मा बेटा और बहन compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories, erotic stories. Visit dreamsfilm.ru
raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: मा बेटा और बहन

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 17:24

मे उसकी चूचियों को मसल उसे मज़ा देते बोला, "यार नंगी पकड़ने मे ज़्यादा

मज़ा आता है."

"ओह्ह भाई जान अभी नही खाने के बाद मम्मी तो 2 घंटे के लिए सो जाती हैं तब

आपको जी भरके नंगी पिलाउन्गि. भाई जान ब्रा अलग कर दीजिए फिर कमीज़ के अंदर

हाथ डालकर पकडिए."

"तू कितनी समझदार है."

फिर मेने उसकी ब्रा खोलकर अलग कर दी तो उसने ब्रा को कुशन के नीचे च्छूपा

दिया फिर अपनी कमीज़ को ऊपर उठाया और मेरे हाथों को अंदर किया. मेने उसकी

दोनो चूचियों को पकड़ लिया और दबा कर उसके होंठ, गाल गले पर चूमने लगा..

वह अपने हाथ पिछे कर मेरे गले मे डाले अपनी चूचियों को देख रही थी.

तभी किचन मे कुच्छ आहट हुई तो वह मेरे हाथ हटाती बोली, "अब रहने दो

भाई जान मम्मी आने वाली हैं."

मे जानता था मम्मी कुच्छ नही कहेंगी लेकिन फिर भी मेने उसे छोड़ दिया तो

उसने अपने कपड़े ठीक किए और अलग होकर बैठ गयी. एक मिनट बाद मम्मी आई

और शुमैला के पास बैठ गयी. वह मुझे देख मुस्काराई तो मे भी मुस्काराया

और इशारा किया कि काम बन गया.

तभी मम्मी ने कहा, "बेटा तुम लोग खाना खाओगे?"

"खा लेते है मम्मी आपको आराम भी करना होगा." शुमैला बोली.

"चलो फिर खाना खा लिया जाए."

तब शुमैला उठकर गयी तो मम्मी मुझसे बोली, "क्या किया बेटा?"

"मम्मी बहुत मस्त है शुमैला की दोनो चूचियाँ, हाई मम्मी दोनो का खूब रस

पिया."

"ठीक है खाना खा लो फिर मे सोने का बहाना कर अपने रूम मे चली जाउन्गि

तब तुम यही फिर करना लेकिन बेटा नीचे हाथ लगाया या नही?"

"अभी नही मम्मी."

"ठीक किया, नीचे वाला माल रात मे ही चूना. आज रात तुम्हारी और शुमैला

की है. अभी एक दो घंटे उसकी चूचियों का मज़ा ही लो. रात मे नीचे का.

अगर अभी नीचे वाली को कुच्छ किया तो वह बेचैन हो जाएगी और चुदाई का असली

मज़ा रात मे ही है. उसे अपना दिखाया या नही?"

"अभी नही मम्मी."

"अब उसे अपना दिखाना और मान जाए तो उसके मुँह मे भी देना. अगर ना माने तो

कोई बात नही मे सीखा दूँगी मुँह मे लेना."

फिर हम सब खाना खाने लगे. खाने पर वह मुझे देख रही थी. खैर खाने के

बाद वह बर्तन सॉफ करने लगी. मे टीवी देखने जाता बोला, "शुमैला मे टीवी

देखने जा रहा हूँ अगर तुमको देखना हो तो आ जाना."

"ठीक है भाई जान आप चलिए मे अभी आती हूँ. बर्तन धोकर कपड़े बदल

लूँ फिर आती हूँ. इन कपड़ो मे परेशानी होती है."

"हां बेटी जाओ बर्तन सॉफ करके भाई जान के साथ टीवी देखना और मुझे डिस्टर्ब ना

करना. मे दो घंटे सोउंगी. और शुमैला बेटी घर मे इतने कसे कपड़े ना

पहना करो. जाओ कोई ढीला सा स्कर्ट और टी-शर्ट पह्न लो." मम्मी तो सोने की बात

कह चली गयी.

मे टीवी देखने लगा. 10 मिनट बाद शुमैला आई तो उसे देख मे दंग रह

गया. लाल रंग का स्कर्ट और वाइट टी-शर्ट मे उसने मेक- अप किया हुआ था.

होंठो पर स्किन कलर की लिप स्टिक थी और पर्फ्यूम से उसका बदन महक रहा था.

मे उसे देखता रहा तो वह मुस्कराते हुए बोली, "भाई जान क्या देख रहे हो?"

"देख रहा हूँ कि मेरी बहन कितनी खूबसूरत है."

"जाइए भाई जान आप भी, मुझे टीवी देखना है."

फिर वह आकर मेरे पास बैठी. उसके बैठने पर मेने उसे देखा और मुस्कराते

हुए उसके हाथो को पकड़ा तो वह अपना हाथ छुड़ा उठकर आगे सिंगल बेड पर

लेट गयी. मे सोफा पर बैठा उसे देखता रहा. उसकी चूचियाँ ऊपर को तनी

हुई थी. टी-शर्ट छ्होटी थी जिससे उसका पेट दिख रहा था. स्कर्ट भी घुटनो से

ऊपर था. वह टीवी की तरफ देख रही थी. तभी उसने अपने पैर घुटनो से मोदे तो

उसका स्कर्ट उसकी कमर पर आ गया और उसकी चिकनी गोरी गोरी राने दिखने लगी.

वह अपनी चिकनी राने दिखाती अपने हाथों को अपनी चूचियों पर बाँधे थी.

8-10 मिनट तक वह ऐसे ही रही.

फिर वह मेरी ओर देख बोली, "भाई जान यह अच्छी फिल्म नही है, मे बोर हो रही

हूँ."

मे उठकर उसके पास जाकर बैठा और उसकी कमर पर हाथ रख बोला, "शुमैला

इस वक़्त कोई अच्छा प्रोग्राम नही आता." और कमर पर हल्का सा दबाव डालता बोला,

"एक घंटे बाद एक अच्छा प्रोग्राम आता है."

"ओह्ह भाई जान तो एक घंटे तक क्या करें?"

"अरे यही प्रोग्राम देखते हैं ना, आओ सोफे पर चलो ना वही बैठकर देखते

हैं दोनो लोग." मेने उसका हाथ पकड़ उसकी नशीली हो रही आँखों मे झाँकते

कहा.

वह मुझे रोकती बोली, "भाई जान मे यही लेटकर देखूँगी, थक गयी हूँ ना आप

भी यही बैठिए ना."

मेने उसे मुस्करा कर देखा और कहा, "ठीक है शुमैला तुम सच मे थक गयी

होगी बर्तन धोकर." और उसकी कमर के पास ही बैठ गया.

अभी मे चुप बैठा था. वह टीवी देखते देखते एक दो बार मुझे भी देख लेती

थी. 4-5 मिनट बाद उसने करवट ले ली तो उसकी पीठ और चूतर मेरी तरफ हो

गये. अब मे भी आगे कुच्छ करने की सोच धीरे से उसके साथ ही लेट गया और

अपना हाथ उसके ऊपर रखा. हाथ उसके ऊपर रखा तो उसने चेहरा मोड़ मुझे

देखा और मुझे अपनी बगल मे लेटा देख मुस्काराकार बोली, "क्या हुआ भाई जान

आप भी थक गये हैं?"

"हां शुमैला सोच रहा था थोडा लेटकर आराम कर लूँ."

"ठीक है भाई जान लेटीये ना, आज तो वैसे भी कोई काम नही है."

कुच्छ देर लेटा रहा फिर धीरे धीरे उसकी स्कर्ट को ऊपर खिसकाने लगा. वह चुप

रही और थोड़ी ही देर मे उसका स्कर्ट ऊपर कर दिया और उसकी पैंटी दिखने लगी.

कुच्छ देर बाद जब उसकी पैंटी को खिसकाना चाहा तो उसने मेरे हाथो को पकड़

लिया और टीवी देखती रही. मे समझ गया कि वह शर्मा रही है. मेने सोचा

ठीक है रात मे देखूँगा नीचे वाली, अभी चूचियों का ही मज़ा लिया जाए.

फिर हाथ को उसकी टी-शर्ट के पास लाया और आगे कर उसकी एक चूची को पकड़ा.

वह चुप रही तो फिर मे धीरे धीरे दबाने लगा. दोनो चूचियों को 4-5 मिनट

तक दबाया फिर उसकी टी-शर्ट को ऊपर करने लगा तो उसने मेरी हेल्प. दोनो

चूचियों को टी-शर्ट से बाहर कर दिया था. वह ब्रा पहले ही उतार चुकी थी.

चूचियों को नंगी करने के बाद उसका कंधा पकड़ अपनी तरफ किया तो वह चुप

चाप सीधी होकर लेट गयी. उसकी आँखें बंद थी और मे उसकी तनी तनी

चूचियों को देख रह ना सका और झुककर एक को मुँह मे ले लिया. अब मे दोनो

चूचियों पर जीभ चला चला चाट रहा था. मे अपनी बहन की दोनो

चूचियों को चूस नही रहा था बल्कि चाट रहा था.

क्रमशः…………………



Maa beta or bahan-4

gataank se aage…………………
Hontho ko choomne par wah aur mast huyi tu mene uske hontho ko apne munh me
lekar khoob kaskar choosa. 3-4 minat hoont choosne ke baad alag hua tu wah
haanfti huyi boli, "oooohhh aaaahh ss Bhai jaan aahh bahut achha laga haai
Bhai jaan inko munh se karo."

"Kya Karen?"

"Bhai jaan meri choochiyon ko munh se choos choos kar piyo."

Me khush hota bola, "Lao pilao apni choochiyon ko."

Fir me usko alag kar let gaya tu wah uthi aur mere oopar jhuk apni ek choochi
ko apne haath se pakad mere munh me laga boli, "Lo Bhai jaan piyo inka rass."

Me uski choochi ko hontho se daba daba kaskar choos raha tha. Wah apne haath
se daba poori choochi ko mere munh me ghusane ki koshish kar rahi thi. 3-4
minat baad usne isi tarah doosri choochi bhi mere munh me di. Dono ko kareeb
das minat tak chusati rahi aur me uski gaand par haath laga uske chutar
sahlata pita raha.

Fir wah mujhe utha meri god me pahle ki tarah let gayi aur fir mere haath ko
apni ek choochi par laga dabane ka ishara kiya. Me dabane laga tu usne mere
chehre ko pakad apni doosri choochi jhukaya. Me uska matlab samajh uski ek
choochi ko masal masal doosri ko pine laga. Wah ab mujhe hi dekh rahi thi. Wah
mere sar par haath fer rahi thi.

Wah mere kaan me fusfusa bhi rahi thi, "Hhhaaa aahh haai Bhai jaan bahut achha
lag raha hai haue aap kitne ache hain."

"Tub hi bahut achhi hai."

"Bhai jaan ek baat tu batao? Abhi jab aapse khane ko poochha that u aap kinka
rass pine ko kah rahe the?"

"Jinka rass pi raha hoon, teri choochiyon ka."

"Haai Bhai jaan aap kitne wo hai."

Tabhi kitchen se Mammi ki awaz aayi wah Shumaila ko bula rahi thi.

Shumaila hadbadakar utha baithi aur apne kapade theek karti boli, "Ji Mammi."

"Beti kya kar rahi ho?"

"Kuchh nahi Mammi aa rahi hoon." Wah bahut ghabra gayi thi aur mujhse boli,
"Haai Bhai jaan darwaza khula tha kahin Mammi ne dekh tu nahi liya?"

"Nahi yaar wah tu kisi kaam se bula rahi hain?"

"Beti agar free ho tu yahan aao."

"Aayi Mammi." Aur wah chali gayi tu me bhi saanse durust karne laga.

Apni bahan ki choochiyon ka rass peekar tu maza hi aa gaya tha. Me fir jaldi
se kitchen ke paas gaya. Mammi roti sek rahi thi. Shumaila unke paas khari huyi.
Wah abhi bhi tezi se saanse le rahi thi.

Mammi use dekhkar boli, "Kya hua beti, tu thaki lag rahi hai?"

"Nahi tu Mammi me theek hoon."

"Kya dekh rahe the tum log?"

"Film Mammi, Mammi bahut achhi film thi."

"Achha achha beti tumhare Bhai jaan kahan hain?"

"Wah tu abhi TV hi dekh rahe hain. Mammi kuchh kaam hai kya?"

"Nahi beti kyon?"

"Me jaaun TV dekhne Bhai jaan akele boar ho jate hain."

"Bahut khyal rakhti hai apne Bhai jaan ka. Ja dekh jake bhai ke saath. Mujhe abhi
10 minat aur lagegen."

Wah khush ho jaldi se bahar nikli tu mene use pakad apni god me uthaia aur TV
room me le aaya. Wah mere gale me baanhen dale mujhe hi dekhe ja rahi thi.
Andar aa me baitha aur use apni god me bitha uske hontho ko choom uski dono
choochiyon ko dabane laga. Do minat baad uske button kholna chaha tu wah boli,
"Nahi Bhai jaan button na kholo aise hi kar. Mammi aa sakti hain."

Me uski choochiyon ko masal use maza dete bola, "Yaar nangi pakadne me zyada
maza aata hai."

"Ohh Bhai jaan abhi nahi khan eke baad Mammi tu 2 ghante ke liye so jati hain tab
aapko ji bharke nangi pilaungi. Bhai jaan bra alag kar dijiye fir kamenez ke andar
haath daalkar pakadiye."

"Tu kitni samajhdaar ha."

Fir mene uski bra kholkar alag kar di tu usne bra ko kushan ke niche chhupa
diya fir apni kamenez ko oopar uthaia aur mere haathon ko andar kiya. Mene uski
dono choochiyon ko pakad liya aur daba uske hoont, gaal gale pa choomne laga..
wah apne haath pichhe kar mere gale me daale apni choochiyon ko dekh rahi thi.

Tabhi kitchen me kuchh ahat huyi tu wah mere haath hatati boli, "Ab rahne do
Bhai jaan Mammi aane wali hain."

Me jaanta tha Mammi kuchh nahi kahengi lekin fir bhi mene use chhor diya tu
usne apne kapade theek kiye aura lag hokar baith gayi. Ek minat baad Mammi aayi
aur Shumaila ke paas baith gayi. Wah mujhe dekh muskarayi tu me bhi muskaraya
aur ishara kiya ki kaam ban gaya.

Tabhi Mammi ne kaha, "Beta tum log khana khaoge?"

"Kha lete hai Mammi aapko aaram bhi karma hoga." Shumaila boli.

"Chalo fir khana kha liya jaye."

Tab Shumaila uthkar gayi tu Mammi mujhse boli, "Kya kiya beta?"

"Mammi bahut mast hai Shumaila ki dono choochiyan, haai Mammi dono ka khoob rass
piya."

"Theek hai khana kha lo fir me sone ka bahan kar apne room me chali jaungi
tab tum yahi fir karma lekin beta niche haath lagaya ya nahi?"

"Abhi nahi Mammi."

"Theek kiya, niche wala maal raat me hi chhona. Aaj raat tumhari aur Shumaila
ki hai. Abhi ek do ghante uski choochiyon ka maza hi lo. Raat me niche ka.
Agar abhi niche wali ko kuchh kiya tu wah bechain ho jayegi aur chudai ka asli
maza raat me hi hai. Use apna dikhaia ya nahi?"

"Abhi nahi Mammi."

"Ab use apna dikhana aur maan jaye tu uske munh me bhi dena. Agar na mane tu
koi baat nahi me sikha doongi munh me lena."

Fir ham sab khana khane lage. Khane par wah mujhe dekh rahi thi. Khair khan eke
baad wah bartan saaf karne lagi. Me TV dekhne jata bola, "Shumaila me TV
dekhne jar aha hoon agar tumko dekhna ho tu aa jana."

"Theek hai Bhai jaan aap chaliye me abhi aati hoon. Bartan dhokar kapade badal
loon fir aati hoon. In kapro me pareshani hoti hai."

"Haan beti jao bartan saaf karke Bhai jaan ke sath TV dekhna aur mujhe disturb na
karna. Me do ghante soungi. Aur Shumaila beti ghar me itne kase kapade na
pahna karo. Jao koi dheela sa skirt aur t-shirt pahn lo." Mammi tu sone ki baat
kah chali gayi.

Me TV dekhne laga. 10 minat baad Shumaila aayi tu use dekh me dang rah
gaya. Laal rang ka skirt aur white t-shirt me usne make- up kiya hua tha.
Hontho par skin color ki lip stick thi aur perfume se uska badan mahak raha tha.
Me use dekhta raha tu wah muskarate hue boli, "Bhai jaan kya dekh rahe ho?"

"Dekh raha hoon ki meri bahan kitni khoobsurat hai."

"Jaiye bhai jaan aap bhi, mujhe TV dekhna hai."

Fir wah aakar mere paas baithi. Uske baithne par mene use dekha aur muskrata
hue uske haatho ko pakra tu wah apna haath chhuda uthkar aage single bed par
let gayi. Me sofa par baitha use dekhta raha. Uski choochiyan oopar ko tani
huyi thi. T-shirt chhoti thi jisse uska pet dikh raha tha. Skirt bhi ghutno se
oopar tha. Wah TV ki taraf dekh rahi thi. Tabhi usne apne pair ghutno se mode tu
uska skirt uski kamar par aa gaya aur uski chikni gori gori raane dikhne lagi.
Wah apni chikni raane dikhati apne haathon ko apni choochiyon par baandhe thi.
8-10 minat tak wah aise hi rahi.

Fir wah meri oor dekh boli, "Bhai jaan yah achhi film nahi hai, me bore ho rahi
hoon."

Me uthkar uske paas jakar baitha aur uski kamar par haath rakh bola, "Shumaila
is waqt koi achha program nahi aata." Aur kamar par halka sa dabav daalta bola,
"Ek ghante baad ek achha program aata hai."

"Ohh Bhai jaan tu ek ghante tak kya Karen?"

"Are yahi program dekhte hain na, aao sofe par chalo na wahi baithkar dekhte
hain dono log." Mene uska haath pakad uski nashili ho rahi aankhon me jhankte
kaha.

Wah mujhe rokti boli, "Bhai jaan me yahi letkar dekhungi, thak gayi hoon na aap
bhi yahi baithiye na."

Mene use muskarakar dekha aur kaha, "Theek hai Shumaila tum sach me thak gayi
hogi bartan dhokar." Aur uski kamar ke paas hi baith gaya.

Abhi me chup baitha tha. Wah TV dekhte dekhte ek do baar mujhe bhi dekh leti
thi. 4-5 minat baad usne karwat le lit u uski peeth aur chutar meri taraf ho
gaye. Ab me bhi aage kuchh karne ki soch dhire se uske saath hi let gaya aur
apna haath uske oopar rakha. Haath uske oopar rakha tu usne chehra mod mujhe
dekha aur mujhe apne bagal me leta dekh muskarakar boli, "Kya hua Bhai jaan
aap bhi thak gaye hain?"

"Haan Shumaila soch raha thoda letkar aaram kar loon."

"Theek hai Bhai jaan letiye na, aaj tu waise bhi koi kaam nahi hai."

Kuchh der leta raha fir dhire dhire uski skirt ko oopar khiskane laga. Wah chup
rahi aur thodi hi der me uska skirt oopar kar diya aur uski panty dikhne lagi.
Kuchh der baad jab uski panty ko khiskana chaha tu usne mere haatho ko pakad
liya aur TV dekhti rahi. Me samajh gaya ki wah sharma rahi hai. Mene socha
theek hai raat me dekhunga niche wali, abhi choochiyon ka hi maza liya jaye.

Fir haath ko uski T-shirt ke paas laya aura age kar uski ek choochi ko pakra.
Wah chup rahi tu fir me dhire dhire dabane laga. Dono choochiyon ko 4-5 minat
tak dabaya fir uski T-Shirt ko oopar karne laga tu usne meri help. Dono
choochiyon ko T-Shirt se bahar kar diya tha. Wah bra pahle hi utaar chuki thi.
Choochiyon ko nangi karne ke baad uska kandha pakad apni taraf kiya tu wah chup
chaap sidhi hokar let gayi. Uski aankhen band thi aur me uski tani tani
choochiyon ko dekh rah na saka aur jhukkar ek ko munh me le liya. Ab me dono
choochiyon par jeebh chala chala chaat raha tha. Me apni bahan ki dono
choochiyon ko choos nahi raha tha balki chaat raha tha.
kramashah…………………

raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: मा बेटा और बहन

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 17:25

माँ बेटा ओर बहन-5

गतान्क से आगे…………………

जब 6-7 मिनट तक चाट्ता रहा तब वह भी मस्ती से भर गयी और अपनी एक

चूची को अपने हाथ से पकड़ मेरे मुँह मे घुसेड़ती फुसफुसाकर बोली,

"भाई जान."

"क्या है शुमैला?"

"ववव आह इनको...."

"क्या बताओ ना तुम तो बहुत शरमाती हो."

"भाई जान इनको मुँह से चूस्कर पियो जैसे खाने से पहले कर रहे थे." वह

शरमाते हुए बोली.

"तुमको अच्छा लगा था अपनी चूचियों को अपने भाई को चूसाने मे?"

"हां भाई जान बहुत मज़ा आया था, और पियो इनको."

"पगली, शरमाया मत कर. अगर तुझे अपनी इस मस्त जवानी का मज़ा लेना हो तो

शरमाना नही. चलो खुलकर इनका नाम लेका कहो जो कहना है."

"भाई जान हाई पियो हाई पियो अपनी बहन की चूचियों को." और शरमाते हुए

बोली, "ठीक है ना भाई जान?"

"बहुत अच्छे चलो एक काम करो यह सब कपड़े अलग करो अड़चन होती है."

"नही भाई जान पूरी नंगी नही."

"अरे देख तेरी मस्त चूचियाँ मेरे सामने है ही फिर क्या?"

"नही भाई नीचे नही उतारुन्गि."

"अच्छा चलो पैंटी पहने रहो और सब उतार दो."

"मम्मी ना आ जाएँ दरवाज़ा बंद कर लो."

"अरे अगर दरवाज़ा बंद कर लिया तो मम्मी कुच्छ ग़लत समझेंगी. डरो नही मम्मी

कम से कम 2 घंटे बाद ही उठेंगी."

तब उसने अपनी टी-शर्ट और स्कर्ट अलग कर दिया और केवल पैंटी मे ही लेट गयी.

फिर मे उसकी एक चूची को मसल दूसरी को चूसने लगा. 20-25 मिनट

मे ही वह एकदम मस्त हो चुकी थी तब मेने कुच्छ आगे ट्राइ करने की सोचा.

"शुमैला."

"जी भाई जान."

"मज़ा आया ना."

"जी बहुत आहह, आप कितने अच्छे हैं."

"और चूसू कि बस?"

"अब बस भाई जान अब कल फिर."

"क्यों रात मे नही पिलाओगी अपनी चूचियों को?"

"रात मे कैसे?"

"मे चुपके से तुम्हारे रूम मे आ जाउन्गा."

"ओह्ह भाई जान फिर तो मज़ा आ जाएगा, हाई मे तो रात भर आपको पिलाउन्गि."

"पर मेरा भी तो एक काम करो."

"क्या भाई जान?"

"देखो मेने तुमको इतना मज़ा दिया है ना इससे मेरा यह बहुत परेशान हो गया

है. तुम अपने हाथ से इसे थोड़ा प्यार करो तो इसे भी क़रार आ जाए." और अपने

लंड पर हाथ लगाया.

वह यह देख शरमाने लगी तो मेने उसके हाथ को पकड़ अपने लंड पर रखते

कहा, "अरे यार तू शरमाती क्यों है."

"नही भाई जान नही मे इसे नही पकडूँगी." और उसने अपना हाथ हटा लिया.

"क्या हुआ जान?"

"भाई जान आपको जो करना हो कर लो मे इसे नही पाकडूँगी मुझे डर लगता है."

"अच्छ ठीक है चल तू ज़रा अपनी चूचियों को मेरे मुँह मे दे."

फिर मे सीधा लेट गया और वह मेरे पास आ अपनी चूचियों को पकड़ मेरे मुँह

मे देने लगी. मेने उसकी चूचियों को चूस्ते हुए अपनी पॅंट को अलग किया फिर

अंडरवेर को खिसका लंड बाहर किया. लंड बाहर कर अपने हाथ से लंड सहलाने

लगा. मेने देखा कि शुमैला की आँखें मेरे लंड पर थी. 2-3 मिनट बाद

शुमैला से कहा, "शुमैला मेरी बहन हाई मेरा लंड सूखा है ठीक से हो

नही रहा प्लीज़ इस पर अपना थूक लगा दो तो यह चिकना हो जाएगा और आराम से

कर लूँगा."

वह कुच्छ देर सोचती रही फिर धीरे से मेरे पैरों के पास गयी और झुककर मेरे

लंड पर खूब सा थूक उंड़ेल दिया. थूक लगा वह फिर मेरे पास आई तो मे

लंड सहलाते बोला, "हां शुमैला अब सही है तुम्हारा थूक बहुत चिकना है.

आहह चुसाओ अपनी हाई तुम्हारी चूचियों को पीकर मूठ मारने का मज़ा ही कुच्छ

और है."

मे उसकी चूचियों को चूस अपनी मूठ मारता रहा फिर थोड़ी देर बाद बोला,

"शुमैला हाई ऐसे नही निकलेगा प्लीज़ एक काम करो"

"जी बताएँ भाई जान."

"यार अपने हाथ से नही होता और तू करेगी नही, तुम प्लीज़ अपनी पैंटी उतारकर

मुझे दे दो ना."

"नही नही हाई नही भाई जान."

"पगली मे तुमको देखूँगा नही बस अपनी पैंटी दे दो. क्या मेरे लिए इतना भी

नही करोगी."

raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: मा बेटा और बहन

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 17:25

तब उसने कुच्छ सोचते हुए अपने स्कर्ट के अंदर हाथ डाला और फिर पैंटी उतारी

और मेरी ओर कर दी. मेने पैंटी पकड़ी और उसे सूंघते हुए उसे मस्त करने के

लिए कहा, "हाई शुमैला मेरी बहन कितनी मस्त और नशीली खुश्बू आ रही है

तुम्हारी पैंटी से हह आह अब तुम्हारी पैंटी को प्यार करूँगा तो मेरा निकलेगा.

फिर उसकी पैंटी को दो-चार बार नाक पर लगा सूँघा और फिर उसे दिखाते हुए

उस जगह को खोला जहाँ पर उसकी चूत होती है. उस जगह को देखा तो वह कुच्छ

पीली सी थी. मेने उस पीली जगह को उसे दिखाते कहा, "शुमैला देखो तुम्हारी

पैंटी यहाँ पीली है, शायद यहाँ पर तुम्हारा पेशाब लग जाता होगा."

वह शर्मकार नीचे देखने लगी तो मेने आगे कहा, "सच शुमैला तुम्हारी चूत

की खुश्बू इस पैंटी से कितनी प्यारी आ रही है. हाई इसे चाटने मे बहुत मज़ा

आएगा."

फिर मे उसकी पैंटी को मुँह मे ले चूसने और चाटने लगा तो वह हैरानी से

मुझे देखने लगी. कुच्छ देर चाट कर बोला, "शुमैला लग रहा है जैसे सच

मे तुम्हारी चूत चाट रहा हूँ."

वह और ज़्यादा शर्मा गयी तब मेने दो टीन बार और पैंटी को चाता फिर उसकी

पैंटी से अपने लंड को रगड़ते हुए कहने लगा, "ले हाई ले शुमैला की पैंटी पर

ही निकल जा हाई यह तो मेरी सग़ी और छ्होटी बहन है यह तुमको अपनी चूत नही

देगी. हाई जब यह मेरा पकड़ नही रही है और मुझे अपनी चटा नही रही है

तो तुझे कैसे देगी."

और फिर मे तेज़ी से झड़ने लगा. खूब पानी निकला था जिसे वह देख भी रही

थी और शर्मा भी रही थी. जब मे झाड़ गया तो उसे पकड़ उसके होंठ चूमकर

बोला, "थॅंक यू शुमैला अगर तुम अपनी पैंटी ना देती तो मेरा निकलता नही और

मुझे मज़ा नही आता. प्लीज़ अब तुम अपनी सभी गंदी पैंटी मुझे दे दिया करना."

वह कुच्छ बोल्ड हो बोली, "भाई जान गंदी क्यों?"

"अरे जो पहनी हुई होगी उसी मे तो तुम्हारी चूत की मस्त खुश्बू होगी ना."

वह फिर शर्मा गयी और धीरे से बोली, "हाय चलिए, भाई जान थोड़ा सा और

चूस दीजिए ना."

तब मेने फिर उसकी चूचियों को 10 मिनट तक और चूसा फिर उससे बोला, "जा

देखकर आ मम्मी सो रही हैं ना."

वह गयी और थोड़ी देर बाद आ बोली, "हां भाई जान सो रही हैं मम्मी."

"शुमैला मेरी जान तुम्हारी चूचियाँ बहुत अच्छी हैं, इनको चूस्कर मज़ा आ

गया यार ज़रा सा अपनी नीचे वाली भी चटा दो ना."

"हाई भाई जान नही नही यह ठीक नही है."

"अरे यार तुम डरो नही बस केवल देखूँगा और एक बार चाटूँगा फिर कुच्छ नही

करूँगा. प्लीज़ शुमैला."

"भाई जान आप नही मानते तो मे आपको केवल दिखा सकती हूँ लेकिन छूने नही

दूँगी, बोलिए?"

"ओके, ठीक है, दिखाओ हाई देखें तो मेरी बहन की चूत कैसी है हाई जिस

चूत की खुश्बू इतनी प्यारी है वह देखने मे कितनी खूबसूरत होगी?"

वह मेरी बात सुन शर्मा गयी और फिर धीरे से अपने स्कर्ट को पकड़ा और मेरे

सामने खड़ी हो स्कर्ट ऊपर उठाने लगी. मे उसकी चूत देख मस्त हो गया और

लंड तेज़ी से झटके लेने लगा. मे उसकी खूबसूरत चूत देख अपने होंठो पर

जीभ फेरता बोला, "आह शुमैला मेरी जान मेरी प्यारी बहन तुम्हारी चूत बहुत

खूबसूरत है, हाई कितनी प्यारी सी छ्होटी छ्होटी फाँक और कितनी गुलाबी सी

एकदम गुलाब की कली सी चूत है. हाई शुमैला वह कितना खुशनसीब होगा जो इस

कली को फूल बनाएगा. आअह उसे कितना मज़ा आएगा जब वह मेरी बहन की प्यारी सी

चूत पर अपनी जीभ लगा चाटेगा."

वह मेरी इस तरह की बात सुन मस्त हो और कुच्छ शरमाते हुए बोली, "ओह्ह

भाई जान आप कैसी बातें कर रहे हैं? अब देख लिया अब बस अब चलिए आराम से

टीवी देखते हैं."

फिर वह स्कर्ट नीचे कर सामने बेड पर करवट के बल लेट गयी तो मे भी उसके

पिछे लेट उसकी गांद पर लंड सटा उसे अपनी बाँहो मे दबोच लिया. वह

कसमसाई तो मेने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और दबाते हुए उसे मस्त करने

के लिए उसके कान मे फुसफुसाने लगा.

"शुमैला मेरी बहन तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हारी चूचियाँ बहुत कड़क है

और तुम्हारी चूत का तो जवाब ही नही."

वह शरमाती सी बोली, "भाई जान टीवी देखिए ना?"

"ओह्ह देख तो रहा हूँ, हाई शुमैला अगर तुम इज़ाज़त दो तो तुम्हारी चूत को

हाथ से छू कर देख लूँ."

"ओह्ह भाई जान आप भी."

"प्लीज़ शुमैला."

"भाई जान देखिए आप ......ओके भाई जान लेकिन भाई जान अभी नही प्लीज़ अभी टीवी

देखिए रात को जब मम्मी सो जाए तब आप आ जाइएएगा मेरे रूम मे तब आप

देखिएगा भी और छू भी लीजिएगा."

"हाई ठीक है शुमैला, ऊहह हाई रात तक इंतेज़ार करना होगा इस प्यारी चूत

के लिए."

फिर मेने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और उसको मसलता रहा और टीवी देखता

रहा. 15-20 मिनट बाद वह अलग होते बोली, "भाई जान अब हटिए मम्मी उठने वाली

होंगी."

फिर वह उठकर टाय्लेट गयी और वापस आ ठीक से बैठ गयी. फिर मेने भी अपने

कपड़े सही किए और थोड़ी देर बाद मम्मी आ गयी.

मम्मी भी हमारे साथ टीवी देखने लगी. 10 मिनट बाद मम्मी बोली, "शुमैला बेटी

जा चाइ बना ला."

वह गयी तो मम्मी ने मुझसे कहा, "आमिर बेटे कुच्छ काम बना तुम्हारा?"

"मम्मी बहुत काम बन गया."

"अच्छा क्या क्या हुआ?"

"मम्मी आज तो शुमैला की दोनो चूचियों को चूस चूस्कर खूब मज़ा लेकर

झाड़ा और उसकी चूत को भी देखा लेकिन उसने छूने नही दिया."

"अरे तो केवल चूचियों का ही मज़ा लिया अपनी बहन की."

"हां मम्मी वैसे उसने कहा है कि रात को अपने रूम मे बुलाएगी."

"अच्छा ठीक है बेटा तुम उसके कमरे मे जाकर ही मज़ा देना. कोशिश करना कि

तुम उसे आज ही चोद लो, और अगर ना चोद पाओ तो एक काम ज़रूर करना."

"क्या मम्मी?"

"तुम अपनी अंडरवेर उसके रूम मे ही छोड़ देना और अपनी कोई और आइटम भी वही

छोड़ देना बाकी मे देख लूँगी."

"ठीक है मम्मी."

फिर शुमैला चाइ लेकर आ गयी. हम सब चाइ पीने लगे. फिर सब कुच्छ नॉर्मल हो

गया. मे बाहर चला गया.

क्रमशः…………………



Maa beta or bahan-5

gataank se aage…………………
Jab 6-7 minat tak chaatta raha tab wah bhi masti se bhar gayi aur apni ek
choochi ko apne hath se pakad mere munh me ghusedti fusfusakar boli,
"Bhai jaan."

"Kya hai Shumaila?"

"Www ah inko...."

"Kya batao na tum tu bahut sharmati ho."

"Bhai jaan inko munh se chooskar piyo jaise khane se pahle kar rahe the." Wah
sharmate hue boli.

"Tumko achha laga tha apni choochiyon ko apne bhai ko chusane me?"

"Haan Bhai jaan bahut maza aaya tha, aur piyo inko."

"Pagli, sharmaya mat kar. Agar tujhe apni is mast jawani ka maza lena ho tu
sharmana nahi. Chalo khulkar inka naam leka kaho jo kahna hai."

"Bhai jaan haai piyo haai piyo apni bahan ki choochiyon ko." Aur sharmate hue
boli, "Theek hai na Bhai jaan?"

"Bahut ache chalo ek kaam karo yah sab kapade alag karo adchan hoti hai."

"Nahi Bhai jaan poori nangi nahi."

"Are dekh teri mast choochiyan mere saamne hai hi fir kya?"

"Nahi bhai niche nahi utarungi."

"Achha chalo panty pahne raho aur sab utaar do."

"Mammi na aa jayen darwaza band kar lo."

"Are agar darwaza band kar liya tu Mammi kuchh galat samjhengi. Daro nahi Mammi
kam se kam 2 ghante baad hi uthengi."

Tab usne apni T-Shirt aur skirt alag kar diya aur kewal panty me hi let gayi.
Fir me uski ek choochi ko masal masal doosri ko choosne laga. 20-25 minat
me hi wah ekdam mast ho chuki thi tab mene kuchh age try karne ki socha.

"Shumaila."

"Ji Bhai jaan."

"Maza aaya na."

"Ji bahut aahh, aap kitne ache hain."

"Aur choose ki bas?"

"Ab bas Bhai jaan ab kal fir."

"Kyon raat me nahi pilaogi apni choochiyon ko?"
"Raat me kaise?"
"Me chupke se tumhare room me aa jaunga."
"Ohh Bhai jaan fir tu maza aa jayega, haai me tu raat bhar aapko pilaungi."
"Par mera bhi tu ek kaam karo."
"Kya Bhai jaan?"
"Dekho mene tumko itna maza diya hai na isse mera yah bahut pareshan ho gaya hai. Tum apne haath se ise thoda pyaar kjaro tu ise bi qaraar aa jaye." Aur apne lund par haath lagaya.
Wah yah dekh sharmane lagi tu me uske haath ko pakad apne lund par rakhte kaha, "Are yaar tu sharmati kyon hai."
"Nahi Bhai jaan nnahi me ise nahi pakrungi." Aur usne apna haath hata liya.
"Kya hua jaan?"
"Bhai jaan aapko jo karma ho karlo me ise nahi pakdungi mujhe darr lagta hai."
"Achh theek hai chal tu zara apni choochiyon ko mere munh me do."
Fir me seedha let gaya aur wah mere paas aa apni choochiyon ko pakad mere munh medene lagi. Me uski choochiyon ko choosta apni pant ko alag kiya fir underwear ko khiska lund bahar kiya. Lund bahar kar apne haath se lund sahlane laga. Me dekha ki Shumaila ki aankhen mere lund par thi. 2-3 minat baad Shumaila se kaha, "Shumaila meri bahan haai mera lund sookha hai theek se ho nahi raha please is par apna thook laga do tu yah chikna ho jayega aur aaram se kar lunga."
Wah kuchh der sochti rahi fir dhire se mere pairon ke paas gayi aur jhukkar mere lund par khoob sat hook undel diya. Thook laga wah fir mere paas aayi tu me lund sahlate boila, "Haan Shumaila ab sahi hai tumhara thook bahut chikna hai. Aahh chusao apni haai tumhari choochiyon ko pikar muth maarne ka maza hi kuchh aur hai."
Me uski choochiyon ko choos apni muth maarta raha fir thodi der baad bola, "Shumaila haai aise nahi niklega please ek kaam karo"
"Ji batayen Bhai jaan."
"Yaar apne haath se nahi hota aur tu karegi nahi, tum please apni panty utaarkar mujhe de do na."
"Nahi nahi haai nahi Bhai jaan."
"Pagli me tumko dekhunga nahi bas apni panty de do. Kya mere liye itna bhi nahi karogi."
Tab usne kuchh sochte hue apne skirt ke andar haath dala aur fir panty utaari aur meri oor kar di. Mene panty pakri aur use soonghte hue use mast karne ke liye kaha, "Haai Shumaila meri bahan kitni mast aur nashili khushbu aa rahi hai tumhari panty se hhh aah ab tumhari panty ko pyaar karunga tu mera niklega."
Fir uski panty ko do-chaar baar naak par laga soongha aur fir used dikhate hu hue us jaga ko khola jaha par uski choot hoti hi. Us jaga ko dekha tu wah kuchh pili sit hi. Mene us pili jagah ko use dikhate kaha, "Shumaila dekho tumhari panty yahan pili hai, shaiad yaha par tumhara peshab lag jata hoga."
Wah sharmakar niche dekhne lagi tu mene aage kaha, "Sach Shumaila tumhari choot ki khushbu is panty se kitni pyari aa rahi hai. Haai ise chaatne me bahut maza aayega."
Fir me uski panty ko munh me le choosne aur chaatne laga tu wah hairani se mujhe dekhne lagi. Kuchh der chaat kar bola, "Shumaila lag raha hai jaise sach me tumhari choot chaat raha hoon."
Wah aur zyada sharma gayi tab mene do ten baar aur panty ko chata fir uski panty se apne lund ko ragadte hue kahne laga, "Le haai le Shumaila ki panty par hi nikal ja haai yah tu meri sagi aur chhoti bahan hai yah tumko apni choot nahi degi. Haai jab yah mera pakad nahi rahi hai aur mujhe apni chata nahi rahi hai tu tujhe kaise degi."
Aur fir me tezi se jhadne laga. Khoob pani nikla tha jise wah dekh bhi rahi thi aur sharma bhi rahi thi. Jab me jhad gaya tu use pakad uske hoont choomkar bola, "Thakn you Shumaila agar tum apni panty na deti tu mera nikalta nahi aur mujhe maza nahi aata. Please ab tum apni sabhi gandi panty mujhe de diya karma."
Wah kuchh bold ho boli, "Bhai jaan gandi kyon?"
"Are jo pahni huyi hogi usi me tu tumhari choot ki mast khushbu hogi na."
Wah fir sharma gayi aur dhire se boli, "Haay chaliye, Bhai jaan thoda sa aur choos dijiye na."
Tab mene fir uski choochiyon ko 10 minat tak aur choosa fir usse bola, "Ja dekhkar aa Mammi so rahi hain na."
Wah gayi aur thodi der baad aa boli, "Haan Bhai jaan so rahi hain Mammi."
"Shumaila meri jaan tumhari choochiyan bahut achhi hain, inko chooskar maza aa gaya yaar zara sa apni niche wali bhi chata do na."
"Haai Bhai jaan nahi nahi yah theek nahi hai."
"Are yaar tum daro nahi bas kewal dekhunga aur ek bar chatunga fir kuchh nahi karunga. Please Shumaila."
"Bhai jaan aap nahi maante tu me aapko kewal dikha sakti hoon lekin chhone nahi doongi, boliye?"
"OK, theek hai, dikhao haai dekhe tu meri bahan ki choot kaisi hai haai jis choot ki khushboo itni pyaari hai wah dekhne me kitni khoobsurat hogi?"
Wah meri baat sun sharma gayi aur fir dhire se apne skirt ko pakra aur mere saamne khadi ho skirt oopar uthane lagi. Me uski choot dekh mast ho gaya aur lund tezi se jhatke lene laga. Me uski khoobsurat choot dekh apne honton par jebh ferta bola, "Aah Shumaila meri jaan meri pyari bahan tumhari choot bahut khoobsurat hai, haai kitni pyaari si chhoti chhoti phaank aur kitni gulabi si ekdam gulab ki kali si choot hai. Haai Shumaila wah kitna khushnaseeb hoga jo is kali ko phool banayega. Aah use kitna maza aayega jab wah meri bahan ki pyari si choot par apni jeebh laga chatega."
Wah meri is tarah ki baat sun mast ho aur kuchh sharmate hue boli, "Ohh Bhai jaan aap kaisi baaten kar rahe hain? Ab dekh liya ab bas ab chaliye aaram se TV dekhte hain."
Fir wah skirt niche kar saamne bed par karwat ke bal let gayi tu me bhi uske pichhe let uski gaand par lund sata use apni baanho me daboch leta. Wah kasmasayi tu mene uski choochiyon ko pakad liya aur dabate hue use mast karne ke liye uske kaan me fusfusane laga.
"Shumaila meri bahan tum bahut khoobsurat ho, tumhari choochiyan bahut kadak hai aur tumhari choot ka tu jawab hi nahi."
Wah sharmati si boli, "Bhai jaan TV dekhiye na?"
"Ohh dekh tu raha hoon, haai Shumaila agar tum izazat do tu tumhari choot ko haath se chho kar dekh loon."
"Ohh Bhai jaan aap bhi."
"Please Shumaila."
"Bhai jaan dekhiye aap ......OK Bhai jaan lekin Bhai jaan abhi nahi please abhi TV dekhiye raat ko jab Mammi so jaye tab aap aa jaiyega mere room me tab aap dekhiyega bhi aur chho bhi lijiyega."
"Haai theek hai Shumaila, oohh haai raat tak intezar karma hoga is pyaari choot ke liye."
Fir mene uski choochiyon ko pakad liya aur usko masalta raha aur TV dekhta raha. 15-20 minat baad wah alag hote boli, "Bhai jaan ab hatiye Mammi uthne wali hongi."
Fir wah uthkar toilet gayi aur wapas aa theek se baith gayi. Fir mene bhi apne kapade sahi kiye aur thodi der baad Mammi aa gayi.
Mammi bhi hamare saath TV dekhne lagi. 10 minat bad Mammi boli, "Shumaila beti ja chai bana lao."
Wah gayi tu Mammi ne mujhse kaha, "Amir bete kuchh kaam bana tumhara?"
"Mammi bahut kaam ban gaya."
"Achha kya kya hua?"
"Mammi aaj tu Shumaila ki dono choochiyon ko choos chooskar khoob maza lekar jhada aur uski choot ko bhi dekha lekin usne chhone nahi diya."
"Are tu kewal choochiyon ka hi maza liya apni bahan ki."
"Haan Mammi waise usne kaha hai ki raat ko apne room me bulayegi."
"Achha theek hai beta tum useke kamre me jakar hi maza dena. Koshish karma kit um use aaj hi chod lo, aur agar na chod pana tu ek kaam zaroor karma."
"Kya Mammi?"
"Tum apni underwear uske room me hi chhod dena aur apni koi aur item bhi wahi chhod dena baki me dekh loongi."
"Theek hai Mammi."
Fir Shumaila chai lekar aa gayi. Ham sab chai pine lage. Fir sab kuchh normal ho gaya. Me bahar chala gaya. kramashah…………………