किरन की कहानी लेखिका: किरन अहमद hindi long sex erotic

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किरन की कहानी लेखिका: किरन अहमद hindi long sex erotic

Unread post by Fuck_Me » 17 Aug 2015 06:08

मेरा नाम किरन अहमद है और मैं ये कहानी अक्टूबर २००२ में लिख रही हूँ। मेरी उम्र सत्ताईस साल की है। गोरा चिट्टा रंग और पाँच फुट - तीन इंच की नॉर्मल हाईट। छरहरा जिस्म, चौंतीस डी- तीस - छत्तीस का मेरा फिगर है। लोग और मेरी सहेलियाँ कहती हैं कि मैं खूबसूरत हूँ। मेरी शादी को तकरीबन आठ महीने हुए हैं। शौहर के साथ सुहाग रात और बाकी की सैक्स लाईफ कैसे गुज़र रही है वो तो मैं आप को बताऊँगी ही लेकिन मैं आपको उस से पहले की कुछ और वाक़ये सुनाने जा रही हूँ।

मैं उस वक्त इंटर के दूसरे साल (बारहवीं) के इग्ज़ैम दे रही थी। उम्र होगी कोई सत्रह-अठारह साल के करीब। मेरे फायनल इग्ज़ैम से पहले प्रिप्रेटरी इग्ज़ैम होने वाले थे। जनवरी का महीना था बे-इंतहा सर्दी पड़ रही थी। मैं दो-दो रज़ाई ओढ़ के पढ़ रही थी।

उन दिनों, मेरे एक कज़न सुहैल जिनकी उम्र होगी कोई चौबीस-पच्चीस साल की, उन्होंने अपने शहर में कोई नया नया बिज़नेस शुरू किया हुआ था, तो वो कुछ खरिदारी के लिये यहाँ आये हुए थे और हमारे घर में ही ठहरे थे। हमारा घर एक डबल स्टोरी घर है, ऊपर सिर्फ़ एक मेरा रूम और दूसरा स्टोर रूम है जिस में हमारे घर के स्पेयर बेड, ब्लैंकेट्स, बेड-शीट्स वगैरह रखे रहते हैं। जब उनकी ज़रूरत होती है तो निकाले जाते हैं मौसम के हिसाब से। और एक दूसरा रूम जिस में मैं अकेली रहती हूँ और अपनी पढ़ाई किया करती हूँ। मेरा रूम बहुत बड़ा भी नहीं और बिल्कुल छोटा भी नहीं, बस मीडियम साईज़ का रूम था जिस में मेरा एक बेड पड़ा हुआ था। वो डबल बेड भी नहीं और सिंगल बेड भी नहीं बल्कि डबल से थोड़ा छोटा और सिंगल से थोड़ा बड़ा बेड था। इतना बड़ा तो था ही कि जब कभी-कभी मेरी फ्रैंड रात में मेरे साथ पढ़ने के लिये आती और रात में रुक जाती तो हम दोनों इतमिनान से सो सकते थे। और रूम में एक पढ़ाई की टेबल और चेयर रखी थी। एक मेरी कपबोर्ड और एक मीडियम साईज़ का अटैच्ड बाथरूम था जिस में वाशिंग मशीन भी रखी हुई थी। घर में नीचे तीन कमरे थे। एक मम्मी और डैडी का बड़ा सा बेडरूम, दूसरा एक बड़ा हाल जैसा ड्राईंग रूम जिसके एक कॉर्नर में डायनिंग टेबल भी पड़ी हुई थी। ये ड्राईंग कम डायनिंग रूम था और एक स्पेयर रूम किसी भी गेस्ट वगैरह के लिये था जिस में सुहैल को ठहराया गया था।

हाँ तो, मैं पढ़ाई में बिज़ी थी। सर्दी जम के पड़ रही थी। मैं अपना लिहाफ ओढ़े बेड पे बैठे पढ़ रही थी। बॉयलोजी का सब्जेक्ट था और मैं एक ज़ूलोजी की बुक पढ़ रही थी। इत्तेफाक से मैं रीप्रोडक्टिव सिस्टम ही पढ़ रही थी जिस में मेल और फीमेल ऑर्गन्स की डीटेल्स के साथ ट्रांसवर्स सेक्शन की फिगर बनी हुई थी। रात काफी हो चुकी थी और मैं अपनी पढ़ाई को फायनल टचेज़ दे रही थी। नोट्स के लिये कुछ फिगर्स देख के बनाये हुए थे और उस में ही कलरिंग कर रही थी और साथ में लेबलिंग कर रही थी।

रात के शायद ग्यारह बजे होंगे पर सर्दी होने की वजह से सब जल्दी ही सो गये थे जिससे लगाता था कि पता नहीं कितनी रात बीत चुकी हो। घर में मेरी मम्मी और डैडी नीचे ही रहते थे और डिनर के बाद अपनी दवाइयाँ खा के अपने रूम में जा के सो चुके थे। अचानक सुहैल मेरे कमरे में अंदर आ गये। मैं देख के हैरान रह गयी और पूछा कि, “क्या बात है?”

तो उसने बताया कि “नींद नहीं आ रही थी और तुम्हारे रूम की लाईट्स जलती देखी तो ऐसे ही चला आया कि देखूँ तो सही कि तुम सच में अपनी पढ़ाई कर रही हो (एक आँख बंद कर के) या कुछ और।“

मैंने कहा कि “देख लो! अपने कोर्स का ही पढ़ रही हूँ, मेरे एक्ज़ाम्स हैं और मैं कोई खेल तमाशा नहीं कर रही हूँ।“

उसने कहा कि “लाओ देखूँ तो सही के तुम क्या पड़ रही हो”, और मेरे नोट्स और रिकोर्ड बुक अपने हाथ में लेकर देखने लगा। सर्दी के मारे उसका भी बुरा हाल हो गया तो वो भी मेरे साथ ही लिहाफ के अंदर घुस आया और मेरे बगल में बैठ गया।

रिकॉर्ड बुक के शुरू में तो मायक्रोस्कोप की फिगर थी और फिर सेल का डायग्राम था। उसके बाद ऐसे हो छोटे मोटे डायग्राम और फिर फायनली उसने वो पेज खोल लिया जिस में मैंने मेल और फीमेल के रीप्रोडक्टिव सिस्टम का डायग्राम बनाया हुआ था। उसने मेरी तरफ़ मुस्कुरा के देखा और बोला कि, “क्या ये भी तुम्हारे कोर्स में है?”

मैंने कहा, “हाँ!” तो उसने कहा कि, “अच्छा! मुझे भी तो समझाओ कि ये सिस्टम कैसे वर्क करता है।“

मैं शरम से पानी-पानी हुई जा रही थी। मैंने कहा कि, “मुझे नहीं पता, तुम खुद भी तो सायंस के स्टूडेंट थे, अपने आप ही पढ़ लो और समझ लो।“

उसने फिर से पूछा कि, “तुम्हारी समझ में नहीं आया क्या ये सिस्टम?” तो मैंने कहा कि, “नहीं!”

उसने फिर पूछा कि “मैं समझा दूँ?” तो मेरे मुँह से अंजाने में "हूँ" निकल गया। उसने कहा, “ठीक है, मैं समझाता हूँ”, और मेरी बुक और मेरी रिकोर्ड बुक को खोल के पकड़ लिया।

हम दोनों बगल बगल में बैठे थे। मैं घुटने मोड़ के बैठी थी और वो पालती मार के बैठा था। अब उसने मुझे समझाना शुरू किया कि, “ये है फीमेल का रीप्रोडक्टिव ऑर्गन, इसे ईंगलिश में वैजायना, पूसी या कंट कहते हैं और हिंदी में चूत कहते हैं।“

मैं शरम के मारे एक दम से लाल हो गयी पर कुछ कहा नहीं। फिर उसने डिटेल में बताना शुरू किया कि, “ये है लेबिया मजोरा जिसे पूसी के लिप्स कहते हैं और ये उसके अंदर लेबिया मायनोरा.... ये डार्क पिंक कलर का या लाल कलर का होता है और ये उसके ऊपर जो छोटा सा बटन जैसा बना हुआ है वो क्लिटोरिस या हिंदी में घुंडी या चूत का दाना भी कहते हैं और जब इसको धीरे-धीरे से रगड़ा जाता है या मसाज किया जाता है तो ये जो चूत का सुराख नज़र आ रहा है, इस में से पानी निकलना शुरू हो जाता है। या फिर अगर लड़की बहुत ही एक्साईटेड हो जाती है तो ये निकलने वाले जूस से चूत गीली हो जाती है जो कि रिप्रोडक्शन के इनिश्यल काम को आसान बना देती है।“

इतना सुनना था कि मेरी चूत में से समंदर जितना जूस निकलने लगा और चूत भर गयी।

अब ये देखो दूसरी फिगर, “ये मेल रीप्रोडक्टिव ऑर्गन है। इसे ईंगलिश में पेनिस या कॉक कहते हैं और हिंदी में लंड या लौड़ा कहते हैं। ये नॉर्मल हालत में ऐसे ही ढीला पड़ा रहता है जैसे कि पहली पिक्चर में है। और जब ये बेहद एक्साईटेड हो जाता है तो ये दूसरी फिगर की तरह खड़ा हो जाता है। ये पेनिस के अंदर जो ब्लड वैसल्स हैं, इन में लहू का बहाव बढ़ जाता है और उसकी वजह से मसल अकड़ के लंड लंबा मोटा और सख्त हो जाता है”, और उसने मेरा हाथ पकड़ के अपने अकड़े हुए लंड पे रख दिया और कहा, “ऐसे!”
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Re: किरन की कहानी लेखिका: किरन अहमद hindi long sex erotic

Unread post by Fuck_Me » 17 Aug 2015 06:08

अब मेरी साँसें तेज़ी से चलने लगी थी और जिस्म में इतनी गर्मी आ गयी थी कि मुझे लग रहा था मानो मेरा जिस्म किसी आग में जल रहा हो। “और ये देखो!” उसने मेरा हाथ लंड के नीचे किया और कहा, “इसके नीचे जो ये दो बॉल्स दिखायी दे रहे हैं, इन्हें ईंगलिश में टेस्टीकल्स या स्कोरटम और हिंदी में आँडे भी कहते हैं। ये असल में स्पर्म बनने की फ़ैक्ट्री है जहाँ स्पर्म बनते हैं। ये स्पर्म जब मेल के ऑर्गन से ट्राँसफर हो के फीमेल के ऑर्गन में जाता है तो बच्चा पैदा होता है।“

मेरा तो मानो बुरा हाल हो गया था। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूँ और सुहैल था के बस एक प्रोफेसर की तरह से लेक्चर दिये जा रहा था। मैं अंजाने में उसका तना हुआ लंड अपने हाथ में पकड़े बैठी थी। मुझे इतना होश भी नहीं था कि मैं अपना हाथ उसके लंड पे से हटा लूँ।

“जब मेल का ये इरेक्ट लंड फीमेल की चूत के अंदर जाता है और चुदाई करते-करते जब एक्साइटमेंट और मज़ा बढ़ जाता है तो अपना स्पर्म चूत के अंदर ये जो बच्चे दानी दिख रही है, उसके मुँह पे छोड़ देता है जिससे स्पर्म बच्चे दानी के खुले मुँह के अंदर चला जाता है और बच्चा पैदा होता है।“

मुझे पता ही नहीं चला के उसका एक हाथ तो मेरी चूत पे है जिसका वो मसाज कर रहा है और मेरा हाथ उसके लंड को पकड़े हुए था और मैं अंजाने में उसके मोटे लंड को दबा रही थी। ये पहला मौका था कि मैंने किसी के लंड को अपने हाथों में पकड़ा हो। उसने फिर कहा कि “देखो कैसी गीली हो गयी है तुम्हारी चूत, ऐसे ही हो जाती है एक्साइटमेंट के टाईम पे।“

तब मुझे एहसास हुआ कि ये मैं क्या कर रही हूँ और एक दम से अपना हाथ उसके लंड पे से खींच लिया। लेकिन उसने अपने हाथ मेरी चूत पे से नहीं हटाया। मेरी नाइटी में हाथ डाले हुए ही था और मेरी चूत का मसाज करता ही जा रहा था जिससे मेरी चूत बहुत गीली हो चुकी थी।

सुहैल हंसने लगा और बोला के “डरती क्यों हो, मैं तो तुम्हें थियोरी के साथ प्रैक्टीकल भी बता रहा था ताकि तुम अच्छी तरह से समझ सको।“

बस इतना कहा उसने और बिजली चली गयी और बल्ब बुझ गया और कमरे में अंधेरा छा गया। मैं तो बेतहाशा गरम और गीली हो चुकी थी। साँसें तेज़ी से चल रही थी, दिमाग और जिस्म में सनसनाहट दौड़ रही थी। ब्लड सरक्यूलेशन सौ गुना बढ़ चुका था, चेहरा लाल हो गया था और मैं गहरी-गहरी साँस ले रही थी। उसने मुझे धीरे से पुश किया और मैं बेड पे सीधे लेट गयी। वो मेरी साईड में था और उसका हाथ अभी भी मेरी चूत पे था। मुझे इतना होश भी नहीं था के मैं उसका हाथ पकड़ के हटा दूँ। बस ऐसे ही चित्त लेटी रही और अंजाने में मेरी टाँगें भी खुल गयी थी और वो मेरी चूत का अच्छी तरह से मसाज कर रहा था। मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था। अब उसने फिर मेरा हाथ पकड़ के अपने अकड़े हुए लंड पे रख दिया और मेरे हाथ को अपने हाथों से ऐसे दबाया जैसे मैं उसका लंड दबा रही हूँ। बहुत मोटा, सख्त और गरम था उसका लंड। उसने इलास्टिक वाला जॉगिंग पैंट पहना था जिसको उसने अपने घुटनों तक खिसका दिया था और मेरे हाथ में अपना लंड थमा दिया था और मैंने हमेशा की तरह बिना पैंटी और बिना ब्रेज़ियर के नाइटी पहनी थी। मुझे क्या मालूम था कि ऐसे होने वाला है। मैं तो रोज़ रात को सोने के टाईम पे अपनी पैंटी और ब्रेज़ियर निकाल के ही सोती थी।

उसका हाथ मेरे सर के नीचे था। उसने दूसरे हाथ से मुझे अपनी तरफ़ करवट दिला दी। अब हम दोनों एक दूसरे की तरफ़ मुँह करके करवट से लेटे थे। उसने मुझे किस करना शुरू किया तो मेरा मुँह अपने आप खुल गया और जल्द ही उसकी ज़ुबान मेरे मुँह के अंदर घुस चुकी थी और मैं उसकी ज़ुबान को ऐसे एक्सपर्ट की तरह चूस रही थी जैसे मैं फ्रेंच किसिंग में कोई एक्सपर्ट हूँ। हालांकि ये मेरी ज़िंदगी का पहला टंग सकिंग फ्रेंच किस था। मेरे जिस्म में तो जैसे हल्के-हल्के इलेक्ट्रिक शॉक्स जैसे लग रहे थे।

मैं सुहैल के राइट साईड पे थी और वो मेरे लेफ़्ट साईड पे। अब उसने अपने पैरों को चलाते हुए अपनी जॉगिंग पैंट भी निकाल दी और अपनी टी-शर्ट भी। वो पूरा का पूरा नंगा हो गया था। उसके सीने के बाल मेरी नाइटी के ऊपर से ही मेरे बूब्स पे लग रहे थे और मेरे निप्पल खड़े हो गये थे। सुहैल ने मेरी राइट लेग को उठा के अपने लेफ़्ट जाँघ पे रख लिया। ऐसा करने से मेरी नाइटी थोड़ी सी ऊपर उठ गयी तो उसने मेरी जाँघों पे हाथ फेरते-फेरते नाइटी को ऊपर उठाना शुरू किया और मेरी मदद से पूरी नाइटी निकाल दी। मैं एक दम से अपने होश-ओ-हवास खो चुकी थी और वो जैसे कर रहा था, करने दे रही थी और पूरा मज़ा ले रही थी।

हम दोनों एक दूसरे की तरफ़ करवट लिये लेटे थे और मेरी एक टाँग उसकी जाँघ पे थी और अब उसने मेरे बूब्स को मसलना शुरू कर दिया और फिर उन्हें मुँह मे लेकर चूसने लगा। बूब्स को मुँह में लेते ही मेरे जिस्म में इलेक्ट्रिक करंट दौड़ गया तो मैंने उसका लंड छोड़ के उसका सर पकड़ के अपने सीने में घुसा दिया। वो ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूचियों को चूस रहा था और उसका लंड जोश में हिल रहा था। लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के लिप्स को छू रहा था। लंड के सुराख में से प्री-कम भी निकल रहा था।

उसने मेरा हाथ अपने सर से हटाया और फिर से अपने लंड पे रख दिया और मैं खुद-ब-खुद ही उसको दबाने लगी और वो मेरी चूत का ऊपर से नीचे मसाज करने लगा। कभी चूत के सुराख में धीरे से उंगली डाल देता और कभी चूत के लिप्स के अंदर ही ऊपर से नीचे और जब कभी मेरी क्लीटोरिस को मसल देता तो मैं जोश में पागल हो जाती। मेरी एक टाँग उसकी जाँघों पे रखे रहने की वजह से मेरी चूत थोड़ी सी खुल गयी थी और लंड का सुपाड़ा चूत से छू रहा था तो मैंने उसके लंड को पकड़े-पकड़े अपनी चूत के अंदर रगड़ना शुरू कर दिया। मैं मस्ती से पागल हुई जा रही थी। मुझे लग रहा था जैसे मेरे अंदर कोई लावा उबल रहा है जो बाहर आने को बेचैन है। इसी तरह से मैं उसके लंड को अपनी चूत में रगड़ती रही और लंड में से निक्ल हुआ प्री-कम और मेरी चूत का बहता हुआ जूस मिल के चूत को और ज़्यादा स्लिपरी बना रहे थे और मेरा मस्ती के मारे बुरा हाल हो चुका था। अब मैं चाह रही थी के ये लंड मेरी चूत के अंदर घुस जाये और मुझे चोद डाले।

सुहैल ने मुझे फिर से चित्त लिटा दिया और मेरी टाँगों को खोल के बीच में आ गया और मेरी बे-इंतहा गीली चूत को किस किया तो मैंने अपने चूतड़ उठा के उसके मुँह में अपनी चूत को घुसेड़ना शुरू कर दिया। मेरी आँखें बंद हो गयी थी और मज़े का आलम तो बस ना पूछो। इतना मज़ा आ रहा था जिसको लिखना मुश्किल है। उसका मुँह मेरी चूत पे लगते ही मेरी टाँगें खुद-ब-खुद ऊपर उठ गयी और उसकी गर्दन पे कैंची की तरह लिपट गयी और मैं उसके सर को अपनी टाँगों से अपनी चूत के अंदर घुसेड़ रही थी और मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मेरे अंदर उबलता हुआ लावा अब बाहर निकलने को बेचैन है। मेरी आँखें बंद हो गयी और उसकी ज़ुबान मेरी क्लीटोरिस को लगते ही मेरे जिस्म में सनसनी सी फैल गयी और मेरे मुँह से एक ज़ोर की सिसकरी निकली, “आआआआहहहह सससस”, और मेरी चूत में से गरम-गरम लावा निकलने लगा और पता नहीं कितनी देर तक निकलता रहा। जब मेरा दिमाग ठिकाने पे आया तब देखा कि सुहैल अभी भी मेरी चूत में अपनी ज़ुबान घुसेड़ के चाट रहा है और पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर दाँतों से काट रहा है और मेरी चूत में फिर से आग लगने लगी। मैं सोच रही थी के बस अब सुहैल मेरी चुदाई कर दे लेकिन उस से बोलने में शरम भी आ रही थी। बस इंतज़ार ही करती रही कि कब ये मुझे चोदेगा।

सुहैल के हाथ मेरी गाँड के नीचे थे और वो मेरे चूतड़ों को उठा के चूत को चूस रहा था। मैं अपने चूतड़ों को उछाल-उछाल के अपनी चूत सुहैल के मुँह से रगड़ रही थी। चूत में फिर से गुदगुदी शुरू हो गयी थी। चूत बे इंतहा गीली हो चुकी थी और मस्ती में मेरी आँखें बंद थी और मैं सुहैल का सर पकड़े हुए अपनी चूत में घुसेड़ रही थी। अब शायद सुहैल से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो वो अपनी जगह से उठा और मेरी टाँगों के बीच में बैठ गया और अपने लौड़े को अपने हाथ से पकड़ के उसके सुपाड़े को मेरी गीली और गरम जलती हुई चूत के अंदर, ऊपर से नीचे कर रहा था। मेरी टाँगें मुड़ी हुई थी। मुझसे भी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैंने अपना हाथ बढ़ा के सुहैल का लोहे जैसा सख्त और मोटा तगड़ा लंड अपने हाथों से पकड़ के अपनी ही चूत में घिसना शुरू कर दिया। उसके लंड में से निकलते हुए प्री-कम से उसका लंड चूत के अंदर स्लिप हो रहा था और जब उसके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के सुराख पे लगाता तो मेरे मुँह से मज़े की एक सिसकरी निकल जाती।
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Re: किरन की कहानी लेखिका: किरन अहमद hindi long sex erotic

Unread post by Fuck_Me » 17 Aug 2015 06:08

सुहैल अब मेरे ऊपर मुड़ गया और मेरे मुँह में अपनी ज़ुबान को घुसेड़ के फ्रेंच किस कर रहा था और मैं उसके लंड को अपनी चूत में घिस्स रही थी। मेरी टाँगें सुहैल की कमर पे लपटी हुई थी और सुहैल का लंड मेरी चूत के लिप्स के बीच में सैंडविच बना हुआ था। उसने अपने लंड को चूत के लिप्स के बीच में से ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। चूत बहुत ही स्लिपरी हो गयी थी और ऐसे ही ऊपर नीचे करते-करते उसके लंड का मोटा सुपाड़ा मेरी छोटी सी चूत के सुराख में अटक गया और मेरा मुँह एक्साइटमेंट में खुला रह गया। उसने अपना लंड थोड़ा सा और पुश किया तो उसके लंड का सुपाड़ा पूरा चूत के अंदर घुस गया और मुझे लगा जैसे मेरी अंदर की साँस अंदर और बाहर की साँस बाहर रह गयी हो। मेरे मुँह से हल्की सी चींख, “ऊऊऊईईई” निकल गयी और मैंने अपने दाँत ज़ोर से बंद कर लिये।

उसने सुपाड़े को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया तो मेरी चूत में एक अजीब सा मज़ा महसूस होने लगा और मैंने अपने दोनों हाथ बढ़ा कर सुहैल को अपनी बांहों में ज़ोर से जकड़ लिया। सुहैल ने लंड को थोड़ा और अंदर घुसेड़ा तो मेरी चूत का सुराख जैसे बड़ा होने लगा और मुझे तकलीफ होने लगी। मैंने कहा कि सुहैल, “दर्द हो रहा है अब और अंदर मत डालो प्लीज़”, तो उसने कहा “अरे पगली... अभी तो थोड़ा सा भी अंदर नहीं गया” और कहा कि “अभी तुमको मज़ा आयेगा, थोड़ा वेट करो”, और फिर वो मेरी चूचियों को चूसने लगा तो मेरे जिस्म में फिर से सनसनी सी फैलनी शुरू हो गयी और मैं उसकी कमर पे अपने हाथ फिराने लगी।

सुहैल अपने लंड के सुपाड़े को मेरी छोटी सी टाइट चूत के अंदर बाहर करने लगा। मेरी चूत में से जूस निकलने की वजह से उसके लंड का टोपा अब अंदर-बाहर स्लिप हो रहा था। ऐसे ही करते-करते उसने अपने लंड को बाहर निकाला और एक झटका मारा तो उसका लोहे जैसा सख्त लंड मेरी चूत के अंदर आधा घुस गया और मेरे मुँह से चींख निकल गयी, “उउउउउउहहहह ईईईईईईई।“

लंड अब आधा अंदर घुस चुका था और मेरी चूत के अंदर जलन शुरू हो गयी। मैं उस से ज़ोर से लिपट गयी। सारा जिस्म अकड़ गया तो सुहैल ने धक्के मारना बंद कर दिया और मेरी चूचियों को चूसने लगा। थोड़ी देर में ही फिर से मुझे अच्छा लगने लगा और मेरी ग्रिप सुहैल पे थोड़ी ढीली हो गयी। उसने अपना लंड मेरी चूत के अंदर ऐसे हो छोड़ दिया और चूचियों को चूसने लगा। मुझे फिर से मज़ा आने लगा और उसका आधा घुसा हुआ लंड अच्छा लगने लगा।

जब उसने देखा के मेरी चूत ने उसके मोटे लंड को अपनी छोटे से सुराख में एडजस्ट कर लिया है तो उसने अपना लंड धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया जिससे मुझे बहुत मज़ा आने लगा। मेरी चूत में से जूस लगातार निकलने लगा जिससे मेरी चूत बहुत ही गीली हो चुकी थी। अब सुहैल ने अपने हाथ मेरी बगल से निकाल के मेरे कंधों को पकड़ लिया और मुझे फ्रेंच किस करने लगा। पोज़िशन ऐसी थी कि दोनों के जिस्म के बीच में मेरे बूब्स चिपक गये थे। सुहैल मुझ पे झुका हुआ था और उसका लंड मेरी चूत में आधा घुसा हुआ था। सुहैल ने धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर कर के मेरी चुदाई शुरू की और मैं मज़े से पागल होने लगी। मेरी चूत में उसका मोटा लंड फँसा हुआ था और अंदर-बाहर हो रहा था। मुझे फिर से लगने लगा के मेरी चूत के काफी अंदर कोई लावा जैसा उबल रहा है और बाहर निकलने को बेचैन है। उतने में ही सुहैल ने अपने लंड को मेरी चूत से पूरा बाहर निकाल लिया तो मुझे अपनी चूत खाली-खाली लगने लगी और फिर देखते ही देखते उसने इतनी ज़ोर का झटका मारा और मेरे मुँह से चींख निकल पड़ी, “ऊऊऊऊईईईईईई अल्लाह...आआआआआ ऊऊऊफफफ निकाल लो बाहर!! मार डाला..... ऊऊऊईईईई”, और मुझे लगा जैसे मेरे जिस्म को चीरता हुआ कोई मोटा सा लोहे का सख्त डंडा मेरी चूत के रासते मेरी टाँगों के बीच में घुस गया हो और मैं सुहैल से लिपट गयी उसको ज़ोर से पकड़ लिया और फिर एक दम से टोटल ब्लैक ऑऊट! शायद मैं एक लम्हे के लिये बे-होश हो गयी। कमरे में तो पहले से ही अंधेरा था। मुझे कुछ नज़र ही नहीं आ रहा था और फिर अचानक ऐसे चूत फाड़ झटके से तो मैं एक दम से बेहोश हो गयी। मुझे लगा जैसे सारा कमरा मेरे आगे घूम रहा हो। मुँह खुला का खुला रह गया था और आँखें बाहर निकल आयी थी और आँखों में से पानी निकल रहा था। मेरा मुँह तकलीफ के मारे खुल गया था। लगाता था जिस्म में खून ही नहीं हो और दिमाग काम नहीं कर रहा था।

पता नहीं मैं कितनी देर उसको ज़ोर से चिपकी रही और कितनी देर तक बेहोश रही। जब होश आया तो देखा कि वो अपने लंड से मेरी फटी चूत को चोद रहा है उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा है और मेरी चूत में जलन से जैसे आग लगी हुई हो। मेरी मुँह से “ऊऊऊऊईईईईई आआआआहहहह औंऔंऔंऔं आआआईईईई” जैसी आवाज़ें निकल रही थी लेकिन सुहैल था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। लगाता था जैसे पागल हो गया हो। ज़ोर-ज़ोर से चुदाई कर रहा था और मेरी फटी चूत में दर्द हो रहा था। मेरा जो लावा निकलने को बेताब था पता नहीं वो कहाँ चला गया था और मुझे बे-इंतहा दर्द हो रहा था। लगाता था जैसे कोई छूरी से मेरी चूत को काट रहा हो। चूत के अंदर बे-इंतहा जलन और दर्द हो रहा था।

सुहैल मुझे चोदे ही जा रहा था। अंधेरे में उसे पता भी तो नहीं चल रहा था कि मैं कितनी तकलीफ में हूँ। मैं उसके जिस्म से चिपकी हुई थी और उसके झटकों से मेरे बूब्स आगे पीछे हो रहे थे। थोड़ी ही देर में जब मेरी चूत उसके मोटे लंड को अपने छोटे से सुराख में एडजस्ट कर चुकी तो मुझे भी मज़ा आने लगा और मेरी ग्रिप उस पे से ढीली पड़ गयी और वो अब दनादन चोद रहा था। उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा था और मुझे बेहद मज़ा आ रहा था, ऐसा मज़ा जो कभी सारी ज़िंदगी नहीं आया था। उसके हाथ अभी भी मेरे कंधों को पकड़े हुए थे और वो अपनी गाँड उठा-उठा के लंड को पूरा सिरे तक बाहर निकलता और जोर के झटके से चूत के अंदर घुसेड़ देता। उसके चोदने की स्पीड बढ़ गयी थी और अब मेरा लावा जो पता नहीं कब से निकलने को बेताब था, मुझे लगा कि अब वो फिर से बाहर आने वाला है और मुझे अपनी चूत के अंदर ही अंदर उसका लंड फूलता हुआ महसूस हुआ। उसने बहुत ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू किया और फायनली लंड को पूरा चूत से बाहर निकाला और एक इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मेरा सारा जिस्म हिल गया और मेरे जिस्म में जैसे बिजली कि झटके लगने लगे और सारा जिस्म काँपने लगा।

मैंने फिर से सुहैल को ज़ोर से अपनी बांहों में जकड़ लिया। उसके साथ ही उसके लोहे जैसे सख्त लंड में से गरम- गरम मलाई के फुव्वारे निकलने लगे और मेरी चूत को भरने लगा। बस उसी टाईम पे मेरा लावा जो चूत के बहुत अंदर उबल रहा था, ऐसे बाहर निकलने लगा जैसे बाँध तोड़ के दरिया का पानी बाहर निकल जाता है। मुझे लगा जैसे सारे जहाँ में अंधेरा छा गया हो। जिस्म में झटके लग रहे थे और दिमाग में सनसनाहट हो रही थी और बहुत ही मज़ा आ रहा था। सुहैल अभी भी धीरे-धीरे चुदाई कर रहा था। जितनी देर तक उसकी मलाई निकलती रही, उसके धक्के चलते रहे और फिर वो अचानक मेरे जिस्म पे गिर गया जिससे मेरे बूब्स हम दोनों के जिस्म के बीच में सैंडविच बन गये। हम दोनों गहरी गहरी साँसें ले रहे थे। मैं उसके बालों में हाथ फिरा रही थी और मेरी ग्रिप बिल्कुल ढीली पड़ गयी थी। टाँगें खुली पड़ी थी और मैं चित्त लेटी रही। सुहैल का लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर ही था पर अब वो धीरे-धीरे नरम होने लगा था और फिर एक प्लॉप की आवाज़ के साथ उसका लंड मेरी चूत के सुराख से बाहर निकल गया और मुझे लगा कि उसकी और मेरी मलाई जो चूत के अंदर जमा हो चुकी थी, वो बाहर निकल रही है और मेरी गाँड के क्रैक पे से होती हुई नीचे बेडशीट पे गिरने लगी।

सुहैल थोड़ी देर तक मेरे ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा। जब दोनों को होश आया तो उसने मुझे एक फ्रेंच किस किया और बोला कि “कल रात फिर तुम्हें रीप्रोडक्टिव सिस्टम का अगला हिस्सा पढ़ाने आऊँगा।“

मैंने मुस्कुराते हुए कहा कि “शैतान चलो भागो यहाँ से, तुम ने ये क्या कर डाला। अगर कुछ हो गया तो क्या होगा।“

उसने कहा कि “नहीं ऐसे नहीं होगा, तुम फ़िक्र ना करो।“ और वो अपने कपड़े पहन के नीचे सोने चला गया।

मैं सुबह देर तक सोती रही। नीचे से मम्मी आवाज़ें देती रही लेकिन मैं तो गहरी नींद सो रही थी तो मम्मी ने सुहैल से कहा कि जा “बेटा ज़रा देख तो सही कि ये किरन की बच्ची अभी तक सोयी पड़ी है। कॉलेज भी जाना है उसने।“

सुहैल ऊपर आया और मुझे जगाया। मैं जब जागी और अपने बेड से उठी तो देखा कि वो तो ब्लड से भरी पड़ी है। मैं तो एक दम से डर ही गयी पर सुहैल ने कहा कि “डरने की कोई बात नहीं है, ये तुम्हारी हायमन थी जिसे झिल्ली भी कहते हैं, वो फट गयी और तुम्हारी चूत कि सील टूट गयी है। ये झिल्ली तो हर कुंवारी लड़की को होती है और पहली चुदाई में टूट जाती है और ये नॉर्मल है”, तो मैंने इतमिनान की साँस ली और बेडशीट को लपेट के वाशिंग मसीन में धोने के लिये डाल दिया और मैं जब नहा धो के नीचे उतर रही थी तो मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था। मम्मी ने पूछा कि क्या हुआ, “ऐसे क्यों चल रही है, तेरी तबियत तो ठीक है ना?” तो मैंने कहा “पता नहीं मम्मी! क्या हुआ!”

सुहैल ने शरारत से मुस्कुराते हुए बीच में कहा कि “शायद कोई चीज़ चुभ गयी होगी” तो मैंने उसकी तरफ़ बनावटी गुस्से से देखा और मैंने मम्मी से कहा, “हाँ मम्मी, हो सकता है कोई चीज़ चुभ गयी हो, कल रात बिजली भी तो चली गयी थी न और अंधेरा हो गया था तो हो सकता है कोई चीज़ सच में चुभ गयी हो” तो मम्मी ने इतमिनान की साँस ली और कहा “ठीक है, अगर दवाई लगानी हो तो लगा लो।“

तो सुहैल ने मुस्कुराते हुए कहा कि “आप फिक्र ना करें खाला, मैं इसे आज दर्द कम होने का इंजेक्शन लगा दुँगा जिससे इसका दर्द हमेशा के लिये खतम हो जायेगा!” मम्मी ने कहा कि “हाँ ये ठीक है”, पर उन्हें क्या पता कि सुहैल कौन से इंजेक्शन की बात कर रहा है और ये इंजेक्शन वो मुझे कहाँ लगायेगा। ये तो बस मैं जानती थी या वो।

मैंने नाश्ता किया और कॉलेज चली गयी। कॉलेज तो चली गयी पर कहीं दिल ही नहीं लग रहा था। चूत में मीठी-मीठी खुजली हो रही थी। बार-बार मेरा हाथ मेरी चूत पे ही चला जाता था और सारे जिस्म में मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था। बार-बार अंगड़ाई लेने का मन कर रहा था। पता नहीं क्यों, आज कॉलेज कुछ अजीब सा लग रहा था । खैर कॉलेज का टाईम खतम हुआ और मैं घर आ गयी और लंच के बाद अपने रूम में जा के सो गयी। बहुत देर तक सोती रही और उठने का मन ही नहीं कर रहा था। सारे जिस्म में एक अजीब सी मिठास लग रही थी। शाम को देर से उठी और फ़्रेश हो के नीचे आ गयी और हम सब ने डिनर साथ किया। वहीं डिनर टेबल पे बैठ के हम सब बातें करने लगे मगर मेरा मन तो कहीं और ही था। मैं बातें सुन तो रही थी पर समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। थोड़ी देर के बद मैंने कहा कि अब मैं जाती हूँ, मुझे पढ़ाई करनी है और मैं ऊपर अपने कमरे में चली गयी।
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A woman is like a tea bag - you can't tell how strong she is until you put her in hot water.