कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र

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rajaarkey
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Unread post by rajaarkey » 03 Nov 2014 16:59

मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. तभी पापा ने एक ज़बरदस्त धक्का लगा दिया और उनका लंड चूत को चीरता हुआ पूरा अंडर समा गया.

“ आाऐययईईई….आआअहह….आह.” मेरे मुँह से ज़ोर की चीख निकल गयी.

“बेटी ऐसे चिल्लाओगी तो मम्मी जाग जाएगी.”

“आप भी तो हमें कितनी बेरहमी से चोद रहे हैं पापा.” पापा के मोटे मूसल ने मेरी चूत को बुरी तरह से फैला के चौड़ा कर दिया था. मुझे डर था की कहीं मेरी चूत सुचमुच ही ना फॅट जाए. अब पापा ने मेरी कमर पकड़ के धक्के लगाना शुरू कर दिया. आसानी से उनका लंड मेरी चूत में जा सके इसलिए अब मैने टाँगें बिल्कुल चौड़ी कर दी थी. मीठा मीठा दर्द हो रहा था. मैं अपने ही बाप से कुतिया बन के चुदवा रही थी.

“ कंचन बेटी तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है.” फ़च फ़च.. फ़च…..फ़च फ़च….फ़च… की आवाज़ें ज़ोर ज़ोर से आ रही थी. मेरी चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी. मैं इतनी उत्तेजित हो गयी थी की अपने चूतेर पीछे की ओर उचका उचका के पापा का लंड अपनी चूत में ले रही थी.

“ कंचन मेरी जान, तुम्हारी मम्मी को चोद कर भी आज तक इतना मज़ा नहीं आया.”

मैं तो वासना में पागल हुई जा रही थी. शायद अपने ही बाप से चुदवाने के एहसास ने मेरी वासना को और भड़का दिया था. पापा मेरे चूतरो को पकड़ के ज़ोर ज़ोर से धक्के मारते हुए बोले,

“कंचन बेटी. सच इन चूतरो ने तो हमारा जीना ही हराम कर रखा था. और तुम्हारा ये गुलाबी छेद!” ये कहते हुए उन्होने एक उंगली मेरी गांद में सरका दी.

“आआआहह…….. ईीइससस्स... ये क्या कर रहे हैं पापा?”

“बेटी तुम्हारे पति ने कभी इस छेद को प्यार किया है?” पापा अब मेरी गांद में उंगली अंडर बाहर कर रहे थे.

“आआी…ईईस्स्स्स… जी उन्होने तो कभी नहीं किया.” मैं समझ गयी थी कि अब पापा मेरी गांद भी मारना चाहते थे.मुझे मालूम था कि पापा को मम्मी की गांद मारने का बहुत शौक है. अपने ही बाप से गांद मरवाने की बात सोच सोच कर मैं बहुत उत्तेजित हो गयी थी और मेरी चूत तो इतनी गीली थी कि रस बह कर मेरी टाँगों पे बह रहा था. आख़िर वही हुआ जिसका मुझे अंदेशा था.

पापा मेरी गांद में उंगली करते हुए बोले,

“ कंचन बेटी हम तुम्हारे इस गुलाबी छेद को भी प्यार करना चाहते हैं.”

“हाई पापा आपको हमारे चूतेर इतने पसंद हैं तो कर लीजिए जी भर के उस छेद से प्यार. आज की रात मैं पूरी तरह से आपकी हूँ.”

“शाबाश मेरी जान, ये हुई ना बात. हमे पता था की हमारी प्यारी बिटिया हमे गांद ज़रूर देगी. अब अपने ये लाजबाब चूतेर थोरे से और ऊपर करो” मैने चूतेर ऊपर की ओर इस तरह उचका दिए कि पापा का लंड आसानी से मेरी गांद में जा सके. पापा ने मेरी गांद से उंगली निकाली और नीचे झुक के अपनी जीभ मेरी गांद के छेद पे टीका दी. मेरी तो वासना इतनी भड़क उठी थी की अब और सहन नहीं हो रहा था. शराब के नशे में वो धीरे धीरे मेरी गांद चाट रहे थे और कभी कभी जीभ गांद के छेद में घुसेड देते. एक हाथ से वो मेरी लंबी लंबी झाँटें सहला रहे थे.

“सच बेटी तुम्हारी गांद बहुत ही ज़्यादा स्वादिष्ट लग रही है. तुम्हारी गांद मैं से बहुत मादक खुश्बू आ रही है.” मुझे आज तक ये बात समझ नहीं आई थी कि मरद लोगों को औरत की गांद चाटने में क्या मज़ा आता है. अब पापा ने मेरी चूत के रस में से सना हुआ लंड मेरी गांद के छेद पे टिका दिया. हाई राम ! मेरे पापा मेरी गांद मारने जा रहे थे. मैं भी कुतिया बनी उस पल का इंतज़ार कर रही थी जब पापा का लंड मेरी गांद में प्रवेश करेगा. पापा ने मेरे चूतरो को पकड़ के चौड़ा किया और साथ ही एक ज़ोर का धक्का लगा दिया.

“ आआईयईई……आआआअहह….इसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स” जैसे ही लंड का मोटा सुपरा मेरी गांद में घुसा मेरे मुँह से चीख निकल ही गयी.

“हाई मेरी जान ! क्या मस्ट गांद है तुम्हारी!” पापा ने मेरे चूतेर पाकर के एक ज़ोर का धक्का लगा के आधे से ज़्यादा लंड मेरी गांद में उतार दिया.

“आआईईईआआआआआ……..ऊऊऊऊऊओ……….ईईस्स्स्स्स्स स.” मेरा दर्द के मारे बुरा हाल था. मुझे पक्का विश्वास था कि आज तो मेरी गांद ज़रूर फटेगी, लेकिन पापा से गांद मरवाने की चाह ने मुझे अँधा कर दिया था.

rajaarkey
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Unread post by rajaarkey » 03 Nov 2014 17:01

“कंचन बेटी जितना मज़ा तुम्हारी गांद मार के आ रहा है उतना मज़ा तो तुम्हारी मम्मी की गांद मार के कभी नहीं आया.” मुझे सबसे ज़्यादा खुशी इस बात की थी की मुझे चोदने में उन्हें मम्मी से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था. इस बार उन्होने पूरा लंड बाहर खीच कर एक ज़बरदस्त धक्के के साथ पूरा लंड जड़ तक मेरी गांद में पेल दिया.

“ऊऊऊऊीीईईईईईईईईईईईई………………आआआआआआआआआआ आ……..आआआआआअहह....मर गयी....ईीइससस्स”

अब पापा ने ज़ोर ज़ोर से धक्के मार मार के लंड मेरी गांद के अंडर बाहर करना शुरू कर दिया था. हर धक्के के साथ उनके बॉल्स मेरी चूत पे चिपक जाते. मेरी आखों के सामने कई बरसों पहले देखा हुआ नज़ारा घूमने लगा जब मैने और नीलम ने पापा का मूसल मम्मी की गांद के अंडर बाहर होता देखा था. उस सीन की याद आते ही मैं कंट्रोल ना कर सकी और एक बार फिर झाड़ गयी. पापा के धक्के अब तेज़ होते जा रहे थे और शायद वो झड़ने वाले थे. अचानक मुझे अपनी गांद में गरम गरम पिचकारियाँ सी महसूस हुई. पापा झाड़ गये थे. मेरी गांद लाबा लब उनके वीर्य से भर गयी थी. उन्होने जैसे ही मेरी गांद से अपना लंड बाहर खींचा, वीर्य गांद में से निकल कर मेरी चूत और जांघों पे बहने लगा. मैं पीठ के बल लेट गयी और अपनी गांद से निकला हुआ पापा का लंड अपने मुँह में ले लिया. किसी मरद का लंड चूसने में आज तक इतना मज़ा नहीं आया था जितना पापा का लंड चूसने में आ रहा था. पूरा लंड, बॉल्स और जांघें मेरी चूत के रस और उनके वीर्य के मिश्रण में सनी हुई थी. उनके लंड से मेरी चूत और गांद दोनो की गंध आ रही थी. मैने बारे प्यार से उनके लंड और बॉल्स को चाट चाट के सॉफ किया. पापा भी 2 घंटे से मुझे चोद रहे थे. वो भी तक कर निढाल हो गये थे. इतने में मुझे ख़र्राटों की आवाज़ सुनाई दी. पापा शराब के नशे और थकावट के कारण सो गये थे. मैने जी भर के उनके लंड को सहलाया, चूमा और चाता. थोरी देर मैं बिस्तेर पे पड़ी रही और पापा के लंड और उनके बॉल्स को सहलाती रही.

मैं अब धीरे से बिस्तेर से उठी. मेरी गांद में से पापा का वीर्य निकल के बह रहा था. मैं जल्दी से दूसरे बाथरूम में गयी और अपनी चूत और गांद को सॉफ किया. फिर मैने वापस जा के अपना पेटिकोट और ब्लाउस पहना और अपने ही बेडरूम में मम्मी के पास जा कर सो गयी. सच कहती हूँ चुदाई का ऐसा आनंद आज तक कभी नहीं आया था. मेरी गांद में फिर हल्का हल्का दर्द शुरू हो गया था. शायद फिर से थोड़ी फॅट गयी थी. अगले दिन मैं पापा से आँख नहीं मिला पा रही थी. अच्छा हुआ वो दो महीने के लिए टूर पे चले गये लेकिन मेरी चूत और गांद में मीठा मीठा दर्द छोड़ गये.

rajaarkey
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Unread post by rajaarkey » 03 Nov 2014 17:03

गतान्क से आगे ......

“aaaaaiiiiii.....isssssss....ooooooi maaaaaa..... mar gayi. Aaahhh...issss...aah.” Papa ke mote laude ne meri choot ke chhed ko itna zyada chaura kar diya tha, aisa lagta tha ki meri choot phat hi jaaegi.

“Kya hua beti?” papa ne lund thora sa aur under sarkate hue poochha.

“Papa, iiiisss....bahut...aaa... bahut mota hai aaaapka. Aap to hamaari choot phaar daalenge.”

“Hum apni pyaari bitiya ki choot kaise phaar sakte hain?” papa mere honthon ka ruspaan karte hue bole.

Papa ne meri dono taangen mor ke mere ghutne meri chuchion se chipka diye the. Ab to main bilkul laachaar thi aur meri choot papa ke mote kaale laude ki daya pe thi. Halaaki ab tak to pati, devar, sasurji aur Chhote bhai ke lumbe tagre lund mujhe chod chuke the, lekin ajj papa ka lund jhelna bhaari par raha tha. Main ye soch kar kaamp uthi ki agar 16 saal ki umar mein hi papa ne mujhe chod diya hota to meri choot ka kya haal ho jata. Itne mein papa ne apna lund thora sa meri choot ke baahar kheencha aur phir ek zor ka dhakka laga diya. Aadhe se zyada lauda meri choot mein sama gaya.

“aaaaaaaiiiiiiiii....ooooooiiiiiii maaaaaaaa........aahhh dheere....aaah...dheere..iiiissss....”

Isase pahle ki main kuchh sambhalti papa ne phir se apna lund supare tak baahar kheencha aur is baar ek aur bhi bhayankar dhakka maar ke poora lund meri choot mein utaar diya.

“aaaaahhhhhh...aaaaaiiii.....maar daala.. phaar daaliye. ...... aapko kya? Issss.. beti ki chaahe phat jaae.” Papa ka mota lauda aakhir jar tak meri choot mein ghus gaya tha aur unke mote mote balls meri gaand ke chhed pe dastak de rahe the. Mera badan paseene mein naha gaya tha. Papa thori der bina hile mere ooper pare rahe aur meri choochion aur honthon ka raspaan karte rahe. Meri choot ka dard bhi ab kum hone laga tha.

“Beti thora dard kum hua?” papa meri choochion ko dabaate hue bole.

“Haan papa, ab jee bhar ke chod lijiye apni pyaari bitiya ko.” Main unke kaan mein phusphusaate hue boli. Ab papa ne poora lund baahar nikaal ke meri choot mein pelna shuru kar diya. Such! Zindagi mein kisi marad se chudwaane mein itna mazaa kabhi nahin aaya tha. Ab mujhe ehsaas hua ki kyun mummy roz chudwaane ke liye utaawali rahti hai. Meri choot bahut geeli ho gayi thi usmen se phach...phach...phach ka maadak sangeet nikal raha tha. Kuchh der tak chodne ke baad unhone apna lund meri choot se baahar kheencha aur mere munh mein daal diya. Papa ka poora lund aur balls meri choot ke rus mein sane hue the. Maine papa ka lund aur balls chaat chaat kar saaf kar diye. Ab papa bole,

“Kanchan meri jaan, ab thora kutia bun jaao. Apne in jaan lewa nitumbon ke darshan bhi to kara do.”

“Aapko mummy ke nitumb bahut ache lagte hain na?” main papa ke balls sahalaate hue boli.

“Haan beti bahut hi sexy nitumb hain tumhaari mummy ke.”

“ Aur humaare ? humaare nitumb nahin achhe lage aapko?”

“Tumhaare nitumb to bilkul jaan lewa hain beti. Jub naha ke tight petticoat mein ghoomti ho to aisa lagta hai jaise petticoat phaar ke baahar nikal aaenge. Tumhaare matakte hue chooter dekh ke to hamaara lund na jaane kitni baar khada ho jata hai.”

“Hai papa itna tung karte hain hamaare nitumb aapko? Theek hai main kutia bun jaati hun. Ab ye nitumb aapke hawaale. Aap jo chaahe kar lijiye.” Ye kah kar maine jaldi se papa ke lund ke mote supare ko choom liya aur phir kutia bun gayi. Ab meri choochian bister pe tiki hui thi aur chooter hawa mein lahra rahe the. Maine chooter chudwaane ki mudra mein uchka rakhe the. Papa mere vishaal chootron ko dekh kar dung rah gaye. Unhone mere dono chootron ko apne haath mein dabocha aur apna munh unke beech mein ghusair diya. Ab main kutia bani hui thi aur papa mere peechhe kutte ki tarah mere chootron ke beech munh diye meri choot chaat rahe the. Phir unhone mere chootron ko pakar ke chaura kiya aur meri gaand ke chhed ke chaaron or jeebh pherne lage. Main to ab saatven aasmaan pet hi. Bahut hi mazaa aa raha tha. Itne papa ne apni jeebh meri gaand ke chhed mein ghusair di. Main ye na sah saki aur ekdum se jhad gayi. Kafi der tak isi mudra mein meri choot aur gaand chaatne ke baad unhone dono haathon se mere chootron ko pakra aur apne mote lund ka garam garam supara meri laar tapkaati choot pe tika diya........

Mera dil zor zor se dhadkne laga. Tabhi papa ne ek zabardast dhakka laga diya aur unka lund choot ko cheerta hua poora under sama gaya.

“ aaaaaiiiiii….aaaaahhhhh….ah.” mere munh se zor ki cheekh nikal gayi.

“Beti aise chillaogi to mummy jag jaaegi.”

“Aap bhi to hamen kitni berahmi se chod rahe hain papa.” Papa ke mote moosal ne meri choot ko buri tarah se phaila ke chaura kar diya tha. Mujhe darr tha ki kahin meri choot suchmuch hi na phat jaae. Ab papa ne meri kamar pakar ke dhakke lagana shuru kar diya. Asaani se unka lund meri choot mein jaa sake isliye ab maine tangen bilkul chauri kar di thi. Meetha meetha dard ho raha tha. Main apne hi baap se kutia bun ke chudwa rahi thi.

“ Kanchan beti tumhaari choot to bahut tight hai.” phach phach.. phach…..phach phach….phach… ki awaazen zor zor se aa rahi thi. Meri choot buri tarah se paani chhor rahi thi. Main itni uttejit ho gayi thi ki apne chooter peechhe ki or uchka uchka ke papa ka lund apni choot mein le rahi thi.

“ Kanchan meri jaan, tumhaari mummy ko chod kar bhi aaj tak itna mazaa nahin aaya.”

Main to vaasna mein paagal hui jaa rahi thi. Shaayad apne hi baap se chudwaane ke ehsaas ne meri vaasna ko aur bhadka diya tha. Papa mere chootron ko pakar ke zor zor se dhakke maarte hue bole,

“Kanchan beti. Such in chootron ne to hamaara jeena hi haraam kar rakha tha. Aur tumhaara ye gulaabi chhed!” Ye kahte hue unhone ek ungali meri gaand mein sarka di.

“Aaaaaahhhhhh…….. iiissss... ye kya kar rahe hain papa?”

“Beti tumhaare pati ne kabhi is chhed ko pyaar kiya hai?” Papa ab meri gaand mein ungli under baahar kar rahe the.

“Aaai…iiiissss… jee unhone to kabhi nahin kiya.” Main samajh gayi thi ki ab papa meri gaand bhi maarna chaahte the.Mujhe maloom tha ki papa ko mummy ki gaand maarne ka bahut shauk hai. Apne hi baap se gaand marwaane ki baat soch soch kar main bahut uttejit ho gayi thi aur meri choot to itni geeli thi ki rus bah kar meri taangon pe bah raha tha. Aakhir vahi hua jiska mujhe undesha tha.

Papa meri gaand mein ungi karte hue bole,

“ Kanchan beti hum tumhaare is gulaabi chhed ko bhi pyaar karna chhahte hain.”

“Hai papa aapko humaare chooter itne pasand hain to kar lijiye jee bhr ke us chhed se pyaar. Aaj ki raat main poori tarah se aapki hun.”

“Shabaash meri jaan, ye hui na baat. Humen pata tha ki humaari pyaari bitiya humen gaand zaroor degi. Ab apne ye lajabaab chooter thore se aur oopar karo” maine chooter oopar ki or is tarah uchka diye ki papa ka lund aasani se meri gaand mein jaa sake. Papa ne meri gaand se ungli nikaali aur neeche jhuk ke apni jeebh meri gaand ke chhed pe tika di. Meri to vaasna itni bhadak uthi thi ki ab aur sahan nahin ho raha tha. Sharaab ke nashe mein vo dheere dheere meri gaand chaat rahe the aur kabhi kabhi jeebh gaand ke chhed mein ghusair dete. Ek haath se vo meri lumbi lumbi jhaanten sahla rahe the.

“Such beti tumhaari gaand bahut hi zyada swadisht lag rahi hai. Tumhaari gaand main se bahut maadak khushboo aa rahi hai.” Mujhe aaj tak ye baat samajh nahin aayi thi ki marad logon ko aurat ki gaand chaatne mein kya mazaa aata hai. Ab papa ne meri choot ke rus mein se sana hua lund meri gaand ke chhed pe tika diya. Hai Ram ! mere papa meri gaand maarne jaa rahe the. Main bhi kutia bani us pal ka intzaar kar rahi thi jub papa ka lund meri gaand mein pravesh karega. Papa ne mere chootron ko pakar ke chaura kiya aur saath hi ek zor ka dhakka laga diya.

“ Aaaaiiiii……aaaaaaahhhhhhhhhhh….issssssssssss” Jaise hi lund ka mota supara meri gaand mein ghusa mere munh se cheekh nikal hi gayi.

“Hai meri jaan ! kya must gaand hai tumhaari!” Papa ne mere chooter pakar ke ek zor ka dhakka laga ke aadhe se zyada lund meri gaand mein utaar diya.

“Aaaiiiiiiaaaaaaaaaa……..oooooooooooh……….iiiissssss s.” Mera dard ke maare bura haal tha. Mujhe pacca vishwaas tha ki aaj to meri gaand zaroor phategi, lekin papa se gaand marwaane ki chaah ne mujhe andha kar diya tha.

“Kanchan beti jitna mazaa tumhaari gaand maar ke aa raha hai utna mazaa to tumhaari mummy ki gaand maar ke kabhi nahin aaya.” Mujhe sabse zyada khushi is baat ki thi ki mujhe chodne mein unhen mummy se bhi zyada mazaa aa raha tha. Is baar unhone poora lund baahar kheech kar ek zabardast dhakke ke saath poora lund jar tak meri gaand mein pail diya.

“ooooooooiiiiiiiiiiiiiii………………aaaaaaaaaaaaaaaaaaaa aa……..aaaaaaaaaaahhhhhh....mar gayi....iiissss”

Ab papa ne zor zor se dhakke maar maar ke lund meri gaand ke under baahar karna shuru kar diya tha. Her dhakke ke saath unke balls meri choot pe chipak jaate. Meri aakhon ke saamne kai barson pahle dekha hua nazaara ghoomne laga jub maine aur Neelam ne papa ka moosal mummy ki gaand ke under baahar hota dekha tha. Us scene ki yaad aate hi main control na kar saki aur ek baar phir jhad gayi. Papa ke dhakke ab tez hote jaa rahe the aur shaayad vo jhadne waale the. Achanak mujhe apni gaand mein garam garam pichkarian si mahsoos hui. Papa jhad gaye the. Meri gaand laba lub unke veerya se bhar gayi thi. Unhone jaise hi meri gaand se apna lund baahar kheencha, veerya gaand mein se nikal kar meri choot aur jaanghon pe bahne laga. Main peeth ke bal lete gayi aur apni gaand se nikla hua papa ka lund apne munh mein le liya. Kisi marad ka lund choosne mein aaj tak itna mazaa nahin aaya tha jitna papa ka lund choosne mein aa raha tha. Poora lund, balls aur jaanghen meri choot ke rus aur unke veerya ke mishran mein sani hui thi. Unke lund se meri choot aur gaand dono ki gandh aa rahi thi. Maine bare pyar se unke lund aur balls ko chaat chaat ke saaf kiya. Papa bhi 2 ghante se mujhe chod rahe the. Vo bhi thak kar nidhaal ho gaye the. Itne mein mujhe kharraton ki awaaz sunai di. Papa sharaab ke nashe aur thakawat ke karan so gaye the. Maine jee bhar ke unke lund ko sahalaya, chooma aur chaata. Thori der main bister pe pari rahi aur papa ke lund aur unke balls ko sahlaati rahi.

Main ab dheere se bister se uthi. Meri gaand mein se papa ka veerya nikal ke bah raha tha. Main jaldi se doosre bathroom mein gayi aur apni choot aur gaand ko saaf kiya. Phir maine waapas jaa ke apna petticoat aur blouse pahna aur apne hi bedroom mein mummy ke paas ja kar so gayi. Such kahti hun chudai ka aisa anand aaj tak kabhi nahin aaya tha. Meri gaand mein phir halka halka dard shuru ho gaya tha. Shaayad phir se thori phat gayi thi. Agle din main papa se aankh nahin mila paa rahi thi. Achha hua vo do maheene ke liye tour pe chale gaye lekin meri choot aur gaand mein meetha meetha dard chod gaye.

kramashah,,,