गन्ने की मिठास compleet

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rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 21 Oct 2014 23:44

संगीता सरक कर कुच्छ नीचे आ गई और मैने एक हाथ से उसकी कमर को पकड़ कर उसकी टाँगो को अच्छे से अपनी कमर से लपेट लिया, मेरा खड़ा लंड पेंट मे तना हुआ ठीक संगीता की चूत के छेद को पॅंटी के उपर से दबा रहा था और संगीता जान बुझ कर मेरे लंड पर अपनी चूत को खूब दबाते हुए मुझे अपनी रसीली जीभ पिला रही थी,

मैने अपने एक हाथ से उसकी कमर को थाम कर दूसरे हाथ से जब संगीता के मोटे मोटे कसे हुए दूध को खूब ज़ोर से उसकी टीशर्ट के उपर से दबाया तो संगीता एक दम से आह सीईईईई ओह भैया करते हुए मुझसे पागलो की तरह चिपक कर मुझे खूब कस कस कर चूमने लगी, संगीता के दूध क्या बताऊ इतने ठोस और कसे हुए थे जैसे किसी औरत की गुदाज गंद का भरा हुआ माँस हो और उसे दबाने मे खूब मज़ा मिलता है,

मैं उसके मोटे मोटे चुचो को खूब कस कस कर मसल रहा था, जब मुझे टीशर्ट के उपर से दबाने मे पूरी सन्तुस्ति नही मिली तब मैने संगीता की टीशर्ट को उसके पेट से उपर चढ़ा कर उसके दोनो मोटे मोटे दूध को कस कर पकड़ कर खींच कर बाहर निकाल लिया,

हाय उसके मोटे दूध का गुलाबी तना हुआ बड़ा सा निप्पल मुझे पगला कर गया और मैने उसके निप्पल को अपने मूह मे भर कर चूस्ते हुए उसके दूसरे दूध को खूब ज़ोर ज़ोर से मसलना चालू कर दिया और संगीता मेरे लंड पर अपनी चूत का दबाव देते हुए आह आह ओह सीईईईईईईईईईईई आह करने लगी, जब मैं संगीता के दूध को दबाता हुआ उसके निप्पल को चूस्ता तो संगीता ओह भैया ओह भैया कहने लगती और जब मैं उसके दूध को खूब ज़ोर से दबाते हुए उसके गुलाबी निप्पल को दन्तो से हल्के हल्के काटने लगता तो संगीता के मूह से सीईईईईईईईईईई आ सीईईईईईईईईई आहह की आवाज़ निकालने लगती,

मैं संगीता को अपने उपर चढ़ाए हुए थक चुका था और मैने उसे उसी पोज़िशन मे लिए हुए नीचे बैठ गया और उसे अपनी गोद मे अच्छे से बैठा कर उसके दूध को दबाते हुए उसका चेहरा पकड़ कर अपनी ओर किया तो संगीता ने एक बार अपनी आँखे खोल कर मुझे देखा और फिर अपनी आँखे बंद कर ली और मैने अपने होंठ उसके लरजते हुए रसीले होंठो पर रख कर उसके होंठो का रस चूस्ते हुए उसके मोटे मोटे आमो को खूब ज़ोर ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया,

संगीता ने अपनी जाँघो को और चौड़ा करके अपनी चूत का दबाव और मेरे लंड पर बढ़ा दिया और मैं उसकी रसीली जवानी को खूब दबोच दबोच कर चूसने लगा,

हम दोनो एक दूसरे को दबा दबा कर चूस चूस कर थक चुके थे, संगीता अपनी जंघे फैलाए मेरी गोद मे चढ़ि हुई अपने मोटे मोटे दूध बड़े प्यार से दब्वा रही थी और मेरे होंठो को चूस रही थी, मैने एक बार इधर उधर नज़र दौड़ाई तो मुझे चारो तरफ सुनसान नज़र आया, मैने संगीता की टीशर्ट पूरी उसके सर से निकाल कर अलग कर दिया और फिर से उसके होंठो को चूसने लगा और उसके मोटे मोटे दूध को बारी बारी से पीने लगा,

संगीता अभी भी अपनी आँखे बंद किए हुए मज़ा ले रही थी,

राज- संगीता

संगीता- हू

राज- आँखे खोल कर मेरी तरफ देख ना

संगीता- नही भैया

राज- क्यो

संगीता- मुझे शरम आती है

राज- अपने भैया से भी कोई शरमाता है क्या चल आँखे खोल और मुझे बता तो ज़रा तुझे कैसा लग रहा है अपने भैया की बाँहो मे नंगी होकर चढ़ने मे,

rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 21 Oct 2014 23:45

संगीता- मुस्कुराते हुए अपनी आँखे खोल कर, अच्छा लग रहा है, बस इतना कह कर संगीता मेरे मूह को चूम लेती है और मैं उसके मोटे मोटे दूध को कस कर दबाते हुए उसकी मोटी जाँघो को सहला कर जैसे ही अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाता हू संगीता एक दम से मुझसे ज़ोर से चिपक जाती है,

राज- संगीता

संगीता- हू

राज- संगीता चल खड़ी होकर अपनी पॅंटी उतार कर बैठ जा,

संगीता- नही भैया

राज- क्यो

संगीता- मुझे शरम आती है

राज- अच्छा तू अपनी आँखे बंद रखना पॅंटी मैं उतार देता हू

संगीता- नही भैया मैं नंगी नही होंगी

राज- संगीता के दूध को पीते हुए, देख संगीता एक बार नंगी हो जा, तू मुझे नंगी बहुत अच्छी लगती है

संगीता- आह भैया धीरे दब्ाओ ना, आप अपनी बहन को नंगी करोगे,

राज- हाँ संगीता तू मुझे नंगी बहुत अच्छी लगती है, मैं तो ग़लत सोच रहा था कि तू एक छ्होटी सी लड़की है पर जब मैने तुझे पॅंटी मे देखा तब मुझे समझ आया कि तू तो बहुत बड़ी हो गई है अब तू पूरी औरत लगने लगी है, सच तुझे साडी पहना कर मम्मी के साथ खड़ा कर दिया जाए तो तू मम्मी की बहन नज़र आएगी,

संगीता- अपनी आँखे खोल कर मुझे देखती हुई, क्यो झूठ बोलते हो भैया, कहाँ मम्मी और कहाँ मैं,

आपने कभी मम्मी को पूरी नंगी देखा है जो ऐसी बात कर रहे हो, क्या मैं मम्मी के बराबर मोटी हू,

राज- क्यो मम्मी जब पूरी नंगी होती है तो बहुत मोटी लगती है क्या,

संगीता- और नही तो क्या, आपने कभी मम्मी की नंगी जंघे देखी है मुझसे तो तीन गुना ज़्यादा मोटी है और उनका पेट देखा है जैसे 6 महीने का बच्चा पेट मे लेकर घूम रही हो, और उनकी गंद कितनी मोटी और चौड़ी है, मैं तो मम्मी के अगल बगल भी नज़र नही आती हू और आप कहते है मैं मम्मी के बराबर मोटी हू,

मेरी बातो से संगीता रंग मे आ चुकी थी और अब अपनी आदत के अनुसार खूब बाते करने लगी थी वो भी बिना किसी शर्म या झिझक के,

राज- अरे मेरा मतलब तुझे मोटी कहने का नही था, मेरा मतलब यह है कि एक जवान मर्द को औरतो का भरा हुआ गुदाज नंगा बदन ही ज़्यादा अच्छा लगता है,

संगीता- तो फिर आपने चंदा को क्यो चोदा

संगीता के मूह से चोदा शब्द सुन कर मैं एक दम से उसे देखने लगा और उसने मुझे देख कर मुस्कुराते हुए मेरे सीने मे अपना मूह च्छूपा लिया,

राज- मैने उसकी चूत को सहलाते हुए कहा संगीता तुझसे किसने कहा कि मैने चंदा को चोदा है

संगीता- अपनी चूत मुझसे सहलवते हुए अपने मूह को मेरे सीने मे छुपाये कहने लगी, मुझे नही मालूम,

राज- अरे बता ना अब शर्मा क्यो रही है देख अब तो मैं तेरी भी चूत को सहला रहा हू चल अब बता मुझे तुझसे चंदा ने कहा है ना यह सब

संगीता- हाँ

राज- और क्या कहा उसने मेरे बारे मे

संगीता- यही कि आप बहुत चुड़क्कड़ हो और दिन भर औरतो को चोदने के चक्कर मे उनके पिछे घूमते हो

राज- तो तुझे बुरा लगा क्या,

संगीता- मेरी ओर जलन भरी नज़रो से देख कर मूह बनाते हुए, मुझे क्यो बुरा लगने लगा,

राज- क्या करू संगीता तेरे भैया का लंड बहुत खड़ा होता है और जहाँ मोटी गंद और बड़े बड़े दूध नज़र आते है मेरा लंड उन्हे देख कर खड़ा हो जाता है, तू देखेगी मेरा लंड,

संगीता- हल्के से मुस्कुराते हुए मेरे सीने से लग कर, मुझे नही देखना

राज- अच्छा मत देख एक बार अपने हाथ से सहला कर तो देख कैसा लगता है तेरे भैया का लंड और उसके बाद मैने अपनी चैन खोल कर अपने लंड को बाहर निकाल कर संगीता के हाथो मे पकड़ा दिया और संगीता मेरे लंड को देख नही रही थी लेकिन वह अपने हाथो से मेरे लंड को छ्चोड़ भी नही रही थी,

वह मेरे लंड को हल्के हल्के टटोल कर महसूस कर रही थी, मैने उसका चेहरा उपर उठाया और उसके रसीले होंठ चूमते हुए कहा

राज- जानती है संगीता अब तेरे भैया का मन तुझ पर फिदा हो गया है और जब से मैने तेरे ये मोटे मोटे दूध और यह मस्त मोटी गंद देखी है तब से मैं तुझे चोदने के लिए तड़प रहा हू, बोल अपने भैया से चुदवायेगि, बोल ना ऐसे चुप रहेगी तो मैं तुझसे कभी बात नही करूगा,

क्रमशः........

rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 21 Oct 2014 23:46

GANNE KI MITHAS--34

gataank se aage......................

sangita- bas bhaiya jara sa aur upar utha lo, maine sangita ki bat sun kar apne hath ka dabav uski chut aur gand ke beech badha diya aur uski moti jangho ke beech ke hisse ko apne hatho se daba kar upar utha diya, meri is harkat se sangita ne pahle to aam tod liya aur phir ek dam se apni dono moti jangho ke beech fase mere hath ko apni dono jangho se khub kas kar daba liya,

raj- tod liya sangita

sangita- ha bhaiya tod liya

maine sangita ko dhire se niche sarkaya aur uske mote mote doodh jo tshirt fadne ko betab the ek dam se mere muh se lag gaye aur maine apna muh sangita ke mote mote bobe se kas kar daba diya aur sangiya ke muh se ek halki si siski kuchh is tarah se nikal gai, unhhhhh o bhaiya aur sangita ne apne hontho se mere galo ko chum liya, maine jaise hi sangita ko thoda aur niche apne sharir se ragadte huye utara sangita ki phuli hui chut sidhe mere khade land par jakar ruk gai aur maine uski kamar thame huye apne land ko kas kar sangita ki chut se daba diya aur sangita oh bhaiya karke ek dam se mujhse chipak gai tabhi maine hath chhod diya aur sangita niche utar kar khadi ho gai,

sangita muskurate huye kahne lagi wah bhaiya kya aam hai mast paka hua hai aur phir sangita ne aam ke upar ke hisse ko jaise hi danto se katna chaha maine kaha are pagli pake aam ko aise kata nahi jata hai balki use khub chusa jata hai, tu ladki hai na isliye tujhe aam chusna nahi ata hai aur phir maine sangita ke mote mote bobo ko dekhte huye kaha pagli aise pake aam ko kaise chuste hai de mai tujhe batata hu,

sangita chor najro se mere land ko dekh rahi thi aur mai uski phuli hui chut aur jangho ko dekh raha tha, maine aam ke upar ke hisse ko thoda sa saf karke sangita se kaha dekh pahle pake huye aam ko kaise daba daba kar use khub rasila karte hai phir mai sangita ke samne us aam ko daba daba kar use naram karne laga uske bad maine uske top par halka sa chhed karke aam ko jaise hi thoda sa dabaya usme se mast ras bahar aane laga aur maine sangita ki aur badha kar usse kaha le ab chat ise,

sangita ne apni rasili jeebh nikal kar aam ko chat liya aur kahne lagi wah bhaiya bahut hi mitha aam hai

raj- pagli jab aam taja ho aur khub gadraya ho tab use chusne par khub rasila aur mitha hi lagta hai aur phir is bar aam ko daba kar maine uska ras chus liya aur phir dusri bar sangita ki aur badhaya aur usne ras chusna shuru kar diya, kuchh der mai hi sangita pura aam kha gai aur phir se ped ki aur dekhne lagi, tabhi use dusra aam najar aa gaya aur vah uchal kar kahne lagi

sangita- bhaiya vo dekho ek aur mast aam laga hai please use bhi tod do na, maine dekha vah aam bhi usi hieght par tha aur sangita ko khub masti chadhi hui thi tabhi to randi bahre bagiche mai panty mai ghum rahi thi, mai samajh gaya tha ki ab der karna bekar hai mal mast chodne layak hai aur abhi to 3 baja hai aaj sham tak ise yahi puri nangi karke khub kas kas kar chodunga,

sangita- bhaiya kya sochne lage uthao na mujhe apni god mai,

maine is bar sangita ko jakar uske hontho ko chumte huye kaha mujhe pata tha tu aam ke bagiche mai pake huye aam dekh kar aise hi pagal ho jayegi,

sangita- apni banhe aage badha kar meri aur katil nigaho se dekhte muh bana kar kahne lagi bhaiya chadhao na apni bahan ko apne upar,

maine jakar sangita ko pahle apne sine se kas kar daba liya aur uske galo ko chumne laga

sangita- bhaiya yah sab aap bad mai kar lena aur phir muskurakar kahne lagi pahle apni bahan ko apne upar to chadha lo, maine sangita ki moti gand ke beech is bar bade aaram se hath dal kar uski bur aur gand par dabate huye uski chut ko kas kar mutthi mai bhar kar use apne upar utha kar apne sine se daba liya, hay uski chut aur gand ka gudaj ehsas bada mast tha,

lekin maine dekha ki is bar sangita apni aankhe band kiye huye mere sine se apne mote doodh khub jor se ragdte huye khub kas kar apni dono jangho ko lapet kar kisi bandariya ki tarah meri kamar se lipti hui thi aur apne rasile hontho se mere gale ko chum rahi thi, maine bhi sangita ki dono tango ko kas kar apni kamar se lapet liya aur apne dono hantho se sangita ki moti gand ko dabate huye jaise hi maine uski panty ke upar se uski gand ke chhed ko sahlaya sangita paglo ki tarah aah bhaiya karti hui mere hontho ko khub kas kas kar chumne lagi, maine apni jeebh nikal kar sangita ke muh mai dalne ki koshish ki to sangita ne apni jeebh nikal kar mere muh mai dalne lagi aur maine uski rasili jeebh ko apne muh mai bhar kar uski moti gand ki guda ko khub sahlate huye uski rasili jeebh ko chusne laga,

sangita sarak kar kuchh niche aa gai aur maine ek hath se uski kamar ko pakad kar uski tango ko achche se apni kamar se lapet liya, mera khada land pent mai tana hua thik sangita ki chut ke chhed ko panty ke upar se daba raha tha aur sangita jan bujh kar mere land par apni chut ko khub dabate huye mujhe apni rasili jeebh pila rahi thi,

maine apne ek hath se uski kamar ko tham kar dusre hath se jab sangita ke mote mote kase huye doodh ko khub jor se uski tshirt ke upar se dabaya to sangita ek dam se aah siiiiii oh bhaiya karte huye mujhse paglo ki tarah chipak kar mujhe khub kas kas kar chumne lagi, sangita ke doodh kya batau itne thos aur kase huye the jaise kisi aurat ki gudaj gand ka bhara hua mans ho aur use dabane mai khub maja milta hai,

mai uske mote mote chucho ko khub kas kas kar masal raha tha, jab mujhe tshirt ke upar se dabane mai puri santusti nahi mili tab maine sangita ki tshirt ko uske pet se upar chadha kar uske dono mote mote doodh ko kas kar pakad kar khinch kar bahar nikal liya,

hay uske mote doodh ka gulabi tana hua bada sa nippal mujhe pagala kar gaya aur maine uske nippal ko apne muh mai bhar kar chuste huye uske dusre doodh ko khub jor jor se masalna chalu kar diya aur sangita mere land par apni chut ka dabav dete huye aah aah oh siiiiiiiiiiiii aah karne lagi, jab mai sangita ke doodh ko dabata hua uske nippal ko chusta to sangita oh bhaiya oh bhaiya kahne lagti aur jab mai uske doodh ko khub jor se dabate huye uske gulabi nippal ko danto se halke halke katne lagta to sangita ke muh se siiiiiiiiiiii aah siiiiiiiiiii aahh ki aawaj nikalne lagti,

mai sangita ko apne upar chadhaye huye thak chuka tha aur maine use usi position mai liye huye niche beth gaya aur use apni god mai achche se betha kar uske doodh ko dabate huye uska chehra pakad kar apni aur kiya to sangita ne ek bar apni aankhe khol kar mujhe dekha aur phir apni aankhe band kar li aur maine apne honth uske larajte huye rasile hontho par rakh kar uske hontho ka ras chuste huye uske mote mote aamo ko khub jor jor se maslana shuru kar diya,

sangita ne apni jangho ko aur chuada karke apni chut ka dabav aur mere land par badha diya aur mai uski rasili jawani ko khub daboch daboch kar chusne laga,

hum dono ek dusre ko daba daba kar chus chus kar thak chuke the, sangita apni janghe phailaye meri god mai chadhi hui apne mote mote doodh bade pyar se dabwa rahi thi aur mere hontho ko chus rahi thi, maine ek bar idhar udhar najar daudai to mujhe charo taraf sunsan najar aaya, maine sangita ki tshirt puri uske sar se nikal kar alag kar diya aur phir se uske hontho ko chusne laga aur uske mote mote doodh ko bari bari se pine laga,

sangita abhi bhi apni aankhe band kiye huye maja le rahi thi,

raj- sangita

sangita- hu

raj- aankhe khol kar meri taraf dekh na

sangita- nahi bhaiya

raj- kyo

sangita- mujhe sharam aati hai

raj- apne bhaiya se bhi koi sharmata hai kya chal aankhe khol aur mujhe bata to jara tujhe kaisa lag raha hai apne bhaiya ki banho mai nangi hokar chadhne mai,

sangita- muskurate huye apni aankhe khol kar, achcha lag raha hai, bas itna kah kar sangita mere muh ko chum leti hai aur mai uske mote mote doodh ko kas kar dabate huye uski moti jangho ko sahla kar jaise hi apne hath se uski chut ko sahlata hu sangita ek dam se mujhse jor se chipak jati hai,

raj- sangita

sangita- hu

raj- sangita chal khadi hokar apni panty utar kar beth ja,

sangita- nahi bhaiya

raj- kyo

sangita- mujhe sharam aati hai

raj- achcha tu apni aankhe band rakhna panty mai utar deta hu

sangita- nahi bhaiya mai nangi nahi houngi

raj- sangita ke doodh ko pite huye, dekh sangita ek bar nangi ho ja, tu mujhe nangi bahut achchi lagti hai

sangita- aah bhaiya dhire dabao na, aap apni bahan ko nangi karoge,

raj- ha sangita tu mujhe nangi bahut achchi lagti hai, mai to galat soch raha tha ki tu ek chhoti si ladki hai par jab maine tujhe panty mai dekha tab mujhe samajh aaya ki tu to bahut badi ho gai hai ab tu puri aurat lagne lagi hai, sach tujhe sadi pahna kar mummy ke sath khada kar diya jaye to tu mummy ki bahan najar aayegi,

sangita- apni aankhe khol kar mujhe dekhti hui, kyo jhuth bolte ho bhaiya, kaha mummy aur kaha mai,

aapne kabhi mummy ko puri nangi dekha hai jo aisi bat kar rahe ho, kya mai mummy ke barabar moti hu,

raj- kyo mummy jab puri nangi hoti hai to bahut moti lagti hai kya,

sangita- aur nahi to kya, aapne kabhi mummy ki nangi janghe dekhi hai mujhse to teen guna jyada moti hai aur unka pet dekha hai jaise 6 mahine ka bachcha pet mai lekar ghum rahi ho, aur unki gand kitni moti aur chaudi hai, mai to mummy ke agal bagal bhi najar nahi aati hu aur aap kahte hai mai mummy ke barabar moti hu,

meri bato se sangita rang mai aa chuki thi aur ab apni aadat ke anusar khub bate karne lagi thi vo bhi bina kisi sharm ya jhijhak ke,

raj- are mera matlab tujhe moti kahne ka nahi tha, mera matlab yah hai ki ek jawan mard ko aurto ka bhara hua gudaj nanga badan hi jyada achcha lagta hai,

sangita- to phir aapne chanda ko kyo choda

sangita ke muh se choda shabd sun kar mai ek dam se use dekhne laga aur usne mujhe dekh kar muskurate huye mere sine mai apna muh chhupa liya,

raj- maine uski chut ko sahlate huye kaha sangita tujhse kisne kaha ki maine chanda ko choda hai

sangita- apni chut mujhse sahlwate huye apne muh ko mere sine mai chhupaye kahne lagi, mujhe nahi malum,

raj- are bata na ab sharma kyo rahi hai dekh ab to mai teri bhi chut ko sahla raha hu chal ab bata mujhe tujhse chanda ne kaha hai na yah sab

sangita- ha

raj- aur kya kaha usne mere bare mai

sangita- yahi ki aap bahut chudakkad ho aur din bhar aurto ko chodne ke chakkar mai unke pichhe ghumte ho

raj- to tujhe bura laga kya,

sangita- meri aur jalan bhari najro se dekh kar muh banate huye, mujhe kyo bura lagne laga,

raj- kya karu sangita tere bhaiya ka land bahut khada hota hai aur jaha moti gand aur bade bade doodh najar aate hai mera land unhe dekh kar khada ho jata hai, tu dekhegi mera land,

sangita- halke se muskurate huye mere sine se lag kar, mujhe nahi dekhna

raj- achcha mat dekh ek bar apne hath se sahla kar to dekh kaisa lagta hai tere bhaiya ka land aur uske bad maine apni chain khol kar apne land ko bahar nikal kar sangita ke hantho mai pakda diya aur sangita mere land ko dekh nahi rahi thi lekin vah apne hantho se mere land ko chhod bhi nahi rahi thi,

vah mere land ko halke halke tatol kar mehsus kar rahi thi, maine uska chehra upar uthaya aur uske rasile honth chumte huye kaha

raj- janti hai sangita ab tere bhaiya ka man tujh par fida ho gaya hai aur jab se maine tere ye mote mote doodh aur yah mast moti gand dekhi hai tab se mai tujhe chodne ke liye tadap raha hu, bol apne bhaiya se chudwayegi, bol na aise chup rahegi to mai tujhse kabhi bat nahi karuga,

kramashah........