दीदी का दीवाना compleet

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raj..
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Re: दीदी का दीवाना

Unread post by raj.. » 02 Nov 2014 18:02

वो एक दम से चिल्ला उठी और गांड खींचने लगी. मैंने दीदी की कमर को जोर से पकड़ लिया और थोड़ा और जोर लगा कर एक और धक्का मार दिया. लण्ड आधा के करीब घुस गया क्योंकि गांड तो एक दम चिकनी हो रखी थी. पर दीदी को शायद दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ चिल्लाते हुए बोली "हरामी....कुत्ते...कहती थी....मत कर....माधरचोद....पीछे पड़ा हुआ था.....साले....हरामी....छोड़..... हाय...मेरी गांड फट गई...उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़....सीईईईई....अब और मत डालना....हरामी....तेरी माँ को चोदु.....मत डाल..... हाय निकल ले...निकल ले भाई....गांड मत मार....हाय चुत मार ले....हाय दीदी की गांड फार कर क्या मिलेगा....सीईईईईइ...आईईईईईइ........मररररर....गईइइइ ....." दीदी के ऐसे चिल्लाने पर मेरी गांड भी फट गई और मैं डर रुक गया और दीदी की पीठ और गर्दन को चूमने लगा और हाथ आगे बढा कर उनकी दोनों लटकती हुई चुचियों को दबाने लगा. मेरी जानकारी मुझे बता रही थी की अगर अभी निकल लिया तो फिर शायद कभी नहीं डालने देगी इसलिए चुप-चाप आधा लण्ड डाले हुए कमर को हलके हलके हिलाने लगा. कुछ देर तक ऐसे करने और चूची दबाने से शायद दीदी को आराम मिल गया और आह उह करते हुए अपनी कमर हिलाने लगी. मेरे लिए ये अच्छा अवसर था और मेल भी धीरे धीरे कर के एक एक इंच लण्ड अन्दर घुसाता जा रहा था. हम दोनों पसीने पसीने हो चुके थे. थोड़ी देर में ही मेरी मेहनत रंग लाइ और मेरा लण्ड लगभग पूरा दीदी की गांड में घुस गया. दीदी को अभी भी दर्द हो रहा था और वो बड़बड़ा रही थी. मैं दीदी को सांत्वना देते हुए बोला "बस दीदी हो गया अब....पूरा घुस चूका है...थोड़ी देर में लौड़ा....सेट हो कर आपको मजा देने लगेगा....हाय...परेशान नहीं हो....मैं खुद से शर्मिंदा हूँ की मेरे कारण आपको इंतनी परेशानी झेलनी पड़ी....अभी सब ठीक हो जाएगा....” दीदी मेरी बात सुन कर अपनी गर्दन पीछे कर मुस्कुराने की कोशिश करती बोली "नहीं भाई...इसमें शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं है...हम आपस में मजा ले रहे है....इसलिए इसमें मेरा भी हाथ है......भाई तू ऐसा मत सोच....मेरे भी दिल में था की मैं गांड मरवाने का स्वाद लू....अब जब हम कर ही रहे है तो....घबराने की कोई जरुरत नहीं है....तुम पूरा कर लो पर याद रखना....अपना पानी मेरी चुत में ही छोड़ना...लो मारो मेरी गांड...मैं भी कोशिश करती हूँ की गांड को कुछ ढीला कर दू....” ऐसा बोल कर दीदी भी धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाने लगी. मैं भी धीरे धीरे कमर हिला रहा था. कुछ देर बाद ही सक सक करते हुए मेरा लण्ड उनकी गांड में आने-जाने लगा. अब जाकर शायद कुछ ढीला हो रहा था. दीदी के कमर हिलाने में भी थोड़ी तेजी आ गई, इसलिए मैंने अपनी गांड का जोर लगाना शुरू कर दिया और तेजी से धक्के मारने लगा. एक हाथ को उनकी कमर के निचे ले जाकर उनकी बूर के टीट को मसलने लगा और चुत को रगड़ने लगा. उनकी चुत पानी छोड़ने लगी. दीदी को अब मजा आ रहा था. मैं अब कचाकाच धक्का लगाने लगा और एक हाथ उनके चुचियों को थाम कर लण्ड को गांड के अन्दर-बाहर करने लगा. चुत से चार गुना ज्यादा टाइट दीदी की गांड लग रही थी. दीदी अपनी गांड को हिलाते हुए बोली " हाय भाई मजा आ रहा है.....सीईईईई....बहुत अच्छा लग रहा है......शुरुर में तो दर्द कर रहा था.....मगर अब अच्छा लग रहा है.....सीईईईई.....हाय राजा....मारो धक्का...जोर जोर से चोदो अपनी दीदी की गांड को......हाय सैयां बताओ अपनी दीदी की गांड मारने में कैसा लग रहा है.....मजा आ रहा है की नहीं.....मेरी टाइट गांड मारने में.... बहन की गांड मारने का बहुत शौक था ना तुझे.... तो मन लगा कर मार....हाय मेरी चुत भी पानी छोड़ने लगी है....हाय जोर से धक्का मार....अपनी बहन को बीबी बना लिया है....तो मन लगा कर बीबी की सेवा कर....हाय राजा सीईईईईईइ.....बहनचोद बहुत मजा आ रहा है.....सीईईईईइ....उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़....." मैं भी अब पूरा जोर लगा कर धक्का मारते हुए चिल्लाया " हाय दीदी सीईईई....बहुत टाइट है तुम्हारी गांड....मजा आ गया....हाय एक दम संकरी छेद है....ऊपर निचे जहाँ के छेद में लौड़ा डालो वही के छेद में मजा भरा हुआ है....हाय दीदी साली....मजा आ गया....सच में तुम बहुत मजेदार हो….. बहुत मजा आ रहा है....सीईईईई....मैं तो पागल हाय....मैं तो पूरा बहनचोद बन गया हूँ.....मगर तुम भी तो भाईचोदी बहन हो मेरी डार्लिंग सिस्टर.....हाय दीदी आज तो मैं तुम्हारी बूर और गांड दोनों फार कर रख दूंगा....." तभी मुझे लगा की इतनी टाइट गांड मारने के कारण मेरा किसी भी समय निकल सकता है. इसलिए मैंने दीदी से कहा की "दीदी...मेरा अब निकल सकता है...तुम्हारी गांड बहुत टाइट है....इतनी टाइट गांड मारने से मेरा तो छिल गया है मगर.....बहतु मजा आया....अब मैं निकाल सकता हूँ....हाय बोलो दीदी क्या मैं तुम्हारी गांड से निकल कर चुत में डालू या फिर.....तुम्हारी गांड में निकल दू....बोलो न मेरी लण्डखोर बहन....साली मैं तुम्हारे चुत में झारू या फिर....गांड में झारू.....हाय मेरी रंडी दीदी....." दीदी अपनी गांड नाचते हुए बोली " माधरचोद....मुझे रंडी बोलता है....साले अगर नहीं दिया होता तो मुठ मारता रह जाता....हाय अगर निकलने वाला है तो भोसरी के पूछ क्या रहा है.....जल्दी से गांड से निकल चुत में डाल...." मैंने सटक से लौड़ा खिंचा और दीदी भी उठ कर खड़ी हो गई और बिस्तर पर जा कर अपनी दोनों टांग हवा में उठा कर अपने जन्घो को फैला दिया. लगभग कूदता हुआ उनके जांघो बीच घुस गया और अपना तमतमाया हुआ लौड़ा गच से उनकी चुत में डाल कर जोर दार धक्के मारने लगा. दीदी भी निचे से गांड उछल कर धक्का लेने लगे और चिल्लाने लगी " हाय राजा मारो....जोर से मारो...अपनी बहन बीबी की...हाय मेरे सैयां...बहुत मजा आ रहा है...इतना मजा कभी नहीं मिला....मेरे भाई मेरे पति....अब तुम्ही मेरे पति हो...हाय राजा मैं तुमसे शादी करुँगी....हाय अब तुम्ही मेरे सैयां हो....मेरे बालम....माधरचोद....ले अपनी दीदी की की चुत का मजा....पूरा अन्दर तक लौड़ा डाल कर...चुत में पानी छोरो....माधरचोद..." मैं भी चिल्लाते हुए बोला " हा रंडी मैं तेरे से शादी करूँगा...मेरे लण्ड का पानी अपनी चुत में ले....हाय मेरा निकलने वाला है....हाय सीईईईईइ.........ले ले...." और दीदी को कस कर अपनी बाँहों में चिपका झरने लगा. उसी समय वो भी झरने लगी.

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