खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 10:49

गतान्क से आगे..............

वो इंसान जिसने अंजाने मे कितने ही लोगो को बस अपनी कामयाबी से अपना दुश्मन बना लिया था सुबह के 6 बजे गहरी नींद मे सो रहा था जब किसी आवाज़ से उसकी नींद खुली.उसने आँखे खोली तो देखा कि उसकी बीवी अंजलि बिस्तर पे नही थी.बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी,वो समझ गया कि अंजलि नहा रही है.उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.रात को चाहे कितनी ही देर से सोयो,अंजलि बच्चो को स्कूल भेजने से पहले तैय्यार हो जाती थी.घर मे नौकरो की फौज थी मगर पति & बच्चो के लिए वो अपने हाथो से खाना बनाती थी & जहा तक हो सके उनके सारे काम खुद करती थी. जसजीत बिस्तर से उठा & अपने कपड़े उतार दिए & कमरे के कपबोर्ड पे लगे आदमकद शीशे के सामने नंगा खड़ा हो गया.42 साल की उम्र मे भी उसका बदन चुस्त था.उसने अपने पेट पे हाथ फेरा जोकि ज़रा भी बाहर नही निकला था"....जसजीत प्रधान,मुख्य मंत्री.",वो बुदबुडाया.उसके सपने पूरे हो रहे थे.इस बार के चुनाव मे उसकी ज़िंदगी भर की मेहनत रंग लाने वाली थी.वो जानता था कि उसका जीतना तय है & उसी की बदौलत उसकी पार्टी की जीत भी तय थी.इस बार वो मुख्यमंत्री बनेगा & आगे,"....हाया..!",उसने जीतेने वाले खिलाड़ी के अंदाज़ मे हवा मे मुट्ठी लहराई.यहा तक के सफ़र मे उसे कुच्छ कंधो पे पाँव रखने पड़े थे मगर ये सब तो सियासत का हिस्सा है..आज तक उसने कुच्छ ऐसा नही किया था जोकि उसके करियर की राह मे रोड़ा बने. उसका ध्यान फिर से अपनी सूरत & जिस्म पे गया.वो जानता था कि औरतो को उसका चेहरा बहुत भाता था & उसे भी औरतें बहुत पसंद थी.बस यही 1 कमी थी उसकी ज़िंदगी मे..वो चाह के भी अपना ज़ेयका नही बदल सकता था.ऐसा नही था की अंजलि खूबसूरत नही थी....बला की हसीन थी वो & दिलकश इतनी की पुछो मत..मगर रोज़-2 बिरयानी तो नही खाई जा सकती ना..कभी-कभार इंसान चाट भी खाना चाहता है..! उसे अपने ख़यालो पे हँसी आ गयी..यही तो फ़र्क़ था उसमे & बाकी नेताओं मे..वो अपने लालच,अपनी कमज़ोरियो पे काबू नही रख पाते थे मगर वो ऐसा नही था.अर्जुन की तरह उसे बस मच्चली की आँख दिखती थी & कुच्छ नही.उसे अपनी काबिलियत पे गुरूर हो आया कि तभी शीशे मे उसकी नज़र अपने निचले बदन पे पड़ी,अंजलि के ख़याल से उसका सोया लंड खड़ा हो रहा था.वो मुस्कुराया & बाथरूम मे घुस गया. बाथरूम मे कदम रखते ही उसे उसकी मौजूदगी से बेख़बर शवर के नीचे नंगी खड़ी अंजलि दिखी.38 बरस & 2 बच्चो के बाद भी उसका जिस्म किसी 30 बरस की औरत जैसा था.जसजीत की नज़र उसकी 36 इंच की गंद पे पड़ी तो उसका हाथ अपनेआप अपने लंड पे चला गया....बस 1 ही लफ्ज़ था उस नाग के लिए-मस्त! आज भी अंजलि की कमर बस 28 इंच की ही थी & जसजीत को उसकी नाज़ुक कमर मे हाथ डाल उसे अपने सीने से लगाने मे आज भी वोही मज़ा आता था जो उसे अपने हनिमून पे आया था.नहाते हुए अंजलि थोड़ा सा घूमी & जसजीत ने उसकी गोरी 36 इंच बड़ी चूचियो की 1 झलक देखी.उनपे सजे गुलाबी निपल्स पानी की ठंडक से कड़े हो रहे थे. "हाआ.....!",अंजलि चौंक पड़ी,"..आप?!!मैं तो डर ही गयी थी.",जसजीत ने शवर के नीचे उसे पीछे से अपनी बाहो मे भर लिया था & उसकी गर्दन चूम रहा था. "यहा मेरे अलावा & कौन तुम्हारे बदन को यू हाथ लगाएगा,जानेमन?",जसजीत ने उसके दाए कान को अपने दन्तो तले हल्के से दबा के काटा. "ऊन्न्ह्ह..!",अंजलि पीछे हो अपने पति के जिस्म से टिक गयी & अपनी बाहे उपर ले जा उसके गले मे डाल दी,"यहा क्या कही भी आपके सिवा & कोई मुझे इस तरह से थोड़े ही हाथ लगा सकता है.",उसने अपना चेहरा दाई तरफ घुमाया तो जसजीत ने उसके नर्म,गुलाबी होंठ अपने होंठो से सील दिए.किसी भी मर्द से जब उसकी दिलरुबा ये इज़हार करे कि उसके उपर सिर्फ़ उसी का हक़ है तो ये बात शायद उस मर्द के लिए सबसे ज़्यादा जोश बढ़ाने वाली होती है.जसजीत के साथ भी ऐसा ही हुआ & उसका लंड अपनी पूरी 8.5 इंच की लूंबाई तक तन गया. "उउन्ण....अभी नही.बच्चों को देर हो जाएगी.",जसजीत ने बीवी की कसी गंद की दरार मे लंड फँसा के उसकी चूचियाँ पकड़ के उन्हे बड़े प्यार से दबाया. "परेशान क्यू होती हो.अभी बहुत वक़्त है.",बीवी के लबो को अपने लबो से खामोश कर जसजीत ने शेल्फ से शवर गेल की बॉटल उठा उसके सीने पे जेल गिराया & फिर लूवाफे लेके जेल को उसके सीने & पेट पे रगड़ने लगा. "ऊन्णन्न्....जस....प्लीज़....

छ्चोड़िए ना!",अपने जिस्म पे चलते पति के हाथो के उपर उसने अपने हाथ जमा दिए थे & देखने से नही लगता था कि वो उन हाथो का घूमना रोकना चाहती थी.लूवाफे से पैदा झाग अब अंजलि के सीने & पेट को ढक चुका था & उसके पति के हाथ अब उसे उसकी चूत के आस-पास दोनो जाँघो पे घूम रहे थे.जसजीत बैठ गया पीछे से अंजलि की भारी जाँघो & सुडोल टाँगो को रगड़ने लगा. "उउन्न्ञणन्.....आनन्न....!",बाथरूम मे बस शवर से गिरते पानी & अंजलि की मदहोश आहो की आवाज़े थी.वो सामने दीवार को थामे खड़ी थी & जसजीत उसकी गंद पे लूवाफे रगड़ रहा था.मस्ती मे बहकति अंजलि ने गर्दन घुमाई तो उसकी निगाह भी शवर जेल पे पड़ी.उसने हाथो मे जेल लिया & पति को उठाया & घुमके उसके सामने हुई & उसके बालो भरे सीने पे जेल रगड़ने लगी.जसजीत ने बीवी को बाहो मे भरा & उसकी मांसल बाहो को रगड़ने लगा. अंजलि के हाथ जसजीत के सीने से नीचे उसके पेट पे गये फिर उस से नीचे & फिर उसने हाथ रोक लिए.जसजीत ने उसे सवालिया नज़रो से देखा तो वो बड़ी शोखी से मुस्कुराइ,"..अब आप नहाइए.मुझे जाना है वरना बच्चो को देर हो जाएगी.",वो शवर से निकल जाने लगी. जसजीत ने उसकी बाँह पकड़ उसे जाने से रोका,"मैने तुम्हे नहलाया,अब तुम मुझे नहलायो.",उसने उसका दाया हाथ अपने लंड पे रख के दबा दिया.अंजलि के गाल पे हया की लाली दौड़ गयी & उसके गुलाबी गाल & सुर्ख हो गये.जसजीत ने बाहो मे भींच उसके बाए गाल को चूम लिया....शादी के इतने सालो बाद भी वो उसके लंड से खेलते वक़्त शर्मा जाती थी.वो पागल था जो थोड़ी देर पहले और औरतो को ना चोद पाने का अफ़सोस कर रहा था.ऐसी सुशील & खूबसूरत बीवी किस्मतवालो को मिलती है & वो इस से बेवफ़ाई कर उसका प्यार नही खो सकता था. उसने उसे चूमते हुए दाया हाथ पीछे ले जाके उसकी गंद को दबाया & फिर पीछे से ही 1 उंगली उसकी चूत मे घुसा दी. "ऊऊन्न्न्नह....जस....आआहह..",उसका हाथ पति के लंड को तेज़ी से हिला रहा था,"..आज तो आप सच मे देर करा देंगे.",उसने उसके कानो मे पागलो की तरह जीभ फिराई.जसजीत समझ गया कि अंजलि अब पूरी तरह से गरम हो चुकी है.उसने उसे बाथरूम की दीवार से सटाया & थोड़ा झुक के उसकी टाँगो को फैलाया तो अंजलि ने खुद ही अपनी दाई टांग उठा दी.जसजीत की बाई बाँह ने उसे संभाला & अगले ही पल उसका लंड अंजलि की चूत मे घुस गया. "ऊऊव्व्वव...!",अंजलि कराही & आगे बढ़ अपने पति के गले मे बाहे कस उसके बदन से झूल गयी.जसजीत ने उसकी भारी जाँघो के नीचे बाहे लगाते हुए उसकी गंद को थामा & अपनी बाहो के झूले मे झूलता उसकी चुदाई करने लगा.अंजलि की चूत मे अभी भी ग़ज़ब की कसावट थी & अंजलि भी पति के तगड़े लंड की कायल थी. "हान्णन्न्....आआहह......ऊऊफफफफ्फ़.....ऊहह....!",उसे बहुत सुकून मिलता था पति की बाहो मे जब वो इस तरह से उसे प्यार करता था.वो उसे ऐसे उठाए था मानो वो कोई गुड़िया हो & उसकी आँखो मे कितना प्यार था उसके लिए...कितनी चाहत!अंजलि का दिल भर आया.उसकी चूत मे 1 कसमशत हो रही थी & उसके दिल के जज़्बात उसे पागल कर रहे थे.उसका दिल किया कि अपना सारा प्यार अपने पति पे उडेल दे & वो पागलो की तरह उसे चूमने लगी.बीवी की गर्मजोशी ने जसजीत को भी दीवाना कर दिया & उसके धक्के & तेज़ हो गये. वो अब बस उसके अंदर झड़ना चाहता था & अंजलि के चेहरे पे वो भाव देखना चाहता था जो उसके झड़ने के साथ आता था.वो फ़ौरन अपने घुटनो पे बैठा & फिर वैसे ही बिना लंड चूत से निकाले उसने अंजलि को बाथरूम के फर्श पे लिटा दिया & उपर से तेज़-2 धक्के लगाने लगा.कभी वो अंजलि के होंठो को चूमता तो कभी उसके गले को.कभी उसके होंठ उसकी चूचियो तक पहुँच जाते तो कभी उसके चेहरे को सहलाती अंजलि की प्यारी उंगलियो पे. अंजली ने उसे अपने जिस्म से बिल्कुल चिपका लिया था & अपनी बाहो & टाँगो मे उसे क़ैद कर लिया था.उसके चेहरे पे बहुत तकलीफ़ के भाव थे मगर जसजीत जानता था कि इस वक़्त वो जन्नत मे उड़ रही है.वो अपनी बीवी को मस्ती का आसमान च्छुआ रहा है,इस ख़याल ने जसजीत को और गर्म कर दिया & जैसे ही अंजलि उसकी पीठ नोचती हुई आँखे बंद कर अपना बदन मोड़ने लगी उसने भी उसका नाम लेते हुए अपना वीर्य उसकी चूत मे छ्चोड़ा & उसके साथ-2 झाड़ गया. "अब कुच्छ किया तो बच्चे स्कूल जा ही नही पाएँगे!",अंजलि ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हो बिंदी लगा रही थी जब जसजीत ने उसे फिर से पीछे से बाहो मे भर लिया था.उसकी बात से उसे हँसी आ गयी. "ये तो आपने सही कहा,श्रीमती मुख्यमंत्री जी!",अंजलि घूमी & अपने पति को सवालिया नज़रो से देखा. "क्या हुआ?नया नाम पसंद नही आया?",उसने उसकी ठुड्डी पकड़ उपर की. "जस,वक़्त से पहले खुशिया मनाना अच्छा नही होता." "क्या जान तुम भी!अब ये बात तो पक्की है की मैं CM बन रहा हू & तुम CM की बीवी!",अंजलि की आँखो मे परेशानी के भाव आ गये थे. "अच्छा-2,अब नही बोलूँगा.अब चुनाव के नतीजे आने के बाद बोलूँगा.खुश?",अंजलि मुस्कुरा दी तो जसजीत ने उसे चूम लिया. "अब तैय्यार हो जाइए.मैं बच्चो को देख आऊँ.",जसजीत तैय्यारि करने लगा,अपनी आनेवाली जीत की ओर 1 और कदम बढ़ाने की. ------------------------------------------------------------------------------- उसने दूरबीन से देखा जसजीत के दोनो बेटे कार की पिच्छली सीट पे बैठ रहे थे & दोनो मिया-बीवी बच्चो को विदा कर रहे थे.ग्रे कलर की मारुति शX4 मे दोनो बच्चे बैठे थे & उनके साथ बस ड्राइवर था.कार का नंबर वो इतनी दूर से नही देख पाया.अभी तक उसकी मुश्किल आसान नही हुई थी,अंदर जाने का रास्ता उसे अभी तक नही समझ आया था कि तभी 1 ख़याल उसके दिमाग़ मे कौंधा....नही..ये बहुत घिनोनी हरकत होगी....लेकिन वो उसे मार नही रहा बस छीन रहा है...कुच्छ दीनो के लिए....हां....जसजीत को नुकसान पहुचाने से कुच्छ नही होगा लेकिन अगर उसके किसी करीबी को नुकसान पहुचाए तो....तब उसे समझ आएगा..हां यही ठीक है & इसके लिए घर के अंदर जाने की ज़रूरत भी नही लेकिन अभी उसे बंगल पे नज़र रखनी ही थी.वो प्रधान परिवार की रोज़ की रुटीन को अच्छी तरह से समझ लेना चाहता था. 10 बजे के करीब प्रधान बाहर आया & 1 होंडा अकॉर्ड मे बैठके निकल गया.अभी तक उसे घर मे 2 गाड़िया दिखी थी & उतने ही ड्राइवर.उसने पति को विदा करती अंजलि को गौर से देखा..बहुत खूबसूरत थी,वो जो करेगा उस से सबसे ज़्यादा तकलीफ़ उसे ही पहुचने वाली थी.उसे बुरा लगा मगर ये ज़रूरी था....ज़रूरी था ताकि प्रधान जैसे लोग आगे से उस जैसे लोगो को भी इंसान समझें. ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- क्रमशः..........

raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 10:50

KHEL KHILADI KA paart--8

gataank se aage.............. vo insan jisne anjane me kitne hi logo ko bas apni kamyabi se apna dushman bana liya tha subah ke 6 baje gehri nind me so raha tha jab kisi aavaz se uski nind khuli.usne aankhe kholi to dekha ki uski biwi Anjali bistar pe nahi thi.bathroom se pani girne ki aavaz aa rahi thi,vo samajh gaya ki anjali naha rahi hai.uske hotho pe muskan fail gayi.raat ko chahe kitni hi der se soyo,anjali bachcho ko school bhejne se pehle taiyyar ho jati thi.ghar me naukro ki fauj thi magar pati & bachcho ke liye vo apne hatho se khana banati thi & jaha tak ho sake unke sare kaam khud karti thi. Jasjit bistar se utha & apne kapde utar diye & kamre ke cupboard pe lage aadamkad shishe ke samne nanga khada ho gaya.42 saal ki umra me bhi uska badan chust tha.usne apne pet pe hath phera joki zara bhi bahar nahi nikla tha"....jasjit pradhan,mukhya mantri.",vo budbudaya.uske sapne pure ho rahe the.is baar ke chunav me uski zindagi bhar ki mehnat rang lane wali thi.vo janta tha ki uska jeetna tay hai & usi ki badaulat uski party ki jeet bhi tay thi.is baar vo mukhyamantri banega & aage,"....haaaa..!",usne jeetene vale khiladi ke andaz me hawa me mutthi lehrayi.yaha tak ke safar me use kuchh kandho pe panv rakhne pade the magar ye sab to siyasat ka hissa hai..aaj tak usne kuchh aisa nahi kiya tha joki uske career ki raah me roda bane. uska dhyan fir se apni surat & jism pe gaya.vo janta tha ki aurato ko uska chehra bahut bhata tha & use bhi auraten bahut pasand thi.bas yehi 1 kami thi uski zindagi me..vo chah ke bhi apna zayka nahi abdal sakta tha.aisa nahi tha ki anjali khubsurat nahi thi....bala ki haseen thi vo & dilkash itni ki puchho mat..maghar roz-2 biryani to nahi khayi ja sakti na..kabhi-kabhar insan chaat bhi khana chahta hai..! use apne khayalo pe hansi aa gayi..yehi to farq tha usme & baki netaon me..vo apne lalach,apni kamzoriyo pe kabu nahi rakh pate the magar vo aisa nahi tha.arjun ki tarah use bas machhli ki aankh dikhti thi & kuchh nahi.use apni kabiliyat pe gurur ho aaya ki tabhi shishe me uski nazar apne nichle badan pe padi,anjali ke khayal se uska soya lund khada ho raha tha.vo muskuraya & bathroom me ghus gaya. bathroom me kadam rakhte hi use uski maujoodgi se bekhabar shower ke neeche nangi khadi anjali dikhi.38 baras & 2 bachcho ke baad bhi uska jism kisi 30 baras ki aurat jaisa tha.jasjit ki nazar uski 36 inch ki gand pe padi to uska hath apneaap apne lund pe chala gaya....bas 1 hi lafz tha us nag ke liye-mast! aaj bhi anjali ki kamar bas 28 inch ki hi thi & jasjit ko uski nazuk kamar me hath daal use apne seene se lagane me aaj bhi vohi maza aata tha jo use apne honeymoon pe aaya tha.nahate hue anjali thoda sa ghumi & jasjit ne uski gori 36 inch badi chhatiyo ki 1 jhalak dekhi.unpe saje gulabi nipples pani ki thandak se kade ho rahe the. "haaaa.....!",anjali chaunk padi,"..aap?!!main to darr hi gayi thi.",jasjit ne shower ke neeche use peechhe se apni baaho me bhar liya tha & uski gardan chum raha tha. "yaha mere alawa & kaun tumhare badan ko yu hath lagayega,janeman?",jasjit ne uske daye kaan ko apne danto tale halke se daba ke kata. "oonnhh..!",anjali peechhe ho apne pati ke jism se tik gayi & apni baahe upar le ja uske gale me daali di,"yaha kya kahi bhi aapke siwa & koi mujhe is tarah se thode hi hath laga sakta hai.",usne apna chehra dayi taraf ghumaya to jasjit ne uske narm,gulabi honth apne hotho se sil diye.kisi bhi mard se jab uski dilruba ye izhar kare ki uske upar sirf usi ka haq hai to ye baat shayad us mard ke liye sabse zyada josh badhane wali hoti hai.jasjit ke sath bhi aisa hi hua & uska lund apni puri 8.5 inch ki lumbi tak tan gaya. "uunn....abhi nahi.bachchon ko der ho jayegi.",jasjit ne biwi ki kasi gand ki darar me lund fansa ke uski chhatiya pakd ke unhe bade pyar se dabaya. "pareshan kyu hoti ho.abhi bahut waqt hai.",biwi ke labo ko apne labo se khamosh kar jasjit ne shelf se shower gel ki bottle utha uske seene pe gel giraya & fir loofah leke gel ko uske seene & pet pe ragadne laga. "oonnnn....jas....please....

chhodiye na!",apne jism pe chalte pati ke hatho ke upar usne apne hath jama diye the & dekhne se nahi lagta tha ki vo un hatho ka ghumna rokna chahti thi.loofah se paida jhag ab anjali ke seene & pet ko dhak chuka tha & uske pati ke hathy ab use uski chut ke aas-paas dono jangho pe ghum rahe the.jasjit baith gaya peechhe se anjali ki bhari jangho & sudol tango ko ragadne laga. "uunnnnn.....aannn....!",bathroom me bas shower se girte pani & anjali ki madhosh aaho ki aavaze thi.vo samne deewar ko thame khadi thi & jasjit uski gand pe loofah ragad raha tha.masti me behakti anjali ne gardan ghumayi to uski nigah bhi shower gel pe padi.usne hatho me gel liya & pati ko uthaya & ghumke uske samne hui & uske balo bhare seene pe gel ragadne lagi.jasjit ne biwi ko baaho me bhara & uski mansal baaho ko ragadne laga. anjali ke hath jasjit ke seene se neeche uske pet pe gaye fir us se neeche & fir usne hath rok liye.jasjit ne use sawaliya nazro se dekha to vo badi shokhi se muskurayi,"..ab aap nahaiye.mujhe jana hai varna bachcho ko der ho jayegi.",vo shower se nikal jane lagi. jasjit ne uski banh pakad use jane se roka,"maine tumhe nahlaya,ab tum mujhe nahlayo.",usne uska daya hath apne lund pe rakh ke daba diya.anjali ke gaal pe haya ki lali daud gayi & uske gulabi gaal & surkh ho gaye.jasjit ne baaho me bhinch uske baaye gaal ko chum liya....shadi ke itne salo baad bhi vo uske lund se khelte waqt sharma jati thi.vo pagal tha jo thodi der pehle aur aurato ko na chod pane ka afsos kar raha tha.aisi sushil & khubsurat biwi kismatwalo ko milti hai & vo is se bewafai kar uska pyar nahi kho sakta tha. usne use chumte hue daya hath peechhe le jake uski gand ko dabaya & fir peechhe se hi 1 ungli uski chut me ghusa di. "oooonnnnhhhh....jas....aaaahhhh..",uska hath pati ke lund ko tezi se hila raha tha,"..aaj to aap asch me der kara denge.",usne uske kano me paglo ki tarah jibh firayi.jasjit samajh gaya ki anjali ab puri tarah se garam ho chuki hai.usne use bathroom ki deewar se sataya & thoda jhuk ke uski tango ko failaya to anjali ne khud hi apni dayi tang utha di.jasjit ki bayi banh ne use sambhala & agle hi pal uska lund anjali ki chut me ghus gaya. "OOOOW..!",anjali karahi & aage badh apne pati ke gale me baahe kas uske badan se jhul gayi.jasjit ne uski bhari jangho ke neeche baahe lagate hue uski gand ko thama & apni baaho ke jhule me jhulata uski chudai karne laga.anjali ki chut me abhi bhi gazab ki kasavat thi & anjali bhi pati ke tagde lund ki kayal thi. 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"ab kuchh kiya to bachche school ja hi nahi payenge!",Anjali dressing table ke samne khadi ho bindi laga rahi thi jab Jasjit ne use fir se peechhe se baaho me bhar liya tha.uski baat se use hansi aa gayi. "ye to aapne sahi kaha,shrimati mukhyamantri ji!",anjali ghumi & apne pati ko sawaliya nazro se dekha. "kya hua?naya naam pasand nahi aaya?",usne uski thuddi pakad upar ki. "Jas,waqt se pehle khushiya manana achha nahi hota." "kya jaan tum bhi!ab ye baat to pakki hai ki main CM ban raha hu & tum CM ki biwi!",anjali ki aankho me pareshani ke bhav aa gaye the. "achha-2,ab nahi bolunga.ab chunav ke natije aane ke baad bolunga.khush?",anjali muskura di to jasjit ne use chum liya. "ab taiyyar ho jaiye.main bachcho ko dekh aaoon.",jasjit taiyyari karne laga,apni aanevali jeet ki or 1 aur kadam badhane ki. ------------------------------------------------------------------------------- usne durbin se dekha jasjit ke dono bete car ki pichhli seat pe baith rahe the & dono miya-biwi bachcho ko vida kar rahe the.grey colour ki Maruti SX4 me dono bachche baithe the & unke sath bas driver tha.car ka number vo itni door se nahi dekh paya.abhi tak uski mushkil aasan nahi hui thi,andar jane ka rasta use abhi tak nahi samajh aaya tha ki tabhi 1 khayal uske dimagh me kaundha....nahi..ye bahut ghinoni harkat hogi....lekin vo use maar nahi raha bas chheen raha hai...kuchh dino ke liye....haan....jasjit ko nuksan pahuchane se kuchh nahi hoga lekin agar uske kisi karibi ko nuksan pahuchaye to....tab use samajh aayega..haan yehi thik hai & iske liye ghar ke andar jane ki zarurat bhi nahi lekin abhi use bungle pe nazar rakhni hi thi.vo pradhan parivar ki roz ki routine ko achhi tarah se samajh lena chahta tha. 10 baje ke kareeb pradhan bahar aaya & 1 Honda Accord me baithke nikal gaya.abhi tak use ghar me 2 gaadiya dikhi thi & utne hi driver.usne pati ko vida karti anjali ko gaur se dekha..bahut khubsurat thi,vo jo karega us se sabse zyada taklif use hi pahuchne vali thi.use bura laga magar ye zaruri tha....zaruri tha taki pradhan jaise log aage se us jaise logo ko bhi insan samjhen. ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- क्रमशः...........

raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 10:55

गतान्क से आगे..............

क्लेरियन होटेल,डेवाले के 6 5 स्टार होटेल्स मे से 1.नीना उस होटेल की लॉबी को तेज़ कदमो से पार करती हुई लिफ्ट्स की ओर जा रही थी.उसने 1 आसमानी रंग की हॉल्टर नेक,लुंबी फ्लोयिंग ड्रेस पहनी थी.ड्रेस उसके सीने से लेके पेट तक कसी हुई थी & नीचे से ढीली.पीछे उपरी पीठ नंगी थी जिसपे उसके सीने तक के लंबे बाल खुले लहरा रहे थे.आँखो पे ओवरसाइज़ सनग्लासस थे & 1 कंधे पे डिज़ाइनर हॅंडबॅग.सामने ड्रेस के गले से क्लीवेज का बस अंदेशा भर हो रहा था.वो लिफ्ट मे घुसी तो बेल्लबोय ने उसे सलाम ठोंका,"10थ फ्लोर.",नीना लिफ्ट के अंदर दाखिल हुई.उसने सभी काम जल्दी निपटाया था फिर भी 10:30 बज गये थे.जो भी हो अगले 4 घंटो तक वो अपनी सारी परेशानिया भूल जाएगी,इसका उसे यकीन था & अगर किस्मत अच्छी रही तो वो परेशानिया शायद हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएँगी. दसवी मंज़िल के सुनसान गलियारे को पार कर नीना 1 सूयीट के दरवाज़े पे पहुँची & कंधे से अपना बॅग उतार उसमे से 1 के कार्ड निकाला & बगल मे बने स्लॉट मे लगा दरवाज़ा खोल अंदर दाखिल हुई.1 कमरे को पार कर वो अंदर के कमरे मे पहुँची जिसके किंग साइज़ पलंग के हेडबोर्ड से पीठ लगाए 1 मर्द बैठा था.1 चादर उसकी कमर तक पड़ी हुई थी & उसका उपरी जिस्म नंगा था.कमरे मे बस साइड-टेबल्स के लॅंप्स जल रहे थे & बड़ा रोमानी माहौल था.नीना उस मर्द को देख मुस्कुराइ,"हेलो,महेश." वो मुस्कुराते हुए आई,अपना बॅग 1 कुर्सी पे फेंका & महेश अरोरा के बाई तरफ बिस्तर से पैर लटका के बैठ गयी.उसकी आँखे कमरे मे घुसते ही महेश की नज़रो से जा मिली थी & दोनो लगातार 1 दूसरे को देखे जा रहे थे.नीना अपना बाया हाथ महेश के जिस्म के पार कर बिस्तर पे टीकाया & अपना चेहरा महेश के चेहरे के करीब ले आके सर नीचे झुकाया,चादर मे कुच्छ हुलचूल हो रही थी.नीना समझ गयी कि महेश का निचला जिस्म भी नंगा है. "बहुत इंतेज़ार कराया तुमने." "तो?",नीना की आँखो मे हुस्न का गुरूर था. "तो मुझे इंतेज़ार करना पसंद नही!" "मुझसे मिलना है तो इंतेज़ार करना सीखो.",महेश ने बिजली की तेज़ी से दाए हाथ से नीना के सर को पकड़ा & ज़ोर से उसके होंठ चूमने लगा.नीना ने छूटने की कोशिश की तो उसने उसकी गर्दन पकड़ उसे दाई तरफ खींचा & बाए हाथ से उसकी जाँघ पकड़ उसे उपर बिस्तर पे खींच लिया.अब नीना अपनी गंद उसके चादर मे च्छूपे लंड पे टिकाए उसकी गोद मे पड़ी थी. महेश ने दाए हाथ से उसके सर को उठाया & फिर से उसे चूमने लगा.उसके बाए हाथ ने नीना की ड्रेस को कमर तक कर दिया.नीना ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने उसकी कोशिश नाकाम कर दी.उसने नीना के होंठ छ्चोड़े & उसकी आँखो मे देखता हुआ उसकी गोरी,सुडोल टाँगे & मक्खनी जंघे सहलाने लगा.नीना को उसका ये अंदाज़ बहुत पसंद था & उसने उसे भड़काने के लिए ही वैसे बदतमीज़ी & गुरूर से बात की थी.उसे ऐसे ही मर्द पसंद थे,मज़बूत,ताक़तवर,हर बात को अपने काबू मे रखनेवाले.ऐसे मर्दो की बाहो मे उसे बहुत सुकून मिलता था. महेश की उम्र 40 बरस की थी लेकिन उसका 5'9" लंबा शरीर बहुत गतिला था.नीना ने अपना दाया हाथ बड़ी हसरत से उसके घने बालो से ढँके चौड़े सीने पे फिराया & फिर उसके मज़बूत कंधो कसरती बाजुओ को सहलाने लगी.उसके छुने मे महेश को उसकी हसरातो की पुकार सॉफ सुनाई दे रही थी.उसने गर्दन घुमा नीना की नंगी जाँघो को देखा.नीना का कद छ्होटा था & वो अभी भी अपने जिस्म का बहुत ख़याल रखती थी.उसकी कमर अभी भी बस 26 इंच की थी & उसके नीचे 36 इंच की गंद जब महेश की आँखो के सामने होती तो वो जोश से पागल हो उठता था. उसने अपने बाए हाथ की उंगलियो के पोरो को हल्के से उसकी पुष्ट जाँघो के अन्द्रुनि हिस्से पे फिराया तो नीना ने अपने घुटने मोड़ लिए.उसकी आँखो मे नशा उतर आया & रसीले,गुलाबी होंठ आधे खुल गये.महेश ने फिर से उसके सर को अपनी तरफ किया & ज़ोर से उसके निचले होंठ को चूमने लगा.उसकी मूच्छें नीना के उपरी होंठो पे गुदगुदी कर रही थी.नीना मस्त हो गयी & अपनी जीभ अपने प्रेमी के मुँह मे घुसा दी.अपनी बाई बाँह उसके गले मे डाल वो उसके पूरे बदन को सहलाते हुए उसे चूम रही थी. महेश ने उसके होंठ छ्चोड़ ड्रेस को थोड़ा & उपर किया तो उसे नीना की आसमानी रंग की छ्होटी सी पॅंटी नज़र आई.नीना ने आज जो लाइनाये पहनी थी,उसे उसने 2 दिन पहले खास आज की मुलाक़ात के लिए ही खरीदा था.वो महेश का चेहरा देख रही थी उसका रिक्षन जानने के लिए.महेश ने ड्रेस थोड़ा और उपर कर नीना के पेट पे कर दिया.पॅंटी बहुत ही छ्होटी थी & सामने बस 1 तिकोना सा कपड़ा दिख रहा था जो केवल नीना की चूत को ढँके था. महेश का बाया हाथ पॅंटी के उपर घूमने लगा तो नीना का नशा और बढ़ गया & वो हल्की-2 आहे भरने लगी,"ओह्ह..महेश..हान्णन्न्..!"

,वो महेश को बेतहाशा चूमे जा रही थी.उसकी चूत ने रस बहाना शुरू कर दिया था & वो अब अपने सभी गम भूल चुकी थी.महेश का हाथ उसके हाइ हील्स मे बँधे पाओ से उसकी टाँगो पे आता & फिर उसकी जाँघो को रगड़ते हुए उसकी पॅंटी पे.उसकी ज़ुबान कभी उसकी गर्दन पे चलती,कभी कानो पे तो कभी उसके मुँह के अंदर.अभी तक उसने वैसे ही नीना के बदन को अपनी बाहो मे थामा हुआ था.नीना उसकी जिस्मानी ताक़त की मुरीद हो गयी थी & खुद को उसके रहमोकरम पे छ्चोड़ दिया था. महेश ने पॅंटी के उपर से ही उसकी ज़ुबान से अपनी ज़ुबान लड़ाते हुए उसके दाने को मसल दिया & ये हरकत नीना झेल नही पाई,"आआहह.....!",वो महेश के सीने से चिपक गयी & उसके दाए कान मे जीभ चलाती झाड़ गयी.उसने अपनी जंघे कस के भीच ली थी & सिसक रही थी. महेश ने नीना को बिना नंगी किए 1 बार झाड़वा दिया था & इस बात ने नीना की खुमारी और बढ़ा दी थी.वो अभी उसी नशे मे थी कि उसे महसूस हुआ कि उसके खुले बालो के नीचे उसकी गर्दन के पीछे छुपे ड्रेस के हुक को उसके पति का दोस्त खोल रहा है....अब उसके नंगे जिस्म पे उसके मज़बूत हाथ घूमेंगे & उसका मज़ा & बढ़ेगा..इस ख़याल से ही नीना मदहोश हो गयी. हुक खुलते ही ड्रेस का उपरी हिस्सा आगे उसकी गोद मे आ गिरा & अब महेश की आँखो के सामने नीना की सुरहिदार गर्दन थी जिसमे 1 मोतियो का चॉकर पड़ा था & उसका मॅचिंग आसमानी स्ट्रेप्लेस्स ब्रा था जोकि उसकी तेज़ धड़कनो की गवाही देते सीने को च्छुपाए हुए था.नीना ने नशीली आँखो से अपने प्रेमी को देखा,"सिर्फ़ तुम्हारे लिए है ये सब!" नीना ने महेश से होने वाली हर मुलाक़ात को यादगार बना देना चाहती थी & इसी लिए उसने ये ड्रेस & ये लाइनाये सब खरीदे थे.महेश पे उसकी बात & उसकी तैय्यारि का पूरा असर हुआ था.उसकी आँखो मे अब नीना के जिस्म से मिलने की चाह & भड़कती दिख रही थी.उसने ड्रेस को उसके पेट से नीचे सरकया तो उसकी गोद मे पड़ी नीना ने अपनी गंद उचका दी & अगले ही पल ड्रेस कमरे के फर्श पे पड़ी थी. महेश ने 1 बार फिर अपनी दाई बाँह मे नीना की पीठ को घेर अपनी ओर खींचा & उसके ब्रा के उपर & गले के नीचे के हिस्से पे चूमने लगा.नीना उस से चिपक के आहे भरने लगी & अपने नाख़ून उसकी पीठ पे नीचे से उपर तक चलाने लगी.उसकी इस हरकत से महेश के जिस्म मे सनसनी दौड़ गयी.उसने बाए हाथ को,जोकि नीना के झड़ने के बाद फिर से उसकी मस्त जाँघो को मसल रहा था,उपर किया & नीना के ब्रा को नीचे किया. नीना के चेहरे पे मुस्कान खिल उठी & वो सर नीचे झुका अपने प्रेमी को देखने लगी.महेश ने बाए हाथ को उसकी दाई चूची के नीचे लगाया,वो गौर से उसके सीने को देख रहा था.नीना की चूचिया थी ही ऐसी-36 साइज़ की छातियो पे शहद के रंग के निपल्स थे जोकि इस वक़्त बिल्कुल कड़े थे.उसके निपल्स का रंग अनोखा था & आज तक जितने भी मर्दो के साथ वो हमबिस्तर हुई थी सब उनकी खूबसूरती पे हैरान हुए बिना नही रहे थे. "क्या देख रहे हो?",नीना ने उसके बालो को खींच उसका सर उपर उठाया. महेश ने बाया हाथ उसकी चूची से हटाया & पीठ पे ले जा ब्रा के हुक्स खोल दिए & फिर बाई चूची को अपनी मुट्ठी मे यू भरा की उंगलियो & अंगूठे के बीच से उसका निपल दिखता रहे & फिर बहुत ज़ोर से दबा दिया. "ऊव्व..!",नीना कराही मगर उसने उसे रोकने की कोई कोशिश नही की. "देख रहा हू असली हैं या नक़ली.",& महेश ने अपना सर नीना के सीने पे झुका दिया.अब तो नीना की हालत खराब हो गयी.महेश बेतहाशा उसकी चूचियो को चूमे & चूसे जा रहा था.उसका बाया हाथ भी उन्हे पूरी शिद्दत से मसल & दबा रहे थे. "ऊहह.....हााईयईईईईई......नहियीईईईईईई.....उूउउम्म्म्ममम......पागल हो क्या!......उउफफफफफफ्फ़....!",बड़ी देर तक नीना की आहो से बेपरवाह महेश उसके सीने से लगा रहा.तभी नीना को अपनी चूत पे कुच्छ महसूस हुआ.उसे पता भी ना चला था & महेश ने अपना बाया हाथ उसके सीने से हटा उसकी पॅंटी पे लगा दिया था & उसे उतार रहा था.