Badla बदला compleet

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rajaarkey
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Re: Badla बदला

Unread post by rajaarkey » 04 Nov 2014 08:13

गतान्क से आगे...
रजनी चुदने के बाद बेख़बर सो रही थी.इंदर धीरे से उठा & अपने कपड़े
पहने.अपनी जीन्स की जेब टटोली तो वाहा वो ड्यूप्लिकेट चाभी थी जो उसने आज
सवेरे ही हलदन मे बनवाई थी.वो रजनी के क्वॉर्टर से बाहर निकला & सीधा
बंगले के पीछे रसोई के दरवाज़े पे रात के चौकीदारो से छिपता हुआ पहुँच
गया.अगले ही पल वो बंगले के अंदर था.सुरेन जी की मौत के वक़्त उसे ये तो
पता लग गया था की शिवा नीचे के कमरे मे रहता है & परिवार के लोग उपरी
मंज़िल के कमरो मे.

वो दबे पाँव शिवा के कमरे के पास पहुँचा & हौले से बंद दरवाज़े को
दबाया.दरवाज़ा फ़ौरन खुल गया तो इंदर घबरा के पीछे हट गया.उसे लगा की
कमरे के अंदर कही शिवा जगा हुआ ना हो.काफ़ी देर तक जब अंदर से कोई आहट
नही आई तो उसने दरवाज़े को ओट मे खड़े हो अंदर झाँका & चौंक गया अंदर कोई
भी नही था.कमरे मे लगा पंखा या एसी भी नही चल रहे थे.वो कमरे के अंदर
दाखिल हुआ & अटॅच्ड बाथरूम को चेक किया,वो भी खाली था..तो इतनी रात गये
शिवा गया कहाँ?अपनी ठुड्डी खुजाता इंदर कमरे से बाहर निकाला.

शिवा तो वही था जहा वो हर रात होता था-अपनी महबूबा की बाहो मे मगर आज रात
उस से 2 ग़लतिया हो गयी थी.हर रात देविका के केमर मे जाने से पहले वो
अपने कमरे का ताला लगा देता था मगर आज वो ये करना भूल गया था & दूसरी
ग़लती जो थी उसने इंदर को खुशी से पागल कर दिया.

वो दूसरी ग़लती थी की शिवा ने आज रात हर रात की तरह देविका के कमरे का
दरवाज़ा अंदर से बंद नही किया.इंदर चाहता तो था की 1 बार शिवा के कमरे की
तलाशी ले मगर उसके पहले वो ये पक्का कर लेना चाहता था की शिवा उस दौरान
कमरे मे वापस नही आएगा लेकिन उसकी समझ मे बिल्कुल नही आ रहा था की आख़िर
शिवा गया कहा!

इसी उधेड़बुन ने उसने उपरी मंज़िल चेक करने की सोची & अपने रब्बर सोल
वाले जूते पहने बिना आवाज़ किए सीढ़ियाँ चढ़ गया.पहले प्रसून का कमरा था
फिर 2 कमरे जोकि गेस्ट रूम्स थे,के बाद देविका का कमरा था.इंदर ने प्रसून
के कमरे के दरवाज़े पे कान लगाया.अंदर खामोशी च्छाई थी,उसने दरवाज़े का
नॉब घुमाया मगर वो अंदर से बंद था.वो आगे बढ़ा & दोनो गेस्ट रूम्स को भी
खाली ही पाया.

फिर वो देविका के कमरे पे पहुँचा & फिर उसकी खुशी का ठिकाना नही रहा.अपनी
प्रेमिका के जिस्म का लुत्फ़ उठाते शिवा को पता भी नही था की उसकी
ग़लतिया उसके लिए & उसकी महबूबा के लिए कितनी भारी पड़ने वाली हैं!इंदर
ने देविका के दरवाज़े को च्छुआ तो वो हल्का सा खुल गया & उसके कानो मे
अंदर से ऐसी आवाज़ आई मानो कोई कराह रहा हो.कमरे मे बिल्कुल अंधेरा
था.उसने धीरे से दरवाज़ा और खोला & फिर उसी की ओट मे हो अंदर झाँका.

झाँकते ही उसकी समझ मे आ गया की कराहने की आवाज़ देविका की थी & वो दर्द
मे नही मस्ती मे आहे भर रही थी.जब उसकी आँखे अंधेरे की आदि हुई तो उसने
देखा की देविका अपने घुटनो पे बैठी अपनी कमर हिला रही है.अंधेरे मे भी
इतना तो ज़ाहिर था की वो नंगी थी & बेचैनी से कमर हिला रही थी मगर उसे ये
समझ नही आ रहा था की नीचे कौन था क्यूकी उसे ये लग रहा था की वो चुदाई कर
रही है मगर फिर नीचे वाला आदमी क्या बिना पैरो के था देविका का चेहरा
दरवाज़े की तरफ ही था & उसके नीचे जो था वो यक़ीनन किसी का लंड ही था मगर
ऐसा पैर कटा इंसान कौन था जो उसे चोद रहा था?

ये उलझन भी देविका ने फ़ौरन ही दूर कर दी.मस्ती मे पागल हो जैसे ही उसने
अगली आह भरी इनडर सब समझ गया & उसे अपनी बेवकूफी पे हँसी भी
आई,"..आअन्न्न्नह...शिवाआआ....आइ लव यू..जान्न्न्न्न..!",देविका दरअसल
शिवा के मुँह पे बैठी कमर हिला रही थी & इंदर जिसे लंड & कमर समझ रहा था
वो असल मे शिवा की जीभ & सर थे.देविका सरक के पीछे हुई & बिजली की तेज़ी
से लंड को अपनी चूत मे घुसाया & 1 बार फिर अपने प्रेमी के उपर लेट
उच्छलने लगी.

..तो ये बात है!..शिवा भाई देविका जी के प्रेमी हैं & इसलिए अपने कमरे से
गायब हैं..चलो अच्छा है..अपना काम और आसान हो गया.इंदर का शैतानी दिमाग़
अब तक 1 तरकीब सोच चुका था.वो जानता था की शिवा को अभी यहा बहुत वक़्त
लगने वाला है मगर तभी अंदर से आ रही आवाज़ो पे उसका ध्यान गया.

देविका मस्ती मे पागल हो चुद्ते हुए पीछे हो शिवा की टांगो पे लेट गयी
थी.शिवा भी उठ बैठा था & उस पोज़िशन मे ही बड़ी हल्की-2 कमर हिला उसे चोद
रहा था.उसका दिल किया की वो अपनी जानेमन की चूचियो का भी लुत्फ़ उठाए तो
उसने हाथ बढ़ाके दोनो मोटे गोलो को थामा & उन्हे पकड़ के देविका को अपनी
टाँगो से उठा लिया.

"आआअहह..!",दर्द & मस्ती से भरी देविका की तेज़ आह ने ही इंदर का ध्यान
खींचा,"..बड़े शरीर हो तुम!",देविका शिवा की गोद मे बैठी उसके सर को थामे
प्यार से चूम रही थी & वो भी उसकी कमर को सहलाते हुए उसकी छातियो को चूम
& चूस रहा था.

"शनिवार को फिर जाओगे अपने भाई के पास?",देविका ने उसका सर अपनी चूची से उठाया.

"हां.",शिवा ने बाए हाथ से देविका के सर को नीचे किया & दाए से उसकी गंद
को मसला & उसे चूमने लगा.

"उन्न्ह..इस बार मत जाओ..",देविका बहुत मस्त हो चुकी थी,"..मैं कैसे
गुज़ारुँगी पूरी रात अकेली..आनंह..!"

"बस 1 ही रात की बात है.फिर नही जाऊं तो भाई साहब चिंता करते हैं.",शिवा
ने बिना लंड चूत से निकाले अपने घुटने मोड & देविका की गंद को थाम गहरे
धक्के लगाने लगा,"..घबराओ मत.आके तुम्हे यान्हा छ्चोड़ने की सारी कसर
पूरी कर दूँगा.",इसके बाद कमरे मे बस दोनो प्रेमियो के बदनो की रगड़ की
आवाज़ & उनकी मस्त आहो के शोर के सिवा कुच्छ ना था.इंदर वाहा से निकला &
जल्दी से नीचे पहुँचा & शिवा का कमरा खंगालने लगा.कमरे मे कोई बहुत चीज़े
तो थी नही.15 मिनिट बाद ही वो उस कमरे की चाभी जो उसे वही कमरे के 1
शेल्फ पे मिल गयी थी,की छाप 1 साबुन पे ले रसोई के दरवाज़े से बाहर निकल
उसमे ताला लगा वापस सर्वेंट क्वॉर्टर्स की ओर जा रहा था.

शिवा गहरी नींद मे सोया था जब उसे अपनी पीठ पे कुच्छ महसूस हुआ.वो देविका
के बिस्तर मे नंगा पेट के बल सोया था,उसने आँखे खोली तो देखा देविका उसके
उपर लेटी,उसकी पीठ मे अपनी छातिया दबाए उसकी पीठ को चूम रही थी.खिड़की से
सुबह के उगते सूरज की किर्ने पर्दे से छन के अंदर आ रही थी.शिवा ने करवट
ली & उठ बैठा,अब उसके देविका के प्रेमी से वापस उसके नौकर बनने का वक़्त
हो चला था.

"थोड़ी देर और रूको ना!",देविका ने बिस्तर से उतरते शिवा के बदन को पीछे
से बाहो मे भर लिया.जवाब मे शिवा बस हंसा & अपनी शर्ट के बटन बंद करने
लगा.उसके पीछे घुटनो पे बैठी देविका ने उसके हाथ शर्ट से अलग किए & फिर
खुद उन्हे बंद करने लगी.

"अरे!मैं तुमसे 1 ज़रूरी बात तो करना भूल ही गयी!"

"क्या?"

"तुम मुझे इंदर से होशियार रहने को क्यू कहते थे?वो तो बहुत ही ईमानदार &
शरीफ इंसान है."

"देखो देविका,उस इंसान को देख हमेशा मुझे ऐसा लगता था जैसे की वो अंदर से
कुच्छ और है & उपर से अच्छे होने का ढोंग करता है.",बटन बंद होते ही वो
बिस्तर से उठ गया,"..लेकिन अभी तक उसने कोई ग़लत काम किया नही है & हो
सकता है मैं भी फ़िज़ूल उसपे शक़ कर रहा हू.तुम्हे भी 3 महीने तो हो ही
गये हैं उसके साथ काम करते हुए.अगर तुम कहती हो तो हो सकता है वो अच्छा
इंसान ही हो."

"अच्छा,अब चलता हू.रात को मिलते हैं.",शिवा झुका & दोनो कुच्छ पॅलो तक 1
दूसरे को चूमते रहे & फिर वो कमरे से बाहर चला गया इस बात से बेख़बर की
वो पहले ही सही था & अब ग़लत & इस ग़लती की कितनी बड़ी सज़ा उसे & उसकी
महबूबा को भुगतनी पड़ेगी.

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rajaarkey
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Re: Badla बदला

Unread post by rajaarkey » 04 Nov 2014 08:13

इंदर के बदले के प्लान के अगले दौर मे ये बहुत ज़रूरी था की देविका के
पास उसका कोई भी भरोसेमंद नही हो.उसके पति को तो वो पहले ही किनारे कर
चुका था,देवर से उसे कोई खास ख़तरा था नही क्यूकी वो यहा रहता ही नही था
& बेटा..उस से तो खैर कोई परेशानी होने का सवाल ही नही था.

अब रह जाता था केवल शिवा जिसे हटाने की चाल इंदर ने अच्छी तरह से सोच ली
थी लेकिन इसके लिए ज़रूरी था की रजनी वाहा मौजूद ना रहे.इस बात को पूरा
करने के लिए इंदर उसका क़त्ल भी कर सकता था पर वो बेवजह कोई ख़तरा नही
मोल लेना चाहता था इसलिए उसने रजनी को छुट्टी पे जाने के लिए मना लिया
था.

अब बस उसे इंतेज़ार था उस रोज़ का जिस दिन शिवा एस्टेट से बाहर जाता अपने
भाई से मिलने.और आख़िर वो दिन भी आ गया.

रजनी 5 दिन पहले ही अपने मा-बाप से मिलने 2 महीने की छुट्टी पे चली गयी
थी & सवेरे ही शिवा भी पंचमहल चला गया था अपने भाई से मिलने.आज सही मौका
था & इसके लिए इंदर ने सारी तैय्यारि कर ली थी.शनिवार का दिन था & आज
दफ़्तर मे बहुत कम स्टाफ आता था.

"कम इन.",देविका अपने कंप्यूटर पे काम कर रही थी & मॉनिटर से नज़र हटाए
बिना उसने दस्तक देने वाले को कॅबिन के अंदर आने की इजाज़त दी.

"गुड मॉर्निंग,मॅ'म."

"आओ,इंदर.बोलो क्या बात है."

"मॅ'म 1 बहुत ज़रूरी बात करनी है मगर समझ नही आता की शुरू कैसे
करू.",उसकी बात सुन देविका के माथे पे शिकन पड़ गयी.उसने कंप्यूटर से
नज़र हटके उसकी ओर सवालिया निगाहो से देखा.

"मॅ'म.बात शिवा भाई के बारे मे है.",1 पल को देविका को बहुत घबराहट
हुई.उसे लगा की कही ऐसा तो नही की इंदर को उसके & शिवा के रिश्ते के बारे
मे पता चल गया है.

"क्या बात करनी है शिवा के बारे मे?",उसके चेहरे पे उसके दिल की घबराहट
नही आने पाई थी.

"मॅ'म. कुच्छ दिन पहले सभी बिज़्नेसस & डिपार्ट्मेंट्स के अकूउंतस चेक कर
रहा था की तभी मेरी नज़र सेक्यूरिटी डिपार्टमेंट मे हुए इस घपले पे गयी."

"घपला!",देविका चौंक पड़ी.उसे थोड़ा चैन तो मिला की उसका राज़ महफूज़ था
मगर शिवा & घपला!

"जी,मॅ'म.ये देखिए सर के गुज़रने के बाद हमारे यहा कोई भी नयी भरती नयी
हुई है..",उसने कुच्छ प्रिंट आउट्स उसके साइन किए,"..लेकिन सर के गुज़रने
के बाद ही सेक्यूरिटी डिपार्टमेंट 2 एक्सट्रा लोगो के नाम पे अकाउंट्स से
उनकी तनख़ाह के पैसे ले रहा है.छान-बीन करने पे पता चला की इन दोनो के
नाम का कोई शख्स हमारे यहा काम ही नही करते बल्कि इन फ़र्ज़ी मुलाज़िमो
के नाम से कोई हर महीने तनख़्वाह अपनी जेब मे डाल रहा है."

"कौन है वो धोखेबाज़?",देविका को जवाब मालूम था मगर फिर भी दिल का कोई
कोना इस उमीद मे था की इंदर कोई और नाम लेगा.

"जी..",इंदर ने नज़रे नीची कर बहुत परेशान & दुखी होने का नाटक किया,"..शिवा भाई."

"इंदर,इस बात के सबूत हैं तुम्हारे पास."

"वो प्रिंट-आउट्स देखिए मॅ'म.इन फ़र्ज़ी नामो के अकाउंट्स शिवा भाई ही
ऑपरेट कर रहे हैं.उनका फोन नंबर & डीटेल्स इस्तेमाल किया गया है दोनो
अकाउंट्स खुलवाने मे.",देविका का गला भर आया था & दिल मे
गुस्सा,दुखा,अपमान & धोखा खाने का दर्द था.वो सर झुकाए बस उन काग़ज़ो को
देखे जा रही थी जिन्होने कोई शुबहा नही छ्चोड़ा था की शिवा वो शिवा जो
उसे मरते दम तक चाहने का दम भरता था..वो शिवा जो उसका आख़िरी सांस तक साथ
निभाने की कसमे ख़ाता था..वो शिवा जिसके सहारे उसने बाकी की ज़िंदगी
गुज़ारने का सपना देखा था......वो शिवा उसे चंद रुपयो के लिए धोखा दे रहा
था.

देविका खामोश बैठी उन काग़ज़ो को देख रही थी.उसके दिल मे तूफान उठा हुआ
था.इंदर का काम हो गया था,वो धीरे से उठा & कॅबिन से बाहर चला गया.

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क्रमशः............



rajaarkey
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Re: Badla बदला

Unread post by rajaarkey » 04 Nov 2014 08:14


बदला पार्ट--30

गतान्क से आगे...
rajni chudane ke baad bekhabar so rahi thi.inder dhire se utha & apne
kapde pehne.apni jeans ki jeb tatoli to vaha vo duplicate chabhi thi
jo usne aaj savere hi Haldan me banvayi thi.vo rajni ke quarter se
bahar nikla & seedha bungle ke peechhe rasoi ke darwaze pe raat ke
chaukidaro se chhipta hua pahunch gaya.agle hi pal vo bungle ke andar
tha.suren ji ki maut ke waqt use ye to pata lag gaya tha ki shiva
neeche ke kamer me rehta hai & parivar ke log upari manzil ke kamro
me.

vo dabe panv shiva ke kamre ke paas pahuncha & haule se band darwaze
ko dabaya.darwaza fauran khul gaya to inder ghabra ke peechhe hat
gaya.use laga ki kamre ke andar kahi shiva jaga hua na ho.kafi der tak
jab andar se koi aahaty nahi aayi to usne darwaze ko ot me khade ho
andar jhanka & chaunk gaya andar koi bhi nahi tha.kamre me laga pankha
ya AC bhi nahi chal rahe the.vo kamre ke andar dakhil hua & attached
bathroom ko check kiya,vo bhi khali tha..to itni raat gaye shiva gaya
kahan?apni thuddi khujata inder kamre se bahar nikala.

shiva to vahi tha jaha vo har raat hota tha-apni mehbooba ki baaho me
magar aaj raat us se 2 galtiya ho gayi thi.har raat devika ke kamer me
jane se pehle vo apne kamre ka tala laga deta tha magar aaj vo ye
karna bhul gaya tha & dusri galti jo thi usne inder ko khushi se pagal
kar diya.

vo dusri galti thi ki shiva ne aaj raat har raat ki tarah devika ke
kamre ka darwaza andar se band nahi kiya.inder chahta to tha ki 1 bar
shiva ke kamre ki talashi le magar uske pehle vo ye pakka kar lena
chahta tha ki shiva us dauran kamer me vapas nahi aayega lekin uski
samajh me bilkul nahi aa raha tha ki aakhir shiva gaya kaha!

isi udhedbun ne usne upari manzil check karne ki sochi & apne rubber
sole vale jute pehne bina aavaz kiye sidhiyan chadh gaya.pehle prasun
ka kamra tha fir 2 kamre joki guest rooms the,ke baad devika ka kamra
tha.inder ne prasun ke kamer ke darwaze pe kaan lagaya.andar khamoshi
chhayi thi,usne darwaze ka knob ghumaya magar vo andar se band tha.vo
aage badha & dono guest rooms ko bhi khali hi paya.

fir vo devika ke kamre pe pahuncha & fir uski khushi ka thikana nahi
raha.apni premika ke jism ka lutf uthaet shiva ko pata bhi nahi tha ki
uski galtiya uske liye & uski mehbooba ke liye kitni bhari padne vali
hain!inder ne devika ke darwaze ko chhua to vo halka sa khul gaya &
uske kano me andar se aisi aavaz aayi mano koi karah raha ho.kamre me
bilkul andhera tha.usne dhire se darwaza aur khola & fir usi ki ot me
ho andar jhanka.

jhankte hi uski samajh me aa gaya ki karahane ki aavaz devika ki thi &
vo dard me nahi masti me aahe bhar rahi thi.jab uski aankhe andhere ki
aadi hui to usne dekha ki devika apne ghtuno pe baithi apni kamar hila
rahi hai.andhere me bhi itna to zahir th ki vo nangi thi & bechaini se
kamar hila rahi thi magar use ye asmajh nahi aa raha tha ki neeche
kaun tha kyuki use ye lag raha tha ki vo chudai kar rahi hai magar fir
neeche vala aadmi kya bina pairo ke tha devika ka chehra darwaze ki
taraf hi tha & uske neeche jo tha vo yakinan kisi ka lund hi tha magar
aisa pair kata insan kaun tha jo use chod raha tha?

ye uljhan bhi devika ne fauran hi dur kar di.mastui me pagal ho jaise
hi usne agli aah bhari inder sab samajh gaya & use apni bevkufi pe
hansi bhi aayi,"..aaannnnhhhhh...shivaaaaaa....i love
you..jaannnnn..!",devika darasal shiva ke munh pe baithi kamar hila
rahi thi & inder jise lund & kamar samajh raha tha vo asal me shiva ki
jibh & sar the.devika sarak ke peechhe hui & bijli ki tezi se lund ko
apni chut me ghusaya & 1 bar fir apne premi ke upar let uchhalne lagi.

..to ye baat hai!..shiva bhai devika ji ke premi hain & isliye apne
kamre se gayab hain..chalo achha hai..apna kaam aur asan ho gaya.inder
ka shaitani dimagh ab tak 1 tarkib soch chuka tha.vo janta tha ki
shiva ko abhi yaha bahut waqt lagne wala hai magar tabhi andar se aa
rahi aavazo pe uska dhyan gaya.

devika masti me pagal ho chudte hue peechhe ho shiva ki tango pe let
gayi thi.shiva bhi uth baitha tha & us position me hi badi halki-2
kamar hila use chod raha tha.uska dil kiya ki vo apni janeman ki
chhatiyo ka bhi lutf uthaye to usne hath badhake dono mote golo ko
thama & unhe pakad ke devika ko apni tango se utha liya.

"AAAAAHHHHH..!",dard & masti se bhari devika ki tez aah ne hi inder ka
dhyan khincha,"..bade sharir ho tum!",devika inder ki god me baithi
uske sar ko thame pyar se chum rahi thi & vo bhi uski kamar ko sehlate
hue uski chhatiyo ko chum & chus raha tha.

"shanivar ko fir jaoge apne bhai ke paas?",devika ne uska sar apni
choochi se uthaya.

"haan.",shiva ne baye hath se devika ke sa ko neeche kiya & daye se
uski gand ko masla & use chumne laga.

"unnhh..is bar mat jao..",devika bahut mast ho chuki thi,"..main kaise
guzarungi puri raat akeli..aannhh..!"

"bas 1 hi raat ki baat hai.fir nahi jaoon to bhai sahab chinta karte
hain.",shiva ne bina lund chut se nikale apne ghutne mode & devika ki
gand ko tham gehre dhakke lagane laga,"..ghabrao mat.aake tumhe yanha
chhodne ki sari kasar puri kar dunga.",iske bad kamre me bas dono
permiyo ke badano ki ragad ki aavaz & unki mast aaho ke shor ke siva
kuchh na tha.inder vaha se nikla & jaldi se neeche pahuncha & shiva ka
kamra khangalne laga.kamer me koi bahut chize to thi nahi.15 minute
baad hi vo us kamre ki chabhi jo use vahi kamre ke 1 shelf pe mil gayi
thi,ki chhap 1 sabun pe le rasoi ke darwaze se bahar nikal usme tala
laga vapas servant quarters ki or ja raha tha.

Shiva gehri nind me soya tha jab use apni pih pe kuchh mehsus hua.vo
Devika ke bistar me nanga pet ke bal soya tha,usne aankhe kholi to
dekha devika uske upar leti,uski pith me apni chhatiya dabaye uski
pith ko chum rahi thi.khidki se subah ke ugte suraj ki kirane parde se
chhan ke andar aa rahi thi.shiva ne karwat li & uth baitha,ab uske
devika ke premi se vapas uske naukar banane ka waqt ho chala tha.

"thodi der aur ruko na!",devika ne bistar se utarte shiva ke badan ko
peechhe se baaho me bhar liya.jawab me shiva bas hansa & apni shirt ke
button band karne laga.uske peechhe ghutno pe baithi devika ne uske
hath shirt se alag kiye & fir khud unhe band karne lagi.

"are!main tumse 1 zaruri baat to karna bhul hi gayi!"

"kya?"

"tum mujhe Inder se hoshiyar rehne ko kyu kehte the?vo to bahut hi
imandar & sharif insan hai."

"dekho devika,us insan ko dekh humesha mujhe aisa lagta tha jaise ki
vo andar se kuchh aur hai & upar se achhe hone ka dhong karta
hai.",button band hote hi vo bistar se uth gaya,"..lekin abhi tak usne
koi galat kaam kiya nahi hai & ho sakta hai main bhi fizul uspe shaq
kar raha hu.tumhe bhi 3 mahine to ho hi gaye hain uske sath kaam karte
hue.agar tum kehti ho to ho sakta hai vo achha insan hi ho."

"achha,ab chalta hu.raat ko milte hain.",shiva jhuka & dono kuchh palo
tak 1 dusre ko chumte rahe & fir vo kamre se bahar chala gaya is baat
se bekhabar ki vo pehle hi sahi tha & ab galat & is galti ki kitni
badi saza use & uski mehbooba ko bhugatni padegi.

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Inder ke badle ke plan ke agle daur me ye bahut zaruri tha ki Devika
ke paas uska koi bhi bharosemand nahi ho.uske pati ko to vo pehle hi
kinare kar chuka tha,devar se use koi khas khatra tha nahi kyuki vo
yaha rehta hi nahi tha & beta..us se to khair koi pareshani hone ka
sawal hi nahi tha.

ab reh jata tha kewal Shiva jise hatane ki chaal inder ne achhi tarah
se soch li thi lekin iske liye zaruri tha ki Rajni vaha maujood na
rahe.is baat ko pura karne ke liye inder uska qatl bhi kar sakta tha
par vo bevajah koi khatra nahi mol lena chahta tha isliye usne rajni
ko chhutti pe jane ke liye mana liya tha.

ab bas use intezar tha us roz ka jis din shiva estate se bahar jata
apne bhai se milne.aur aakhir vo din bhi aa gaya.

rajni 5 din pehle hi apne maa-baap se milne 2 mahine ki chhutti pe
chali gayi thi & savere hi shiva bhi Panchmahal chala gaya tha apne
bhaise milne.aaj sahi mauka tha & iske liye inder ne sari taiyyari kar
li thi.shanivar ka din tha & aaj daftar me bahut kam staff aata tha.

"come in.",devika apne computer pe kaam kar rahi thi & monitor se
nazar hataye bina usne dastak dene vale ko cabin ke andar aane ki
ijazat di.

"good morning,ma'am."

"aao,inder.bolo kya baat hai."

"ma'am 1 bahut zaruri baat karni hai magar saamjh nahi aata ki shuru
kaise karu.",uski baat sun devika ke mathe pe shikan pad gayi.usne
computer se nazar hatake uski or sawaliya nigaho se dekha.

"ma'am.baat shiva bhai ke bare me hai.",1 pal ko devika ko bahut
ghabrahat hui.use laga ki kahi aisa to nahi ki inder ko uske & shiva
ke risht ke bare me pata chal gaya hai.

"kya baat karni hai shiva ke bare me?",uske chehre pe uske dil ki
ghabrahat nahi aane payi thi.

"ma'am.amin kuchh din pehle sabhi businesses & departments ke acoounts
check kar raha tha ki tabhi meri nazar security department me hue is
ghaple pe gayi."

"ghapla!",devika chaunk padi.use thoda chain to mila ki uska raaz
mehfuz tha magar shiva & ghapla!

"ji,ma'am.ye dekhiye sir ke guzarne ke baad humare yaha koi bhi nayi
bharti nayi hui hai..",usne kuchh print outs uske samn kiye,"..lekin
sir ke guzarne ke baad hi security department 2 extra logo ke naam pe
accounts se unki tankhah ke paise le raha hai.chhan-been karne pe pata
chala ki in dono ke naam ka koi shakhs humare yaha kaam hi nahi kata
balki in farzi mulazimo ke naam se koi har mahine tankhwah apni jeb me
daal raha hai."

"kaun hai vo dhokhebaaz?",devika ko jawab malum tha magar fir bhi dil
ka koi kona is umeed me tha ki inder koi aur naam lega.

"ji..",inder ne nazre neechi kar bahut pareshan & dukhi hone ka natak
kiya,"..shiva bhai."

"inder,is baat ke sabot hain tumhare paas."

"vo print-outs dekhiye ma'am.in farzi namo ke accounts shiva bhai hi
operate kar rahe hain.unka fone number & details istemal kiya gaya hai
dono accounts khulwane me.",devika ka gala bhar aaya tha & dil me
gussa,dukha,apman & dhokha khane ka dard tha.vo sar jhukaye bas un
kagazo ko dekhe ja rahi thi jinhone koi shubaha nahi chhoda tha ki
shiva vo shiva jo use marte dum tak chahne ka dum bharta tha..vo shiva
jo uska aakhiri sans tak sath nibhane ki kasme khata tha..vo shiva
jiske sahare usne baki ki zindagi guzarne ka sapna dekha tha......vo
shiva use chand rupayo ke liye dhokha de raha tha.

devika khamosh baithi un kagazo ko dekh rahi thi.uske dil me toofan
utha hua tha.inder ka kaam ho gaya tha,vo dhire se utha & cabin se
bahar chala gaya.

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kramashah............