माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

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The Romantic
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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 16:34

रीमा को जब लगा कि अब वह समय आ गया है जब मैं धीरे धीरे अपना होश खो रहा हूँ तो उसने अपने चूतड को हिलाना शूरु कर दिया जैसे एक कुतिया अपनी गाँड हिला कर अपने कुत्ते को रिझाती है बिल्कुल वैसे ही हिला रही थी रीमा अपना पीछवाडा। देख मेरे लाल अपनी माँ का पीछावाडा इसको पाने कि हसरत लेकर तू मेरे पास आया था मेरे लाल देख ले इनको निहार ले मेरे नितंब बडा प्यार करता है न तू अपनी माँ की गाँड से और माँ कि इस मोटी मोहन मतवाली गाँड को भोगने की चाह रखाता है माँ देगी बेटा माँ तुझे जरुर अपनी गाँड देगी जितनी देर चाहे जैसे चाहे भोगना माँ का पीछे वाला छेद तुने जिस तरह से मुझे खुश किया है ना माँ जरुर देगी तू चिंता मत कर मेरे मादरचोद बेटे। बस तू मुझे ऐसे ही मजा दिये जा ऐसे ही जैसा मैं कहती हूँ करता जा मेरे लाल माँ को खुश करेगा तो गाँड मे लंड डाल कर हिलाने को मिलेगा। इन मोटे चूतडो के सवारी करने को मिलेगी बिल्कुल इसी तरह कुतिया बन कर ही खडी रहूगी तेरे लिये और तू भी मुझे अपनी रंगीली कुतिया समझ कर ही चोदना कोई भी रहम मत करना मुझ पर उधेड कर रख देना अपनी माँ को ऐसे उधेडना कि तेरी ये कुतिया चल भी ना पाये पूरा मजा लेना बेटा। देख तेरी ये कुतिया माँ कैसे अपने चूतड हिला रही है और मेरी ये गाँड पसीने से भरी पडी है तेरी इस रंडी माँ का पसीना तेरे माँ के बदन से निकला है और तेरी माँ के बदन के कितने ही प्राकृतिक तत्व इसमे मिले है और ये तत्व तेरे लंड की सेहत के लिये बहुत ही जरूरी है बेटा तू रोज मेरे पसीनी का सेवन करेगा तो तेरा ये मूसल ज्यादा दिनो तक जवान बना रहेगा और अगर ये जवान रहेगा तभी तो अपनी माँ की गंडिया को मजा देगा बोल मादरचोद सही कहा कि नंही।

हाँ माँ तुम तो वैसे भी चुदायी शास्त्र की महा ज्ञानी हो तुम्को तो चुदायी शास्त्र की महान शिक्षक के रूप में प्रसिधी मिलनी चाहिये अगर तुम कह रही हो की तुम्हारे बदन से उतपादित होने वाले पर्दाथ मेरे लंड के लिये लाभ दायक है तो मैं जरुर उनका सेवन करूंगा माँ बेटा तू सच मुच मे पसीने की महत्ता को समझता है मैं तो धन्य हो गयी तेरे जैसे बेटा पाकर। तेरी माँ होने के नाते और मैं पहली औरत हूँ जिसने तुझे चुदायी सिखायी तो मैं तेरी शिक्षका हुयी दोनो तरह से तुझे सही मार्ग दिखाना मेरा कर्तव्य है। मेरी बात मान कर जीवन में आगे बढेगा तो तुझे मस्त चुद्दकड जीवन के साथ साथ हजारो चूत और गाँड भी प्राप्त होगी। तेरे लंड को इतनी प्रसीधी प्राप्त होगी के तेरे सामने मेरे जैसे अधेड उम्र की नारीयो की कतार लग जायेगी और तू अपने लंड रूपी मूसल से उनकी चूत और गाँड का उद्धार कर सकेगा मेरे लाल। मैं तो बस यही चाहाती हूँ कि जो भी औरत तेरे लिये अपने चूत के द्वार खोले वह तेरे लंड को कभी भी भूल न पाये और मैं जानती हूँ तेरे लंड मे ये शक्ति है बाकि तो मुझे पता नंही माँ मैं तो बस इतना जानता हूँ कि जब से मैंने इस कमरे में प्रवेश किया है मुझे ऐसा अहसास हो रहा है कि जैसे मैं किसी स्वर्ग में हूँ।

क्रमशः........................

The Romantic
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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 16:34

गतांक से आगे.....................

रीमा ने अपना पीछवाडा हिलाते हुये पीछे मुड कर मुझे देखा और मुस्कुरायी फिर थोडा आगे झुकी और अपने दोनो हाथ अपने चूतडो पर रख दिये। एक स्वर्ग का द्वार तो तू भोग चूका है मेरे लाल और फिर उसने अपने हाथो से अपने चूतड खीच कर चौडे कर दिये और अपनी गाँड खोल कर मेरे सामने कर दी और मेरे इस दूसरे स्वर्ग के द्वार को पाने की इच्छा रखता है न मेरे लाल तो ले आजा थोडी अपनी माँ कि सेवा कर फिर मैं अपने इस कसे संकरे द्वार का मजा भी दूंगी मेरे लाल और इस छेद में तुझे पहले छेद से ज्यादा मजा आयेगा समझा गाँडू। रीमा की गाँड का नजारा मेरे सामने आते ही मैं तो मस्ती से भर गया। मुझे उसकी इस गाँड मे ही लंड डाल कर हिलाना था और उसके लिये कुछ भी कर सकता था। आ जा बेटा अब बहुत हो गया अब तो भोग माँ के चूतड देख पसीने से तार तार हो गये है और पसीना तो अब बहने को तैयार है। तूने थोडी देर और की तो पसीना बह कर बर्बाद हो जायेगा आ जा मेरे लाल मेरी गंडिया बाद मे निहार लेना। अब मेरे लिये भी बहुत मुशकिल था रीमा के चूतडो से दूर रहना मैं रीमा के पीछे घुटनो के बल बैठ गया। मेरे बैठते ही रीमा की खुली हुयी गाँड एक दम मेरे सामने आ गयी मन किया अभी अपना मुँह रीमा के चूतडो के बीच घुसा दूं और उसकी गाँड चाट लूं पर पहले उसके चूतड से बह रहा पसीना पीना ज्यादा जरुरी था। रीमा ने अभी भी अपने चूतड खोल रखे थे मैंन कहा माँ तुम अब अपने चूतड छोड दो मैं तुम्हारा पसीना पीऊंगा।

रीमा ने अपने चूतड छोड दिये और घुटनो और हाथो के बल हो गयी और अपना चेहरा पीछे घुमा कर बोली ले बेटा बन गयी तेरी माँ कुतिया अब भोग अपनी माँ को मेरे लाडले। मैं थोडा झुक गया और अपने चेहरे को रीमा के भारी चूतड के पास ले गया पहले उसके बदन से निकल रही पसीने और चूत रस से मिली जुली गंध को मैंने सूंघा सच मे बहुत ही मस्तानी गंध थी रीमा के बदन की। फिर अपना ध्यान रीमा के बांये चूतड की तरफ लगाया जिस पर पसीने की बूंदे मोतियो की तरह चमक रही थी। फिर मैंने रीमा के चूतड को चूमना शुरु कर दिया चूमने के साथ साथ मैं रीमा का पसीना भी पी रहा था उसके चूतड के निचले हिस्से से चलते हुये मैं उपरी हिस्से तक गया और उसकी शराब से भी किमती पसीने की एक एक बूंद को मैंने पिया। पसीने के बूंदे चूमने के बाद मैंने उसके चूतड को चाटना शुरु कर दिया। पूरी जीभ निकाल कर नीचे से उपर तक लेकर जाता और उसके चूतड को चाटता अच्छे से एक एक इंच उसके चूतड को चाटने के बाद मैंने उसके चूतड को कुछ हिस्से को मुँह मे भर कर चूसना शुरु कर दिया जैसे जो पसीना रीमा के चूतड में समा गया हो उसे भी चूस कर बाहर निकाल कर पी संकू। मुझे इस तरह उसका चूतड चूसना बहुत भा रहा था। मेरा एक हाथ मेरे लंड कर चला गया और मैंने अपने सुपाडे को अपनी उंगलियो में पकड कर मसलने लगा क्योकि मेरी उत्तेजना मुझे पागल बनाये दे रही थी। मुझे समझ ही नंही आ रहा था कि क्या करूं और क्या नंही। इसलिये उसके चूतड को चूसने पर अपना ध्यान केन्द्रित करके मैं उसके बाँये चूतड के एक एक हिस्से को मुँह मे भर कर चूसा। रीमा भी मस्ती मै अपने चूतड हिला कर अपने मजे का इजहार कर रही थी। बाँये चूतड से पसीना निचोड लेने के बाद मैंने दाँये चूतड कि और अपना रुख किया। रीमा का बाँया चूतड मेरे मुँह के प्रतिकार की वजह से थूक से सन कर एक दम चमक रहा था।

उसके थूक से सने चूतड को एक नजर देखने के बाद अपना मुँह रीमा के दाँये चूतड पर लगा दिया और उसके पसीने को पीने लगा उसके दाँये चूतड को भी थोडी देर मैं मैंने चूम, चाट और चूस कर अपने थूक से सान दिया और अब उसके दोनो चूतड मेरे थूक में सने चमक रहे थे। फिर मैंने रीमा के थूक से सने दौनो चूतड अपने हाथो से पकडे और उनको जोर जोर से मसलने लगा। चूतड थूक से सने होने के कारण मेरे हाथ उसके चूतड पर फिसल रहे थे। पर उसके मुलायम चूतडो का अहसास मुझे अपने हाथो पर बहुत हे मस्ताना लग रहा था। थोडी देर रीमा के मुलायम चूतडो को मसलने का मजा लेता रहा फिर मैने अपनी नाक रीमा के चूतड की दरार पर रखी और उसकी गाँड कि मस्ताने गंध को सूंघने लगा। हाय क्या कर रहा रे गाँडू गाँड सूंघ रहा है मादरचोद हाय माँ के लौडे साले तू तो गाँड का बडा ही रसीया है तेरे जैसे रसीया बहुत ही कम मिलते है आज तू मुझे मिला है तो पूरा मजा लूंगी मुझे भी अपनी गाँड को प्यार करवाना पंसद है। गाँड पंसद है न तुझे बहनचोद मैं भी देखती हूँ कि तू क्या क्या कर सकता है मेरे चूतडो के लिये आज देख तेरी क्या हालत करती हूँ मैं अपने चूतड खुद ही पीछे करके मेरे चेहरे पर दबाते हुये रीमा ने कहा।


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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 16:35

उसके ऐसा करने से मेरी नाक उसकी चूतड की दरार मैं फंस गयी और उसकी गाँड की गंध सीधा मेरे नाक में समा गयी। और मैं भी गहरी सांँस लेकर उस मस्तानी गंध को अपने अंदर लेने लगा। सूंघ गाँडू सूंघ अपनी माँ कि गाँड ले मादरचोद यही चाहिये था न तुझे अब ले अपने चूतड को और भी कस कर मेरी नाक पर दबाते हुये रीमा बोली मैंने भी अपनी नाक रीमा की चूतड की दरार मे और घुसा दी मुझे उसकी वह सौंधी गंध बहुत ही पंसद आ रही थी। साथ ही साथ मैं उसके दोनो चूतड अभी भी मसल रहा था। अब मेरा थूक उसके चूतड पर थोडा सूख गया था जिसकी वजह से उसके चूतड अब बडी ही आसाने से मेरे हाथ मे पकड में आ रहे थे। और मैंने रीमा के चूतड को पूरी ताकत के साथ मसलना शुरु कर दिया। रीमा भी आगे पीछे अपने चूतड हिला रही थी जैसे वह मेरी नाक से अपनी गाँड चोद रही हो पर क्योके मैं उसके चूतड अपने हाथो से दबा रहा था जिसकी वजह उसके मोटे चूतडो के माँस ने उसकी गाँड का छेद अपनी अंदर छुपा रखा था जिसकी वजह से मेरी नाक उसके चूतड पर ही दब रही थी अभी तक मैं अपनी नाक से उसकी गाँड को महसूस नंही कर पाया था। रीमा को भी अपने मोटे चूतड मसलवाते हुये अपने चूतड की गंध सुंघवाने मे मजा आ रहा था। वह खुद ही अपने चूतड पीछे ढेल कर मेरे चेहरे पर दबा रही थी साथ ही साथ मुझे अपने चूतड जोर जोर से मसलने के लिये उकसा रही थी। माँस से भरे चूतडो पर मर्द का हाथ पडने के बाद रीमा बिल्कुल गली की कुत्तिया कि भांति हो गयी थी जो किसी भी कुत्ते का लंड चूत में लेने को बेताब हो जाती है। चूत की गर्मी ने रीमा का हाल बुरा कर दिया था।

क्रमशः........................