पेइंग गेस्ट compleet

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007
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Re: पेइंग गेस्ट

Unread post by 007 » 31 Oct 2014 16:44


मैने हचक हचक कर चोदते हुए कहा. “दो कारण हैं सुधा भाभी, एक यह कि ढीली चूत आराम से काफ़ी देर चोदी जा सकती है, लन्ड जल्दी झड़ता नहीं इसलिये ज्यादा देर मजा आता है, साली सकरी बुर हो तो दो मिनट में लौड़े को अपने घर्षण से झड़ा देती है. दूसरा कारण यह है कि ढीली चूतें बहुत रसीली होती हैं, जरा से मजे में चूने लगती हैं, और जो बुर के पानी के शौकीन हैं मेरी तरह, उन्हें खूब रस चाटने को मिलता है.”
हमारी इन बातों से हम दोनों अब मस्त गरम हो गये थे. एक घंटा भी होने को आया था. चुदाई का बहुत आनंद हम ले चुके थे. मैने अब हचक हचक कर उछल उछल कर कस के सुधा भाभी को चोदना शुरू कर दिया. दस मिनट में जब मैं मस्ती से चिल्लाते हुए झड़ा तो भाभी करीब सात आठ बार स्खलित हो चुकीं थीं. मजा लेने और सुस्ताने के बाद भाभी ने उठकर कपड़े ठीक किये. “अनिल भैया, अब रोज चोदोगे ना मुझे? प्लीज़? बच्चियों के बाहर जाते ही दोपहर को मैं तुंहारे कमरे में आ जाया करूंगी.” मेरा लन्ड आप के ही लिये है भाभी, पर रात को भी आप चुदाएं तो मुझे बड़ी प्रसन्नता होगी आपकी सेवा करने में.” “ठीक है, बच्चियों के सो जाने के बाद मैं आ जाया करूंगी, पर चुपचाप अंधेरे में ही चोदना पड़ेगा.”
उस दिन से हमारा कामकर्म मस्त चलने लगा. रोज दिन में जब सीमा और मीनल बाहर जाते तो मैं भाभी की चूत चूसता और चोदता. रात को जाग कर मैं भाभी की राह देखता. करीब एक बजे वे आतीं थी क्योंकि लड़कियां कभी कभी सोने में बाराह बजा देतीं थीं. शनिवार और रविवार को बड़ी तकलीफ़ होती थी क्योंकि दोनो लड़कियां घर में रहती थीं. कभी अगर वे सहेलियों के साथ घूमने जातीं, तब हम मौका देख कर फ़टाफ़ट चुदाई कर लेते.
भाभी के पूरे नग्न शरीर को मैने दूसरे ही दिन देख लिया था. भाभी सफ़ेद काटन की ब्रा और चड्डी पहनतीं थीं. शरीर बड़ा गदराया हुआ और मांसल था. झांटों के बाल छोड़ दिये जाएम तो भाभी का बाकी पूरा शरीर बड़ा कोमल और चिकना था. फ़ूले हुए मम्मे मुलायम और गुदाज थे. बहुत बड़े भी नहीं और छोटे भी नहीं, करीब करीब आमों जितने थे. नरम और पिलपिले होकर थोड़े लटकने लगे थे. निपल खूब बड़े बड़े थे, काले जामुनों जैसे. भाभी के अनुसार छोटी सीमा बहुत दिनों तक, करीब चार वर्ष की होने तक उनका दूध पीती थी, छोड़ने के लिये तैयार ही नहीं होती थी. उसीके चूसने से निपल बड़े हो गये थे.

रात को भाभी सिर्फ़ गाउन पहन कर आती थी ताकि जल्दी से उतारा जा सके. रात के अम्धेरे में कुछ दिखता तो नहीं था, पर मैं टटोल उनकी टांगों के बीच लेट जाता था और पहले घंटे भर उनकी चूत चूसता था. मन भर के बुर का रस पीने के बाद मैं फ़िर घंटे भर उन्हें चोदता. सुबह तीन के करीब भाभी तृप्त होकर अपना गाउन पहनती और अपने कमरे में लौट जातीं. बीच में जब भाभी की मासिक पारी शुरू हुई तो मुझे लगा था कि अब दो-तीन दिन नहीं आयेगी. पर बराबर आकर भाभी मेरा लन्ड चूसतीं और मुझे तीन चार बार झड़ा कर ही वापस जाती.
भाभी कभी कभी मेरी फ़रमाइश पर गाजर या ककड़ी से मुट्ठ मार कर दिखातीं. हस्तमैथुन का नजारा दिखकर मुझे पूरा दीवाना करके फ़िर वह रसभरी चिपचिपी गाजर या ककड़ी मुझे खिलाई जाती. एक बार रात को भाभी की चूत चूसी तो उसमें से मीठा चिपचिपा केला निकला. हम्सते हुए भाभी ने बताया कि उसने मेरे कमरे में आने के पहले छिले केले से आधा घंटा मुट्ठ मारी और फ़िर उसे वैसे ही बुर में घुसेड़ कर मुझे चखाने को चली आई. केले और चूतरस का वह मिश्रण मुझे इतना उत्तेजित कर गया कि उस रात मैने लगातार तीन घम्टे तक सुधा भाभीका भोसड़ा चोदा और आखिर सुबह पांच बजे अपने कमरे में जाने दिया.
सिर्फ़ एक मामले में सुधा भाभी ने मेरी एक न सुनी. उनको नंगा देखते समय मैने कई बार उनके मोटे भरे पूरे चूतड़ देखे थे. उस नरम चिकनी गांड को मारने के लिये मैं मरा जा रहा था पर जब भी भाभी से पूछता तो वह साफ़ मना कर देती. सिर्फ़ यह बात छोड़ कर बाकी सब भोग मुझे भाभी करातीं थीं. धीरे धीरे मैं सुधा भाभी के अधेड़ मांसल शरीर का पूरा दीवाना बन चुका था और वह खुद मेरे मस्त लन्ड की आदी हो गई थी.
एक महीना इसी मस्ती में गुजर गया. लड़कियों को भी खुछ भनक पड़ गयी क्योंकि एक दो बार हम पकड़े ही जाने वाले थे. एक बार भाभी किचन में टेबल के सामने बैठ कर पापड़ बेल रही थी. टेबल पूरा चादर से ढका था. मुझे भाभी के चूतरस की प्यास लगी और मैं सीधा टेबल के नीचे घुस कर उनकी साड़ी उठाकर उस में घुस गया और बुर चूसने लगा. भाभी ने साड़ी मेरे शरीर पर डाल दी और मुझे अन्दर छुपा लिया.
सहसा मीनल वहां आ गयी, वह कालेज से जल्दी लौट आयी थी. दरवाजे में खड़ी होकर अपनी मां से वह बात करती रही, साड़ी और चादर से छुपा होने से मैं उसे दिखा नहीं. “ममी तुम हांफ़ क्यों रही हो, चेहरा भी तमतमाया हुआ है?” उसने पूछा. मैने बुर चूसना चालू रखा और चुदासी की मारी बिचारी भाभी भी अपनी जांघों में मेरा सिर दबा मेरे मुंह को हौले हौले चोदती रही और मीनल से बातें भी करती रही. किसी तरह उसने मीनल को वहां से भगाया और फ़िर मेरे मुंह में अपना पानी झड़ाकर मेरी प्यास बुझाई.

007
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Re: पेइंग गेस्ट

Unread post by 007 » 31 Oct 2014 16:45


भाभी को भोगना मुझे बहुत अच्छा लगता था और अक्सर मैं आफ़िस से छुट्टी लेकर जल्दी घर आ जाता था जिससे लड़कियों के घर आने से पहले भाभी को चोद सकूम. असल में अब मुझे दोनों लड़कियां भी बहुत अच्छी लगने लगी थीं. मीनल का दुबला पतला सांवला शरीर और नन्ही किशोरी सीमा की कमसिन जवानी मुझे तड़पाने लगी थी. मैं सोचने लगा कि अगर इन्हें भी चुदासी के जाल में फ़ंसा लूम तो बस तीन तीन मस्त शरीर भोगने को मिलेंगे दिन रात,

इसलिये मैने सुधा भाभी को चुपचाप लड़कियों को भी इस काम क्रीड़ा में शामिल करने के लिये अनकहे तरीके से उकसाना शुरू कर दिया. उन्हें मैं अक्सर मां-बेटी के सम्भोग की कहानियां और चित्र लाकर देता. उन्हे एक दो बार ऐसी ब्लू फ़िल्में भी दिखायीं जिनमे सिर्फ़ मां और बेटियों की आपसी चुदाई और बुर चूसने को दिखाया गया था. एक बार तो मैने मजाक में कह भी दिया कि मेरे आने के पहले भी इस घर में भाभी के लिये बड़ी मस्ती की रातें होना चाहियी थीं क्योंकि जहां दो जवान बेटियां और उनकी चुदैल मां हो वहां उनके भूखे रहने का प्रश्न ही नहीं उठता था.
मां-बेटियों के काम सम्बन्धों के चित्र देख कर भाभी उत्तेजित होने लगी थीं. अब काफ़ी बार वे जब प्यार से अपनी बेटियों को गले लगाती तो बहुत देर तक छोड़ती नही थी और गालों के साथ साथ कभी कभी जल्दी से उनके होंठ भी चूम लेती थी. मैने देखा कि लड़कियों को भी यह अच्छा लगने लगा था.
आखिर एक दिन एक शुक्रवार को भांडा फ़ूट ही गया. हुआ यों कि मीनल और सीमा सुबह से ही पिकनिक को गयी थीं. देर रात आने वाली थीं. भाभीने फ़ोन करके मुझे आफ़िस से बुला लिया और दोपहर को जब मैं घर पहुंचा तो चुदासी से तड़पती सुधा भाभी बिलकुल तैयार थी. घर की चाबी मेरे पास थी इसलिये जैसे ही में दरवाजा खोल कर अन्दर पहुंचा, भाभी के बुलाने की आवाज आई और मैं उनके कमरे की ओर चल दिया. “अनिल भैया, जल्दी आओ, अब रहा नहीं जाता.”
मैं अन्दर गया तो देखता हूं कि भाभी मादरजात नंगी होकर पलंग पर पड़ी थी और अपनी तीन उंगलियां बुर में घुसेड़ कर हस्त मैथुन कर रही थी. “अनिल जल्दी आओ, चोद डालो मुझे, आज दिन भर मालूम नहीं कैसी चुदासी लगी है, मुट्ठ मारने से शांत ही नहीं होती. मीनल और सीमा भी अब रात को ही आएंगी तो मुझे आज दिन भर हचक हचक कर पूरे जोर से चोद डालो”
मैं भी अपने कपड़े उतार कर पलंग पर चढ गया और पहले तो भाभी की उंगलियां चाटने लगा. फ़िर लेट कर उस रिसती चूत पर मुंह लगाता हुआ बोला “भाभी, अभी तो चूसने दीजिये, मन भर के इस बुर रानी का प्रसाद पा लूम, फ़िर आपको आपकी इच्छानुसार चोद डालूंगा.” करीब आधा घंटा पैने उस चिपचिपी बुर को चाटा और चूसा और फ़िर क्लिटोरिस को मुंह में लेकर तब तक चूसा जब तक भाभी मस्ती से चीखती हुई ढेर नहीं हो गई.
झड़ने पर भी उसकी चुदाने की प्यास नहीं गयी और वह बार बार मुझसे चोदने को कहती रही. मै भी काफ़ी बुर का पानी पी चुका था, अपना लोहे जैसा कड़ा लन्ड लेकर भाभी पर चढ गया और एक ही बार में पूरा अन्दर उतार दिया. फ़िर भाभी के शरीर पर लेट कर उन्हें चूमता हुआ चोदने लगा. “झड़ना नहीं मेरे राजा भैया, शाम तक लगातार चोदना.” भाभी सिसकते हुए बोली.
अचानक दरवाजा खुला और सीमा और मीनल अन्दर आईं. पिकनिक कैंसल होने से वे जल्दी लौट आयीं थी. हमें पलन्ग पर कुश्ती लड़ते देखकर पहले तो स्तब्ध रह गईं और एक दूसरे की ओर देखने लगीं. फ़िर सीमा चहक कर बोली “हाय दीदी, तू ठीक कहती थी, अम्मा चुदा रही है अंकल से”. मुझे लगा कि दोनों अब हल्ला मचाएंगी पर मुझे और भाभी दोनों को चुदाई का इतना मजा आ रहा था कि हमने लड़कियों की परवाह न करके चोदना चालू रखा. कुछ देर तक तो दोनों दूर खड़ी देखती रहीं, फ़िर चुपचाप पास आकर पलन्ग पर बैठ गयीं और तमाशा देखने लगीं. दोनो के चेहरे अब धीरे धीरे कामवासना में डूबते दिख रहे थे.



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Re: पेइंग गेस्ट

Unread post by 007 » 31 Oct 2014 16:46

भाभी की सिस्कारियों को सुनकर बड़ी मीनल ने, जो मां की लाड़ली थी, पूछा “अम्मा, दर्द हो रहा है क्या, अनिल अंकल को उठने के लिये कहूम?” भाभी ने सिर हिला कर मना किया “नहीं बेटी, बहुत मजा आ रहा है, हा ऽ य, कितने जोर से मन लगा कर चोद रहे हैं मुझे तेरे अंकल” और उसने लाड़ में मीनल को पास खींच किया. मीनल का चेहरा अपनी हथेलियों में भर कर भाभी उसका मुंह चूमने लगीं. मीनल ने भी बड़े प्यार से भाभी की आंखों और गालों को चूमा और कहा “मेरी प्यारी अम्मा, कितने दिनों के बाद तुझे इतना खुश देखा है, मन भर के चुदा लो मां, हमारी फ़िक्र मत करो” और फ़िर वह भाभी को बड़े प्यार से चूमने में लग गई.
उधर छोटी सीमा मेरे गालों से अपना गाल सटा कर बैठ गयी और पूछा “क्यों अंकल, कैसी है हमारी अम्मा?” मैं हचक हचक कर उस बच्ची की मां को चोदता रहा और बोला “सीमा बेटी, तेरी अम्मा की चूत इतनी मादक है कि शराब भी क्या होगी. अभी चोद रहा हूं तो लगता है कि मखमल की म्यान को चोद रहा हूं.” सीमा ने मेरे होंठों पर अपने प्यारे नाजुक होंठ रख दिये और मुझे चूमने लगी. मैने धीरे से भाभी की ओर देखा कि वह इसपर क्या कहती है. पर उसे इसमें कुछ गैर नहीं लगा और हमारी ओर प्यार से मुस्कराकर वह फ़िर अपनी बड़ी बेटी का चुम्बन लेने लगी. मैने भी अपने होंठों में सीमा के मुलायम होंठों को दबा लिया और चूसने लगा.
चुदाई अब पूरे जोरों में थी और कस के फ़चाक-फ़चाक-फ़चाक कर मेरा लन्ड अन्दर बाहर हो रहा था. बड़ी बेटी अम्मा के साथ चूमाचाटी कर रही थी और छोटी बेटी अपनी अम्मा को चोदते मर्द से याने मुझसे चुम्बनों का आदान प्रदान कर रही थी. मैने चुम्बन थमा कर कहा “लड़कियों, देखो तुम्हारी मम्मी की चूचियां कैसी खड़ी होकर थिरक रही हैं. इसका मतलब यह है कि मां को बहुत आनन्द हो रहा है और ये स्तन भी खड़े होकर मांग कर रहे हैं कि हमें दबाओ. अगर इन्हे अपने नाजुक हाथों से सहलाओ और मसलो तो मम्मी को बड़ा मजा आयेगा.”
मीनल ने सीमा से कहा. “चल छोटी, देर मत कर, तू दाहिनी चूची पकड़, मैं बायीं दबाती हूं.” दोनों ने एक एक स्तन को हाथ में लिया और बड़े प्यार से वे अपनी मां के स्तन दबाने लगीं. मेरे साथ सीमा की और भाभी के साथ मीनल की चूमा चाटी चलती ही रही. मैं अब हचक हचक कर पूरे जोर से सुधा भाभी को चोद रहा था. “भाभी, अब नहीं रहा जाता, आप मन भर के चुद चुकी हैं ना, तो मै भी झड़ लूम”
भाभी मस्ती से कराह कर बोली “बस एक बार और अनिल, फ़िर तुम मार लेना मेरी बुर जैसे चाहो.” मेरे कहने पर लड़कियां जोर जोर से भाभी के निपल मसलने लगीं और इस मीठी हरकत को भाभी सह न सकीं और तृप्ति की एक किलकारी मार कर झड़ गईं. मैने अब घचा घच लन्ड चलाना शुरू कर दिया और दो मिनट में मस्त मुठिया कर भाभी की चूत में झड़ गया. मैं पूरा लस्त होकर भाभी के शरीर पर पड़ा पड़ा और सीमा को चूमता हुआ इस मीठे स्खलन का लुत्फ़ उठाता रहा जब तक पूरा नहीं झड़ गया.
लन्ड बाहर निकालकर मैने रूमाल से पोंछा. दोनों लड़कियां बड़ी ललचायी निगाह से उसकी तरफ़ देख रही थीं. रूमाल से मैने भाभी की गीली चू रही बुर भी पोंछी. भाभी ने अब अपनी दोनों बेटियों को बाहों में भर लिया था और बारी बारी से प्यार से चूम रही थीं. चूमते हुए भाभी ने उनसे कहा “मेरी प्यारी बच्चियों, अनिल अंकल इतना अच्छा चोदते हैं कि मुझे लगता है इनसे रात दिन चुदाऊ.”

सीमा ने शैतानी से कहा. “अम्मा, तो कितने दिनों से चुदा रही हो, हमें भी तो बताओ?” भाभी ने पूरी कहानी बताई कि कैसे वह पिछले कई दिनों से मुझसे दिन रात चुदा रही थी. जब उन्होंने बताया कि चोदने के अलावा कैसे हम एक दूसरे के गुप्तांगों को चूस चूस कर रसपान भी करते हैं तो लड़कियों की आंखों में छाई मादकता और गहरी हो गयी और उनकी सांसें जोर जोर से चलने लगीं.
छोटी सीमा भाभी की चूची दबाती हुई बोली. “वाह मम्मी, अकेले अकेले ही मजा लोगी, हमें भी तो चुदने दो.” सीमा की इस बेशर्म हरकत पर मीनल शरमा गई. “चुप कर सीमा, अम्मा को चुदाने दो, हम सिर्फ़ देखा करेंगे” सीमा ने झपट कर अपनी बड़ी बहन के उरोजों को हाथ लगाया और दबा कर देखा. “तो दीदी चुदाने के नाम से तेरे निपल क्यों कड़े हो गये, बिलकुल कंचे जैसे कड़क लग रहे हैं ?” मीनल और शरमा गयी और इधर उधर झांकने लगी. सुधा भाभी पड़े पड़े अपनी बेटियों की नोक झोंक देख कर हंस रही थी. मुझसे बोली “ठीक ही तो है, अनिल, बच्चियों को भी मजा मिलना चाहिये.”
मैंने कहा “इतनी प्यारी सुकुमार लड़कियां हैं भाभी, इन्हें तो मैं बड़े प्यार से रस ले लेकर भोगूंगा.” सीमा तो खुशी से उछल पड़ी “चलिये अंकल, पहले मुझे चोदिये” और अपने कपड़े उतरने लगी. भाभी ने उसे रोका और कहा “अभी नहीं बेटी, दिन है, कोई आ जायेगा तो तकलीफ़ होगी, बीच में ही कामकर्म बन्द करना पड़ेगा. सब लोग आराम कर लो, रात के खाने के बाद सब बड़े वाले कमरे में, जहां वह बड़ा पलन्ग है, मिलते हैं, फ़िर खूब प्यार करेंगे.”