मैं और मेरी मम्मी

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The Romantic
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मैं और मेरी मम्मी

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 16:49

मैं और मेरी मम्मी (भाग-1)

मेरा नाम रवि है और मैं आप लोगों को अपनी सच्ची कहानी बता रही हूँ जो की कुछ साल पहले मेरे साथ हुई.

मैं अपनी माँ के साथ एक गाओं मे रहता हूँ. मैने शहर के एक स्कूल से 12 पास की और गाओं मे आ गया अपनी माँ के साथ रहने और खेती बरी संभालने. मेरी माँ चाहती थी की मैं शहर मे ही रहूं पर मेरे पापा ने ज़ोर देकर कहा की अब मुझे ही खेती बरी संभालने हैं सो मैं गाओं मे आ गया. मेरे पापा शहर मे रहते हैं और महीने मे एकबार ही घर पर आते हैं. हमारे घर पर दो कमरे थे,


एक मेरा और दूसरा मेरी माँ का.मेरी आगे 19 है और माँ की 40 है. मेरी माँ एक बहुत ही कामुक औरत है. माँ वैसे तो घर मे सारी, ब्लाउस और लहंगा पहनती है पर रात को सोते समय अपना लहंगा खोल कर सिर्फ़ ब्लाउस और सारी पहन लेती है. मेरी माँ के माममे 38D साइज़ के हैं और उसकी गाँड बहुत टाइट दिखती है. रात को सोते समय अक्सर मैं उनके मम्मो को देख सकता हूँ उनके ब्लाउस से झँकते हुए जब वो सो रही होती है तब. एक दिन मैने उनके जाँघ देख लिए. वो सो रही थी और उनकी सारी जाँघ पर आ गयी थी तो मैने उसके सफेद सफेद जाँघ देख लिए. मेरा लंड एकद्म खड़ा हो गया और मैं जल्दी से बातरूम मे जाकर मूठ मारकर आ गया. मैने सोचा पता नहीं माँ नंगी कैसे दिखती होगी. मेरे जाने के कुछ दीनो बाद से ही मैने देखा की माँ थोड़ी बेचैन है. मैने पूछा तो माँ बोली की कोई परेशानी नहीं है.

कुछ दीनो के बाद मेरे चाचा आए. उनकी उमर 60 थी. मैने देखा की माँ बहुत खुश लग रही है. चाचा को रात को रहना था हमारे घर पर और अगले दिन सुबह को अपने गाओं लौटना था. चाचा को दूसरा कमरा देकर माँ बोली की मैं रात को उनके साथ ही बिस्तर पर सो जाओं. रात को मैं और माँ बिस्तर पर सो गये.

अचानक कुछ आवाज़ से मेरी नींद टूटी तो देखा की माँ कमरे का दरवाज़ा बंद करके कहीं जा रही है. मैने सोचा रात को माँ कहाँ जा रही होगी. मैं उठा और दूसरे दरवाज़े से बाहर आकर देखा की माँ चाचा के कमरे मे जा रही है. मैं जल्दी से खिड़की के पास गया और उसमे से चुपके चुपके देखने लगा.

माँ के घुसते ही साथ चाचा बोले, ‘कितनी देर लगा दी तुमने शीला, कब्से मेरा लंड फंफंना रहा है. माँ बोली, “ रवि के सोने का इंतेज़ार कर रही थी मैं तो. चूत तो मेरी भी कब से पानी छोड़ रही है आप के घोड़े जैसा लंड के बारे मैं सोच के, मैं भी बहुत बेचैन हूँ आपके मोटे डंडे को सहलाने के लिए. देखिए ना मेरी चूत कैसे तड़प रही है आपके लंड को पाने के लिए.”

यह बोलकर माँ ने जल्दी से अपनी साडी कमर तक उठाई और चाचा को अपनी चूत दिखाने लगी. मैने भी माँ की चूत को देखा, चूत पर बाल का तो कोई निशान भी नही था, चाचा ने झट से अपनी हथेली उसकी चूत पे रख दी और उसे घिसने लगे. माँ अपने हाथ को चाचा के लूँगी के पास ले गये और उसे खोल दिया. जैसे हे माँ ने चाचा का लंड देखा "है हाए दायया ! 4 साल पहले भी तो आप से ही चुदवाती थी पर उस वक़्त तो इतना बड़ा नही था "

चाचा बोले सर्जरी करवाइ है मेरी कुट्टिया, चल अपने कपड़े उतार और जल्दी नंगी हो जा. 4 साल हो गये तुझे चोदे हुए.”अब मैं समझा क्यूँ माँ चाहती थी की मैं शहर मे ही रहूं.

जिससे की वो चाचा से चुदवाती रहे. अब जल्दी से अपने कपड़े उतरने लगी और अपनी चोली और सारी को उतार फेंका. तब तक चाचा भी नंगे हो गये. अब मैने माँ को पूरी तरह नंगा देखा. उसके मुममे बहुत बड़े बड़े थे और उसके निपल तो एकदम खड़े थे. चाचा का लंड करीब 9+ होगा अब चाचा लेट गये और माँ झट से चाचा के उप्पर 69 के पोज़िशन मे हो गये.

चाचा ने माँ की चूत को चाटना चालू किया और माँ ने चाचा के लंड को चूसने लगी. माँ अपने मूह मे चाचा के लंड को ले लिया और उसको पूरी तरह से अपने मूह मे घुसने लगी. उधर चाचा माँ की चूत को चाटने के साथ साथ उसकी चूत अंदर अपनी दो उंगली डाल दी और आगे पीछे करने लगे.

माँ धीरे धीरे ऊउउइईई माआअ ….. आआहह……. ऊऊओह…. करते हुए सिसकियाँ लेने लगी.

माँ …"आप की उंगली भी किसी लंड जैसे है भैया,

चाचा....” उंगली लेते वक़्त भैया ना कहा कर रानी.

माँ अब चाचा के लंड को बहुत ज़ोर ज़ोर से चूस रहे थी और उनके अंदो (बॉल्स) को दबाने लगी. चाचा बोले,” आबे साली मेरा माल मूह मे ही ले लेगी तो तेरे चूत मे लंड कौन लेगा. चल सीधी होकर मेरे लंड पर बैठ जा और सवारी शुरू कर दे.”

माँ कुछ देर तक वैसे ही चाचा के लंड को चूस्टी रहे फिर उठकर सीधी हो गयी और चाचा के पैरो के बीच बैठ कर उसके लंड को हाथ से मसालने लगी.

फिर माँ झुकी और चाचा के लंड को चाटने लगी और फिर पूरा लंड मूह मे घुसा लिया. ऐसा करते समय माँ की गाँड उप्पर हो गयी और मुझे उसकी गाँड और चूत दोनो की एक साथ दर्शन हो गयी.

तब मैने देखा की माँ जैसे जैसे चाचा का लंड और थैला चूस्टी चाचा भी अपने पैर के अंगूठे से माँ की चूत पर घिसते जाते. अचानक मैने देखा की चाचा का अंगूठा पूरा माँ की चूत मे चला गया है और माँ अचानक ही एक ज़ोर की सिसकी लेकर चाचा के उप्पर लेट गयी. मैं समझ गया की माँ ने अपना पानी छोड़ दिया चाचा पर.

चाचा ने अब माँ की चुचि से खेलना शुरू किया और उसे मूह मे ले लिए. दूसरे चुचि को वो हाथ से दबाने लगे और उसकी घुंडी को मसालने लगे. माँ एकद्म से फिर गरम हो गयी और चाचा के लंड से खेलना शुरू कर दिया. अब माँ चाचा के लंड को हाथ से पकड़ कर अपने चूत को पास लाई और धीरे से उस पेर बैठ गयी और उनके लंड को अपने चूत मे दल लिया.

मैं तो काफ़ी पहल ही गरम हो गया था और अपने लंड को हाथ से घिस रहा था. जैसे ही माँ के चूत मे चाचा का लंड पूरी तरह गया मैने अपना माल छोड़ दिया ककच्चे के अंदर ही. अब माँ बड़े ही मज़े से चाचा के लंड की सवारी कर रही थी और चाचा भी मज़े से माँ के मम्मो से खेल रहे थे. इसी बीच माँ ऊउउइईई … माआ……. अहह…….. ऊऊउउइईई……. करते हुए एक और बार पानी छोड़ दिया. चाचा ने तब उसे अपने लंड से उतरा और बिस्तर पर उसे लिटा कर उसे चूत मे अपनी लंड दल दी और धक्के मरने शुरू किए. उनका पूरा लंड माँ की चूत मे घुस गया था और उसका थैला माँ की चूत के नीचे जाकर धक्के मार रहा था. माँ के मूह से …. उउक्क …. उऊउक्कककक …. उउउम्म्म्मम … ऊओउउइईई ….. ऊओफफफफ्फ़….. की आवाज़े निकल रही थी और उसने अपनी आखें बंद कर ली थी. अचानक चाचा बहुत ज़ोर ज़ोर से धक्के मरने लगे और थोड़ी देर मे उसने अपना पूरा गरम माल माँ के चूत मे छोड़ दिया. मुझसे सहा नही गया और मैने एकबार फिर अपने ककच्चे मे अपना माल छोड़ दिया.

इसके बाद मैं जा कर सो गया. शायद माँ और चाचा ने एक और राउंड चुदाई की और फिर सो गये. सुबहह को चाचा अपने गाओं चले गये. उसके बाद एक दिन रात को माँ मुझसे बोली,” रवि, आज तू मेरे साथ ही सो जाना”. मैं बहुत खुश हुआ की शायद आज मुझे माँ को नंगा देखने मिलेगा. मैं रात को माँ के बिस्तर पर लेट गया.

थोड़ी देर मे माँ आई और मेरी तरफ अपनी पीठ करके अपनी चोली उतार दी.उस ने सोचा शायद मैं सो गया.अब तक माँ के एक चुचि पर से सारी हाथ गये थी और मेरे आँखों के सामने उसकी एक चुचि थी. यह देख मेरा लंड टाइट हो गया. मैं माँ की तरफ मूह कर क सो गया वो करवट बदलती- बदलती मेरा लंड को टच हो गया /

लगता है की माँ गरमा गयी थी, रंडी साली. फिर एक नाख़ून से मेरे लंड की टोपी को धीरे धीरे से गिसने लगी . मैं भी आगे-पीछे होने लगा. मेरा टाइट लंड अब उनके सामने था. माँ बोली,” उई माँ ! यह क्या है तेरे जाँघो के बीच मे इतना बड़ा सा. बेटा तेरा लंड तो बिल्कुल टाइट है. और तेरी झाण्टे भी बहुत घनी है. तेरा लंड तो बहुत बड़ा है रवि. यह कैसे हो गया?’

मैं बोला, ”मैं भी जवान हो गया हूँ. पर यह अभी पूरा बड़ा कहाँ हुआ है, अभी तो तोड़ा बाकी है. हाथ से सहलाने से पूरा बड़ा हो जाएगा.” माँ बोली, “अर्रे बेटा मुझे मालूम ना था की तू इतना बड़ा हथियार घर मैं हे ले क घूम रहा है, नही तो दिन मैं 4-4 बार चोदवाती तुझसे. पर तेरा ये लंड तो सचमुच ही बहुत बड़ा है. क्या मैं इसे थोडा सहलाके देखूं और कितना बड़ा हो सकता है?”

यह बोल कर माँ ने झट से मेरा लंड अपने हाथ मे ले लिए ओर उसे घिसने लगी जिससे की मेरा लंड बिल्कुल खड़ा हो गया. अब माँ बोली, “र वि, क्या तेरा लंड क्या हमेशा इतना बड़ा रहता है?”

मैं बोला, “ नही माँ तेरी गाँड देख कर ऐसा हो गया है.”

माँ, “अर्रे शैतान तेरा लंड अपनी माँ के गाँड देख कर बड़े हो गयी है. मैं तुझे मज़ा चखाती हूँ.” यह बोल माँ ने मेरा लंड अपने मूह के पास ले गयी और लंड के टोपी को चूसने लगी. मैं तड़प उठा. माँ हंसकर बोली, “तुझे आज मैं पूरा मज़ा चखाती हूँ.”

फिर माँ ने मेरे सूपाडे को अपने मूह मे ले लिया और धीरे धीरे चूसने लगी साथ ही मेरे अंदो (बॉल्स) को हाथों से मसालने लगी. अब माँ ने मेरा पूरा लंड अपने मूह मे ले लिया और ज़ोर ज़ोर से अपना मूह अप्पर नीचे करने लगे. मैं अपना लंड माँ के मूह से बाहर आते और अंदर जाते हुए देखने लगा.

फिर माँ ने मेरे लंड को निकल कर मेरे अंदो से खेलने लगी और उन्हे चाटने लगी फिर अचानक से पुर थैले को मूह मे लेकर चूसने लगी. मैं सुख से कराह उठा. थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा और फिर माँ मेरे पास लेट गयी और मैने उसके वक्षो को मूह मे लेकर चूसना शुरू कर दिया. साथ ही मैने अपना दूसरा हाथ माँ के साड़ी के अंडर डाल दिया और उसके चूत को सहलाने लगा. माँ के चूत से पानी निकल रहा था.

माँ बोली, “अरे रावी बेटे मेरे लाल ज़रा मेरे नीचे वाले होंठ को चूस कर मुझे मज़ा दे मेरी जवानी का. चल अपनी माँ की साड़ी उतार कर नंगा कर दे. »

मुझसे रहा नही गया और मैने झट से उसकी साड़ी उतार दी एर उसे नंगा कर दिया. माँ ने अपने पैर फैला दिए थे और मेरा सिर उसके चूत की तरफ खिचने लगी. मैं जल्दी से उसके चूत को चाटने लगा. उसकी चूत बहुत फूली हुई थी और उसके चूत के होंठ एकदम खुले हुए थे

एग्ज़ाइट्मेंट मे. उसमे से उसका रस भी चूत रहा था. मैने अपने मूह उसके चूत पर लगा दिया और उसके होतों को फैला कर उसके चूत के अंडर भी अपनी जीभ घुसा दी और उसे अपनी जीभ से चोदने लगा. माँ को बहुत मज़ा आ रहा था.

उस पर बॉल नही थे मैने पूछा मा"तुम्हरे बॉल क्यो नही है बेटा, तुम्हारी माँ की ये सड़क भी तो चलती रहती है. थोड़ी देर बाद माँ बोली, “अब तू लेट जा और मैं तेरी सवारी करती हूँ.”

मैं जल्दी से लेट गया और माँ मेरे दोनो तरफ अपने पैर फैला कर मेरे लंड के अप्पर धीरे धीरे बैठने लगी. जल्दी ही मेरा ताना हुआ लंबा लंड माँ के चूत मे था. उसके गरम चूत मुझे बहुत गर्म कर चुकी थी. इसके बाद माँ धीरे धीरे मेरी सवारी करने लगी और आगे पीछे होने लगी.

10 मिनिट तक माँ मुझे चोदती रही और फिर झड़ गयी. अब मैने माँ को लिटाया और जल्दी से उसके चूत मे अपना लंड डाल दिया और उसे घपा घाप घपा घाप चोदने लगा. माँ अपनी गाँड उछाल उछाल के मेरा साथ देने लगी. माँ ने अपने पैर पूरे फैल्ला दिए जिससे की मैं पूरी तरह उसके चूत मे लंड पेल सकूँ.

मेरा आँड का थैला उसकी चूत से टकराने लगा और माँ मज़े से चोदवाती रही. करीब बीस मिनिट टुक लंड पेलने के बाद मुझे लगा मैं झड़ने वाला हूँ और माँ भी समझ गयी तो उसने मुझे अपने अंदर ही झड़ने के लिए बोल दिया और मैं वैसे लंड पेलते हुए उसके अंडर झाड़ गया.

फिर मैं माँ से पूछने लगा की इस किस से चूत ढीली करवाई है तो माँ बोली"1 तो तेरे नाना जब मैं 14 की थी वो ढ़ाचा दच्चा चोद्ते था.मेरे चारो बाई.और जो मैं मार्केट जाती तो 1 या 2 से ढिल्ले करवा आती वो मुज़े याद नही,पर बेटा आज तक 1 भी दिन नही गया जब मेरी चूत मैं कुछ ना गया हो..लंड नही तो मुल्ली,

फिर मैने माँ से पूछा काबी गांद मरवी है,

मा" नही वो मर्वानी भी नाही.
मैने कहा मैं मारना चाहता हो,
वो बोली मुज़े मेरे पिया की कसम कभी नही करना वैसे मैने,
मैं बोला. मैं तो बस ऐसे हे पूच रहा था मा.

2 दिन बाद मैं ओर माँ सेक्सी मोविए धेक रहे थे उस मैं लड़का लड़की को उल्टिकार उस के हाट बेड की 1 साइड बाँध दियाया फिर उस की चुदाई की तभी मेरे दिमाग़ मैं आइडिया आया माँ की गंद की धगिया उड़ा डुगा.

मैने माँ को वैसे हे सेक्स करने को कहा वो तो तैय्यर बैठे थी, मैने माँ क हाथ बेड क आगे ओर पैर पीछे बंद कर यूयेसे फ्लाइयिंग सूपरमन की पोज़िशन मैं किया ता क गाँड मार साकु, मैं माँ की चूत मैं उंगली डाली गील्ली थी मैं वाहा से ही चूत का पानी उस की गंद मैं लगाने लगा ओर मिद्देल फिंगर 'घुप'से दल दे.

माँ को चल समाज आ गई बोली, कुत्ते ज्ञड़ का ख़याल डेमाग से निकल दे,मैने लंड पर टेल की मालिश करने लगा माँ की आइज़ मैं डर के आँसू आ गये 8 इंच का लंड गाँड
की मोरी सदा के लिए खोल देगा, मैने कहा लंड क लिया रेडी हो जा

माँ,नही बेटा ऐसा ना करते, मैं लंड को छेड़ पर रख कर 1 तूफ़ानी जटका मारा ओर बाल्स तक मेरा लंड माँ की गाँड मे धँस दिया, माँ चिड़िया की तरह छटपटा उठी उसक मूह से खुल के एक चीख निकल गयी 'आआआ एयाया आऐययई ईईईईईई ईईईईई ईईईईईई ईईईईईई ईईईई,, मैं सारा लंड माँ की गाँड मे डालकर 16 मिंट तक वैसे ही लेता रहा ओर माँ क चुप होने का इंतज़ार करता रहा,15 मिंट बाद वो सिर्फ़ पायट मैं हे रो रही थी फिर मैने धीरे- धीरे लंड अंदर बाहर करने लगा,वो फिर रोने लगी मैने 1 घंटे तक माँ की गाँड मरि अब मैं थोड़ी देर रुक जाता ओर अपनी उंगली काट लेता जब मैने गाँड से लंड बाहर निकाला मुज़े माँ पर तरस आ गया माँ की गाँड का छेद दो रुपये सिक्के जितना बड़ा हो गया था,, ओर बेड पर भी खून गिर रहा था, उस रात माँ की 6 बार गाँड मारी,3 दिन तक माँ को चलने में प्रेशानि होती रही 2 दिन तक च्छेद पर उंगली रकति ओर कहती हराम के देख कितनी खोल के रख दी. मैने कहा सॉरी मां,फिर धीरे 2 माँ गान्डू भी बन गई,

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Re: मैं और मेरी मम्मी

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 16:53

मैं और मेरी मम्मी (भाग-2)

दोस्तो मेरा नाम रवि है, मेरे घर में हम तीन लोग हैं, मैं, मेरी माँ और मेरे पिताजी ! पिताजी ज्यादातर ऑफिस के काम से बाहर ही रहते हैं तो घर पर रह गए मैं और मेरी माँ ! मैं अभी 19 साल का हूँ और मेरी माँ की उम्र होगी 37 साल, मेरी माँ बला की खूबबसूरत है। उनकी खूबसूरती तो ऐसी है कि अगर आज भी वो घर से बाहर निकलती है तो चलने वाले सभी आदमियों की और लड़कों की लुल्ली पैंट में ही खड़ी हो जाती है। क्योंकि उनका फिगर है ही इतना लाजवाब 36-27-36 ।


मैं अभी कालेज में ही हूँ और अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ। इस रविवार को मैं घर पर ही था छुट्टी होने की वजह से तो जब मैं सोकर उठा तो मेरी माँ घर की साफ सफाई कर रही थी।

माशा अल्लाह !

क्या लग रही थी वो !

सिल्की गुलाबी रंग के गाउन में उनके स्तन तो गाउन से बाहर निकलने को ही हो रहे थे। अगर ब्रा ना होती तो माँ के स्तन बाहर निकल चुके होते। और उनकी गांड तो मानो ऐसे मुझे उकसा रही थी कि आ बैल- मेरी मार। मैंने अपनी माँ को पहले कभी ऐसी नजर से नहीं देखा था पर मैं करता भी क्या ! मैं अभी उनके नितम्बों को देख कर सोच ही रहा था कि इतने में उन्होंने कहा- रवि, रवि, आज पूरे दिन पड़ा ही रहेगा या उठेगा भी ! बिस्तर से खड़ा हो ! मुझे यहाँ सफाई करनी है, कितना गन्दा कर रखा है तूने अपना कमरा !


मैं बोला- होता हूँ खड़ा !


और मैं खड़ा हो गया पर यह भूल गया कि मेरा लंड भी जोश में आकर खड़ा हो गया था, वो तो बस घुस जाना चाहता था माँ की गांड में !


मैंने उसे ठीक किया और बाहर आ गया।


बाहर पिताजी अखबार पढ़ रहे थे। इतने में मेरे दोस्त मुझे बुलाने के लिए आ गए क्रिकेट मैच के लिए।


मैं भी फिर जल्दी से नहा धोकर अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने चला गया पर पूरे दिन में अपनी माँ के सेक्सी ख्यालों में खोया रहा और उस दिन ढंग से खेल भी नहीं पाया।


शाम को 6 बजे जब मैं घर पर आया तो घर बिलकुल सुनसान सा पड़ा था, लग रहा था कि कोई नहीं है। पर जब मैं अन्दर घुसा तो मैं तो हैरान ही रह गया।

पापा मम्मी को चोद रहे थे। वो अब मेकअप करके किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। मैं यह सब बाहर दरवाजे के बगल में खड़ा होकर देख रहा था। क्या लग रही थी वो ! पापा मम्मी के बोबों को ऐसे दबा रहे थे कि आज ही सारा दूध निकाल लेना चाहते हो !


वो कह रहे थे- कमली, आजा मेरी जान ! अब तो महीने भर बाद ही मौका मिलेगा तुझे चोदने का !


शायद वो ऑफिस के काम से बाहर जा रहे थे।


माँ ने कहा- तो जा क्यों रहे हो ? इस जान को छोड़कर मत जाओ न ! मेरा दिल नहीं लगेगा, इतने दिन में मैं तो पागल ही हो जाऊँगी तुम्हारे बिना !


अरे, कमली क्यों चिंता करती हो? एक महीने बाद आ तो रहा हूँ मैं ! फिर से चोदूँगा तुझे मेरी जान ! पर काम तो काम है न ! वो तो करना ही पड़ेगा।


माँ बोली- हम्म ! वो तो है मेरे राजा !


पापा ने कहा- कमली, चल अब घोड़ी बन जा ! काफी देर हो गई चूत मारते हुए !


तो माँ बोली- तुम मर्द लोगो को गाण्ड में ऐसा क्या मजा आता है?


और पापा ने मम्मी को घोड़ी बनाया और चोदने लगे।


क्या आवाजें निकाल रही थी माँ चुदते हुए ! मेरा लंड तो फनफनाने लगा था उनकी अवस्था देख कर !


मैं मन ही मन सोच रहा था कि काश मैं अपनी माँ को चोद पाता ! क्या माल है वो ! आधे घंटे भर तक वो चुदाई-कार्यक्रम चला होगा और फिर पापा रात को ही मुंबई के लिए चले गए और माँ से कह गए कि मेरा ख्याल रखे।


मैंने उस शाम का दृश्य देख कर कसम खाई कि एक बार तो माँ को जरुर चोदूँगा।


दिन ऐसे ही निकलने लगे और माँ भी थोड़ा उदास सी रहने लगी। क्या करे, उन्हें लंड ही नहीं मिला था इतने दिनों से !


मुझसे माँ की यह बेचैनी देखी नहीं जा रही थी पर मैं उनसे कह भी तो नहीं सकता था।


मैंने उनसे पूछा- माँ, इतनी उदास क्यों रहती हो तुम आजकल?


तो वो बोली- कुछ नहीं रवि, तेरे पापा की बहुत याद आ रही है, इतनी दिन हो गए न !


तो मैंने कहा- माँ मैं हूँ न पापा की जगह ! बोलो क्या हुआ ?


तो वो बोली- र वि तू क्या जाने एक औरत की मज़बूरी ! तू तो अभी बच्चा है।


तो मैंने कहा- हाँ माँ ! मैं समझ सकता हूँ कि आप पर क्या बीत रही है ! पर मैं एक बात बता दूँ कि मैं बच्चा नहीं रहा अब ! पूरे 19 साल का हो गया हूँ ! और मेरा पप्पू भी।


वो बोली- क्या कहा तूने र वि?


मैं सकपका गया और कहा- सॉरी माँ, गलती से मुँह से निकल गया।



और वो मेरे लंड को देखने लगी। मैं उस समय माँ से सॉरी बोलकर कॉलेज़ चला गया और काफी सोचता रहा कि यह मैंने क्या कह दिया ! माँ क्या सोचेगी मेरे बारे में..... की रवि कैसी बात बोल कर गया है ?


पर माँ ने तो शाम के लिए कुछ और ही योजना बना रखी थी।


कॉलेज़ खत्म करके जैसे ही मैंने घर के अन्दर कदम रखा, वैसे ही बारिश चालू हो गई। माँ ने मुझे देख कर कहा- आ गया मेरा राजा बेटा !


और यह कह कर वो छत पर कपड़े उठाने चली गई। उन्होंने उस समय वही गुलाबी सिल्की गाउन पहन रखा था। मैं भी उनके पीछे पीछे ऊपर चला गया तो वो मुझे देख कर बोली- तू ऊपर क्यों आ गया? भीग जायेगा ! चल नीचे जा !


मैं बोला- अरे माँ, मैं तो आपकी मदद करने के लिए ऊपर आया हूँ !


और आधे कपड़े उन्होंने उठाये, आधे मैंने, और नीचे आ गए।


सीढ़ी उतरते वक़्त माँ मेरे आगे चल रही थी, मैं उनके पीछे !


उनके भीगे हुए मादक चूतड़ क्या लग रहे थे ! भीगने की वजह से उनका गाउन बिल्कुल उनके शरीर से चिपक गया था। मन तो कर रहा थ कि उनको गोदी में उठा कर उनकी इतनी गांड मारूँ कि सारा वीर्य ही निकाल दूँ !


नीचे आकर माँ कहने लगी- इस बारिश को भी आज ही आना था ! एक तो यह ठण्ड, ऊपर से बारिश ! चल कपड़े बदल ले, नहीं तो ठण्ड लग जाएगी।


उस समय मैं माँ के दोनों स्तन देख रहा था जो गाउन में से झांक रहे थे। क्या संतरे थे- मानो कि अभी दबाओ तो कई ग्लास भर कर जूस निकलेगा उसमें से !उन्होंने मुझे देख कर कहा- क्या देख रहा है तू इधर मेरे उभारों को घूर कर ?


मैं डर गया और कहा- कुछ भी तो नहीं !


तो वो बोली- मैं सब समझती हूँ बेटा ! माँ हूँ तेरी !


और यह कह कर वो बाथरूम की तरफ जाने लगी और कहने लगी- तू भी अपने कपड़े बदल ले, मैं भी अब नहा लेती हूँ !


क्या गाण्ड लग रही थी चलते हुए उनकी ! मैं मन ही मन तो उन्हें चोद ही चुका था और आज अच्छा मौका था उन्हें सचमुच में चोदने का !


मैं उनसे जाकर पीछे से लिपट गया। माँ एकदम से घबरा गई। मैंने कहा- माँ सॉरी ! मैं ऐसा कुछ नहीं देख रहा था जो आप सोच रही हो !


माँ से चिपकते ही मेरा लंड फुन्कारे मारने लगा था और इसका एहसास मेरी माँ को भी हो गया था क्योंकि उस समय मेरा लंड उनकी दरार में रगड़ मारने लगा था। शायद माँ समझ गई थी कि मैं उन्हें चोदना चाहता हूँ।


उन्होंने कहा- चल छोड़ मुझको ! मैं तो बस मजाक कर रही थी !

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Re: मैं और मेरी मम्मी

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 16:54


शायद वो भी काफी दिनों से चुदासी थी इसलिए चुदवाना भी चाहती थी और उन्होंने मुझे पीछे से हटाकर अपनी छाती में समा लिया। मैं तो उनके वक्ष में खो ही गया था।


क्या स्तन थे उनके ! मन तो कर रहा था कि दबा कर सारा दूध निकल लूँ !


फिर वो बोली- चल, अब जा ! कपड़े बदल ले ! मैं भी नहा लूँ !


तब वो बाथरूम में चली गई।


मैं कहाँ मानने वाला था, उनके बाथरूम में जाने के बाद मैं उन्हें बाथरूम में देखने लगा दरवाज़े के छेद मैं से !


उन्होंने अपने धीरे-धीरे कपड़े उतारे। शायद उन्हें पता लग गया था कि मैं उन्हें छेद में से देख रहा हूँ और वो धीरे धीरे अपनी चूचियाँ दबाने लगी और सिसकारी भरने लगी- उह्ह्ह ह्म्म्मम्म ओह माय गोशह्ह्ह्ह आह्ह्ह अहा ओह्ह्ह और अपनी चूत में भी ऊँगली डालने लगी। वो यह सब कुछ मुझे दिखा रही थी जानबूझ कर !


और मैं भी बाहर खड़ा होकर अपना लंड दबा रहा था।


क्या आवाजें थी- हम्म ओह्ह्ह होऊस्स्स ओह माय गुड फक मी ....


मैं बाहर सब सुन रहा था पर कुछ नहीं बोला ! मन तो कर रहा था कि दरवाज़ा खोल कर अन्दर घुस जाऊँ !


पर मुझे लगा कि यह मेरा भ्रम भी तो होसकता है, शायद उन्होंने मुझे न देखा हो !


इतने में उन्होंने मुझे आवाज़ लगाई- अरे मेरे कपड़े तो बाहर ही रह गए ! जरा देना बेटा !


मैं घबरा गया और वहाँ से बाहर के कमरे में आ गया और डरते हुए पूछा- कहाँ हैं कपड़े?


वो बोली- वहीं पर मेज पर रखे हैं !


मैं बोला- ठीक है। लाता हूँ !


वहाँ पर उनकी लाल रंग की ब्रा और चड्डी के साथ लाल रंग का गाउन रखा हुआ था। मैंने उन्हें उठाया और उनकी ब्रा और चड्डी को सूंघने लगा। क्या खुशबू थी उनमें ! भीनी-भीनी सी चूत की ! मानो जन्नत !


और फिर माँ को देने के लिए बाथरूम की ओर जाने लगा कि तभी माँ जोर से चिल्लाई- क्या कर रहा है ? इतनी देर हो गई तुझे? कहाँ मर गया?


मैं बोला- ला तो रहा हूँ !


मैं जब बाथरूम के पास पहुँचा तो दरवाज़ा खुला हुआ था। मैं उन्हें कपड़े देने लगा, उन्होंने अपना हाथ बाहर निकाला और कपड़े ले लिए।


मेरा मन किया कि मैं भी घुस जाऊँ ! क्या पता बात बन ही जाये !


और दरवाजा खुला होने के कारण मैं भी बाथरूम में घुस गया। माँ को पता नहीं लगा क्योंकि उनका मुँह पीछे की तरफ था, वो ब्रा पहन रही थी। मैंने उन्हें पीछे से जाकर पकड़ लिए और उनके मम्मे दबाने लगा।


वो एकदम से घबरा गई और बोली- कौन है?


उन्होंने जैसे ही पीछे मुड़ कर देखा तो मुझे देख कर सबसे पहले उन्होने मुझे कस कर चांटा जड़ दिया और कहने लगी- क्या कर रहा था यह? तुझसे शर्म नहीं आती अपनी माँ के साथ ऐसा करते हुए? पर मैं तो मानो सब कुछ भूल ही गया था उस समय। मैं उनके उरोजों से चिपट गया और उन्हें चूसने लगा।
दरवाजा खुला होने के कारण मैं भी बाथरूम में घुस गया। माँ को पता नहीं लगा क्योंकि उनका मुँह पीछे की तरफ था, वो ब्रा पहन रही थी। मैंने उन्हें पीछे से जाकर पकड़ लिए और उनके मम्मे दबाने लगा।


वो एकदम से घबरा गई और बोली- कौन है?


उन्होंने जैसे ही पीछे मुड़ कर देखा तो मुझे देख कर सबसे पहले उन्होने मुझे कस कर चांटा जड़ दिया और कहने लगी- क्या कर रहा था यह? तुझसे शर्म नहीं आती अपनी माँ के साथ ऐसा करते हुए? पर मैं तो मानो सब कुछ भूल ही गया था उस समय। मैं उनके उरोजों से चिपट गया और उन्हें चूसने लगा।


इससे पहले कि वो मुझे कुछ कहती, मैंने उनकी चूत में ऊँगली डाल दी और घुमा दी।


और इसके बाद तो शायद माँ को भी लगा कि अब इसने इतना कुछ कर लिया है तो अब क्या रोकूँ इसे, क्योंकि वो भी तो सेक्स करने के लिए तड़प रही थी इतने दिनों से !


और माँ सिसकारी भरने लगी- उह्ह्ह ह़ा हाह आःह्ह्ह जालिम शर्म कर ! मैं तेरी माँ हूँ ! कम से कम मुझे तो बख्श दे ! शर्म कर थोड़ी !


तो मैंने कहा- माँ, आप बहुत सेक्सी हो ! मैं तो आपको कब से चोदने की फ़िराक में था ! आज मौका मिला है तो कैसे हाथ से जाने दूँ? आज मत रोको ! समा जाने दो मुझको तुम्हारे अन्दर ! नहीं तो मैं मर जाऊंगा माँ !


तो वो बोली- अच्छा ठीक है कम्बखत मारे ! अब तुझे क्या कहूँ? कुछ कहने लायक नहीं छोड़ा तूने तो ! जो करना है कर लेना ! पर अभी बाहर जा ! मैं कपड़े पहन कर बाहर आती हूँ ! कम से कम चैन से कपड़े तो पहन लेने दे। बाहर आने के बाद जो करना है, कर लेना।


मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कहा- नहीं पहले तो मैं आपको खूब चोदूंगा अभी !


और इतनी देर में मैंने अपना लौड़ा निकाल कर उनकी चूत पर लगा दिया।


वो एकदम से चिल्ला पड़ी- ऊई माऽऽऽ आऽऽ आ मार डाला जालिम !


जैसे ही मैंने उनकी चूत मैं लोडा डाला- उईऽऽ मांऽऽ मार डाला तूने तो ! अहह हूह्ह म्मम्म म्मम्म हह्म्म्म उह्ह्ह !


और मैं धीरे धीरे धक्के लगाने लगा क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स था तो मैं जल्दी झड़ने वाला था, मैंने माँ से कहा- माँ, मैं झड़ने वाला हूँ ! क्या करूँ?


वो बोली- निकाल दे अपना वीर्य मेरी चूत में ! बना दे मुझे अपने बच्चे की माँ !


और मैंने सारा वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया। अब मैं बिल्कुल शांत हो चुका था पर माँ के अन्दर चुदाई करने की तमन्ना जाग गई थी। माँ मुझे देख रही थी और कहने लगी- पड़ गई तुझे शांति? चोद लिया तूने साले अपनी माँ को ? चोदते समय शर्म नहीं आई? तूने तो अपनी आग तो बुझा ली अब मैं क्या करूँ साले? चल अब बाहर जा ! मुझे दोबारा नहाना पड़ेगा। सारा गन्दा कर दिया मुझे। अब क्या मुँह दिखाऊँगी मैं तेरे पापा को !


और मैं बाहर आ गया। कुछ देर बाद वो भी बाथरूम से बाहर आ गई और अपने कमरे में चली गई। तब तक मैं भी अपने कमरे में जा चुका था। करीब आधा घंटा हो चुका था इस बात को।


मैं भी काफी शर्म महसूस कर रहा था, तो मैंने सोचा कि क्यों न माँ को जाकर सॉरी कह दूँ !


मैं उनसे माफ़ी मांगने उनके कमरे की तरफ जाने लगा, पर जैसे ही मैं उनके कमरे में पहुँचा तो वो तो सज-धज कर खड़ी हुई थी बिल्कुल 18 साल की लड़की की तरह लग रहा थी। उनके बड़े बड़े स्तन मानो कह रहे थे- आओ और हमें खा जाओ !


उनका यह रूप देख कर लग रहा था जैसे कि आज मानो उनकी सुहागरात हो !


मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था। शायद माँ को चुदवाने की हुड़क चढ़ चुकी थी, वो कहने लगी- इधर आ ! मुझे तुझसे कुछ बात करनी है !


मैंने कहा- माँ सॉरी ! प्लीज पापा से मत कहना !


और मैं उनकी छाती से चिपट कर रोने का नाटक करने लगा। क्या खुशबू आ रही थी उनके वक्ष से !


तो उन्होंने मुझसे पूछा- बेटा जो हुआ उसे भूल जा ! और एक बात बता कि क्या मैं तुझे इतनी जवान लगती हूँ कि तुझे इतनी भी शर्म नहीं आई और तूने ऐसा कर दिया?


मैंने कहा- गलती हो गई माँ .....


वो बोली- चल ठीक है, कोई बात नहीं ! अच्छा एक बात बता, तू क्या फिर से मुझे चोदेगा?


मैंने कहा- नहीं !


तो वो बोली- चल पगले ! इतनी मेहनत से तैयार हुई हूँ मैं चुदने के लिए और तू मना कर रहा है ? तेरे लंड ने तो मेरी चूत में आग लगा दी है, अब इस आग को तो तू ही बुझाएगा मेरे राजा ! चोद डाल मुझे । फाड़ दे मेरी चूत ! निकाल दे आज सारी जलन मेरी चूत की !


और उन्होंने मुझे अपने वक्ष में दबा लिया और कहने लगी- पी ले सारा दूध इनका ! कुछ मत छोड़ इनमें ! समा जा मेरे अन्दर !


मैं भी मन ही मन खुश हो गया और कहने लगा- मेरा तो जैकपॉट लग गया है आज !


मेरी मुराद पूरी हो रही थी एक ही दिन में दो बार !