Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 14 Dec 2014 06:10

जाल पार्ट--31

गतान्क से आगे.

उसके नखुनो की चुभन से आहत हो उसने उसके हसीन चेहरे पे हाथ फिराते हुए उसके मुँह मे अपनी ज़ुबान घुसा दी जिसे रंभा ने शिद्दत से चूसा.विजयंत ने कुच्छ देर बाद होंठ अलग किए & वैसे ही लंड उसकी चूत पे घुमाया तो रंभा ने आह भरी.विजयंत के हाथ उसकी चूचियो से लगे तो रंभा ने कंधे दीवार से लगा सीना & आगे कर दिया.विजयंत ने उन्हे दबाया & फिर सीधा खड़ा हो गया.ससुर के जिस्म के नशे मे चूर रंभा दीवार से हटी & उसे बाहो मे भर चूम लिया & फिर उसके होंठो को छ्चोड़ नीचे उसके सीने पे आ गयी & धीरे-2 काटने लगी.

विजयंत ने आँखे बंद कर सर पीछे फेंका & आह भरी & फिर तुरंत रीता को गर्दन घुमा के देखा.बिस्तर उन दोनो से काफ़ी दूर था & शायद यही वजह थी कि वो बीवी की मौजूदगी मे बहू का लुत्फ़ उठाने मे कामयाब हो रहा था.रंभा उसके निपल्स को दांतो से छेड़ने के बाद धीमे-2 काटते हुए नीचे आई & उसकी बालो से ढँकी नाभि मे जीभ फिराई.उस वक़्त विजयंत ने बड़ी मुश्किल से अपने लंड को पिचकारी छ्चोड़ने से रोका.

रंभा नीचे आई & अपने गालो पे उसके प्रेकुं से गीले तगड़े लंड को रगड़ा & फिर अपने मुँह मे भर लिया.विजयंत आँखे बंद कर दीवार पे बाया हाथ टीका के आगे झुकता हुआ खड़ा हो गया & डाए हाथ से रंभा की चिकनी पीठ सहलाने लगा.रंभा की ज़ुबान उसके लंड को पागल किए जा रही थी.काफ़ी देर तक वो लंड & उसके नीचे लटक रहे आंडो को जिनपे से विजयंत ने बाल साफ कर रखे थे,चाटती रही & फिर जब उसने मुँह हटा के हाथ उपर ले जा उसकी छाती के बालो मे फिराए तो विजयंत ने उन्हे पकड़ उसे उपर उठाया & बाहो मे भर चूम लिया.

दीवार से सटी उसकी गर्दन को थामे रंभा ने उसके मुँह को अपनी चूचियो से चिपका लिया तो विजयंत नीचे झुका & उसकी जाँघो को हाथो मे थामते हुए लंड को उसकी चूत मे धकेला.

"आईई..!",रंभा के चेहरे पे दर्द की लकीरें खींची लेकिन वो ससुर से बिल्कुल चिपक गयी.उसके घुटनो के पास से उसकी जाँघो को थाम उसे गोद मे उठा विजयंत उसकी चुदाई करने लगा.रंभा को अब कुच्छ होश नही था.ससुर का तगड़ा लंड उसे वही बेजोड़ जिस्मानी मज़ा दे रहा था जिसकी उसे हमेशा ख्वाहिश रहती थी.विजयंत ने दाया हाथ जाँघ से हटाया & उसकी गंद की बाई फाँक को दबोच लिया & उच्छल-2 के उसे चोदने लगा.रंभा ऐसे कभी नही चुदी थी.उसने शादी के पहले ही जिस्मानी रिश्ते कायम किए थे 1 मर्द के साथ.उसके बाद और मर्द आए,1 साथ 2 मर्दो से भी चुदी लेकिन इस तरह से 1 ही मर्द के साथ उसकी सोती बीवी की मौजूदगी मे उसकी गोद मे खड़े होके चुदाई करना!..इसने तो उसे रोमांच से भर दिया था.

विजयंत का दिल उसके सीने की लुभावनी गोलाईयो को चूमने का हुआ & वॉसर नीचे झुकने लगा लेकिन रंभा को थामे रहने के लिए उसे आगे की ओर झुकना पड़ा.रंभा पीछे झुक गयी थी & विजयंत उसकी चूचियाँ चूस्ते हुए,उसे थामे चोद रहा था.विजयंत को कोई तकलीफ़ होती नही दिख रही थी.रंभा तो उसकी मर्दानगी की मुरीद हो गयी!समीर की गुमशुदगी मे उसका हाथ हो या ना हो लेकिन वो जिस्मो के खेल का कमाल का खिलाड़ी था!

उसे उसी तरह झूलते हुए उसने तब तक चोदा जब तक उसकी चूत ने उसके लंड को जाकड़,सिकुड़ते-फैलते हुए उसके झड़ने का एलन ना कर दिया.विजयंत उसे गोद मे उठाए घुमा & अपने बिस्तर के पास चला गया.विजयंत ने जिस्मो का खेल ना जाने कितनी औरतों के साथ,कितने तरीके से खेला था लेकिन इस तरह से बीवी की मौजूदगी मे किसी और को-वो भी अपनी बहू को चोदना,उसके लिए भी बिल्कुल अनूठा तजुर्बा था!

"उधर कहा जा रहे हैं,डॅडी?",रंभा ससुर से चिपटि उसके गले बाहे कसे,उसके बाए कान मे फुसफुसाई.विजयंत ने कुच्छ जवाब नही दिया & पलंग के उस तरफ आ गया जिधर रीता सो रही थी.रीता करवट पे थी & उसकी नंगी पीठ उनकी तरफ थी.विजयंत ने वही पलंग के बगल मे फर्श पे बिछे गाळीचे पे अपनी बहू को बिना उसकी चूत से लंड निकाले लिटाया & घुटनो पे बैठ उसकी कमर को थाम उसकी गंद को गाळीचे से उठा धक्के लगाने लगा.रंभा कालीन के धागो को नोचती सर दाए-बाए झटकते हुए मस्ती मे झूमने लगी.उसकी निगाह जब उपर पलंग पे सो रही अपनी सास पे पड़ती तो वो & रोमांच से भर उठती.

विजयंत उसके पेट को दबाते हुए & उसकी चूचियो को मसल्ते तब तक उसे चोद्ता रहा जब तक उसने कमर उचकानी नही शुरू कर दी.रंभा ने पीछे सर के उपर गाळीचे पे हाथ टीका के ज़ोरोसे कमर उचकानी शुरू कर दी थी & उसका चेहरा मस्ती की शिद्दत से बिल्कुल सख़्त सा दिख रहा था.विजयंत ने फ़ौरन टाँगे फैलाते हुए उसकी चूत को नीचे गाळीचे पे दबाया & हाथ आगे गाळीचे पे टिका उसके उपर झुक के धक्के लगाने लगा.रंभा की चूत ने फिर से उसके लंड पे अपनी जानी-पहचानी हरकत शुरू कर दी थी.विजयंत उसके उपर लेट गया तो रंभा ने अपनी टाँगे उसकी जाँघो के पिच्छले हिस्सो पे फँसा दी.

विजयंत ज़ोरदार धक्के लगा रहा था & रंभा की कोख पे चोट पे चोट किए जा रहा था.रंभा के लिए अब आहें रोकना नामुमकिन था.जिस्म मे ऐसा मज़ा पैदा हो & उसका इज़हार ना कर पाए,अब हर रोज़ तो ये करना उसके लिए मुश्किल था.विजयंत ने फ़ौरन बिस्तर के किनारे से 1 कुशन खींचा & उसके मुँह पे रख दिया.दोनो अभी भी बीच-2 मे रीता को देख रहे थे जोकि सो रही थी.

रंभा ने कुशन को मुँह पे दबा लिया & आहो का शोर उसमे दफ़्न करने लगी.विजयंत उसके उपर लेट गया था & उसका बालो भरा सीना उसकी चूचियो को पीस रहा था.कुच्छ धक्को के बाद जब उसने महसूस किया कि अब रंभा बहुत शिद्दत के साथ कमर हिला रही है & आहें कुशन के बाब्जूद बाहर आ सकती हैं तो उसने कुच्छ तेज़ धक्के & लगाए & उसकी चूत की कसक को शांत किया.रंभा झड़ी & कुशन मुँह से हटा के फेंका & उचकते हुए अपने ससुर की गर्दन पकड़ के उसके दाए कंधे मे मुँह घुसा के अपना दाँत गढ़ा दिए.विजयंत को उसकी इस हरकत से दर्द हुआ पर साथ ही मज़ा भी आया & उसने उसकी चूत मे अपना रस छ्चोड़ दिया.दोनो 1 दूसरे से लिपटे साथ झाड़ते रहे.

कुच्छ देर बाद जब तूफान पूरी तरह से थम गया तो विजयंत ने अपनी बहू को गोद मे उठाया & उसके कमरे मे ले गया & उसके बिस्तर पे बाहो मे भरके तब तक लेटा रहा,जब तक की वो नींद के आगोश मे नही चली गयी.

विजयंत मेहरा ने रंभा के साथ समीर की तलाश शुरू कर दी थी.डेवाले मे 1 रात बिता दोनो अगली सुबह पंचमहल पहुँचे.जब तक रंभा ने अपना समान पॅक किया विजयंत ने समीर के दफ़तर का जायज़ा लिया.मीडीया वालो के लिए इस खबर मे अब वो मज़ा नही रहा था क्यूकी पहले दिन से लेके अभी तक मे कुच्छ मसालेदार नही घटा था लेकिन फिर भी आख़िर बात इतने बड़े आदमी के बेटे के लापता होने की थी.वो रंभा या विजयंत से बात करने की फिराक़ मे लगे ही रहते थे.

रंभा ने अपना समान पॅक किया & अपनी कार मे डलवाया & सीधा होटेल वाय्लेट पहुँची.विजयंत अपनी प्राडो मे पहले से ही उसका इंतेज़ार कर रहा था.रंभा उसकी कार मे बैठी & दोनो निकल पड़े.

पोलीस अपना काम मुस्तैदी से कर रही थी.1 हाइ-प्रोफाइल केस मे कुच्छ गड़बड़ी ना हो जाए इसलिए वो पूरी सावधानी बरत रहे थे.विजयंत ने 1 बार भी पंचमहल पोलीस महकमे पे अपने रसुख का इस्तेमाल कर कोई दबाव नही डाला था.उसकी पहुँच कितनी उपर तक थी ये सभी जानते थे & इस बात को जताने की उसे कोई ज़रूरत नही थी.उसने पंचमहल के पोलीस कमिशनर से बस 1 बार मुलाकात की थी.उपर से राज्य का होम मिनिस्टर,सीएम यहा तक की सेंट्रल गवर्नमेंट के मंत्रियो,जिनमे से किसी से विजयंत ने 1 बार भी इस सिलिसिले मे बात नही की थी,खुद ही पोलीस से लगभग हर रोज़ केस के बारे मे पुच्छ रहे थे.

विजयंत बेटे के लिए कोई शोर नही मचा रहा था इसका मतलब ये नही था कि वो कुच्छ सोच नही रहा था.उसने इरादा पक्का कर लिया था कि अगर उसके बेटे को कोई तकलीफ़ पहुँचा रहा है तो वो उसे अपने हाथो से सज़ा देगा.

रंभा ने कार चलाते अपने ससुर को देखा.उसने आसमानी रंग की चेक की कमीज़ & काली जीन्स पहनी थी & इस वक़्त अपनी उम्र से बहुत ही ज़्यादा कम दिख रहा था.रंभा ने सफेद शर्ट & गहरी नीली जीन्स पहनी थी & उसके जिस्म के सारे कटाव बड़े क़ातिलाना अंदाज़ मे उभर रहे थे.रंभा ने अपने काले चश्मे के पार अपने ससुर को देखा & दाए हाथ को उसकी दाढ़ी पे फिराया & मुस्कुराइ.विजयंत मुस्कुराया & उसका हाथ चूम लिया.वो जानबूझ के रंभा को अपने साथ इस सफ़र पे लाया था ताकि वो हर पल उसपे नज़र रख सके.2 रातो की ज़बरदस्त चुदाई का मतलब ये नही था कि उसकी बहू उसके शक़ के दायरे से बाहर चली गयी थी.

कार पंचमहल से 50किमी की दूरी पे बने पहले मेहरा फार्म के गेट मे दाखिल हुई.विजयंत ने अपने आने की खबर नही दी थी & वाहा का स्टाफ उसे देख चौंक गया & वाहा अफ़रा-तफ़री मच गयी.विजयंत रंभा के साथ मॅनेजर के कॅबिन मे बैठ गया,"सर,समीर सर के बारे मे सुन हम सब भी बहुत परेशान हैं."

"जी,मिस्टर.नाथ.आप बुरा ना माने तो मैं ज़रा पिच्छले 6 महीने के अकाउंट्स & रेकॉर्ड्स देखना चाहूँगा."

"ज़रूर सर.आप यहा मेरी चेर पे बैठिए,कंप्यूटर ऑपरेट करने मे आसानी होगी.",

"ठीक है लेकिन मैं हार्ड कॉपीस भी देखना चाहूँगा.",विजयंत उसकी कुर्सी पे आके बैठ गया & कंप्यूटर खुलने पे फाइल्स देखने लगा.

"ओके,सर.मैं अभी सारी फाइल्स मँगवाता हू.",मॅनेजर कॅबिन से बाहर गया तो उसके पीछे रंभा भी बाहर आ गयी.उसे देखने से ऐसा लग रहा था कि वो ऊब रही है लेकिन हक़ीक़त ये थी कि वो मॅनेजर & बाकी स्टाफ की 1-1 हरकत देख रही थी.

विजयंत का मानना था कि समीर की गुमशुदगी मे अगर ब्रिज कोठारी का हाथ नही था तो हो सकता है अग्री बिज़्नेस की किसी गड़बड़ी का पता चलना समीर की गुमशुदगी का सबब बना हो.वो किसी भी सिरे को बिना जाँचे छ्चोड़ना नही चाहता था.2 घंटे तक सर खपाने के बावजूद उसे वाहा के काम-काज कोई ऐसी गड़बड़ी नज़र नही आई.

रंभा फार्म घूम वाहा के लोगो से बातचीत के दौरान ये पता लगती रही की वाहा के पुराने मॅनेजर को हटाने की वजह क्या थी लेकिन उसे भी कोई ऐसी बात नही पता चली जिस से की किसी पे कोई शक़ जाता.दोनो ने दोपहर का खाना फार्म के मॅनेजर के साथ ही खाया & उसके बाद वाहा की कॉटेज मे आराम करने चले गये.कॉटेज मे 3 कमरे थे & मॅनेजर ने 2 कमरे सॉफ करवा दिए.उस बेचारे को क्या पता था कि उसने दूसरा कमरा बेकार मे ही ठीक करवाया था!

"यहा तो कुच्छ ऐसा पता नही चला.",ससुर के पहलू मे उसके सीने पे सर रखे रंभा ने उसकी शर्ट के उपर के खुले बटन के अंदर हाथ घुसा के उसके सीने को सहलाया.

"हूँ..अकाउंट्स सब ठीक थे.उस मॅनेजर को समीर ने क्यू हटाया था?",वो रंभा के बालो से खेल रहा था.

"वो चाहता था कि उसका तबादला क्लेवर्त कर दिया जाए.वो वही का रहने वाला था..",रंभा उसके सीने पे दोनो हाथ जमा के उनपे ठुड्डी टीका के ससुर को देखने लगी,"..लेकिन वाहा का फार्म हमारे बाकी फार्म्स से अलग हैं."

"हाँ,वाहा हम ठंडी जगहो मे होने वाली सब्ज़ियाँ & फल & फूल उगते हैं.क्लेवर्त 1 हिल स्टेशन है & वाहा बहुत से बोरडिंग स्चोल्स भी हैं..",विजयंत दाए हाथ कि 1 उंगली से उसका बाया गाल सहला रहा था,"..वही हमारी लगभग 90% पैदावार खप जाती है.उस आदमी को तजुर्बा होगा नही इसीलिए समीर ने उसे वाहा भेजा नही होगा."

"वो यहा के काम मे कोताही बरतने लगा था & समीर की चेतावनियो के बावजूद सुधर नही रहा था इसीलिए समीर ने उसे निकाल दिया.यहा के लोगो की बातो से भी ऐसा नही लगता कि उन्हे समीर का फ़ैसला ग़लत लगा हो.मगर क्या इतनी सी बात के लिए वो समीर को नुकसान पहुँचा सकता है?"

"मैं उपरवाले से मनाता तो हू कि ऐसा नही हुआ हो लेकिन..",वो उठ बैठा,"..सच्चाई ये है रंभा,की लोगो को इस से भी मुख्तसर बातो पे अपनी जान गॅवानी पड़ी है.",रंभा के चेहरे का रंग उड़ गया.दिल के किसी कोने मे 1 डर था की समीर शायद अब इस दुनिया मे हो ही ना लेकिन इस तरह से अपने ससुर के मुँह से इस बात को सुनने का असर ही दूसरा था.समीर से उसे प्यार नही था लेकिन वो उस से नफ़रत भी नही करती थी.वो ससुर की चहेती भी बन गयी थी लेकिन वो जानती थी की मेहरा खानदान मे उसकी इज़्ज़त & पुछ तभी होगी जब समीर ज़िंदा रहेगा.नही तो,उसकी सास & ननद के दबाव मे विजयंत जैसे मज़बूत आदमी को भी उसे पैसे देके घर से अलग करना पड़ सकता था & ये उसे मंज़ूर नही था.उसने तय कर लिया था कि चाहे जो भी हो,अब मेहरा खानदान को उसे भी अपना हिस्सा मानना पड़ेगा & उसे भी वही इज़्ज़त देनी पड़ेगी लेकिन समीर के बिना ये मुमकिन होना मुश्किल ही था.

"चलो,चलें.",विजयंत जूते पहन रहा था.रंभा उठी & शीशे मे देख अपने कपड़े ठीक करने लगी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--31

gataank se aage.

uske nakhuno ki chubhan se aahat ho usne uske haseen chehre pe hath firate hue uske munh me apni zuban ghusa di jise rambha ne shiddat se chusa.vijayant ne kuchh der baad honth alag kiye & vaise hi lund uski chut pe ghumaya to rambha ne aah bhari.vijayant ke hath uski chhatiyo se lage to rambha en kandhe deewar se laga seena & aage kar diya.vijayant ne unhe dabaya & fir seedha khada ho gaya.sasur ke jism ke nashe me chur rambha deewar se hati & use baaho me bhar chum liya & fir uske hotho ko chhod neeche uske seene pe aa gayi & dhire-2 kaatne lagi.

vijayant ne aankhe band kar sar peechhe fenka & aah bhari & fir turant rita ko gardan ghuma ke dekha.bistar un dono se kafi door tha & shayad yehi vajah thi ki vo biwi ki maujoodgi me bahu ka lutf uthane me kamyab ho raha tha.rambha uske nipples ko danto se chhedne ke baad dhime-2 kaatate hue neeche aayi & uski baalo se dhanki nabhi me jibh firayi.us waqt vijayant ne badi mushkil se apne lund ko pichkari chhodne se roka.

rambha neeche aayi & apne gaalo pe uske precum se gile tagde lund ko ragda & fir apne munh me bhar liya.vijayant aankhe band kar deewar pe baya hath tika ke aage jhukta hua khada ho gaya & daye hath se rambha ki chikni pith sehlane laga.rambha ki zuban uske lund ko pagal kiye ja rahi thi.kafi der tak vo lund & uske neeche latak rahe ando ko jinpe se vijayant ne baal saaf kar rakhe the,chaatati rahi & fir jab usne munh hata ke hath upar le ja uski chhati ke baalo me firaye to vijayant ne unhe pakad use upar uthaya & baaho me bhar chum liya.

deewar se sati uski gardan ko thame rambha ne uske munh ko apni choochiyo se chipka liya to vijayant neeche jhuka & uski jangho ko hatho me thamte hue lund ko uski chut me dhakela.

"aaiyee..!",rambha ke chehre pe dard ki lakeeren khinchi lekin vo sasur se bilkul chipak gayi.uske ghutno ke paas se uski jangho ko tham use god me utha vijayant uski chudai karne laga.rambha ko ab kuchh hosh nahi tha.sasur ka tagda lund use vahi bejod jismani maza de raha tha jiski use humesha khwahish rehti thi.vijayant ne daya hath jangh se hataya & uski gand ki bayi fank ko daboch liya & uchhal-2 ke use chodne laga.rambha aise kabhi nahi chudi thi.usne shadi ke pehle hi jismani rishte kayam kiye the 1 mard ke sath.uske abad aur mard aaye,1 sath 2 mardo se bhi chudi lekin is tarah se 1 hi mard ke sath uski soti biwi ki maujoodgi me uski god me kahde hoke chudai karna!..isne to use roamnch se bhar diya tha.

vijayant ka dil uske seene ki lubhawani golaiyo ko chumne ka hua & vosar neeche jhukane laga lekin rambha ko thame rehne ke liye use aage ki or jhukna pada.rambha peechhe jhuk gayi thi & vijayant uski choochiyan chuste hue,use thame chod raha tha.vijayant ko koi taklif hoti nahi dikh rahi thi.rambha to uski mardangi ki murid ho gayi!sameer ki gumshudgi me uska hath ho ya na ho lekin vo jismo ke khel ka kamal ka khiladi tha!

use usi tarah jhulate hue usne tab tak choda jab tak uski chut ne uske lund ko jakad,sikudte-failte hue uske jhadne ka elan na kar diya.vijayant use god me uthaye ghuma & apne bistar ke paas chal agaya.vijayant ne jismo ka khel na jane kitni auraton ke sath,kitne tarike se khela tha lekin is tarah se biwi ki maujoodgi me kisi aur ko-vo bhi apni bahu ko chodna,uske liye bhi bilkul anutha tajurba tha!

"udhar kaha ja rahe hain,daddy?",rambha sasur se chipti uske gale baahe kase,uske baye kaan me phusphusayi.vijayant ne kuchh jawab nahi diya & palang ke us taraf aa gaya jidhar rita so rahi thi.rita karwat pe thi & uski nangi pith unki taraf thi.vijayan ne vahi palang ke bagal me farsh pe bichhe galiche pe apni bahu ko bina uski chut se lund nikale litaya & ghutno pe baith uski kamar ko tham uski gand ko galiche se utha dhakke lagane laga.rambha kaleen ke dhago ko nochti sar daye-baye jhatakte hue masti me jhumne lagi.uski nigah jab upar palang pe sor ahi apni saas pe padti to vo & romanch se bhar uthati.

vijayant uske pet ko dabate hue & uski choochiyo ko masalte tab tak use chodta raha jab tak usne kamar uchkani nahi shuru kar di.rambha ne peechhe sar ke upar galiche pe hath tika ke zoros e kamar uchkani shuru kar di thi & uska chehra masti ki shiddat se bilkul sakt sa dikh raha tha.vijayant ne fauran tange failate hue uski chut ko neeche galiche pe dabaya & hath aage galiche pe tika uske upar jhuk ke dhakke lagane laga.rambha ki chut ne fir se uske lund pe apni jani-pehchani harkat shuru kar di thi.vijayant uske upar let gaya to rambha ne apni tange uski jangho ke pichhle hisso pe fansa di.

vijayant zordar dhakke laga raha tha & rambha ki kokh pe chot pe chot kiye ja raha tha.rambha ke liye ab aahen rokna namumkin tha.jism me aisa maza paida ho & uska izhar na kar paye,ab har roz to ye karna uske liye mushkil tha.vijayant ne fauran bistar ke kinare se 1 cushion khincha & uske munh pe rakh diya.dono abhi bhio beech-2 me rita ko dekh rahe the joki so rahi thi.

rambha ne cushio ko munh pe daba liya & aaho ka shor usme dafn karne lagi.vijayant uske uapr let gaya tha & uska baalo bhara seena uski choochiyo ko pees raha tha.kuchh dhakko ke baad jab usne mehsus kiya ki ab rambha bahut shiddat ke sath kamar hila rahi hai & aahen cushion ke baqvjud bahar aa sakti hain to usne kuchh tez dhakke & lagaye & uski chut ki kasak ko shant kiya.rambha jhadi & cushion munh se hata ke fenka & uchakte hue apne sasur ki gardan pakad ke uske daye kandhe me munh ghusa ke apna dant gada diye.vijayant ko uski is harkat se dard hua par sath hi maza bhi aaya & usne uski chut me apna ras chhod diya.dono 1 dusre se lipte sath jhadte rahe.

kuchh der baad jab toofan puri tarah se tham gaya to vijayant ne apni bahu ko god me uthaya & uske kamre me le gaya & uske bistar pe baaho me bharke tab tak leta raha,jab tak ki vo nind ke agosh me nahi chali gayi.

Vijayant Mehra ne Rambha ke sath Sameer ki talash shuru kar di thi.Devalay me 1 raat bita dono agli subah Panchmahal pahunche.jab tak rambha ne apna saman pack kiya vijayant ne sameer ke dafatr ka jayza liya.media walo ke liye is khabar me ab vo maza nahi raha tha kyuki pehle din se leke abhi tak me kuchh masaledar nahi ghata tha lekin fir bhi aakhir baat itne bade aadmi ke bete ke lapata hone ki thi.vo rambha ya vijayant se baat karne ki firaq me lage hi rehte the.

rambha ne apna saman pack kiya & apni car me dalwaya & seedha Hotel Violet pahunchi.vijayant apni Prado me pehle se hi uska intezar kar raha tha.rambha uski car me baithi & dono nikal pade.

police apna kaam mustaidi se kar rahi thi.1 high-profile case me kuchh gadbadi na ho jaye isliye vo puri savdhani barat rahe the.vijayant ne 1 baar bhi panchmahal police mehakme pe apne rasukh ka istemal kar koi dabav nahi dala tha.uski pahunch kitni upar tak thi ye sabhi jante the & is baat ko jatane ki use koi zarurat nahi thi.usne panchmahal ke police commissioner se bas 1 baar mulakat ki thi.upar se rajya ka home minister,CM yaha tak ki central government ke mantriyo,jinme se kisi se vijayant ne 1 baar bhi is silisile me baat nahi ki thi,khud hi police se lagbhag har roz case ke bare me puchh rahe the.

vijayant bete ke liye koi shor nahi macha raha tha iska matlab ye nahi tha ki vo kuchh soch nahi raha tha.usne irada pakka kar liya tha ki agar uske bete ko koi taklif pahuncha raha hai to vo use apne hatho se saza dega.

rambha ne car chalate apne sasur ko dekha.usne aasmani rang ki check ki kamiz & kali jeans pehni thi & is waqt apni umra se bahut hi zyada kam dikh raha tha.rambha ne safed shirt & gehri nili jeans pehni thi & uske jism ke sare katav bade qatilana andaz me ubhar rahe the.rambha ne apne kale chashme ke paar apne sasur ko dekha & daye hath ko uski dadhi pe firaya & muskurayi.vijayant muskuraya & uska hath chum liya.vo jaanbujh ke rambha ko apne sath is safar pe laya tha taki vo har pal uspe nazar rakh sake.2 raato ki zabardast chudai ka matlab ye nahi tha ki uski bahu uske shaq ke dayre se bahar chali gayi thi.

car panchmahal se 50km ki duri pe bane pehle Mehra Farm ke gate me dakhil hui.vijayant ne apne aane ki khabar nahi di thi & vaha ka staff use dekh chaunk gaya & vaha afra-tafri mach gayi.vijayant rambha ke sath manager ke cabin me baith gaya,"sir,sameer sir ke bare me sun hum sab bhi bahut pareshan hain."

"ji,Mr.Nath.aap bura na mane to main zara pichhle 6 mahine ke accounts & records dekhna chahunga."

"zarur sir.aap yaha meri chair pe baithiye,computer operate karne me aasani hogi.",

"thik hai lekin main hard copies bhi dekhna chahunga.",vijayant uski kursi pe aake baith gaya & computer khulne pe files dekhne laga.

"ok,sir.main abhi sari files mangwata hu.",manager cabin se bahar gaya to uske peechhe rambha bhi abhar aa gayi.use dekhne se aisa lag raha tha ki vo oob rahi hai lekin haqeeqat ye thi ki vo manager & baki staff ki 1-1 harkat dekh rahi thi.

vijayant ka maanana tha ki sameer ki gumshudgi me agar Brij Kothari ka hath nahi tha to ho sakta hai agri business ki kisi gadbadi ka pata chalna sameer ki gumshudgi ka sabab bana ho.vo kisi bhi sire ko bina janche chhodna nahi chahta tha.2 ghante tak sar khapane ke bavjood use vaha ke kaam-kaaj koi aisi gadbadi nazar nahi aayi.

rambha farm ghum vaha ke logo se baatchit ke dauran ye pata lagati rahi ki vaha ke purane manager ko hatane ki vajah kya thi lekin use bhi koi aisi baat nahi pata chali jis se ki kisi pe koi shaq jata.dono ne dopahar ka khana farm ke manager ke sath hi khaya & uske baad vaha ki cottage me aaram karne chale gaye.cottage me 3 kamre the & manager ne 2 kamre saaf karwa diye.us bechare ko kya pata tha ki usne dusra kamra bekar me hi thik karwaya tha!

"yaha to kuchh aisa pata nahi chala.",sasur ke phelu me uske seene pe sar rakhe rambha ne uski shirt ke upar ke khule button ke andar hath ghusa ke uske seene ko sehlaya.

"hun..accounts sab thik the.us manager ko sameer ne kyu hataya tha?",vo rambha ke baalo se khel raha tha.

"vo chahta tha ki uska tabadla Clayworth kar diya jaye.vo vahi ka rehne vala tha..",rambha uske seene pe dono hath jama ke unpe thuddi tika ke sasur ko dekhne lagi,"..lekin vaha ka farm humare baki farms se alag hain."

"haan,vaha hum thandi jagaho me hone vali sabziyan & phal & phool ugate hain.clayworth 1 hill station hai & vaha bahut se boarding schols bhi hain..",vijayant daye hath ki 1 ungli se uska baya gaal sehla raha tha,"..vahi humari lagbhag 90% paidavar khap jati hai.us aaadmi ko tajurba hoga nahi isiliye sameer ne use vaha bheja nahi hoga."

"vo yaha ke kaam me kotahi baratane laga tha & sameer ki chetavaniyo ke bavjood sudhar nahi raha tha isiliye sameer ne use nikal diya.yaha ke logo ki baato se bhi aisa nahi lagta ki unhe sameer ka faisla galat laga ho.magar kya itni si baat ke liye vo sameer ko nuksan pahuncha sakta hai?"

"main uparwale se manaata to hu ki aisa nahi hua ho lekin..",vo uth baitha,"..sachchai ye hai rambha,ki logo ko is se bhi mukhtasar baato pe apni jaan gawani padi hai.",rambha ke chehre ka rang ud gaya.dil ke kisi kone me 1 darr tha ki sameer shayad ab is duniya me ho hi na lekin is tarah se apne sasur ke munh se is baat ko sunane ka asar hi dusra tha.sameer se use pyar nahi tha lekin vo us se nafrat bhi nahi karti thi.vo sasur ki chaheti bhi ban gayi thi lekin vo janti thi ki mehra khandan me uski izzat & puchh tabhi hogi jab sameer zinda rahega.nahi to,uski saas & nanad ke dabav me vijayant jaise mazbut aadmi ko bhi use paise deke ghar se alag karna pad sakta tha & ye use manzur nahi tha.usne tay kar liya tha ki chahe jo bhi ho,ab mehra khandan ko use bhi apna hissa manana padega & use bhi vahi izzat deni padegi lekin sameer ke bina ye mumkin hona mushkil hi tha.

"chalo,chalen.",vijayant jute pehan raha tha.rambha uthi & shishe me dekh apne kapde thik karne lagi.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 14 Dec 2014 06:11

जाल पार्ट--32

गतान्क से आगे.

"आपने मॅनेजर नाथ से ये क्यू कहा कि हम वापस पंचमहल जा रहे हैं?",विजयंत कार को आवंतिपुर की तरफ भगा रहा था.

"इसलिए ताकि वो आगे के फार्म्स को हमारे आने की खबर ना दे.",रंभा उसके दिमाग़ से प्रभावित हुए बिना नही रह सकी.उसने अपनी सीट बेल्ट खोली & उसके कंधे पे सर रख के सामने रास्ते को देखने लगी.विजयंत ने भी फार्म पे और लोगो से पिच्छले मॅनेजर के निकाले जाने की वजह पुछि थी & उन्होने भी वही कहा था जो रंभा ने कहा था.अब उसे महसूस होने लगा था कि शायद रंभा पे उसका शक़ ग़लत है लेकिन वो शायद अभी भी उसके दिमाग़ मे था & इसका यही मतलब था कि रंभा शक़ के दायरे से बाहर नही निकली थी.

शाम के 5 बज रहे थे & कार तेज़ी से आवंतिपुर की ओर बढ़ रही थी.विजयंत ने बाई बाँह उठाके रंभा को उसके घेरे मे लिया तो रंभा उसके & करीब आ गयी & उसके सीने पे हाथ फ़िराने लगी.दोनो खामोशी मे 1 दूसरे के जिस्मो के मस्ताने एहसास का लुत्फ़ उठाते हुए रास्ता तय कर रहे थे इस बात से अंजान कि 1 कार लगातार उनका पीछा कर रही थी जिसे चलाने वाले के गाल पे 1 निशान था.

उस शख्स ने पिच्छले 2 दिनो मे विजयंत मेहरा & उसके कारोबार & परिवार के बारे मे इंटरनेट से काफ़ी जानकारी जुटाई थी.पंचमहल पहुँचने से पहले उसने सोचा भी नही था कि उसे विजयंत की ज़िंदगी के बारे मे भी जानना पड़ेगा मगर किस्मत ने उसे ऐसा करने पे मजबूर कर दिया था.उसे तो बस रंभा से मतलब था लेकिन समीर की गुमशुदगी ने सब गड़बड़ कर दिया था.

जब विजयंत रंभा के साथ पहले फार्म पे गया तो वो फिर से झल्ला उठा था.फार्म मे घुसने का रास्ता उसे नही सूझा था & उसे फार्म के बाहर के छ्होटे से बाज़ार मे तेज़ मिर्च वाले समोसे & बहुत ज़्यादा मीठी चाइ पी के वक़्त काटना पड़ा.उसने जैसे ही फ़ैसला किया कि अब उसे किसी तरह फार्म मे घुसना ही है,तभी उसे विजयंत की प्राडो बाहर आते दिखी.

इस वक़्त वो शख्स पंचमहल & आवंतिपुर के रास्ते मे पड़ने वाले दूसरे मेहरा फार्म के पास के 1 कस्बे की 1 सराई मे रुका था.उसे ये तो समझ आ गया था कि विजयंत बेटे को ढ़ूनडने निकला है & उसी सिलसिले मे फार्म्स के चक्कर लगा रहा है.उसकी समझ मे ये नही आ रहा था कि वो रंभा को हर जगह अपने साथ लेके क्यू घूम रहा था..कम्बख़्त वो 1 पल को भी अकेली नही रह पा रही थी..उसने सिगरेट वही कमरे के फर्श पे बुझाई & अपनी मच्छरदानी उठाके बिस्तर पे चला गया.रात को विजयंत फार्म छ्चोड़ने वाला नही,इतना उसे यकीन था.उसने चादर पूरे सर तक ओढ़ ली & सोने लगा,आख़िर कल सुबह बहुत सवेरे उठ उसे फिर से रंभा का पीछा करना था.

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रंभा फार्महाउस की कॉटेज मे ससुर के कमरे मे उसके बिस्तर पे 1 नीली डेनिम की मिनी स्कर्ट & स्लेटी रंग का ऑफ-शोल्डर टॉप पहने बैठी थी.पलंग के हेडबोर्ड से टेक लगाके कमर से नीचे के हिस्से को दाई तरफ मोड़ वो किसी मॅगज़ीन के पन्ने पलट रही थी कि विजयंत उसके बगल मे आ बैठा.दोनो रात का खाना खा चुके थे & उसके पहले इस फार्म के भी सारे अकाउंट्स चेक कर चुके थे.यहा भी उन्हे कोई सुराग नही मिला था.

रंभा ने मॅगज़ीन किनारे की & गर्दन बाई तरफ घुमाई & ससुर के लबो से लब सटा दिए.दोनो हौले-2 1 दूसरे को चूमने लगे.विजयंत ने उसके टॉप मे से नुमाया दाए कंधे पे हाथ रखा तो वो खुद ही उसकी ओर घूमी & अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा दी.विजयंत उसकी ज़ुबान चूसने लगा & बया हाथ नीचे उसकी स्कर्ट पे रख दिया & दाए को उसकी गर्दन के नीचे से होते उसके दाए कंधे पे रख दिया & वाहा सहलाते हुए उसकी ज़ुबान की हर्कतो से मस्त होता रहा.

विजयंत का जोश बढ़ा तो वो थोड़ा आगे हुआ & रंभा फिर पहले जैसे ही हेअडबोर्ड से आड़ के बैठ गयी.विजयंत का हाथ उसकी स्कर्ट के नीचे जाँघ के खुले हिस्से पे बहुत हल्के-2 घूम रहा था.रंभा को उसके हाथ की ये हरकत बहुत मस्त कर रही थी.विजयंत उसकी जाँघ को मसल नही रहा था बल्कि बहुत हल्के से सहला रहा था.

अब विजयंत की ज़ुबान रंभा के मुँह मे घूम रही थी & उसका लंड उसकी ट्रॅक पॅंट मे बिल्कुल तन गया था.विजयंत उसे चूमते हुए ही थोड़ा उठा & उसके कंधे पकड़ उसे नीचे करने लगा तो उसका इशारा समझ रंभा खुद ही बिस्तर पे लेट गयी.उसके कमर का नीचे का हिस्सा अभी भी दाई तरफ मुड़ा हुआ था & उसके हाथ ससुर के चेहरे को थामे थे.विजयंत घुटनो पे हो आगे झुका तो उसका लंड बहू की गंद से टकराया.

"यहा भी कोई सुराग हाथ नही लगा ना?",रंभा ने पुछा तो वो उसे उसकी गंद पे दबाते हुए और झुका & रंभा के चेहरे को पकड़ अपने सीने को उसकी छातियो पे दबाते हुए बड़ी शिद्दत से उसे चूमने लगा.लंड के एहसास ने रंभा की चूत को भी कुलबुला दिया.वो भी नाख़ून से ससुर की दाढ़ी खरोंछती मस्ती मे खोने लगी.काफ़ी देर तक दोनो ऐसे ही चूमते रहे.विजयंत को अपने सीने मे रंभा के चुभते निपल्स अब जैसे उसके होंठो को बुलावा देते महसूस हो रहे थे.

"नही लेकिन 1 आदमी मुझे कुच्छ अजीब लगा.",उसने उसके टॉप को उपर किया & उसकी आँखो के सामने ट्रॅन्स्परेंट स्ट्रॅप्स वाली काली ब्रा मे क़ैद मस्ती मे पल-पल फूलते उसके सीने के बेकल उभार चमक उठे.उसने ब्रा के उपर से ही 2 हल्की किस्सस दोनो चूचियो पे ठोनकी तो रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद की & मुस्कुराते हुए ससुर के बालो मे उंगलिया फिराने लगी.विजयंत ने अपने घुटनो से उसकी टाँगो को सीधा कर दिया था & अब उसके उपर लेटा हुआ था.

"उउम्म्म्म..कौन?",विजयंत उसके सीने की वादी मे अपनी गर्म साँसे छ्चोड़ रहा था & रंभा के जिस्म की आग उनकी तपिश से & बढ़ रही थी.वो अब अपनी भारी जंघे आपस मे रगड़ अपनी चूत की बेसब्री जताने लगी थी.विजयंत ने उसके टॉप को फिर नीचे किया & उसके कंधो को चूमने लगा.पतले-2 ट्रॅन्स्परेंट बार स्ट्रॅप्स को उसने दांतो से उठा के कंधो के किनारे पे किया & फिर कंधो पे अपनी जीभ फिराने लगा.रंभा ने जोश मे उसके बॉल खींचे & नीचे से अपनी कमर बहुत धीरे से उचका उसके लंड को मानो जल्दी उसमे समाने का न्योता दिया.

"नाम नही पता उसका लेकिन वो सारे स्टाफ के साथ खड़ा था & थोड़ा घबराया लगा मुझे.",विजयंत की ज़ुबान उसकी गर्दन पे आई तो रंभा ने सर बिस्तर के किनारे से नीचे कर दिया ताकि वो आसानी से उसकी गोरी गर्दन चूम सके.विजयंत उसके दोनो कंधो & गर्दन के साथ-2 उसकी ठुड्डी को भी चूम रहा था & जब मस्ती मे बहाल हो रंभा ने उसके दोनो कान पकड़ उसके चेहरे को अपने गले से उठाया तभी उसने अपने लब उसके जिस्म से हटाए.

"उफफफफफफ्फ़..हालत खराब कर देते हैं आप तो!",रंभा ने प्यार से उसे झिड़का,"..तो उस से कुच्छ पुछा नही आपने?",उसकी आँखो मे अब ससुर के जिस्म के नशे के लाल डोरे दिख रहे थे.

"अभी नही.कल सवेरे उस से अकेले मे पुछुन्गा.",रंभा ने स्टाफ के उस आदमी का नाम जानने की कोई खास कोशिश नही की थी & ना ही उसकी बात से उसकी मस्ती कम हुई थी.विजयंत का शक़ बहू पे और कम हो रहा था मगर अभी भी उसका दिल उसे समीर की गुमशुदगी के मामले मे पूरी तरह से बेकसूर नही मान रहा था.

उसने उसके टॉप को उपर खिचा तो रंभा ने अपने हाथ सर के पीछे कर दिए & अगले ही पल टॉप उसके जिस्म से जुदा हो फर्श पे गिरा हुआ था.विजयंत उठा था तो रंभा ने फिर से दोनो जंघे आपस मे भींच ली थी & दोनो घुटने दाई तरफ मोड़ लिए थे.उसके हाथ ससुर की टी-शर्ट मे घुस गये थे & उसके गथिले जिस्म पे बड़ी हसरत से फिर रहे थे.1 बार फिर विजयंत उसके रसीले होंठो का रस पी रहा था.कुच्छ देर तक रंभा उसकी पीठ & उसके सीने पे अपने नाख़ून फिराती रही & फिर उसने ससुर की शर्ट निकाल दी.

"आहह..!",विजयंत झुका & अपना बाया हाथ रंभा की दाई टांग से होते उसकी जाँघ & फिर उसकी कमर के बगल से होते हुए उसके सीने के बगल मे उसकी ब्रा तक फिराया & फिर वही पे थाम लिया.रंभा ने भी टाँगे सीधी कर ली & फिर से ससुर के सर को थाम लिया & उसकी किस का जवाब देने लगी.विजयंत उसके उपर झुका उसे चूम रहा था & उसका बाया हाथ बहू की पीठ के नीचे घुस रहा था.हाथ नीचे पहुँच ब्रा के हुक्स को ढूंड रहा था.इस सब के दौरान किस जारी थी.हुक्स मिलते ही उन्हे खोल दिया गया & ब्रा को विजयंत ने उसके दाए बाज़ू से निकाला & फिर सीने को नंगा करते हुए उसके बाए कंधे पे अटका दिया & फिर चूमते हुए दोनो हाथो से रंभा के हसीन चेहरे को थाम लिया.

"उउन्न्ह.....हुउऊउन्न्ह..!",रंभा अब बहुत मस्त हो चुकी थी & उसकी पॅंटी उसके रस से भीगने लगी थी.विजयंत ने ब्रा को उसके बाए बाज़ू से निकाला & उसके सर के पीछे फर्श पे गिरा दिया तो रंभा ने अपना दाया हाथ उसकी पीठ पे रख दिया & बाए को अपने सर के बगल मे बिस्तर पे.विजयंत उसकी गर्दन पे बाई तरफ चूम रहा था.

"समझ मे नही आता..",उसने ससुर के बाल पकड़ के उसके सर को कंधे से उठाया & अपनी बाई चूची पे रखा,"..उउन्न्ह..समीर ऐसे कहा गायब हो गया & अभी तक कोई सुराग भी नही मिल रहा है....आन्न्न्नह..!",विजयंत के होंठ अब उसकी दाई चूची पे थे & उसे पूरा का पूरा मुँह मे भरने की कोशिश कर रहे थे.अचानक की गयी इस हरकत से रंभा की चूत की कसक चरम पे पहुँच गयी & उसने बेचैनी मे सर उपर उठाया & उसका जिस्म झटके खाने लगा.विजयंत अभी भी उसकी चूची को मुँह मे भरने की कोशिश मे जुटा था & वो झाडे जा रही थी.

रंभा के दाए हाथ के नाख़ून विजयंत के बाए कंधे मे धँस गये थे.वो कांप रही थी & विजयंत उसकी चूचियों को चूसे जा रहा था.रंभा का सर वापस बिस्तर के किनारे पे आ गया था & वो आहें भर रही थी.विजयंत ने बाए घुटने को उसकी टांगो के बीच घुसा उन्हे फैलाया & फिर आगे झुकते हुए रंभा के होंठ चूमे.थोड़ी देर बाद वो उठा तो उसके लबो से लब चिपकाए रंभा भी उचकी & अपने हाथ नीचे ले जाके उसकी ट्रॅक पॅंट को सरकाने लगी.

"फ़िक्र मत करो.मैं उसका पता लगा के ही दम लूँगा.",विजयंत ने उसी वक़्त कमर नीचे करते हुए लंड को रंभा की चूत पे दबा दिया.रंभा के हाथ ढीले हो दोनो जिस्मो के बीच फँस गये & उसने सर पीछे झटका.विजयंत झुका & उसकी गोरी गर्दन को चूमने लगा & फिर उसके होठ दोबारा नीचे हो उसकी प्रेमिका की चूचियों से चिपक गये.उसके हाथ रंभा की स्कर्ट के हुक्स खोल रहे थे & अगले ही पल रंभा को स्कर्ट & पॅंटी 1 साथ उसकी मखमली टाँगो से फिसलती उसके जिस्म से अलग होती महसूस हुई.रंभा अब ससुर के बिस्तर मे बिल्कुल नंगी हो चुकी थी.

"ऊहह....आन्न्‍न्णनह..!",विजयंत ने दोनो टाँगे उसकी टाँगो के बीच घुसा अपने घुटनो से उन्हे और फैला दिया & फिर आगे झुका तो रंभा ने खुद उचक के उसके होंठो का अपने होंठो से इसटेक्बल किया.विजयंत ने अपने बदन को थोड़ा सा टेढ़ा किया & बाए हाथ को नीचे कर उसकी चूत के लाल दाने पे गोल-2 उंगली घुमाने लगा.रंभा जोश से काँपने लगी & अपनी ज़ुबान मस्ती मे विजयंत की ज़ुबान से लड़ाने लगी.

"ऊन्नह..!",विजतन घुटनो पे बैठ उसके सीने पे झुक के उसकी चूचियों पे अपना मुँह चलाने लगा.उसकी उंगली ने दाने को रग़ाद-2 के रंभा को मस्ती मे दूसरी बार झड़ने पे मजबूर किया & अभी वो संभली भी नही थी कि उंगली को उसकी कसी चूत मे घुसा अंदर कुच्छ टटोलने लगा.

"आननह..हुन्न्ह..!",रंभा कमर उचका रही थी & वो अब उसके गोल पेट को चूम रहा था.उसकी उंगली अभी भी अंदर कुच्छ टटोल रही थी & रंभा को समझ मे नही आ रहा था कि वो कर क्या रहा है.

"आननह..!",तभी जैसे उसके बदन & ज़हन मे 1 धमाका सा हुआ.उसकी चूत के अंदर की दीवार पे विजयंत की उंगली ने वो जगह ढूंड निकाली थी जो शायद किसी औरत के जिस्म की सबसे नाज़ुक जगह होती है,जिसे जानकार जी-स्पॉट कहते हैं.जिस्म मे जैसे मस्ती सैलाब बन के उमड़ पड़ी थी.इतनी मस्ती कि वो उसे से नही पा रही थी.ये झड़ना था या फिर उस से भी कुच्छ और ज़्यादा.बेसब्री इतनी ज़्यादा थी कि उसने ससुर का हाथ पकड़ अपनी चूत से झटके से अलग किया & अपनी कमर उचकाने लगी.वो अपनी ही दुनिया मे खो गयी थी जहा वो चारो तरफ रंगीन बादलो से भरे आसमान मे उड़ रही थी.खुशी इतनी ज़्यादा थी कि उसका दिल उसे बर्दाश्त नही कर पाया था & वो सुबकने लगी थी.

जब थोड़ी देर बाद वो सायंत हुई & आँखे हल्के से खोली तो बगल मे उसे उसके बॉल सँवारता विजयंत अढ़लेटा नज़र आया.उसके दिल मे उसे उस जन्नत का नज़ारा दिखाने वाले शख्स के लिए बहुत प्यार उमड़ पड़ा & उसने उसके गले मे बाहें डाल बड़ी शिद्दत से चूमा & फिर बिस्तर पे लिटा दिया.वो अब अपने ससुर को अपने प्यार से सराबोर कर देना चाहती थी.

उसने उसे लिटा दिया & उसके सीने पे अपनी चूचियाँ दबाती उसे चूमने लगी.उसके बाद नीचे आई & उसके बालो भरे सीने पे हल्के-2 चूमने लगी.विजयंत उसके जिस्म को धीरे-2 सहला रहा था.रंभा के होंठो की मस्तानी हरकतें उसके जोश को बढ़ा रही थी.रंभा घने बालो के बीचो-बीच चूमती हुई नीचे उसकी नाभि तक आई & वाहा अपनी जीभ फिराई.

"ओह्ह्ह्ह..!",विजयंत ने जोश मे आह भरी.रंभा ने उसकी नाभि के नीचे बहुत धीमे-2 काटना शुरू कर दिया.विजयंत तो जोश से पागल हो उठा.रंभा ने काटते हुए ही उसकी पॅंट नीचे सर्काई & फिर उसकी टाँगो के बीच बैठ पॅंट को निकाल दिया.विजयंत के सफेद अंडरवेर मे उसका लंड बिल्कुल तना दिख रहा था.

रंभा ने अपने बॉल झटके & उन्हे दाए कंधे के उपर से आगे लाई & उनके सिरो को अपने ससुर के सीने पे फिराया.विजयंत तो मस्ती मे बहाल हो गया.बाल सीने से उसके पेट से होते हुए उसके अंडरवेर पे आए तो अपने नाज़ुक अंगो पे बालो के एहसास से वो तड़प उठा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--32

gataank se aage.

"aapne manager nath se ye kyu kaha ki hum vapas panchmahal ja rahe hain?",vijayant car ko Avantipur ki taraf bhaga raha tha.

"isliye taki vo aage ke farms ko huamre aane ki khabar na de.",rambha uske dimagh se prabhavit hue bina nahi reh saki.usne apni seat belt kholi & uske kandhe pe sar rakh ke samne raste ko dekhne lagi.vijayant ne bhi farm pe aur logo se pichhle manager ke nikale jane ki vajah puchhi thi & unhone bhi vahi kahat tha jo rambha ne kaha tha.ab use mehsus hone laga tha ki shayad rambha pe uska shaq galat hai lekin vo shayad abhi bhi uske dimagh me tha & iska yehi matlab tha ki rambha shaq ke dayre se bahar nahi nikli thi.

sham ke 5 baj rahe the & car tezi se avantipur ki or badh rahi thi.vijayant ne bayi banh uthake rambha ko uske ghere me liya to rambha uske & karib aa gayi & uske seene pe hath firane lagi.dono khamoshi me 1 dusre ke jismo ke mastane ehsas ka lutf uthate hue rasta tay kar rahe the is baat se anjan ki 1 car lagatar unka peechha kar rahi thi jise chalane vale ke gaal pe 1 nishan tha.

Us shakhs ne pichhle 2 dino me Vijayant Mehra & uske karobar & parivar ke bare me internet se kafi jankari jutayi thi.Panchmahal pahunchane se pehle usne socha bhi nahi tha ki use vijayant ki zindagi ke bare me bhi jaanana padega magar kismat ne use aisa karne pe majboor kar diya tha.use to bas Rambha se matlab tha lekin Sameer ki gumshudgi ne sab gadbad kar diya tha.

jab vijayant rambha ke sath pehle farm pe gaya to vo fir se jhalla utha tha.farm me ghusne ka rasta use nahi sujha tha & use farm ke bahar ke chhote se bazar me tez mirch vale samose & bahut zyada mithi chai pi ke waqt kaatana pada.usne jaise hi faisla kiya ki ab use kisi tarah farm me ghusna hi hai,tabhi use vijayant ki Prado bahar aate dikhi.

is waqt vo shakhs Panchmahal & Avantipur ke raste me padne vale dusre mehra farm ke paas ke 1 kasbe ki 1 sarai me ruka tha.use ye to samajh aa gaya tha ki vijayant bete ko dhoondane nikla hai & usi silsile me farms ke chakkar laga raha hai.uski samajh me ye nahi aa raha tha ki vo rambha ko har jagah apne sath leke kyu ghum raha tha..kambakht vo 1 pal ko bhi akeli nahi reh pa rahi thi..usne cigarette vahi kamre ke farsh pe bujhai & apni machhardani uthake bistar pe chala gaya.raat ko vijayant farm chhodne vala nahi,itna use yakin tha.usne chadar pure sar tak odh li & sone laga,aakhir kal subah bahut savere uth use fir se rambha ka peechha karna tha.

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rambha farmhouse ki cottage me sasur ke kamre me uske bistar pe 1 nili denim ki mini skirt & slaty rang ka off-shoulder top pehne baithi thi.palang ke headboard se tek lagake kamar se neeche ke hisse ko dayi taraf mod vo kisi magazine ke panne palat rahi thi ki vijayant uske bagal me aa baitha.dono raat ka khana kha chuke the & uske pehle is farm ke bhi sare accounts check kar chuke the.yaha bhi unhe koi surag nahi mila tha.

rambha ne magazine kinare ki & gardan bayi taraf ghumayi & sasur ke labo se lab sata diye.dono haule-2 1 dusre ko chumne lage.vijayant ne uske top me se numaya daye kandhe pe hath rakha to vo khud hi uski or ghumi & apni zuban uske munh me ghusa di.vijayant uski zuban chusne laga & baya hath neeche uski skirt pe rakh diya & daye ko uski gardan ke neeche se hote uske daye kandhe pe rakh diya & vaha sehlate hue uski zuban ki harkato se mast hota raha.

vijayant ka josh badha to vo thoda aage hua & rambha fir pehle jaise hi headbord se ad ke baith gayi.vijayant ka hath uski skirt ke neeche jangh ke khule hisse pe bahut halke-2 ghum raha tha.rambha ko uske hath ki ye harkat bahut mast kar rahi thi.vijayant uski jangh ko masal nahi raha tha balki bahut halke se sehla raha tha.

ab vijayant ki zuban rambha ke munh me ghum rahi thi & uska lund uski track pant me bilkul tan gaya tha.vijayant use chumte hue hi thoda utha & uske kandhe pakad use neeche karne laga to uska ishara samajh rambha khud hi bistar pe let gayi.uske kamar ka neeche ka hissa abhi bhi dayi taraf muda hua tha & uske hath sasur ke chehre ko thame the.vijayant ghutno pe ho aage jhuka to uska lund bahu ki gand se takraya.

"yaha bhi koi surag hath nahi laga na?",rambha ne puchha to vo use uski gand pe dabate hue aur jhuka & rambha ke chehre ko pakad apne seene ko uski chhatiyo pe dabate hue badi shiddat se use chumne laga.lund ke ehsas ne rambha ki chut ko bhi kulbula diya.vo bhi nakhun se sasur ki dadhi kharonchti masti me khone lagi.kafi der tak dono aise hi chumte rahe.vijayant ko apne seene me rambha ke chubhte nipples ab jaise uske hotho ko bulawa dete mehsus ho rahe the.

"nahi lekin 1 aadmi mujhe kuchh ajib laga.",usne uske top ko upar kiya & uski aankho ke samne transparent straps vali kali bra me qaid masti me pal-pal phoolte uske seene ke bekal ubhar chamak uthe.usne bra ke upar se hi 2 halki kisses dono chhatiyo pe thonki to rambha ne masti me aankhe band ki & muskurate hue sasur ke baalo me ungliya firane lagi.vijayant ne apne ghutno se uski tango ko seedha kar diya tha & ab uske upar leta hua tha.

"uummmm..kaun?",vijayant uske seene ki vadi me apni garm sanse chhod raha tha & rambha ke jism ki aag unki tapish se & badh rahi thi.vo ab apni bhari janghe aaps me ragad apni chut ki besabri jatane lagi thi.vijayant ne uske top ko fir neeche kiya & uske kandho ko chumne laga.patle-2 transparent bar straps ko usne danto se utha ke kandho ke kinare pe kiya & fir kandho pe apni jibh firane laga.rambha ne josh me uske baal khinche & neeche se apni kamar bahut dhire se uchka uske lund ko mano jaldi usme samane ka nyota diya.

"naam nahi pata uska lekin vo sare staff ke sath khada tha & thoda ghabraya laga mujhe.",vijayant ki zuban uski gardan pe aayi to rambha ne sar bistar ke kinare se neeche kar diya taki vo aasani se uski gori gardan chum sake.vijayant uske dono kandho & gardan ke sath-2 uski thuddi ko bhi chum raha tha & jab masti me behaal ho rambha ne uske dono kaan pakad uske chehre ko apne gale se uthaya tabhi usne apne lab uske jism se hataye.

"ufffffff..halat kharab kar dete hain aap to!",rambha ne pyar se use jhidka,"..to us se kuchh puchha nahi aapne?",uski aankho me ab sasur ke jism ke nashe ke laal dore dikh rahe the.

"abhi nahi.kal savere us se akele me puchhunga.",rambha ne staff ke us aadmi ka naam jaanane ki koi khas koshish nahi ki thi & na hi uski baat se uski masti kam hui thi.vijayant ka shaq bahu pe aur kam ho raha tha magar abhi bhi uska dil use sameer ki gumshudgi ke mamle me puri tarah se bekasur nahi maan raha tha.

usne uske top ko upar khicnha to rambha ne apne hath sar ke peeche kar diye & agle hi pal top uske jism se juda ho farsh pe gira hua tha.vijayant utha tha to rambha ne fir se dono janghe aapas me bhinch li thi & dono ghutne dayi taraf mod liye the.uske hath sasur ki t-shirt me ghus gaye the & uske gathile jism pe badi hasrat se fir rahe the.1 baar fir vijayant uske rasile hotho ka ras pi raha tha.kuchh der tak rambha uski pith & uske seene pe apne nakhun firati rahi & fir usne sasur ki shirt nikal di.

"aahhhhh..!",vijayant jhuka & apna baya hath rambha ki dayi tang se hote uski jangh & fir uski kamar ke bagal se hote hue uske seene ke bagal me uski bra tak firaya & fir vahi pe tham liya.rambha ne bhi tange seedhi kar li & fir se sasur ke sar ko tham liya & uski kiss ka jawab dene lagi.vijayant uske upar jhuka use chum raha tha & uska baya hath bahu ki pith ke neeche ghus raha tha.hath neeche pahunch bra ke hooks ko dhoond raha tha.is sab ke dauran kiss jari thi.hooks milte hi unhe khol diya gaya & bra ko vijayant ne uske daye bazu se nikala & fir seene ko nanga karte hue uske baye kandhe pe atka diya & fir chumte hue dono hatho se rambha ke haseen chehre ko tham liya.

"uunnhhhhh.....huuuunnhhhh..!",rambha ab bahut mast ho chuki thi & uski panty uske ras se bhigne lagi thi.vijayant ne bra ko uske baye bazu se nikala & uske sar ke peechhe farsh pe gira diya to rambha ne apna daya hath uski pith pe rakh diya & baye ko apne sar ke bagal me bistar pe.vijayant uski gardan pe bayi taraf chum raha tha.

"samajh me nahi aata..",usne sasur ke baal pakad ke uske sar ko kandhe se uthaya & apni bayi choochi pe rakha,"..uunnhhhhh..sameer aise kaha gayab ho gaya & abhi tak koi surag bhi nahi mil raha hai....aannnnhhhhhh..!",vijayant ke honth ab uski dayi choochi pe the & use pura ka pura munh me bharne ki koshish kar rahe the.achanak ki gayi is harkat se rambha ki chut ki kasak charam pe pahunch gayi & usne bechaini me sar upar uthaya & uska jism jhatke khane laga.vijayant abhi bhi uski choochi ko munh me bharne ki koshish me juta tha & vo jhade ja rahi thi.

rambha ke daye hath ke nakhun vijayant ke baye kandhe me dhans gaye the.vo kanp rahi thi & vijayant uski choochiyon ko chuse ja raha tha.rambha ka sar vaps bistar ke kinare pe aa gaya tha & vo aahen bhar rahi thi.vijayant ne baye ghutne ko uski tango ke beech ghusa unhe failaya & fir aage jhukte hue rambha ke honth chume.thodi der baad vo utha to uske labo se lab chiupkaye rambha bhi uchki & apne hath neeche le jake uski track pant ko sarkane lagi.

"fikr mat karo.main uska pata laga ke hi dum lunga.",vijayant ne usi waqt kamar neeche karte hue lund ko rambha ki chut pe daba diya.rambha ke hath dhile ho dono jismo ke beech fans gaye & usne sar peechhe jhatka.vijayant jhuka & uski gori gardan ko chumne laga & fir uske hoth dobara neeche ho uski premika ki choochiyon se chipak gaye.uske hath rambha ki skirt ke hooks khol rahe the & agle hi pal rambha ko skirt & panty 1 sath uski makhmali tango se fisalti uske jism se alag hoti mehsus hui.rambha ab sasur ke bistar me bilkul nangi ho chuki thi.

"oohhhhhhhhhhh....aannnnnhhhhhhhhh..!",vijayant ne dono tange uski tangao ke beech ghusa apne ghutno se unhe aur faila diya & fir aage jhuka to rambha ne khud uchak ke uske hotho ka apne hotho se istekbal kiya.vijayant ne apne badan ko thoda sa tedha kiya & baye hath ko neeche kar uski chut ke laal dane pe gol-2 ungli ghumane laga.rambha josh se kanpne lagi & apni zuban masti me vijayant ki zuban se ladane lagi.

"oonnhhhhhhhh..!",vijatan ghutno pe baith uske seene pe jhuk ke uski chhatiyo pe apna munh chalane laga.uski ungli ne dane ko ragad-2 ke rambha ko masti me dusri baar jhadne pe majbur kiya & abhi vo sambhli bhi nahi thi ki ungli ko uski kasi chut me ghusa andar kuchh tatolne laga.

"aannhhh..hunnhhhh..!",rambha kamar uchka rahi thi & vo ab uske gol pet ko chum raha tha.uski ungli abhi bhi andar kuchh tatol rahi thi & rambha ko samajh me nahi aa raha tha ki vo kar kya raha hai.

"AANNHHHHHHH..!",tabhi jaise uske badan & zehan me 1 dhamaka sa hua.uski chut ke andar ki deewar pe vijayant ki ungli ne vo jagah dhund nikali thi jo shayad kisi aurat ke jism ki sabse nazuk jagah hoti hai,jise jankar g-spot kehte hain.jism me jaise masti sailab ban ke umad padi thi.itni masti ki vo use seh nahi pa rahi thi.ye jhadna tha ya fir us se bhi kuchh aur zyada.besabri itni zyada thi ki usne sasur ka hath pakad apni chut se jhatke se alag kiya & apni kamar uchkane lagi.vo apni hi duniya me kho gayi thi jaha vo charo taraf rangin baadlo se bhare aasman me ud rahi thi.khushi itni zyada thi ki uska dil use bardasht nahi kar paya tha & vo subakne lagi thi.

jab thodi der baad vo sayant hui & aankhe halke se kholi to bagal me use uske baal sanwarta vijayant adhleta nazar aaya.uske dil me use us jannat ka nazara dikhane vale shakhs ke liye bahut pyar umad pada & usne uske gale me baahen daal badi shiddat se chuma & fir bistar pe lita diya.vo ab apne sasur ko apne pyar se sarabor kar dena chahti thi.

usne use lita diya & uske seene pe apni chhatiya dabati use chumne lagi.uske baad neeche aayi & uske baalo bhare seene pe halke-2 chumne lagi.vijayant uske jism ko dhire-2 sehla raha tha.rambha ke hotho ki mastani harkaten uske josh ko badah rahi thi.rambha ghane baalo ke beecho-beech chumti hui neeche uski nabhi tak aayi & vaha apni jibh firayi.

"ohhhh..!",vijayant ne josh me aah bhari.rambha ne uski nabhi ke neeche bahut dhime-2 kaatna shuru kar diya.vijayant to josh se pagal ho utha.rambha ne kaatate hue hi uski pant neeche sarkayi & fir uski tango ke beech baith pant ko nikal diya.vijayant ke safed underwear me uska lund bilkul tana dikh raha tha.

rambha ne apne baal jhatke & unhe daye kandhe ke uapr se aage layi & unke siro ko apne sasur ke seene pe firaya.vijayant to masti me behaal ho gaya.baal seene se uske pet se hote hue uske underwear pe aaye to apne nazuk ango pe baalo ke ehsas se vo tadap utha.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 14 Dec 2014 06:13

जाल पार्ट--33

गतान्क से आगे.

रंभा उसे देख मुस्कुराइ & अपने बाए हाथ से उसके लंड को अंडरवेर के उपर से ही दबाने लगी.जब उसने विजयंत के आंडो को ज़ोर से दबाया तो उसने कमर उचका के,आँखे बंद कर ज़ोर से आह भरी.रंभा झुकी & अंडरवेर के उपर से ही आंडो को दबाते हुए लंड को काटने लगी.विजयंत का तो हाल बुरा हो गया,उसे लगा की अब वो झाड़ ही जाएगा.

रंभा मुस्कुराइ & सर उसकी गोद से उठा अंडरवेर को निकाल दिया & फिर बालो के सिरो को उसके लंड & आंडो पे फिराया.विजयंत इस बार सूपदे की कोमल त्वचा पे बालो के एहसास से और शिद्दत से तडपा.रंभा झुकी & बाए हाथ की हथेलियो को आंडो पे जमाते हुए उसने लंड के निचले हिस्से पे उंगलियालपेटी & उसके मत्थे को मुँह मे भर लिया.विजयंत तो अब मस्ती मे मदहोश हो गया.रंभा का कोमल मुँह उसके सूपदे से प्रेकुं को चाते जा रहा था.

उसने अपनी सारी इच्छा-शक्ति का ज़ोर लगाके खुद को झड़ने से रोका.रंभा उसके लंड पे मुँह चला रही थी & वो उसके चेहरे पे हाथ.कुच्छ देर बाद रंभा ने लंड को मुँह से निकाला,उसकी चूत मे फिर से कसक उठ रही थी.वो उठी & अपने घुटने ससुर की कमर के दोनो ओर जमाते हुए अपनी चूत को लंड पे झुका दिया.

"ऊहह..!",लंड उसकी चूत मे समाने लगा.उसने 2 इंच लंड बाहर ही रहने दिया & फिर उसपे उच्छलने लगी.अपने ससुर की जाँघो को थामे उसकी नज़रो से नज़रे मिलाती वो उस से चुद रही थी.विजयंत ने उसकी कमर थाम लंड को जड तक घुसाना चाहा तो उसने उसे रोक दिया.

"पूरा लंड तो अंदर जाने दो!",उसने उसकी कमर के मांसल बंगलो को मसला.

"उन्ह..हुंग..बिल्कुल नही..आपका बहुत बड़ा है..ऊव्ववव!",वो उसके सीने पे हाथ जमा आगे झुकी तो विजयंत ने उचक के उसकी बाई चूची मुँह मे भर निपल पे काट लिया.रंभा फ़ौरन पीछे हो गयी & थोड़ा पीछे झुकते हुए जाँघो पे हाथ रख & कभी उन्हे सहलाते हुए कमर हिलाके ससुर से चुदवाने लगी.

"अच्छा भाई ठीक है..तो कम से कम अपनी चूचिया तो पिला दो हमे!",उसने उसकी गंद की फांको को दबोचा.

"उउन्न्ं..ना!आप काटते हैं उन्हे.",विजयंत बिस्तर से उठने लगा तो रंभा ने फ़ौरन बाया घुटना बिस्तर से उठा उसे ससुर के सीने पे रख दिया & उठने से रोक दिया.विजयंत उसकी इस अदा पे मुस्कुरा के उसके पाँव को पकड़ उसकी उंगलकिया चूसने लगा.रंभा ने अपने बालो मे बड़े मादक अंदाज़ मे उंगलिया फिराते हुए आँखे बंद कर आह भरी & अपनी चूचियाँ आगे करते हुए जिस्म को कमान की तरह मोड़ा.उसका जिस्म विजयंत की इस हरकत से मस्ती की कगार पे पहुँच गया था & वो झाड़ गयी थी.

अधखुली आँखो से रंभा ने देखा कि विजयंत फिर उठने वाला है तो उसने फ़ौरन उसके सीने पे रखी टांगको दाई तरफ घुमाया & फिर उसके लंड पे ही बैठे हुए बदन को दाए तरफ घुमाने लगी.ऐसा करने से विजयंत के लंड पे उसकी चूत गोलाई मे घूमी & वो मस्ती मे कराहा.रंभा ने पूरा जिस्म घुमा पीठ विजयंत की ओर कर दी & आगे झुक उसकी मज़बूत टाँगो को पकड़ फिर से कमर हिलाने लगी.विजयंत लेटे-2 ही अपने गर्म हाथ उसकी पीठ से लेके गंद तक फिराने लगा.रंभा अब बहुत मस्त हो गयी थी & बस लंड पे कूदे जा रही थी.

जिस्म की गर्मी जब बहुत बढ़ गयी तो उसका दिल महबूब के होंठो की हसरत करने लगा & वो पीछे होने लगी.उसने अपने तलवे बिस्तर पे जमाए & हाथ पीछे झुक बिस्तर पे & अपनी कमर बहुत तेज़ी से हिलाने लगी.इतना शक्तिशाली मर्द उसके पैर चूमने के बाद उसके नीचे उसके मुताबिक चुदाई कर रहा था,इस ख़याल ने उसकी खुमारी & बढ़ा दी थी & वो अब बस झड़ने ही वाली थी.

"आननह..!",विजयंत ने उसकी गंद की दरार मे उंगली फिराई तो वो & ना सह सकी & चिहुनक के आगे होते हुए झाड़ गयी.विजयंत फ़ौरन उठ बैठा & पीछे से ही उसकी मोटी,कसी चूचियो को दबोचा & फिर बाई बाँह को उसकी कमर मे लपेटे दाई तरफ करवट लेते हुए रंभा को पहले बिस्तर पे करवट से लिटाया & फिर और घूमते हुए उसे पेट के बल लिटाया & फिर उसके उपर सवार हो गया.

बहू की मादक अदाओं ने उसे बहुत मस्त कर दिया था.उसने अपने दोनो घुटने जोकि रंभा की फैली टाँगो के बीच बिस्तर पे टीके थे,को बाहर कर उन्ही से धकेल के उसकी टाँगो को आपस मे बिल्कुल सटा दिया & फिर 1 ज़ोर का धक्का दिया.

"हाईईईईई....माआंन्‍नननणणन्..!",रंभा ने सर उपर झटका.उसकी कसी चूत अब और कस गयी थी & ससुर का लंबा,मोटा,तगड़ा लंड अब चूत की दीवारो को बहुत बुरी तरह रगड़ रहा था.लंड उसकी गंद की मोटी फांको के बावजूद जड तक समा गया था & अगले धक्के पे उसने रंभा की कोख पे चोट की.कमरा क्या पूरी कॉटेज रंभा की मस्त आहो से भर गयी.विजयंत उसके उपर झुका उसकी चूचियों मसलता ज़ोरदार चुदाई कर रहा था.रंभा ने 1 बहुत ज़ोर की आह भारी & फिर झाड़ गयी.

विजयंत ने उसकी टाँगे वापस फैलाई & उनके बीच आ गया & उसकी गंद दबाते हुए चोदने लगा.कुच्छ देर बाद रंभा भी कमर हिला-2 के उसका जवाब देने लगी.विजयंत घुटनो पे बैठ गया & थोड़ा उपर हुआ तो रंभा भी अपने घुटनो & हाथो पे हो गयी & खुद ही कमर आगे-पीछे कर उस से चुदवाने लगी.विजयंत ने उसकी कमर थाम ज़ोरदार धक्के लगाने शुरू कर दिए.रंभा सर झटकते आहे भरे जा रही थी.उसके हाथ बिस्तर की चादर को भिंचे हुए थे.

1 साया कॉटेज की ओर बढ़ रहा था.वो कॉटेज की खिड़की तक आ के ठिठक गया था.वो कुच्छ सोच रहा था.उसने अपनी कलाई पे बँधी घड़ी देखी,11 बज रहे थे.1 घंटे से थोड़ा उपर हो गया था विजयंत को कॉटेज के अंदर गये लेकिन वो जगा था शायद क्यूकी उसके कमरे की बत्ती जाली दिख रही लेकिन क्या इस वक़्त..

"आआहह..!",रंभा चीखी & बिस्तर पे निढाल हो गयी.वो कोख पे अपने ससुर के लंड की & चोटें बर्दाश्त नही कर पाई थी & झाड़ गयी थी & इस बार उसकी चूत की उसी मस्तानी हरकत ने विजयंत के लंड को भी दबोच के झड़ने पे मजबूर कर दिया था.विजयंत उसके उपर गिरा आहे भरता हुआ अपना गाढ़ा वीर्य छ्चोड़े चला जा रहा था जोकि सीधा रंभा की कोख मे जा रहा था.रंभा भी उसके साथ-2 मस्ती के आसमान मे उड़ी जा रही थी.

"ठक-2!",किसी ने दरवाज़ा खाटख़टाया & दोनो चौंक गये & 1 दूसरे को देखने लगे.विजयंत ने लंड बहू की चूत से खींचा & उसे उसके कमरे मे जाने का इशारा किया.रंभा ने उसकी बात मानी & विजयंत कपड़े पहन दरवाज़े की ओर चला गया.

"न-नमस्ते..सर..!",विजयंत मेहरा ने दरवाज़ा खोला तो सामने वही स्टाफ मेंबर खड़ा था जिसके बारे मे थोड़ी देर पहले उसने रंभा को बताया था.वो लगभग 30-35 बरस का आदमी था & घबराया हुआ लग रहा था.

"बोलो,क्या बात है?",विजयंत ने ट्रॅक पॅंट के उपर ड्रेसिंग-गाउन पहन लिया था & उसकी जेबो मे हाथ डाले खड़ा था.उसकी रोबिली आवाज़ ने सामने खड़े शख्स को & घबरा दिया.

"ज-जी..",वो इधर-उधर देख रहा था.

"अंदर आओ.",विजयंत की आवाज़ के रोब से बँधा वो अंदर आ गया,"बैठो.",घबराया सा वो आदमी कॉटेज के ड्रॉयिंग रूम के सोफे के कोने पे बैठ गया,"ये लो.",विजयंत ने पानी का ग्लास उसे दिया तो वो गतगत पी गया,"अब बताओ क्या बात है.",विजयंत उसके सामने बैठ गया.

"स-सर..मेरा नाम मनोज है & मैं यही काम करता हू."

"हूँ.पोल्ट्री विंग तुम्ही देखते हो.मुझे पता है.",विजयंत ने उसपे शुबहे होने पे उसके बारे मे मॅनेजर से पुच्छ लिया था.उसने तो सोचा था कि अगली सुबह वो उसे तलब करेगा लेकिन यहा तो वो खुद ही उसके पास पहुँच गया था.

"सर,समीर सर गायब हुए तो मुझे लगा ये बात आपको बता देनी चाहिए ल-लेकिन मुझे पता नही था कि ऐसा होगा न-नही तो पहले ही सब बता देता."

"आख़िर बात क्या है बताओ तो!",विजयंत अब झल्ला गया था,"..& घबराओ मत तुम्हे कुच्छ नही होगा."

"सर,समीर सर ने कुच्छ दिनो पहले पंचमहल मे सभी स्टाफ मेंबर्ज़ के लिए 1 पार्टी दी थी..नमस्ते,मेडम!..",रंभा भी वाहा आ गयी थी.विजयंत ने उसकी ओर देखा तो उसने सर हिलाके पार्टी होने की बात मानी,"..वाहा फार्म नो.1 का पुराना मॅनेजर हरपाल सिंग भी आया था.वो समीर सर से बार-2 अपना तबादला क्लेवर्त करने को बोल रहा था लेकिन वो मान नही रहे थे क्यूकी उसे वैसे फार्म का तजुर्बा नही था.."

"..पार्टी मे शराब भी थी & हरपाल ने कुच्छ ज़्यादा ही पी ली थी.मैं भी उसी के साथ बैठा था.दरअसल मुझे उसके साथ ही लौटना था.वो नशे मे धुत था & मुझे उसकी कार ड्राइव करनी पड़ी.उस रात मुझे उसके ही फार्म पे रुकना था.रास्ते भर वो यही बोलता रहा कि वो समीर सर को मज़ा चखा देगा.वो उसे उसके परिवार के साथ नही रहने दे रहा तो वो भी उसे उसके परिवार से अलग कर के दम लेगा.."

"..उस वक़्त तो मैने सोचा की वो नशे मे बक रहा है लेकिन समीर सर गायब हुए तो मेरा माथा ठनका & मैने हरपाल को फोन किया लेकिन उसका फोन नही मिला,मैने उसके घर पे फोन किया & उसके घरवालो ने कहा कि वो नौकरी ढूँदने के चक्कर मे बॅंगलुर गया हुआ है तो मैने उनसे उसका मोबाइल नंबर माँगा लेकिन उस नंबर पे भी मैं उस से बात नही कर पाया."

"तुमने ये बातें पोलीस को क्यू नही बताई?"

"सर..वो..",उसने माथे से पसीना पोंच्छा,"..सर..हरपाल की बहन हिना आवंतिपुर मे रहती है &..और.."

"तुम दोनो 1 दूसरे को चाहते हो?",रंभा ने बात पूरी की,"..& तुम्हे लगा कि होने वाले साले को यू फाँसना ठीक नही."

"मेडम..वो..मुझे अभी तक ऐसा लग रहा था कि हरपाल बेकसूर है लेकिन मैने हिना से आज ही बात की & उसने भी अपने भाई से उस रोज़ से बात नही की जिस रोज़ समीर सर पंचमहल से निकले थे.सर,मैं सच कहता हू मेरा & कोई इरादा नही था..मैं तो बस हिना के चलते..-",विजयंत ने हाथ उठाके उसे आगे बोलने से रोक दिया.

"तुम ये बात अब किसी को नही बताओगे,पोलीस को भी नही.मैं नही चाहता कि हरपाल होशियार हो जाए & तुम्हे घबराने की कोई ज़रूरत नही है.तुम अपनी प्रेमिका से भी पहले जैसे ही मिलते रहो,बाते करते रहो लेकिन अगर हरपाल का कोई भी सुराग मिले,तो फ़ौरन हमे बताओगे..",विजयंत ने 1 काग़ज़ पे उसे 1 नंबर लिख के दिया,"..ये हमारा फोन नंबर है जिसपे तुम हमे कॉंटॅक्ट कर सकते हो.अब हमे हरपाल का क्लेवर्त के घर का पता,उसकी बेहन का पता & उसके बारे मे जो भी जानते हो सब बताओ."

30 मिनिट बाद विजयंत & रंभा फिर से 1 दूसरे की बाहो मे समाए थे,"उउम्म्म्म..अब आगे क्या करना है?..आहह..!",कंबल के नीचे विजयंत उसकी गंद को मसलते हुए उसकी गर्दन चूम रहा था.

"अब हम कल सवेरे आवंतिपुर जाएँगे & तुम हिना से मिल के ये पता लगाने की कोशिश करोगी की उसके भाई ने इधर उस से कोई कॉंटॅक्ट किया है या नही,उसके बाद देखेंगे क्या करना है.",विजयंत ने उसकी चूचियो को चूसा तो रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली & ससुर के बाल पकड़ उसके सर को सीने पे & दबा दिया.अब उसे भी ये लग रहा था कि समीर की गुमशुदगी मे उसके बाप का हाथ नही है लेकिन ये भी तो हो सकता था कि उसने 1 बहुत बड़ा जाल बुना हो लेकिन फिर वो उसे साथ लिए क्यू घूम रहा था & जैसे उसके दिमाग़ मे बिजली सी कौंधी..विजयंत उसपे शक़ कर रहा है!

"आननह..!",उसने उसकी चूत मे उंगली घुसा दी थी.रंभा अब सब समझ गयी थी..कैसी अजीब बात थी वो विजयंत पे शक़ कर रही थी & वो उसपे!..वो मुस्कुराइ & थोड़ा उचक के उसकी चूचियाँ चूस्ते विजयंत के सर को चूम लिया & मस्ती मे खो गयी.

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बलबीर मोहन ब्रिज कोठारी के रोज़मर्रा की ज़िंदगी के बारे मे लगभग सब कुच्छ जान गया था मसलन वो कितने बजे दफ़्तर जाता था,उसके मोबाइल का प्राइवेट नंबर क्या था,वग़ैरह-2 लेकिन अभी तक उसे समीर की गुमशुदगी से जोड़ने वाला कोई सिरा नही नज़र आया था.उसे ये भी पता चल गया था कि वो औरतो का शौकीन था & अपनी बीवी सोनिया से लगभग रोज़ ही बेवफ़ाई करता था लेकिन अभी तक उसे उसकी महबूबाओ मे से भी कोई शक़ करने लायक नही दिखी थी.

अभी भी वो 1 रेस्टोरेंट की टेबल पे बैठा ब्रिज को अपने बॅंकर के साथ रात का खाना खाते देख रहा था.बलबीर को अभी तक लगा नही था कि ब्रिज का इस घटना के पीछे कोई हाथ हो सकता है लेकिन उसे पूरी तसल्ली तो करनी ही थी.उसने अपना खाना ख़त्म किया & फिर वेटर 1 सुफ्ले ले आया.उसने उसका 1 नीवाला लिया..बहुत मज़ेदार था.वो दिल ही दिल मे मुस्कुराया..इस खाने का भी बिल विजयंत की फीस मे जुड़ने वाला था..जासूसी मे जितनी भी मुश्किलें हो उसमे कुच्छ फ़ायदे तो थे ही!

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क्रमशः.......

JAAL paart--33

gataank se aage.

rambha use dekh muskurayi & apne baye hath se uske lund ko underwear ke upar se hi dabane lagi.jab usne vijayant ke ando ko zor se dabaya to usne kamar uchka ke,aankhe band kar zor se aah bhari.rambha jhuki & underwear ke uapr se hi ando ko dabate hue lund ko kaatne lagi.vijayant ka to haal bura ho gaya,use laga ki ab vo jhad hi jayega.

rambha muskurayi & sar uski god se utha underwear ko nila diya & fir baalo ke siro ko uske lund & ando pe firaya.vijayant is baar supade ki komal tvacha pe baalo ke ehsas se aur shiddat se tadpa.rambha jhuki & baye hath ki hathelo ko ando pe jamate hue usne lund ke nichle hisse pe ungliyalapeti & uske matthe ko munh me bhar liya.vijayant to ab masti me madhosh ho gaya.rambha ka komal munh uske supade se precum ko chate ja raha tha.

usne apni sari ichha-shakti ka zor lagake khud ko jhadne se roka.rambha uske lund pe munh chala rahi thi & vo uske chehre pe hath.kuchh der baad rambha ne lund ko munh se nikala,uski chut me fir se kasak uth rahi thi.vo uthi & apne ghutne sasur ki kamar ke dono or jamate hue apni chut ko lund pe jhuka diya.

"oohhhhhhh..!",lund uski chut me samane laga.usne 2 inch lund bahar hi rehne diya & fir uspe uchhalne lagi.apne saur ki jangho ko thame uski nazro se nazrren milati vo us se chud rahi thi.vijayant ne uski kamar tham lund ko jud tak ghusana chaha to usne use rok diya.

"pura lund to andar jane do!",usne uski kamar ke mansal banglo ko masla.

"unh..hunh..bilkul nahi..aapka bahut bada hai..oowwww!",vo uske seene pe hath jama aage jhuki to vijayant ne uchak ke uski bayi choochi munh me bhar nipple pe kaat liya.rambha fauran peechhe ho gayi & thoda peechhe jhukte hue jangho pe hath rakh & kabhi unhe sehlate hue kamar hilake sasur se chudne lagi.

"achha bhai thik hai..to kam se kam apni choochiya to pila do humen!",usne uski gand ki fanko ko dabocha.

"uunnn..na!aap kaatate hain unhe.",vijayant bistar se uthne laga to rambha ne fauran baya ghutna bistar se utha use sasur ke seene pe rakh diya & uthne se rok diya.vijayant uski is ada pe muskura ke uske panv ko pakad uski unglkiya chusne laga.rambha ne apne baalo me bade maadak andaz me ungliya firate hue aankhe band kar aah bhari & apni choochiyan aage karte hue jism ko kaman ki tarah moda.uska jism vijayant ki is harkat se masti ki kagar pe pahunch gaya tha & vo jhad gayi thi.

adhkhuli aankho se rambha ne dekha ki vijayant fir uthne vala hai to usne fauran uske seene pe rakhi tangko dayi taraf ghumaya & fir uske lund pe hi baithe hue badan ko daye taraf ghumane lagi.aisa krne se vijayant ke lund pe uski chut golai me gumi & vo masti me karaha.rambha ne pura jism ghuma pith vijayant ki or kar di & aage jhuk uski mazbut tango ko pakad fir se kamar hilane lagi.vijayant lete-2 hi apne garm hath uski pith se leke gand tak firane laga.rambha ab bahut mast ho gayi thi & bas lund pe kude ja rahi thi.

jism ki garmi jab bahut badh gayi to uska dil mehboob ke hotho ki hasrat karne laga & vo peechhe hone lagi.usne apne talve bistar pe jamaye & hath peechhe jhuk bistar pe & apni kamar bahut tezi se hilane lagi.itna shaktishali mard uske pair chumne ke baad uske neeche uske mutabik chudai kar raha tha,is khayal ne uski khumari & badha di thi & vo ab bas jhadne hi wali thi.

"aannhhhhhhh..!",vijayant ne uski gand ki darar me ungli firayi to vo & na seh saki & chihunk ke aage hote hue jhad gayi.vijayant fauran uth baitha & peechhe se hi uski moti,kasi choochiyo ko dabocha & fir bayi banh ko uski kamar me lapte dayi taraf karwat lete hue rambha ko pehle bistar pe karwat se litaya & fir aur ghumte hue use pet ke bal litaya & fir uske upar sawar ho gaya.

bahu ki madak adaon ne use bahut mast kar diya tha.usne apne dono ghutne joki rambha ki faili tango ke beech bistar pe tike the,ko bahar kar unhi se dhakel ke uski tango ko aapas me bilkul sata diya & fir 1 zor ka dhakka diya.

"haiiiiii....maaaannnnnnnn..!",rambha ne sar upar jhatka.uski kasi chut ab aur kas gayi thi & sasur ka lumba,mota,tagda lund ab chut ki deewaro ko bahut buri tarah ragad raha tha.lund uski gand ki moti fanko ke bavjood jud tak sama gaya tha & agle dhakke pe usne rambha ki kokh pe chot ki.kamra kya puri cottage rambha ki mast aaho se bhar gayi.vijayant uske upar jhuka uski chhatiya masalta zordar chudai kar raha tha.rambha ne 1 bahut zor ki aah bhari & fir jhad gayi.

vijayant ne uski tange vapas failayi & unke beech aa gaya & uski gand dabate hue chodne laga.kuchh der baad rambha bhi kamar hilka-2 ke uska jawab dene lagi.vijayant ghutnoe pe baith gaya & thoda upar hua to rambha bhi apne ghutno & hatho pe ho gayi & khud hi kamar aage-peechhe kar us se chudne lagi.vijayant ne uski kamar tham zordar dhakke lagane shuru kar diye.rambha sar jhatakte aahe bhare ja rahi thi.uske hath bistar ki chadar ko bhinche hue the.

1 saya cottage ki or badh raha tha.vo cottage ki idhiyo tak aa ke thithak gaya tha.vo kuchh soch raha tha.usne apni kalai pe bandhi ghadi dekhi,11 baj rahe the.1 ghante se thoda upar ho gaya tha vijayant ko cottage ke andar gaye lekin vo jaga tha shayad kyuki uske kamre ki batti jali dikh rahi lekin kya is waqt..

"aaaahhhhhhhhh..!",rambha chikhi & bistar pe nidhal ho gayi.vo kokh pe apne sasur ke lund ki & choten bardasht nahi kar payi thi & jhad gayi thi & is baar uski chut ki usi mastani harkat ne vijayant ke lund ko bhi daboch ke jhadne pe majboor kar diya tha.vijayant uske upar gira aahe bharta hua apna gadha virya chhode chala ja raha tha joki seedha rambha ki kokh me ja raha tha.rambha bhi uske sath-2 masti ke aasman me udi ja rhi thi.

"thuk-2!",kisi ne darwaza thakthakaya & dono chaunk gaye & 1 dusre ko dekhne lage.vijayant ne lund bahu ki chut se khincha & use uske kamre me jane ka ishara kiya.rambha ne uski baat mani & vijayant kapde pehan darwaze ki ro chala gaya.

"N-namaste..sir..!",Vijayant Mehra ne darwaza khola to samne vahi staff member khada tha jiske bare me thodi der pehle usne Rambha ko bataya tha.vo lagbhag 30-35 baras ka aadmi tha & ghabraya hua lag raha tha.

"bolo,kya baat hai?",vijayant ne track pant ke upar dressing-gown pehan liya tha & uski jebo me hath dale khada tha.uski robili aavaz ne samne khade shakhs ko & ghabra diya.

"j-ji..",vo idhar-udhar dekh raha tha.

"andar aao.",vijayant ki aavaz ke rob se bandha vo andar aa gaya,"baitho.",ghabraya sa vo aadmi cottage ke drawing room ke sofe ke kone pe baith gaya,"ye lo.",vijayant ne pani ka glass use diya to vo gatagat pi gaya,"ab batao kya baat hai.",vijayant uske samne baith gaya.

"s-sir..mera naam Manoj hai & main yehi kaam karta hu."

"hun.poultry wing tumhi dekhte ho.mujhe pata hai.",vijayant ne uspe shubahe hone pe uske bare me manager se puchh liya tha.usne to socha tha ki agli subah vo use talab karega lekin yaha to vo khud hi uske paas pahunch gaya tha.

"sir,sameer sir gayab hue to mujhe laga ye baat aapko bata deni chahiye l-lekin mujhe pata nahi tha ki aisa hoga n-nahi to pehle hi sab bata deta."

"aakhir baat kya hai batao to!",vijayant ab jhalla gaya tha,"..& ghabrao mat tumhe kuchh nahi hoga."

"sir,sameer sir ne kuchh dino pehle Panchmahal me sabhi staff members ke liye 1 party di thi..namaste,madam!..",rambha bhi vaha aa gayi thi.vijayant ne uski or dekha to usne sar hilake party hone ki baat mani,"..vaha farm no.1 ka purana manager Harpal Singh bhi aaya tha.vo sameer sir se baar-2 apna tabadala Clayworth karne ko bol raha tha lekin vo maan nahi rahe the kyuki use vaise farm ka tajurba nahi tha.."

"..party me sharab bhi thi & harpal ne kuchh zyada hi pi li thi.main bhi usi ke sath baitha tha.darasal mujhe uske sath hi lautna tha.vo nashe me dhut tha & mujhe uski car drive karni padi.us raat mujhe uske hi farm pe rukna tha.raste bhar vo yehi bolta raha ki vo sameer sir ko maza chakha dega.vo use uske parivar ke sath nahi rehne de raha to vo bhi use uske parivar se alag kar ke dum lega.."

"..us waqt to maine socha ki vo nashe me bak raha hai lekin sameer sir gayab hue to mera matha thanka & maine harpal ko fone kiya lekin uska fone nahi mila,maine uske ghar pe fone kiya & uske gharwalo ne kaha ki vo naukri dhoondne ke chakkar me Bangalore gaya hua hai to maine unse uska mobile number manga lekin us number pe bhi main us se baat nahi kar paya."

"tumne ye baaten police ko kyu nahi batayi?"

"sir..vo..",usne mathe se paseena ponchha,"..sir..harpal ki bahan Hina Avantipur me rehti hai &..aur.."

"tum dono 1 dusre ko chahte ho?",rambha ne baat puri ki,"..& tumhe laga ki hone vale sale ko yu phansana thik nahi."

"madam..vo..mujhe abhi tak aisa lag raha tha ki harpal bekasur hai lekin maine hina se aaj hi baat ki & usne bhi apne bhai se us roz se baat nahi ki jis roz sameer sir panchmahal se nikle the.sir,main sach kehta hu mera & koi irada nahi tha..main to bas hina ke chalte..-",vijayant ne hath uthake use aage bolne se rok diya.

"tum ye baat ab kisi ko nahi bataoge,police ko bhi nahi.main nahi chahta ki harpal hoshiyar ho jaye & tumhe ghabrane ki koi zarurat nahi hai.tum apni premika se bhi pehle jaise hi milte raho,baate karte raho lekin agar harpal ka koi bhi surag mile,to fauran hume bataoge..",vijayant ne 1 kagaz pe use 1 number likh ke diya,"..ye humara fone number hai jispe tum humse contact kar sakte ho.ab hume harpal ka clayworth ke ghar ka pata,uski behan ka pata & uske bare me jo bhi jante ho sab batao."

30 minute baad vijayant & rambha fir se 1 dusre ki baaho me samaye the,"uummmm..ab aage kya karna hai?..aahhhh..!",kambal ke neeche vijayant uski gand ko maslate hue uski gardan chum raha tha.

"ab hum kal savere avantipur jayenge & tum hina se mil ke ye pata lagane ki koshish karogi ki uske bhai ne idhar us se koi contact kiya hai ya nahi,uske baad dekhenge kya karna hai.",vijayant ne uski chhatiyo ko chusa to rambha ne masti me aankhe band kar li & sasur ke baal pakad uske sar ko seene pe & daba diya.ab use bhi ye lag raha tha ki sameer ki gumshudgi me uske baap ka hath nahi hai lekin ye bhi to ho sakta tha ki usne 1 bahut bada jaal buna ho lekin fir vo use sath liye kyu ghum raha tha & jaise uske dimagh me bijli si kaundhi..vijayant uspe shaq kar raha hai!

"aannhhh..!",usne uski chut me ungli ghusa di thi.rambha ab sab samajh gayi thi..kaisi ajeeb baat thi vo vijayant pe shaq kar rahi thi & vo uspe!..vo muskurayi & thoda uchak ke uski choochiyan chuste vijayant ke sar ko chum liya & masti me kho gayi.

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Balbir Mohan Brij Kothari ke rozmarra ki zindagi ke bare me lagbhag sab kuchh jaan gaya tha maslan vo kitne baje daftar jata tha,uske mobile ka private number kya tha,vagairah-2 lekin abhi tak use sameer ki gumshudgi se jodne vala koi sira nahi nazar aaya tha.use ye bhi pata chal gaya tha ki vo aurato ka shaukeen tha & apni biwi Soniya se lagbhag roz hi bewafai karta tha lekin abhi tak use uski mehboobao me se bhi koi shaq karne layak nahi dikhi thi.

abhi bhi vo 1 restaurant ki table pe baitha brij ko apne banker ke sath raat ka khana khate dekh raha tha.balbir ko abhi tak laga nahi tha ki brij ka is ghatna ke peechhe koi hath ho sakta hai lekin use puri tasalli to karni hi thi.usne apna khana khatm kiya & fir waiter 1 souffle le aaya.usne uska 1 nivala liya..bahut mazedar tha.vo dil hi dil me muskuraya..is khane ka bhi bill vijayant ki fees me judne vala tha..jasusi me jitni bhi mushkilen ho usme kuchh fayde to the hi!

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kramashah.......