Recession Ki Maar -रिसेशन की मार compleet

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rajaarkey
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Recession Ki Maar -रिसेशन की मार compleet

Unread post by rajaarkey » 13 Dec 2014 01:21

रिसेशन की मार




लेखक : दा_ग्रेट_वाररियर

मेरा नाम स्नेहा है. मैं गार्डेन सिटी बॅंगलुर की रहने वाली हू. अब इस वक़्त मेरी एज 28 यियर्ज़ की है और मैं एक शादी शुदा महिला हू. हमारी शादी को 4 साल बीत चुके है और मैं एक पक्की हाउसवाइफ हू. मेरे हज़्बेंड

( सतीश ) सतीश का अपना डिफरेंट टाइप्स ऑफ एलेक्ट्रिकल आक्सेसरीस का बिज़्नेस था. वो वाइर्स, होल्डर्स, प्लग्स, कनेक्टर्स और दूसरे आक्सेसरीस आइटी के कंपनीज़ और दूसरे प्राइवेट ऑफिसस मैं सप्लाइ करते थे. सतीश का काम ठीक ठाक चल रहा था. हमारी लाइफ सेट थी. हम एक मीडियम क्लास फॅमिली से बिलॉंग करते थे. सतीश के पास अपना खुद का एक घर भी था जिस्मै हम रहते थे. हमे किसी चीज़ की कोई कमी नही थी. ऊपेर वाले ने बोहोत ज़ियादा तो नही दिया था पर कम भी नही दिया था. हम बोहोत अछी तरह से रह रहे थे. मैं यह पास्ट टेन्स मैं इस लिए लिख रही हू के अब हमारा बिज़्नेस एक दम से ठप्प हो गया है रिसेशन की मार की वजह से बोहोत सारे आइटी कंपनीज़ का

दीवालिया निकल चुका था और प्राइवेट ऑफीस का भी कुछ ऐसा ही हाल था. सतीश का लॉस कुछ ज़ियादा ही हो गया था और वो अपने सप्लाइयर्स को भी पेमेंट करने के काबिल नही थे जिसकी वजह से सप्लाइयर्स ने माल सप्लाइ करना बंद कर दिया था. सतीश कर्ज़े मैं डूबते चले गये और बिज़्नेस ऑलमोस्ट बंद करना पड़ा और हमारी ज़िंदगी मैं जैसे बोहोत बड़ी कठिनाई आती चली गयी. हमारी परेशानी का दौर शुरू हो गया और सतीश बेचारे सारा दिन इधर उधर घूम घूम के अपने पेंडिंग इनवाइसस की अमाउंट्स को वसूल करने के लिए डिफरेंट ऑफिसस के चक्कर लगा चुके थे पर कही से कोई उम्मीद की किरण नज़र नही आ रही थी और कोई भी पेमेंट नही कर रहा था. रिसेशन की मार ऐसी पड़ी के हमारी ज़िंदगी मैं जैसे एक भूचाल आ गया और अब हमको खाने पीने की भी तकलीफ़ होने लगी. थोड़े ही दीनो मैं जो कुछ बचा कुचा था वो भी सब ख़तम हो गया और सतीश कर्ज़े मैं डूबने लगे और नौकरी की तलाश मैं इधर उधर भटकने लगे पर कही भी किसी किसम का भी जॉब नही मिला और इस बीच मैं ने सतीश से कहा के अगर वो कोई ख़याल ना करे तो मैं भी कही कोई जॉब कर लूँगी तो कुछ ना कुछ तो घर का खर्चा पानी चल ही जाएगा तो सतीश बड़ी मुश्किल से तय्यार हो गये और मैं अब पूरे इंडिया मैं अपने जॉब के अप्लिकेशन भेजने लगी. डेली मेरा काम यही था के पेपर्स मे आड़ देखती और अप्लाइ कर देती थी.

यह मेरी एक फॅंटेसी है और कुछ रियल इन्सिडेंट्स है जो मैं आप के साथ शेर कर रही हू. इस से पहले कि मैं अपनी फॅंटेसी स्टार्ट करू लेट मी डिस्क्राइब माइसेल्फ आंड इन शॉर्ट टू टेल यू सम्तिंग अबौट मी.

मेरा परिवार जिस्मै मेरे डॅड, मोम और मैं बॅस हम तीन ही लोग थे. मेरे डॅड एक सरकारी करमचारी थे. हमारा भी एक छोटा सा घर है लैकिन पिताजी को गवर्नमेंट क्वॉर्टर मिला हुआ था जिस्मै हम रहते थे. मैं अपनी खूबसूरती की तारीफ तो नही करना चाहती पर सच मे मैं एक बोहोत ही खूबसूरत लड़की हू यह मैं नही मेरे फ्रेंड्स कहते है. बॅंगलुर के फर्स्ट क्लास वेदर की वजह से मेरे चिक्स किसी कश्मीरी सेब की तरह गुलाबी हो गये थे, मेरा फेस राउंड और ब्राइट है. माइ स्माइल ईज़ माइ ट्रेषर और जब स्माइल देती तो गालो मैं छोटे छोटे डिंपल्स पड़ते है जो बोहोत अच्छे लगते हैं. मेरे बाल थोड़े से कर्ली है पर डार्क ब्लॅक और शाइनिंग वाले है. मेरी आँखें काली और बड़ी बड़ी चमकदार है फ्रेंड्स बोलते है कि आइ हॅव लाइव्ली एएस जैसे आँखें बोल रही हो और अगर कोई मुझ से बात करता है तो मेरी आँखो की गहराई मैं और मेरी मुस्कान मे डूब जाता है. मैं हेर आयिल तो यूज़ नही करती पर फिर भी लोग ऐसा फील करते है जैसे मैं हेर आयिल लगाए

हुए हू, ई मीन टू से कि मेरे बाल इतने शाइनिंग वाले है. मेरे दाँत मोटी जैसे सफेद और चमकदार है और जब मैं स्माइल देती हू तो ऑलमोस्ट हाफ मोती जैसे चमकते हुए दाँत दिखाई देते है. मैं उतनी मोटी तो नही पर दुबली पतली भी नही मीडियम बिल्ट है मेरी. आइ हॅड वेरी गुड हेल्थ. मेरा बदन भरा भरा है जो बोहोत ही सेक्सी लगता है. मेरे बूब्स का साइज़ 36” है, एक दम से कड़क और बोहोत ही पर्फेक्ट शेप मे है, गोल गोल है ऐसा लगता है जैसे कोकनट को हाफ कट कर के मेरे चेस्ट पे रख दिया हो जिन के ऊपेर लाइट चॉक्लेट कलर के निपल्स है जो मोस्ट्ली एरेक्ट ही रहते है और लाइट ब्राउन कलर के 1 इंच का आरियोला है और मेरे बूब्स बोहोत ही कड़क है एक दम से सख़्त पत्थर जैसे. यूँ तो मैं ब्रस्सिएर पेहेन्ति हू पर जब घर मे रहती हू तो मोस्ट्ली अवाय्ड करती हू और ऐसे टाइम पे मेरे निपल्स मेरे शर्ट के ऊपेर से सॉफ एरेक्ट और खड़े हुए दिखाई देते है और जब मैं चलती हू तो मेरे शर्ट के अंदर जब कपड़ा निपल्स से रगड़ता है तो मुझे बोहोत ही मज़ा आता है, ऐसा लगता है जैसे कोई धीरे धीरे मेरे निपल्स की मसाज कर रहा है. मेरे बूब्स और निपल बोहोत ही सेन्सिटिव है. थोडा सा भी टच मुझे मज़ा देता है और जैसे मेरे बदन मे एलेक्ट्रिसिटी दौड़ने लगती है. मैं अपनी चूत के बालो को हमेशा ट्रिम कर के शेप मैं रखती हू और फर्स्ट क्लास ट्रिम देती हू. मुझे अपनी ट्रिम किए हुए छोटे छोटे नरम और मुलायम झांतो वाली चूत बोहोत अछी लगती है और मैं उसपे बोहोत प्यार से हाथ फेरेती और ऐसे ट्रिम बालो पे मसाज करना मुझे बोहोत अछा लगता है और मेरा ख़याल है के हर लड़की को अपनी चूत प्यारी होती है और हर लड़की अपनी चूत पे प्यार से हाथ फेरती है जैसे मैं फेरती हू.

मैं कॉमर्स की ग्रॅजुयेट हू और जब मैं बी. कॉम के फर्स्ट एअर मे थी तब मैं ने फर्स्ट टाइम अपनी चूत का मसाज किया था.

मैं लाइट एक्सर्साइज़ भी करती थी जिस से मेरी बॉडी पर्फेक्ट शेप मे है. एक दिन मैं कॉलेज से वापस आई और बाथरूम मैं शवर लेने चली गई. मेरे बाथरूम मे एक लाइफ साइज़ का मिरर भी लगा हुआ है जिस्मै मैं अपने नंगे बदन को बोहोत देर तक देखती और अप्रीशियेट करती रहती थी, अपने बूब्स को भी लाइट मसाज करती थी. उस दिन शवर लेने के लिए जब अपने कपड़े उतारे तो मे एज यूषुयल अपने बूब्स का मसाज किया और फिर मिरर मे अपने नंगे बदन को देखते देखते पता नही कब और कैसे मेरा हाथ अपनी चूत पे चला गया और जैसे के मैं प्यार से अपनी चूत पे हाथ फेरती हू उसी तरह से चूत पे हाथ फेरने लगी तो उस दिन मुझे ऐसे प्लेषर का एहसास हुआ जो पहले कभी नही हुआ था और देखते ही देखते मेरी मिड्ल फिंगर चूत के दाने को रगड़ते रगड़ते चूत के अंदर चली गयी और मैं अज्ञाने मे अपनी चूत के अंदर अपनी उंगली डाल के चोदने लगी और तो मुझे ऐसा मज़ा आया जो

पहले कभी नही आया था, मेरा सारा बदन गरम हो गया, मेरी आँखे बंद हो गयी और साँसें तेज़ी से चलने लगी और 2 – 3 मिनिट के अंदर ही मेरा बदन सुन्न हो गया और जैसे मेरे दिमाग़ मैं आँधियाँ चलने लगी मेरा बदन काँपने लगा और फर्स्ट टाइम एवर इन माइ लाइफ मेरी चूत मे से जूस बह के चूत के बाहर निकलने लगा और मैं लाइफलेस हो के बाथरूम के फ्लोर पे बैठ गई और फिर फ्लोर पे ही लेट गयी और मुझे लगा के शाएद मैं 10 – 15 मिनिट के लिए सो गयी. जब मैं अपने सेन्सस मे वापस आई तो मुझे महसूस हुआ के मेरे बदन मे मीठा मीठा नशा सा फैला हुआ है और मुझे अपना बदन बोहोत ही हल्का हल्का महसूस होने लगा और मुझे लगा जैसे मैं हवाओ मे उड़ रही हू. मैं फ्लोर से उठ गई और शवर ले के बाहर आ गई. उस दिन के बाद से मेरा मूड एक दम से चेंज दिखाई देने लगा मुझे हर चीज़ अछी लगने लगी और मैं अक्सर अपने आप मे गाना गाने लगी और अकेले मे मुस्कुराने लगी और उसके बाद से मैं रात मे डेली सोने से पहले अपनी चूत को बोहोत प्यार से सहलाती हू और फिर अच्छी तरह से चूत के दाने को रगड़ के और चूत के अंदर उंगली डाल के मास्टरबेट कर के जूस निकाल देती हू और उसके बाद ही सोती हू जिस से मुझे बोहोत अछी मीठी और गहरी नींद आती है.

जब मैं बी.कॉम के 2न्ड एअर मई थी तब मेरी फ्रेंडशिप मेरे एक कॉलेज फेलो रवि से हो गई वोमेरे से एक साल सीनियर था उस से फ्रेंडशिप हो गई थी जो ऑलमोस्ट 1 साल तक मेरा बॉय फ्रेंड रहा. उसके साथ मैं थियेटर मे फिल्म देखने जाती थी, कभी हम पार्क मे घूमने भी चले जाते थे और कभी ईव्निंग मे रेस्टोरेंट मे भी जा के कॉफी वाघहैरा पीते थे. हम काफ़ी क्लोज़ हो गये थे. एक शाम कॉलेज के छोटे से पार्क के कॉर्नर मे उसने मुझे पहला टॅंक सकिंग पॅशनेट किस किया और साथ मे उसके हाथ मेरे बूब्स पर भी आ गये और वो मेरे बूब्स को स्क्वीज़ करने लगा. उसका हाथ मेरे बूब्स पे लगते ही मेरे बदन मे एलेक्ट्रिसिटी दौड़ने लगी और आइ ब्रोक दा किस क्यॉंके मुझे पता था कि मेरे बूब्स और निपल्स कितने सेन्सिटिव है और इफ़ आइ अलो हिम टू स्क्वीज़ मोर टू मेरी चूत से जूस वही निकल जाता. उसके बाद वी केम क्लोज़र टू ईच अदर और जब हम थियेटर मे होते तो वो अपने हाथ मेरे बदन पे इधर उधर घुमाता और लोगो की नज़र बचा के मेरे थाइस पे हाथ रख देता और थियेटर के अंधेरे मे मेरी चूत का भी मसाज करता जिसकी वजह से मोस्ट ऑफ दा टाइम्स मैं वही थियेटर के अंदर ही झाड़ जाती. और मेरा हाथ ले कर अपने लौदे पर रख देता. उसका आकड़े हुए लौदे को पकड़ते ही मेरी चूत गीली हो जाती. मैने हमेशा ही उसके लंड को पॅंट के ऊपेर से ही पकड़ा था कभी नेकेड लंड को नही पकड़ा जिसकी वजह से मुझे उसके लंड का साइज़ भी नही मालूम, बॅस इतना जानती थी के उसका लंड बोहोत ही कड़क हो जाता था जब मैं हाथ मे उसके लंड को पकड़ती तो. जब जब भीहमको मोका मिलता वी किस ईच अदर आंड हे स्क्वीज़ मी बूब्स आंड मसाज माइ पुसी ओवर माइ क्लोद्स.

रवि से मिलने के बाद से ही मेरे अंदर सेक्स की भावना बढ़ने लगी और मैं इंटरनेट पे लंड, चूत और चुदाई के फोटोस और वीडियो क्लिप्स देखने लगी और उसके बाद से मेरा मास्टरबेशन करना कुछ ज़ियादा ही हो गया पर मैं ने रवि को कभी चोदने नही दिया. एक अछी और रिप्यूटेड फॅमिली से होने की वजह से मे चाहती थी के मैं अपनी चूत की सील शादी के बाद अपने पति से ही तुडवाउन्गि और अपने पति को ही अपनी वर्जिनिटी प्रेज़ेंट करूगी. पर शादी के बाद ख़याल आया के मैं ने रवि को एक मौका दिया होता तो अछा होता काश के रवि भी मुझे चोद देता. एनिहाउ अब क्या हो सकता था जो होना था वो हो चुका था.

मेरी फॅंटेसी शादी के थोड़े ही दीनो मे शुरू होती है जिसे मैं ऊपेर लिख चुकी हू अब मैं यहा से अपनी फॅंटेसी स्टार्ट करती हू.

मेरी शादी सतीश के साथ पूरे रीति रिवाजो के साथ ठीक ठाक तरीके से हो गई थी और मैं उसके घर आ गई थी. सतीश के पेरेंट्स बॅंगलुर से तकरीबन 300 किमी दूर एक डिस्ट्रिक्ट मे रहते थे. सतीश अपने बिज़्नेस की वजह से बॅंगलुर शिफ्ट हो गये थे और एक छोटा सा घर भी खरीद लिया था तो उसी घर मे, मैं और सतीश अकेले ही रहते थे. पहले ही लिख चुकी हू के पहले पहले तो बिज़्नेस बोहोत अछा चलता रहा पर 2 या 3 सालो मैं ही रिसेशन की मार की वजह से सतीश का बिज़्नेस तकरीबन बंद हो गया था, हमारा गुज़र बसर, खाना पीना बहुत मुश्किल हो गया था, बड़े ही कठिन दिन चल रहे थे. सिन्स आइ वाज़ कॉमर्स ग्रॅजुयेट, तौग आइ नेवेर हॅड एनी प्रॅक्टिकल एक्सपीरियेन्स बट आइ नो दा नो हाउ आंड दा अंडरस्टॅंडिंग ऑफ अकाउंट्स आंड आइ वाज़ शुवर इफ़ आइ स्टार्ट डूयिंग आ जॉब इन अकाउंट्स ऑर सेक्रेटेरियल फील्ड, आइ कॅन पिक अप वेरी ईज़िली आंड कॅन बी कॉन्फिडेंट इन आ शॉर्ट टाइम. आइ हॅव सीन सो मेनी लेडी सेक्रेटरीस इन ऑफिसस वेनेवर आइ हॅड आ चान्स टू विज़िट एनी ऑफीस फॉर एनी वर्क आंड आइ थिंक दा वर्क ऑफ सेक्रेटरीस आर ऑल्सो ईज़ी आंड आइ वाज़ कॉन्फिडेंट दट आइ कॅन डू तट ऑल्सो आस अन आल्टर्नेटिव टू अकाउंट्स फील्ड. ऐसा सोचते हुए आइ स्टार्टेड अप्लाइयिंग फॉर ए जॉब ऑल ओवर इंडिया टेकिंग दा अड्रेसस ऑफ कंपनीज़ इन नीड ऑफ अकाउंटेंट्स ओर इन सिक्रेटेरियल फील्ड. जहा जॉब की अड्वर्टाइज़्मेंट देखी, अप्लाइ कर देती और बोहोत बेचैनी से डेली पोस्ट का वेट करती रहती पर हमेशा निराशा ही हाथ आती और पोस्ट मन बिना लेटर दिए चला जाता. अप्लाइ करने के टाइम पे ही अपना पोस्टल और ईमेल आइडी दोनो लिख देती थी. पोस्ट को तो चेक कर लेती थी पर एमाइल चेक करना मुश्किल हो गया था क्यॉंके धीरे धीरे फोन कट करवाना पड़ा फिर इंटरनेट और केबल कनेक्षन भी कट

करवाना पड़ा था इसी लिए अब मैं अपने एमाइल्स भी नही चेक कर सकती थी. घर के करीब ही एक इंटरनेट केफे था जिसे एक फिज़िकली चल्लनगेड आदमी चला ता था. हमारा पड़ोसी होने के नाते उसे हमारे बिज़्नेस के बारे मे भी पता था वो मुझे अपने केफे मे आ के फ्री मे ईमेल चेक करने की पर्मिशन दे देता था जहा जा कर मैण अपने ईमेल्स चेक कर लिया करती थी.

क्रमशः......................

Recession Ki Maar part--1

Lekhak : the_great_warrior

Mera naam Sneha Hai. Mei Garden City Bangalore ki rehne wali hu. Ab iss waqt meri age 28 years ki hai aur mai ek shadi shuda mahila hu. Hamari shadi ko 4 saal beet chuke hai aur mai ek pakki Housewife hu. Mere Husband

( Satish ) Satish ka apna different types of electrical accessories ka business tha. Wo wires, holders, plugs, connectors aur doosre accessories IT ke companies aur doosre private offices mai supply karte the. Satish ka kaam theek thaak chal raha tha. Hamari life set thi. Ham ek medium class family se belong karte the. Satish ke pas apna khud ka ek ghar bhi tha jismai ham rehte the. Hamai kisi cheez ki koi kami nahi thi. Ooper wale ne bohot ziada to nahi dia tha par kam bhi nahi dia tha. Ham bohot achi tarah se reh rahe the. Mai yeh past tense mai is liye likh rahi hu ke ab hamara business ek dum se thapp ho gaya hai recession ki maar ki wajah se bohot sare IT companies ka

diwaliya nikal chuka tha aur private office ka bhi kuch aisa hi haal tha. Satish ka loss kuch ziada hi ho gaya tha aur wo apne suppliers ko bhi payment karne ke kabil nahi the jiski wajah se suppliers ne maal supply karna band kar dia tha. Satish karze mai doobte chale gaye aur business almost band karna pada aur hamari zindagi mai jaise bohot badi kathinai aati chali gayee. Hamari pareshani ka dour shuru ho gaya aur Satish bechara sara din idhar udhar ghoom ghoom ke apne pending invoices ki amounts ko vasool karne ke liye different offices ke chakkar laga chuke the par kahi se koi ummeed ki kiran nazar nahi aa rahi thi aur koi bhi payment nahi kar raha tha. Recession ki maar aisi padi ke hamari zindagi mai jaise ek bhuchaal aa gaya aur ab hamko khane peene ki bhi takleef hone lagi. Thode hi dino mai jo kuch bacha kucha tha wo bhi sab khatam ho gaya aur satish karze mai doobne lage aur noukri ki talash mai idhar udhar bhatakne lage par kahi bhi kisi kisam ka bhi job nahi mila aur iss beech mai ne satish se kaha ke agar wo koi khayal na kare to mai bhi kahi koi job kar lungi to kuch na kuch to ghar ka kharcha pani chal hi jayega to satish badi mushkil se tayyar ho gaye aur mai ab poore India mai apne job ke application bhejne lagi. Daily mera kaam yehi tha ke papers mai ad dekhti aur apply kar deti thi.

Yeh meri ek fantasy hai aur kuch real incidents hai jo mai aap ke sath share kar rahi hu. Iss se pehle ke mai apni fantasy start karu Let me describe myself and in short to tell you something about me.

Mera pariwar jismai mere dad, mom aur mai bass ham teen hi log the. Mere dad ek sarkari karamchari the. Although hamara bhi ek chota sa ghar hai laikin pitaji ko Government quarter mila hua tha jismai ham rehte the. Mai apni khubsurti ki tareef to nahi karna chahti par sach mei mai ek bohot hi khubsurat ladki hu yeh mai nahi mere friends kehte hai. Bangalore ke first class weather ki wajah se mere cheeks kisi kashmiri seb ki tarah gulabi ho gaye the, Mera face round aur bright hai. My smile is my treasure aur jab smile deti to galo mai chote chote dimples padte hai jo bohot ache lagte hei. Mere bal thode se curly hai par dark black aur shining wale hai. Meri aankhein kaali aur badi badi chamakdar hai hai friends bolte hai ke I have lively eyes jaise aankhein bol rahi ho aur agar koi mujh se baat karta hai to meri aankho ki gehrayee mai aur meri muskan mai doob jata hai. Mai hair oil to use nahi karti par phir bhi log aisa feel karte hai jaise mai hair oil lagaye

hue hu, I mean to say ke mere baal itne shining wale hai. Mere dant moti jaise safed aur chamakdar hai aur jab mai smile deti hu to almost half moti jaise chamakte hue dant dikhayee dete hai. Mai utni moti to nahi par dubli patli bhi nahi medium built hai meri. I had very good health. Mera badan bhara bhara hai jo bohot hi sexy lagta hai. Mere boobs ka size 36” hai, ek dum se kadak aur bohot hi perfect shape mai hai, gol gol hai aisa lagta hai jaise coconut ko half cut kar ke mere chest pe rakh dia ho jin ke ooper light chocolate colour ke nipples hai jo mostly erect hi rehte hai aur light brown colour ke 1 inch ka areola hai aur mere boobs bohot hi kadak hai ek dum se sakht patthar jaise. Yun to mai brassier pehenti hu par jab ghar mai rehti hu to mostly avoid karti hu aur aise time pe mere nipples mere shirt ke ooper se saaf erect aur khade hue dikhayee dete hai aur jab mai chalti hu to mere shirt ke ander jab kapda nipples se ragadta hai to mujhe bohot hi maza aata hai, aisa lagta hai jaise koi dheere dheere mere nipples ka massage kar raha hai. Mere boobs aur nipple bohot hi sensitive hai. Thoda sa bhi touch mujhe maza deta hai aur jaise mere badan mai electricity doudne lagti hai. Mai apni choot ke balo ko hamesha trim kar ke shape mai rakhti hu aur first class trim deti hu. Mujhe apni trim kiye hue chote chote naram aur mulayam jhato wali choot bohot achi lagti hai aur mai uspe bohot pyar se hath phereti aur aise trim balo pe massage karna mujhe bohot acha lagta hai aur mera khayal hai ke har ladki ko apni choot pyari hoti hai aur har ladki apni choot pe pyar se hath pherti hai jaise mai pherti hu.

Mai Commerce ki Graduate hu aur jab mai B. Com ke first year mai thi tab mai ne first time apni choot ka massage kia tha.

Mai light exercise bhi karti thi jis se meri body perfect shape mai hai. Ek din mai college se wapas ayi aur bathroom mai shower lene chali gai. Mere bathroom mai ek life size ka mirror bhi laga hua hai jismai mai apne nange badan ko bohot der tak dekhti aur appreciate karti rehti thi, apne boobs ko bhi light massage karti thi. Uss din shower lene ke liye jab apne kapde utare to mei as usual apne boobs ka massage kia aur phir mirror mai apne nange badan ko dekhte dekhte pata nahi kab aur kaise mera hath apni choot pe chala gaya aur jaise ke mai pyar se apni choot pe hath pherti hu usi tarah se choot pe hath pherne lagi to uss din mujhe aise pleasure ka ehsaas hua jo pehle kabhi nahi hua tha aur dekhte hi dekhte meri middle finger choot ke dane ko ragadte ragadte choot ke ander chali gayee aur mai ajnaane mai apni choot ke ander apni ungli dal ke chodne lagi aur to mujhe aisa maza aaya jo

pehle kabhi nahi aaya tha, mera sara badan garam ho gaya, meri aankhain band ho gayi aur saansein tezi se chalne lagi aur 2 – 3 minute ke ander hi mera badan sunn ho gaya aur jaise mere dimagh mai aandhiyan chalne lagi mera badan kaampne laga aur first time ever in my life meri choot mai se juice beh ke choot ke baher nikalne laga aur mai lifeless ho ke bathroom ke floor pe baith gai aur phir floor pe hi let gayee aur mujhe laga ke shaed mai 10 – 15 minute ke liye so gayee. Jab mei apne senses mai wapas aai to mujhe mehsoos hua ke mere badan mai meetha meetha nasha sa phaila hua hai aur mujhe apna badan bohot hi halka pohulka mehsoos hone laga aur mujhe laga jaise mai hawao mai udd rahi hu. Mai floor se uth gai aur shower le ke baher aa gai. Uss din ke bad se mera mood ek dum se change dikhayee dene laga mujhe har cheez achi lagne lagi aur mai aksar apne aap mai gaana gaane lagi aur akele mai muskurane lagi aur uske bad se mai raat mai daily sone se pehle apni choot ko bohot pyar se sehlaati hu aur phir acchi tarah se choot ke dane ko ragad ke aur choot ke ander ungli dal ke masturbate kar ke juice nikal deti hu aur uske baad hi soti hu jis se mujhe bohot achi meethi aur gehri neend aati hai.

Jab mai B.Com ke 2nd year mai thi tab meri friendship mere ek college fellow Ravi se ho mere se ek saal senior tha us se friendship ho gai thi jo almost 1 saal tak mera boy frined raha. Uske sath mai theatre mai film dekhne jati thi, kabhi ham park mai ghoomne bhi chale jate the aur kabhi evening me restaurant mai bhi ja ke coffee waghaira peete the. Ham kaafi close ho gaye the. Ek shaam college ke chote se park ke corner mai usne mujhe pehla tongue sucking passionate kiss kia aur sath mai uske hath mere boobs par bhi aa gaye aur wo mere boobs ko squeeze karne laga. Uska hath mere boobs pe lagte hi mere badan mai electricity doudne lagi aur I broke the kiss kyonke mujhe pata tha ke mere boobs aur nipples kitne sensitive hai aur if I allow him to squeeze more to meri choot se juice wahi nikal jata. Uske bad we came closer to each other aur jab ham theatre mai hote to wo apne hath mere badan pe idhar udhar ghumata aur logo ki nazar bacha ke mere thighs pe hath rakh deta aur theater ke andhere mai meri choot ka bhi massage karta jiski wajah se most of the times mai wahi theatre ke ander hi jhad jati. Aur mera hath le kar apne Loude par rakh deta. Uska akda hua loude ko pakadte hi meri choot geeli ho jati. Mai hamesha hi uske Lund ko pant ke ooper se hi pakda tha kabhi naked lund ko nahi pakda jiski wajah se mujhe uske Lund ka size bhi nahi malum, Bass itna janti thi ke uska Louda bohot hi kadak ho jata tha jab mai hath mai uske loude ko pakadti ho. Jab jab bhi

hamko moka milta we kiss each other and he squeeze my boobs and massage my pussy over my clothes.

Ravi se milne ke bad se hi mere ander sex ki bhavna badhne lagi aur mai internet pe Lund, Choot aur chudai ke photos aur video clips dekhne lagi aur uske bad se mera masturbation karna kuch ziada hi ho gaya par mai ne Ravi ko kabhi chodne nahi dia. Ek achi aur reputed family se hone ki wajah se mai chahti thi ke mai apni choot ki seal shadi ke bad apne pati se hi tudwaugi aur apne pati ko hi apni virginity present karugi. Par Shadi ke bad khayal aaya ke mai ne Ravi ko ek mouka dia hota to acha hota kaash ke Ravi bhi mujhe chod deta. Anyhow ab kia ho sakta tha jo hona tha wo ho chuka tha.

Meri fantasy shadi ke thode hi dino mai shuru hoti hai jise mai ooper likh chuki hu ab mai yaha se apni fantasy start karti hu.

Meri Shadi Satish ke sath poore riti rivajo ke sath theek thaak tarike se ho gai thi aur mai uske gahr aa gai thi. Satish ke parents Bangalore se takreeban 300 km door ek district mai rehte the. Satish apne business ki wajah se Bangalore shift ho gaye the aur ek chota sa ghar bhi kharid lia tha to usi ghar mai, mae aur satish akele hi rehte the. Pehle hi likh chuki hu ke pehle pehle to business bohot acha chalta raha par 2 ya 3 salo mai hi Recession Ki Maar ki wajah se Satish ka business takreeban band ho gaya tha, hamara guzar basar, khana pina bohto mushkil ho gaya tha, bade hi kathin din chal rahe the. Since I was Commerce Graduate, though I never had any practical experience but I know the know how and the understanding of accounts and I was sure if I start doing a job in accounts or secreterial field, I can pick up very easily and can be confident in a short time. I have seen so many lady secretaries in offices whenever I had a chance to visit any office for any work and I think the work of secretaries are also easy and I was confident that I can do that also as an alternative to accounts field. Aisa sochte hue I started applying for a job all over India taking the addresses of companies in need of accountants or in secretarial field. Jaha job ki advertisement dekhi, apply kar deti aur bohot bechaini se daily post ka wait karti rehti par hamesha nirasha hi haath aati aur post man bina letter diye chala jata. Apply karne ke time pe hi apna postal aur email id dono likh deti thi. Post ko to check kar leti thi par email check karna mushkil ho gaya tha kyonke dheere dheere phone cut karwana pada phir Internet aur cable connection bhi cut

karwana pada tha isi liye ab mai apne emails bhi nahi check kar sakti thi. Ghar ke kareeb hi ek Internet café tha jise ek physically challnaged aadmi chala ta tha. Hamara padosi hone ken ate usey hamare business ke bare mai bhi pata tha wo mujhe apne café mai aa ke free mai email check karne ki permission de deta tha jaha ja kar mai apne emails chek kar lia karti thi.

kramashah......................


rajaarkey
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Re: Recession Ki Maar -रिसेशन की मार

Unread post by rajaarkey » 13 Dec 2014 01:21

रिसेशन की मार पार्ट--2

गतान्क से आगे..........

अप्लाइ करते करते ऑलमोस्ट 3 मंथ हो गये थे पर कही से कोई ऐसा फ्रूटफुल रिप्लाइ ही नही आया था. थोड़े बोहोत जो रीप्लाइस आते थे वो यही आते थे की वी हॅव केप्ट युवर अप्लिकेशन इन और आक्टिव फाइल, एज सून एज वी हॅव सम वेकेन्सी वी विल कॉंटॅक्ट यू. कुछ लोग तो डाइरेक्ट लिख देते थे कि पोज़िशन ईज़ ऑलरेडी फिल्ड. कुछ लिखते थे कि वी हॅव प्रमोटेड ए गाइ फ्रॉम और ऑफीस टू फिल दट पोज़िशन. कुछ कंपनीज़’ वाले लिखते के उनको एक्सपीरियेन्स्ड लड़की चाहिए. मैं तो इतनी निराश हो गयी थी के रातो मे रोने लगती के शाएद मुझे जॉब नही मिलेगा और धीरे धीरे सतीश की हेल्थ भी खराब रहने लगी थी. हमारा टाइम ही खराब चल रहा था. सतीश इतने सेल्फ़ कॉन्षियस थे के अपने पिताजी से या मेरे पिताजी से कुछ मॉनिटरी हेल्प लेने के लिए तय्यार ही नही थे. उसका ख़याल था कि यह बुरा टाइम है जो जल्दी ही ख़तम हो जाएगा और फिर वोही पुराने फुल प्रॉफिटबल बिज़्नेस आ जाएगा. सो ही वाज़ रेज़िस्टिंग बट हिज़ हेल्थ ईज़ रूयिनिंग दे बाइ दे आंड आइ आम अनेबल टू फाइंड आ जॉब फॉर माइसेल्फ. हम दोनो रातो मे रिसेशन, बिज़्नेस लॉस और जॉब के बारे मे ही डिसकस किया करते थे. हमारी सेक्स लाइफ भी तकरीबन ख़तम ही हो चुकी थी. अब सतीश का लंड जैसे एक छोटा सा लटकता हुआ यूरिन पास करने का टूल बन गया था. उसके लंड को एरेक्ट हुए पता नही कितने वीक्स हो गये थे. शुरू शुरू मे तो मेरा बोहोत मूड होता था चुदवाने का और मैं सतीश के लंड से खेलती और अपने हाथमे ले कर दबाती और कभी मूह मे ले के चूस्ति लैकिन फिर भी उसका लंड एरेक्ट नही होता था और मैं अपनी चुदवाने की भावना को अपने दिल मैं ही दबा के सो जाती. अब धीरे धीरे मेरी चूत भी गीली होना बंद हो गयी थी. दिन और रात बस जॉब का ही ध्यान लगा रहता था इसीलिए सेक्स की भावना ऑलमोस्ट ख़तम ही हो गयी थी. मेरा दिल भी अब चुदाई से हट गया था और मैं जो अपनी चूत की ऐसी अच्छी देख भाल किया करती थी अब अपनी चूत के बालो को ट्रिम करना भी छोड़ दिया था.

दिन और रात ऐसे ही निराशा भरे गुज़रने लगे. एक दिन जब मैं अपने मेल्स चेक कर रही थी तो मुझे वो गुड न्यू मिल गयी जिसका इंतेज़ार मैं ऑलमोस्ट 2 महीने से कर रही थी. मुझे इंटरव्यू कॉल आई थी आर.के. इंडस्ट्रीस, मुंबई से. आर.के. इंडस्ट्रीस को उनके मॅनेजिंग डाइरेक्टर ( एम डी ) के लिए एक पर्सनल सेक्रेटरी की ज़रूरत थी जो उनके छोटे मोटे पर्सनल अकाउंट्स भी देख सके. मेल देख कर मेरे दिल को जो खुशी मिली वो मैं बयान नही कर सकती.

मेरी आँखो मैं एक नयी चमक आ गयी, दिल इतनी ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा जैसे अभी उछल कर सीने से बाहर आ जाएगा, बदन मे खुशी से पसीना आ गया पर फॉरन ही एक दम से पता नही क्यों दिल बैठ गया के इंटरव्यू तो मुंबई मे है और पोस्ट भी वही के लिए है. मैं सतीश को छोड़ के कैसे जासकती हू और यह कोई ज़रूरी भी नही है के मैं बॅंगलुर से मुंबई जाउ और यह जॉब मुझे ही मिले पर दिल कह रहा था के थेअर ईज़ नो हार्म इन ट्राइयिंग स्नेहा चली जा ट्राइ तो कर ले भगवान की कृपा रही तो यह जॉब तुझे ही मिलेगी फिर दूसरी तरफ दिल कहता के स्नेहा सिक्रेटेरियल जॉब तो किसी लड़की को ही मिलेगी ना और तू तो एक शादी शुदा है फिर दिल कहता के यार चली तो जा एक ट्राइ करने मे किया प्राब्लम है तू भी कुछ कम ब्यूटिफुल और सेक्सी नही है बॅस थोड़ा अपने आप को मॉडर्न बना ले और ट्राइ मार ले. यह सोचते सोचते मैं घर आ गई और सतीश को इंटरव्यू का प्रिंट आउट दिखा दिया तो वो भी खुश हो गया और बोला के चली जाओ और ट्राइ कर्लो देखो क्या होता है. हम दोनो ने मिल कर डीटेल मे डिसकस किया. पहले प्रोग्राम बना के दोनो जाएगे फिर सोचा के अब इतना लंबा एक्सपेन्स करके मुंबई जाए वाहा का होटेल, बोरडिंग, लॉड्जिंग और ट्रॅन्स्पोर्टेशन का खर्चा बोहोत हो जाएगा. सतीश ने पूछा के क्या तुम अकेली जा सकती हो तो मैने बोला के मैं कभी बॅंगलुर से बाहर ही नही गई मुझे तो पता भी नही के मुंबई क्या है, कहा है, कैसी है वाहा क्या होगा एट्सेटरा एट्सेटरा. सतीश एक दो टाइम अपने बिज़्नेस के सिलसिले मे मुंबई जा चुके थे तो उनको मुंबई का एक वेग टाइप का आइडिया था लैकिन वाहा वो किसी को जानते नही थे और यह इंटरव्यू की प्लेस भी नही जानते थे कि कहा है और मुझे कुछ ख़ास गाइड भी नही कर सके बस मुंबई के लाइफ स्टाइल के बारे मे थोड़ा बोहोत जो जानते थे बता दिया. इंटरव्यू 3 दिन बाद होना था और मुझे कल ही मुंबई के लिए निकल जाना था नही तो मैं टाइम पे नही पहुँच सकती थी. बहुत आर्ग्युमेंट्स और डिस्कशन्स के बाद अल्टिमेट्ली यही डिसाइड हुआ के मुझे अकेले ही जाना पड़ेगा और मेरे पास बिल्कुल भी टाइम नही है. रात हो गई है और कल लंच टाइम तक मुझे चले जाना है. यह डिसाइड किया के प्राइवेट बस से जाना होगा क्यॉंके सब से पहले तो ट्रेन का टिकेट कॉस्ट्ली पड़ता था और बिना रिज़र्वेशन मुंबई तक का ट्रॅवेल ऑलमोस्ट इंपॉसिबल था इसी लिए बस का डिसाइड कर लिया गया.

सतीश ने मुझे समझाया के कैसे जाना है और क्या करना है और कैसे वापस आना है उसके बाद सतीश तो मेडिसिन ले के सो गये पर मुझे तो तय्यारी करनी थी इसी लिए मैं वॉशिंग मशीन मे अपने कपड़े डाल के वॉशिंग मे लग गई और शादी मे आया हुआ एक मीडियम साइज़ का सूटकेस निकाल के उसको साफ किया और कपड़े धोने के बाद आइर्निंग करने बैठ गई. अपना मेक अप बॉक्स भी रेडी कर लिया. मेरे पास कॉलेज के ज़माने का एक क्रीम बॅकग्राउंड पे पिंक फ्लवर वाला

मिद्डी टाइप का सिल्की स्कर्ट था और लाइट क्रीम कलर पे पोल्का डॉट वाली एक चोली जिसमे नीचे से नाट भी डाली जा सकती थी, यह ड्रेस मुझे बोहोत ही पसंद था तो मैं ने इंटरव्यू के लिए इस ड्रेस को ही चूज किया जिसे सतीश ने भी अप्रूव किया था और यह ड्रेस सतीश को भी बोहोत ही पसंद था. यह ड्रेस को आइरन किया और सूट केस रेडी कर लिया. जब यह सब काम कंप्लीट हो गया तो मुझे ख्याल आया के मुझे अपने आप को भी तो ठीक ठाक करना है नही तो इंटरव्यू के टाइम पे ऐसा लगेगा जैसे मैं किचन से उठ कर आ रही हू, यह ख़याल आते ही मेरे चेहरे पे एक मुस्कान आ गयी और मैं बाथरूम मे शवर लेने चली गई.

मैं अपनी झांतो भरी चूत को शेव करने लगी.

बाथरूम मे आने के बाद जब अपने कपड़े उतारे और नंगी हो गई और सामने वॉल पे लगे लाइफ साइज़ मिरर मे मुझे अपनी चूत के आगे ऐसा जंगल दिखाई दिया जिसे देख कर मैं डर गई के यह मेरी चूत की क्या हालत हो गई है और फिर मैं ने कपबोर्ड से हेर रिमूविंग क्रीम निकाल के अपनी चूत के बालो पे स्प्रेड किया और वेट करने लगी. थोड़ी देर के बाद प्लॅटिक के पीस से जब चूत के झांतो पे शेव जैसे ही किया तो चूत पे धक्की हुई झांट आसानी से निकलने लगे और जंगल जैसे बालो भरी चूत की जगह एक चमकदार, चिकनी सिल्की सॉफ्ट चूत दिखाई देने लगी जिस पर मैं प्यार से हाथ फेरने लगी और देखते ही देखते मैं सब कुछ भूल गयी मुझे इस वक़्त अपनी प्यारी चूत से ज़ियादा कुछ अछा नही लग रहा था और मैं अपनी प्यारी चिकनी चूत का बड़े प्यार से मसाज करने लगी. अपनी चूत पे हाथ फिराना मुझे बोहोत ही अछा लग रहा था, मेरे बदन मैं एक सनसनी सी फैलने लगी थी. मेरी फ्रेशली शेवन सॉफ्ट चूत को इस टाइम एक मोटे से मूसल लंड की ज़रूरत महसूस होने लगी जो मेरी गरम चिकनी चूत को चोद चोद के उसका भोसड़ा बना दे. आज कल सतीश का लंड तो एरेक्ट नही हो रहा था इसी लिए मुझे इमीडीयेट्ली अपने

कॉलेज फ्रेंड रवि का मोटा लंड याद आगेया और अब मेरी चूत की पोज़िशन ऐसी थी कि उसको एक मस्त मोटे लंड से चूत के फटने तक चुदाई चाहिए थी. मैं एक लंड के लिए बे चैन हो गई और अपनी उंगली को चूत के अंदर डाल के चोद्ते हुए मैं अपनी चूत के अंदर रवि के लंड को अपने ख़यालो मे ही अपनी चूत के अंदर महसूस करने लगी अपनी समंदर जैसी गीली चूत को अपनी उंगली से पागलो की तरह से चोदने लगी, मेरी उंगली चूत के अंदर तूफ़ानी रफ़्तार से अंदर बाहर हो रही थी और पता ही नही चला कब मेरी आँखें बंद हो गयी थी और सारे बदन मे एक नशा सा च्छा गया था, आँखें बंद हो गई, मस्ती से मेरा बदन किसी सूखे पत्ते की तरह से काँपने लगा और मैं झड़ती ही चली गई झड़ती ही चली गई पता नही कितनी देर तक झड़ती रही क्यॉंके मेरी चूत को चुदे हुए बोहोत दिन हो गये थे, मे बाथरूम के फ्लोर पे लेट गई और फिर और मेरा सारा बदन ऐसे सुन्न हो गया था जैसे किसी ने बदन मे ऐसी सन सनाहट होने लगी जैसे अनेस्तीसिया दे दिया हो और चूत के मसाज के बाद आज इतना ज़ियादा जूस निकला था कि क्या बताउ, चूत से जूस बह के जाँघो से होता हुआ नीचे फ्लोर पे भी गिर गया ऐसा लगता था जैसे मेरी चूत से मस्ती का जूस नही कोई समंदर निकला हो. मेरी चूत के अंदर इतने दिनो से सोई हुई चुदाई की वासना जागने लगी और मैं एक दम से चुदासी हो गई और मेरी चूत एक मोटे लंड से चुदने को बेचैन होने लगी और सोचने लगी के काश आज की रात सतीश का लंड उठ जाए और मुझे चोद चोद कर मेरी चूत का भोसड़ा बना दे. पर क्या करू मुझे पता था के अब इस टाइम पे उसका लंड नही एरेक्ट होगा इसी लिए अपने दिल पे पत्थर रख के बिना चुदवाये ही शवर लिया और टवल लपेट के शवर से बाहर आ गई.

अपनी झांतो भरी चूत को साफ कर के और फ्रेशली शेवन चूत का मस्त मसाज करने तक मुझे पता ही नही चला के मेरे शवर लेने मे तकरीबन एक घंटा लग गया है. मेरे शवर ले के बाथरूम से बाहर आने तक सतीश सो गये थे. मुझे उसे देख के उसपे दया आ गई और सोचने लगी के काश मुझे यह जॉब मिल जाए तो एक बार फिर से हमारे दिन पलट सकते है. सतीश का बिज़्नेस फिर से ठीक हो सकता है. एट्सेटरा एट्सेटरा, यही सोचते सोचते मैं अपने कपड़े और दूसरा समान पॅक करने लगी. एक एक चीज़ को अच्छी तरह से डबल चेक किया और सूटकेस को पॅक किया और सोने के लिए अपने बेड पे चली गई. टाइम देखा तो रात के 4 बज रहे थे.

मुझे अकेले ट्रॅवेल करने के डर से और फर्स्ट टाइम मुंबई देखने के एग्ज़ाइट्मेंट मे नींद ही नही आ रही थी. मैं बेड पे लेटी करवटें बदल बदल के सोने की कोशिश करने लगी पर कुछ नही हुआ. आख़िर सारी रात जाग जाग कर ही गुज़री बॅस अपनी आँखें बंद कर के लेटी रही. दिमागी टेन्षन की वजह से

बोहोत दीनो से रातो मे नींद नही आ रही थी कभी किसी दिन 3 घंटे कभी 4 घंटे ऐसे ही नींद होती रही थी. और आज तो रात भर नींद नही आई थी. बेड पे लेटने के बाद सारा टाइम करवटें बदलने मे गुज़र गया और बिना सोए ही सुबह उठ के शवर लिया तो थोडा फ्रेश महसूस करने लगी.

आज मुझे किसी प्राइवेट बस से मुंबई जाना था. सुबह मेरे शवर लेने तक सतीश ब्रेकफास्ट बना चुके थे. हम दोनो ने ब्रेकफास्ट लिया और सतीश बस के रिज़र्वेशन के लिए चले गये. बॅंगलुर से मुंबई जाने के लिए बोहोत प्राइवेट कंपनीज़ के बस चलते थे. हमारे घर के करीब ही एक प्राइवेट कंपनी भी थी जहा सतीश एंक्वाइरी के लिए चले गये और थोड़ी ही देर मे रिज़र्वेशन ले के वापस आ गये. बस दोपेहेर के 2 बजे बॅंगलुर से निकलती थी. लेट रिज़र्वेशन करवाने की वजह से मुझे सब से लास्ट वाली सीट मिली थी. मैं शवर ले के तय्यार हो गई. बॅंगलुर से मुंबई का जर्नी कुछ ज़ियादा ही लंबा था फिर सोचा के रास्ते मे मौसम कैसा होगा पता नही हो सकता है के ठंडी हो इसी लिए मैं ने डिसाइड किया और अपना एक डार्क ब्लू बॅकग्राउंड पे लाइट क्रीम कलर के छोटे छोटे फ्लवर और डीप नेक का शर्ट जिस्मै से मेरा दूध जैसा क्लीवेज भी नज़र आ रहा था और डार्क ब्लू कलर की मॅचिंग वाला सलवार सूट पहेन लिया. इस डार्क कलर की सलवार मे मेरा गोरा रंग बोहोत अछा लग रह था. मुझे घर मे ब्रस्सिएर और पॅंटी पहेन्ने की आदत तो थी नही और फिर मैं ने सोचा के इतना लंबा सफ़र है शाएद पॅंटी और ब्रस्सिएर मेरे बदन पे अगर टाइट हो गये तो उनको दूसरे पॅसेंजर के सामने अड्जस्ट करना भी मुश्किल हो जाएगा और फिर बस मे कौन मुझे देखने जा रहा है के मैं ने ब्रस्सिएर और पॅंटी पहनी है के नही बॅस यह सोच के मैं थोड़ा सा मुस्कुरा दी और बिना ब्रस्सिएर और बिना पॅंटी के ही सलवार सूट पहेन लिया. सलवार सूट बोहोत लाइट मेटीरियल का बना हुआ था जिसका मेरे बदन पे एहसास ही नही हो रहा था मुझे यह ड्रेस भी बोहोत ही पसंद था तो मैं ने यह पहेन लिया. सलवार पेहेन्ते पेहेन्ते देखा तो मुझे याद आया के इस सलवार सूट मे तो मेरे टेलर ने सलवार मे नाडा नही एक मोटी सी और अछी क्वालिटी का एलास्टिक लगाया हुआ था जिसके पहेन्ने से मैं बोहोत ही कंफर्टबल महसूस करती थी और अगर नाडा होता तो उसको बाँधने मे कभी टाइट हो जाता कभी ढीला तो वो एक अलग मुश्किल थी इसी लिए मैं हमेशा ही एलास्टिक हाई प्रिफर करती थी और मैं ने अपने टेलर से बोल दिया था के नेक्स्ट टाइम से मेरी सारी सलवार मे एलास्टिक ही लगाना. एक अंदर की बात बताउ, सलवार मे एलास्टिक होने की वजह से कभी भी बैठे बैठे या खड़े खड़े ऊपेर से अपना हाथ अपनी चूत मे डाला जा सकता था चाहे वो खुजाने के लिए हो या

चूत का मसाज करने के लिए. मैं यह सलवार सूट मे बोहोत ही कंफर्टबल और लाइट महसूस कर रही थी.

क्रमशः......................

Recession Ki Maar part--2

gataank se aage..........

Apply karte karte almost 3 months ho gaye the par kahi se koi aisa fruitful reply hi nahi aaya tha. Thode bohot jo replies aate the wo yehi aate the ke we have kept your application in our active file, as soon as we have some vacancy we will contact you. Kuch log to direct likh dete the ke position is already filled. Kuch likhte the ke we have promoted a guy from our office to fill that position. Kuch companies’ wale likhte ke unko experienced ladki chahiye. Mai to itni nirash ho gayi thi ke rato mai rone lagti ke shaed mujhe job nahi milega aur dheere dheere Satish ki health bhi kharab rehne lagi thi. hamara time hi kharab chal raha tha. Satish itne self conscious the ke apne pitaji se ya mere pitaji se kuch monetary help lene ke liye tayyar hi nahi the. uska khayal tha ke yeh bura time hai jo jaldi hi khatam ho jayega aur phir wohi purane full profitable business aa jayega. So he was resisting but his health is ruining day by day and I am unable to find a job for myself. Ham dono rato mai Recession, business loss aur job ke bare mai hi discuss kia karte the. Hamari sex life bhi takreeban khatam hi ho chuki thi. Ab satish ka Louda jaise ek chota sa latakta hua urine pass karne ka tool ban gaya tha. Uske Loude ko erect hue pata nahi kitne weeks ho gaye the. Shuru shuru mai to mera bohot mood hota tha chudwane ka aur mai Satish ke Lund se khelti aur apne hath mai le ka dabati aur kabhi muh mai le ke choosti laikin phir bhi uska Lund erect nahi hota tha aur mai apni chudwane ki bhavna ko apne dil mai hi daba ke so jati. Ab dheere dheere meri choot bhi geeli hona band ho gayee thi. Din aur rat bas job ka hi dhayan laga rehta tha isiliye sex ki bhavna almost khatam hi ho gayee thi. mere dil bhi ab chudai se hat gaya tha aur mai jo apni choot ki aisi achi dekh bhaal kia karti thi ab apni choot ke balo ko trim karna bhi chhor dia tha.

Din aur raat aise hi nirasha bhare guzarne lage. Ek din jab mai apne mails check kar rahi thi to mujhe wo good new mil gayi jiska intezar mai almost 2 mahine se kar rahi thi. Mujhe Interview call ayi thi R.K. Industries, Mumbai se. R.K. Industries ko unke Managing Director ( MD ) ke liye ek Personal Secretary ki zaroorat thi jo unke chote mote personal accounts bhi dekh sake. Mail dekh kar mere dil ko jo khushi mili wo mai bayan nahi kar sakti.

Meri aankho mai ek nayee chamak aa gayee, dil itni zor zor se dhadakne laga jaise abhi uchal kar seene se baher aa jayega, badan mai khushi se paseena aa gaya par foran hi ek dum se pata nahi kyon dil baith gaya ke Interview to Mumbai mai hai aur post bhi wahi ke liye hai. Mai Satish ko chhor ke kaise jasakti hu aur yeh koi zaroori bhi nahi hai ke mai Bangalore se Mumbai jau aur yeh job mujhe hi mile par dil keh raha tha ke there is no harm in trying Sneha chali ja try to kar le bhagvan ki kripa rahi to yeh job tujhe hi milegi phir doosri taraf dil kehta ke Sneha secretarial job to kisi ladki ko hi milegi na aur tu to ek shadi shuda hai phir dil kehta ke yar chali to ja ek try karne mai kia problem hai tu bhi kuch kam beautiful aur sexy nahi hai bass thoda apne aap ko modern bana le aur try mar le. Yeh sochte sochte mai ghar aa gai aur Satish ko Interview ka print out dikha dia to wo bhi khush ho gaya aur bola ke chali jao aur try karlo dekho kia hota hai. Ham dono ne mil kar detail mai discuss kia. Pehle programme bana ke dono jayege phir socha ke ab itna lamba expense karke Mumbai jaye waha ka hotel, boarding, lodging aur transportation ka kharcha bohot ho jayega. Satish ne poocha ke kia tum akeli ja sakti ho to mei ne bola ke mai kabhi Bangalore se baher hi nahi gai mujhe to pata bhi nahi ke Mumbai kia hai, kaha hai, kaisi hai waha kia hoga etc etc. Satish ek do time apne business ke silsile mai Mumbai ja chuke the to unko Mumbai ka ek vague type ka idea tha laikin waha wo kisi ko jante nahi the aur yeh Interview ki place bhi nahi jaante the ke kaha hai aur mujhe kuch khaas guide bhi nahi kar sake bas Mumbai ke life style ke bare mai thoda bohot jo jante the bata dia. Interview 3 din bad hona tha aur mujhe kal hi Mumbai ke liye nikal jana tha nahi to mai time pe nahi pohoch sakti thi. Bohot arguments aur discussions ke bad ultimately yehi decide hua ke mujhe akele hi jana padega aur mere pas bilkul bhi time nahi hai. Raat ho gai hai aur kal Lunch time tak mujhe chale jana hai. Yeh decide kia ke private Bus se jana hoga kyonke sab se phel to train ka ticket costly padta tha aur bina reservation Mumbai tak ka travel almost impossible tha isi liye Bus ka decide kar lia gaya.

Satish ne mujhe samjhaya ke kaise jana hai aur kia karna hai aur kaise wapas aana hai uske bad Satish to medicine le ke so gaye par mujhe to tayyari karni thi isi liye mai washing machine mai apne kapde dal ke washing mai lag gai aur shadi mai aaya hua ek medium size ka suitcase nikal ke usko saaf kia aur kapde dhone ke bad ironing karne baith gai. Apne make up box bhi ready kar lia. mere pas college ke zamaane ka ek cream background pe pink flower wala

middi type ka silky skirt tha aur light cream colour pe polka dot wali ek choli jismain neeche se knot bhi dali ja sakti thi, yeh dress mujhe bohot hi pasand tha to mai ne Interview ke liye iss dress ko hi chose kia jise Satish ne bhi approve kia tha aur yeh dress Satish ko bhi bohot hi pasand tha. Yeh dress ko iron kia aur suit case ready kar lia. Jab yeh sab kaam complete ho gaya to mujhe kahyal aaya ke mujhe apne aap ko bhi to theek thaak karna hai nahi to Interview ke time pe aisa lagega jaise mai kitchen se uth kar aa rahi hu, yeh khayal aate hi mere chehre pe ek muskan aa gayi aur mai bathroom mai shower lene chali gai.

Mai apni jhanto bhari choot ko shave karne lagi.

Bathroom mai aane ke bad jab apne kapde utare aur nangi ho gai aur samne wall pe lage life size mirror mai mujhe apni choot ke aage aisa jungle dikhayee dia jise dekh kar mai dar gai ke yeh meri choot ki kia halat ho gai hai aur phir mai ne cupboard se Hair Removing Cream nikal ke apni choot ke balo pe spread kia aur wait karne lagi. Thodi der ke bad platic ke piece se jab choot ke jhato pe shave jaise hi kia to choot pe dhakki hui jhant asaani se nikalne lage aur jungle jaise balo bhari choot ki jagah ek chamakdar, chikni silky soft choot dikhayee dene lagi jis par mai pyar se hath pherne lagi aur dekhte hi dekhte mai sab kuch bhool gayi mujhe iss waqt apni pyari choot se ziada kuch acha nahi lag raha tha aur mai apni pyari chikni choot ka bade pyar se massage karne lagi. Apni choot pe hath phirana mujhe bohot hi acha lag raha tha, mere badan mai ek sansani si phailne lagi thi. Meri freshly shaven soft choot ko iss time ek mote se musal Lund ki zaroorat mehsoos hone lagi jo meri garam chikni choot ko chod chod ke uska bhosda bana de. Aaj kal Satish ka Lund to erect nahi ho raha tha isi liye mujhe immediately apne

college friend Ravi ka mota Lund yaad aagaya aur ab meri choot ki position aisi thi ke usko ek mast mote lund se choot ke phatne tak chudai chahiye thi. Mai ek lund ke liye be chain ho gai aur apni ungli ko choot ke ander dal ke chodte hue mai apni choot ke ander Ravi ke Lund ko apne khayalo mai hi apni choot ke ander mehsoos karne lagi apni samandar jaisi geeli choot ko apni ungli se pagalo ki tarah se chodne lagi, meri ungli choot ke ander toofani raftaar se ander baher ho rahi thi aur pata hi nahi chala kab meri aankhein band ho gayi thi aur sare badan mai ek nasha sa chha gaya tha, aankhein band ho gai, masti se mera badan kisi sookhe patte ki tarah se kaanpne laga aur mai jhadti hi chali gai jhadti hi chali gai pata nahi kitni der tak jhadti rahi kyonke meri choot ko chude hue bohot din ho gaye the, mei bathroom ke floor pe let gai aur phir aur mera sara badan aise sunn ho gaya tha jaise kisi ne badan mai aisi san sanahat hone lagi jaise anesthesia de dia ho aur Choot ke massage ke bad aaj itna ziada juice nikla tha ke kia batau, choot se juice beh ke jhango se hota hua neeche floor pe bhi gir gaya aisa lagta tha jaise meri choot se masti ka juice nahi koi samandar nikla ho. Meri choot ke ander itne dino se soi hui chudai ki vasna jaagne lagi aur mai ek dum se chudasi ho gai aur meri choot ek mote Lund se chudne ko bechain hone lagi aur sochne lagi ke kaash aaj ki raat satish ka Lund uth jaye aur mujhe chod chod kar meri choot ka bhosda bana de. Par kia karu mujhe pata tha ke ab iss time pe uska Lund nahi erect hoga isi liye apne dil pe patthar rakh ke bina chudwaye hi shower lia aur towel lapet ke shower se baher aa gai.

Apni jhanto bhari choot ko saaf kar ke aur freshly shaven choot ka mast massage karne tak mujhe pata hi nahi chala ke mere shower lene mai takreeban ek ghanta lag gaya hai. Mere shower le ke bathroom se baher aane tak Satish so gaye the. Mujhe usey dekh ke uspe daya aa gai aur sochne lagi ke kaash mujhe yeh job mil jaye to ek bar phir se hamare din palat sakte hai. Satish ka business phir se theek ho sakta hai. etc etc, Yehi sochte sochte mai apne kapde aur doosra saman pack karne lagi. Ek ek cheez ko acchi tarah se double check kia aur suitcase ko pack kia aur sone ke liye apne bed pe chali gai. Time dekha to raat ke 4 baj rahe the.

Mujhe akele travel karne ke darr se aur first time Mumbai dekhne ke excitement mai neend hi nahi aa rahi thi. Mai bed pe leti karwate badal badal ke sone ki koshish karne lagi par kuch nahi hua. Aakhir sari raat jaag jaag kar hi guzari bass apni aankhein band kar ke leti rahi. Dimaghi tension ki wajah se

bohot dino se raato mai neend nahi aa rahi thi kabhi kisi din 3 ghante kabhi 4 ghante aise hi neend hoti rahi thi. aur aaj to raat bhar neend nahi ayi thi. bed pe letne ke bad sara time karwate badalne mai guzar gaya aur bina soye hi subah uth ke shower lia to thoda fresh mehsoos karne lagi.

Aaj mujhe kisi private bus se Mumbai jana tha. Subah Mere shower lene tak satish breakfast bana chuke the. Ham dono ne breakfast lia aur Satish bus ke reservation ke liye chale gaye. Bangalore se Mumbai jane ke liye bohot private companies ke bus chalte the. Hamare ghar ke kareeb hi ek private company bhi thi jaha Satish enquiry ke liye chale gaye aur thodi hi der mai reservation le ke wapas aa gaye. Bus dopeher ke 2 baje Bangalore se nikalti thi. Late reservation karwane ki wajah se mujhe sab se last wali seat mili thi. Mai shower le ke tayyar ho gai. Bangalore se Mumbai ka journey kuch ziada hi lamba tha phir socha ke raaste mai mousam kaisa hoga pata nahi ho sakta hai ke thandi ho isi liye mai ne decide kia aur apna ek dark blue background pe light cream colour ke chote chote flower aur deep neck ka shirt jismai se mera doodh jaisa cleavage bhi nazar aa raha tha aur dark blue colour ki matching wala salwar suit pehen lia. Yeh dark colour ki salwar mai mera gora rang bohot acha lag rah tha. Mujhe ghar mai brassier aur panty pehenne ki aadat to thi nahi aur phir mai ne socha ke itna lamba safar hai shaed panty aur brassier mere badan pe agar tight ho gaye to unko doosre passenger ke samne adjust karna bhi mushkil ho jayega aur phir bus mai koun mujhe dekhne ja raha hai ke mai ne brassier aur panty pehni hai ke nahi bass yeh soch ke mai thoda sa muskura di aur bina brassier aur bina panty ke hi salwar suit pehen lia. Salwar suit bohot light material ka bana hua tha jiska mere badan pe ehsaas hi nahi ho raha tha mujhe yeh dress bhi bohot hi pasand tha to mai ne yeh pehen lia. Salwar pehente pehente dekha to mujhe yaad aaya ke iss salwar suit mei to mere tailor ne salwar mai nada nahi ek moti si aur achi quality ka elastic lagaya hua tha jiske pehenne se mai bohot hi comfortable mehsoos karti thi aur agar nada hota to usko bandhne mai kabhi tight ho jata kabhi dheela to wo ek alag mushkil thi isi liye mai hamesha hi elastic hi prefer karti thi aur mai ne apne tailor se bol dia tha ke next time se meri sari salwar mai elastic hi lagana. Ek ander ki baat batau, Salwar mai elastic hone ki wajah se kabhi bahi baithe baithe ya khade khade ooper se apna hath apni choot mai dala ja sakta tha chahe wo khujane ke liye ho ya

choot ka massage karne ke liye. Mai yeh salwar suit mai bohot hi comfortable aur light mehsoos kar rahi thi.

kramashah......................


rajaarkey
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Re: Recession Ki Maar -रिसेशन की मार

Unread post by rajaarkey » 13 Dec 2014 01:23

रिसेशन की मार पार्ट--3

गतान्क से आगे..........

मैं और सतीश टाइम पर ट्रॅवेल ऑफीस पोहोच गये. सतीश को वेदर देख के याद आया और वो करीब की दुकान से एक वॅसलिंग मिक्स कोल्ड क्रीम का डिब्बा ले के आया, यहा कोई सूपरमार्केट तो था नही जो अपनी चाय्स से पर्चेस किया जा सके, इसी लिए चौड़े मूह वाला बड़े ढक्कन का मीडियम साइज़ का डिब्बा मिला जिसे सतीश ने खरीद लिया और मुझे बोला के यह रखलो रास्ते मैड हूप लगेगी या बाहर की हवा से स्किन खराब हो जायगी तो यह तुम अपने फेस पे और हाथो पे लगा लेना तो मैं ने वो कोल्ड क्रीम की बॉटल को अपने पर्स मे ही रख लिया. इतनी देर मैं वाहा ऑलमोस्ट सब ही लोग आ चुके थे और बस के अंदर बैठने लगे थे. मेरा सूटकेस भी बस के नीचे बने लॉकर मे रख दिया और मैं सिर्फ़ अपना पर्स ले के अपनी सीट पे आ गई. देखा तो मेरी सीट पे मैं अकेली ही थी और कोई नही आया तो मैं खुश हो गई के चलो सफ़र आराम से गुज़रेगा 2 सीट पे आराम से बैठुगी. मे बोहोत ही डर रही थी और बस के चलने तक सतीश मेरे साथ ही रहे और मेरी हिम्मत बढ़ा रहे थे और मुझे बिना घबराए और बिना डरे कॉन्फिडेन्स के साथ सफ़र करने को बोल रहे थे. आज मैं फर्स्ट टाइम सतीश से और बॅंगलुर से दूर जा रही थी मेरा दिल बड़ी ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था जैसे अभी बहेर निकल जाएगा, मेरे बदन से पसीने छ्छूट रहे थे फिर भी मैं हिम्मत दिखा रही थी और यह सोच कर के जब मुझे जाना ही है तो क्यों ना मैं कॉन्फिडेन्स के साथ जाउ और अगर मुझे बॅंगलुर से बाहर ही रह कर जॉब करनी है तो मेरे अंदर कॉन्फिडेन्स तो होना ही चाहिए बॅस यह सोच कर मेरे अंदर हिम्मत बढ़ने लगी और मेरा दिमाग़ से डर निकल गया और मेरे चेहरे पे कुछ इतमीनान आ गया. बस अपने टाइम पे स्टार्ट हो गयी और चल पड़ी. मैं ने बुझे दिल से और अपनी आँसू भरी आँखो से सतीश को बाइ बोला और खिड़की से हाथ निकाल के उसको उस वक़्त तक विश करती रही तब तक वो दिखाई देता रहा. जब वो नज़रो से ओझल हो गया तो मुझे रोना आ गया और मेरे आँसू निकल पड़े. कुछ देर तक रोती रही फिर अपने आप को संभाल लिया. लास्ट सीट पे बैठने की वजह से किसी को पता भी नही चला के मैं रो रही थी.

अब मैं अपने आप को बस के अंदर सेट करने लगी और जो शॉल लपेटी थी उसको फोल्ड कर के ऊपेर बने हुए ओवरहेड पोर्षन मे रख दिया. मे के महीना था और दोपेहेर 2 बजे की गर्मी थी बदन पसीने से भरा हुआ था. जैसे ही बस चलने लगी थोड़ी हवा आई तो बदन का पसीना सूखा पर बाहर अभी हवा गरम ही चल रही थी. शुरू शुरू मे तो बस के अंदर के लोग एक दूसरे से ज़ोर ज़ोर से बातें कर रहे थे पर थोड़ी ही देर के बाद ऑलमोस्ट सब ही लोग चुप हो गये थे और बस मे जैसे एक सुकून आ गया था. मैं अब सोचने लगी के मुंबई मे क्या होगा, कहा होटेल मिलेगा, आर के इंडस्ट्रीस का ऑफीस पता नही कितनी दूर होगा, जॉब मिलेगी भी या नही एट्सेटरा एट्सेटरा. अभी मे यह सब सोचने मे ही बिज़ी थी के बस एक स्टॉप पे रुकी, खिड़की से बाहर झाँक के देखा तो किसी बोर्ड पे पीनिया लिखा देखा तो मैं समझ गई के बस बॅंगलुर के आउट्स्कियर्ट मे पोहोच गई है पर यह नही मालूम हुआ के बस क्यों रुकी है.

5 मिनिट के अंदर ही बस के अंदर एक जवान और बड़ा हॅंडसम सा यंग आदमी एक छोटा सा एर बॅग लटकाए, ट्रॅक सूट पहने अंदर आया. मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा क्यॉंके वो आदमी सीधा मेरी तरफ आ रहा था और वो सच मे मेरे पास आ के रुक गया और अपना एर बॅग सीट के नीचे रख के मेरे साइड वाली सीट पे बैठ गया तो मैं समझ गई के उसने रिज़र्वेशन तो शाएद बॅंगलुर से ही करवा लिया था पर शाएद उसको यही से बोर्ड करना था. उसने बैठने से पहले हेलो मिस बोला और धीरे से मुस्कुरा दिया. ऊफ्फ क्या बताउ कितनी किल्लर स्माइल थी उसकी. देखने से लगता था के प्लस और माइनस शाएद मेरी ही एज ग्रूप का होगा पर बोहोत ही हॅंडसम था, हाइट होगी कोई 5’ 9/10” के करीब, मेरे से अछा ख़ासा लंबा था, बोहोत ही गोरा रंग, ट्रॅक सूट के हाफ स्लीव्स टी शर्ट के अंदर से उसके लंबे भरे भरे गोरे गोरे हाथ जिनपे आछे ख़ासे बाल भी थे और उसकी रिस्ट पे एक बड़ी सी ब्लॅक स्ट्रॅप वाली स्पोर्ट्स . बहुत ही मस्त लग रही थी. अथलेटिक टाइप की मस्क्युलर बॉडी थी. बड़ी बड़ी ब्राउन एएस और लाइट ब्राउन बॉल जो बोहोत ही अछी तरह से सेट किए हुए थे, ब्रॉड शोल्डर्स और स्पोर्ट्स शूस मे वो एक स्पोर्टस्मन ही लग रहा था. उसके पास से पर्फ्यूम की बोहोत ही बढ़िया स्मेल आ रही थी लगता था के कोई हाइ क्वालिटी का पर्फ्यूम यूज़ करता है. उसने एक दम से मुझे बोहोत अछी तरह से विश किया और बोला हेलो मिस विच सीट वुड यू लाइक टू सीट, विंडो ओर आसले. मुझे उस टाइम तक आसले सीट क्या होती है पता नही था बॅस विंडो सीट से समझ आ गया के आसले सीट मीन्स नेक्स्ट टू विंडो यानी पॅसेज वाली सीट तो मैं ने बोला के आइ होप यू वोंट माइंड इफ़ आइ यूज़ विंडो सीट, तो उसने एक बोहोत ही दिलकश मुस्कुराहट के साथ बोला ओह मिस प्लीज़ डॉन’ट वरी, आप जहा कंफर्टबल फील करती है बैठिए. इतना बोल के मैं विंडो सीट की ओर हट गई और वो मेरे लेफ्ट साइड मे बैठ गया और मुस्कुराते

हुए बोला के हेलो मिस, आइ आम राज और अपने हाथ मेरी तरफ बढ़ा दिया तो मैं भी उसकी मुस्कान मे इतनी डूब चुकी थी के मैं ने भी अपना हाथ उसके हाथ मे दे दिया और बोली के आइ आम स्नेहा तो उसने बोला के स्नेहा ईज़ आ नाइस नेम, वेरी ग्लॅड टू नो यू मिस तो मैं ने भी बोला के सेम हियर. उसने बोला के मैं मुंबई जा रहा हू तो मे ने भी बोला के मे भी मुंबई ही जा रही हू तो उसने बोला के विश यू ए प्लेज़ेंट जर्नी तो मे ने भी मुस्कुरा के बोला के सेम टू यू. इतनी बात करने से मेरा दिल कुछ हल्का होने लगा और मैं सोचने लगी के इतना हॅंडसम आदमी साथ मे हो तो शाएद सच मे मेरा जर्नी अछा ही होगा और यह सोच के मैं थोड़ा सा मुस्कुरा दी और खामोश हो गई और खिड़की के बाहर देखने लगी. यह हमारा छोटा सा इंट्रोडक्षन था.

उसके बैठने के थोड़ी देर के बाद ड्राइवर कॉफी पी के वापस आया और बस फिर से स्टार्ट हो गई. बस के सीट्स बोहोत ज़ियादा कंफर्टबल और बोहोत ज़ियादा बड़े भी नही थे इसी वजह से जब वो बैठा तो उसका शोल्डर और हाथ मेरे हाथ से लगने लगा और बस के मूव्मेंट्स के साथ उसका हाथ भी ऊपेर नीचे होने लगा. उसका बदन बोहोत ही गरम था जिसकी गर्मी मैं अपने बदन मे महसूस कर रही थी. मुझे भी कुछ अछा लगने लगा था इसी लिए मैं ऐसे ही बैठी रही. थोड़ी देर के बाद उसने अपना बॅग नीचे सीट से बाहर निकाला और बॅग मे से 2 कोक के ठंडे कॅन्स निकाले और एक मेरी तरफ बढ़ा दिया और बोला के प्लीज़ टेक इट मिस स्नेहा तो पहले तो मैं ने नो थॅंक्स बोला पर उसने बोला के गर्मी बोहोत है ठंडा ठंडा कोक पी लीजिए गर्मी जाती रहेगी वो बड़ी अची हिन्दी भी बोल रहा था लगता था के अछा ख़ासा पढ़ा लिखा होगा और उसके कपड़ो से, उसकी रिस्ट . से और उसके मेह्न्गे पर्फ्यूम उसे करने से लगता था के वो किसी अमीर घराने का होगा. उसके इन्सिस्ट करने पर मैं ने हाथ बढ़ा के थॅंक्स बोला और उसके हाथ से कोक ले लिया. कोक लाने के टाइम पे मेरा हाथ उसके हाथ से टच कर गया, मुझे उसका हाथ बोहोत ही गरम महसूस हुआ और मेरे बदन मे एक करेंट सा दौड़ गया. मैं कोक का कॅन खोल के पीने लगी. कोक बोहोत ही ठंडा था ऐसा लगता था के उसने कोक को फ्रीज़ किया हुआ था इसी लिए इतना ठंडा था और सच मे ऐसी गर्मी मई ठंडे कोक के पीना का मज़ा कुछ और ही था. जब ठंडा कोक थ्रोट के अंदर से पेट मे जा रहा था तो ऐसा लग रहा था जैसे एक ठंडी लकीर थ्रोट से पेट मे जा रही है और यह फीलिंग बोहोत अछी लग रही थी. उसने पूछा के कोक कैसा लगा मिस तो मैं ने बोला के डॉन’ट कॉल मी मिस जस्ट कॉल मी स्नेहा प्लीज़ तो वो हंस दिया और बोला के हा तो स्नेहाज़ी आपको ऐसी गर्मी मे ठंडा ठंडा कोक कैसा लगा तो मैं ने भी मुस्कुरा के बोला के नही स्नेहा जी नही सिर्फ़ स्नेहा बोलिए प्लीज़ और फिर जवाब दिया हा बोहोत अछा लगा तो उसने कहा के कॉल मी राज तो मैं ने कहा थॅंक्स राज जी तो उसने भी कहा के नही राज जी नही सिर्फ़ राज बोलिए प्लीज़ और हम दोनो मुस्कुरा दिए.

यह हमारी स्टार्टिंग के बात चीत थी उसके बाद राज ने अपने बॅग से कुछ मॅगज़ीन निकाले और एक मेरी तरफ बढ़ा दिया और एक वो खुद पढ़ने लगा. यह एक फिल्मी मॅगज़ीन था जिसे मैं देखने लगी. लास्ट नाइट बिल्कुल भी नींद नही हुई थी, शाम के ऑलमोस्ट 4 बज रहे थे और अभी भी बाहर से गरम हवा लग रही थी इसी लिए मुझे नींद आने लगी तो मुझे वॅसलीन मिक्स कोल्ड क्रीम की बॉटल याद आई तो मैं ने पर्स से निकाल के अपने चेहरे पे और हाथो पे क्रीम लगाई और क्रीम को पर्स मे वापस रख कर वैसे ही बैठे बैठे बोहोत देर तक तो राज के बारे मे सोचती रही के वाह क्या शानदार मर्द है कितना हंडसॅम है, लड़कियाँ तो इस पर मरती होंगी पता नही कितनी लड़कियाँ इस हॅंडसम से चुदवा चुकी होंगी पता नही कितनी गर्ल फ्रेंड्स होगे इसके पता नही शादी शुदा है या अभी ऐसे ही ज़िंदगी के मज़े ले रहा है एट्सेटरा एट्सेटरा ऐसे ही मेरे दिमाग़ मे सावालात गूंजते रहे फिर मैं कुछ देर तक मॅगज़ीन के पिक्चर्स देखती रही और ऐसे ही देखते देखते सो गयी. आँख खुली तो शाम के ऑलमोस्ट 6 या 6:30 बजे का टाइम था. मुझे लगा जैसे मुझे एक घंटे की नींद लगी थी इसी लिए मैं तोड़ा फ्रेश फील कर रही थी. बस चित्रदुरगा टाउन मे पोहोच रही थी. मेरी आँख खुली तो देखा के राज भी सो चुका था और जैसे ही बस चित्रदुरगा के आउट्स्कियर्ट के टी स्टॉल पे एक हल्के से झटके से रुकी तू राज की आँख भी खुल गई और हम दोनो एक दूसरे को देख के विदाउट एनी रीज़न मुस्कुरा दिए उसने सजेस्ट काइया के नीचे उतरते है और चाइ कॉफी पीते है तो मैं भी एक ही पोज़िशन मे इतनी देर से बैठे बैठे थक चुकी थी इसी लिए मैं भी नीचे उतर के थोड़ी वॉकिंग करके अपने मसल्स को रिलॅक्स करना चाहती थी इसलि लिए मैं भी नीचे उतर गई. राज ने मुझ से पूछा के क्या लेगी आप चाय या कॉफी तो मैं ने बोला के कॉफी ही ठीक रहेगी तो उसने 2 नेस्केफे का ऑर्डर दिया. कॉफी बोहोत अछी और बोहोत ही टेस्टी थी. शाम के टाइम मे गरमा गरम कॉफी बोहोत अछी लग रही थी मैं अपना पर्स खोल के कॉफी का पेमेंट करने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला के नही पेमेंट तो मैं करूगा, प्लीज़ बे मी गेस्ट फिर भी मैं ने इन्सिस्ट किया तो उसने मुझे रोक दिया और खुद ही पेमेंट किया तो मैं ने उसको थॅंक्स बोला तो उसने बोला के नो फॉरमॅलिटीस प्लीज़. उसने जब मेरे हाथो को अपने गरम हाथो से पकड़ा तो मेरे अंदर एक करेंट सा दौड़ गया और मेरे माथे पे थोड़ा सा पसीना भी आगेया.

थोड़ी देर के अंदर वाहा पे सब पॅसेंजर्स यरिनल्स को जा के वॉशरूम से फ्रेश हो गये और कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स ले के वापस बस मे आ गये थे. मैं भी वॉशरूम को जा के आ गई थी तो यूरिनरी ब्लॅडर जो यूरिन से फुल हो गया था अब रिलॅक्स हो गया था और मैं भी ईज़ी फील कर रही थी. तकरीबन आधे

घंटे के बाद बस फिर से चलने लगी. इतनी देर से बहेर की गरम हवा लगने से मेरे गोरे गोरे चीक्स लाल हो गये थे तो राज ने बोला के स्नेहा आपके चेहरे पे धूप ने अपना कमाल दिखा दिया और आपके गालो को कश्मीरी सेब का कलर दे दिया तो मैं ऐसे फर्स्ट क्लास कॉमेंट्स के लिए मुस्कुरा दी. मुझे उसका यह ब्यूटी का आडमाइर करने का स्टाइल बोहोत अछा लगा. मैं ने बोला के नही ऐसी कोई बात नही मैं आक्च्युयली रात मे सोई नही थी इसी लिए मुझे नींद आ गई और मुझे पता भी नही था के मैं सन के डाइरेक्षन मे बैठी हू और बोला के राज आप इधर विंडो सीट पर आ जाइए मैं उधर आ जाती हू और मैं अपनी सीट से उठने लगी तो वो भी अपनी सीट से उठ गया और हम ने सीट्स का एक्सचेंज कर लिया अब मैं उसके लेफ्ट साइड मे बैठी थी. यह आसले वाली सीट मुझे विंडो सीट से ज़ियादा ठीक लगी के मैं अपने लेग्स को थोड़ा स्ट्रेच कर सकती थी. राज ने मुझ से पूछा के आप कहा रहती हो मुंबई मे तो मैने बोला के ओह नही मैं मुंबई मे रहती नही आक्च्युयली मे मुंबई को बिल्कुल फर्स्ट टाइम जा रही हू तो उसका मूह हैरत से खुल गया और बोला के आप अकेली जा रही हो मुंबई और वो भी फर्स्ट टाइम तो मैं ने बोला के हा एक कंपनी मे मेरा इंटरव्यू है तो उसने पूछा के कैसा इंटरव्यू तो मैने बोला के मैं ने सिक्रेटेरियल पोस्ट के लिए अप्लाइ किया था और मुझे कॉल आई है इंटरव्यू के लिए तो उसने पूछा के कोन्सि कंपनी का है तो मैं ने बोला के है कोई आर के इंडस्ट्रीस जिस्मै एमडी को प्राइवेट सेक्रेटरी कम अकाउंट्स वाली असिस्टेंट चाहिए तो उसने बोला के आपको पता है किसी एमडी की प्राइवेट सेक्रेटरी होने का मतलब क्या होता है तो मैं ने पूछा के नही, क्यों, क्या होता है उसका मतलब, तो उसने बोला के मुंबई या और दूसरे बिग सिटीस मैं जो भी किसी भी कंपनी के एमडी या एग्ज़िक्युटिव्स होते है वो बड़े ही हरामी होते है, अपनी सेक्रेटरीस को अपने साथ टूर पे भी आउट ऑफ सिटी ले जाते है जहा कभी कभी तो दोनो को एक ही रूम शरीर करने पड़ता है, और ऑफीस मे उनके साथ लेट बैठना भी पड़ता है कभी कभी तो उनके रूम मे घंटो तक भी बैठना पड़ता है और ऑलमोस्ट ऑल प्राइवेट सेक्रेटरीस के उनके बॉसस के साथ इल्लीगल रिलेशन्स होते है तो मेरा मूह हैरत से खुला का खुला रह गया और मैं ने पूछा आप सच बोल रहे हो तो उसने कहा के हाँ एक दम से सच.

क्रमशः......................

Recession Ki Maar part--3

gataank se aage..........

Bangalore se nikalne ke time pe mousam ziada garmi bhi nahi ziada thandi bhi nahi bohot pleasant weather tha phir bhi mai ne apne badan pe ek shawl lapet li ke kahi raste mai thandi lage to shawl kaam ayegi aur kisi ko pata bhi nahi chalega ke mai ne panty aur brassier nahi pehni hai and anyhow thodi der mai hi andhera ho jayega to phir kisi ko bhi kia pata chalega ke kisne kia pehna hai kia nahi.

Mai aur satish dopeher ke 2 baje se pehle hi travel office pohoch gaye. Satish ko weather dekh ke yaad aya aur wo kareeb ki dukan se ek vaseling mix cold cream ka dibba le ke aaya, yaha koi supermarket to tha nahi jo apni choice se purchase kia ja sake, isi liye choude muh wala bade dhakkan ka medium size ka dibba mila jise Satish ne kharid lia aur mujhe bola ke yeh rakhlo raste maid hoop lagegi ya baher ki hawa se skin kharab ho jaygi to yeh tum apne face pe aur hatho pe laga lena to mai ne wo cold cream ki bottle ko apne purse mai hi rakh lia. Itni der mai waha almost sab hi log aa chuke the aur bus ke ander baithne lage the. mera suitcase bhi bus ke neeche bane locker mai rakh dia aur mai sirf apna purse le ke apni seat pe aa gai. Dekha to meri seat pe mai akeli hi thi aur koi nahi aaya to mai khush ho gai ke chalo safar araam se guzrega 2 seat pe aram se baithugi. Mei bohot hi dar rahi thi aur bus ke chalne tak satish mere sath hi rahe aur meri himmat badha rahe the aur mujhe bina ghbaraye aur bina darey confidence ke sath safar karne ko bol rahe the. Aaj mai first time Satish se aur Bangalore se door ja rahi thi mera dil badi zor zor se dhadak raha tha jaise abhi baher nikal jayega, mere badan se paseene chhoot rahe the phir bhi mai himmat dikha rahi thi aur yeh soch kar ke jab mujhe jana hi hai to kyon na mai confidence ke sath jau aur agar mujhe Bangalore se baher hi reh kar job karni hai to mere ander confidence to hona hi chahiye bass yeh soch kar mere ander himmat badhne lagi aur mera dimagh se darr nikal gaya aur mere chehre pe kuch itmenan aa gaya. Bus apne time pe start ho gayi aur chal padi. Mai ne bujhe dil se aur apni aansoo bhari aankho se Satish ko bye bola aur khidki se hath nikal ke usko uss waqt tak wish karti rahi tab tak wo dikhayee deta raha. Jab wo nazro se ojhal ho gaya to mujhe rona aa gaya aur mere aansoo nikal pade. Kuch der tak roti rahi phir apne aap ko sambhaal lia. Last seat pe baithne ki wajah se kisi ko pata bhi nahi chala ke mai ro rahi thi.

Ab mai apne aap ko bus ke ander set karne lagi aur jo shawl lapeti thi usko fold kar ke ooper bane hue overhead portion mai rakh dia. May ke mahina tha aur dopeher 2 baje ki garmi thi badan paseene se bhara hua tha. Jaise hi bus chalne lagi thodi hawa ayi to badan ka paseena sookha par baher abhi hawa garam hi chal rahi thi. Shuru shuru mai to bus ke ander ke log ek doosre se zor zor se batein kar rahe the par thodi hi der ke bad almost sab hi log chhup ho gaye the aur bus mai jaise ek sukoon aa gaya tha. Mai ab sochne lagi ke Mumbai mei kia hoga, kaha hotel milega, RK Industries ka office pata nahi kitni door hoga, job milegi bhi ya nahi etc etc. Abhi mei yeh sab sochne mai hi busy thi ke bus ek stop pe ruki, khidki se baher jhank ke dekha to kisi board pe Peenya likha dekha to mai samajh gai ke bus Bangalore ke outskirt mai pohoch gai hai par yeh nahi malum hua ke bus kyon ruki hai.

5 minute ke ander hi bus ke ander ek jawan aur bada handsome sa young aadmi ek chota sa air bag latkaye, track suit pehne ander aaya. Mera dil zor se dhadakne laga kyonke wo aadmi seedha meri taraf aa raha tha aur wo sach mai mere paas aa ke ruk gaya aur apna air bag seat ke neeche rakh ke mere side wali seat pe baith gaya to mai samajh gai ke usne reservation to shaed Bangalore se hi karwa lia tha par shaed usko yahi se board karna tha. Usne baithne se pehle Hello miss bola aur dheere se muskura dia. Uff kai batau kiti killer smile thi uski. Dekhne se lagta tha ke plus aur minus shaed meri hi age group ka hoga par bohot hi handsome tha, height hogi koi 5’ 9/10” ke kareeb, mere se acha khasa lamba tha, bohot hi gora rang, track suit ke half sleeves T shirt ke ander se uske lambe bhare bhare gore gore hath jinpe ache khaase baal bhi the aur uski wrist pe ek badi si black strap wali sports watch bohto hi mast lag rahi thi. Athletic type ki muscular body thi. Badi badi brown eyes aur light brown baal jo bohot hi achi tarah se set kiye hue the, broad shoulders aur sports shoes mai wo ek sportsman hi lag raha tha. Uske pas se perfume ki bohot hi badhiya smell aa rahi thi lagta tha ke koi high quality ka perfume use karta hai. Usne ek dum se mujhe bohot achi tarah se wish kia aur bola Hello Miss which seat would you like to sit, Window or Aisle. Mujhe uss time tak AISLE seat kia hoti hai pata nahi tha bass window seat se samajh aa gaya ke AISLE seat means next to window yaani passage wali seat to mai ne bola ke I hope you wont mind if I use window seat, to usne ek bohot hi dilkash muskurahat ke sath bola Oh miss please don’t worry, aap jaha comfortable feel karti hai baithiye. Itna bol ke mai window seat ki or hat gai aur wo mere left side mai baith gaya aur muskurate

hue bola ke Hello Miss, I am Raj aur apne hath meri taraf badha dia to mai bhi uski muskan mai itni doob chuki thi ke mai ne bhi apna hath uske hath mai de dia aur boli ke I am Sneha to usne bola ke Sneha is a nice name, Very glad to know you miss to mai ne bhi bola ke same here. Usne bola ke mai Mumbai ja raha hu to me ne bhi bola ke mei bhi Mumbai hi ja rahi hu to usne bola ke wish you a pleasant journey to mei ne bhi muskura ke bola ke same to you. Itni bat karne se mera dil kuch halka hone laga aur mai sochne lagi ke itna handsome aadmi sath mai ho to shaed sach mai mera journey acha hi hoga aur yeh soch ke mai thoda sa muskura di aur khamosh ho gai aur khidki ke baher dekhne lagi. Yeh hamara chota sa introduction tha.

Uske baithne ke thodi der ke bad driver coffee pi ke wapas aaya aur bus phir se start ho gai. Bus ke seats bohot ziada comfortable aur bohot ziada bade bhi nahi the isi wajah se jab wo baitha to uska shoulder aur hath mere hath se lagne laga aur bus ke movements ke sath uska hath bhi ooper neeche hone laga. Uska badan bohot hi garam tha jiski garmi mai apne badan mai mehsoos kar rahi thi. Mujhe bhi kuch acha lagne laga tha isi liye mai aise hi baithi rahi. Thodi der ke bad usne apna bag neeche seat se baher nikala aur bag mai se 2 Coke ke thande cans nikale aur ek meri taraf badha dia aur bola ke please take it Miss Sneha to pehle to mai ne No Thanks bola par usne bola ke garmi bohot hai thanda thanda coke pi lijiye garmi jaati rahegi wo badi achi hindi bhi bol raha tha lagta tha ke acha khasa padha likha hoga aur uske kapdo se, uski wrist watch se aur uske mehnge perfume use karne se lagta that ke wo kisi ameer gharaane ka hoga. Uske insist karne par mai ne hath badha ke thanks bola aur uske hath se coke le lia. Coke lane ke time pe mera hath uske hath se touch kar gaya, mujhe uska hath bohot hi garam mehsoos hua aur mere badan mai ek current sa doud gaya. Mai Coke ka can khol ke peene lagi. Coke bohot hi thanda tha aisa lagta tha ke usne Coke ko freeze kia hua tha isi liye itna thanda tha aur sach mai aisi garmi mai thande Coke ke peena ka maza kuch aur hi tha. Jab thanda coke throat ke ander se pet mai ja raha tha to aisa lag raha tha jaise ek thandi lakeer throat se pet me ja rahi hai aur yeh feeling bohot achi lag rahi thi. Usne pucha ke Coke kaisa laga miss to mai ne bola ke don’t call me miss just call me Sneha please to wo hans dia aur bola ke haa to Snehaji aapko aisi garmi mai thanda thanda coke kaisa laga to mai ne bhi muskura ke bola ke nahi Sneha ji nahi sirf Sneha boliye please aur phir jawab dia haa bohot acha laga to usne kaha ke call me Raj to mai ne kaha thanks raj ji to usne bhi kaha ke nahi Raj ji nahi sirf Raj boliye please aur ham dono muskura diye.

Yeh hamari starting ke baat cheet thi uske bad Raj ne apne bag se kuch magazine nikale aur ek meri taraf badha dia aur ek wo khud padhne laga. yeh ek filmi Magazine tha jise mai dekhne lagi. Last night bilkul bhi neend nahi hui thi, sham ke almost 4 baj rahe the aur abhi bhi baher se garam hawa lag rahi thi isi liye mujhe neend aane lagi to mujhe Vaseline mix Cold Cream ki bottle yaad ayi to mai ne purse se nikal ke apne chehre pe aur hatho pe cream lagayii aur cream ko purse mai wapas rakh ka raise hi baithe baithe bohot der tak to Rajj ke bare mai sochti rahi ke wah kia shandar mard hai kitna hamndsome hai, ladkiyan to iss par marti hongi pata nahi kitni ladkian iss handsome se chudwa chuki hongi pata nahi kitne girl friends hoge iske pata nahi shadi shuda hai ya abhi aise hi zindagi ke maze le raha hai etc etc aise hi mere dimagh mai sawalaat goonjte rahe phir mai kuch der tak magazine ke pictures dekhti rahi aur aise hi dekhte dekhte so gayi. Aankh khuli to sham ke almost 6 ya 6:30 baje ka time tha. Mujhe laga jaise mujhe ek ghante ki neend lagi thi isi liye mai thoda fresh feel kar rahi thi. Bus Chitradurga town mai pohoch rahi thi. Meri aankh khuli to dekha ke Raj bhi so chuka tha aur jaise hi bus Chitradurga ke outskirt ke tea stall pe ek halke se jhatke se ruki tu Raj ki aankh bhi khul gai aur ham dono ek doosre ko dekh ke without any reason muskura diye usne suggest kia ke neeche utarte hai aur chai coffee peete hai to mai bhi ek hi position mai itni der se baithe baithe thak chuki thi isi liye mai bhi neeceh utar ke thodi walking karke apne muscles ko relax karna chahti thi isli liye mai bhi neeche utar gai. Raj ne mujh se pucha ke kia legi aap chaye ya coffee to mai ne bola ke coffee hi theek rahegi to usne 2 Nescafe ka order dia. Coffee bohot achi aur bohot hi tasty thi. Sham ke time mai garma garam coffee bohot achi lag rahi thi mai apna purse khol ke coffee ka payment karne lagi to usne mera hath pakad lia aur bola ke nahi payment to mai karuga, please be my guest phir bhi mai ne insist kia to usne mujhe rok dia aur khud hi payment kia to mai ne usko thanks bola to usne bola ke No formalities please. Usne jab mere hatho ko apne garam hatho se pakda to mere ander ek current sa doud gaya aur mere maathe pe thoda sa paseena bhi aagaya.

Thodi der ka ander waha pe sab passengers urinals ko ja ke washroom se fresh ho gaye aur coffee ya cold drinks le ke wapas bus mai aa gaye the. Mai bhi washroom ko ja ke aa gai thi to urinary bladder jo urine se full ho gaya tha ab relax ho gaya tha aur mai bhi easy feel kar rahi thi. Takreeban aadhe

ghante ke baad bus phir se chalne lagi. Itni der se baher ki garam hawa lagne se mere gore gore cheeks laal ho gaye the to Raj ne bola ke Sneha aapke chehre pe dhoop ne apna kamal dikha dia aur aapke galo ko kashmiri seb ka colour de dia to mai aise first class comments ke liye muskura di. Mujhe uska yeh beauty ka admire karne ka style bohot acha laga. Mai ne bola ke nahi aisi koi bat nahi mai actually raat mai soi nahi thi isi liye mujhe neend aa gai aur mujhe pata bhi nahi tha ke mai sun ke direction mai baithi hu aur bola ke Raj aap idhar window seat par aa jayie mai udhar aa jati hu aur mai apni seat se uthne lati to wo bhi apni seat se uth gaya aur ham se seats ka exchange kar lia ab mai uske left side mai baithi thi. yeh aisle wali seat mujhe window seat se ziada theek lagi ke mai apne legs ko thoda stretch kar sakti thi. Raj ne mujh se pucha ke aap kaha rehti ho Mumbai mai to maine bola ke oh nahi mai Mumbai mei rehti nahi actually mei Mumbai ko bilkul first time ja rahi hu to uska muh hairat se khul gaya aur bola ke aap akeli ja rahi ho Mumbai aur wo bhi first time to mai ne bola ke haa ek company mai mera interview hai to usne pucha ke kaisa interview to maine bola ke mai ne secretarial post ke liye apply kia tha aur mujhe call ayi hai interview ke liye to usne poocha ke konsi company ka hai to mai ne bola ke hai koi R K Industries jismai MD ko Private Secretary cum accounts wali assistant chahiye to usne bola ke aapko pata hai kisi MD ki Private secretary hone ka matlab kia hota hai to mai ne poocha ke nahi, kyon, kia hota hai uska matlab, to usne bola ke Mumbai ya aur doosre big cities mai jo bhi kisi bhi company ke MD ya executives hote hai wo bade hi harammi hote hai, apni secretaries ko apne sath tour pe bhi out of city le jate hai jaha kabhi kabhi to dono ko ek hi room share karne padta hai, aur office mai unke sath late baithna bhi padta hai kabhi kabhi to unke room mai ghanto tak bhi baithna padta hai aur almost all private secretaries ke unke bosses ke sath illegal relations hote hai to mera muh hairat se khula ka khula reh gaya aur mai ne poocha aap sach bol rahe ho to usne kaha ke haa ek dum se sach.

kramashah......................