मेरी बेकाबू जवानी compleet

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raj..
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Re: मेरी बेकाबू जवानी

Unread post by raj.. » 09 Nov 2014 15:24


मम्मी ने रसोई मे दो सब्जिया बनाई थी, गोभी की और आलू की. पति ने मम्मी से पूछा “ अरे नाज़ जी, ये आलू की सब्जी जया ने बनाई है, क्यूंकी इस मे वही मीठा पन है जैसा जया ने चाइ बनाते वक़्त डाला था”.उस पर मम्मी ने कहा “ नही भाई साहिब ये सब्जिया तो मैं ही बनाती हू, जया तो अक्सर पढ़ाई मे ही लगी रहती है. लेकिन अब मैं इसे खाना बनाना सीखा दूँगी ताकि कभी दोपहर मे आपको कुछ गरम खाने का मन करे तो जया आपके लिए बना सके”. मम्मी ने मेरी ऑर देखते हुए पूछा ” क्यू जया खाना बनाना सीखेंगी ना?, क्यूंकी आगे जाके तुम्हे भी अपने पति देव के लिए खाना तो बनाना ही पड़ेगा”. मम्मी की इस बात पर मैं शर्मा गयी और सब हंस रहे थे. मैं अपने पति की ओर देख रही थी और वो मेरे पैरो को बहुत ज़ोर से दबा रहे थे. मैं मन मे सोच के मुस्कुरा रही थी के मम्मी पापा को कहा पता था कि उनकी बेटी ने तो शादी कर ली है और वो अब सिर्फ़ अपने पति के आदेशो पर ही चल रही है.

डेट: 24-जून-96 ठीक रत के 12 बजे थे, मेरा अलार्म बज रहा था और मैं गहरी नींद मे थी, क्यूंकी कल से मैं एक पल के लिए भी ठीक से सो नही पाई थी. मेने हाथो की अंगड़ाया ली और अपने बेड पे से नंगी ही उठ के बाथरूम मे नहाने चली गयी. अपने पूरे बदन को मेने अच्छे से साफ किया और जिस्म के उपर एक छ्होटी सी रज़ाई लपेट के नीचे अपने पति जी के पास जाने के लिए निकल पड़ी.

मैं सीढ़ियो से उतर के पति जी के घर के पास जाने लगी, तभी मेने देखा के पति जी मेरा दरवाजा खोल के और पूरे नंगे होकर मेरा इंतेजार कर रहे थे. मैं दौड़ के उनके पास पहोच गयी और उन्हे अपने आगोस मे कर लिया, पति जी ने मुझे कमर मे हाथ डाल के अपने जिस्म से सटाये हुए मुझे घर के अंदर ले लिया और दरवाजे को बंद कर दिया. मैं घर मे जाते ही उनसे दूर हुई और अपने घुटनो के बल बैठ के पति जी के पैरो के उपर अपने दोनो हाथो को रख दिया और अपना सिर भी उनके पैरो मे झुका दिया, ऐसा करते ही मेरी पीठ पे से मेरे बल हट के मेरे सिर के उपर आ गये और पति जी को मेरी नंगी पीठ का दर्शन हो गया. पति जी बहुत खुस थे, उन्होने मुझे सदा सुहागन होने का आशीर्वाद दिया. फिर उन्होने मेरे कंधो को अपने हाथो मे लेके मुझे खड़ा किया. मेने अपने दोनो हाथो को ज़ोर के उनके सामने एक नादान लड़की तरह खड़ी रही, मेरे बाल मेरे दोनो कंधो से होते हुए मेरे दोनो स्तनो के पास चले गये थे, मेरा सिर भी झुका हुवा था.

पति जी ने मेरे सिर पे अपना राइट हाथ फेरा और अपने राइट हाथ को मेरी गर्दन के पास ले जाके मेरे बालो के साथ मेरी गर्दन को दबा दिया. फिर पति जी ने मुझे अपनी और खिचा और अपने नंगे जिस्म के साथ लगा दिया. मेरे स्तन के उपर जो बाल थे वो पति जी के छाती के बालो के साथ जुड़ गये और मेरे जिस्म मे जैसे गुद गुडी जैसी होने लगी, मैं हल्का सा मुस्करा उठी और अपना सिर पति जी की छाती मे छुपा लिया. पति जी ने मेरी पीठ पे लेफ्ट हाथ फेरा और मुझे अपने जिस्म से ज़ोर से सटा दिया. फिर पति जी ने मुझे अपने जिस्म से थोड़ा सा पीछे किया और मेरे चेहरे को उपर की ओर उठा के मुझे किस करने लगे, धीरे धीरे किस करते हुए पति जी ने मुझे अपनी ओर खिचा और मेरे जिस्म के उपर अपना हाथ चला ने लगे. मैं भी किस मे मदहोश हो गयी थी और पति जी के जिस्म के उपर अपने नाज़ुक हाथ घुमा रही थी. फिर पति जी किस को रोकते हुए, मेरी कमर मे हाथ डाल के, मुझे उठा के मेरे मास्टर बेडरूम ले गये.

बेडरूम मे जाते ही मेने देखा कि आज बेड पे लाल रंग की चादर थी और उस पे पीले रंग के फूल थे. पति जी ने मुझे बेड पे लिटा दिया और वो खुद कुछ दूरी से मुझे बेड पे नंगी सोई हुई देख रहे थे. पति जी मेरी ओर आगे बढ़ने ही वाले थी कि मैं बेड से उठ के “स्वर्गीय कविता राज शर्मा” के फोटो के पास चली गयी. मैं वाहा पर हाथ जोड़ के खड़ी थी और पति जी मेरे पीछे आकर मेरे कंधो के उपर अपने हाथ रख के खड़े थे, उस वक़्त उनका लंड मेरी नंगी पीठ पर लग रहा था.

मेने कविता जी और देखते हुए कहा “ मैं हमेशा भगवान से सिर्फ़ इतना ही माँगा था कि मुझे कोई बेहद प्यार करे, मेरी हर ज़रूरत को पूरा करे, मुझे कभी अकेला ना छोड़े, मेरे हर दुख दर्द और ख़ुसी मे वो मेरा साथ दे. मेने ये कभी नही सोचा था कि आपके पति देव ही मेरे पालनहार बनेंगे. शायद आपने ही मेरी बात भगवान से सुन ली होगी क्यूंकी आप भगवान के बहुत ज़्यादा नज़दीक हो, इसलिए आपने ही हम दोनो को मिलने के लिए मेरी ज़िंदजी मे जो कुछ हुवा वो आपके कारण ही हुवा है और मे इसके लिए आपका शुक्रिया करती हू.फिर पति जी ने कहा “ देखा कविता मेने कोई ग़लती नही की तुम्हारी जगह पर जया को अपनी पत्नी बना के”.

फिर पति जी ने मुझे अपनी ओर करते हुए कहा “ जया अब तुम हर वक़्त अपने जिस्म की प्यास को बुझाने से पहले कविता से आशीर्वाद ले लेना और अपने पति को हर तरीके से खुस रख ने का आशीर्वाद माँगना”. पति जी ने मुझे बेड के पास ले जाके मुझे पीठ के बल लिटा दिया, वो खुद मेरे उपर आके मेरे दोनो पैरो के बीच मे, मेरी चूत के पास अपना लंड रख के, मेरे स्तन को अपनी छाती से ढक के, मेरे नाज़ुक होंठो को चूम ने लगे. किस करते हुए उन्होने मेरी चूत के पास अपना लेफ्ट हाथ ले जाके उसे खोल दिया और अपने मोटे लंड को उसे मे डाल ने लगे. मेरी चूत कब्से अंदर से गीली थी इसलिए मुझे सुरू मे लंड जब अंदर गया तब कोई दर्द नही हुवा. किस को और ज़ोर से करते हुए पति जी लंड को भी और अंदर तक डालने लगे. मैं उस वक़्त मस्ती मे थी और पति जी का साथ देते हुए उनके होंठो को काट रही थी, अपने हाथो को उनकी पीठ पे घुमा रही थी, उनके सिर के बालो को अपनी हाथो की मुट्ठी से पकड़ के खिच रही थी, क्यूंकी मुझसे और दर्द बर्दाश्त नही हो रहा था. उधर पति जी भी खूब उत्तेजित हो रहे थे और अपने लंड को मेरी चूत मे बहुत जल्दी जल्दी अंदर बाहर कर रहे थे.

raj..
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Re: मेरी बेकाबू जवानी

Unread post by raj.. » 09 Nov 2014 15:25


एक मोड़ पे मैं झाड़ ने ही वाली थी तभी पति जी को अहसास हो गया और मुझे ज़ोर से गर्दन मे हाथ डाल के पकड़ लिया और लंड को एक झटके मे अंदर तक जाके रख दिया और मेने अपना पानी छोड़ दिया, उस पानी ने गरम लंड को पूरा गीला कर के ठंडा कर दिया. पति जी मेरी चूत मे लंड को अंदर तक रख ते हुए, मेरी कमर पे हाथ रख के, मेरे दोनो पैरो के बिचमे बैठ गये. उनके जिस्म से पसीने की बूंदे मेरी कमर पे गिर रही थी और वो मुझे ठंडक दे रही थी. मेरे चेहरे पे बाल आए थे, उनको पति जी ने हटाते हुए मेरी ओर देख ने लगे. मेने हल्की सी मुस्कान देके उनको थॅंक्स कहा. पति जी मेरे हाथो को अपने हाथो मे लेके उनकी उंगलियो को चूम ने लगे और कहा “ जया अपने हाथ अपने सिर के उपर ले जाके रखो और मैं कुछ भी करू वो नीचे नही आने चाहिए”. मेने अपने हाथ सिर के उपर ले जाके रख दिए, ऐसा करते ही मेरे दोनो स्तन उपर की ओर उभर आए. पति जी मेरे उपर झुकते ही मेरे राइट को स्तन को चूमने लगे और लंड को अंदर बाहर कर ने लगे. जैसे जैसे लंड अंदर बाहर हो रहा था, पति जी मेरे स्तन पे ज़ोर से दबाव दे रहे थे. मेरे हाथ अपने आप ही नीचे आगाये और मेने पति जी के सिर के बालो को ज़ोर से पकड़ लिया. क्यूंकी पति जी मेरे स्तन पे बहुत ज़ोर से काट रहे थे और मे सहन नही कर पा रही थी.

इतने मे ही पति जी रुक गये और मेरी ओर देख के कहा “ जया मेने कहा था अपने हाथ उपर ही रख ना”. मेने अपनी नज़र झुकाते हुए कहा “ पति जी मुझे से दर्द सहा नही गया और मेरे रोक ने पे भी मेरे हाथ रुके नही और वो नीचे आ गये”. पति जी ने कविता जी की ओर देखते हुए कहा“ कविता इसे थोड़ा सा सहारा दो ताकि ये मेरा दर्द सहे सके, जया जाओ और कविता से आशीर्वाद ले के आओ”. मैने बेड पे से उतर के, चल ने के लिए अपने लेफ्ट पैर को आगे किया और राइट पैर को आगे करने ही वाली थी की मैं वापस बेड पे बैठ गयी, क्यूंकी मुझे बहुत दर्द हो रहा था. मैं जैसे तैसे करके कविता जी के फोटो के पास गयी और उनसे आशीर्वाद माँगा कि “ कविता जी मुझे दर्द सहन करने की हिम्मत दो, ताकि मैं अपने पति जी को खुस रख के उनकी जिस्म की प्यास को बुझा ने मे समभागी हो सकु”. मैं मूड के बेड की ओर बढ़ने ही वाली कि मेने देखा कि पति जी ने बेड के किनारे पे बनाई हुए लकड़ी की डिज़ाइन मे एक रस्सी बाँध दी और उसका एक छोर बेड के उपर खुला रखा.

मैं सिर को नीचे झुकाते हुए पति जी के पास जाके खड़ी रही, उन्होने मुझे चूमा और कहा “ जया मैं कविता को भी ऐसे ही प्यार करता था और उसे कोई सीकायत नही होती थी”. मेने कहा “ आप क्या करते थे कविता जी के साथ”. इतना कहते ही उन्होने मुझे कमर से उठा के बेड पे लिटा दिया और खुद भी लंड को चूत के पास रख के मेरे हाथो को अपने हाथो मे लेके मेरे सिर के पीछे ले गये. सिर के उपर मेरे दोनो हाथो को उन्होने रस्सी से बंद दिया और धीरे धीरे अपने हाथो को मेरे बँधे हाथो के उपर से छूते हुए मेरे स्तन पे ले जाके उन्हे दबा दिया और लंड को मेरी चूत मे डाल दिया, मैं दर्द से कराह उठी. लंड हर बार अंदर करने पर वो मेरे स्तन को दबाते थे और बाहर करने पर छोड़ देते थे. फिर मेरे स्तन के नीचे से पीठ पे हाथ ले जाके मुझे ज़ोर से दबा दिया और अपने मूह को मेरे राइट स्तन पे रख के उसे चूस ने लगे और लंड के अंदर बाहर होने पर उसे ज़ोर से काटते थे और मेरे निपल को चूम थे और कई बार काट ते भी थे. मेरे हाथ बंदे होने की बजह से मैं हाथो से कुछ भी कर नही पा रही थी और मेरी टाँगे जो खुली हुई थी उसे पति जी की कमर पे ज़ोर से दबा रही थी, क्यूंकी मेरा विरोध करने का एक ही रास्ता खुला था, मैं पैरो को और खोल भी नही सकती थी क्यूंकी लंड तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था उसे रोक ने के लिए मैं उसे और अंदर कर रही थी, ताकि पति जी उसे और अंदर बाहर ना करे और मुझे थोड़ी सी चैन की सांस ले ने को मिले.करीब आधे घंटे तक वो मुझे ऐसे ही दर्द देते रहे और उनके लंड ने पानी छोड़ दिया, जो मेरी चूत मे अंदर तक फेल गया और चूत चारो और से गीला करके उसे ठंडा कर दिया. उधर पति जी भी मेरे उपर गिर पड़े और मैं उनके पसीने से पानी पानी हो गई.
क्रमशः........


raj..
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Re: मेरी बेकाबू जवानी

Unread post by raj.. » 09 Nov 2014 15:27


Meri Bekaabu jawaani--8


gataank se aage......

Ghar pe ate hi jab me sidiya chadh rahi thi ki tabhi pati ji samne aa gaye aur mere hontho ko chum ke mujhe baho me utha liya aur mere sasural me le gaye. Pati ji ne mujhe ghar ke andar le jake sofe pe bitha diya aur khud mere pairo ke bich me baith gaye. Phir apna pura jism mere jism se laga diya aur mere hontho ko paglo ki tarah chumne aur katne lage. Mene unse apne hontho ko chhudane ki kafi koshish ki lekin pati ji ne mujhe aur bhi behrehmi se hontho ko chuma aur kata. Meri aankho me aasu bhi aa gaye the. Phir 10 minat ki ladai ke bad unhone mujhe chod diya. Mene sir ko jukaye hue pati ji se pucha “ Pati ji college me mujhe bataya gaya tha ki meri mummy ki tabiyat kharab hai “. Pati ji ne mujhe phir se halke se chuma aur kaha “ Pahle shant ho jao, kya tumhe mere upar jara sa bhi vishvas nahi hai, tumhari mummy meri bhi to samdhan hui na, to kya me apni pyari patni ki mumy ko kuch hone dunga”. Phir se mere hontho ko chumte hue mujhe baho bhar ke mujhe bedroom le gaye aur mujhe bed pith ke bal lita diya. Phir pati ji pure nange ho gaye aur mere upar let gaye. Pati ji ne mere pure jism ko chuma aur dhire dhire karke college dress ko nikal diye aur apni almari me rakh diya. Pati ji mere baju me aake so gaye aur mera sir apni chaatee ke upar rakh diya aur apne hatho ko mere balo me gumane lage, me bhi unki chaatee ko chumne lagi aur nipple ko chus ne lagi. Is dauran pati ji ne kaha “ Jayaa me aaj subah tumhare ghar gaya tha, me tumhari mummy-papa se bat kar raha tha, tumhari mummy ne mujhe bataya ki “ bhai sahib koi choti si naukri ho to batana kyunki me jyada padhi likhi nahi hu aur mera samay bhi bit jaye”. Darrasal me bhi unhe koi naukri karne ke liye hi kahne gaya tha taki hum dono pati patni ke jaise rah sake aur jism ki pyas ko buja sake. Me ne ye sunte hi unko kaha ki “meri pehchan kafi college me hai, are ha! nazdik me hi ek muslim college hai aur vaha par bachho ka khayal rakh sake aeisi koi aurat ki jarurat hai, lekin usme ek dikkat hai ki aapko jyada waqt dena padega, aako subah 9 baje se sam ko 6 baje tak vaha naukri karni padegi, agar aapke pati aur aapko manjur ho to me unse abhi bat kar leta hu”. Muslim college sunte hi vo kush ho gayi aur turant ha kar diya. Mene bhi muslim college me phone karke tumhari mummy ki naukri pakki kar di. Mene kaha “ To aaj se hi aapko college me jana hai”. Meri bat sunte hi vo kush ho gayi, tabhi tumhare papa ne kaha “ are lekin Jayaa ko to pata nahi chalega aur vo ghar band dekhe gi to rone lagegi”. Mene kaha “ Jayaa ki chinta aap mat kijye, vo jab college se aayegi to me use bata dunga ke aap ke sath kya huva hai, vo bhi is bat ko sunke kush ho jayegi”. Puri bat sunke bad mujhe apti ji ke upar bahut pyar aane laga aur meri aankho me se khusi ke aasu bhi aagye aur mene unke hontho ko chumne lagi. Pati ji mere upar aake apne lund ko chut me dal ke mujhe chodne lage, kafi der aise hi chodne ke bad pati ji apne lund ko teji se andar bahar karne lage aur mere jism ko apne hatho se, mere chehre aur garden ko apne hontho se katne lage. Me is pyar se kafi uttejit ho gayi thj aur dono hatho se pati ji ke pith ko nakhuno se noch diya aur khun bhi nikal diya. Aise hi karte hue me 3 bar pani nikal chuki thi aur pati ji 2 bar. Phir hum dono aise hi thodi der ke liye so gaye. Mujhe bahut joro se bhuk lagi thi is liye meri nind tut gayi. Mene ghadi me dekha ki abhi 12 baje the. Mene dekha ki pati ji mere stan pe sir rakh ke so rahe the, mene unhe apni baho me bharte hue unke mathe ko, aankho ko, galo ko aur hontho ko chum liya. Turant hi nind se jag gaye aur mujhe apni baho me bharte huyr mujhe chum ne lage, mera chehra aur gardan pure unki hontho ke pani se bhig gaye. Phir pati ji ne kaha “ Jayaa aaj se jab bhi tum apne sasural me hogi tab hum dono bilkul nange hi hoge, hamare jism pe koi kapda nahi hoga, hum dono jab chahe tab ek dusre ke jism ko pakad ke apna pyar jata sake, I love you Jayaa”. Mene kaha “ Pati ji vaise bhi mujhe bina kapade rehna bahut achha lagta hai, I love you Pati ji”. Phit pati ji khade hue aur mujhe apni baho me utha ke kitchen me le gaye. Kitchen me unhone mujhe chule ke pass khada kiya aur khud bhi baju me khade ho gaye. Pati ji ne kaha “ Jayaa abhi me nasta banata hu, tum dekhna ke kaise banata hu, kyunki ek patni ka kartvaya hai ke vo unke liye khana banaye, unhe apne hatho se khilaye aur unka dher sara pyar paye”. Mene sir jukate hue kaha “ Ha pati ji me bhi yahi chahti hu ke aapko aur kam na karna pade me hi sara kam kar lungi, jaise mummy karti hai”. Pati je ne kaha “ Vah meri Jayaa rani tum ne to mujhe bahut khus kar diya, tumhari bate hamesha mithi hi hoti hai tumhare hontho ki tarah”. Itna kahte unhone mujhe chum liya aur mujhe chule ke pass khada kiya aur vo mere piche aa gaye, mere piche aate hi unka mota sa lund meri gan pe lagne laga, mujhe thori si utejana ho gayi aur mene bhi apni gan ko thoda sa piche le jake unko lund dabaya. Pati ji mere is bartav ko dekh ke mujhe aur jor se pakad liya aur meri garden ko chum ne lage. Phir hum dono ne nasta banaya aur sath me kha bhi liya. Pati ji ne kaha “ Jayaa rani hum dopehr ko sirf nasta hi karenge, jab me tumhe chod raha hunga to tumhara pet khali ho ne ki bajah se tumhe achha lagega”. Mene kaha “ jaisa aap kahe, lekin pati ji me kafi thak jati hu, mummy kaheti hai ki thakan ho to dudh pina chahiye”. Pati ji ne kaha “ are vah Jayaa aise hi tum apne jism ka khayal rakhana, rahi bat dudh ki freez me bahut sara dudh hai tum use pe lena, thik hai”. Phir nasta aur dudh ke bad hum dono hall me sofe pe jake baith gaye. Pati ji mere baju me apne left hath ko meri gardan me dalte hue mujhe chumne lage. Me bhi unhe chumne lagi. Mujhe bahut hi ajib sa lag raha tha ke ab tak me jis insane ko janti nahi thi use ke sath nangi baithi huyi hu. Pati ji ne mujhe 15 minat tak kiss karte rahe. Phir unhone mujhe kaha “ Jayaa tumhare gale me mangalsutra bahut achha lag raha he, khas karke jab vo tumhare dono stan ke bich me aata hai, Jayaa me chahta hu ki tumhe aur bhi gehne pahanau”. Mene kaha “ Ha pati ji mujhe bhi gehne pahaneka kafi sokh he”. Pati ji ne kaha “ achha to me abhi hi Jewellary shop me jake tumhare jism ko pura gehne se saja du aise sare gehne leke aata hu, tum itni der me apna homework khatam kar do”.


Phir pati je ne jewellary ki shop me mere liye bahut sare gehne lene ke liye chale gaye.Me apne sasural me nangi hi ghum rahi thi. Me ghar ki har chij ko dekh rahi thi.Mene hall me aur aasan vale room me bahut sari nangi ladkiyo ki tasbir dekhi, usme se jyadatar painting ki huyi nangi tasvire thi. Kai to Raja maharaje ke sex ki tasvire thi. Me jab bedroom me aayi to dekha ki almari ki baju vali dival par ek aurat ki tasvie thi, vo kafi khubsurut thi, uhone apne bal khule rakhe the aur ek lal rang ka kurta paijama ma pahana tha, us tasvir ke niche likha tha “ Swargiya Kavita V Desai”.Me samajh gayi ki ye mere pati ji ki pehli patni hai, isliye mene dono hatho ko jod ke unhe pranam kiya aur hum dono ke aane vale kal ke liye aashirvad bhi manga.Phir me us kurte ko khojne ke liye almari ko khola. Mene dekha ki usme ek bhag mere liye bana tha aur us par mera nam “Shrimati Jayaa Rajkumar Desai” aur ek bhag mere pati dev ka tha., me apna nam dekh ke kafi sharma gayi. Mene mere bhag me dekha ki usme sare kapade jo bade ghar ki ladkiya pahanti hai vaise the. Jeans, top, kurta, paijama, lehnga, choli, choti choti chaddi aur bra. Me us lal rang ke kurte paijama ko khojne lagi, vo mujhe mil gaya. Mene pahle ek pink rang ki chaddi pahani, phir paijama pahana jo ki silk ka tha aur vo mere jism ko gudguda raha tha.Phir mene kurta pahana, js ka aage ki aur ka hissa khula huva tha, jo mere stan ke aadhe hisse ko bahar rakh raha tha. Mene bhi Kavita ji ke photo ki taram khud ko saja diya aur aage hall me jake pati ji ka intejar karne lagi.
Karib 1 ghante ke bad pati ji ne door kholke andar aaye, me bhag ke unke pass chali gayi aur unhe apne jism me lappet liya.Hum dono ne ek lambi kiss ki. Phir pati ji ne mujhe unse thoda dur karte hue mujhe sir se pav tak dekha aur karib do minat tak dekhte hi rahe….,. Phir mene pati ji ke pairo ko chuva aur unhone mere sir pe hath rakh ke kaha “ Sada suhagan raho”. Phir mujhe apni baho me utha ke bedroom me le gaye.
Bedroom me mujhe Kavita ji ki tasvir ke pass le gaye aur tasvir ko dekh ke kehne lage “ Kavita ye Jayaa hai meri patni aur tumari sotan…., kavita ye vahi ladki hai jiska jikar me tumhe kuch dino se kar raha tha, aur mene tumhe vachan bhi diya tha ki ek din ise tumhari sotan bana ke hi rahunga, tumhare gujre jane ke pahle hum dono apne jism ki bhuk ko mita the vaise hi aaj se me “ Raj Desai” apni choti umar vali, kamsin javani se bhari, apne jism ko sirf mere liye sajane vali, jo har waqt mere khayalo me khone vali “ Shrimati Jayaa Raj Desai “ ek dusre ki jism ki bhuk ko mitayenge aur sayad ye bhuk kabhi khatam hi na ho”.
Me ye sab sunke ek dam pagal si ho gayi aur ye sochne lagi ki Kavita ji aur pati dev ji kya kya karte the jism ki pyass ko mitane ke liye aur sarm ke mare apna muh unke gale me chupa diya. Pati ji ne ye dekha aur bole “ Kavita ye meri patni jo hai vo bahut hi sharmati hai bilkul tumhari tarah aur meri har bat ko apna kartvay samajh kar khub acchi tarah use nibhati hai. Sach me kavita tumhare jane ke bad mujhe koi achha sathi nahi mila tha, lekin ab mujhe meri zindagi mil gayi hai. Me apni patni ki jism ki pyass ko kabhi bujne nahi dunga aur din rat iske jism ko pyar karunga. Jayaa tumne meri pehli patni ki jagah lene ki bahut hi badiya shuruat ki hai”. Mene kaha “ Pati ji mene Kavita ji se apne aane vale kal ki liye bahut sari khusiya mangi hai”. Pati ji meri is bat se khus hue aur mere hontho ko chum diya.
Pati ji ne mujhe bed pe bitha diya aur khud mere piche aake baith gaye aur mujhe piche se kamar me hath dal ke jor se pakad liya, mera pura jism kap gaya. Phir unhone mere balo ko sir ke upar se jor se pakad ke apne chehre ki aur guma diya aur mere hontho ko kiss karne lage. Pahle dhire dhire mere hontho ko chuma aur phir kuch pal ke bad apne left hath se balo ko jor se pakad ke mere uple hontho apne dono hontho me dabate hue bahut jor se kat diya., us doran me kafi tadap rahi thi aur mere dono hatho ko pati ji ke pith aur balo me gumane lagi aur apni hatho ki mutthi se nochene lagi. Karib pach ya che minat tak unhone mere dono hontho ko aise hi kat diya aur mene ne unhe noch diya. Me buri tarah se haf rahi thi kyunki meri sanse bhari ho rahi thi. Pati ji ne mujhe apni chati se laga kar mujhe sant kiya. Phir unhone mere chehre ko apne hatho me rakh ke meri aur dekhne lage, us waqt mere bal mere chehre ke pass aa gaye the aur mere dono hoth lal ho chuke the, mene najre niche kar lit hi. Mere is samparan ko dekhte hue unhone mere dono hontho ko ek sath apne muh me le liya aur halke se unke upar jibh gumane lage, mano vo mere hontho ki malis kar rahe ho….,. Pati ji ne mere liye itna sab karne ke bad meri najar me sach much ke bhagvan ban gaye aur mene apne dono hatho ke unke pairo ke pass le jake unke charan saprsh kiye. Mere aise karne se unhone mujhe sir pe chuma aur mujhe apni bahome bharte hue unke jism se sata diya.
Pati ji ne kaha “ Jayaa me aaj tumhare liye sone ki aur chije laya hu, jaise pahle mene sone ki chain di thi vaise hi aur bhi samay aate me tumhe pahanaunga”. Pati ji ne pahle sone ke kangan mere hatho me pahanaye, phir pairo me sone ki payal, kano me sone ke jumke, kamar pe sone ka patta, hatho me son eke bajuband, sir pe sone ka mang tikka. Ant me unhone ek bakse mese ek sone ki karib 15 tole ki chain nikali, jiske sath ek loket tha, us loket ke ek baju me “ Raj & Jayaa “ likha tha aur dusri baju me “ Jism ki pyass “ likha tha, yani ye saf jahir tha ke hamara rista ek dusre ki jism ki pyass ko bujane ke jiye hi bana hai. Mene us loket ki dono baju ko chuma aur pati ji ne mere gale me use pahana diya. Uska vajan kafi jyada tha is liye meri garden thori si juk gayi to pati ji ne kaha “ Jayaa pahle ke jamane aurat apna sir utha ke n chal sake isliye use bhari sone ki chain pahana te the aur ye har aurat ka pati dharm bhi hota hai ki vo apne pati dev ki har bat ko sir jukaye mane aur us me pura sahog de”.
Pati ji ne mujhe bed se khara kiya aur mere sare kapde joki mene sirf unke liye pahane the use nikal diya aur mujhe pua nanga kar diya. Unhone mujhe baho me bharte hue bed pe pith ke bal lita diya aur khud mere dono pairo ke bich me aake meri chut ke pass apna mota sa lund sata diya. Meri chut ne kab pani chod diya tha mujhe pata hi nahi chala, kyunki me sex me hoti kriya se anjan thi, kyunki me abhi bhi choti bachhi jaisa hi vyavhar karti thi. Pati ji ne jan liya tha ki meri chut gili ho chuki hai isliye unhone mujhe jat se nanga kar diya. Pati ji ne apna mota sa lund meri chut me dal ne lage aur mere upar juke ke mere hontho ko chumne lage. Meri chut me unka lund, mota hone ki bajah se aasani se gus nahi raha tha, unhone thoda thoda karte hue lund puri tarah se chut me dal diya, us waqt unke har ek dhakke se meri chut me ek naya ahesas ho raha tha, mano ke vo koi dukh dene vala dard nahi balke ek mitha dard karne vala lund ke jariye pati ji ki jism ki pyass bujane vala tha. Me apne jism ki pyass ko bujane ke liye pati ji ko pura sahakar de rahi thi.
kramashah........