मेरी चार ममिया complet

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The Romantic
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Re: मेरी चार ममिया

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 07:21

मेरी चार मामियां --3

गतान्क से आगे...................................

कंगन अनिता के पास आई और इतनी ज़ोर से बोली कि हम तीनो को सुनाई

पड़ सके, "दीदी आप क्यों परेशान हो रही है, आराम से रहो हम

तीन ही तो है यहाँ." कहकर उसने अनिता की सारी का पल्लू हटा दिया

और उनके कंधों की मालिश करने लगी.

अनिता मामी के मुँह से हल्की कराह निकल गयी. कंगन ने उनकी

सारी को हटा दिया और ज़मीन पर गिर जाने दिया. अनिता मामी की दोनो

चुचियों मुझे सॉफ दीखाई दे रही थी. उनकी फूली फूली चूची

देख मन कर रहा था कि में भी उनके निपल को मुँह मे ले बच्ची

की तरह दूध पीने लगूँ.

कंगन मामी ने अनिता मामी के बाई माममे को अपने हाथ मे लिया और

मसल्ने लगी. अनिता मामी सिसक रही थी, "ओह्ह्ह्ह कंगन ओह्ह्ह प्लीज़

ऐसा मत करो......"

"क्यों दीदी क्या आपको अच्छा नही लग रहा....आप नही चाहती कि में

ऐसा करूँ." कंगन ने निपल को मसल्ते हुए पूछा.

"अच्छा तो बहोत लग रहा है कंगन....." अनिता धीरे से बोली.

"तो फिर हम सब दिल मे जो आएगा करेंगे...तुम्हे बहोत मज़ा आएगा

दीदी..." कंगन ने जोरों से निपल को मसल्ते हुए कहा.

कंगन मामी के शब्द सुनकर मैं चौंक उठा. हम का मतलब

था कि में भी. मेरे बदन मे सरसरी सी दौड़ गयी और मेरा लंड

शॉर्ट मे तंबू बनकर तन गया.

"राज थोड़ी मदद करो तो..." कंगन मामी ने बच्ची को अनिता की गोद से

उठाते हुए कहा.

मेने देखा कि बच्ची सो चुकी थी, मेने उसे कंगन के हाथों से

लिया और पालने मे सुला दिया.

अनिता ने मामी खड़ी होकर अपने ब्लाउस के बटन बंद किए और अपनी

सारी ठीक करने लगी.

"ऐसा करो तुम दोनो मेरे बेडरूम मे चलो में आती हूँ." कंगन ने

कहा.

हम दोनो उनके बेडरूम मे आए और कंगन हमारे पीछे आकर दरवाज़ा

अंदर से बंद कर दिया. कंगन अनिता के पास आई और उनकी सारी के

पल्लू को फिर ज़मीन पर गिरा दिया.

"कंगन क्या हमे ये सब करना चाहिए? मुझे तो बड़ी शरम आ रही

है."अनिता ने कहा.

"दीदी अब क्या हुआ.... आप ही कह रही थी कि आप राज के मजबूत

हाथों को अपने शरीर पर महसूस करना चाहती हो..." कंगन ने कहा.

"अनिता मामी क्या ये सच है." मेने सीधे अनिता को देखते हुए

पूछा.

"बोलो दीदी..... शरमाओ मत....आख़िर हम तीन ही तो हैं यहाँ

पर..." कंगन ने कहा.

"हां चाहती हूँ..... लेकिन...." अनिता ने शरम के मारे अपना

चेहरा हाथो मे छुपा लिया.

"फिर ठीक है.... डरो मत." कहकर कंगन अनिता के ब्लाउस के बटन

खोलने लगी. मेने भी अनिता के करीब आया और उनकी कमर को सहलाने

लगा. उनकी मुलायम और चिकनी त्वचा को छूते ही अनिता का बदन कांप

उठा.

कंगन ने अनिता का ब्लाउस खोल कर उतारा तो उनकी दोनो भारी भारी

चुचिया उछल कर बाहर को आ गयी. निपल मे दूध भरा होने के

कारण वो फूली फूली लग रही थी. दूध की बूंदे अभी निपल पर

दीखाई दे रही थी. कंगन ने एक निपल को ज़ोर से मसला तो दूध की

धार बाहर को निकल पड़ी.

बिना एक शब्द कहे कंगन ने झुक कर अपना मुँह अनिता की चुचि से

लगाया और दूध को पीने लगी. वो एक हाथ से एक चुचि को पकड़

चूस रही थी और दूसरे हाथ से दूसरी चुचि को मसल रही थी.

अनिता मामी के मुँह से सिसकारियाँ फूट रही थी...उन्हे भी मज़ा

आने लगा था.

अपनी दोनो ममियों को इस हालत मे देख, एक बिस्तर पर अध नंगी और

दूसरी उनकी चूची चूस रही थे... को देख मेरे लंड मे तनाव

बढ़ने लगा. कंगन को अनिता की चुचि चूस्ते देख मेरे गला

सूखने लगा, मेने झट से एक थूक का गोला अपने गले के नीचे

उतारा अपनी सूखे होठों पर अपनी जीब फिराने लगा. मुझसे रहा

नही गया और में अनिता के पास गयाऔर अपना हाथ उनके कंधो पर रख

दिया. अनिता ने मेरा हाथ कंधों पर से हटा अपनी बाई चुचि पर

रखा.

में उनकी चुचि को मसल्ने लगा. कंगन ने मुस्कुरा कर मेरी ओर

देखा और अनिता की चुचि को चूस्ति रही. अनिता मामी ने मुझे सामने

की तरफ खींचा और अपनी दूसरी चुचि चूसने का इशारा किया.

में भी उनके बगल मे बैठ उनकी चुचि चूसने लगा. अब में और

कंगन अनिता की चुचियों को इस तरह चूस रहे थे जैसे कि दो

पिल्ले किसी कुतिया के स्तनो को चूस्ते है.

गरम दूध की बूँदों से मेरा मुँह भर गया. वैसे तो बेस्वाद था

लेकिन जवानी मस्ती से भरपूर. करीब दस मिनिट तक में और कंगन

अनिता की चुचियों को चूस्ते रहे. थोड़ी देर मे दूध आना बंद हो

गया.

"दीदी क्या बात है आज दूध जल्दी ख़तम हो गया? लगता है कल

रात किसी और ने भी इन्हे चूसा है..." कंगन ने अनिता ने पूछा.

"तुम्हारे जेठ जी के अलावा किसी ने नही...." अनिता ने कहा.

कंगन अब अनिता की सारी और पेटिकोट को नीचे खिसकने लगी.

अनिता मामी हल्का सा विरोध करते बोली, "नही कंगन मत करो मुझे

बहोत शरम आ रही है."

लेकिन कंगन ने उनकी एक ना सुनी और उनकी सारी और पेटिकोट नीचे

खिसका उनके पैरों से अलग कर दिया. ओह्ह क्या गोरी और चिकनी टाँगे

थी अनिता की. टाँगो की बीच छुपा था प्यार का ख़ज़ाना हल्के बालों

से घिरा हुआ. कमरा एक अजीब मस्ती की महक से भर उठा.

कंगन ने अनिता की जाँघो को फैलाया और मुझे उनकी चूत के दर्शन

कराए. शरम के मारे अनिता ने अपनी आँखे बंद कर ली और अपना हाथ

आँखों पर रख दिया, उसी वक्त एक झटके मे कंगन ने मेरी शॉर्ट्स

नीचे कर उतार दी.

मेरे खड़े लंड को देख कंगन मुस्करा दी, "शैतान कहीं का."

वीर्य की बूँद शबनम के मोती की तरह मेरे लंड के सूपदे पर

जगमगा रही थी. कंगन ने मेरे लंड को पकड़ा और उसकी चमड़ी को

तोड़ा पीछे कर मसालने लगी. तभी अनिता मामी ने अपनी आँखे खोली

और मेरे खड़े लंड को देख सिसकारी भरने लगी. वो मस्ती में अपने

हाथों से अपनी चुचियाँ मसल रही थी.

"दीदी आप तय्यार हो ना...." कंगन ने पूछा.

"समझ मे नही आ रहा क्या कहूँ.... मुझे डर भी लग रहा है

फिर भी में ये सब करना चाहती हूँ.....देखो ना मेरे दिल की

धड़कन कितनी तेज हो गयी है..." अनिता ने कहा.

"ओह्ह्ह्ह... दीदी अब हिम्मत करके इसकी मदद करो....ये भी नया है इस

खेल मे...." कंगन ने अनिता को उकसाया.

"ठीक है..." अनिता ने कहा.

कंगन पलंग से हटकर साइड मे इस तरह खड़ी हो गयी कि हमारी

चुदाई को देख सके.

मेने देखा कि अनिता मामी की आँखो से डर गायब हो चुका था और

अब उन्माद की मस्ती भरी थी आँखों मे. वो खड़ी हुई और अपने परों

मे फँसी सारी और पेटिकोट को उतार दिया. अब मामी बिल्कुल नंगी मेरे

सामने खड़ी थी. मामी पलंग पर लेट गई और मुझे अपने पास बुलाया.

मेरे हाथो को अपनी चुचियों पर रख बोली, "चूसो राज और इन्हे

ज़ोर ज़ोर से मस्लो."

मेने आनी जीब उनकी चुचि पर रखी और अपने हाथों से मसल्ने

लगा. में अपनी जीब को उनकी निपल पर फिराता तो वो सिसक

पड़ती..."ऑश राज चूसो इन्हे ऐसे ही.... ओह हाआँ ....मस्लो और

ज़ोर से......"

अनिता मेरे होठों को चूस्ते हुए सिसक पड़ी, "मुझे प्यार करो राज"

मेने पहले अनिता के होठों को चूसा, फिर नीचे होते हुए उनकी

चुचियों को चूसा फिर उनके पेट को चूमते हुए अपनी जीब उनकी नाभि

मे घूमाने लगा तो वो सिसक पड़ी, "ऑश राज गुदगुदी होती है ना."

नीचे खिसकते हुए मेने उनकी कमर को चूमा और फिर उनकी प्यारी

चूत को चूमते हुए उनकी जांघों को चूमने लगा. जांघों के

अन्द्रुनि हिस्सों पर अपनी ज़ुबान घूमाते हुए में और नीचे खिसक

उनके पावं को चूमने लगा.

अनिता ने मुझे खींच कर अपने उपर लीटा लिया. मुझे जोरों से बाहों

मे भर उन्होने अपनी चुचियाँ मेरी छाती से मसल दी. में भी इस

तरह लेटा था कि मेरा खड़ा लंड उनकी चूत के मुँह पर ठोकर मार

रहा था.

अनिता ने अपनी टाँगो को थोड़ा फैलाया और मेरे चूताडो को भींचने

लगी. में अपने लंड को पकड़ उसकी चूत पर घिसने लगा.

अनिता ने मेरे लंड को पकड़ अपनी चूत की पंखुरियों को फैलाते हुए

लगा दिया, "अब सहन नही होता राज चोदो मुझे....घुसा दो अपने

लंड को इस मे..."

मेने एक ज़ोर का धक्का मारा तो मेरा लंड अनिता की चूत की दीवारों

को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर घुस गया.

"ओह............" एक कराह सी निकल पड़ी उसके मुँह से.

अब में अपनी कमर हिला धक्के मार रहा था. अनिता भी नीचे से

चूतड़ उछाल साथ दे रही थी. मामी की कराह और बड़बड़हत सुन

मुझे भी जोश आ रहा था.

"ओह अनिता मामी आपकी चूत तो काफ़ी गरम है ओह आअज फाड़

दूँगा में इस चूत को."

"हां राज ऐसे ही चोदो जब से कंगन तुम्हारे लंड की तारीफ़ की

थी में तरस रही थी इसके लिए....ऑश हाआँ फाड़ दो मेरे राजा

ऑश चोदो."

में अनिता मामी की चुचियों को कस कस मसल्ते हुए अपने लंड को

उनकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था.

मेने अपनी नज़र कंगन मामी पर डाली तो देखा कि वो अपनी आँख

बंद किए हुए थी. उन्होने अपनी सारी कमर तक उठा रखी थी. अपनी

चुचि को ब्लाउस से बाहर निकाल वो एक हाथ से मसल रही थी और

दूसरे हाथ से अपनी चूत मे तीन उंगली डाल अंदर बाहर कर रही

थी. हमारी दुनिया से दूर मामी अपनी सपनो की दुनिया मे खोई अपनी

मस्त गरम चूत को उंगलियों से चोद रही थी.

हम दोनो के बदन पसीने से लत पथ थे, में धक्के पर धक्के

मार रहा था और अनिता बड़बड़ा रही थी.

"ओह राजा चोदो ऑश हाआँ मेरा छूटने वाला है ऑश हाँ ज़ोर से

चोदो."

"हाआँ मामी मेरा भी छूटने वाला है ऑश में तो गया." मेने ज़ोर

का धक्का लगाते हुए अपने वीर्य की फौहर उनकी मादक चूत मे छोड़

दी.

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Re: मेरी चार ममिया

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 07:22

मामी भी झड़ने के करीब ही थी उन्होने अपनी कमर को उपर तक

उठाया और मेरे लंड को अपनी बच्चेदानि पर लेते हुए पानी छोड़ दिया.

में अनिता मामी के उपर ही लेट गया और हम दोनो अपनी उखड़ी सांसो

को काबू मे करने लगे.

तभी मेने देखा कि कंगन भी ओह्ह्ह अयाया करते अपनी उंगलियाँ और

जोरों से अंदर बाहर कर रही थी. उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया

था जो चूत के बाहर बहकर उसकी झटों को गीला कर रहा था.

इतने मे कंगन हमारे पास आई और अनिता की चुचियों को एक बार

फिर चूसने लगी.

"ओह्ह्ह... कंगन प्लीज़ फिर से नही..." अनिता हंसते हुए बोली.

पर कंगन ने उनकी बात सुनी नही और उनकी चुचियों को चूस्ति

रही. ये देख में भी उनकी चुचि को मुँह मे ले चूसने लगा. जब

उनकी चुचियो मे दूध ख़तम हो गया तो कंगन मामी उठ कर

बाथरूम चली गयी और में अनिता मामी से चिपक कर सो गया.

जब मेरी आँख खुली तो देखा कि अनिता और कंगन मेरे बगल मे ही

सोई पड़ी है. मेने धीरे से दोनो जायगा तो दोनो मुझे देख मुस्कुरा

पड़ी. अनिता मामी बाथरूम मे मुँह धोकर वापस आई तो दोनो अपने

अपने कपड़े पहनने लगे.

थोड़ी देर बाद हम सब ने मिलकर खाना खाया. खाना खाने के बात

जब कंगन मामी ने अनिता मामी को बताया कि किस तरह मेरा मन

चारों मामियों को चोद्ने का है तो अनिता मामी हंस पड़ी और बोली.

"राज तुम तो दो दिन मे ही पूरे चुदक्कड बन गये. लेकिन हां अगर

चारों साथ मे चुदवाएँगी तो मज़ा ज़रूर आयगा. दो को तुम चोद ही

चुके हो देखते है बाकी कि दो कैसे तय्यार होती है."

अब में कंगन मामी और अनिता मामी मिलकर प्लान बनाने लगे कि बाकी

दो मामियों को कैसे तय्यार किया जाए. पहले ये तय हुआ कि सिमरन

मामी को तय्यार किया जाए लेकिन उनके रिज़र्व नेचर को देखते हुए ये

तय हुआ कि मोना मामी को ही फँसाया जाय. मोना मामी सबसे छोटी थी.

अगला दिन शनिवार था और मेरे तीनो मामा सहर किसी खास काम से

चले गये. उनकी कोई ज़मीन थी जिसके सिलसिले मे वो किसी वकील से

मिलने गये थे.

कंगन मामी का मकान काफ़ी बड़ा था और उसकी छत भी काफ़ी बड़ी थी.

मोहल्ले का सबसे बड़ा मकान होने से किसी की भी नज़र उस छत पर

नही पड़ सकती थी. अनिता मामी ने सुझाव दिया कि क्यों ना छोटी सी

पार्टी छत पर ही मनाई जाए. शनिवार की रात को हम चारों कंगन

मामी की छत पर इकट्ठा हुआ. मोना मामी को हमारे प्लान के बारे मे

कुछ पता नही था.

हम चारों आपस मे बात करने लगे. पहले अनिता मामी मुझसे सवाल

करती गयी, जैसे कि मेरा कॉलेज कैसा था. में जिंदगी मे क्या

बनना चाहता हूँ, मेरी पसंद क्या क्या का है वग़ैरह वग़ैरह. ये

सब बातें करीब रात के 10 बजे तक चलती गई.

थोड़ी देर बाद बात चीत का विषय प्रेम ओर रोमॅन्स पर आ गया.

"अच्छा राज एक बात तो बताओ कॉलेज मे किसी लड़की को फँसा कि नही?"

कंगन मामी ने अचानक पूछा.

"कहाँ.... मामी... आपके भानजे की शकल कहाँ इतनी सुन्दर है कि

कोई लड़की उसे पसंद करे...." मेने हंसते हुए कहा.

"कौन कहता है कि मेरा प्यारा सा भांजा सुन्दर नही है....अगर में

उन लड़कियों की जगह होती तो कबका तुम्हे पटा चुका होती." कंगन

मामी ने कहा.

"बात तो तुम ठीक कहती हो छोटी..... मोना तुम्हारा क्या खाया है?"

अनिता मामी ने मोना मामी से पूछा.

"आप सही कह रही हैं दीदी..... राज देखने मे वाकई बहोत सुन्दर

और हॅंडसम है." मोना मामी ने कहा.

"अच्छा राज एक बताओ तुम्हारा सेक्स के बारे मे क्या ख़याल है?" अनिता

मामी ने पूछा.

"मामी आप भी ना.... कैसे सवाल करती है." मेने जान बुझ कर

अंजान बनते हुए कहा.

"अरे इसमे शरमाने वाली क्या बात है... बताओ ना अगर तुम्हे सेक्स

करने का मौका मिले तो तुम अपनी कौनसी कल्पना पूरी करना चाहोगे?'

कंगन मामी ने पूछा.

"नही पहले आप सब बताइए उसके बाद मे बताउन्गा.... लेकिन आप

तीनों को मेरे एक सवाल का उत्तर पहले देना होगा... पहले मे मोना

मामी से पूछता हूँ." मेने मोना मामी के तरफ देखते हुए कहा.

थोड़ी देर सोचने के बाद मोना मामी बोली, "ठीक है पूछो."

"मामी झूठ से काम नही चलेगा आप तीनो को सच सच बताना

होगा." मैने कहा.

"ठीक है हम सच सच बताएँगी." मोना मामी ने कहा.

"क्या शादी के पहले आपने सेक्स किया था?" मेने मोना मामी से पूछा.

मेरा प्रश्न सुनकर मामी सोच मे पड़ गयी.

"अरे घबरा क्यों रही है..... ठीक है तू बाद मे बताना मे ही पहले

बता देती हूँ जिससे तेरी शरम खुल जाए." अनिता मामी ने कहा. "भाई

मेने तो किया था.... हमारे घर के नौकर के साथ उसने ही पहली बार

मुझे चुदाई का मज़ा दिया था."

"वह दीदी आप तो बड़ी छुपी रुस्तम निकली....." मोना मामी ने कहा.

"चल अब अपनी भी तो बता....?" कंगन मामी ने पूछा.

"हां दीदी मेने भी किया है..... मेरे साथ कॉलेज मे एक लड़का

पढ़ता था उसके साथ.... में तो उससे शादी भी करना चाहती थी

लेकिन पिताजी ने मेरी शादी इस घर मे कर दी." मोना मामी ने बताया.

"चल कंगन अब तू बता." अनिता मामी ने कहा.

"सच कहूँ तो दीदी शादी के पहले मेने सेक्स का खूब मज़ा लिया

है...मुझे तो सेक्स इतना अच्छा लगता है कि क्या बताउ." कंगन मामी

ने कहा.

"चलो राज अब तुम बताओ कि तुम्हारी क्या कल्पना है?" अनिता मामी ने

पूछा.

"मामी मेरा तो मन करता है की में सेक्स सिर्फ़ अपने परिवार वालों के

साथ ही करूँ... चाहे वो कोई भी हो. रिश्ते मे कोई भी हो." मेने

कहा.

"वह मेरे राजा तो तुम घर की औरतों को चोद्ने की तमन्ना रखते

हो.... अगर हम मामियाँ तुम्हे चोद्ने दें तो तुम हमारी भी चुदाई

करोगे?" अनिता मामी ने हंसते हुए कहा.

"हां मामी, अंधे को क्या चाहिए दो आँखे वो तो आप दे ही देंगी..."

मेने भी हंसते हुए कहा, "अच्छा चलिए अब आप बताइए कि आपको क्या

पसंद है?' मेने पूछा.

"मेरा तो मन करता है कि में घर मे हर समय नंगी रहूं और जब

भी मौका मिले चुदाई करती रहूं." अनिता ने कहा.

फिर मेने कंगन मामी से पूछा तो उन्होने कहा कि उन्हे खुले आँगन

मे नंगा नहाना अच्छा लगता है. उन्होने बताया कि स्नान करते वक़्त या

चुदाई करते वक़्त अगर मुझे कोई चुप कर देख रहा होता है तो वो

और उत्तेजित हो जाती है.

"चलो मोना मामी अब आपको भी बताना होगा कि आपको क्या पसंद है....

चुप रहने से काम नही चलेगा." मेने कहा.

"मुझे शरम आती है......" मोना मामी ने अपना चेहरा अपने हाथों

से छुपा लिया.

"अरे क्यों शरमा रही है... बता ना..." कंगन मामी ने उसके पेट पर

चिकोटी काटते हुए कहा.

"दीदी.... मेरा तो मन करता है कि में खुली जगह पर चुदाई करूँ

जैसे कोई बाग या बगीचा हो या फिर कोई समुन्द्र का किनारा हो..."

मोना मामी ने कहा.

"अगर कोई खुली छत हो तो ....." अनिता मामी ने कहा.

"तब तो दीदी और मज़ा आ जाएगा.... चाँदनी रात और खुले आसमान

के नीचे चुदाई मे तो चार चाँद लग जाएँगे." मोना मामी ने कहा.

"ठीक है जब हम सब अपनी अपनी कल्पना बता ही चुके है तो क्यों ना

आज की रात हम सब अपनी कल्पना को हक़ीक़त का रूप दे दें." कंगन

मामी ने कहा.

"दीदी..... आप कहना क्या चाहती है....?" मोना मामी ने चौंकते हुए

कहा.

"में ये कहना चाहती हूँ क्यों ना हम सब आज अपने मन की तंमना पूरी

कर लें... क्यों राज अगर हम तीनो हन कहें तो क्या तुम हमारी

चुदाई करना चाओगे...?" कंगन मामी ने कहा.

"भला में क्यों ना करूँगा....." मेने मुस्कुराते हुए कहा.

"आप दीदी क्या आप तय्यार है?" कंगन मामी ने अनिता मामी से पूछा.

"हां मैं तो तय्यार हूँ...." अनिता मामी ने कहा.

मेने देखा कि कंगन मामी और अनिता मामी ने ऐसे हालत तय्यार कर

मोना मामी को अपने जाल मे फँसा लिया था..."तुम क्या कहती हो मोना?'

कंगन मामी ने पूछा.


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Re: मेरी चार ममिया

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 07:23

3

Kangan Anita ke paas aayi aur itni jor se boli ki hum teeno ko sunai

pad sake, "didi aap kyon pareshan ho rahi hai, arram se raho hum

teen hi to hai yahan." kehkar usne Anita ki saree ka pallu hata diya

aur unke kandhon ki maalish karne lagi.

Anita mami ke munh se halki karah nikal gayi. Kangan ne unki

saree ko hata diya aur jameen par gir jane diya. Anita mami ke dono

chuchiyon mujhe saaf deekhai de rahi thi. Unki fuli fuli choochi

dekh man kar raha tha ki mein bhi unke nipple ko munh me le bacchi

ki tarah doodh peene lagun.

Kangan mami ne Anita maami ke bayi mame ko apne hath me liya aur

masalne lagi. Anita maammi sisak rahi thi, "ohhhh kangan ohhh please

aisa mat karo......"

"Kyon didi kya aapko accha nahi lag raha....aap nahi chahti ki mein

aisa karoon." Kangan ne nipple ko masalte hue pucha.

"Accha to bahot lag raha hai Kangan....." Anita dheere se boli.

"To phir hum sab dil me jo aayega karenge...tumhe bahot maza aayega

didi..." Kangan ne joron se nipple ko masalte hue kaha.

Kangan ke maami ke shabd hum sunkar me chuank utha. Hum ka matlab

tha ki mein bhi. Mere badan me sarsari si daud gayi aur mera lund

short me tambu bankar tan gaya.

"Raj thodi madad karo to..." Kangan mami ne bachi ko Anita ki god se

uthate hue kaha.

Meine dekha ki bachi so chuki thi, meine use Kangan ke hathon se

liya aur palne me sula diya.

Anita mamai khadi hokar apne blouse ke button band kiye aur apni

saree thik karne lagi.

"Aisa karo tum dono mere bedroom me chalo mein aati hun." Kangan ne

kaha.

Hum dono unke bedroom me aaye aur Kangan hamare peeche aakar darwaza

andar se band kar diya. Kangan Anita ke paas ayi aur unki saree ke

pallu ko phir jameen par gira diya.

"Kangan kya hame ye sab karna chahiye? mujhe to badi sharam aa rahi

hai."Anita ne kaha.

"Didi ab kya hua.... aap hi keh rahi thi ki aap Raj ke majboot

hathon ko apne sharir par mehsus karna chahti ho..." Kangan ne kaha.

"Anita mami kya ye sach hai." meine seedhe Anita ko dekhte hue

pucha.

"Bolo didi..... shramao mat....aakhir hum teen hi to hain yahan

par..." Kangan ne kaha.

"Haan chahti hoon..... lekin...." Anita ne sharam ke mare apna

chehra hahton me chupa liya.

"Fir thik hai.... daro mat." kehkar kangan Anita ke blouse ke button

kholne lagi. Meine bhi Anita ke kareeb aya aur unki kamar ko sehlane

laga. Unki mulayam aur chikni twacha ko chute hi Anita ka badan kanp

utha.

Kangan ne Anita ka blouse khol kar utara to unki dono bhari bhari

chuchiyoan uchal kar bahar ko aa gayi. Nipple me doodh bhara hone ke

karan wo phuli phuli lag rahi thi. Doodh ki boonde abhi nipple par

deekhai de rahi thi. Kangan ne ek nipple ko jor se masla to doodh ki

dhar bahar ko nikal padi.

Bina ek shabd kahe Kangan ne juhk kar apna munh Anita ki chuchi se

lagaya aur doodh ko peene lagi. Wo ek hath se ek chuchi ko pakad

choos rahi thi aur doosre hath se doosri chuchi ko masal rahi thi.

Anita maami ke munh se siskariyan phoot rahi thi...unhe bhi mazaa

ane laga tha.

Apni dono mamiyon ko is halat me dekh, ek bistar par adh nangi aur

doosri unki choochi choos rahi the... ko dekh mere lund me tanav

badhne laga. Kangan ko Anita ki chuchi chooste dekh mere gala

sookhne laga, meine jhat se ek thook ka gola apne gale ke neeche

utara apni sukhe hothon par apni jeeb phirane laga. Mujhese raha

nahi gaya aur mein Anita ke paas aur apna hath unke kandho par rakh

diya. Anita ne mera hath kandhon par se hata apni bayi chuchi par

rakha.

Mein unki chuchi ko masalne laga. Kangan ne muskura kar meri aur

dekha aur Anita ki chuchi ko choosti rahi. Anita mami ne mujhe samne

ki taraf kheencha aur apni doosri chuchi choosne ka ishaara kiya.

Mein bhi unke bagal me baith unki chuchi chosne laga. Ab mein aur

kangan Anita ki chuchiyon ko is tarah choos rahe the jaise ki do

pille kisi kutiya ke stano ko chooste hai.

Garam doodh ki boondon se mera munh bhar gaya. Waise to beswad tha

lekin jawani masti se bharpur. Kareeb dus minute tak mein aur Kangan

Anita ki chuchiyon ko chooste rahe. Thodi der me doodh aana band ho

gaya.

"Didi kya baat hai aaj doodh jaldi khatam ho gaya? lagata hai kal

raat kisi aur ne bhi inhe choosa hai..." Kangan ne Anita ne pucha.

"Tumhare jethji ke alawa kisi ne nahi...." Anita ne kaha.

Kangan ab Anita ki saree aur peticoat ko neeche khiskane lagi.

Anita mami halka sa virodh karte boli, "Nahi Kangan mat karo mujhe

bahot sharam aa rahi hai."

Lekin Kangan ne unki ek na suni aur unki saree aur peticoat neeche

khiska unke pairon se alag kar diya. Ohh kya gori aur chikni tange

thi Anita ki. Tango ki beech chupa tha pyaar ka khazana halke baalon

se ghira hua. Kamra ek ajeeb masti ki mehak se bhar utha.

Kangan ne Anita ki jangho ko failaya aur mujhe unki choot ke darshan

karaye. Sharam ke mare Anita ne apni ankhe band kar li aur apna hath

ankhon par rakh diya, usi wakt ek jhatke me Kangan ne meri shorts

neeche kar uttar di.

Mere khade lund ko dekh Kangan muskara di, "Shaitan kahin ka."

Viraya ki boond shabnam ke moti ki tarah mere lund ke supade par

jagamaga rahi thi. Kangan ne mere lund ko pakda aur uski chamdi ko

thoda peeche kar masalne lagi. Tabhi Anita mami ne apni aankhe kholi

aur mere khade lund ko dekh siskari bharne lagi. Wo masti mein apne

hathon se apni chuchiyan masal rahi thi.

"Didi aap tayyar ho na...." Kangan ne pucha.

"Samajh me nahi aa raha kya kahun.... mujhe dar bhi lag raha hai

phir bhi mein ye sab karna chahti hoon.....dekho na mere dil ki

dhadkan kitni tej ho gayi hai..." Anita ne kaha.

"Ohhhh... didi ab himmat karke iski madad karo....ye bhi naya hai is

khel me...." Kangan ne Anita ko uksaya.

"Thik hai..." Anita ne kaha.

Kangan palang se hatkar side me is tarah khadi ho gayi ki hamari

chudai ko dekh sake.

Meine dekha ki Anita maami ki anakhon se dar gayab ho chuka tha aur

ab unmad ki masti bhari thi ankhon me. Wo khadi hui aur apne paron

me fansi saree aur peticoat ko uttar diya. Ab mami bilkul nangi mere

samne khadi thi. Mami palang par let gai aur mujhe apne pas bulaaya.

Mere hahton ko apni chuchiyon par rakh boli, "Choooso Raj aur inhoe

jor jor se maslo."

Meine ani jeeb unki chuchi par rakhi aur apne hathon se masalne

laga. Mein apni jeeb ko unki nipple par firata to wo sisak

padti..."OHHH RAJ CHOOOSO INHE AISE HI.... OHHHH HAAAN ....MASLO AUR

JOR SE......"

Anita mere hothon ko chooste hue sisak padi, "Mujhe pyaar karo Raj"

Meine pehle Anita ke hothon ko choosa, fir neeche hote hue unki

chuchiyon ko choosa fir unke pet ko choomte hue apni jeeb unki nabhi

me ghoomane laga to wo sisak padi, "OHHH RAJ GUDGUDI HOTI HAI NA."

Neeche khisakte hue meine unki kamar ko chooma aur hir unki pyaari

choot ko choomte hue unki janghon ko choomne laga. Janghon ke

andruni hisson par apni juban ghoomate hue mein aur neeche kihsak

uki paon ko choomne laga.

Anita ne mujhe khinch kar apne upar leeta liya. Mujhe joron se bahon

me bhar unhone apni chuchiyan meri chati se masal di. Mein bhi is

tarah leta tha ki mera khada lund unki choot ke munh par thokar mar

raha tha.

Anita ne apni tango ko thoda failaya aur mere chootadon ko bheenchne

lagi. Meine apne lund ko pakad uski choot par ghisne laga.

Anita ne mere lund ko pakad apni choot ki pankhuriyon ko failate hue

laga diya, "AB SEHAN NAHI HOTA RAJ CHOODO MUJHE....GHUSA DO APNE

LUND KO IS ME..."

Meine ek jor ka dhakka mara to mera lund Anita ki choot ki deewaron

ko chirta hua pura ka pura andar ghus gaya.

"OHHHHHHH............" Ek karah si nikal padi uske munh se.

Ab mein apni kamar hila dhakke mar raha tha. Anita bhi neeche se

chootad uchal saat de rahi thi. Mami ki karah aur badbadaht sun

mujhe bhi josh aa raha tha.

"OHHHH ANITA MAAMI AAPKI CHOOT TO KAFI GARAM HAI OHHHH AAAJ PHAD

DUNGA MEIN IS CHOOT KO."

"HAAN RAAAJ AISE HI CHOOODO JAB SE KANGAN TUMHARE LUND KI TAREEEF KI

THI MEIN TARAS RAHI THI ISKE LIYE....OHHH HAAAN PHAAAD DO MERE RAJA

OHHH CHOODO."

Mein Anita maami ki chuchiyon ko kas kas masalte hue apne lund ko

unki choot ke andar bahar kar raha tha.

Meine apni nazar Kangan maami par daali to dekh ki wo apni aankh

band kiye hue thi. Unhone apni saree kamar tak utha rakhi thi. Apni

chuchi ko blouse se bahar nikal wo ek hath se masal rahi thi aur

doosre hath se apni choot me teen ungli daal andar bahar kar rahi

thi. Hamare duniyon se door maami apni sapno ki duniya me khoyi apni

mast garam choot ko ungliyon se chod rahi thi.

Hum dono ke badan paseene se lath path the, mein dhakke par dhakke

mar raha tha aur Anita badabada rahi thi.

"OH RAJA CHOODO OHHHH HAAAN MERA CHOOTNE WALA HAI OHHHH HAN JOR SE

CHOODO."

"HAAAN MAAMI MERA BHI CHOOTNE WALA HAI OHHH MEIN TO GAYA." Meine jor

ka dhakka lagate hue apne virya ki fauhar unki madak choot me chod

di.

Maami bhi jhadne ke kareed hi thi unhone apni kamar ko upar tak

uthaya aur mere lund ko apni bachedani par lete hue pani chod diya.

Mein Anita maami ke upar hi let gaya aur hum dono apni ukhdi sanso

ko kabu me karne lage.

Tabhi meine dekha ki Kangan bhi ohhh aaaah karte apni ungliyan aur

joron se andar bahar kar rahi thi. Uski choot ne bhi pani chod diya

tha jo choot ke bahar behkar uski jhaton ko geela kar raha tha.

Itne me Kangan hamare paas aayi aur Anita ki chuchiyon ko ek bar

phir choosne lagi.

"Ohhh... Kangan please fir se nahi..." Anita hanste hue boli.

Par kangan ne unki baat suni nahi aur unki chuchiyon ko choosti

rahi. Ye dekh mein bhi unki chuchi ko munh me le choosne laga. Jab

unki chuchyion me doodh khatam ho gaya to Kangan mami uth kar

bathroom chali gayi aur mein Anita maami se chipak kar so gaya.

Jab meri aankh khuli to dekha ki Anita aur Kangan mere bagal me hi

soyi padi hai. Meine dheere se dono jayga to dono mujhe dekh muskura

padi. Anita maami bathroom me munh dohokar wapas aayi to dono apne

apne kapde pehanne lage.

Thodi der baad hum sab ne milkar khana khaya. Khana khane ke baat

jab Kangan maami ne Anita maami ko bataya ki kis tarah mera man

charon maamiyon ko chodne ka hai to Anita maami hans padi aur boli.

"Raj tum to do din me hi pure chuddakad ban gaye. lekin haan agar

charon sath me chudwaingi to mazaa jaroor aayga. Do ko tum chod hi

chuke ho dekhte hai baki ki do kaise tayyar hoti hai."

Ab mein Kangan maami aur Anita maami milkar plan banane lage ki baki

do maamiyon ko kaise tayyar kiya jaye. Pehle ye tay hua ki Simran

Maami ko tayyar kiya jaye lekin unke reserve nature ko dekhte hue ye

tay hua ki Mona maami ko hi phansaya jay. Mona maami sabse choti thi.

Agla din shanivar tha aur mere teeno maama sehar kisi khas kaam se

chale gaye. Unki koi jameen thi jiske silsile me wo kisi vakil se

milne gaye the.

Kangan maami ka makan kafi bada tha aur uski chat bhi kafi badi thi.

Mohaale ka sabse bada makan hone se kisi ki bhi nazar us chat par

nahi pad sakti thi. Anita maami ne sujhav diya ki kyon na choti si

party chat par hi manayi jaye. Shanivar ki raat ko hum charon Kangan

maami ki chat par ikattha hua. Mona maai ko hamare plan ke bare me

kuch pata nahi tha.

Hum charon aapas me baat karne lage. Pehle Anita maami mujhse sawal

karti gayi, jaise ki mera college kaisa tha. Mein jindagi me kya

banna chahta hun, meri pasand kya kya ka hai vagairah vagairah. Ye

sab baatein kareeb raat ke 10 baje tak chalti gai.

Thodi der baad baat chit ka vishay prem or romance par aa gaya.

"Aacha Raj ek baat to batao college me kisi ladki ko phansa ki nahi?"

Kangan maami ne achanak pucha.

"Kahan.... mami... aapke bhanje ki shakal kahan itni sunder hai ki

koi ladki use pasand kare...." meine hanste hue kaha.

"Kaun kehta hai ki mera pyaara sa bhanja sunder nahi hai....agar mein

un ladkiyon ki jagay hoti to kabka tumhe pata chuka hoti." Kangan

mami ne kaha.

"Baati tum thik kehti ho choti..... Mona tumhara kya khaya hai?"

Anita mami ne Mona maami se pucha.

"Aap sahi keh rahi hain didi..... Raj dekhne me wakai bahot sunder

aur handsome hai." Mona mami ne kaha.

"Accha Raj ek batao tumhara sex ke bare me kya khayal hai?" Anita

maami ne pucha.

"Maami aap bhi naa.... kaise sawal karti hai." Meine jaan bujh kar

anjaan bante hue kaha.

"Are isme sharmane wali kya baat hai... batao na agar tumhe sex

karne ka mauk mile to tum apni kaunse kalapan puri karna chahoge?'

Kangan maami ne pucha.

"Nahi pehle aap sab bataiye uske baad me bataunga.... lekin aap

teenon ko mere ek sawal ka uttar pehle dena hoga... pehle me Mona

maami se puchata hun." meine Mona maami ke taraf dekhte hue kaha.

Thodi der sochne ke bad Mona maami boli, "Thik hai pucho."

"Maami jhooth se kaam nahi chalega aap teeno ko sach sach batana

hoga." miene kaha.

"Thik hai hum sach sach batayengi." Mona mami ne kaha.

"Kya shaadi ke pehle aapne sex kiya tha?" meine Mona maami se pucha.

Mera prashna sunkar mami soch me pad gayi.

"Are ghabra kyon rahi hai..... thik hai tu baad me batana me hi pehle

bata deti hun jisse teri sharam khul jaye." Anita mami ne kaha. "Bhai

meine to kiya tha.... hamare ghar ke naukar ke sath usne hi pehli bar

mujhe chudai ka mazaa diya tha."

"Wah didi aap to badi chupi rustam nikali....." Mona mami ne kaha.

"Chal ab apni bhi to bata....?" Kangan mami ne pucha.

"Haan didi meine bhi kiya hai..... mere sath college me ek ladka

padhta tha uske sath.... mein to usse shaadi bhi karna chahti thi

lekin pitaji ne meri shaadi is ghar me kar di." Mona maami ne bataya.

"Chal Kangan ab tu bata." Anita maami ne kaha.

"Sach kahun to didi shadi ke pehle meine sex ka khoob mazaa liya

hai...mujhe to sex itna accha lagta hai ki kya bataun." Kangan mami

ne kaha.

"Chalo Raj ab tum batao ki tumhari kya kalpana hai?" Anita maami ne

pucha.

"Maami mera to man karta hai ki mein sex sirf apne parivar walon ke

sath hi karun... chahe wo koi bhi ho. rishte me koi bhi ho." meine

kaha.

"Wah mere raja to tum ghar ki aurton ko chodne ki tammanna rakhte

ho.... agar hum maaamiyan tumhe chodne dein to tum hamari bhi chudai

karoge?" Anita maami ne hanste hue kaha.

"Haan maami, andhe ko kya chahiye do aankhe wo to aap de hi dengi..."

meine bhi hanste hue kaha, "acha chaliye ab aap bataiye ki aapko kya

pasand hai?' meine pucha.

"Mera to man karta hai ki mein ghar me har samay nangi rahun aur jab

bhi mauka mile chudai karti rahun." Anita ne kaha.

Phir meine Kangan maami se pucha to unhone kaha ki unhe khule aangan

me nanga nahana accha lagta hai. Unhone bataya ki snan karte waqt ya

chudai karte waqt agar mujhe koi chup kar dekh raha hota hai to wo

aur uttejit ho jati hai.

"Chalo Mona mami ab aapko bhi batana hoga ki aapko kya pasand hai....

chup rehne se kaam nahi chalega." meine kaha.

"Mujhe sharam aati hai......" Mona maami ne apna chehra apne hathon

se chupa liya.

"Are kyon shrama rahi hai... bata na..." Kangan mami ne uske pet par

chikoti katte hue kaha.

"Didi.... mera to man karta hai ki mein khuli jagah par chudai karun

jaise koi baagh ya bageecha ho ya phir koi samundra ka kinara ho..."

Mona maami ne kaha.

"Agar koi khuli chat ho to ....." Anita mami ne kaha.

"Tab to did aur maza aa jayega.... chandni raat aur khule aasman

ke neeche chudai me to char chand lag jayenge." Mona maami ne kaha.

"Thik hai jab hum sab apni apni kalpana bata hi chuke hai to kyon na

aaj ki raat hum sab apni kalpana ko haqiqat ka roop de den." Kangan

maami ne kaha.

"Didi..... aap kehna kya chahti hai....?" Mona maami ne chaunkte hue

kaha.

"Mein ye kehna chahti hun kyon na hum sab aaj apne man ki tammna puri

kar len... kyon Raj agar hum teeno haan kahen to kya tum hamari

chudai karna chaoge...?" Kangan maami ne kaha.

"Bhala mein kyon naa karunga....." meine muskurate hue kaha.

"Aap did kya aap tayyar hai?" Kangan maami ne Anita maami se pucha.

"Haan me to tayyar hun...." Anita mami ne kaha.

Meine dekha ki Kangan mami aur Anita maami ne aise halat tayyar kar

Mona maami ko apne jaal me phansa liya tha..."tum kya kehti ho Mona?'

Kangan maami ne pucha.

kramashah.....................

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