खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 16:04

खेल खिलाड़ी का पार्ट--55

गतान्क से आगे............-

"कमिशनर साहब,जसजीत जी के बेटे के केस की क्या खबर है?",CM अत्रे बस अभी-2 जसजीत से मिलने के बाद अपने दफ़्तर आए थे.

"सर,पूरी फोर्स इसी काम मे जुटी है."

"क्यू?क्या बाकी जुर्म होने बंद हो गये हैं?",अत्रे ने 1 फाइल उठा के पैनी निगाह से कमिशनर को देखा,"देखिए,ये केस बहुत ज़रूरी है मैं मानता हू मगर इसके चलते बाकी काम नही रुकना चाहिए."

"सर,हम पूरी मुस्तैदी से अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभा रहे हैं."

"हूँ..वैसे क्या लगता है कब तक सुलझेगा ये मामला?"

"सर,आपको तो पता ही है आज पहली बार किडनॅपर्स ने कॉंटॅक्ट किया है.अभी तक तो उनकी माँगे भी नही पता चली हैं.कुच्छ पक्का नही कहा जा सकता.अगर किस्मत अच्छी रही तो चंद दिनो मे सुलझ जाएगा मामला नही तो हफ्ते भी लग सकते हैं."

"हूँ..",उन्होने फाइल पे नज़रें गढ़ा दी,"..हफ्ते ही लगे तो ठीक हैं.अब आप जा सकते हैं."

"सर.",कमिशनर ने CM की कही आख़िरी बात का मतलब समझ लिया था.वो जानता था कि अत्रे 1 नेता पहले है & CM की कुर्सी उसे कितनी प्यारी है.प्रधान को कमज़ोर करने का कोई मौका वो भला क्यू छ्चोड़ेगा मगर इस सब मे वो बच्चा मोहरा बन के रह गया था....लेकिन वो कर भी क्या सकता था?..लेकिन वो इस शहर का कमिशनर था..चाहे कुछ भी हो जाए,वो केवल बच्चे को बचाने को तवज्जो देगा,अत्रे & बाकी नेता इंतेज़ार कर सकते थे.

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"क्या पता चला,डॉक्टर?",अजीत ने फोरेन्सिक लॅब के चीफ से पुचछा.

"1 बहुत ज़रूरी बात."

"बताइए."

"ये सुव चोरी की है."

"अच्छा!"

"हाँ,इसके एंजिन पे इसका चॅसी नंबर खुरछ के उसे बदलने की कोशिश की गयी है मगर फिर भी हमने अंदाज़ लगा लिया है कि नंबर क्या हो सकता है..ये देखिए.",उसने 1 काग़ज़ अजीत को दिया.

"जीएच10045287ल या गफ़10095287ई..थॅंक्स,डॉक्टर.देखते हैं आपकी निकली ये जानकारी क्या रंग लाती है."

"वेलकम,ऑफीसर."

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"वो लौंडा तो बेकार है ये मैं जानता हू.",बल्लू रघु & रानो के साथ बैठा था,"..अकेला पूरा चेहरा दुनिया को दिखाते हुए बच्चे को अगवा करने आ गया,गधा कहीं का!..लेकिन वो गॅंग जिसने उस से बच्चे को छ्चीना वो पेशेवर है,बाबा."

"हाँ,बल्ले..अभी-2 मुझे बलदेव ने बताया है कि पोलीस को वो गाड़ी मिल गयी है जिसमे लड़का भागा था & वो गाड़ी भी जिसमे वो सोचते हैं कि बच्चा अगवा हुआ था."

"क्या?!"

"हां,बेटा मगर वो गॅंग की गाड़ी बिल्कुल जली हुई है."

"धात तेरे की!",बल्लू झल्लाया,"बाबा,मैने सारे शहर मे सभी गॅंग्स के यहा पता करवा लिया है.ये अपने शहर क्या अपने राज्य के किसी गॅंग का काम नही है.सब साले सोच रहे हैं कि इतना बड़ा कांड करने वाला ये रातोरात नया गॅंग पैदा कैसे हो गया!"

"पैदा जब भी हुआ हो,बल्लू..",रानो की आवाज़ खून जमाने वाली थी,"..उन्हे मौत की नींद हम ही सुलाएँगे."

अगली रात अजीत फिर घर नही आ पाया था & वरुण & मेघना ने 1 और रात 1 ही कमरे मे बिताई.इस रात दोनो की कशमकश और ज़्यादा थी.दोनो के दिल बीती बातो को याद कर उनके जिस्मो की बेचैनी बढ़ाए जा रहे थे.

पूरी रात दोनो ने आँखो-2 मे काट दी.सवेरे फिर पिच्छले दिन की ही तरह वरुण के लिए मोना ने चाइ बनाई जिसे पीते हुए वो टीवी देख रहा था.वो कार जिसमे किडनॅपर्स अनीश को छ्चीन के ले गये थे,उसकी बरामदगी की खबर से उसे उनके पकड़े जाने की कुच्छ उम्मीद जागी मगर तभी टीवी पे अगली खबर सुनते ही उसके होश उड़ गये.

"वरुण अवस्थी नाम का ये शख्स सज़ायाफ़्ता मुजरिम है & जसजीत प्रधान के बेटे के अफ़रन के सिलसिले मे पोलीस को इसकी तलाश है..",वरुण ने मोना को देखा जिसके चेहरे पे भी घबराहट झलक रही थी.

"मोना,मैं यहा से निकल जाता हू."

"& पोलीस के हाथो मे पड़ गये तो!बस 1 ही रात की तो बात है वरुण फिर अपने उस साथी के पास चले जाना या फिर.."

"या फिर क्या?"

"मैं अजीत से बात करू?"

"क्या बतओगि उसे की कैसे जानती हो इस मुजरिम को..",वरुण फीकी हँसी हंसा,"..मोना,तुम्हारी ज़िंदगी खुशाल है.क्यू उसे बर्बाद करना चाहती हो!..मेरी ज़िंदगी जितनी बर्बाद होनी थी हो चुकी,अब इस से ज़्यादा कुच्छ और बुरा क्या हो सकता है.1 बार जैल जा चुका हू,दूसरी बार चला जाऊँगा लेकिन तुम अपने पति से कुच्छ नही कहोगी."

"ठीक है.",वरुण चाइ ख़त्म कर उपर च्छूपने चला गया & मेघना उसे च्छुपाने के बाद उदास अपने बिस्तर पे तब तक बैठी रही जब तक अजीत वापस नही आ गया.

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अरशद & दीप्ति चुदाई मे जुटे थे & कमरे के आड़े हुए दरवाज़े से उनकी मस्त आवाज़ें बाहर आ रही थी.इस वक़्त अनीश के कमरे के बाहर की ड्यूटी देव & बालू की थी.चार्ली दोनो प्रेमियो की नशीली आहें सुन गरम हो चुका था & उसका जिस्म भी किसी लड़की के साथ की ख्वाहिश मे तड़प रहा था.

उसने दरवाज़े की ओट से देखा,दीप्ति अपने घुटनो & हाथो पे बिस्तर पे थी & अरशद पीछे से उसकी चूत मे लंड घुसाए उसे चोद रहा था.उस गरम नज़ारे को देख कब उसका हाथ अपने पॅंट के अंदर घुस गया & उसके लंड से खेलने लगा उसे पता ही नही चला.

दोनो प्रेमियो की पीठ उसकी तरफ थी & वो अरशद की पुष्ट गंद को भिंचे हुए दीप्ति की चूत मे धक्के लगाते देखते हुए अपना लंड हिला रहा था,"क्या बे!बा हाथ से ही हिलाएगा या फिर इसका इस्तेमाल भी करेगा!"

"ह-हां..नही...!",चार्ली चौंक गया & लंड पॅंट मे डाल कमरे मे जाने लगा.बालू हंसता हुआ बाथरूम चला गया.

"क्यू बे कुच्छ सच्चा मज़ा चाहिए या बस..",बालू बाथरूम से बाहर आया & हाथो से लंड हिलाने का इशारा किया.

"यहा कैसे होगा.",चार्ली मायूसी से बोला.

"होगा..वो कौन थी रे पिच्छली बार तेरी शाब्बो..क्या नाम था?"

"गुलबो.",चार्ली खुशी से बोला.

"हां,फिर मिलेगा उस से."

"मगर कैसे उस्ताद?",चार्ली ने आवाज़ नीची कर ली,"उसमे ख़तरा होगा.हम यहा च्चिपे हैं.कही किसी को भनक लग गयी तो?"

"कुच्छ नही होगा."

"& अरशद?"

"अबे तू बस बेफ़िक्र रह & जब कहु चलने को तैय्यार रहियो.",बालू बेपरवाही से बोला & वाहा से चला गया.

"बिल्कुल सही जवाब है दोस्त..",प्रोफेसर दीक्षित ने अरशद से कहा,"..वैसे मेरा नाम दीक्षित है."

"हमारी माँग ध्यान से सुन लो & कल बताओ कि हमे ये कब दे रहे हो.",अरशद ने उसकी बात अनसुनी करते हुए अपनी माँग बताई & फोन काट दिया.इस बार फिर 8 सेकेंड के भीतर पोलीस ने कॉल ट्रेस कर ली.इस बार सिविल हॉस्पिटल के पीसीओ से फोन आया था & वाहा के पोलीस पोस्ट के इंचार्ज को फ़ौरन वाहा भेजा गया.वो दौड़ता हुआ वाहा पहुँचा मगर बूथ हॉस्पिटल के पिच्छले दरवाज़े पे बना था.इंचार्ज ने पिच्छले गेट के बाहर खड़े 1 हवलदार को उसके मोबाइल पे जल्दी बूथ तक पहुचने को कहा.इधर वो कॉन्स्टेबल गेट से दाखिल हुआ & उसी के बगल से अरशद 1 बाइक से वाहा से बाहर निकला.

अरशद ने बाइक वही खड़ी की जहा हमेशा से खड़ी होती थी,1 मकान के गॅरेज मे.उस हथियारो के दलाल ने ही उसे इस गॅरेज की चाभी दी थी & ये बिके मुहैय्या कराई थी.वाहा से वो पैदल पास के मार्केट की पार्किंग मे गया गाड़ी निकाली & बुंगले की ओर चल पड़ा.

"क्या?!",प्रोफेसर & अरशद की बातचीत कंट्रोल रूम मे सुन रहे अजीत ने जैसे ही ये बात डीसीपी वेर्मा को बताई उनके माथे पे शिकन पड़ गयी,चलो मेरे साथ."

"देखिए,कमिशनर साहब अपने बेटे को बचाने के लिए मैं कोई भी कीमत देने को तैय्यार हू मगर 1 करोड़ के हीरे..मैं कहा से लाऊँ ये सब.",जसजीत की आवाज़ मे बेबसी थी.

"प्रधान जी,मैं आपकी परेशानी समझता हू.देखिए,ये बहुत शातिर लोग हैं.उन्हे रकम छ्होटे-2 हीरे चाहिए जिनमे से किसी भी हीरे की कीमत र्स.10,000 से ज़्यादा ना हो.यानी की करीब 1000 हीरे उन्हे चाहिए.अब ये हीरे इतने छ्होटे होते हैं लगभग कमीज़ के बटन के जैसे या उस से भी छ्होटे.1बड़ी पोटली मे आसानी से 1000 हीरे आ जाएँगे.मैने आपकी बात CM साहब तक पहुँचा दी है & वो भी इस बात का हल ढूढ़ने मे लगे हुए हैं."

ये सारी बातें जसजीत की स्टडी मे हो रही थी की तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई & 1 नौकर के हाथो चाइ-नाश्ते की ट्रॉली के साथ नीना वाहा दाखिल हुई.उसका पति तो पहले से ही बड़े भाई के साथ वाहा बैठा था.नीना ने सभी को चाइ सर्व करवाई & वाहा से चली गयी.5 मिनिट बाद भैया जी को भी ये खबर मालूम थी & 15 मिनिट बाद रघु कुम्भात को भी.

"भैया,हम दोनो अपने पैसे मिला लेते हैं & बाकी का उधार ले लेते हैं."

"नही,मुकुल."

"देखिए,प्रधान जी..",कमिशनर ने आगे कहा,"..प्रोफेसर उनके साथ बात तो करेगा ही.वो उनकी माँग को नीचे लाने की कोशिश करेगा मगर बात ये है कि अगर हम हीरे दे देते हैं तो वो पहले उन्हे परखेंगे & फिर बच्चे को हमे सौपेंगे.अगर हम इन्हे धोखा देने की कोशिश करते हैं तो फिर..",कमिशनर ने बात अधूरी छ्चोड़ दी.

"नही..कमिशनर साहब..मैं अपने बच्चे को अब और ख़तरे मे नही डाल सकता.",तभी जसजीत का मोबाइल बजा जिसे मुकुल ने उठा लिया.

"भैया,CM साहब का फोन है.",जसजीत ने मोबाइल लिया & कुच्छ देर बात करता रहा & फिर फोन कमिशनर को थमा दिया.

"CM साहब ने 1 उपाय सुझाया है.राज्य के गेम ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन से वो ये हीरे हमे दिलवा देंगे & हम इनकी कीमत बाद मे चुका सकते हैं.."

"..& अगर हम उन्हे दबोचने मे कामयाब हो गये तब तो कोई बात ही नही है.बच्चा भी हमारे पास होगा & हीरे भी.",कमिशनर ने फोन जसजीत को लौटा के उसकी बात पूरी की.जो कमिशनर ने नही बताया वो ये कि CM अत्रे ने उसे फोन रखने से पहले ये कहा था कि हीरे अगर वापस नही मिले तो बहुत अच्छा होगा.मतलब सॉफ था कि फिर उस कीमत को चुकाने मे जसजीत को काफ़ी समय लगेगा & फिर CM का रास्ता सॉफ था.

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"1 बात तो तय है..".प्रोफेसर दिव्या & नामित के साथ बैठा था,"..ये जितने भी लोगो का गॅंग है उनमे से कोई 1 या तो जौहरी है या फिर हीरो का जानकार."

"हूँ..मगर प्रोफेसर मुझे लगता है कि उन हीरो के ज़रिए उन्हे पकड़ना तो आसान हो जाएगा.हम हीरो को ट्रॅक कर उन तक पहुँच सकते हैं."

"नही दिव्या जी,वो छ्होटे साइज़ के हीरे आपको केवल छ्होटे जौहरियो से मिलते हैं.उनपे कोई सरकारी मार्क भी नही होगा चाहे आप उन्हे जहा से ले लें."

"पर हमे खरीदते वक़्त तो कार्ड मिलता है जिसमे उनके असली होने की सरकारी मोहर लगी रहती है."

'बिल्कुल सही,नामित जी मगर हीरे पे तो कोई मार्किंग नही होती.बहुत से बहुत आप हीरे को जौहरी से जाँचवा के उसके साथ के कार्ड मे लिखी बात की सच्चाई परख सकते हैं.बड़े हीरो पे तो मार्किंग होती भी है मगर इन छ्होटे-2 हीरो पे ऐसा कुच्छ नही होता."

"यानी उन्हे ट्रॅक करना मुश्किल है?"

"बहुत.",प्रोफेसर सोचे जा रहा था.ये लोग बहुत चालाक थे & इसका मतलब था कि उतने ही ख़तरनाक भी होंगे.उसे पहली बार अपनी ज़िम्मेदार का बोझ महसूस हुआ & उसके दिल मे 1 बार फिर वही डर आया कि अगर बच्चे को कुच्छ हो गया तो वो क्या दोबारा उस सदमे को झेल पाएगा.दीपाली की मौत वाले हादसे मे उसे अपनी महबूबा को खोने का दर्द तो था ही मगर साथ मे नाकाम होने की टीस भी थी.अब फिर से वही टीस क्या उसे तोड़ नही देगी?..उसने ठंडी सांस भरी..जो होगा देखा जाएगा..अभी तो बस ये काम ठीक से हो जाए.

सवेरे के 4 बजे मेघना की नींद खुली तो उसने देखा की वरुण फर्श पे लगे बिस्तर पे नही है.वो झटके से उठी तो देखा वो तैय्यार हो के बाथरूम से निकल रहा है,"अब मैं चलूँगा."

"हूँ..ड्रॉयिंग रूम मे बैठो,मैं चाइ बनाती हू.",वो रसोई मे चली गयी.

खामोशी से दोनो चाइ पीते हुए टीवी देख रहे थे.मेघना को समझ नही आ रहा था कि उसका दिल बैठा क्यू जा रहा था.वरुण से अब कोई रिश्ता वो रखने की सोच भी नही सकती थी.उसने उसकी जो भी मदद की वो इसलिए क्यूकी वो उन दोनो के बीच के उस खूबसूरत रिश्ते को भूली नही थी जो बदक़िस्मती से टूट गया था..& वरुण ने भी इन तीन दिनो मे कोई ऐसी हरकत या बात नही की जिस से लगे की वो अभी भी उसे प्यार करता था.

"मोना..",वरुण खड़ा था,"..अब जाता हू.तुमने जो किया वो तो शायद ही कोई करता.इतना बड़ा ख़तरा मोल लिया तुमने मेरे लिए."

"प्लीज़ वरुण..",आगे अगर बोलती तो शायद उसकी रुलाई छूट जाती.

"ओके,मोना.बाइ!"

"1 मिनिट,वरुण.",मेघना भागती हुई ड्रॉयिंग रूम से बाहर गयी & जब वापस आई तो उसके हाथो मे कुच्छ पैसे थे.

"मोना,प्लीज़..मैं ये नही ले सकता.",मोना ने चुपचाप सारे पैसे उसकी कमीज़ की जेब मे डाल दिए.

"वरुण,बस 1 बात याद रखना कि चाहे जिसकी मदद लो,जो भी करो..तुम 1 अच्छे इंसान हो & कोई पेशेवर मुजरिम नही.",वरुण ने उसका हाथ पकड़ा & उसकी आँखो मे देखा.मेगना की आँखो की नमी उसे अपनी निगाहो मे भी महसूस हुई.

"बाइ!",उसने उसका हाथ दबाया & वाहा से निकल गया.अब उसकी मंज़िल थी मूसा का अड्डा जहा उसे उम्मीद थी कि उसे अपनी मुश्किल से च्छुतकारा मिल ही जाएगा.

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दिव्या की आँख खुली तो 1 पल को उसे समझ नही आया कि वो कहा है फिर जब नींद पूरी तरह खुली तो उसे याद आया कि वो प्रोफेसर दीक्षित के साथ उसी के कमरे मे है.कल दिन मे घर की बिजली अचानक चली गयी थी & उसे ठीक करने के बहाने मे 2 लोग आए & प्रोफेसर के कमरे के बग्स फिर से चालू कर गये थे.इस बार उन्होने उसके बिस्तर के हेअडबोर्ड के पीछे 1 बग फिट किया था & दूसरा फिर से गुलदस्ते मे.

प्रोफेसर ने गुलदस्ते मे ताज़े फूल लगा के पानी भर दिया & उस बग को बेकार कर दिया.पलंग के सिरहाने वाले बग के तार को लटका देना तो और भी आसान काम था.उसके बाद फिर से कमेरे पे 1 कपड़ा डाल अंधेरे कमरे मे उसने दिव्या को जम के चोदा था.

रात की हर्कतो ने दिव्या को काफ़ी थका दिया था & इसलिए उसे काफ़ी गहरी नींद आई थी.वो उठी & अपने कपड़े पहनने लगी कि तभी फोन घनघना उठा..इतनी सुबह किडनॅपर्स का फोन!

उसने झट से कपड़े पहन कमरे के दरवाज़ा खोला.तब तक प्रोफेसर ने फोन उठा लिया था,"दीक्षित बोल रहा हू,दोस्त."

"हमारी माँगो का क्या हुआ?"

"क्या दोस्त..इतनी बड़ी माँग है & फिर हमे बच्चे की सलामती का कोई असबूत नही दिया.",अरशद मन ही मन मुस्कुराया..बड़ा होशियार आदमी था इसलिए तो उसने अपने मोबाइल मे अनीश की बात रेकॉर्ड की थी.उसने उसे ऑन किया.

"..मैं ठीक हू,मम्मी-पापा.ना बीमार हू ना कोई चोट लगी है.बिल्कुल अच्छा हू.",कॉल ट्रेस हो गयी थी.

"लाजपत कुंज..ए ब्लॉक..के पास के बूथ से कॉल की जा रही है.",कंट्रोल रूम मे बैठे टेक्नीशियन ने लोकेशन बताई,"..हां..पार्क के पास.",ये जानकारी फ़ौरन वाहा के सबसे नज़दीकी पेट्रोल कार को दी गयी.

"हमारी माँग मानी की नही?"

"यार कुच्छ तो कम करो.बहुत ज़्यादा रकम है."

"मैं कल फिर फोन करूँगा.अगर हां नही बोला तो फोन के 6 घंटे बाद अनीश का कुच्छ समान तुमलोगो को मिल जाएगा.",ट्रॅक सूट पहने अरशद ने फोन काटा & बूथ से निकल जॉगिंग करता पार्क मे दाखिल हो गया.उसके निकलने के 5 सेकेंड बाद ही पेट्रोल कार वाहा पहुँची & पोलिसेवाले इलाक़े को छानने लगे.तब तक अरशद पार्क के दूसरे छ्होर के गेट से निकल अपनी बाइक पे सवार वाहा से निकल चुका था.

प्रोफेसर का बदन ठंडे पसीने से नहा गया था,वो जानता था अनीश के समान का क्या मतलब था..उस मासूम के जिस्म का कोई हिस्सा या फिर..उसने सर झटका & नामित की ओर देखा,"अपने बॉस को कहिए कि हीरो का जल्द इंतेज़ाम करें & अगर नही हैं तो मुझसे मिलें मैं कुच्छ ना कुच्छ करवाउन्गा!",प्रोफेसर की आवाज़ की चिंता ने दिव्या & नामित दोनो को परेशान कर दिया था.शायद पहली बार उन्हे एहसास हुआ था कि मामला कितना संगीन है.

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"क्या वो कार तमिल नाडु से चोरी हुई थी?",जाली सुव को देख के जो 2 चॅसी नंबर. का सुराग मिला था,उनमे से 1 सही था & उसका पता चल गया था,"..ओके..ठीक है.",अजीत ने इंटरकम रखा & सामने बैठे इनस्पेक्टर से मुखातिब हुआ,"..साउत इंडिया से चोरी गाड़िया यहा बहुत खपाई जाती हैं.ये उस सुव का असली नंबर है.इसे लेके शहर के सभी चोरी की गाडियो के दलालो की खबर लो & राज्य के बाकी शहरो मे भी ये नंबर फ्लश करवा दो."

"सर."

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"दिव्या जी?"

"जी बोल रही हू.",दिव्या ने अपने मोबाइल पे अंजान नंबर देख के फोन रिसीव किया.

"मैं फ़राज़ बोल रहा हू पंचमहल से."

"ओह..हेलो फ़राज़ जी!कैसे हैं आप?"

"बढ़िया हू दिव्या जी आपके काम की 1 बात पता चली है."

"अच्छा.क्या?"

"जिस केस के सिलसिले मे आप हमारे शहर आई थी उसी का 1 बहुत बड़ा सुराग मिला है."

"अच्छा."

"हां,1 लुटेरे का नाम पता चल गया है हमे."

"क्या?कैसे?",दिव्या की हैरत & खुशी का ठिकाना नही था.

"अभी कुच्छ दिन पहले रुटीन ट्रॅफिक चेकिंग मे 1 आदमी हमारे हाथ लगा जिसकी बाइक की डिकी मे नक़ली शराब भरी थी.हिरासत मे लेने के बाद उस से हमे 500 के 40 नोट्स मिले.हमारे 1 इनस्पेक्टर ने पहले उन नोट्स की जाँच 1 बॅंक मे करवाई कि कही ये नक़ली तो नही.नोट्स तो बिल्कुल असली थे मगर जब हम उन्हे मालखाने मे रखने लगे तो मुझे आपके यहा की लूट की याद आई.आपके डिपार्टमेंट ने हमे उस लूट की सभी डीटेल्स भेजी ही थी तो मैने यू ही नोट्स के नंबर्स मॅच किए & सारे नंबर्स मिल गये."

"ग्र8 वर्क,फ़राज़ जी."

"थॅंक्स.मैने फिर उस आदमी से कड़े तरीके से पूछ ताछ की तो पता चला की उसका 1 रेग्युलर ग्राहक था जिसे वो हर तरह की शराब मुहैय्या कराता था & ये नोट्स उसी ने एकमुश्त पेमेंट की तौर पे दिए थे & उसी ने बताया कि उसका नाम बालू है & जुर्म उसका पेशा है.उसे ये तो नही मालूम था कि डेवाले की लूट उसने की थी मगर उसका कहना था कि देव नाम के 1 शख्स के साथ उसकी बहुत छनती थी & आजकल दोनो ही हमारे शहर मे नज़र नही आ रहे.साथ ही ये भी पता चला है कि बालू को जुए की लत है & जिस रोज़ हम रेलवे यार्ड मे उस शख्स को नही पकड़ पाए थे उसी रोज़ उसने अपना बहुत बड़ा जुए का कर्ज़ा चुकाया था & उस रोज़ उसके साथ देव & 1 और कोई शख्स था..कौन ये हमे पता नही..मैने आपके दिए हुए स्केचस उसे दिखाए तो उसने बालू को तो पहचान लिया मगर दूसरे को वो नही पहचान पाया."

"फ़राज़ जी,आपने तो हमारे लिए बहुत बड़ा काम कर दिया."

"अब शर्मिंदा मत कीजिए,दिव्या जी.मैने आपको ई-मैल भेजी है उसे देख लीजिएगा.ओके,बाइ!"

"बाइ!"

बुंगले के कंप्यूटर पे दिव्या ने ई-मैल चेक की तो उसे पता चल गया कि जिस शख्स ने लूट की वॅन के टाइयर्स बदलवाए थे वो बालू ही था.दिव्या ने फ़ौरन ये जानकारी डिपार्टमेंट को दी & क्रिमिनल डेटबेस मे बालू को ढूँढा तो कुच्छ ही देर मे बालू की पूरी कहानी उसके आँखो के सामने थी.उसने सभी को ताक़ीद की कि बालू की फोटो हर थाने मे लगा दी जाए & 1 उसे पकड़ने का नोटीस जारी कर दिया जाए.

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"देख,अरशद & दीप्ति जब ड्यूटी पे होंगे & देव आराम कर रहा होगा तब हम नसीबपुरा चलेंगे..",आनेवाले ख़तरे से बेख़बर बालू चार्ली को अपना अयाशि का प्लान समझा रहा था,"..अपने-2 कमरे लॉक कर हम यहा से निकलेंगे & ट्रेन से 20 मिनिट मे वाहा पहुँच जाएँगे.",वो डेवाले की लोकल ट्रेन्स की बात कर रहा था,"..2 घंटे मे अपना काम निपटा के फिर करीब 30 मिनिट मे वापस यहा आ जाएँगे.तो 3 घंटे मे अपना काम हो जाएगा & ये बात अरशद को पता भी नही चलेगी."

"लेकिन उस्ताद अगर बाहर किसी ने देख लिया तो?",चार्ली चिंतित तो था मगर चुदाई का लालच उसे लुभा रहा था,"..अरशद बता रहा था कि वो आदमी कह रहा था कि नसीबपुरा की रेड मे वो बाल-2 बचा था फिर स्केचस भी तो जारी हैं."

"अबे यार तू बहुत डरता है!",बालू बेपरवाही से बोला,"..अब मुझे देख,कितने बरस हो गये.स्केच क्या अपनी तो फोटो है पोलिसेवालो के पास तो क्या करू?..साला जीना छ्चोड़ दू!..अबे यार,1 तो पता नही कि कब साली ज़िंदगी का खेल ख़त्म हो जाए उपर से जब तक ज़िंदा रहें,ऐसे डर-2 के मरते रहें.देख,तुझे नही जाना तो मत जा,मैं तो जाउन्गा..साला बहुत दिन हो गये किसी औरत की चूत मारे हुए!",वो उठ खड़ा हुआ,अब उसकी ओर देव की बारी थी.चार्ली भी उठा,उसकी ज़िम्मेदारी खाना बनाने की & घर की देख-रेख की थी,फिर वो दोनो जोडियो को आराम देने के लिए अकेला 2 घंटे बैठता था.

"उस्ताद..",कमरे से निकलता बालू मुड़ा,"..मैं चलूँगा आपके साथ.",जिस्म की भूख ने उसकी समझ पे परदा डाल दिया था.

"ये हुई ना बात!चल आराम कर.बताउन्गा तुझे कि कब जाना है.",बालू कमरे से बाहर निकल गया.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--55

gataank se aage............-

"Commissioner sahab,Jasjit ji ke bete ke case ki kya khabar hai?",CM Atre bas abhi-2 jasjit se milne ke baad apne daftar aaye the.

"sir,puri force isi kaam me juti hai."

"kyu?kya baki jurm hone band ho gaye hain?",atre ne 1 file utha ke paini nigah se commissioner ko dekha,"dekhiye,ye case bahut zaruri hai main manta hu magar iske chalte baki kaam nahi rukna chahiye."

"sir,hum puri mustaidi se apni zimmedariyaan nibha rahe hain."

"hun..vaise kya lagta hai kab tak suljhega ye mamla?"

"sir,aapko to pata hi hai aaj pehli baar kidnappers ne contact kiya hai.abhi tak to unki maange bhi nahi pata chali hain.kuchh pakka nahi kaha ja sakta.agar kismat achhi rahi to chand dino me suljah jayega mamla nahi to hafte bhi lag sakte hain."

"hun..",unhone file pe nazren gada di,"..hafte hi lage to thik hain.ab aap ja sakte hain."

"sir.",commissioner ne CM ki kahi aakhiri baat ka matlab samajh liya tha.vo janta tha ki atre 1 neta pehle hai & CM ki kursi use kitni pyari hai.pradhan ko kamzor karne ka koi mauka vo bhala kyu chhodega magar is sab me vo bachcha mohra ban ke reh gaya tha....lekin vo kar bhi kya sakta tha?..lekin vo is shehar ka commissioner tha..chahe kuch bhi ho jaye,vo kewal bachche ko bachane ko tavajjoh dega,atre & baki neta intezar kar sakte the.

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"kya pata chala,doc?",Ajit ne forensic lab ke chief se puchha.

"1 bahut zaruri baat."

"bataiye."

"ye SUV chori ki hai."

"achha!"

"haan,iske engine pe iska chassis number khurach ke use badalne ki koshish ki gayi hai magar fir bhi humne andaz laga liya hai ki number kya ho sakta hai..ye dekhiye.",usne 1 kagaz ajit ko diya.

"GH10045287L ya GF10095287I..thanx,doc.dekhte hain aapki nikali ye jankari kya rang lati hai."

"welcome,officer."

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"vo launda to bekar hai ye main janta hu.",Ballu Raghu & rano ke sath baitha tha,"..akela pura chehra duniya ko dikhate hue bachche ko agwa karne aa gaya,gadha kahinka!..lekin vo gang jisne us se bachche ko chheena vo peshewar hai,Baba."

"haan,balle..abhi-2 mujhe Baldev ne bataya hai ki police ko vo gadi mil gayi hai jisme ladka bhaga tha & vo gadi bhi jisme vo sochte hain ki bachcha agwa hua tha."

"kya?!"

"haan,beta magar vo gang ki gadi bilkul jali hui hai."

"dhat tere ki!",ballu jhallaya,"baba,maine sare shehar me sabhi gangs ke yaha pata karwa liya hai.ye apne shehar kya apne rajya ke kisi gang ka kaam nahi hai.sab sale soch rahe hain ki itna bada kand karne vala ye raatoraat naya gang paida kaise ho gaya!"

"paida jab bhi hua ho,ballu..",rano ki aavaz khun jamane wali thi,"..unhe maut ki nind hum hi sulayenge."

Agli raat Ajit fir ghar nahi aa paya tha & Varun & Meghna ne 1 aur raat 1 hi kamre me bitayi.is raat dono ki kashmakash aur zyada thi.dono ke dil beeti baato ko yaad kar unke jismo ki bechaini badhaye ja rahe the.

puri raat dono ne aankho-2 me kaat di.savere fir pichhle din ki hi tarah varun ke liye mona ne chai banayi jise peete hue vo tv dekh raha tha.vo car jisme kidnappers Anish ko chheen ke le gaye the,uski baramdgi ki khabar se use unke pakde jane ki kuchh umeed jagi magar tabhi tv pe agli khabar sunte hi uske hosh ud gaye.

"Varun Awasthi naam ka ye shakhs sazayafta mujrim hai & Jasjit Pradhan ke bete ke apharan ke silsile me police ko iski talash hai..",avrun ne Mona ko dekha jiske chehre pe bhi ghabrahat jhalak rahi thi.

"mona,main yaha se nikal jata hu."

"& police ke hatho me pad hata hu!bas 1 hi raat ki to baat hai varun fir apne us sathi ke paas chale jana ya fir.."

"ya fir kya?"

"main ajit se baat karu?"

"kya bataogi use ki kaise janti ho is mujrim ko..",varun fiki hansi hansa,"..mona,tumhari zindagi khushaal hai.kyu use barbad karna chahti ho!..meri zindagi jitni barbad honi thi ho chuki,ab is se zyada kuchh aur bura kya ho sakta hai.1 baar jail ja chuka hu,dusri baar chala jaoonga lekin tum apne pati se kuchh nahi kahogi."

"thik hai.",varun chai khatm kar upar chhupne chala gaya & meghna use chhupane ke baad udas apne bistar pe tab tak baithi rahi jab tak ajit vapas nahi aa gaya.

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Arshad & Dipti chudai me jute the & kamre ke ade hue darwaze se unki mast aavazen bahar aa rahi thi.is waqt anish ke kamre ke bahar ki duty Deva & Balu ki thi.Charlie dono premiyo ki nashili aahen sun garam ho chuka tha & uska jism bhi kisi ladki ke sath ki khwahish me tadap raha tha.

usne darwaze ki ot se dekha,dipti apne ghutno & hatho pe bistar pe thi & arshad peechhe se uski chut me lund ghusaaye use chod raha tha.us garam nazare ko dekh kab usk hath apne pant ke andar ghus gaya & uske lund se khelne laga use pata hi nahi chala.

dono premiyo ki pith uski taraf thi & vo arshad ki pusht gand ko bhinche hue dipti ki chut me dhakke lagate dekhte hue apna lund hila raha tha,"kya be!ba hath se hi hilayega ya fir iska istemal bhi karega!"

"h-haan..nahi...!",charlie chaunk gaya & lund pant me daal kamre me jane laga.balu hansta hua bathroom chala gaya.

"kyu be kuchh sachcha maza chahiye ya bas..",balu bathroom se bahar aaya & hatho se lund hilane ka ishara kiya.

"yaha kaise hoga.",charlie mayusi se bola.

"hoga..vo kaun thi re pichhli baar teri Shabbo..kya naam tha?"

"Gulabo.",charlie khushi se bola.

"haan,fir milega us se."

"magar kaise ustad?",charlie ne aavaz neechi kar li,"usme khatra hoga.hum yaha chhipe hain.kahi kisi ko bhanak lag gayi to?"

"kuchh nahi hoga."

"& arshad?"

"abe tu bas befikr rah & jab kahu chalne ko taiyyar rahiyo.",balu beparwahi se bola & vaha se chala gaya.

"Bilkul sahi jawab hai dost..",Professor Dixit ne Arshad se kaha,"..vaise mera naam Dixit hai."

"humari mang dhyan se sun lo & kal batao ki hume ye kab de rahe ho.",arshad ne uski baat ansuni karte hue apni mang batayi & fone kaat diya.is baar fir 8 second ke bhitar police ne call trace kar li.is baar Civil Hospital ke PCO se fone aaya tha & vaha ke police post ke incharge ko fauran vaha bheja gaya.vo daudta hua vaha pahuncha magar booth hospital ke pichhle darwaze pe bana tha.incharge ne pichhle gate ke bahar khade 1 hawaldar ko uske mobile pe jaldi booth tak pahuchane ko kaha.idhar vo constable gate se dakhil hua & usi ke bagal se arshad 1 bike se vaha se bahar nikla.

arshad ne bike vahi khadi ki jaha humesha se khadi hoti thi,1 makan ke garage me.us hathyaro ke dalal ne hi use is garage ki chabhi di thi & ye bike muhaiyya karayi thi.vaha se vo paidal paas ke market ki parking me gaya gadi nikali & bungle ki or chal pada.

"kya?!",professor & arshad ki baatchit control room me sun rahe Ajit ne jaise hi ye baat DCP Verma ko bataye unke mathe pe shikan pad gayi,chalo mere sath."

"dekhiye,Commissioner sahab apne bete ko bachane ke liye main koi bhi keemat dene ko taiyyar hu magar 1 crore ke heere..main kaha se laoon ye sab.",Jasjit ki aavaz me bebasi thi.

"Pradhan ji,main aapki pareshani samajhta hu.dekhiye,ye bahut shatir log hain.unhe rakam chhote-2 heere chahiye jinme se kisi bhi heere ki keemat Rs.10,000 se zyada na ho.yani ki karib 1000 heere unhe chahiye.ab ye heere itne chhote hote hain lagbhag kamiz ke button ke jaise ya us se bhi chhote.1badi potli me aasani se 1000 heere aa jayenge.maine aapki baat CM sahab tak phuncha di hai & vo bhi is baat ka hal dhondane me lage hue hain."

ye sari baaten jasjit ki study me ho rahi thi ki tabhi darwaze pe dastak hui & 1 naukar ke hatho chai-nashte ki trolley ke sath Nina vaha dakhil hui.uska pati to pehle se hi bade bhai ke sath vaha baitha tha.nina ne sabhi ko chai serve karwai & vaha se chali gayi.5 minute baad Bhaiya ji ko bhi ye khabar malum thi & 15 minute baad Raghu Kumbhat ko bhi.

"bhaiya,hum dono apne paise mila lete hain & baki ka udhar le lete hain."

"nahi,Mukul."

"dekhiye,pradhan ji..",commissioner ne aage kaha,"..professor unke sath baat to karega hi.vo unki mang ko neeche lane ki koshish karega magar baat ye hai ki agar hum heere de dete hain to vo pehle unhe parkhenge & fir bachche ko hume saupenge.agar hum inhe dhokha dene ki koshish karte hain to fir..",commissioner ne baat adhuri chhod di.

"nahi..commissioner sahab..main apne bachche ko ab aur khatre me nahi daal sakta.",tabhi jasjit ka mobile baja jise mukul ne utha liya.

"bhaiya,CM sahab ka fone hai.",jasjit ne mobile liya & kuchh der baat karta raha & fir fone commissioner ko thama diya.

"CM sahab ne 1 upai sujhaya hai.rajya ke Gem Trading Corporation se vo ye heere hume dilwa denge & hum inki keemat baad me chuka sakte hain.."

"..& agar hum unhe dabochne me kamyab ho gaye tab to koi baat hi nahi hai.bachcha bhi humare paas hoga & heere bhi.",commissioner ne fone jasjit ko lauta ke uski baat puri ki.jo commissioner ne nahi bataya vo ye ki CM Atre ne use fone rakhne se pehle ye kaha tha ki heere agar vapas nahi mile to bahut achha hoga.matlab saaf tha ki fir us keemat ko chukane me jasjit ko kafi samay lagega & fir CM ka rasta saaf tha.

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"1 baat to tay hai..".professor Divya & Namit ke sath baitha tha,"..ye jitne bhi logo ka gang hai unme se koi 1 ya to jauhri hai ya fir heero ka jankar."

"hun..magar professor mujhe lagta hai ki un heero ke zariye unhe pakadna to aasan ho jayega.hum heero ko track kar un tak pahunch sakte hain."

"nahi divya ji,vo chhote size ke heere aapko keval chhote jauhriyo se milte hain.unpe koi sarkari mark bhi nahi hoga chahe aap unhe jaha se le len."

"par hume kharidte waqt to card milta hai jisme unke asli hone ki sarkari mohar lagi rehti hai."

'bilkul sahi,namit ji magar heere pe to koi marking nahi hoti.bahut se bahut aap heere ko jauhri se janchwa ke uske sath ke card me likhi baat ki sachchai parakh sakte hain.bade heero pe to marking hoti bhi hai magar in chhote-2 heero pe aisa kuchh nahi hota."

"yani unhe track karna mushkil hai?"

"bahut.",professor soche ja raha tha.ye log bahut chalak the & iska matlab tha ki utne hi khatarnak bhi honge.use pehli baar apni zimmedar ka bojh mehsus hua & uske dil me 1 baar fir vahi darr aaya ki agar bachche ko kuchh ho gaya to vo kya dobara us sadme ko jhel payega.Deepali ki maut vale hadse me use apni mehbooba ko khone ka dard to tha hi magar sath me nakam hone ki tees bhi thi.ab fir se vahi tees kya use tod nahi degi?..usne thandi sans bhari..jo hoga dekha jayega..abhi to bas ye kaam thik se ho jaye.

Savere ke 4 baje Meghna ki nind khuli to usne dekha ki Varun farsh pe lage bistar pe nahi hai.vo jhatke se uthi to dekha vo taiyyar ho ke bathroom se nikal raha hai,"ab main chalunga."

"hun..drawing room me baitho,main chai banati hu.",vo rasoi me chali gayi.

khamoshi se dono chai peete hue tv dekh rahe the.meghna ko samajh nahi aa raha tha ki uska dil baitha kyu ja raha tha.varun se ab koi rishta vo rakhne ki soch bhi nahi sakti thi.usne uski jo bhi madad ki vo isliye kyuki vo un dono ke beech ke us khubsurat rishte ko bhuli nahi thi jo badkismati se tut gaya tha..& varun ne bhi in teen dino me koi aisi harkat ya baat nahi ki jis se lage ki vo abhi bhi use pyar karta tha.

"Mona..",varun khada tha,"..ab jata hu.tumne jo kiya vo to shayad hi koi karta.itna bada khatra mol liya tumne mere liye."

"please varun..",aage agar bolti to shayad uski rulayi chhut jati.

"ok,mona.bye!"

"1 minute,varun.",meghna bhagti hui drawing room se bahar gayi & jab vapas aayi to uske hatho me kuchh paise the.

"mona,please..main ye nahi le sakta.",mona ne chupchap sare paise uski kamiz ki jeb me daal diye.

"varun,bas 1 baat yaad rakhna ki chahe jiski madad lo,jo bhi karo..tum 1 achhe insan ho & koi peshevar mujrim nahi.",varun ne uska hath pakda & uski aankho me dekha.megna ki aankho ki nami use apni nigaho me bhi mehsus hui.

"bye!",usne uska hath dabaya & vaha se nikal gaya.ab uski manzil thi Musa ka adda jaha use umeed thi ki use apni mushkil se chhutkara mil hi jayega.

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Divya ki aankh khuli to 1 pal ko use samajh nahi aaya ki vo kaha hai fir jab nind puri tarah khuli to use yaad aaya ki vo Professor Dixit ke sath usi ke kamre me hai.kal din me ghar ki bijli achanak chali gayi thi & use thik karne ke bahane me 2 log aaye & professor ke kamre ke bugs fir se chalu kar gaye the.is baar ynhone uske bistar ke headbord ke peechhe 1 bug fit kiya tha & dusra fir se guldaste me.

professor ne guldaste me taze phool laga ke pani bhar diya & us bug ko bekar kar diya.palang ke sirhane vale bug ke taar ko latka dena to aur bhi aasan kaam tha.uske baad fir se camere pe 1 kapda daal andhere kamre me usne divya ko jum ke choda tha.

raat ki harkato ne divya ko kafi thaka diya tha & isliye use kafi gehri nind aayi thi.vo uthi & apne kapde pehanane lagi ki tabhi fone ghanghana utha..itni subah kidnappers ka phone!

usne jhat se kapde pehan kamre ke darwaza khola.tab tak professor ne fone utha liya tha,"Dixit bol raha hu,dost."

"humari maango ka kya hua?"

"kya dost..itni badi mang hai & fir hume bachche ki salamati ka koi asboot nahi diya.",Arshad man hi man muskuraya..bada hoshiyar aadmi tha isliye to usne apne mobile me Anish ki baat record ki thi.usne use on kiya.

"..main thik hu,mummy-papa.na bimar hu na koi chot lagi hai.bilkul achha hu.",call trace ho gayi thi.

"Lajpat Kunj..A block..ke paas ke booth se call ki ja rahi hai.",control room me baithe technician ne location batayi,"..haan..park ke paas.",ye jankari fauran vaha ke sabse nazdiki patrol car ko di gayi.

"humari mang mani ki nahi?"

"yaar kuchh to kam karo.bahut zyada rakam hai."

"main kal fir fone karunga.agar haan nahi bola to fone ke 6 ghante baad Anish ka kuchh saman tumlogo ko mil jayega.",track suit pehne arshad ne fone kata & booth se nikal jogging karta park me dakhil ho gaya.uske nikalne ke 5 second baad hi patrol car vaha pahunchi & policevale ilake ko chhanane lage.tab tak arshad park ke dusre chhor ke gate se nikal apni bike pe savar vaha se nikal chuka tha.

professor ka badan thande pasine se naha gaya tha,vo janta tha anish ke saman ka kya matlab tha..us masoom ke jism ka koi hissa ya fir..usne sar jhatka & Namit ki or dekha,"apne boss ko kahiye ki heero ka jald intezam karen & agar nahi hain to mujhse milen main kuchh na kuchh karwaunga!",professor ki aavaz ki chinta ne divya & namit dono ko pareshan kar diya tha.shayad pehli baar unhe ehsas hua tha ki mamla kitna sangin hai.

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"kya vo car Tamil Nadu se chori hui thi?",jali SUV ko dekh ke jo 2 chassis nos. ka surag mila tha,unme se 1 sahi tha & uska pata chal gaya tha,"..ok..thik hai.",ajit ne intercom rakha & asmne baithe inspector se mukhatib hua,"..south India se chori gaadiya yaha bahut khapayi jati hain.ye us SUV ka asli number hai.ise leke shehar ke sabhi chori ki gadiyo ke dalalo ki khabar lo & rajya ke baki shehro me bhi ye number flash karwa do."

"sir."

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"divya ji?"

"ji bol rahi hu.",divya ne apne mobile pe anjan number dekh ke fone receive kiya.

"main Faraz bol raha hu Panchmahal se."

"oh..hello faraz ji!kaise hain aap?"

"badhiya hu divya ji aapke kaam ki 1 baat pata chali hai."

"achha.kya?"

"jis case ke silsile me aap humare shehar aayi thi usi ka 1 bahut bada surag mila hai."

"achha."

"haan,1 lutere ka naam pata chal gaya hai hume."

"kya?kaise?",divya ki hairat & khushi ka thikana nahi tha.

"abhi kuchh din pehle routine traffic checking me 1 aadmi humare hath laga jiski bike ki dickiy me naqli sharab bhari thi.hirasat me lene ke baad us se hume 500 ke 40 notes mile.humare 1 inspector ne pehle un notes ki janch 1 bank me karwai ki kahi ye naqli to nahi.notes to bilkul asli the magar jab hum unhe malkhane me rakhne lage to mujhe aapke yaha ki loot ki yaad aayi.aapke department ne hume us loot ki sabhi details bheji hi thi to maine yu hi notes ke numbers match kiye & sare numbers mil gaye."

"gr8 work,faraz ji."

"thanx.maine fir us aadmi se kade tarike se puchhtachh ki to pata chala ki uska 1 regular grahak tha jise vo har tarah ki sharab muhaiyya karata tha & ye notes usi ne ekmusht payment ki taur pe diye the & usi ne bataya ki uska naam Balu hai & jurm uska pesha hai.use ye to nahi malum tha ki Devalay ki loot usne ki thi magar uska kehna tha ki Deva naam ke 1 shakhs ke sath uski bahut chhanti thi & aajkal dono hi humare shehar me nazar nahi aa rahe.sath hi ye bhi pata chala hai ki balu ko jue ki lat hai & jis roz hum railway yard me us shakhs ko nahi pakad paye the usi roz usne apna bahut bada jue ka karza chukaya tha & us roz uske sath deva & 1 aur koi shakhs tha..kaun ye hume pata nahi..maine aapke diye hue sketches use dikhaye to usne balu ko to pehchan liya magar dusre ko vo nahi pehchan paya."

"faraz ji,aapne to humare liye bahut bada kaam kar diya."

"ab sharminda mat kijiye,divya ji.maine aapko e-mail bheji hai use dekh lijiyega.ok,bye!"

"bye!"

bungle ke computer pe divya ne e-mail check ki to use pata chal gaya ki jis shakhs ne loot ki van ke tyres badalwaye the vo balu hi tha.divya ne fauran ye jankar department ko di & criminal database me balu ko dhoonda to kuchh hi der me balu ki puri kahani uske aankho ke samne thi.usne sabhi ko taqeed ki ki balu ki foto har thane me laga di jaye & 1 use pakadne ka notice jari kar diya jaye.

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"dekh,arshad & dipti jab duty pe honge & deva aaram kar raha hoga tab hum Nasibpura chalenge..",aanevale khatre se bekhabar balu Charlie ko apna ayasshi ka plan samjha raha tha,"..apne-2 kamre lock kar hum yaha se niklenge & train se 20 minute me vaha pahunch jayenge.",vo devalay ki local trains ki baat kar raha tha,"..2 ghante me apna kaam nipta ke fir karib 30 minute me vapas yaha aa jayenge.to 3 ghante me apna kaam ho jayega & ye baat arshad ko pata bhi nahi chalegi."

"lekin ustad agar bahar kisi ne dekh liya to?",charlie chintit to tha magar chudai ka lalach use lubha raha tha,"..arshad bata raha tha ki vo aadmi keh raha tha ki nasibpura ki raid me vo baal-2 bacha tha fir sketches bhi to jari hain."

"abe yaar tu bahut darta hai!",balu beparwahi se bola,"..ab mujhe dekh,kitne baras ho gaye.sketch kya apni to foto hai policevalo ke paas to kya karu?..sala jeena chhod du!..abe yaar,1 to pata nahi ki kab sali zindagi ka khel khatm ho jaye upar se jab tak zinda rahen,aise darr-2 ke marte rahen.dekh,tujhe nahi jana to mat ja,main to jaunga..sala bahut din ho gaye kisi aurat ki chut mare hue!",vo uth khada hua,ab uski or deva ki bari thi.charlie bhi utha,uski zimmedari khana banane ki & ghar ki dekh-rekh ki thi,fir vo dono jodiyo ko aaram dene ke liye akela 2 ghante baithata tha.

"ustad..",kamre se nikalta balu muda,"..main chalunga aapke sath.",jism ki bhukh ne uski samajh pe parda daal diya tha.

"ye hui na baat!chal aaram kar.bataunga tujhe ki kab jana hai.",balu kamre se bahar nikal gaya.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 16:05

खेल खिलाड़ी का पार्ट--56

गतान्क से आगे............-

"चल जल्दी बता साहब को किसे बेची थी वो गाड़ी?",इनस्पेक्टर ने इनटेरगेशन रूम मे कुर्सी पे बैठे उस घबराए शख्स को & 1 और तमाचा जमाया.वो इनस्पेक्टर दिन भर सर खपाने के बाद & 5 चोरी की गाडिया बेचने वालो से कड़ी पुच्छ-ताछ करने के बाद उस शख्स तक पहुँच ही गया था जिसने वो सुव बेची थी.

"साहब..अब मुझे उसका नाम-पता कैसे मालूम होगा.",वो गिड़गिडया,"..बस उसकी शक्ल याद है."

"हूँ..उसने तुम्हे पेमेंट कैसे किया था..मतलब कैसे नोट थे?",अजीत का दिमाग़ तेज़ी से चल रहा था.

"1000 & 500 के नोट्स थे."

"तूने क्या किया उन पैसों का?"

"साहब,कुच्छ खर्च हो गये कुच्छ हैं."

"कहा हैं?"

"1 बार मुझे छ्चोड़ दें साहब,बस मैं सब आपको दे दूँगा..बल्कि आप जीतने बोलो उतने पैसे आपको पहुचा दूँगा."

"अबे साले..कमिने..",इनस्पेक्टर ने उसकी धुलाई शुरू कर दी,"..हमारे साब को घूस देने की कोशिश कर रहा है.चल,चोरी की गाड़ी बेचने-खरीदने के अलावा अब सरकारी अफ़सर को घुस देने का चार्ज भी तुझपे लगाता हू."

"अरे नही साब..हाईईइ..नही..मेरा वो मतलब नही था....",अजीत के इशारे पे इनस्पेक्टर रुक गया.

"तो उसका हुलिया बताओ.",फिर वो इनस्पेक्टर से मुखातिब हुआ,"..वो पैसो को बरामद करो & उन्हे चेक करो.शायद कुच्छ हाथ लगे & इसे हमारे रेकॉर्ड्स के सभी क्रिमिनल्स की तस्वीरे दिखाओ."

"साहब."

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"ये तो बड़ी अच्छी खबर है,दिव्या.अब उन लुटेरो का पकड़ मे आना दूर नही लगता."

"हां,प्रोफेसर मगर हम तो इस केस मे फँसे हैं तो कही वो हमारे हाथ से बच ना जाए."

"हाँ ये बात भी है लेकिन इस समय इस केस से ज़्यादा किसी और केस को तवज्जो भी तो नही दे सकते."

"हां."

"प्रोफेसर.",नामित वाहा आ गया,"आपकी कही बात से मुझे 1 आइडिया सूझा & मैने रेकॉर्ड्स खंगलवाए & ये देखिए मुझे क्या मिला!",नामित बहुत जोश मे था.

"क्या मिला,नामित जी?"

"ये आदमी.",उसने देव की तस्वीर दोनो के सामने की,"देव,सुनारो के परिवार मे इसकी पैदाइश हुई थी & काफ़ी दीनो तक इसने यही काम किया फिर जुर्म की दुनिया मे उतर गया."

"आपने ये इन्फर्मेशन डीसीपी साहब को दे दी?"

"नही,प्रोफेसर अभी नही.मैने सोचा पहले आपसे बात कर लू.कही ऐसा तो नही होगा कि वो मुझे बेवकूफ़ समझेंगे?"

"नामित..",जवाब दिव्या ने दिया,"..हम इस केस मे पूरी तरह से अंधेरे मे हैं.ऐसे मे कोई भी बात कितनी भी सीधी सी क्यू ना लगे बेकार नही होती.तुम बेझिझक वेर्मा सर को ये बात बताओ.ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा..ये देव बेकसूर निकलेगा यही ना!..तो क्या हुआ है तो ये पेशेवर मुजरिम इस्पे शक़ तो लाज़मी है."

"थॅंक यू.",नामित वाहा से निकल गया.

आज भैया जी बहुत खुश थे,आज उन्हे फोन करके नीना को बुलाना नही पड़ा था,वो खुद उनसे मिलने आ रही थी उनके सरकारी बंगल पे.उन्होने बस बाहर के गार्ड्स को पहरे पे रहने दिया था & घर के नौकरो को उन्होने छुट्टी दे दी थी.वो आज नीना के साथ जम के लुत्फ़ उठना चाहते थे.फोन पे उसकी खनकती आवाज़ ने ही उन्हे गरम कर दिया था.

इंटरकम बजने पे उन्होने उसे उठाया तो गार्ड ने उन्हे नीना के आने की खबर दी तो उन्होने उसे अंदर भेजने को कहा & साथ ही ये ताकीद की कोई भी तब तक अंदर ना आए जब तक की उनका हुक्म ना हो.इसके बाद उन्होने अपने सारे कपड़े उतार दिए & सोफे पे बैठ अपने लंड को सहलाने लगे.

"आओ मेरी जान.",नीना जैसे ही अंदर दाखिल हुई उसकी आँखे हैरानी से फैल गयी,"..दरवाज़ा बंद कर दो.",उसने दरवाज़ा बंद किया & फिर घूम वही खड़ी रही.उसे इस बात की उम्मीद नही थी कि भैया जी यू नंगे उसका इंतजार कर रहे होंगे.

"खड़ी क्यू हो?हमारे पास आओ.",उन्होने लंड को थोड़ा हिलाया.नीना वैसे ही खड़ी सकुचने का नाटक करने लगी.

"जी..वो..आपको लगेगा कि मैं नखरे कर रही हू..मगर आज सच मे वक़्त नही है मेरे पास..",भैया जी ने उसे सर से पाँव तक देखा.आज नीना ने काले रंग की स्लीवेलेस्स,कसी ड्रेस पहनी थी जो उसके घुटनो तक आ रही थी.जब वो दरवाज़ा बंद करने घूमी थी तो उसकी 36 साइज़ की गंद & ज़्यादा उभरी दिखी थी,"..वो तो मुझे कुच्छ ऐसी बता पता चली कि लगा कि आपको खुद मिलके बता दू."

"तो बताओ ना.",भैया जी सोफे से उठा उसके करीब आए & बाई बाँह को उसके बाए कंधे पे रख उसके बदन को घेरते हुए दाए मे उसका दूसरा हाथ थाम उसे अपने साथ सोफे पे ले आए & उसे खुद से सटा के बैठ गये.उनका बाया हाथ नीना के मखमली बाज़ू सहलाने मे लग गया & दाए से उसने नीना के दाए हाथ को उठा अपने होंठो से लगा लिया.कुच्छ देर तक चूमने के बाद वो उसकी उंगलियो को हौले-2 चूसने लगे तो नीना कसमसने लगी.

"प्लीज़..मत करिए!..मेरी बात तो सुन लीजिए.",भैया जी का बाया हाथ उसके बाज़ू से सरक के उसकी कमर पे आ गया था & दबा रहा था.वो सर पीछे कर नीना की गर्दन के पिच्छले हिस्से & ड्रेस की गहरी बॅक मे से दिख रही उसकी चिकनी पीठ को चूम रहे थे.

"आपको पता है क्या फिरौती मागी है किडनॅपर्स ने....नही....प्लीज़...आप भी ना..!",भैया जी ने उसका बाया हाथ अपने लंड पे रख दिया & उसने जब ना-नुकर की तो तब तक उसे लंड पे दबाए रहे जब तक नीना ने अपने कोमल हाथ से उनके सख़्त लंड को हिलाना नही शुरू कर दिया.

"नही..जानेमन बताओ क्या कीमत लगी है उस मासूम की?",उन्होने ड्रेस की ज़िप को नीचे कर नीना की पीठ पे बेसब्री से हाथ फिराया.

"उन्न....नही..प्लीज़.",नीना लंड छ्चोड़ ड्रेस की ज़िप वापस बंद करने को छटपटाई तो भैया जी ने मुस्कुराते झुए उसकी ड्रेस के स्ट्रॅप्स को कंधो से नीचे कर दिया & उसे बाहो मे भर उसकी छातियो को अपने सीने से दबा दिया.दबाव के चलते उसकी दूधिया चूचियाँ ब्रा से छलक के बाहर आने को आतुर दिख रही थी.

उन्होने नीना के रसीले होंठो को अपने होंठो की गिरफ़्त मे लिया & तब तक उन्हे चूमते रहे जब तक नीना भी थोड़ी मस्ती मे नही आ गयी & अपने होंठो को खोल उनकी ज़ुबान को अपनी ज़ुबान से लड़ जाने दिया.

"1 करोड़ के हीरे माँगे हैं उन्होने.",उसने उनकी छाती पे हाथ जमा उन्हे दूर कर किस तोड़ी.

"क्या?!",भैया जी चौंक पड़े.उन्होने उसका ब्रा नीचे कर उसकी चुचियाँ नंगी की & उन्हे झुक के चूमने लगे.

"उम्म..नही..प्लीज़...आहह..",उन्होने हल्के से उसके शहद के रंग के निपल्स को बारी-2 काटा,"..प्लीज़....आप मुझे मरवाएँगे..हॅयियी...ऊहह...!",भैया जी सब भूल उसकी चूचियो को दबाने,चूसने मे जुट गये.नीना उनके सर को पकड़ उनके बॉल खींचने लगी.भैया जी के लिए ये समझना मुश्किल था कि ऐसा वो उन्हे रोकने के लिए कर रही है या मस्ती मे बहाल होके.नीना का जिस्म अब पूरी तरह से मस्त था.उसकी चूत गीली हो गयी थी & वो बेचैनी मे अपनी भारी जंघे आपस मे रगड़ रही थी.

"तो क्या जसजीत तैय्यार है इतनी बड़ी रकम चुकाने के लिए?",उन्होने जी भर के उसकी छातियो को चूसा & चूमा & जब नीना का जिस्म झटके खाते हुए उसके झड़ने की गवाही देने लगा तो उन्होने अपना सर उसके सीने से अलग किया & उसे खड़ा कर दिया.

"हां.",वो उसकी ड्रेस उतार रहे थे & वो हाथो से अपने सीने को ढँके खड़ी थी.

"मगर ये तो बहुत बड़ी रकम है?",उन्होने उसकी पॅंटी खींचनी चाही तो नीना ने उनका हाथ थाम लिया मगर उन्होने उसका हाथ किनारे किया & उसकी रस से लिसदी पॅंटी को उतार दिया.

"CM अत्रे उसे गेम ट्रेडिंग से हीरे दिलवा रहे हैं."

"क्या?",भैया जी ने उसे सोफे पे लिटाया तो नीना नही मानी.

"नही..बहुत देर हो जाएगी..1 तो आपके काम से आई & आप मुझे ही..नही कपड़े पहनने दीजिए.",भैया जी ने खड़ी नीना को बाहो मे भर उसे अपनी गोद मे बिठा लिया.

"अरे,मेरी रानी हर बार ऐसे ही घबराती हो!मगर कुच्छ नही होता.",उसकी कोमल गंद का दबाव लंड पे पड़ते ही उनका दिल उसे चोदने को बेकरार हो उठा.

"इसलिए तो और डर लगता है कि कब तक किस्मत हमारा साथ देगी.जाने दीजिए ना!",वो उनकी गोद से उठने लगी तो उन्होने उसकी कमर थाम उसे गोद मे बिठा लिया & सोफे की बॅक से टेक लगाते हुए उन्होने उसकी पीठ अपनी छाती से लगा ली & बाए हाथ से उसकी कमर को जकड़ा & दाए से उसकी चूत मे उंगली करने लगे.

"ऊहह....हाईईईईईई.....उउउउन्न्न्न्ह्ह्ह्ह..प्लेआस्ीईए......!",भैया जी की उंगली की रगड़ से वो बहाल उनके उपर लेट सी गयी & अपना सर उनके बाए कंधे पे टीका दिया & मज़े मे आँखे बंद कर अपनी कमर हिलाने लगी.

"सीयेम उसे मुफ़्त मे हीरे दे रहा है?"

"आन्न्‍न्णनह..नही..ओईइ....भैया को सारी कीमत चुकानी पड़ेगी लेकिन पोलीस को यकीन है की..हाईईईईईईईईईईईईई.......आआनह..",भैया जी बहुत ज़ोर-2 से उसकी चूत मे अपनी 2 उंगलिया कर रहे थे & वो भी मस्ती मे चीखते हुए अपनी कमर उच्छाल रही थी,"..वो बदमाशो को .....ऊहह...धार दबोचेगी......आआन्न्न्नह..!",नीना कुच्छ ही पलो मे दोबारा झाड़ गयी.

भैया जी की समझ मे अत्रे का खेल आ गया था.उन्होने नीना को सोफे पे उल्टा लिटाया & उसकी गंद सहलाने लगे.वो समझ गये थे कि अब पोलीस ज़रूर किडनॅपर्स को पकड़ेगी & उन्हे उसी वक़्त ख़त्म कर देगी.हीरे बरामद होंगे मगर कहा ये जाएगा कि ना किडनॅपर्स मिले ना ही हीरे.हीरे जाएँगे CM की जेब मे & प्रधान अपना सियासी करियर भूल उन हीरो की कीमत अदा करता रहेगा.उन्होने नीना की मक्खनी गंद को चूम लिया,ये औरत बड़े काम की थी.ना केवल उसने उन्हे बिस्तर मे वो अंजाना एहसास दिलाया था बल्कि अब उनके करियर मे भी उनके काम आ रही थी.वो झुक के उसकी गंद चाटने लगे तो नीना अपनी गंद उचका के उनके चेहरे मे घुसाने लगी.भैया जी समझ गये कि अब वो पूरी तरह से मस्त है & उनका चुदाई मे पूरा साथ देगी.

वो अपने घुटनो को उसके जिस्म की दोनो ओर जमा के उसकी गंद पे बैठ गये & उसकी दरार मे अपना मोटा लंड फँसा के उसकी मोटी फांको को हाथो मे दबोच लिया & उन्हे दबाते हुए अपना लंड आगे-पीछे करने लगे.उसकी गंद से हाथ आगे उसकी कोमल पीठ पे फिसलते हुए उन्होने उसकी ब्रा के हुक्स खोल दिए.लंड के गर्म एहसास को महसूस करते ही नीना आहे भरने लगी.1 घंटे बाद उन्हे पोलीस डिपार्टमेंट मे तैनात उनका आदमी भी उन्हे इस बारे मे और खबर देने वाला था.उन्होने सोच लिया था कि इस मामले से प्रधान को हराने के अलावा & कैसे फ़ायदा उठाया जा सकता है लेकिन वो सब बाद मे.अभी केवल नीना & उसके नशीले जिस्म का लुत्फ़ उठना उनका मक़सद था.

उसकी गंद की फांको को दबाते हुए उन्होने फैलाया & इस बार उसकी दरार मे फिसलते अपने लंड को उसकी चूत के छेद मे घुसा दिया.

"ऊव्ववव..!",सर सोफे से उठा नीना करही.भैया जी उसकी गंद पे बैठे उसे चोदने लगे.नीना की चूत की कसावट उनके लंड को पागल किए जा रही थी.वो उसकी गान्ड पे हाथ रखे बस धक्के पे धक्के लगाए जा रहे थे.नीना भी मस्ती मे अपनी गंद उचकाने लगी थी.उसे बहुत मज़ा आ रहा था.भैया जी का लंड उसकी चूत की गहराइयो मे उतरा उसकी चूत की दीवारो से रगड़ के उसे जन्नत की सैर करा रहा था.उसने सोफे के गद्दे को अपने हाथो से भींच लिया & अपना सर बेचैनी से हिलाते हुए बुरी तरह गंद उचकाने लगी.उसकी गंद पकड़े उसे चोद्ते हुए भैया जी समझ गये कि वो 1 बार फिर झाड़ गयी है.

उन्होने लंड बाहर खींचा & नीना को गोद मे उठा लिया & उसे अपने कमरे मे ले गये & बिस्तर पे लिटा दिया फिर उसकी टाँगे फैलाई & उसकी चूत से बह रहे रस को चाटने लगे.नीना सर के नीचे रखे तकिये को हाथो से पकड़ कसमसाती हुई आहे भरने लगी.झड़ने के बाद उसकी चूत बड़ी संवेदनशील हो गयी थी & ऐसे मे उसके आशिक़ का यू उसकी चूत मे ज़ुबान फिराना उसे पागल कर रहा था.

तभी भैया जी का मोबाइल बजा.उन्होने नंबर देखा,उनके पोलिसेवाले ने वक़्त से पहले ही फोन कर दिया था.उन्होने फ़ौरन ब्लुएतूथ हंडसफ़री किट कान मे लगाया & फिर से नीना की जंघे फैला,उन्हे सहलाते हुए उसकी चूत चाटने लगे,"बोलो."

"सर,बड़ी काम की बात पता चली है.जो एसीपी प्रोफेसर के साथ तैनात है उसे 1 बात सूझी है कि कही किडनॅपर्स मे कोई जवाहरात का जानकार तो नही.."

"अरे काम की बात करो!",भैया जी झल्ला उठे,1 तो उनके मस्ताने खेल के बीच खलल डाल रहा था उपर से बेकार की बाते कर रहा था.उन्होने सारा रस पीने के बाद नीना की खुली जाँघो के बीच घुटने पे बैठ अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया & 1 बार फिर उसकी चुदाई शुरू कर दी.

"सर,देव नाम का 1 अपराधी शक़ के दायरे मे आया है मगर मुश्किल ये है कि हमारे मुखबिरो का कहना है कि वो इधर पंचमहल शिफ्ट हो गया है & यहा शायद काम नही करता."

"हूँ.ठीक है.और कुच्छ?",भैया जी ने नीना के घुटने मोड़ दिए थे & उन्हे उसकी मोटी चूचियो पे दबाए उसे चोदे जा रहे थे.नीना वैसे ही कभी बिस्तर,कभी तकिये को बेचैनी से अपने हाथो मे पकड़ती आहे भरे जा रही थी.

"जी नही,सर."

"ठीक है.परसो दफ़्तर आके अपना इनाम ले जाना."

"शुक्रिया सर.",पोलीस वाला हंसा तो भैया जी ने फोन बंद कर कीट कान से निकाल के फेंक दिया & अपनी माशूका के घुटनो को दबोचे उसके उपर लेट गये & अब बड़े शदीद धक्को के साथ उसकी चुदाई करने लगे.नीना की चूत की कसावट अब उन्हे बहुत बुरी तरह से महसूस हो रही थी & अब वो भी झड़ने के करीब पहुँच रहे थे.

"किसे इनाम दे रहे थे?....ऊओह...हाईईइ.....!",नीना ने उन्हे अपनी बाहो मे कस लिया & उनकी पीठ पे अपने बेसब्र हाथ फिराने लगी.भैया जी ने उसके घुटने छ्चोड़े तो उसने अपनी टाँगे उनकी टाँगो के उपर रख दी & तलवो को उनकी टाँगो के उपर जमा नीचे से कमर हिलाते हुए उचकने लगी.

"1 ऐसा शख्स था जिसकी जानकारी हमे कामयाबी दिलाएगी ताकि तुम ज़िंदगी भर मेरी रानी बन के रह सको....आहह..!",नीना ने उचकते हुए उनकी गंद मे नाख़ून धंसा दिए थे & उनके बाए कान मे दीवानो की तरह जीभ फिराने लगी थी.अपनी प्रेमिका के झड़ने को महसूस करते ही भैया जी का लंड भी पिचकारिया छ्चोड़ने लगा & वो भी झटके खाते हुए नीना की चूचियो पे ढेर हो गये.

"सेठ मोहन लाल डकैती केस वाली फाइल अपडेट कर दी?",दिव्या थोड़ा वक़्त निकाल दफ़्तर आई थी.

"जी मेडम,आप प्लीज़ ऑनलाइन डेटबेस मे अपडेट कर डीजये..",कॉन्स्टेबल ने कंप्यूटर ऑन किया,"..मैं हार्ड कॉपी लेके आता हू,उसपे आपके दस्तख़त चाहिए."

"हूँ.",ये बहुत बड़ा सुराग हाथ लगा था दिव्या को.गुलबो ने अपने पास आने वाले लुटेरे का नाम विकी बताया था & दिव्या को पूरा यकीन था कि वो उस बंदे का नक़ली नाम था मगर बालू की खबर तो बिल्कुल पक्की थी.हवलदार फाइल ले आया तो उसने उसपे दस्तख़त किए & ऑनलाइन डेटबेस मे भी लॉगिन करके वही जानकारी अपडेट कर दी.

फाइल लेके वो डीसीपी वेर्मा के दफ़्तर जाने लगी ताकि उन्हे दोनो केसस के बारे मे जो भी नयी जानकारी जमा हुई,उस से वाकिफ़ करा दे.दिव्या कॅबिन से निकली तो बाहर के हॉल मे काम कर रहे लोगो की गहमागहमी देख उसे बहुत भला लगा.पिच्छले कुच्छ दीनो से बंगल पे रह के वो थोड़ा उकता गयी थी.

"अबे ठीक से देख..",उसने देखा की 1 इनस्पेक्टर 1 बड़े सहमे शख्स को जोकि कुर्सी पे बैठा था 1 चपत लगा रहा है,"..तभी तो पहचानेगा & हां..अगर यू ही किसी का नाम लिया तो बेटा तुझे ही इस केस मे अंदर कर दूँगा.",दिव्या ने देखा कि ये इनस्पेक्टर अजीत के मातहत काम करता था.

"इनस्पेक्टर.."

"मेडम.",उसने सलाम ठोंका,"..यही है जिसने सुव बेची थी.",उसने दिव्या के सिहरे से पुच्छे सवाल का जवाब दिया,"..अब साहब ने कहा है कि इसे ये आल्बम दिखाऊँ शायद किसी को पहचान ले."

"हूँ.",दिव्या आगे जाने लगी की तभी सामने से आती 1 लेडी कॉन्स्टेबल से वो टकरा गयी & फाइल उसके हाथ से गिर गयी.

"सॉरी मेडम.",वो कॉन्स्टेबल फटफट बिखरे पन्ने उठाने लगी.

"कोई बात नही.",दिव्या उसकी मदद करने लगी.1 पन्ना उस सहमे शख्स के कदमो के पास गिरा था.दिव्या ने देखा कि उसने उस पन्ने को गौर से देखा & फिर आल्बम देखने लगा.दिव्या ने कॉन्स्टेबल से पन्ने लिए,वो शख्स 1 बार फिर उसी गिरे पन्ने को देख रहा था.दिव्या उसके नज़दीक गयी तो उसने हड़बड़ा के फिर से आल्बम मे नज़रे गढ़ा दी.दिव्या ने पन्ना उठाया तो उसपे उसी आर्म्स डीलर का स्केच था जिसकी तलाश मे अजीत नसीबपुरा गया था.उसने तो इस शख्स का स्केच इसलिए लगाया था कि अगर कही ये पकड़ मे आता है तो शायद वो उसे उस विकी नाम के गुलबो के ग्राहक का पता बता दे.

"तुम इसे जानते हो?",दिव्या ने स्केच उस चोरी के गाड़ी बेचने वाले के सामने किया.

उसने ना मे सर हिलाया & अपनी आस्तीन से माथे पे चूचुहा रहा पसीना पोंच्छने लगा.एसी हॉल मे उसे पसीना आ रहा था,ये देख दिव्या मुस्कुराइ & उसके सामने मेज़ पे बैठ गयी,"कौन है ये?"

"अबे बताता है या फिर से तुझे दवाई चाहिए..हैं?",उस कॉन्स्टेबल ने अपना उल्टा हाथ दिखाया.

"बा..बताता हू..लेकिन.."

"अबे लेकिन के..जल्दी बोल!",उसने उसे फिर घुड़का.

"मेडम..अगर मैं ग़लत हुआ तो क्या मुझे अंदर कर देंगी?"

"नही..तुम पहले ये बताओ कि इसे जानते हो तो कैसे जानते हो?"

"मेडम..इसकी शक्ल उसी से मिलती है जिसने मुझसे गाड़ी खरीदी थी."

"क्या?!"

"जी,मेडम."

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"ये तो बहुत बड़ा सुराग हाथ लगा है.",डीसीपी वेर्मा कुर्सी पे हाथो को जोड़े बैठे थे.

"सर."

"हां,दिव्या.".कमरे मे अजीत भी मौजूद था.

"मेरा ख़याल है कि जिस गॅंग ने सेठ मोहन लाल को लूटा था उसी का हाथ है अनीश की किडनॅपिंग मे."

"ये तुम कैसे कह सकती हो?"

"सर,इस आर्म्स डेलाएर को 1 लुटेरे के साथ देखा गया था."

"अब ये किडनॅपिंग के लिए गाड़ी खरीद रहा है & हमे अच्छी तरह पता है कि शहर का कोई भी गॅंग इस मामले मे शामिल नही है तो फिर वही लोग बचते हैं शक़ के दायरे मे."

"हूँ..गुड पॉइंट.यानी कि अगर हम बालू को पकड़ने मे ध्यान लगाए तो शायद ये मामला सुलझ जाए..",वो अजीत से मुखातिब हुए,"..अजीत,ये बात अभी बस हम तीनो & प्रोफेसर दीक्षित तक ही रहनी चाहिए.अब जब तक हम किसी को पकड़ नही लेते,हम कोई जानकारी किसी से नही बाटेंगे."

"ओके,सर.मगर क्यू?"

"कोई खास बात नही बस इसलिए की जितना ज़्यादा लोग बातो को जानते हैं उतना उसके लीक होने का खतरा बढ़ता है."

"सर,नामित को बताना है या नही?"

"अरे उसे तो मैं भूल ही गया था.हाँ,उसे बताना है मगर उसे भी मेरी बात समझा देना."

"ओके,सर."

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"उउन्ण..छ्चोड़िए..ऊव्ववव..!",नीना अपनी दिलकश शर्मीली अदाओं से भैया जी को रिझाने मे कोई कसर नही छ्चोड़ रही थी.उनके पहलू मे उनसे चिपकी वो उनके हाथो को अपने जिस्म पे कही भी ठहरने नही दे रही थी,"बताइए ना अब कैसे इस जानकारी से फ़ायदा होगा हमे?"

"मेरी जान..",भैया जी ने उसकी चूचियाँ मसली,वो उसे इनकार कर उसकी बेरूख़ी मोल लेने का ख़तरा उठना नही चाहते थे,"..बस इतना जानो कि अब मैं ऐसा खेल खेलूँगा कि जसजीत तो पानी मे जाएगा ही, उसके साथ CM भी.उपर से हमे पैसे भी मिलेंगे फिर इस शहर क्या तुम इस राज्य पे अपनी हुकूमत चलाना.",उन्होने उसकी बाई जाँघ उठा के अपनी टाँगो के उपर चढ़ा ली.

"तफ़सील से बताइए.",उसने उनके सीने के बालो को सहलाया.

"अच्छा भाई.",अब वो उसकी गंद सहला रहे थे,"..बच्चा हमारे काबू मे आ जाए तो फिरौती किसे मिलेगी?हमे..फिर तुम ये नही समझी की CM की इसमे क्या चाल है.",नीना की गंद को सहलाते हुए उन्होने CM के इरादो से वाकिफ़ कराया,"..तो वो किडनॅपर्स तो जान से जाएँगे ही & हम उनकी बॉडीस को पोलीस से बरामद करवा देंगे & पूरे मुल्क मे इस बात का धिंडोरा पीटेगे की अगर लाषे मिल गयी तो हीरे क्यू नही मिले?..उन्हे पोलीस ने दबा दिया है CM के कहने पे.अत्रे इस मामूली सी चाल से बचना जानता है मगर आन चुनाव के पहले ऐसे स्कॅंडल मे फँसा तो उसके साथ पार्टी की हार के चान्सस बढ़ जाते हैं.उसके बाद हम जीत गये तो फिर तुम हमारी मालिका बन हुकूमत करना!",नीना के मन मे और भी सवाल थे मगर उसने अभी उन्हे पुच्छना ठीक नही समझा & हंसते हुए 1 बार फिर भैया जी की बाहो मे समा गयी.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--56

gataank se aage............-

"Chal jaldi bata sahab ko kise bechi thi vo gadi?",inspector ne interrogation room me kursi pe baithe us ghabraye shakhs ko & 1 aur tamacha jamaya.vo inspector din bhar sar khapane ke baad & 5 chori ki gadiya bechne valo se kadi puchh-tachh karne ke baad us shakhs tak pahunch hi gaya tha jisne vo SUV bechi thi.

"sahab..ab mujhe uska naam-pata kaise malum hoga.",vo gidgidaya,"..bas uski shakl yaad hai."

"hun..usne tumhe payment kaise kiya tha..matlab kaise note the?",Ajit ka dimagh tezi se chal raha tha.

"1000 & 500 ke notes the."

"tune kya kiya un paison ka?"

"sahab,kuchh kharch ho gaye kuchh hain."

"kaha hain?"

"1 baar mujhe chhod den sahab,bas main sab aapko de dunga..balki aap jitne bolo utne paise aapko pahicha dunga."

"abe sale..kamine..",inspector ne uski dhulai shuru kar di,"..humare sagab ko ghoos dene ki koshish kar raha hai.chal,chori ki gadi bechne-kharidne ke alawa ab sarkari afsar ko ghus dene ka charge bhi tujhpe lagata hu."

"are nahi saab..haiiii..nahi..mera vo matlab nahi tha....",ajit ke ishare pe inspector ruk gaya.

"to uska huliya batao.",fir vo inspector se mukhatib hua,"..vo paose os se barmad karo & unhe check karo.shayad kuchh hath lage & ise humare records ke sabhi criminals ki tasveere dikhao."

"sahab."

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"ye to badi achhi khabar hai,Divya.ab un lutero ka pakad me aana door nahi lagta."

"haan,Professor magar hum to is case me phanse hain to kahi vo humare hath se bach na jaye."

"haan ye baat bhi hai lekin is samay is case se zyada kisi aur case ko tavajjoh bhi to nahi de sakte."

"haan."

"professor.",Namit vaha aa gaya,"aapki kahi baat se mujhe 1 idea sujha & maine records khangalwaye & ye dekhiye mujhje kya mila!",namit bahut josh me tha.

"kya mila,namit ji?"

"ye aadmi.",usne Deva ki tasvir dono ke samne ki,"deva,sunaro ke parivar me iski paidaish hui thi & kafi dino tak isne yehi kaam kiya fir jurm ki duniya me utar gaya."

"aapne ye information DCP sahab ko de di?"

"nahi,professor abhi nahi.maine socha pehle aapse baat kar lu.kahi aisa to nahi hoga ki vo mijhe bevkuf samjhenge?"

"namit..",jawab divya ne diya,"..hum is case me puro tarah se andhere me hain.aose me koi bhi baat kitni bhi seedhi si kyu na lage bekar nahi hoti.tum bejhijhak Verma sir ko ye baat batao.zyada se zyada kya hoga..ye deva bekasur niklega yahi na!..to kya hua hai to ye peshevar mujrim ispe shaq to lazmi hai."

"thank you.",namit vaha se nikal gaya.

Aaj Bhaiya Ji bahut khush the,aaj unhe fone karke Nina ko bulana nahi pada tha,vo khud unse milne aa rahi thi unke sarkari bungle pe.unhone bas bahar ke guards ko pehre pe rehne diya tha & ghar ke naukro ko unhone chhutti de di thi.vo aaj nina ke sath jum ke lutf uthana chahte the.fone pe uski khanakti aavaz ne hi unhe garam kar diya tha.

intercom bajne pe unhone use uthaya to guard ne unhe nina ke aane ki khabar di to unhone use andar bhejne ko kaha & sath hi ye takeed ki koi bhi tab tak andar na aaye jab tak ki unka hukm na ho.iske baad unhone apne sare kapde utar diye & sofe pe baith apne lund ko sehlane lage.

"aao meri jaan.",nina jaise hi andar dakhil hui uski aankhe hairani se fail gayi,"..darwaza band kar do.",usne darwaza band kiya & fir ghum vahi khadi rahi.use is baat ki umeed nahi thi ki bhaiya ji yu nange uska mintezar kar rahe honge.

"khadi kyu ho?humare paas aao.",unhone lund ko thoda hilaya.nina vaise hi khadi sakuchane ka natak karne lagi.

"ji..vo..aapko lagega ki main nakhre kar rahi hu..magar aaj sach me waqt nahi hai mere paas..",bhaiya ji ne use sar se panv tak dekha.aaj nina ne kale rang ki sleeveless,kasi dress pehni thi jo uske ghutno tak aa rahi thi.jab vo darwaza band karne ghumi thi to uski 36 size ki gand & zyada ubhri dikhi thi,"..vo to mujhe kuchh aisi bata pata chali ki laga ki aapko khud milke bata du."

"to batao na.",bhaiya ji sofe se utha uske karib aaye & bayi banh ko uske baye kandhe pe rakh uske badan ko gherte hue daye me uska dusra hath tham use apne sath sofe pe le aaye & use khud se sata ke baith gaye.unka baya hath nina ke makhmali bazu sehlane me lag gaya & daye se usne nina ke daye hath ko utha apne hontho se laga liya.kuchh der tak chumne ke baad vo uski ungliyo ko haule-2 chusne lage to nina kasmasane lagi.

"please..mat kariye!..meri baat to sun lijiye.",bhaiya ji ka baya hath uske bazu se sarak ke uski kamar pe aa gaya tha & daba raha tha.vo sar peechhe kar nina ki gardan ke pichhle hisse & dress ki gehri back me se dikh rahi uski chikni pith ko chum rahe the.

"aapko pata hai kya firauti magi hai kidnappers ne....nahi....please...aap bhi na..!",bhaiya ji ne uska baya hath apne lund pe rakh diya & usne jab na-nukar ki to tab tak use lund pe dabaye rahe jab tak nina ne apne komal hath se unke sakht lund ko hilana nahi shuru kar diya.

"nahi..janeman batao kya keemat lagi hai us masoom ki?",unhone dress ki zip ko neeche kar nina ki pith pe besabri se hath firaya.

"unn....nahi..please.",nina lund chhod dress ki zip vapas band karne ko chhatpatai to bhaiya ji ne muskurate jhue uski dress ke straps ko kandho se neeche kar diya & use baaho me bhar uski chhatiyo ko apne seene se daba diya.dabav ke chalte uski doodhiya chhatiya bra se chhalak ke bahar aane ko aatur dikh rahi thi.

unhone nina ke rasile hotho ko apne hotho ki giraft me liya & tab tak unhe chumte rahe jab tak nina bhi thodi masti me nahi aa gayi & apne hotho ko khol unki zuban ko apni zuban se lad jane diya.

"1 crore ke heere mange hain unhone.",usne unki chhati pe hath jama unhe door kar kiss todi.

"kya?!",bhaiya ji chaunk pade.unhone uska bra neeche kar uski chhatiya nangi ki & unhe jhuk ke chumne lage.

"umm..nahi..please...aahhh..",unhone halke se uske shehad ke rang ke nipples ko bari-2 kata,"..please....aap mujhe marwayenge..haiii...oohhhhhh...!",bhaiya ji sab bhool uski choochiyo ko dabane,chusne me jut gaye.nina unke sar ko pakad unke baal khinchne lagi.bhaiya ji ke liye ye samajhna mushkil tha ki aisa vo unhe rokne ke liye kar rahi hai ya masti me behal hoke.nina ka jism ab puri tarah se mast tha.uski chut gili ho gayi thi & vo bechaini me apni bhari janghe aapas me ragad rahi thi.

"to kya Jasjit taiyyar hai itni badi rakam chukane ke liye?",unhone ji bhar ke uski chhatiyo ko chusa & chuma & jab nina ka jism jhatke khate hue uske jhadne ki gawahi dene laga to unhone apna sar uske seene se alag kiya & use khada kar diya.

"haan.",vo uski dress utar rahe the & vo hatho se apne seene ko dhanke khadi thi.

"magar ye to bahut badi rakam hai?",unhone uski panty khinchni chahi to nina ne unka hath tham liya magar unhone uska hath kinare kiya & uski ras se lisdi panty ko utar diya.

"CM Atre use Gem Trading se heere dilwa rahe hain."

"kya?",bhaiya ji ne use sofe pe litaya to nina nahi mani.

"nahi..bahut der ho jayegi..1 to aapke kaam se aayi & aap mujhe hi..nahi kapde pehanane dijiye.",bhaiya ji ne khadi nina ko baaho me bhar use apni god me bitha liya.

"are,meri rani har baar aise hi ghabrati ho!magar kuchh nahi hota.",uski komal gand ka dabav lund pe padte hi unka dil use chodne ko bekarar ho utha.

"isliye to aur darr lagta hai ki kab tak kismat humara sath degi.jane dijiye na!",vo unki god se uthne lagi to unhone uski kamar tham use god me bitha liya & sofe ki back se tek lagate hue unhone uski pith apni chhati se laga li & baye hath se uski kamar ko jakda & daye se uski chut me ungli karne lage.

"oohhhhh....haiiiiiii.....uuuunnnnhhhh..pleaseeeee......!",bhaiya ji ki ungli ki ragad se vo behal unke upar let si gayi & apna sar unke baye kandhe pe tika diya & maze me aankhe band kar apni kamar hilane lagi.

"CM use muft me heere de raha hai?"

"aannnnnhhhh..nahi..ouiiii....bhaiya ko sari keemat chukani padegi lekin police ko yakin hai ki..haiiiiiiiiiiiiii.......aaaanhhhhhhh..",bhaiya ji bahut zor-2 se uski chut me apni 2 ungliya kar rahe the & vo bhi masti me chikhte hue apni kamar uchhal rahi thi,"..vo badmasho ko .....oohhhhhh...dhar dabochegi......aaaannnnhhhhhhhhh..!",nina kuchh hi palo me dobare jhad gayi.

bhaiya ji ki samajh me atre ka khel aa gaya tha.unhone nina ko sofe pe ulta litaya & uski gand sehlane lage.vo samajh gaye the ki ab police zarur kidnappers ko pakdegi & unhe usi waqt khatm kar degi.heere baramad honge magar kaha ye jayega ki na kidnappers mile na hi heere.heere jayenge CM ki jeb me & Pradhan apna siyasi career bhul un heero ki keemat ada karta rahega.unhone nina ki makkhani gand ko chum liya,ye aurat bade kaam ki thi.na keval usne unhe bistar me vo anjan ehsas dilaya tha balki ab unke career me bhi unke kaam aa rahi thi.vo jhuk ke uski gand chaatne lage to nina apni gand uchka ke unke chehre me ghusane lagi.bhaiya ji samajh gaye ki ab vo puri tarah se mast hai & unka chudai me pura sath degi.

vo apne ghutno ko uske jism ki dono or jama ke uski gand pe baith gaye & uski darar me apna mota lund fansa ke uski moti fanko ko hatho me daboch liya & unhe dabate hue apna lund aage-peechhe karne lage.uski gand se hath aage uski komal pith pe fislate hue unhone uski bra ke hooks khol diye.lund ke garm ehsas ko mehsus karte hi nina aahe bharne lagi.1 ghante baad unhe police department me tainat unka aadmi bhi unhe is bare me aur khabar dene wala tha.unhone soch liya tha ki is mamle se pradhan ko harane ke alawa & kaise fayda uthaya ja sakta hai lekin vo sab baad me.abhi keval nina & uske nashile jism ka lutf uthana unka maqsad tha.

uski gand ki fanko ko dabate hue unhone failaya & is baar uski darar me fisalte apne lund ko uski chut ke chhed me ghusa diya.

"oow.!",sar sofe se utha nina karahi.bhaiya ji uski gand pe baithe use chodne lage.nina ki chut ki kasavat unke lund ko pagal kiye ja rahi thi.vo uski gnad pe hath rakhe bas dhakke pe dhakke lagaye ja rahe the.nina bhi masti me apni gand uchkane lagi thi.use bahut maza aa raha tha.bhaiya ji ka lund uski chut ki gehraiyo me utra uski chut ki deewaro se ragad ke use jannat ki sair kara raha tha.usne sofe ke gadde ko apne hatho se bhinch liya & apna sar bechaini se hilate hue buri tarah gand uchkane lagi.uski gand pakde use chodte hue bhaiya ji samajh gaye ki vo 1 baar fir jhad gayi hai.

unhone lund bahar khincha & nina ko god me utha liya & use apne kamre me le gaye & bistar pe lita diya fir uski tange failayi & uski chut se beh rahe ras ko chaatne lage.nina sar ke neeche rakhe takiye ko hatho se pakad kasmasati hui aahe bharne lagi.jhadne ke baad uski chut badi samvedanshil ho gayi thi & aise me uske aashiq ka yu uski chut me zuban firana use pagal kar raha tha.

tabhi bhaiya ji ka mobile baja.unhone number dekha,unke policevale ne waqt se pehle hi fone kar diya tha.unhone fauran bluetooth handsfree kit kaan me lagaya & fir se nina ki janghe faila,unhe sehlate hue uski chut chaatne lage,"bolo."

"sir,badi kaam ki baat pata chali hai.jo ACP Professor ke sath tainat hai use 1 baat sujhi hai ki kahi kidnappers koi zevrat ka jankar to nahi.."

"are kaam ki baat karo!",bhaiya ji jhalla uthe,1 to unke mastane khel ke beech khalal daal raha tha upar se bekar ki baate kar raha tha.unhone sara ras peene ke baad nina ki khuli jangho ke beech ghutne pe baith apna lund uski chut me ghusa diya & 1 baar fir uski chudai shuru kar di.

"air,Deva naam ka 1 apradhi shaq ke dayre me aaya hai magar mushkil ye hai ki humare mukhbiro ka kehna hai ki vo idhar Panchmahal shift ho gaya hai & yaha shayad kaam nahi karta."

"hun.thik hai.aur kuchh?",bhaiya ji ne nina ke ghutne mod diye the & unhe uski moti choochiyo pe dabaye use chode ja rahe the.nina vaise hi kabhi bistar,kabhi takiye ko bechaini se apne hatho me pakadti aahe bhare ja rahi thi.

"ji nahi,sir."

"thik hai.parso daftar aake apna inaam le jana."

"shukriya sir.",police vala hansa to bhaiya ji ne fone band kar kit kaan se nikal ke fenk diya & apni mashooka ke ghutno ko daboche uske upar let gaye & ab bade shadeed dhakko ke sath uski chudai karne lage.nina ki chut ki kasavat ab unhe bahut buri tarah se mehsus ho rahi thi & ab vo bhi jhadne ke kareeb pahunch rahe the.

"kise inam de rahe the?....ooohhhh...haiiii.....!",nina ne unhe apni baaho me kas liya & unki pith pe apne besabr hath firane lagi.bhaiya ji ne uske ghutne chhode to usne apni tange unki tango ke upar rakh di & talvo ko unki tango ke upar jama neeche se kamar hilate hue uchakne lagi.

"1 aisa shakhs tha jiski jankari hume kamyabi dilayegi taki tum zindagi bhar meri rani ban ke reh sako....aahhhhh..!",nina ne uchakte hue unki gand me nakhun dhansa diye the & unke baaye kaan me deewano ki tarah jibh firane lagi thi.apni premika ke jhadne ko mehsoos karte hi bhaiya ji ka lund bhi pichkariya chhodne laga & vo bhi jhatke khate hue nina ki choochiyo pe dher ho gaye.

"Seth Mohan Lal dacoity case vali file update kar di?",Divya thoda waqt nikal daftar aayi thi.

"ji madam,aap please online database me update kar dijye..",constable ne computer on kiya,"..main hard copy leke aata hu,uspe aapke dastkhat chahiye."

"hun.",ye bahut bada surag hath laga tha divya ko.Gulabo ne apne paas aane vale lutere ka naam Vicky bataya tha & divya ko pura yakeen tha ki vo us bande ka naqli naam tha magar Balu ki khabar to bilkul pakki thi.hawaldar file le aaya to usne uspe dastkhat kiye & online database me bhi login karke vahi jankari update kar di.

file leke vo DCP Verma ke daftar jane lagi taki unhe dono cases ke bare me jo bhi nayi jankari jama hui,us se vakif kara de.divya cabin se nikli to bahar ke hall me kaam kar rahe logo ki gehmagehmi dekh use bahut bhala laga.pichhle kuchh dino se bungle pe reh ke vo thoda ukta gayi thi.

"abe thik se dekh..",usne dekha ki 1 inspector 1 bade sehme shakhs ko joki kursi pe baitha tha 1 chapat laga raha hai,"..tabhi to pehchanega & haan..agar yu hi kisi ka naam liya to beta tujhe hi is case me andar kar dunga.",divya ne dekha ki ye inspector ajit ke mathat kaam karta tha.

"inspector.."

"madam.",usne salam thonka,"..yehi hai jisne SUV bechi thi.",usne divya ke sihare se puchhe sawal ka jawab diya,"..ab sahab ne kaha hai ki ise ye album dikhaoon shayad kisi ko pehchan le."

"hun.",divya aage jane lagi ki tabhi samne se aati 1 lady constable se vo takra gayi & file uske hath se gir gayi.

"sorry madam.",vo constable phatphat bikhre panne uthane lagi.

"koi baat nahi.",divya uski mada karne lagi.1 panna us sehme shakhs ke kadmo ke paas gira tha.divya ne dekha ki usne us panne ko gaur se dekha & fir album dekhne laga.divya ne constable se panne liye,vo shakhs 1 baar fir usi gire panne kod ekh raha tha.divya uske nazdik gayi to usne hadbada ke fir se album me nazre gada di.divya ne panna uthaya to uspe usi arms dealer ka sketch tha jisi talash me Ajit Nasibpura gaya tha.usne to is shakhs ka sketch isliye lagaya tha ki agar kahi ye pakad me aata hai to shayad vo use us Vicky naam ke gulabo ke grahak ka pata bata de.

"tum ise jante ho?",divya ne sketch us chori ke gadi bechne vale ke samne kiya.

usne naa me sar hilaya & apni aasteen se mathe pe chuchuha raha paseena ponchhne laga.AC hall me use paseena aa raha tha,ye dekh divya muskurayi & uske samne mez pe baith gayi,"kaun hai ye?"

"abe batata hai ya fir se tujhe dawai chahiye..hain?",us constable ne apna ulta hath dikhaya.

"ba..batata hu..lekin.."

"abe lekin ke..jaldi bol!",usne use fir ghudka.

"madam..agar main galat hua to kya mujhe andar kar dengi?"

"nahi..tum pehle ye batao ki ise jante ho to kaise jante ho?"

"madam..iski shakl usi se milti hai jisne mujhse gadi kharidi thi."

"kya?!"

"ji,madam."

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"ye to bahut bada surag hath laga hai.",DCP Verma kursi pe hatho ko jode baithe the.

"sir."

"haan,divya.".kamre me ajit bhi maujood tha.

"mera khayal hai ki jis gang ne seth mohan lal ko loota tha ussi ka hath hai Anish ki kidnapping me."

"ye tum kaise keh sakti ho?"

"sir,is arms delaer ko 1 lutere ke sath dekha gaya tha."

"ab ye kidnapping ke liye gadi kharid raha hai & hume achhi tarah pata hai ki shehar ka koi bhi gang is mamle me shamil nahi hai to fir vahi log bachte hain shaq ke dayre me."

"hun..good point.yani ki agar hum balu ko pakadne me dhyan lagaye to shayad ye mamla sulajh jaye..",vo ajit se mukhatib hue,"..ajit,ye baat abhi bas hum teeno & Professor Dixit tak hi rehni chahiye.ab jab tak hum kisi ko pakad nahi lete,hum koi jankari kisi se nahi baatenge."

"ok,sir.magar kyu?"

"koi khas baat nahi bas isliye ki jitna zyada log baato ko jante hain utna uske leak hone ka khtra badhta hai."

"sir,Namit ko batana hai ya nahi?"

"are use to main bhool hi gaya tha.haan,use batana hai magar use bhi meri baat samjha dena."

"ok,sir."

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"uunn..chhodiye..oow.!",Nina apni dilkash sharmili adaon se Bhaiya Ji ko rijhane me koi kasar nahi chhod rahi thi.unke pehlu me unse chipki vo unke hatho ko apne jism pe kahi bhi theharne nahi de rahi thi,"bataiye na ab kaise is jankari se fayda hoga hume?"

"meri jaan..",bhaiya ji ne usi chhatiya masli,vo use inkar kar uski berukhi mol lene ka khatra uthana nahi chahte the,"..bas itna jano ki ab main aisa khel khelunga ki Jasjit to pani me jayega hi, uske sath CM bhi.upar se hume paise bhi milenge fir is shehar kya tum is rajya pe apni hukumat chalana.",unhone uski bay jangh utha ke apni tango ke upar chadha li.

"tafsil se bataiye.",usne unke seene ke balo ko shelaya.

"achha bhai.",ab vo uski gand sehla rahe the,"..bachcha humare kabu me aa jaye to firauti kise milegi?hume..fir tum ye nahi samjhi ki CM ki isme kya chaal hai.",nina ki gand ko sehlate hue unhone CM ke irado se vakif karaya,"..to vo kidnappers to jaan se jayenge hi & hum unki bodies ko police se baramad karwa denge & pure mulk me is baat ka dhindore peetenge ki agar lashe mil gayi to heere kyu nahi mile?..unhe police ne daba diya hai CM ke kehne pe.Atre is mamooli si chaal se bachna janta hai magar ain chunav ke pehle aise scandal me phansa to uske sath party ki haar ke chances badh jate hain.uske baad hum jeet gaye to fir tum humari malika ban hukumat karna!",nina ke man me aur bhi sawal the magar usne abhi unhe puchhna thik nahi samjha & hanste hue 1 baar fir bhaiya ji ki baaho me sama gayi.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 16:06

खेल खिलाड़ी का पार्ट--57

गतान्क से आगे............-

"सारे शहर मे बालू के नाम का अलर्ट जारी कर दो & साथ मे देव का भी..",डीसीपी वेर्मा उम्मीद की किरण दिखते ही हरकत मे आ गये थे,"..दिव्या,ध्यान रहे कि ये अलर्ट तुम भेजोगी क्यूकी सेठ मोहन लाल वाला केस तुम्हारे ज़िम्मे था.अलर्ट मे केस का नाम ज़रूर देना.मैं नही चाहता कि उन्हे ये भनक लगे की हमे उनके किडनॅपिंग मे शामिल होने का शक़ है."

"सर,यहा या पंचमहल मे जब भी लूट हुई उसमे दीप्ति को चारा बनाके 4 लूटेरो ने वारदात को अंजाम दिया था..",दिव्या कह रही थी,"..अब हमे पक्का पता है कि बालू उनमे से 1 है.नामित की थ्योरी माने तो दूसरा हो सकता है देव मगर वो लुटेरा जिसका नाम हमे विकी पता चला था वो तो पक्का बालू के ही साथ है.तो क्या उसके नाम का अलर्ट नही जारी करें?"

"नही.इस तरह से उन्हे पक्का पता चल जाएगा कि हमे उनके अफ़रन मे शामिल होने का पता चल गया है.देखो,बालू,देव ये सब सज़ायाफ़्ता छटे बुदमाश हैं जबकि उस विकी के बारे मे कुच्छ ऐसा नही पता है तो उसपे शक़ करना यानी गॅंग को सावधान करना & अनीश को ख़तरे मे डालना."

"ओके,सर.",सभी उठके जाने लगे तो वेर्मा साहब ने उन्हे रोका.

"दिव्या,प्रोफेसर दीक्षित को बोल देना कि वो किडनॅपर्स से कहें की हमे उनकी शर्त मंज़ूर है मगर वो पहले 1 बार अनीश से हमारी बात कराएँ & फिर वो जगह बताएँ जहा वो हमसे हीरे लेके अनीश को सौंपेंगे."

"सर."

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"जसजीत जी,ये हैं वो हीरे जैसे उन नीच इंसानो ने माँगे हैं.",CM अत्रे के इशारे पे आर.एस.अवस्थी ने 1 आदमी को अंदर बुलाया जिसने 1 कपड़े का बड़ा सा पाउच डेस्क पे रखा.अवस्थी ने खुद उसे 1 ट्रे दी तो उसने उसपे पाउच को उल्टा कर दिया.हीरो की चकाचौंध से सबकी आँखे चुन्धिया गयी.उस आदमी ने 1-1 करके हीरे गिने & उन्हे वापस पाउच मे डाला.

"प्रधान भाई,अब ऐसे मौके पे ये बात करना मुझे बिल्कुल भी अच्छा नही लग रहा मगर क्या करें ये क़ानूनी करवाई तो करनी पड़ेगी.",अवस्थी ने 1 स्टंप पेपर पे लिखा करारनामा प्रधान को पढ़ने को दिया.उसमे ये लिखा था कि प्रधान को ये हीरे गेम ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन की ओर से CM के खास अनुरोध पे दिए जा रहे हैं & आने वाले 6 महीनो मे उसे उनकी सारी कीमत अदा करनी पड़ेगी.जसजीत ने चुपचाप काग़ज़ पे दस्तख़त किए.

"शुक्रिया,अत्रे जी.",उसने पाउच उठा लिया.ऐसा नही था कि उसे अत्रे की चाल का पता नही था.वो अच्छे से जानता था कि ये हीरे देके वो क्या खेल खेल रहा है मगर वो मजबूर था.और कोई रास्ता भी तो नही था अनीश को वापस लाने का.जसजीत ने हीरे उठाए & काफ़ी कड़ी सेक्यूरिटी के बीच अपने घर वापस आके उन्हे अपनी तिजोरी मे महफूज़ रख दिया.उसने किसी को भी ये नही बताया कि हीरे अब उसके पास हैं.

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"क्या फ़ैसला लिया तुमलोगो ने?",अरशद हर बार आवाज़ बदलने की कोशिश करता था मगर प्रोफेसर अच्छे से जानता था की पहले रोज़ से वो 1 ही शख्स से बात कर रहा है.

"तुम्हे हीरे मिल जाएँगे मगर 1 बार मेरी बच्चे से बात करवाओ."

"वो नामुमकिन है,मैं तुम्हे कल फिर उसकी आवाज़ सुना दूँगा & तुम्हे ये बताउन्गा की हीरे कब & कहा पहुचाने हैं & बच्चा कैसे मिलेगा.",उसने फोन रखा & बूथ से बाहर निकला.इस बार भी वही हुआ जो पहले हुआ था,पोलीस बस चंद सेकेंड्स देर से वाहा पहुँची,तब तक अरशद वाहा से निकल चुका था.

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"प्यारे..",नाश्ते की मेज़ पे जैसे ही चार्ली ने बालू की प्लेट रखी उसने दबी आवाज़ मे कहा,"..आज शाम तैय्यार रहना."

"हूँ.",चार्ली ने प्लेट रखी & वापस रसोई मे चला गया.

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"अरे..",दिव्या चौंक गयी.वो अपने बिस्तर मे सो रही थी कि प्रोफेसर वाहा आ गया & उसे अपनी बाहो मे भर लिया था,"..मैं तो आ ही रही थी."

"मैने सोचा कि आज तुम्हारे कमरे को गुलज़ार करते हैं.",दिव्या दाई करवट पे लेटी थी & पीछे से प्रोफेसर ने उसे बाई बाँह के घेरे मे ले लिया था & उसके गुलाबी होंठ चूमने लगा था.दिव्या थोड़ा पीछे हुई & अपनी मोटी गंद प्रोफेसर के लंड पे पूरी दबा दी.प्रोफेसर उसकी छ्होटी नाइटी के उपर से ही उसके पेट को सहलाता उसे चूमता रहा.

"उम्म्म्म..तुम्हे क्या लगता है..?..आहह..",प्रोफेसर अब उसके होंठो को छ्चोड़ उसकी पीठ चूम रहा था & दिव्या बाया हाथ पीछे ले जा उसके पाजामे के उपर से उसके लंड को सहला रही थी,"..कि जैसा हम सोच रहे हैं,दोनो वारदातो मे 1 ही गॅंग का हाथ है?..ऊहह..!".प्रोफेसर ने उसकी पॅंटी मे हाथ घुसा के उसकी गंद को रगड़ना शुरू कर दिया था.

"हाँ,तुम्हारी सोच तो सही लगती है.",वो उठ बैठा & अपने कपड़े निकालने लगा.कमरे की मद्धम रोशनी मे उसने देखा की दिव्या भी उठ गयी & अपनी नाइटी उतारने लगी.उसकी आँखो मे जिस्मो का नशा था & हसीन चेहरे पे बिखरे बाल बड़े लुभावने लग रहे थे.अपने आशिक़ की निगाहो मे निगाहें डाल वो अपने कपड़े निकालने लगी.दोनो पूरे नंगे हुए & दिव्या अपनी दोनो टाँगे प्रोफेसर के दोनो तरफ रखते हुए उसकी गोद मे बैठ गयी.1 दूसरे को सीने से लगाए,1 दूसरे की पीठ पे बेचैनी से अपने गरम हाथ फिराते दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे.दिव्या की ज़ुबान प्रोफेसर के मुँह मे घुस उसकी जीभ से खेलने लगी तो प्रोफेसर ने उसकी चौड़ी गंद की मस्त फांको को हाथो मे भर लिया.

"मगर 1 बात है..",प्रोफेसर अपनी महबूबा के होंठ छ्चोड़ उसकी गर्दन चूमते हुए नीचे होने लगा तो दिव्या उसके गले को थाम पीछे झुक गयी & अपने सीने के मस्त उभर उसकी खिदमत मे पेश कर दिए.दिव्या की कमर थामे प्रोफेसर उसकी छातियो को चूमने लगा.अपनी नाक दोनो चूचियो के बीच घुसा उसने अपना मुँह रगड़ा तो दिव्या को हँसी भी आई & मज़ा भी,"..काम ये गॅंग कर रहा होगा मगर दिमाग़ किसी और का है."

"ऊहह..आहह..लेकिन किसका हो सकता है?..उउन्न्ह..!",प्रोफेसर अब उसकी मोटी,कसी चूचिया चूस रहा था.जब से दिव्या प्रोफेसर की प्रेमिका बनी थी तब से उसका शफ्फाक़ गोरा जिस्म कुच्छ दागो से भर गया था-प्रोफेसर के होंठो की गुस्ताखियो के दागो से.उन दागो मे और इज़ाफ़ा करने के बाद प्रोफेसर ने उसे पीछे धकेला तो दिव्या वैसे ही अपनी टाँगे उसकी कमर पे लपेटे पीछे बिस्तर पे लेट गयी.प्रोफेसर के मज़बूत हाथो ने उसकी कमर को थाम उसके जिस्म को उपर उठा उसके गोरे पेट को अपने मुँह से लगा लिया.दिव्या उसकी इस हरकत से परेशान हो तेज़ आहे भरने लगी.

"आननह..प्रधान का तो कोई ऐसा दुश्मन भी नही है..उऊन्ह..हुउन्न्ह..!",प्रोफेसर उसकी नाभि को चाते जा रहा था & उसकी चूत गीली हुए जा रही थी.दिव्या का सर बिस्तर पे था & जिस्म प्रोफेसर के हाथो मे हवा मे उठा था.जब उसका प्रेमी इस तरह उसे अपने काबू मे ले लेता था तो 1 अजीब से रोमांच से उसका दिल मचल जाता था.प्रोफेसर की ज़ुबान थोड़ी और नीचे हुई & दिव्या की चिकनी,गुलाबी चूत को चाट लिया.

"आहह..!",दिव्या ज़ोर से करही.प्रोफेसर की आतुर जीभ उसकी चूत की गहराइयो मे उतार उसे और रस बहाने पे मजबूर करने लगी.दिव्या अपने बालो से खेलती कमर हिलाते हुए इस पल का पूरा लुत्फ़ उठा रही थी.

"उस लड़के वरुण को भूल गयी?",प्रोफेसर उसकी चूत को चाते चला जा रहा था.बीच-2 मे उसकी जीभ उसके दाने को भी छेड़ देती थी.

"हां....उउफफफफ्फ़...",प्रोफेसर की ज़ुबान ने उसकी चूत की कसमसाहट को शिद्दत पे पहुँचा दिया था,"..मगर वो तो जुनूनी किस्म का इंसान लगता है..हाईईईईई....फिर वो अगवा कर नही पाया..आन्न्न्नह..हान्न्न्नह..मैं तो किसी जानी दुश्मन की बात कर रही थी...आआअन्न्न्नह......!",1 लंबी चीख के साथ दिव्या झाड़ गयी & बिस्तर पे गिर गयी.अपनी गोद मे उसके पेट को सहलाते हुए प्रोफेसर आँखे बंद किए अपनी साँसे संभालती दिव्या को देख रहा था.उसके चेहरे पे मस्ती की खुमारी & मदहोशी का मिलन उसके लंड को बेकाबू करने को काफ़ी था.तेज़ सांसो से पैदा हुए सीने के उतार-चढ़ाव तो शायद किसी ऋषि की तपस्या भी तोड़ देते तो फिर प्रोफेसर की क्या बिसात थी!

उसने 1 हाथ से लंड पकड़ दिव्या की चूत मे उसे घुसाया & फिर आगे झुकते हुए उसकी नर्म बाहे पकड़ उसे उठाके अपने सीने से लगा लिया.दिव्या उसके गले से लग गयी & उसके सर को चूमते हुए अपनी गंद उपर-नीचे करने लगी.दोनो की चुदाई शुरू हो गयी थी.

"इन राजनेताओ की ज़िंदगी 1 बंद किताब होती है जिसके कुच्छ पन्ने तो शायद उनके मा-बाप,बीवियो ने भी नही पढ़े होते हैं.जसजीत 1 अच्छा आदमी है मगर मैं नही मानता कि उसका दामन बिल्कुल बेदाग है..",प्रोफेसर अपनी हसीन महबूबा की कसी गंद को अपने हाथो मे तौल रहा था,"..& अगर ऐसा है भी तो फिर उसकी कामयाबी से जलने वालो की कमी थोड़े ही है!",वो उसके दाए कंधे को चूम रहा था.दिव्या की उच्छलने की रफ़्तार बढ़ रही थी.उसने अपनी बाहें प्रोफेसर के कंधे पे जमाते हुए उसके सर को हाथो मे भर लिया & उसे अपने सीने से चिपकाए अपने घुटनो पे बैठ ज़ोर-2 से चुदाई करने लगी.उसके जिस्म की कशमकश 1 बार फिर आसमान च्छुने लगी थी.

"उउन्न्ह...ऊन्नह...आआननह..हाआअन्न्न्नह..!",उसने ज़ोर से आहे भरी,उसकी चूत ने प्रोफेसर के लंड को बिल्कुल जाकड़ लिया था,वो दोबारे झाड़ रही थी.

"तुम्हारा इशारा कही भैया जी की ओर तो नही?",दिव्या जब संभली तो उसने अपने प्रेमी के नर्म लब चूम लिए.प्रोफेसर के लिए उसके दिल मे प्यार का सैलाब उमड़ रहा था.प्रोफेसर ने उसकी गंद पकड़े हुए उसे पलटा & बिस्तर पे लिटा दिया & अपने हाथ बिस्तर पे जमा उसे चोदने लगा.

"हो सकता है वो हो या फिर कोई और हो.",उसके गहरे मगर धीमे धक्के दिव्या को पागल कर रहे थे.उसके बाजुओ मे बेसब्री से हाथ फिराते हुए वो आहे भर रही थी.जिस्म का जोश बढ़ा तो उसकी टाँगे भी उस मस्ती की गवाही देने लगी.अपने पैरो को वो प्रोफेसर की टाँगो पे रगड़ने लगी.उसकी मस्तानी हरकते देख प्रोफेसर मुस्कुराया & उसके उपर झुक गया & उसे चूमने लगा.दिव्या ने अपने आशिक़ का चेहरा हाथो मे थाम लिया & उसे बड़ी शिद्दत से चूमने लगी.

"केवल दूसरी पार्टी ही क्यू,उसकी अपनी पार्टी का कोई और शख्स भी उसका दुश्मन हो सकता है.",प्रोफेसर ने उसकी दाई टांग को पकड़ उसे भी उसकी बाई टांग के उपर रख दिया & फिर बिना लंड निकाले दिव्या की दाई तरफ लेट गया फिर उसने उसकी दाई टाँग को उठा दिया & थोड़ा सा उसकी ओर घूम अपनी बाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे डाल दी & उसकी चूत मे अपने लंड को अंदर-बाहर करने लगा.

"आईईईईयययययईए..!",मस्ती मे करहती दिव्या ने अपने होंठ प्रोफेसर के होंठो से लगा दिए & बाया हाथ नीचे ले जाके उसके आंडो को सहलाने लगी.प्रोफेसर उसके हाथ के एहसास से मस्ती मे पागल हो गया & अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी,"अजिंक्या..डार्लिंग...आहह..लेकिन ये काम किसी ताक़तवर इंसान का लगता है?..ऊव्ववव.....हाँ...चोद्ते रहो..इसी तरह..हाईईइ....आहह...हान्न्न्न्न..!"

"हाँ,मेरी जान वो तो है..",प्रोफेसर का चेहरा भी अब जोश से तमतमा गया था & वो बस तेज़-2 धक्के लगाए जा रहा था.दिव्या की चूत की जकड़न फिर से क़ातिल हो गयी थी & इस बार वो खुद पे काबू रखने के मूड मे नही था.अपनी महबूबा को अपने & करीब कर उसकी चूचियो को दबाते हुए,उसकी टांग को थामे वो उसे चोदे जा रहा था 7 कुच्छ ही पॅलो बाद दोनो ने 1 साथ ज़ोर से आह भरी.अपने कमरे मे सोया नामित चौंक के उठ बैठा मगर उसके बाद उसे कुच्छ सुनाई नही दिया.उसने कमरे का दरवाज़ा खोल बाहर झाँका तो पूरे घर मे सन्नाटा था.वो वापस बिस्तर पे आया & ये सोचता सो गया की उसे वहाँ हुआ था.

आँखे बंद किए,मुँह खोले दिव्या अपनी जन्नत मे खो गयी थी.वो 1 बड़ी खूबसूरत जगह थी जहा बस खुशी ही खुशी थी,मज़ा ही मज़ा.उसकी चूत मे उसे कुच्छ बहुत गरम महसूस हो रहा था.वो जानती थी ये प्रोफेसर का वीर्य था जो उसकी चूत को भर रहा था.प्रोफेसर के आंडो मे भी 1 अजीब सा मस्ताना एहसास हो रहा था जिसकी तासीर वो दिल से लेके पूरे जिस्म मे महसूस कर रहा था & खुशी से पागल हो रहा था.दो जिस्म मस्ती का खेल फिर जीत गये थे & सुकून से भर गये थे.

"वो ताक़तवर इंसान राज्य का CM भी तो हो सकता है.",प्रोफेसर ने अपनी प्रेमिका को बाहो मे भर उसके माथे को चूमा तो दिव्या का दिल जो सुकून से भरा था उसमे थोड़ी उलझन पैदा हो गयी..हो तो सकता था..भगवान करे..ऐसा ना हो..लेकिन अगर ऐसा हुआ तो..ज़लज़ला आ जाएगा राज्य मे..सब कुच्छ जो शांति से चल रहा है बिखर जाएगा..कैसे निबटेंगे वो लोग फिर इस से जब उनका नेता ही सब बर्बाद करने पे तुला हो..

वो ऐसे ही सवालो मे खोई रहती मगर प्रोफेसर ने लंड को उसकी चूत से खींचा & उसे अपनी तरफ घुमा अपनी बाहो मे भर लिया & चूमने लगा.दिव्या ने खुद को उसकी बाहो मे ढीला छ्चोड़ दिया & सारी परेशानिया भूल उसकी किस का जवाब देने लगी.

"डर लग रहा है,सुतड़.",चार्ली बालू के साथ तेज़ कदमो से चला जा रहा था.

"अबे यार!",बालू झल्ला उठा,"..तेरी हर समय फटती क्यू रहती है!..साला..हमारा हुलिया पिच्छली बार से इतना बदला हुआ है..इतना वक़्त बीत गया & तू है की अभी भी डरे जा रहा है!"

"उस्ताद,कोई बहुत ज़्यादा वक़्त तो नही हुआ है."

"तो तू जा वापस.",बालू रुक गया,"..भाई,मेरा भी मूड खराब कर रहा है तू.तुझे लेनी है या नही?",चार्ली खामोश रहा तो बालू ने सवाल दोहराया.चार्ली ने हां मे सर हिलाया.

"तो चल चुपचाप..आए टॅक्सी!",जब अरशद & दीप्ति पहरे पे बैठे & देव सोने चला गया तो दोनो चुपके से अपने-2 कमरे लॉक कर घर से निकल आए थे.20 मिनिट मे दोनो नसीबपुरा मे थे.

"अब सुन..मैं उधर जा रहा हू..",बालू ने 1 गली की ओर इशारा किया,"..तू भी वही चलेगा या फिर..?"

"मैं सोच रहा था कि.."

"..उसी पोच्छली वाली के पास जाऊं.",बालू बात पूरी कर हंसा,"..जा,मुन्ना मगर ध्यान रहे अगर पुच्छे तो कह दियो कि तुझे किसी कंपनी मे नौकरी मिल गयी है दूसरे शहर मे."

"ठीक है,उस्ताद."

"ठीक डेढ़ घंटे बाद यही मिलना.देर मत करना."

"नही करूँगा,उस्ताद.",दोनो अपने-2 रास्ते चल दिए.

"वरुण भाई,बुरा मत मानना मगर ये तो वही बात हुई कि आसमान से गिरे खजूर मे अटके!",मूसा ज़ोर से हंसा.6 फ्ट से भी ज़्यादा लंबा मूसा 1 खुशदील इंसान था लेकिन उसकी सबसे बड़ी खूबी थी कि वो यारो का यार था.

"तुम्हारी बात का क्या बुरा मानना,मूसा भाई.",वरुण ने उसकी फैली हथेली पे हाथ मारा.

"तो अब करना क्या है?"

"मैं उस बच्चे को छुड़ा के अपने पाप को कुच्छ हद्द तक धोना चाहता हू."

"भाई,ये तो बड़ी ही मुश्किल बात है.",मूसा सोच मे पड़ गया.वरुण जानता था कि अभी-2 जैल से च्छुटे मूसा को वो दोबारा ख़तरे मे डाल रहा था.

"मूसा भाई,बस ये आख़िरी एहसान कर दो बस."

"वरुण भाई,दोस्ती मे एहसान की बात कर अपने यार को शर्मिंदा मत करो!मेरी समझ मे नही आ रहा कि ये काम आख़िर किया किसने है?"

"भाई..",उन दोनो के साथ मूसा के कुच्छ खास आदमी बैठे थे & उन्ही मे से 1 बोला,"..ये अपने शहर के किसी बंदे का काम नही किसी बाहर वाले का है & बाबा के लोग भी इस मामले मे कुच्छ ज़्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं."

"क्या?!कुम्भात को इसमे क्या दिलचस्पी है."

"भाई,वो सेठ मोहन लाल की डकैती मे भी कोई बाहर वाला था & अब ये..2 बड़े-2 काम मे कोई बाहर वाला उसकी नाक के नीचे से हलवा खींच ले गया & वो सूंघ भी नही पाया,इसी की खुंदक होगी बुड्ढे को!",कमरे मे ठहाको का शोर गूंजा.

"अरे नही यार,केवल वो बात नही है..मामला कुच्छ ज़्यादा पेचीदा है..खैर..पोलीस ने कुच्छ नया किया है क्या?"

"भाई,बिल्कुल ताज़ा खबर है..",1 जवान लड़का कमरे मे आया,"..मामू लोग बालू नाम के कोई गुंडे को ढूंड रहे हैं वो मोहन लाल डकैती मामले मे & उपर से नही बोल रहे मगर किसी देव के बारे मे भी पुचहताच्छ कर रहे हैं."

"वाह बेटा ना सलाम ना आदाब,सीधे ऑल इंडिया रेडियो की ख़बरे सुनाने लगा!"

"सलाम,भाई.",वो लड़का झेन्प्ता मूसा के करीब आया तो उसने उसकी पीठ पे धौल जमाया.

"तुझे कैसे पता चला ये सब?"

"वो अपना शंभू है ना हवलदार,वही बता रहा था मुझे अभी."

"बालू..देव..",मूसा सोच मे पड़ गया,"..वरुण भाई आप आराम करो..अब मैं देखता हू क्या हो सकता है."

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"भाई रघु..बस 1 बार बच्चा हमारे हाथ लग जाए.",भैया जी रघु,रानो & बल्लू के साथ बैठे थे.

"उसके बाद तो हमारे वारे न्यारे हो जाएँगे.",रघु ने बात पूरी की.

"भाई बल्लू,अब क्या करोगे?",भैया जी उस से मुखातिब हुए.

"बस साहब,आपके डिपार्टमेंट की तरह मैं भी बालू & देव की खोज मे लगा हुआ हू."

"अरे अभी हमारा डिपार्टमेंट कहा हुआ है.अगर तुम्हारी मेहनत रंग ले आई तब ज़रूर हो जाएगा!",भैया जी की बात पे सभी हंस पड़े.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--57

gataank se aage............-

"Sare shehar me Balu ke naam ka alert jari kar do & sath me Deva ka bhi..",DCP Verma umeed ki kiran dikhte hi harkat me aa gaye the,"..Divya,dhyan rahe ki ye alert tum bhejogi kyuki Seth Mohan Lal vala case tumhare zimme tha.alert me case ka naam zarur dena.main nahi chahta ki unhe ye bhanak lage ki hume unke kidnapping me shamil hone ka shaq hai."

"sir,yaha ya Panchmahal me jab bhi loot hui usme Dipti ko chara banake 4 lootero ne vardat ko anjam diya tha..",divya keh rahi thi,"..ab hume pakka pata hai ki balu unme se 1 hai.Namit ki thory mane to dusra ho sakta hai deva magar vo lutera jiska naam hume Vicky pata chala tha vo to pakka balu ke hi sath hai.to kya uske naam ka alert nahi jari karen?"

"nahi.is tarah se unhe pakka pata chal jayega ki hume unke apharan me shamil hone ka pata chal gaya hai.dekho,balu,deva ye sab sazayafta chhante budmash hain jabki us vicky ke bare me kuchh aisa nahi pata hai to uspe shaq karna yani gang ko savdhan karna & Anish ko khatre me dalna."

"ok,sir.",sabhi uthke jane lage to verma sahab ne unhe roka.

"divya,Professor Dixit ko bol dena ki vo kidnappers se kahen ki hume unki shart manzoor hai magar vo pehle 1 baar anish se humari baat karayen & fir vo jagah batayen jaha vo humse heere leke anish ko saunpenge."

"sir."

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"Jasjit ji,ye hain vo heere jaise un neech insano ne mange hain.",CM Atre ke ishare pe R.S.Awasthi ne 1 aadmi ko andar bulaya jisne 1 kapde ka bada sa pouch desk pe rakha.awasthi ne khud use 1 tray di to usne uspe pouch ko ulta kar diya.heero ko chakachaundh se sabki aankhe chundhiya gayi.us aadmi ne 1-1 karke heere gine & unhe vapas pouch me dala.

"Pradhan bhai,ab aise mauke pe ye baat karna mujhe bilkul bhi achha nahi lag raha magar kya karen ye kanooni karvai to karni padegi.",awasthi ne 1 stamp paper pe likha kararnama pradhan ko padhne ko diya.usme ye likha tha ki pradhan ko ye heere Gem Trading Corporation ki or se CM ke khas anurodh pe diye ja rahe hain & aane vale 6 mahino me use unki sari keemat ada karni padegi.jasjit ne chupchap kagaz pe dastkhat kiye.

"shukriya,atre ji.",usne pouch utha liya.aisa nahi tha ki use atre ki chaal ka pata nahi tha.vo achhe se janta tha ki ye heere deke vo kya khel khel raha hai magar vo majboor tha.aur koi rasta bhi to nahi tha anish ko vapas lane ka.jasjit ne heere uthaye & kafi kadi security ke beech apne ghar vapas aake unhe apni tijori me mehfuz rakh diya.usne kisi ko bhi ye nahi bataya ki heere ab uske paas hain.

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"kya faisala liya tumlogo ne?",Arshad har baar avaz badalne ki koshish karta tha magar professor achhe se janta tha ki pehle roz se vo 1 hi shakhs se baat kar raha hai.

"tumhe heere mil jayenge magar 1 baar meri bachche se baat karao."

"vo namumkin hai,main tumhe kal fir uski aavaz suna dunga & tumhe ye bataunga ki heere kab & kaha pahuchane hain & bachcha kaise milega.",usne fone rakha & booth se bahar nikla.is baar bhi vahi hua jo pehle hua tha,police bas chand seconds der se vaha pahunchi,tab tak arshad vaha se nikal chuka tha.

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"pyare..",nashte ki mez pe jaise hi Charlie ne balu ki plate rakhi usne dabi aavaz me kaha,"..aaj sham taiyyar rehna."

"hun.",charlie ne plate rakhi & vapas rasoi me chala gaya.

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"are..",divya chaunk gayi.vo apne bistar me so rahi thi ki professor vaha aa gaya & use apni baaho me bhar liya tha,"..main to aa hi rahi thi."

"maine socha ki aaj tumhare kamre ko gulzar karte hain.",divya dayi karwat pe leti thi & peechhe se professor ne use bayi banh ke ghere me le liya tha & uske gulabi honth chumne laga tha.divya thoda peechhe hui & apni moti gand professor ke lund pe puri daba di.professor uski chhoti nighty ke upar se hi uske pet ko sehlata use chumta raha.

"ummmm..tumhe kya lagta hai..?..aahhhhh..",professor ab uske hontho ko chhod uski chum raha tha & divya baya hath peechhe le ja uske pajame ke upar se uske lund ko sehla rahi thi,"..ki jaisa hum soch rahe hain,dono vardato me 1 hi gang ka hath hai?..oohhhhhh..!".professor ne uski panty me hath ghusa ke uski gand ko ragadna shuru kar diya tha.

"haan,tumhari soch to sahi lagti hai.",vo uth baitha & apne kapde nikalne laga.kamre ki maddham roshni me usne dekha ki divya bhi uth gayi & apni nighty utarne lagi.uski aankho me jismo ka nasha tha & haseen chehre pe bikhre baal bade lubhavne lag rahe the.apne aashiq ki nigaho me nigahen daal vo apne kapde nikalne lagi.dono pure nange hue & divya apni dono tange professor ke dono taraf rakhte hue uski god me baith gayi.1 dusre ko seene se lagaye,1 dusre ki pith pe bechaini se apne garam hath firate dono 1 dusre ko chumne lage.divya ki zuban professor ke munh me ghus uski jibh se khelne lagi to professor ne uski chaudi gand ki mast fanko ko hatho me bhar liya.

"magar 1 baat hai..",professor apni mehbooba ke honth chhod uski gardan chumte hue neeche hone laga to divya uske gale ko tham peechhe jhuk gayi & apne seene ke mast ubhar uski khidmat me psh kar diye.divya ki kamar thame professor uski chhatiyo ko chumne laga.apni naak dono choochiyo ke beech ghusa usne apna munh ragda to divya ko hansi bhi aayi & maza bhi,"..kaam ye gang kar raha hoga magar dimagh kisi aur ka hai."

"oohhhhh..aahhhhhh..lekin kiska ho sakta hai?..uunnhhhhhh..!",professor ab uski moti,kasi choochiya chus raha tha.jab se divya professor ki premika bani thi tab se uska shaffaq gora jism kuchh daagho se bhar gaya tha-professor ke hotho ki gustakhiyo ke daagho se.un dagho me aur izafa karne ke baad professor ne use peechhe dhakela to divya vaise hi apni tange uski kamatr pe lapete peechhe bistar pe let gayi.professor ke mazbut hatho ne uski kamar ko tham uske jism ko upar utha uske gore pet ko apne munh se laga liya.divya uski is harkat se pareshan ho tez aahe bharne lagi.

"aannhhhhhh..pradhan ka to koi aisa dushman bhi nahi hai..uunhh..huunnhhhhh..!",professor uski nabhi ko chate ja raha tha & uski chut gili hue ja rahi thi.divya ka sar bistar pe tha & jism professor ke hatho me hawa me utha tha.jab uska premi is tarah use apne kabu me le leta tha to 1 ajib se romanch se uska dil machal jata tha.professor ki zuban thodi aur neeche hui & divya ki chikni,gulabi chut ko chaat liya.

"aahhhhhhhh..!",divya zor se karahi.professor ki aatur jibh uski chut ki gehraiyo me utar use aur ras bahane pe majbur karne lagi.divya apne baalo se khelti kamar hilate hue is pal ka pura lutf utha rahi thi.

"us ladke varun ko bhul gayi?",professor uski chut ko chaate chala ja raha tha.beech-2 me uski jibh uske dane ko bhi chhed deti thi.

"haan....uufffff...",professor ki zuban ne uski chut ki kasmasahat ko shiddat pe pahuncha diya tha,"..magar vo to junooni kism ka insa lagta hai..haiiiiii....fir vo agwa kar nahi paya..aannnnhhhh..haannnnhhhh..main to kisi jani dushman ki baat kar rahi thi...aaaaannnnhhhhhhhh......!",1 lumbi chikh ke sath divya jhad gayi & bistar pe gir gayi.apni god me uske pet ko sehlate hue professor aankhe band kiye apni sanse sambhalti divya ko dekh raha tha.uske chehre pe masti ki khumari & madhoshi ka milan uske lund ko bekabu karne ko kafi tha.tez sanso se paida hue seene ke utar-chadhav to shayad kisi rishi ki tapasya bhi tod dete to fir professor ki kya bisat thi!

usne 1 hath se lund pakad divya ki chut me use ghusaya & fir aage jhukte hue uski narm baahe pakad use uthake apne seene se laga liya.divya uske gale se lag gayi & uske sar ko chumte hue apni gand upar-neeche karne lagi.dono ki chudai shuru ho gayi thi.

"in rajnetao ki zindagi 1 band kitab hoti hai jiske kuchh panne to shayd unke maa-baap,biwiyo ne bhi nahi padhe hote hain.jasjit 1 achha aadmi hai magar main nahi manta ki uska daman bilkul bedagh hai..",professor apni haseen mehbooba ki kasi gand ko apne hatho me taul raha tha,"..& agar aisa hai bhi to fir uski kamyabi se jalne valo ki kami thode hi hai!",vo uske daye kandhe ko chum raha tha.divya ki uchhalne ki raftar badh rahi thi.usne apni baahen professor ke kandhe pe jamate hue uske sar ko hatho me bhar liya & use apne seene se chipkaye apne ghutno pe baith zor-2 se chudai karne lagi.uske jism ki kashmakash 1 baar fir aasmaan chhune lagi thi.

"uunnhhhh...oonnhhhhh...aaaannhhhhhh..haaaaannnnhhhhh..!",usne zor se aahe bhari,uski chut ne professor ke lund ko bilkul jakad liya tha,vo dobare jhad rahi thi.

"tumhara ishara kahi Bhaiya Ji ki or to nahi?",divya jab sambhli to usne apne premi ke narm lab chum liye.professor ke liye uske dil me pyar ka sailab umad raha tha.professor ne uski gand pakde hue use palta & bistar pe lita diya & apne hath bistar pe jama use chodne laga.

"ho sakta hai vo ho ya fir koi aur ho.",uske gehre magar dheeme dhakke divya ko pagal kar rahe the.uske bazuo me besabri se hath firate hue vo aahe bhar rahi thi.jism ka josh badha to uski tange bhi us masti ki gawahi dene lagi.apne pairo ko vo professor ki tango pe ragadne lagi.uski mastani harkate dekh professor muskuraya & uske upar jhuk gaya & use chumne laga.divya ne apne aashiq ka chehra hatho me tham liya & use badi shiddat se chumne lagi.

"keval dusri party hi kyu,uski apni party ka koi aur shakhs bhi uska dushman ho sakta hai.",professor ne uski dayi tang ko pakad use bhi uski bayi tang ke upar rakh diya & fir bina lund nikale divya ki dayi taraf let gaya fir usne uski dayi tnag ko utha diya & thoda sa uski or ghum apni bayi banh uski gardan ke neeche daal di & uski chut me apne lund ko andar-bahar karne laga.

"aaiiiiyyyyyeeeee..!",masti me karahti divya ne apne honth professor ke hotho se laga diye & baya hath neeche le jake uske nado ko sehlane lagi.professor uske hath ke ehsas se masti me pagal ho gaya & apne dhakko ki raftar badha di,"Ajinkya..darling...aahhhhhh..lekin ye kaam kisi taqatwar insan ka lagta hai?..oow....haan...chodte raho..isi tarah..haiiii....aahhhh...haannnnn..!"

"haan,meri jaan vo to hai..",professor ka chehra bhi ab josh se tamtama gaya tha & vo bas tez-2 dhakke lagaye ja raha tha.divya ki chut ki jakdan fir se qatil ho gayi thi & is baar vo khud pe kabu rakhne ke mood me nahi tha.apni mehbooba ko apne & karib kar uski chhatiyo ko dabate hue,uski tang ko thame vo use chode ja raha tha 7 kuchh hi palo baad dono ne 1 sath zor se aah bhari.apne kamre me soya namit chaunk ke uth baitha magar uske baad use kuchh sunai nahi diya.usne kamre ka darwaza khol bahar jhanka to pure ghar me sannata tha.vo vapas bistar pe aaya & ye sochta so gaya ki use veham hua tha.

aankhe band kiye,munh khole divya apni jannat me kho gayi thi.vo 1 badi khubsurat jagah thi jaha bas khushi hi khushi thi,maza hi maza.uski chut me use kuchh bahut garam mehsus ho raha tha.vo janti thi ye professor ka virya tha jo uski chut ko bhar raha tha.professor ke ando me bhi 1 ajib sa mastana ehsas ho raha tha jiski taseer vo dil se leke pure jism me mehsus kar raha tha & khushi se pagal ho raha tha.do jism masti ka khel fir jeet gaye the & sukun se bhar gaye the.

"vo taqatwar insan rajya ka CM bhi to ho sakta hai.",professor ne apni premika ko baaho me bhar uske mathe ko chuma to divya ka dil jo sukun se bhara tha usme thodui uljhan paida ho gayi..ho to sakta tha..bhagwan kare..aisa na ho..lekin agar aisa hua to..zalzala aa jayega rajya me..sab kuchh jo shanti se chal raha hai bikhar jayega..kaise nibtenge vo log fir is se jab unka neta hi sab barbad karne pe tula ho..

vo aise hi sawalo me khoyi rehti magar professor ne lund ko uski chut se khincha & use apni taraf ghuma apni baaho me bhar liya & chumne laga.divya ne khud ko uski baaho me dhila chhod diya & sari pareshaniya bhul uski kiss ka jawab dene lagi.

"Darr lag raha hai,sutad.",Charlie balu ke sath tez kadmo se chala ja raha tha.

"abe yaar!",balu jhalla utha,"..tero har samay phatati kyu rehti hai!..sala..humara huliya pichhli baar se itna badla hua hai..itna waqt beet gaya & tu hai ki abhi bhi dare ja raha hai!"

"ustad,koi bahut zyada waqt to nahi hua hai."

"to tu ja vapas.",balu ruk gaya,"..bhai,mera bhi mood kharab kar raha hai tu.tujhe leni hai ya nahi?",charlie khamosh raha to balu ne sawal dohraya.charlie ne haan me sar hilaya.

"to chal chupchap..aye taxi!",jab Arshad & Dipti pehre pe baithe & Deva sone chala gaya to dono chupke se apne-2 kamre lock kar ghar se nikal aaye the.20 minute me dono Nasibpura me the.

"ab sun..main udhar ja raha hu..",balu ne 1 gali ki or ishara kiya,"..tu bhi vahi chalega ya fir..?"

"main soch raha tha ki.."

"..usi pochhli vali ke paas jaoon.",balu baat puri kar hansa,"..ja,munna magar dhyan rahe agar puchhe to kag diyo ki tujhe kisi company me naukri mil gayi hai dusre dhehar me."

"thik hai,ustad."

"thik dedh ghante baad yahi milna.der mat karna."

"nahi karunga,ustad.",dono apne-2 raste chal diye.

"Varun bhai,bura mat maanana magar ye to vahi baat hui ki aasman se gire khajur me atke!",Musa zor se hansa.6 ft se bhi zyada lumba musa 1 khushdil insan tha lekin uski sabse badi khubi thi ki vo yaaro ka yaar tha.

"tumhari baat ka kya bura maanana,musa bhai.",varun ne uski faili hatheli pe hath mara.

"to ab karna kya hai?"

"main us bachche ko chhuda ke apne paap ko kuchh hadd tak dhona chahta hu."

"bhai,ye to badi hi mushkil baat hai.",musa soch me pad gaya.varun janta tha ki abhi-2 jail se chhute musa ko vo dobara khatre me daal raha tha.

"musa bhai,bas ye aakhiri ehsan kar do bas."

"varun bhai,dosti me ehsan ki baat kar apne yaar ko sharminda mat karo!meri samajh me nahi aa raha ki ye kaam aakhir kiya kisne hai?"

"bhai..",un dono ke sath musa ke kuchh khas aadmi baithe the & unhi me se 1 bola,"..ye apne shehar ke kisi bande ka kaam nahi kisi bahar wale ka hai & Baba ke log bhi is mamle me kuchh zyada dilchaspi le rahe hain."

"kya?!Kumbhat ko isme kya dilchaspi hai."

"bhai,vo Seth Mohan Lal ki dacoity me bhi koi bahar vala tha & ab ye..2 bade-2 kaam me koi bahar vala uski naak ke neeche se halwa khinch le gaya & vo sungh bhi nahi paya,isi ki khundak hogi buddhe ko!",kamre me thahako ka shor gunja.

"are nahi yaar,kewal vo baat nahi hai..mamla kuchh zyada pechida hai..khair..police ne kuchh naya kiya hai kya?"

"bhai,bilkul taza khabar hai..",1 jawan ladka kamre me aaya,"..mamu log Balu naam ke koi gunde ko dhund rahe hain vo mohan lal dacoity mamle me & upar se nahi bol rahe magar kisi Deva ke bare me bhi puchhtachh kar rahe hain."

"vaah beta na salam na aadab,seedhe All India radio ki khabre sunane laga!"

"salam,bhai.",vo ladka jhenpta musa ke karib aaya to usne uski pith pe dhaul jamaya.

"tujhe kaise pata chala ye sab?"

"vo apna Shambhu hai na hawaldar,vahi bata raha tha mujhe abhi."

"balu..deva..",musa soch me pad gaya,"..varun bhai aap aaram karo..ab main dekhta hu kya ho sakta hai."

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"bhai Raghu..bas 1 baar bachcha humare hath lag jaye.",Bhaiya ji raghu,Rano & Ballu ke sath baithe the.

"uske baad to humare vare nyare ho jayenge.",raghu ne baat puri ki.

"bhai ballu,ab kya karoge?",bhaiya ji us se mukhatib hue.

"bas sahab,aapke deaprtment ki tarah main bhi balu & deva ki khoj me laga hua hu."

"are abhi humara department kaha hua hai.agar tumhari mehnat rang le aayi tab zarur ho jayega!",bhaiya ji ki baat pe sabhi hans pade.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........