माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

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The Romantic
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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:52

जब वह चल कर जा रही थी तो उसके हौदे जैसे चूतड हिल रहे थे और उसने अपने हाथ बिल्कुल भी अपनी चूचीयो से नही हटाये थे। इस तरह से बैठने के बाद रीमा ने कहा आ जा बेटा ले मसल ले मेरे मम्मे अब इसतरह से बैठने से मुझे थोडा आसानी होगी अपने मम्मो को पकडने मे। मैं रीमा की तरफ चल दिया मेरा लंड मस्ती मे मेरे चलने से हिल रहा था और अब मुझे नाडे के बंधे होने के कारण हो रहे दर्द की आदत हो गयी थी। फिर मैं रीमा कि जाँघो के बीच जा कर बैठ गया और अपने हाथ उसकी जाँघो पर रखकर फेरते हुये आगे बढ कर उसकी घूडीयो का एक एक चुम्बन लिया। और अपने हाथ उठा कर उसकी चूचीयो पर रख दिय़्ये।

आज मैं पहली बार किसी के मम्मो को मसलने जा रहा था। जिसके सपने मैंने देखे थे आज वह पूरा होने जा रहा था। फिर मैंने उसके एक मम्मे को अपने हाथ मे लिया और उसको दबाया। आह कि आवाज रीमा के मुँह से निकल गयी। मेरे बदन मे भी मस्ती कि लहर दौड गयी। उसकी चूची उमर की वजह से ढीली हो गयी थी पर अभी भी काफी कडी और माँसल थी। फिर ऐसा ही मैंने उसके दुसरे मम्मे के साथ किया और फिर दोनो मम्मो पर हाथ रखकर धीरे धीरे उसके मम्मो को मसलने लगा। इसतरह से मैं उसकी चूचीयो को मसलने का मजा लेता रहा रीमा के उपर भी मेरे इसतरह से मम्मो को मसलने का असर हो रहा था। उसके मुँह से हल्की हल्की करहाने की आवाज निकल रही थी।

मुझे उसके मम्मो को इसतरह हल्के हल्के मसलने मै मजा आ रहा था और मै काफी देर से घुटनो के बल बैठ मेरे पैर भी दुख गये थे और अब मैं आराम से बैठ कर उसके मम्मो का मजा लेना चाहता था। यही सोच कर मैंने रीमा से कहा माँ अब मैं आराम से बैठ कर तुम्हारे मम्मो को मसल कर गुंथुगा जिससे इन मस्ताने मम्मो से कुछ रस निकाल सकू बहूत देर हो चूकी है मुझे और मुझे प्यास भी लग रही है। मैं इन मम्मो के रस से अपनी प्यास बुझाना चाहता हूँ। रीमा बोली थीक है बेटा बता क्या है तेरे मन मे। मैंने कहा माँ अब मैं सोफे पर बैठता हूँ और तुम मेरी गोदी मे बैठ जाओ और अपना एक हाथ मेरी गर्दन मे डाल कर मुझसे मम्मे मसलवाने का मजा लो। जब अच्छी तरह से मसलने के बाद तुम्हारी चूचीयाँ रस से भर जायेगी तब मैं अपने मुँह से इस घुडियो को चूस कर और अपनी जीभ से इन गोलाईयो को चाट कर तुम्हारा रस पीयूगाँ।रीमा बोली ठीक है बेटा जैसा तू बोल वैसे भी इसमे मेरा कुछ काम तो है नही बस मुझे तो आराम से बैठ कर अपने मम्मो को मसलवाना है और उनका जूस निकलवाना है। बाकी काम तो तुझे हि करना है। पर प्यास तो मुझे भी लगी है। तो बैठ जा सोफे पर मैं अपने लिये वाईन लेकर आती हूँ तेरी गोदी मैं तेरा लंड अपने चूतड के नीचे दबा कर बैठुगी और मम्मे मसलवाते हुये वाईन पीयूगी और कभी कभी अपने होठों से तुझे भी पिलाउँगी। और वैसे भी तेरी प्यास तो मेरे मम्मे बुझा देगें। फिर मैं एक आखरी बार उसके मम्मो को मसल कर उठ कर उसके बगल मे बैठ गया और बोला जाओ माँ तुम जाकर वाईन ले आओ मैं सोफे पर बैठता हूँ। रीमा ने कहा नही मैं तुझे ऐसे अकेला छोड कर नही जा सकती। कही मेरे पीछे तू अपने लंड से खेलने लगा तो। मैं नही चाहती तु अपने लंड से खेले। जब तक तू यहाँ है लंड से खेलने का हक सिर्फ मेरा है समझे।

मैंने कहा ठीक है माँ तुम कहती हो तो चलता हूँ। और फिर रीमा ने मेरा लंड अपने हाथो से पकडा और उसको खीचने लगी। उसके खीचने से मैं फट से उठ कर खडा हो गया। फिर वह मुझे मेरे लंड से पकड कर खीचती हुयी फ्रिज की तरफ़ ले चली। और मैं उसके पीछे पीछे किसी पालतू कुत्ते की भाँती चल दिया। फिर उसने लकडी के रैक के पास जाकर उसमे से वाईन का गिलास निकाला। और बगल मे रखे फ्रिज से जूस का डिब्बा निकाल कर गिलास मे जूस भरने लगी। मैंने कहा माँ तुम तो वाईन पीने वाली थी। रीमा बोली बेटा मे वाईन ही पीयूगी। इस जूस के गिलास से तू एक घूंट पी ले फिर मेरे लिये ये वाईन हि बन जायेगा। मैंने उसके तरफ आश्चर्य से देखा तो बोली अरे बेटा अगर कोइ प्रेमी या प्रेमिका किसी भी द्र्व्य को अपनी प्रेमीका या प्रेमी के होठों से छुआ दे तो उसमे इतना नशा भर जाता है की उससे अच्छी शराब और कोई हो ही नही सकती। और क्या तू मेरा प्रेमी और मैं तेरी प्रेमीका नही हूँ क्या।


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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:53

मैंने कहा हाँ माँ हम प्रेमी प्रेमीका ही है। गिलास मैं जूस भरने के बाद उसने जूस का डिब्बा वापस रख दिया और और जूस का गिलास मुझको पकडा दिया और बोली ले बेटा मेरे इस जूस को शराब बना दे। मैंने रीमा के हाथ से उसके जूस का गिलास ले लिया और उसमे से एक घूंट जूस पी कर गिलास उसको दे दिया। रीमा हाँ अब मेरी वाईन तैयार है। फिर मैं रीमा से बोला चलो माँ चल कर सोफे पर मेरी गोदी मैं बैठो फिर मैं तुम्हारे मम्मो की मालिश करता हूँ। यह कह कर मैंने अपना हाथ उसकी कमर मे डाल दिया और उसको सोफे की तरफ ले चला जैसे की वह मेरी प्रेमीका हो। मेरा मन तो मेरा हाथ उसके चूतडो पर रखने का कर रहा था पर मैंने अभी अपने आप को उसके मम्मो पर ही केन्द्रित रखना उचित समझा।

फिर मैं इसी तरह उसके बदन से अपना बदन सटा कर चलते हुये सोफे के पास तक आ गया। और फिर उसके गाल का चुम्बन लेकर उसकी कमर से हाथ निकाल लिया। और फिर मैं सोफे पर बैठ गया। मेरा लंड लोहे की रॉड की तरह सीधा खडा था। उसको देख कर रीमा बोली हाय रे तेरा लंड तो जबरदस्त खडा है अगर इस पर मैं बैठूगी तो ये मेरी पैन्टी फाड कर मेरी गाँड मे घुस जायेगा और मेरी गाँड को फाड देगा न बाबा न मैं तो नही बैठती तेरी गोदी मे। मैंने कहा नही माँ अगर तुम मेरे लंड को नीचे कर के अपने भारी चूतडो के नीचे इसको दबा लोगी तो फिर ये तुम्हारी पैन्टी नही फाड पायेगा और तुम्हारी गाँड भी बच जायेगी तुम एक बार बैठ कर तो देखो।

रीमा बोली तू बोलता है तो मैं बैठती हूँ पर मुझे बहुत डर लग रहा है। अच्छा ले मेरा गिलास पकड फिर मैं बैठती हूँ। मैंने रीमा के हाथ से गिलास ले लिया और फिर रीमा ने अपने भारी भरकम चूतड मेरी तरफ कर दिये और अपने हाथ से मेरा लंड पकड कर नीचे कि और दबा दिया और मेरी गोदी मे बैठ गयी फिर उसने थोडा बहुत इधर उधर हिल कर मेरे लंड को अपनी आराम के हिसाब से सेट कर लिया। अब मेरा लंड उसकी गाँड की दरार मे फंस गया था और उसकी भारी चूतडो के दवाब से नीचे दब गया। उसके माँसल नंगे गद्देदार चिकने चूतड मुझे मेरी जाँघो पर महसूस हो रहे थे।

मुझे रीमा के शरीर का भार अपनी जाँघो पर उसके चूतड के जरीये महसूस हो रहा था। उसके चूतडो के स्पर्श से मेरे मस्ती बढ रही थी पर मेरा लंड उसकी गाँड की दरार मे फंसा फडफडा रहा था। फिर इस तरह जब मेरा लंड अच्छी तरह से उसकी गाँड की दरार मे फंस गया रीमा ने अपनी चिकनी पीठ मेरी छाती पर टिका दी और बोली हाय रे मेरे लाल तू ठीक कहता था। तेरा लंड तो बिल्कुल मेरे गाँड से दब गया और मेरे पैन्टी मे छेद भी नही हुआ। फिर उसने अपनी एक बाँह मेरे गले के पीछे डाल दी ऐसा करे से मुझे उसकी काँख के काले लम्बे बालो की एक झलक मिली। बालो से भरी उसकी काँख कि झलक देख कर मन किया कि अपना मुँह उसमे घुसा दूँ पर मैंने अपने आप को रोक लिया।

फिर रीमा ने कहा ले बेटा बैठ गयी मैं अब तू इत्मिनान से मेरे मम्मो को दबा मसल और उन्का जूस निकाल कर पी ला मेरे जूस का गिलास मेरे को दे दे। मैंने जुस का गिलास रीमा को पकडा दिया और उसके मम्मो की तरफ देखने लगा। उसके मम्मे अब मेरे और पास आ गये थे और जैसे जैसे उसकी साँसे चल रही थी उसके मम्मे उपर नीचे हो रहे थे। मैंने अपना एक हाथ बढा कर उसकी कमर के इर्दगिर्द डाल दिया और अपने मुँह कि झुका कर उसके मम्मो कि दरार पर रख दिया और उसके बदन की गंध लेने लगा। फिर एक चुम्बन उसकी दरार का लेकर मैंने अपना हाथ उसके भारी भरकम १ किलो के मम्मे पर रख कर उसको धीरे धीरे मसलने लगा।

रीमा ने अपने जूस का एक सिप लिया और मस्ती भरी निगाह से मेरे को उसके मम्मे दबाते हुये देख रही थी। फिर रीमा बोली दबा बेटा दबा अपनी माँ के मम्मे मजा ले इनका आह ऐसे हि मेरे लाडले ऐसे ही दबा तूने तो मुझे आज महारानी बना दिया अपनी जाँघ पर बिठा कर क्या मजे दे रहा है मुझे। जोर से दबा बेटा इस तरह से धीरे धीरे मसलते हुये तेरे को बहुत देर हो गयी है। जरा इनको जोर से मसल। लगता है तेरे को थोडी ताकत कि जरुरत है मैं देती हूँ तेरे को ताकत। तेरे को अभी मैं जूस पिलाती हूँ अपने मुँह कि लार मिला कर उससे तुझको ताकत मिलेगी। मैंने कहा हाँ माँ मुझको तुम्हारे मुँह के जूस की बहुत जरुरत है। लाओ जल्दी लाओ पिलाओ मुझको अपना जूस।

ये कह कर उसने जूस का एक बडा घूंट भर लिया और अपने मुँह मे लेकर उसको घुमाने लगी जिससे उसका लार भी उस जूस मे मिल गयी। फिर उसने मेरे होठों पर अपने होठ रख दिये और अपने मुँह का जूस मेरे मुँह मे अपनी जीभ की मदद से डालने लगी। मैं उसके लार मिले जूस को धीरे धीरे पीने लगा। इस तरह करते करते रीमा ने अपने मुँह का सारा जूस मुझको पीला दिया। फिर रीमा बोली अब तो कुछ ताकत आयी तेरे मे दबा मेरे चूचीयो मसल के रख दे अपने मजबूत हथो से लाल कर दे इनको रगड रगड कर। फिर मैंने अपना हाथ उसके एक मम्मे के सामने रखा जिससे उसकी घुडी मेरी हथेली के थीक बीच मे आ गयी और अपने पूर हाथ से उसका मम्मा पकडते हुये अपनी पूरी ताकत से मसल दिया जैसे मैं कोई बडा सा नीबूं निचोड रहा हूँ।

क्रमशः.....................

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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:54

गतांक से आगे.....................

इस पर रीमा चिल्ला पडी और बोली हाय रे मार डाला क्या जोर से मसली है मेरी चूची। मेरे पुरे मम्मे मे दर्द भर दिया हाय रे जालिम इतनी जोर से मसलते हैं क्या इतना प्यारा मम्मा। पर बेटा मुझे बडा मजा आया तू मसल जितनी जोर से मसल सकता है मसल इस दर्द मे भी तेरी रंडी माँ को मजा आ रहा है। ये हुयी न कुछ मर्दो वली बात इतनी देर से क्या बच्चो कि तरह मसल रहा था मेरी चूचीयाँ। और मसल जोर जोर से रुक क्यो गया मसल इनको साली बडा परेशान करती है रोज आज मिला है कोई पक्का हरामजादा जो इनकी सही से कुटायी कर सकता है। हाँ बेटा मसल डाल इनको निकाल दे इनकी सारी मस्ती। आज पता चलेगा इनको मुझे तंग करने कि सजा कया होती है। रोज मुझसे मेरी चूचीयाँ कहती रहती है कि मुझे मसलो मुझे मसलो। आज मेरा बेटा आ गया है और इन चूचीयो को कस के कुटायी करेगा और इनको मसल मसल कर पुरा बदला लेगा इन साली हरामी चूचीयो से अपनी माँ को तंग करने का। फिर मेरी और देख कर बोली लेगा न बेटा बदला इनसे मुझको तंग करने का।

मैं चूचीयो को उसी तरह से कस कस के मसल रहा था। मैंने कहा हाँ माँ जरुर लूँगा बदला इनसे माँ। इन साली चूचीयो के इतनी हिम्मत कि मेरी माँ कि परेशान करे इनको तो मसल मसल कर मैं लाल कर दुँगा। रीमा बोली हाँ बेटा मसल और मसल केवल दबा ही नही इस घुडीयो को पकड कर इनके साथ भी खेल। इनको भी थोडा मसल और खीच जोर जोर से उखाड कर फेंक दे इनको मेरे मम्मो के उपर से। यही तो सारी फसाद की जड है। इनको मस्ती चढती है तो साली चूचीयो मे खुमारी भर देती हैं और तन कर खडी हो जाती है। काट ले इनको अपने दाँतो से खा जा। रीमा के बाँते मेरी मुझे उसकी चूचीयो के साथ बेदर्दी का बर्ताव करने के लिये उकसा रही थी और मैं भी उसके मम्मो को अच्छी तरह से मसल कर पूरा मजा लेना चाहता था।

फिर मैंने उसकी घुडी अपनी उंगलीयो के बीच मे पकडी और कस के मसल दी। और रीमा मस्ती और दर्द मे जोर जोर से चिल्लाने लगी और अपनी बातो से मुझे जोर से उनको खीचने और मसलने के लिये कहने लगी। मैं भी जोर जोर से उसकी चूची मसल रहा था और साथ ही साथ उसके घुंडी को भी मसल रहा था बीच बीच मे उसकी घुडी को पकड कर बाहर की तरफ खीच देता था जिससे उसकी घुडी जो मस्ती मे खडी होकर करीब १ इन्च कि हो गयी थी मेरे खीचने से उसकी लम्बाई डेढ इन्च हो जाती थी। घुंडी के खीचने से उसका बडा मम्मा भी उसके साथ चला आता था। जिससे मम्मा थोडा उठ जाता था। थोडी देर उसको मैं ऐसे ही रखता था और फिर एक झटके के साथ छोड देता था। जिससे उसका मम्मा एक झटके के साथ नीचे गिरता था।

फिर कभी उसकी घुडी को मैं अपने अंगुठे और उंगली के बीच पकड कर कस के दबा कर पूरी ताकत के साथ घुमा देता था ऐसा करने से उसके मुँह से चीख निकल जाती थी पर वह मुझे और उकसाती थी ऐसा करने को। और मैं भी पागलो की तरह उसकी चूचीयो के साथ खेल रहा था। उसकी गोरी गोरी चूचीयाँ मेरे मसलने के कारण गुलाबी होना शुरु हो गयी थी। उसकी ये हालत देख कर मैंने उससे पूछा माँ मैं इतनी जोर जोर से तुम्हारी चूचीयो को मसल रहा हूँ तुमको बहुत ज्यादा दर्द तो नही हो रहा। रीमा ने कहा बेटा क्या बताऊ दर्द तो बहूत हो रहा है पर इनको मसलवाने मे जो मजा आ रहा है उसके सामने दर्द कुछ भी नही है। और तुझे भी बडा मजा आ रहा है तेरी आँखे और तेरा लंड जो मेरे चूतड के नीचे दबा है मुझे सब बता रहा है।

और मैं तेरी माँ हूँ तेरे मजे के लिये अगर मुझे दर्द भी हो रहा होता तो भी मैं ये दर्द सह लेती समझा अब सोच मत और लगा रहे अपने काम पर जब तक चाहे तब तक मजा ले मेरे मम्मो का। बस मुझे और क्या चाहिये था फिर मै पुरे जोर शोर से उसके मम्मे की कुटायी करने मे जूट गया। बीच बीच मे रीमा मुझे अपने मुँह से जूस भी पिलाती जा रही थी। अभी तक मैंने उसके सिर्फ एक मम्मे को मसला था। फिर मेरा मन किया कि मैं उसके मम्मे को चूसू यह सोच कर मैंने उसका एक मम्मा मसलते हुये अपना मुँह नीचे कर के उसके दुसरे मम्मे की घुडी को अपने होठो के बीच पकड लिया और उनपर अपनी जीभ फिराने लगा।