खानदानी चुदाई का सिलसिला

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rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:58


इतना सोचते हुए उसका ध्यान अचानक उस लड़की पे गया...क्या चूचा था उसका..एक दम सखी जैसा. छ्होटा पर सुडोल. क्या स्वाद था. जीभ अनायास ही होंठो पे फिरने लगी. लंड को सहलाते हुए संजय ने ड्रिंक ख़तम किया. एक और ड्रिंक बनाने के लिए उठने लगा तो लंड को उपर की तरफ सीधा करके अंडरवेर में डाल लिया. करीब 4 इंच लंड अंडरवेर के एलास्टिक के बाहर था. ''शांत रह बच्चे..अभी तुझे इतनी जल्दी चूत नसीब नही होगी..सब्र रख..'' लंड को समझाते हुए संजय ने लंड के टोपे को पूचकारा और एक ड्रिंक और बनाई. पहला सिप लेने ही लगा था कि डोर पे नॉक हुआ.

''सरला जी दरवाज़ा खोलिए..सो गई क्या..मैं हूँ किरण..'' वो आवाज़ वो चेहरा वो बदन जिसने शाम से संजय के दिमाग़ पे जादू किया हुआ था बस डोर के दूसरी तरफ थी.

बिना कुच्छ सोचे समझे हाथ में ड्रिंक लिए संजय ने तपाक से दरवाज़ा खोल दिया.

''तुम ..?? यहाँ..?? सरला जी के रूम में..?? ऊहह माइ गॉड ये क्या है....?? इस हालत्त्त्त्त्त्त्त मेन्न्न्न...ऊओह माइ....गॉड...?? '' किरण के हाथ उसके मूह पे थे. आँखें फटी हुई थी. संजय के लंड पे नज़र पड़ते ही किरण लरखरा गई और एक कदम पिछे हटी. चाँदनी में लंड और भी निखर के दिख रहा था. पर्पल कलर का सुपाड़ा चाँदनी में चमक रहा था. चॅम्डी पिछे को खींची पड़ी थी. सरला ने सच कहा था. उसका दामाद आदमी नही घोड़ा था. अंदर से किरण का रोम रोम जागृत हो गया था. उसकी चूत पे जैसे चीटीओ का हमला हो गया था. चूचे आन्यास ही कड़क हो गए. निपल तो जैसे ब्लाउस फाड़ के बाहर आना चाहते थे.

संजय ने उसकी ये हाल को देख के अपनी कातिल मुस्कुराहट दी और पेग को मूह से लगाया. किरण पिघलने लगी. कभी उसके चेहरे को देखती और कभी उसके लंड को. 8 महीने से विधवा किरण की उत्तेजना शायद सिर्फ़ सरला समझ सकती थी. इसीलिए उसने किरण को अपने कमरे का नही बल्कि अपने दामाद के कमरे का पता दिया था. एक आख़िरी बार किरण ने संजय के चेहरे को देखा और वो अपने होश खोने लगी. दिमाग़ और दिल साथ नही दे रहे थे. सब तरफ कन्फ्यूषन थी. उसकी कन्फ्यूषन संजय ने दूर की. किरण का हाथ पकड़ के रूम में खींच लिया और डोर बंद कर दिया. एसी की ठंडक में भी किरण का बदन भट्टी बना हुआ था. बिना कुच्छ बोले संजय ने पेग किरण के होंठो से लगा दिया. किरण उसकी आखों में देखते देखते पेग पी गई. पेग स्ट्रॉंग था पर शायद उससे भी स्ट्रॉंग थी उसके बदन की महक. जो कि कमरे में फैलने लगी थी.

संजय ने पेग के ख़तम होते ही एक और लाइट पेग बनाया और बिस्तर पे सिर झुकाए बैठी किरण के होंठो से लगा दिया. ये भी जल्द ही उसके गले से उतर गया. पर कुच्छ बूँदें होंठो के किनारों से होती हुई गर्दन और फिर संजय के होंठो पे चली गई. किरण अब होश खो चुकी थी. बदन की आग अब भड़क चुकी थी और उस आग को शांत करने का सिर्फ़ एक तरीका था. संजय का होज़पाइप जब तक उसके बदन के अंदर फुहार नही छोड़ेगा तब तक उसकी आग भुजने वाली नही थी. कपड़े उतरने लगे और देखते ही देखते किरण विधवा से नंगी विधवा हो गई थी. 8 महीने का सब्र का बाँध टूट गया और सैलाब आ गया.

संजय बिस्तर पे लेटा हुआ था और किरण उसके बदन से अपने बदन को रगड़ रही थी. 38सी की मोटी मोटी चूचियाँ और उनपे कड़े भूरे निपल संजय के बदन को रगड़ रहे थे. पर रगड़ पूरी नही हो पा रही थी. बीच में एक दीवार थी ..संजय का अंडरवेर. अपने चूचो को संजय के मूह से रगर्ते हुए उसकी छाती पे पहुँची और वहाँ से शुरू हुआ अंडरवेर तक पहुँचने का सफ़र. संजय के बदन के बाल टूट टूट के किरण के बदन से चिपक रहे थे. जहाँ जहाँ भी उसके होंठ चलते वहाँ थूक के निशान छोड़ जाते. अंडरवेर के एलास्टिक को दाँतों में फँसा के किरण एक जंगली बिल्ली की तरह गुर्राई. इशारा सॉफ था...गांद उठा के अंडरवेर उतरवा लो नही तो फाड़ दूँगी. संजय ने मुस्कुराते हुए एक आह भारी और गांद उठा दी. देखते ही देखते अंडरवेर पैरों में था. और लंड उसका ...तो मत पुछिये. उसपे तो जैसे भूखी शेरनी का अटॅक हुआ था. लंड का सूपड़ा दाँतों के बीच लाल होने लगा. जीभ रह रह के लंड के सुराख को कुरेद रही थी...होंठ लंड की साइड पे उपर से नीचे तक चल रहे थे. 5 - 6 इंच से ज़ियादा मूह में दाखिल नही हो रहा था पर शेरनी की भूख थी कि बढ़ती जा रही थी. लंड के बेस को पकड़ के सिर को उपर उठाती और फिर वापिस नीचे ले जाती. हर स्ट्रोक के साथ लंड थोड़ा और अंदर जाता.

पर हर स्ट्रोक को लगाने के लिए जो मेहनत किरण कर रही थी वो सॉफ दिख रहा था. 7 इंच के बाद लंड गले की बॅकसाइड को कुरेदने लगा था. थूक की जैसे बाढ़ आ गई थी. लंड और टट्टों का कोई भी हिस्सा उस बाढ़ से बच नही पा रहा था. बिस्तर गीला हो चुका था. गले तक लंड लेने पर कुच्छ सेकेंड के लए मूह बंद रहता और फिर साँस लेने के लए खुलता. नातुने भी उसी हिसाब से खुल और बंद हो रहे थे, आँखों से आँसू बहे जा रहे थे पर प्यास भुज नही रही थी. संजय ये नज़ारा देख के खुद भी मदहोश हुआ पड़ा था. एक नई सनसनी उसके बदन में घर कर गई थी. इतना उतावला पन उसने आज तक नही देखा था. राखी भाभी जो कि लंड चूसने में निपुण थी उन्होने ने भी कभी इतना एफर्ट नही दिखाया था. वो करीब 10 इंच तक आसानी से ले लेती थी पर शायद इसलिए कि उन्होने बहुत प्रॅक्टीस की थी. पर ये बात कुच्छ और थी. ये भूख और ये चुम्मे आज तक संजय ने एक्सपीरियेन्स नही किए थे.

rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:58



''ऊओह मेरी मूह बोली सासू मा...मैं झरने वाला हूओन ज़ाआआन्णन्न्...मेरा होने वाला है...रुक्क्क ..जा...नही तो मूह भर दूँगा....ऊओह ...प्ल्लसस....रुक्ककक...''' संजय कराह रहा था.

पर मूह बोली सास नही रुकी और संजय भी नही. मौसम से पहले ही होली आ गई और पिचकारी से सफेद रंग निकलने लगा. पर यहाँ बदन का कोई बाहरी हिस्सा गीला नही हुआ. गीला हुआ तो मूह बोली सास का गला...उसकी तृप्ति हो गई..ऐसा रंग जो अब ज़िंदगी भर नही छूटने वाला था. किरण गटक गटक के पीने लगी. आक्सिडेंट से 2 महीने पहले पति का पीया था. आज उस बात को करीब 10 महीने हो गए. अमृत पिए बिना गति नही और आज उसे अमृत मिल गया.......

पर बात यहाँ नही रुकी ...अमृत के धारे बहते हुए संजय का बदन ऐंठने लगा. उसका मूह खुल गया और जीभ बाहर निकल आई. अमृत ख़तम हो गया पर मूह वैसे ही खुला था. इस मूह को अमृत की ज़रूरत थी और वो उसको मिला किरण के होंठो से. बदन से बदन मिल गया और होंठ एक दूसरे से. जीभें आपस में बातें करने लगी. वीर्य का स्वाद मूह में जाते ही संजय को होश आ गया. बाहें फैला के उसने किरण के बदन को जाकड़ लिया. लंड अभी भी तना हुआ था. बुर के छेद पे दस्तक दे रहा था. बुर लिसलिसाई हुई आग बरसा रही थी. होज़ पाइप डालो मेरे में...ऐसी आवाज़ दे रही थी. होज़ पाइप ने जगह ले ली और धीरे धीरे 4 इंच अंदर चला गया. चूत का कसाव अब उसे रोक रहा था. पर शेरनी को लंड चाहिए था.....आज उसे कोई नही रोक सकता था. संजय के कंधों पे किरण नाम की शेरनी के पंजे थे और फिर वो हुआ जिसकी उम्मीद संजय ने कभी नही की थी. आज से पहले ऐसा सिर्फ़ मिन्नी भाभी के साथ हुआ था. शेरनी ने अपने चूतर उपर किए और लंड खिसक के बाहर आया. जब सुपादे का सिर्फ़ 1 इंच का हिस्सा अंदर बचा तो शेरनी ने अपने बदन को ज़ोर से नीचे दबाया.

एक ही झटके में बचा हुआ 10 इंच सब हदें तोड़ता हुआ जड़ तक समा गया और शेरनी की एक तेज़ दहाड़ सुनाई पड़ी.

''ओउुुउउइईईईईईईईईईई माआआआआआआआआ........................मरररर...गेयीयियैआइयैआइयैआइयीयीयियी...''
क्रमशः................................................


rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:59



Kuchh hi der men Sanjay mood men aa gaya. Apne college ka dance champion apni moves dikhaane laga. Dekhte hi dekhte stage ke aas paas logon ne ghera bana lia aur Sanjay aur kiran ki jodi ko jagah de di. Uss samay Chance pe dance karle gana chal rha tha aur Sanjay ne Kiran ko Anushka Sahrma ki tarah nachana shuru kar dia. Uski har move gaane ki beat se mil rahi thi. Kiran uski bahon men jhool rahi thi aur hanse jaa rahi thi. Sab log taalian baja baja ke use utsaahit kar rahe the. Isi tarah se ek aur gaane pe dono ne ek sath dance kia. Kiran bhi achhi dancer thi aur har tarike se usne Sanjay ka sath dia. Dance karte hue Sanjay kaafi alag alag jagah Kiran ko chhoo raha tha. Kiran ko uske touch se kaafi sukhad ehsaas ho raha tha. uske man men bhi purush ke sprash ki ichha jaagrit ho rahi thi. Uski peeth, kamar aur bajuon pe jab Sanjay ka hath lagta to uska rom rom khil uthta. Itne men DJ ne ek slow romantic song laga dia aur sab log apne apne partner ke sath close dance karne lage.


Kiran Sanjay ke kandhon ke level tak aa rahi thi. Upar dekhte hue usne Sanjay ki aankhon men jhanka. Ankhon aankhon men bahut si baaten dono ek doosre se keh gae. Kareeb 20 second tak dono ek doosre ko dkhte rahe aur isi dauraan unke jism bhi kaafi kareeb a gae. Sanjay ka lund uski pant men halchal karne laga tha. Us ehsaas ne usko jagaya aur usne Sakhi ki taraf dekha. Sakhi table pe sir rakhe soi hui thi aur Sarla uske sir pe hath pher rahi thi. Sarla ki nazren Kiran aur Sanjay pe thi. Apni saas ko dekhte hue Sanjay sakpaka gaya. Usne Kiran se excuse lia aur table ki taraf gaya. Kiran thori mayoos hui par phir apne ko sambhalte hue waapis kaam men lag gai.


Sanjay table pe pahuncha to Sakhi ne usse kaha ki wo room men jana chahti hai. Sarla, Sakhi aur Sanjay room ki taraf chal die. Sarla Sanjay ko gaur se dekh rahi thi. Usko yakeen ho gaya tha ki Kiran Sanjay pe lattooo ho gai hai. Sanjay bhi aakhir ek mard tha aur 4 mahine se apni patni se wanchit tha. Aane waale 8 - 9 mahine usse stree sukh se wanchit rehna tha. Isse pehle ki baat kisi galat disha men chale jae Sarla ne ek decision lia. Sanjay aur Sakhi ko kamre men chod ke Sarla waapis pub chali gai. Kiran ko dhoondh ke usne Kiran se kuchh baat kahi. Uski baat sunn ke Kiran dang reh gai. Kareeb 15 minute tak dono men baaen aur behas hoti rahi aur uske baad Sarla wahan se chali gai. Sarla ne room men pahunch ke Sanjay ko waapis pub jaake Sarla ka purse laane ko kaha jo wahan chhoot gaya tha. Sanjay utsaahit man se waapis chal dia aur Sarla uski chaal men aai rawaangi dekh ke muskura di.

Jab tak Sanjay pub men pahuncha tab tak uske dono bade bhai aur bhabhian wahan se jaane ke lie nikal rahe the. Minni aur rakhi bhi thak chuki thi. Raju aur Sujit ne Sanjay se puchha ki wo kahan jaa raha hai. Sanjay ne purse wali baat batai. Ye keh ke wo log rooms ki taraf chal die aur Sanjay pub ki taraf. Pub men ab bheed thori kam thi par log abhi bhi naach rahe the. Young couples aur kucch middle age couples stage pe ''Chhamak Chhalo'' pe dance kar rahe the. Sanjay ko bahut zor se peshaab laga tha to wo pehle toilet gaya. Kehte hain jab kuchch hona hota hai to kismat bhi ishaare karti hai. Gents toilet ke gate ke pass ek kone men ek jawaan joda masti men laga hua tha. Ladki ka ek mumman shirt ke bahar latka hua tha aur uska BF ya husband usko bheench bheench ke choose raha tha. Ladki poore nashe men thi aur usko Sanjay ke wahan hone se koi farak nahi pada. Sanjay usko kuchh second dekhta raha aur fatafat toilet men gaya. Peshaab karte karte uska lund poora khada ho gaya. 11 inch ke lund ko sambhalna bhi dikkat wala kaam tha. Khair jaise taise Sanjay ne usse sulaya aur waapis nikalne laga. Bahar nikalte hi Sanjay ka nazara dekh ke hosh udd gae. Ladki ka mumman to bahar tha hi sath men uski panty pairon men giri padi thi aur ladka uski choot ki ragraai kar raha tha. Ladki ke chehre pe sex ki garmi thi aur bahut mast bhaav the. Ladke ne use deewaar ke sath chipkaya hua tha aur uski ek taang apne hath men pakdi hui thi, doosre hath se uski skirt men fingering kar raha tha. Iss baar ladki ne Sanjay ko dekha aur apne muh men ungli daal ke usse choosa.

Ishara saaf tha par Sanjay ko abhi kaafi hosh tha. Sab taraf nazar dauaate hue usne aage bad ke ladki ke mamme pe hamla bol dia. Mumman medium size ka tha aur badi asaani se Sanjay ke muh men samaa gaya. Poore mamme ko muh men rakhte hue Sanjay ne ladki ka hath pakad ke apne lund pe rakhwaya. Pehle se adhaa tanaa lund ab poora tan gaya aur ladki ke muh se ek moan nikal aai. Shayad ye ladki koi professional thi aur shayad isi lie uske partner ko bhi koi farak nahi pad raha tha ki uska maal koi aur bhi loot raha hai. itne men kankhion se dekhte hue Sanjay ki nazar Kiran pe padi. Wo hall men kisi ko dhoondh rahi thi. Ladki ke mamme ko ek aakhiri choopa deke Sanjay Kiran ki taraf bada. Achanak usse kuchh soojha aur bar pe jake usne 2 large whiskey ke order kie. Ek kone men khade hoke wo Kiran ko dekhta raha. Kiran kaafi pareshaan aur uttejit lag rahi thi jaise kisi ko bheed men dhoondh rahi ho. Jis tarike se wo guests ki bheed ko dekh rahi thi usse Sanjay ko andaaza ho gaya ki wo kisi naukar ya employee ko nahi balki kisi guest ko hi dhoondh rahi hai. 5 minute men 2 large whiskey pine ke baad Sanjay pichhe se Kiran ki taraf bada. Kiran bar ke sath bane storeroom men ja rahi thi aur apne aap se badbade ja rahi thi. Storeroom khula tha aur Kiran usme enter hote hi ek table ki taraf badi. Uspe Sarla ka purse pada tha. Sanjay ne mauka dekh ke store room men entry li aur darwaza andar se band kar dia. Usne dhyaan rakha ki darwaaze ko abhi kundi na lagae.

''Lagata hai kuchh bahut keemati tha jo kho gaya hai...kaafi pareshaan dikh rahi hain aap...'' 1 ft ki doori pe Kiran ke pichhe khare khare Sanjay ne kaha. Uski 6 ft ki height se Kiran kaafi chhoti dikh rahi thi. Ab Sanjay pe daaru ka suroor bhi ho gaya tha.

''oouuuiii maaa...oohhh gaaawdd...tumne to mujhe daraa hi dia....ooohhh maaaa..'' Kiran chaunk ke mudi aur uske muh se halki si cheekh nikal gai.

''Hmmm pehle jise dhoondh rahi thi ..aur jab wo saamne hai to darr rahi ho... baat kuchh jami nahi..'' Sanjay muskurata hua bola.

'' Main kya dhoondh rahi thi aur kya matlab hai tumhara ..saamne to tum ho...main kya tumhe dhoondh rahi thi ??'' Kiran ne gusse aur achambhit hone ke bhav dikhae.

'' Pichhe 10 min men jis hisaab se aapne sab logon pe nazre ghumaai aur phir jis tarah se badbadaate hue aap yahan pe aai ..ye sab ...kya hai...'' Sanjay ab thode confused sa tha. Usse pehle laga tha ki Kiran uspe lattoo hui hai par ab shayad baat kuchh aur hi na ho.

'' Main tumhe nahi dhoondh rahi thi...main Sarla ji ko dhoondh rahi thi..wo abhi thori der pehle aai thi aur unka purse yahan reh gaya tha..mujhe laga ki wo toilet gai hongi ..par jab wo nahi aai to main unhe dekhne lagi...tum kya apne ko bahut VIP samjhate ho jo main tumhe dhoondhungi.'' Kiran ka gussa dekhte hi banta tha.

Ab baari Sanjay ke sakpakaane ki thi. Wo ghabra gaya ki kahin josh men aake usne kuchh galat to nahi keh dia. Baat Sakhi tak pahunchegi to kya sochegi. Bhabhion ko chodna unse maze lena ghar ki parampara ka hissa tha, Babuji ka aadesh tha...par parai stree pe dore daalna shayad ye kisi ko bhi manzoor na hoga.

'' Ji main to mazaak kar raha tha..actually mujhe Saasu maa ne hi bheja tha aapse purse laane ke lie...main aapko dhoondh raha tha to aapko pareshaan dekha ..socha aapse thori chuhhal kar loon..after all aap bhi to meri saas jaisi hai...'' Sanjay ne apni sabse achhi smile dete hue baat ko sambhalne ki koshish ki.

Jaisa ki pehle bataya tha ki Sanjay daaru peene ke baad baaki logon jaisa nahi rehta. Wo masti men aa jaata hai aur kabhi hosh nahi khota. Daaru uske lie nashe ka kaam zaroor karti hai par jaise ki tonic ho. Uske college men ladkian use daaru pi ke dekhne ko tarasti thi. Uski harkaten, chaal aur muskaan itni nasheeli hoti thi ki ladkian uspe lattoo ho jaati thi. Aur abhi wo smile dekh ke Kiran ki dharkane double ho chuki thi. '' Haaye kya kaatil muskaan hai...man karta hai ki is muskaan se apni muskaan milaa doon...kiss kar loon isse...uffff...meri choot ..itni geeli kaise ho gai...main gir jaungi...'' Kiran ke dimaag men ye sab baaten chal rahi thi.

Par usse apne pe control rakhna tha. Usse situation ko sambhalna tha. Jo baaten Sarla ne usse kahi thi wo sach thi. Uske damaad sa handsome wahan koi nahi tha. Ab dekhna ye the ki jo baat usne Sanjay ke lund ke baare men kahi thi kya wo baat sach hai. Par usme abhi waqt tha.

''Theek hai main tumhari baat maan leti hoon damaad ji..ye lo apni shaitaani ka phal ..aur ye lo apni saasu maa ka purse ..isse leke jao aur unse kehna ki main 1 ghante men aaungi unke kamre pe kuchh zaroori baaten karne. samjhe mere muh bole natkhat damaad ji..'' Kiran ne aage bad ke Sanjay ka kaan maror dia aur uske gaalon pe ek halki si chapat di. Uske iss action se Sanjay thode tilmila gaya aur uske ahankaar ko chot pahunchi.