर रहा था. मगर साइको इस जाल में फँसने वाला नही था. उसने मोहित के सर की तरफ फाइयर किया. मगर मोहित तुरंत भाग कर दीवार के किनारे छुप गया.

“अपना नाम बता देते तो दुबारा मिलना आसान होता. तुम्हारी भी पैंटिंग बना देता…हाहहाहा” साइको ने कहा.

साइको फ़ौरन अपनी कार की तरफ बढ़ा. मोहित ने एक मोटा सा पत्थर उठाया और उसके सर पर निसाना लगा कर ज़ोर से मारा. पत्थर सीधा खोपड़ी में लगा साइको की. खून बहने लगा उसके सर से.

“साले तेरी इतनी हिम्मत.” बिना सोचे समझे गोलियाँ बरसा दी साइको ने और अपनी कार में बैठ कर निकल दिया वहाँ से. शायद उसे डर था कि कही पोलीस ना आ जाए.

मोहित भाग कर वापिस आया घर के आगे. अपना सारा समान उठाया और बाइक लेकर निकल पड़ा, “चोदुन्गा नही तुझे आज मैं.” मगर साइको कि कार उसे कही नज़र नही आई.

“कहाँ गया हराम्खोर…कार का नंबर भी नही देख पाया अंधेरे में.” मोहित ने निराशा में कहा.

………………………………………………………………………………

………………………..

रात के 10 बज रहे थे. राज शर्मा ने कयि बार पद्‍मिनी की खिड़की की तरफ देखा मगर वाहा हर बार परदा ही टंगा मिला.

“उनको मुझसे प्यार होता तो खड़ी रहती खिड़की पर. मेरे लिए क्या इतना भी नही कर सकती वो” राज शर्मा ये सब सोच ही रहा था कि खिड़की का परदा हटा और पद्‍मिनी ने चुपके से राज शर्मा की तरफ झाँक कर देखा. राज शर्मा पद्‍मिनी को देखते ही तुरंत जीप से बाहर आ गया. मगर पद्‍मिनी ने तुरंत परदा गिरा दिया राज शर्मा को जीप से बाहर आते देख. उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा था.

“हद होती है यार किसी बात की…फिर से परदा गिरा दिया. आज आर-पार की बात हो जाए बस.” राज शर्मा घर के दरवाजे की तरफ बढ़ा और बेल बजाई. घर में कामवाली नही रुकी थी इसलिए दरवाजा पद्‍मिनी को ही खोलना था.

“क्या चाहता है अब ये, पहले तो चुपचाप आ कर आँखे बंद कर के बैठ गया था जीप में अब बेल क्यों बजा रहा है.” पद्‍मिनी तुरंत नही आई दरवाजा खोलने. कोई 5 मिनिट बाद आई वो. उसने दरवाजा खोला तो पाया कि राज शर्मा वापिस अपनी जीप की तरफ जा रहा था.

“क्या है…बेल क्यों बजा रहे थे.” पद्‍मिनी ने कहा.

राज शर्मा वापिस आया उसके पास और बोला, “क्या प्राब्लम है आपकी. मेरी शकल क्या इतनी बुरी है कि मुझे देखते ही परदा गिरा देती हैं आप.”

“तो क्या मैं तुम्हारे लिए खिड़की पर ही खड़ी रहूंगी…मुझे क्या कुछ और काम नही है.”

“प्यार करता हूँ आपसे कोई मज़ाक नही मगर आपने मेरे प्यार को मज़ाक समझ कर मुझे बर्बाद करने की ठान रखी है.”

“मैं ऐसा कुछ नही कर रही हूँ. तुम बैठ गये थे वापिस आ कर चुपचाप जीप में.”

“हां तो और क्या करता…मुझे देखते ही परदा गिरा दिया था आपने.”

“मैं तुम्हारे लिए भाग कर नीचे आई थी पर तुम्हे क्या…जाओ तुम यहा से..मुझे तुमसे बात नही करनी है.” पद्‍मिनी रोते हुए बोली और दरवाजा पटक दिया वापिस और कुण्डी लगा ली.

राज शर्मा हैरान रह गया ये सब सुन कर. “अरे हां दरवाजे की आवाज़ आई तो थी. उफ्फ मैं भी कितना बेवकूफ़ हूँ. पद्‍मिनी जी दरवाजा खोलिए प्लीज़…” राज शर्मा दरवाजा पीटने लगा.

पद्‍मिनी ने दरवाजा खोला और सुबक्ते हुए बोली, “क्या है अब, क्यों मुझे परेशान कर रहे हो.”

“बस एक सवाल का जवाब दे दीजिए फिर कभी परेशान नही करूँगा…क्या आप मुझे प्यार करती हैं.”

“तुम्हे क्या लगता है?”

“मुझे तो लगता है कि आप कोई खेल, खेल रही हैं मेरे साथ”

“प्यार करती हूँ मैं तुमसे कोई खेल नही और मुझे पता है कि खेल तुम खेलोगे मेरे साथ.” पद्‍मिनी ने कहा और दरवाजा वापिस बंद कर दिया.

“ये बहुत अच्छा किया आपने. प्यार का इज़हार किया और दरवाजा बंद कर दिया. ये खेल नही है तो और क्या है.”

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साइको 42 इंच टीवी पर गौरव मेहरा और स्वेता गुप्ता के एरॉटिक मर्डर की वीडियो देख रहा था.

“गौरव मेहरा नाम है मेरा…यही बोला था ना तू चिल्ला कर मुझे. एक तो पीछे से मेरी कार को ठोक दिया उपर से रोब झाड़ने लगा. तेरे जैसे एलीट वर्म की ऐसी ही मौत होनी चाहिए थी. साला गांद मार रहा था अपनी एंप्लायी की. गांद मारते-मारते खुद अपनी जान गँवा बैठा हाहहहाहा. बहुत सुंदर एरॉटिक मर्डर की पैंटिंग बनेगी. मिस्टर गौरव मेहरा चियर्स यू आर दा प्राउड विक्टिम ऑफ माइ आर्ट. तुम्हे मेरे उपर चिल्लाने की सज़ा भी मिल गयी और तुम मेरी आर्ट का हिस्सा भी बन गये…मगर…”

अचानक साइको गुस्से से तिलमिला उठा, “मगर ये कौन था जिसने मेरा सर फोड़ दिया. इसकी तो बहुत ही भयंकर पैंटिंग बनाउन्गा मैं. पता करना होगा इसके बारे में. अंधेरे में साले की शकल नही दीखी वरना पाताल से भी ढूंड निकालता हरामी को. कोई बात नही जल्दी पता लग जाएगा उसका और फिर हाहहहाहा.”

साइको कॅन्वस पर गौरव मेहरा और स्वेता की एरॉटिक मौत की पैंटिंग बनाने में व्यस्त हो गया.

“धीरे-धीरे बनाउन्गा ये पैंटिंग, ऐसी एरॉटिक मौत किसी को नही दी मैने हाहहाहा.”

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राज शर्मा दरवाजा पीट-ता रहा मगर पद्‍मिनी ने दरवाजा नही खोला. वो कुण्डी बंद करके दरवाजे के सहारे ही खड़ी थी. उसका दिल बहुत ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था. प्यार का इज़हार जो कर बैठी थी वो. माथे पर पसीने थे उसके. राज शर्मा से नज़रे मिलाना अब मुस्किल था उसके लिए.

“फँसा ही लिया इसने मुझे अपने जाल में. पर मैं वो घिनोना सपना कभी पूरा नही होने दूँगी. प्यार का ये मतलब नही है कि ये मेरे साथ हवस का नंगा नाच खेलेगा.” पद्‍मिनी ने खुद से कहा.

“पद्‍मिनी जी प्लीज़ दरवाजा खोलिए. ये सब ठीक नही है. क्यों सता रही हैं आप मुझे.” राज शर्मा ने कहा.

“देखो तुम्हारे साथ और लोग भी हैं. वो लोग सुन लेंगे तो क्या कहेंगे. क्यों मेरी बदनामी करवाने पर तुले हो.”

“कोई कुछ नही सुन रहा है. आप दरवाजा खोलिए प्लीज़. हमारा बात करना बहुत ज़रूरी है. क्या आप प्यार का इज़हार करके मुझे यू तड़प्ता छोड़ देंगी.”

पद्‍मिनी ने दरवाजा खोला और बोली, “ज़्यादा स्मार्ट बन-ने की कोशिस मत करना मेरे साथ. बाकी लड़कियों के साथ जो किया वो मेरे साथ नही चलेगा. क्या मतलब है तड़प्ता छोड़ देने का. इतनी जल्दी तुम ये सब सोचने लग गये.”

राज शर्मा को कुछ समझ नही आया. वो समझता भी कैसे. उसे पद्‍मिनी के सपने के बारे में कुछ नही पता था.

“आप क्यों नाराज़ हो रही हैं. क्या आपको नही लगता कि हमें शांति से बैठ कर कुछ प्यारी बाते करनी चाहिए. आज बहुत बड़ा दिन है हमारे लिए.”

“हां आख़िर कार तुम कामयाब हो गये. हो गया मुझे तुमसे प्यार. पर इस से ज़्यादा कुछ और मत सोचना.”

“मैं कुछ नही सोच रहा हूँ. मुझे कुछ समझ नही आ रहा कि आप क्या कहना चाहती हैं.”

“मुझे नही पता कि इस प्यार का मतलब क्या है. हां पर प्यार कर बैठी हूँ तुमसे…पता नही क्यों..जबकि मैं तुमसे दूर रहना चाहती थी.”

“क्या आप पछता रही हैं…अगर ऐसा है तो ये प्यार मत कीजिए. आपको किसी उलझन में नही देखना चाहता हूँ मैं.”

“तुम मुझे प्यार क्यों करते हो…क्या बता सकते हो मुझे. झूठ मत बोलना.” पद्‍मिनी ने पूछा.

“पद्‍मिनी जी आपकी तरह मुझे भी नही पता कि इस प्यार का मतलब क्या है. हां बस प्यार हो गया आपसे. क्यों हुआ ये प्यार इसका जवाब मेरे पास नही है. बस इतना जानता हूँ कि आपकी म्रिग्नय्नि सी आँखो में खो गया हूँ मैं.”

“मेरी आँखे क्या म्रिग्नय्नि हैं…” पद्‍मिनी ने पूछा.

“आपको नही पता क्या? …मुझे डुबो दिया म्रिग्नय्नि आँखो में और खुद अंजान बनी बैठी हैं आप.”

“ये फ्लर्ट है या प्यार…”

“आपको क्या लगता है…” राज शर्मा ने हंसते हुए कहा.

“मुझे लगता है कि तुम मेरे साथ कोई खेल, खेल रहे हो.” पद्‍मिनी ने कहा.

“प्यार करते हैं हम आपसे, कोई मज़ाक नही. और हमें कोई खेल, खेलना नही आता. दिल में प्यार रखते हैं आपके लिए…अपना दिल निकाल कर आपके कदमो में रख देंगे.”

ये सुन कर एक मध्यम सी मुस्कान उभर आई पद्‍मिनी के होंटो पर. राज शर्मा वो मुस्कान बस देखता ही रह गया.

“ऐसे क्या देख रहे हो.”

“अगर थप्पड़ नही मारेंगी तो एक बात कहूँ.”

“अब थप्पड़ क्यों मारूँगी तुम्हे…”

“बहुत प्यारी मुस्कान है आपकी. बहुत दिनो बाद आपके होंटो पर ये मुस्कान देखी मैने. हमेशा यू ही मुस्कुराती रहना आप.”

पद्‍मिनी की आँखे टपक गयी ये सुन कर. राज शर्मा ने भी उसके आंशु देख लिए.

“क्या हुआ…क्या मैने कुछ ग़लत कहा. देखिए मेरी बातों में ज़रा सा भी फ्लर्ट नही है. आपको प्यार करता हूँ. कभी झूठी तारीफ़ नही करूँगा…फ्लर्ट झूठा होता है और प्यार सच्चा.”

“मम्मी, पापा मेरी वजह से मारे गये. ये खाली घर खाने को दौड़ता है. हर तरफ उनकी यादें बिखरी पड़ी हैं. बहुत ही दुखी हूँ मैं. ऐसे में भी क्यों मुस्कुरा उठी तुम्हारी बात पर पता नही मुझे…”

“ये तो अच्छी बात है. सब कुछ भूल कर हमें आगे बढ़ना होगा.”

“हमें मतलब?” पद्‍मिनी ने अपने आँसू पोंछते हुए कहा

“क्या इस प्यार में अकेले चलेंगी आप…क्या मुझे हक़ नही कि आपके साथ चलूं कदम से कदम मिला कर.”

क्रमशः..........................

BAAT EK RAAT KI--90

gataank se aage.................

“kitna paisa chaahiye tumhe bolo.” Gaurav ne kaha.

“paise se kahi jyada anmol painting banegi tum dono ki. Meri painting ke aage tumhaara paisa kuch nahi..ye lo chaaku pakdo aur har ek dhakke ke saath ek chaaku maaro iski peeth mein. Agar tumne ise nahi maara to tumhaara bheja uda dunga.” Psycho ne chaaku thama diya gaurav ko.

“sir…please mujhe mat maarna.” sweta gidgidaayi.

“aur haan dhakke ke bina chaaku maara to bhi tumhaara bheja uda dunga. Ise bhi maaro aur iski gaand bhi maaro…dono ek saath maaro hahahahaha.” Psycho hansne laga.

“sir iski baat mat maan-na please.”

“chup kar saali randi. Mere liye kya tu apni jaan nahi de sakti.” Gaurav ne kaha.

Mohit ne khidki ke paas se hat kar turant rohit ko phone milaaya aur pura vaakya suna diya.

“mohit main abhi hospital mein hun…magar police party abhi turant bhej raha hun vaha. Tum tab tak psycho par nazar rakho.” Rohit ne kaha.

Mohit vaapis khidki mein aaya to usne dekha ki gaurav ne chaaku hawa mein utha rakha hai. is se pahle ki mohit kuch soch paata kuch karne ke baare mein gaurav ne khud ko aage dhakailte hue chaaku gaad diya sweta ki peeth mein. Kamre mein cheenkh gunj uthi sweta ki.

“good very good…ek dhakka aur maaro aur ek chaaku aur maaro hahahaha.”

Gaurav ne chaaku upar uthaaya hi tha dubaara maarne ke liye ki psycho ne furti se aage badh kar gala kaat diya gaurav ka. Vo turant sweta ko saath lekar jamin par gir gaya.

“saala kamina kahi ka, bechaari ki gaand maarte-maarte jaan le li. Sharam aani chaahiye tumhe. But don’t worry both of you are now proud victim of my art. Pura scene record kar liya hai maine ghar jaakar itminaan se painting banaaunga tumhari erotic maut ki hahahaha.”

“ye police kaha rah gayi…hamesha late aati hai. mere paas koyi hathiyaar bhi nahi hai…kya karun..kuch nahi kiya to ye phir se bhaag jaayega aaj.” Mohit ne man hi man.

Psycho vaha se apna samaan utha kar chal diya.

“ye jaroor ghar ke peeche se ghusa hoga. Kuch karna hoga mujhe.” Mohit apni investigation ka samaan vahi chod kar ghar ke peeche ki taraf bhaaga. Psycho tab tak ghar se nikal chuka tha aur ghar ke peeche khadi apni car ki taraf badh raha tha. vo car black scorpio nahi thi.

“ruk jaao varna goli maar dunga…haath upar karo aur jamin par baith jaao.” Mohit ne peeche se poiliciye rob mein awaaj di.

Psycho ne turant peeche mud kar dekha aur hanste hue bola, “main kutto ke bhonkne se nahi rukta hun. Bandook to le aate kahi se pahle ye sab bhonkne se pahle.” Psycho ne kaha.

Ghar ke peeche andhera tha isliye psycho mohit ko pahchaan nahi paaya.

“police ne gher liya hai tumhe chaaro taraf se tum bach kar nahi ja sakte yaha se. hathiyaar gira do chupchaap.”

“police ki to maine gaand maar li hai beta…police ki baat mat kar.” Psycho ne bandook taan di mohit ki taraf.

Mohit psycho ko baaton mein uljhane ki koshis kar raha tha. magar psycho is jaal mein phansne wala nahi tha. usne mohit ke sar ki taraf fire kiya. Magar mohit turant bhaag kar deewar ke kinaare chup gaya.

“apna naam bata dete to dubaara milna asaan hota. Tumhaari bhi painting bana deta…hahahaha” Psycho ne kaha.

Psycho fauran apni car ki taraf badha. Mohit ne ek mota sa pathar uthaaya aur uske sar par nisaana laga kar jor se maara. Pathar seedha khopdi mein laga psycho ki. Khun bahne laga uske sar se.

“saale teri itni himmat.” Bina soche samjhe goliyan barsa di psycho ne aur apni car mein baith kar nikal diya vaha se. shaayad use dar tha ki kahi police na aa jaaye.

mohit bhaag kar vaapis aaya ghar ke aage. Apna saara samaan uthaaya aur bike lekar nikal pada, “chodunga nahi tujhe aaj main.” magar psycho ki car use kahi nazar nahi aayi.

“kaha gaya haraamkhor…car ka number bhi nahi dekh paaya andhere mein.” Mohit ne niraasha mein kaha.

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Raat ke 10 baj rahe the. Raj sharma ne kayi baar padmini ki khidki ki taraf dekha magar vaha har baar parda hi tanga mila.

“unko mujhse pyar hota to khadi rahti khidki par. mere liye kya itna bhi nahi kar sakti vo” Raj sharma ye sab soch hi raha tha ki khidki ka parda hata aur padmini ne chupke se Raj sharma ki taraf jhaank kar dekha. Raj sharma padmini ko dekhte hi turant jeep se baahar aa gaya. magar padmini ne turant parda gira diya Raj sharma ko jeep se baahar aate dekh. Uska dil jor-jor se dhadakne laga tha.

“had hoti hai yaar kisi baat ki…phir se parda gira diya. Aaj aar-paar ki baat ho jaaye bas.” Raj sharma ghar ke darvaaje ki taraf badha aur bell bajaayi. Ghar mein kaamwali nahi ruki thi isliye darvaaja padmini ko hi kholna tha.

“kya chaahta hai ab ye, pahle to chupchaap aa kar aankhe band karkle baith gaya tha jeep mein ab bell kyon baja raha hai.” padmini turant nahi aayi darvaaja kholne. Koyi 5 minute baad aayi vo. Usne darvaaja khola to paaya ki Raj sharma vaapis apni jeep ki taraf ja raha tha.

“kya hai…bell kyon baja rahe the.” Padmini ne kaha.

Raj sharma vaapis aaya uske paas aur bola, “kya problem hai aapki. Meri shakal kya itni buri hai ki mujhe dekhte hi parda gira deti hain aap.”

“to kya main tumhaare liye khidki par hi khadi rahungi…mujhe kya kuch aur kaam nahi hai.”

“pyar karta hun aapse koyi majaak nahi magar aapne mere pyar ko majaak samajh kar mujhe barbaad karne ki thaan rakhi hai.”

“main aisa kuch nahi kar rahi hun. Tum baith gaye the vaapis aa kar chupchaap jeep mein.”

“haan to aur kya karta…mujhe dekhte hi parda gira diya tha aapne.”

“main tumhaare liye bhaag kar neeche aayi thi par tumhe kya…jaao tum yaha se..mujhe tumse baat nahi karni hai.” padmini rote hue boli aur darvaaja patak diya vaapis aur kundi laga li.

Raj sharma hairaan rah gaya ye sab sun kar. “arey haan darvaaje ki awaaj aayi to thi. uff main bhi kitna bevkoof hun. Padmini ji darvaaja kholiye please…” Raj sharma darvaaja peetne laga.

Padmini ne darvaaja khola aur shubakte hue boli, “kya hai ab, kyon mujhe pareshan kar rahe ho.”

“bas ek sawaal ka jawaab de dijiye phir kabhi pareshaan nahi karunga…kya aap mujhe pyar karti hain.”

“tumhe kya lagta hai?”

“mujhe to lagta hai ki aap koyi khel, khel rahi hain mere saath”

“pyar karti hun main tumse koyi khel nahi aur mujhe pata hai ki khel tum kheloge mere saath.” Padmini ne kaha aur darvaaja vaapis band kar diya.

“ye bahut achcha kiya aapne. Pyar ka izhaar kiya aur darvaaja band kar diya. Ye khel nahi hai to aur kya hai.”

Psycho 42 inch LCD tv par gaurav mehra aur sweta gupta ke erotic murder ki video dekh raha tha.

“gaurav mehra naam hai mera…yahi bola tha na tu chillaa kar mujhe. Ek to peeche se meri car ko thok diya upar se rob jhaadne laga. Tere jaise elite worm ki aisi hi maut honi chaahiye thi. saala gaand maar raha tha apni employee ki. Gaand maarte-maarte khud apni jaan ganva baitha hahahahaha. Bahut sundar erotic murder ki painting banegi. Mr gaurav mehra cheers you are the proud victim of my art. Tumhe mere upar chillaane ki saja bhi mil gayi aur tum meri art ka hissa bhi ban gaye…magar…”

Achaanak psycho gusse se tilmila utha, “magar ye kaun tha jisne mera sar phod diya. Iski to bahut hi bhayankar painting banaaunga main. pata karna hoga iske baare mein. Andhere mein saale ki shakal nahi deekhi varna paatal se bhi dhund nikaalta haraami ko. koyi baat nahi jaldi pata lag jaayega uska aur phir hahahahaha.”

Psycho canvas par guarav mehra aur sweta ki erotic maut ki painting banaane mein vyast ho gaya.

“dheere-dheere banaaunga ye painting, aisi erotic maut kisi ko nahi di maine hahahaha.”

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Raj sharma darvaaja peet-ta raha magar padmini ne darvaaja nahi khola. Vo kundi band karke darvaaje ke sahaare hi khadi thi. uska dil bahut jor-jor se dhadak raha tha. pyar ka ijhaar jo kar baithi thi vo. Maathe par pasine the uske. Raj sharma se najre milaana ab muskil tha uske liye.

“phansa hi liya isne mujhe apne jaal mein. Par main vo ghinona sapna kabhi pura nahi hone dungi. Pyar ka ye matlab nahi hai ki ye mere saath hawas ka nanga naach khelega.” Padmini ne khud se kaha.

“padmini ji please darvaaja kholiye. Ye sab theek nahi hai. kyon sata rahi hain aap mujhe.” Raj sharma ne kaha.

“dekho tumhaare saath aur log bhi hain. Vo log sun lenge to kya kahenge. Kyon meri badnaami karvaane par tule ho.”

“koyi kuch nahi sun raha hai. aap darvaaja kholiye please. Hamaara baat karna bahut jaroori hai. kya aap pyar ka ijhaar karke mujhe yu tadapta chod dengi.”

Padmini ne darvaaja khola aur boli, “jyada smart ban-ne ki koshis mat karna mere saath. Baaki ladkiyon ke saath jo kiya vo mere saath nahi chalega. Kya matlab hai tadapta chod dene ka. Itni jaldi tum ye sab sochne lag gaye.”

Raj sharma ko kuch samajh nahi aaya. Vo samajhta bhi kaise. Use padmini ke sapne ke baare mein kuch nahi pata tha.

“aap kyon naraaj ho rahi hain. Kya aapko nahi lagta ki hamein shaanti se baith kar kuch pyari baate karni chaahiye. Aaj bahut bada din hai hamaare liye.”

“haan aakhir kaar tum kaamyaab ho gaye. ho gaya mujhe tumse pyar. Par is se jyada kuch aur mat sochna.”

“main kuch nahi soch raha hun. Mujhe kuch samajh nahi aa raha ki aap kya kahna chaahti hain.”

“mujhe nahi pata ki is pyar ka matlab kya hai. haan par pyar kar baithi hun tumse…pata nahi kyon..jabki main tumse dur rahna chaahti thi.”

“kya aap pachta rahi hain…agar aisa hai to ye pyar mat kijiye. Aapko kisi uljhan mein nahi dekhna chaahta hun main.”

“tum mujhe pyar kyon karte ho…kya bata sakte ho mujhe. Jhut mat bolna.” Padmini ne pucha.

“padmini ji aapki tarah mujhe bhi nahi pata ki is pyar ka matlab kya hai. haan bas pyar ho gaya aapse. Kyon hua ye pyar iska jawaab mere paas nahi hai. bas itna jaanta hun ki aapki mrignayni si aankho mein kho gaya hun main.”

“meri aankhe kya mrignayni hain…” padmini ne pucha.

“aapko nahi pata kya? …mujhe dubo diya mrignayni aankho mein aur khud anjaan bani baithi hain aap.”

“ye flirt hai ya pyar…”

“aapko kya lagta hai…” Raj sharma ne hanste hue kaha.

“mujhe lagta hai ki tum mere saath koyi khel, khel rahe ho.” Padmini ne kaha.

“pyar karte hain hum aapse, koyi majaak nahi. aur hamein koyi khel, khelna nahi aata. Dil mein pyar rakhte hain aapke liye…apna dil nikaal kar aapke kadmo mein rakh denge.”

Ye sun kar ek madham si muskaan ubhar aayi padmini ke honto par. Raj sharma vo muskaan bas dekhta hi rah gaya.

“aise kya dekh rahe ho.”

“agar thappad nahi maarengi to ek baat kahun.”

“ab thappad kyon maarungi tumhe…”

“bahut pyari muskaan hai aapki. Bahut dino baad aapke honto par ye muskaan dekhi maine. Hamesha yu hi muskuraati rahna aap.”

Padmini ki aankhe tapak gayi ye sun kar. Raj sharma ne bhi uske aanshu dekh liye.

“kya hua…kya maine kuch galat kaha. Dekhiye meri baaton mein jara sa bhi flirt nahi hai. aapko pyar karta hun. Kabhi jhuti taarif nahi karunga…flirt jhuta hota hai aur pyar sacha.”

“mammi, papa meri vajah se maare gaye. ye khaali ghar khaane ko daudta hai. har taraf unki yaadein bikhri padi hain. Bahut hi dukhi hun main. aise mein bhi kyon muskura uthi tumhaari baat par pata nahi mujhe…”

“ye to atchi baat hai. sab kuch bhool kar hamein aage badhna hoga.”

“hamein matlab?” padmini ne apne aansu ponchte hue kaha

“kya is pyar mein akele chalengi aap…kya mujhe haq nahi ki aapke saath chalun kadam se kadam mila kar.”

Kramashah..........................